खंडवा। जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेड़े की कुर्सी पर फैसला 14 नवंबर को होगा। उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए सुबह 11 बजे जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में सम्मेलन बुलाया गया है। इंदौर संभाग आयुक्त भास्कर लाक्षाकार ने सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए कलेक्टर ऋषव गुप्ता को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया है।
कलेक्टर ने बताया कि निर्धारित तारीख पर अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चर्चा और मतदान कराया जाएगा। सम्मेलन की तारीख तय होने के बाद जिला पंचायत की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
दूसरी बार शुरू हुई अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश पहले भी की गई थी। उस समय कांग्रेस समर्थित सदस्यों ने आवेदन दिया था, लेकिन प्रशासन ने पंचायत अधिनियम का हवाला देते हुए इसे स्वीकार नहीं किया था।
प्रशासन का कहना था कि जिला पंचायत का कार्यकाल ढाई साल पूरा होने से पहले अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सदस्यों ने दोबारा प्रक्रिया शुरू की। इस बार आवेदन स्वीकार होने के बाद मतदान के लिए सम्मेलन की तारीख भी तय कर दी गई है।
कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य मनोज भरतकार के मुताबिक, मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना बन सकती है। ऐसे में अध्यक्ष के लिए सदस्यों का समर्थन बनाए रखना चुनौती होगी।
टॉस से अध्यक्ष बनी थीं पिंकी वानखेड़े
पिंकी वानखेड़े के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने की कहानी भी राजनीतिक उठापटक से जुड़ी रही है। पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष पद कंचन तनवे को मिला था। वे निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य चुनी गई थीं। उस समय भाजपा के पास अनुसूचित जाति वर्ग से अध्यक्ष पद का दावेदार सदस्य नहीं था।
जिले से इस वर्ग के केवल दो सदस्य निर्वाचित हुए थे। इनमें नानकराम बरवाहे कांग्रेस के समर्थन से जीते थे। भाजपा ने कंचन तनवे को समर्थन दिया और वे जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत का अंतर महज एक वोट का था।
बाद में कंचन तनवे को भाजपा से विधानसभा चुनाव का टिकट मिला। विधायक बनने के बाद उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद रिक्त हुए वार्ड में उपचुनाव कराया गया, जिसमें पिंकी वानखेड़े जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं। अध्यक्ष पद के चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस समर्थित नानकराम बरवाहे से हुआ। दोनों उम्मीदवारों को बराबर वोट मिले। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने पर्ची के जरिए फैसला कराया, जिसमें पिंकी वानखेड़े विजयी रहीं और अध्यक्ष बनीं।
सदस्य के निधन से बदला संख्या बल का समीकरण
जिला पंचायत के राजनीतिक समीकरण में वार्ड क्रमांक 6 से भाजपा समर्थित सदस्य श्रीराम चौधरी के निधन के बाद बदलाव आया है। इससे अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में जुटे सदस्यों को अपनी स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
हालांकि, प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में कितने सदस्य मतदान करेंगे, यह 14 नवंबर को सम्मेलन के दौरान ही स्पष्ट होगा। अब सभी की नजर इस बैठक पर है, जहां मतदान से तय होगा कि पिंकी वानखेड़े अध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी या उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा।


