भोपाल। बढ़ता वायु प्रदूषण अब केवल सांस संबंधी बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर दिल, दिमाग और शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ रहा है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वायु प्रदूषण से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के अलग-अलग स्तर के आधार पर स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर और बचाव के उपाय बताए गए हैं।
एडवाइजरी के मुताबिक, हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड, ग्राउंड लेवल ओजोन, वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) जैसे प्रदूषक मौजूद रहते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 18% का योगदान
एडवाइजरी में आईसीएमआर की 2019 की स्टडी का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में कुल मौतों में 18% का संबंध वायु प्रदूषण से है। इनमें क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से 32.5%, इस्केमिक हार्ट डिजीज से 29.2%, स्ट्रोक से 16.2% और लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से 11.2% मौतों का योगदान बताया गया है।
AQI बढ़ने के साथ बढ़ता है स्वास्थ्य पर खतरा
एडवाइजरी में एयर क्वालिटी इंडेक्स को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इसके अनुसार हवा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का स्तर इस प्रकार है:
| AQI स्तर | हवा की गुणवत्ता | स्वास्थ्य संबंधी सलाह |
|---|---|---|
| 0-50 | अच्छा | सामान्य तौर पर विशेष सावधानी की जरूरत नहीं |
| 51-100 | संतोषजनक | संवेदनशील लोग लंबे समय तक बाहर मेहनत वाली गतिविधियों से बचें |
| 101-200 | मध्यम प्रदूषित | बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील लोगों को बाहर लंबे समय तक व्यायाम या शारीरिक मेहनत से बचना चाहिए |
| 201-300 | खराब | स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बाहर की शारीरिक गतिविधियां सीमित रखें |
| 301-400 | बहुत खराब | लंबे समय तक संपर्क से स्वस्थ लोगों को भी सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। सुबह और देर शाम बाहर निकलने से बचें |
| 401-500 | गंभीर | बाहर की गतिविधियां बंद कर घर में रहें और शारीरिक गतिविधियां कम रखें |
एडवाइजरी के अनुसार, AQI 401 से 500 के बीच होने पर स्थिति गंभीर मानी जाती है। इस स्तर पर स्वस्थ लोगों को भी लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस संबंधी परेशानी हो सकती है। वहीं संवेदनशील लोगों को कम समय के संपर्क में भी गंभीर दिक्कत होने का खतरा रहता है।
अस्थमा और हृदय रोगियों को विशेष सावधानी की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा है।
एडवाइजरी में ध्वनि प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, ध्वनि प्रदूषण से तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, सुनने की क्षमता में कमी और नींद प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
सुबह की हवा में प्रदूषण ज्यादा, हल्की धूप निकलने के बाद करें मॉर्निंग वॉक
पर्यावरण विशेषज्ञ सुभाष सी. पांडे के अनुसार, सर्दियों में देर रात और सुबह हवा का दबाव कम होने से प्रदूषक जमीन के नजदीक जमा हो जाते हैं। इससे सुबह की हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक हो सकता है।
उन्होंने बताया कि यह स्थिति फेफड़ों के रोगियों, हृदय रोगियों, 5 साल से छोटे बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है।
विशेषज्ञ ने सलाह दी है कि सर्दियों में मॉर्निंग वॉक हल्की धूप निकलने के बाद ही करनी चाहिए। इस समय हवा में मौजूद प्रदूषक ऊपर उठने लगते हैं।


