रायपुर। छत्तीसगढ़ में पंजीकृत करीब 80 लाख श्रमिकों में से 73 लाख से ज्यादा की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। श्रमिकों के डिजिटल सत्यापन के मामले में प्रदेश कई बड़े राज्यों से आगे है। अकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में 91.37% उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ बड़े राज्यों में पहले स्थान पर है। वहीं कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों के सत्यापन में 82.28% उपलब्धि के साथ प्रदेश सभी राज्यों से आगे है।
केंद्र सरकार की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों श्रेणियों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। हालांकि, कुल पंजीकृत श्रमिकों में अब भी करीब 7 लाख का सत्यापन बाकी है।
अकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में 91.37% उपलब्धि
केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 79 लाख 23 हजार 503 अकुशल श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें से 76 लाख 20 हजार 979 श्रमिकों की आधार सीडिंग हो चुकी है, जबकि 72 लाख 39 हजार 364 की ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी है।
इस तरह अकुशल श्रमिकों के सत्यापन में प्रदेश की उपलब्धि 91.37% है। इस श्रेणी में राष्ट्रीय औसत 61.01% है। यानी छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय औसत से 30.36 प्रतिशत अंक आगे है।
देश के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की संयुक्त सूची में लद्दाख 97.59%, मिजोरम 97.42% और त्रिपुरा 92.79% के साथ छत्तीसगढ़ से आगे हैं। हालांकि, बड़े राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर है।
अन्य बड़े राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
- पश्चिम बंगाल: 89.10%
- तमिलनाडु: 83.17%
- आंध्र प्रदेश: 81.27%
- मध्य प्रदेश: 63.78%
कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों के सत्यापन में भी आगे
कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी में भी छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश में 73,596 श्रमिकों की आधार सीडिंग और 64,087 की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। इस श्रेणी में कुल उपलब्धि 82.28% है, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 13.53% है। यानी छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय औसत से 68.75 प्रतिशत अंक आगे है।
संयुक्त रैंकिंग में दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव 98.33% के साथ पहले स्थान पर है। छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर है, लेकिन केवल राज्यों की तुलना में प्रदेश पहले नंबर पर है।
अन्य राज्यों में ई-केवाईसी की स्थिति:
- महाराष्ट्र: 56.70%
- कर्नाटक: 36.95%
- गुजरात: 27.04%
- मध्य प्रदेश: 16.47%
फेस ऑथेंटिकेशन से हो रही श्रमिकों की मौजूदगी की जांच
ई-केवाईसी के दौरान श्रमिक के आधार और पंजीयन में दर्ज जानकारी का मिलान किया जाता है। कार्यस्थल पर उसकी मौजूदगी दर्ज करने के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन किया जाता है।
इस प्रक्रिया में रोजगार सहायक मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों की मोबाइल से चेहरे की पहचान कर दिन में दो बार उपस्थिति दर्ज करता है। यानी पहले श्रमिक की पहचान का सत्यापन होता है और फिर काम की जगह पर उसकी मौजूदगी की जांच की जाती है।
इस व्यवस्था से फर्जी नामों पर हाजिरी दर्ज होने की आशंका कम करने में मदद मिलती है। बस्तर और सरगुजा जैसे कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी शिविर लगाकर श्रमिकों की ई-केवाईसी कराई गई है।


