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Asia Cup 2025 India की जीत, UAE की टीम 57 रन पर आउट, Fastest Chase रिकॉर्ड

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दुबई, Asia Cup 2025: एशिया कप 2025 के उद्घाटन मैच में भारत ने यूएई (UAE) को केवल 57 रन पर आउट कर दिया। यह भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में UAE का lowest total रिकॉर्ड है। भारत की टीम ने इसके बाद महज 4.3 ओवर में 1 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल किया और पुरुष टी20 में सबसे fastest chase का रिकॉर्ड भी बनाया।

UAE की पारी में मुख्य मोमेंट्स:

  • कप्तान मुहम्मद वसीम (19) और अलीशान शराफू (22) ने पावरप्ले में 41 रन जोड़े।
  • इसके बाद भारत के स्पिनरों ने दबाव बनाया और UAE की पूरी टीम 57/10 पर समेट दी।

भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन:

  • कुलदीप यादव – 4 ओवर, 7 रन, 4 विकेट
  • शिवम दुबे – 3 ओवर, 4 रन, 3 विकेट
  • वरुण चक्रवर्ती – 1 ओवर, 4 रन, 1 विकेट

भारत की बल्लेबाजी:

भारत ने यूएई के स्कोर का पीछा करते हुए महज 4.3 ओवर में जीत हासिल की। सूर्यकुमार यादव और अन्य बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया।

मैच के रिकॉर्ड्स और खास बातें:

  • UAE का स्कोर भारत के खिलाफ lowest T20 total
  • भारत ने पुरुष T20 में fastest chase record बनाया।
  • भारत की टीम ने एशिया कप 2025 की शुरुआत शानदार तरीके से की।

इस जीत ने भारत के लिए आत्मविश्वास बढ़ाया और टी20 क्रिकेट में नए records और milestones सेट किए।

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Yukta

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Bihar

Bihar Bridge Construction Accident: लालगंज में अचानक गिरा Launcher, 2 मजदूरों की हालत नाजुक

बिहार (Bihar) के वैशाली जिले के लालगंज में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल पर अचानक बड़ा हादसा हो गया। पुल बनाने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा भारी Launcher अचानक नीचे गिर गया। हादसे के समय वहां मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें कई इसकी चपेट में आ गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 8 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें से 2 मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों और निर्माण स्थल पर काम कर रहे कर्मचारियों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की। भारतमाला Project के तहत चल रहा था काम लालगंज में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां भारत माला परियोजना के तहत NH-139W फोरलेन का निर्माण चल रहा है। इसी परियोजना के तहत पुल का काम भी किया जा रहा है। निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाला लॉन्चर अचानक गिरने से यह दुर्घटना हुई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। राहत और बचाव का काम शुरू किया गया और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। दो मजदूरों की हालत गंभीर हादसे में घायल मजदूरों में दो की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। बाकी घायलों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद प्रशासन ने मौके का जायजा लिया और हादसे की वजह पता करने के लिए जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि लॉन्चर गिरने के पीछे तकनीकी खराबी थी, मशीनरी में कोई समस्या आई या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा में चूक हुई। Construction Site की Safety पर फिर उठे सवाल निर्माणाधीन पुल पर भारी मशीनरी के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। ऐसे हादसे में सिर्फ मशीन या निर्माण कार्य को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि वहां काम कर रहे मजदूरों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। लालगंज की घटना के बाद निर्माण स्थल पर Safety Measures और मशीनरी की तकनीकी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। फिलहाल घायल मजदूरों का इलाज जारी है। सभी की नजर अब गंभीर रूप से घायल दो मजदूरों की हालत पर बनी हुई है।
Nepal

India-Nepal Relief: बाढ़ से तबाह Nepal के लिए भारत ने भेजी 8वीं बड़ी मदद

Nepal में अगस्त के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में घर, सड़कें और पुल बह गए, जबकि हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इस मुश्किल वक्त में भारत लगातार नेपाल के साथ खड़ा है। भारत ने अब 35 टन राहत सामग्री लेकर 8वीं खेप नेपाल भेजी है, जो काठमांडू पहुंच गई है। इस मदद के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान और Rescue Equipment पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। Nepal Flood में 1367 से ज्यादा लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को शुरू हुई इस भीषण आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। Reuters के मुताबिक कम से कम 1,367 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रही हैं। इस आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने से आई भारी बाढ़ बताई जा रही है। तेज बहाव के साथ पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आईं और रास्ते में आने वाले कई गांवों तथा Infrastructure को भारी नुकसान पहुंचा। India ने भेजी 8वीं राहत खेप भारत ने मानवीय सहायता के तहत भारतीय वायुसेना के विमान से 35 टन राहत और बचाव सामग्री नेपाल भेजी है। यह नेपाल के लिए भेजी गई भारत की आठवीं राहत खेप है। इससे पहले भी भारत कई चरणों में राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम नेपाल भेज चुका है। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल में Rescue और Forensic Operations में भी सहयोग कर रहे हैं। इससे प्रभावित लोगों की तलाश और आपदा में जान गंवाने वालों की पहचान के प्रयासों को मजबूती मिल रही है। सड़कें और पुल टूटे, Rescue Operation में बड़ी चुनौती बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में सड़क और पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। यही वजह है कि राहत टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई जगह Helicopter पहले से Search and Rescue Mission में लगे हैं। ऐसे में नेपाल की सेना अब Drones की मदद से राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचा रही है। इन ड्रोन के जरिए भोजन, दवाइयां, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें उन जगहों तक भेजी जा रही हैं, जहां सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। हजारों लोग अभी भी Missing बाढ़ के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं। कई मामलों में शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने पहले ही Forensic Experts और अन्य विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। जरूरत पड़ने पर DNA आधारित पहचान की प्रक्रिया भी मददगार साबित हो रही है। भारत में भी कुछ परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान के लिए DNA Samples जमा कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान नेपाल में इस आपदा से सिर्फ लोगों की जान नहीं गई, बल्कि बड़े पैमाने पर Infrastructure को नुकसान पहुंचा है। सड़कें, पुल, घर और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। नेपाल अब राहत के साथ-साथ आने वाले समय में Reconstruction की तैयारी भी कर रहा है। सरकार ने शुरुआती Recovery और Reconstruction के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत बताई है। इसका मकसद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने के साथ जरूरी Infrastructure को दोबारा खड़ा करना है। भारत की मदद से बढ़ी उम्मीद नेपाल इस समय अपने हाल के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं और कई इलाकों में सामान्य जिंदगी वापस लाने की कोशिश जारी है। ऐसे समय में भारत की लगातार राहत सहायता पड़ोसी देश के लिए महत्वपूर्ण है। 35 टन की 8वीं राहत खेप के काठमांडू पहुंचने से Search, Rescue और राहत अभियान को जरूरी सामान मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना और नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हालात बहाल करना है।
BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: Xi Jinping आएंगे India, PM Modi के साथ Bilateral Talks पर सबकी नजर

नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले भारत और चीन के रिश्तों को लेकर हलचल बढ़ गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला India Visit होगा। सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Xi Jinping की Bilateral Meeting पर है। 2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे Xi Jinping शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई थी। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बड़ा झटका दिया। सीमा पर तनाव के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे। राजनीतिक बातचीत, कारोबार और निवेश पर भी इसका असर दिखाई दिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की है। Modi-Xi Meeting पर क्यों टिकी हैं निगाहें? BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच LAC, Border Peace, Trade और Economic Relations जैसे कई अहम मुद्दे हैं। अगर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होती है, तो सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालिया रिपोर्टों में भी इस बैठक में LAC की स्थिति और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की संभावना जताई गई है। Galwan Clash के बाद बदले भारत-चीन के रिश्ते 2020 की गलवान झड़प भारत-चीन संबंधों के लिए एक बड़ा turning point साबित हुई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। समय के साथ सीमा पर स्थिति को संभालने के लिए दोनों पक्षों ने बातचीत का रास्ता बनाए रखा। अब BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी और जिनपिंग की आमने-सामने बातचीत को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। Trade और Business Relations भी बड़ा मुद्दा भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही चुनौती नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन इसके साथ कई तरह की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। चीनी कंपनियों के निवेश, वीजा, तकनीक और संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार को लेकर भारत सतर्क रहा है। वहीं कुछ भारतीय कारोबारी भी चीन के साथ व्यापार करते समय अलग-अलग व्यावसायिक और नियामकीय अड़चनों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत से Economic Relations को लेकर भी कोई सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है। BRICS Summit में बड़े नेताओं का जमावड़ा 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS Summit आयोजित हो रहा है। भारत इस बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा से निपटने और महत्वपूर्ण Supply Chains जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से यह Summit काफी महत्वपूर्ण हो गया है। क्या India-China Relations में आएगा नया मोड़? सबसे बड़ा सवाल यही है कि Modi-Xi Meeting से भारत और चीन के रिश्तों को कितनी नई दिशा मिलती है। दोनों देशों के बीच अभी भी कई मतभेद हैं, लेकिन हाल के महीनों में संवाद और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें दिखाई दी हैं। अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो इससे सीमा पर शांति, व्यापार और दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक बैठक से वर्षों से चले आ रहे मतभेद खत्म नहीं होंगे। फिलहाल दुनिया की नजर BRICS Summit पर है और खासतौर पर इस बात पर कि PM Modi और Xi Jinping की मुलाकात में क्या बातचीत होती है और भारत-चीन रिश्तों के लिए इससे क्या संदेश निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मूर्ति हटाने को लेकर दावों पर प्रशासन की सफाई

उज्जैन। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच उज्जैन का यह मंदिर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा से जुड़े वीडियो और रील्स वायरल होने के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए श्रद्धालु भी शामिल हैं। सती गेट के पास स्थित मंदिर के आसपास प्रशासन की कार्रवाई और प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर प्रतिमा को हटाने के किसी भी प्रयास से इनकार किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चमत्कार की कहानियां प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम होने की चर्चाओं के बाद सोशल मीडिया पर खड़े हनुमानजी से जुड़ी कई तरह की चमत्कारिक कहानियां वायरल हो रही हैं। इन वीडियो और रील्स के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से मंदिर के आसपास के क्षेत्र में निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई है। वहीं, हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट के भीतर विराजमान है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। IIT इंदौर की टीम फिर करेगी जांच प्रतिमा को हटाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच IIT इंदौर की टीम सोमवार को मंदिर पहुंची थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर मंदिर और प्रतिमा से संबंधित स्थिति की जांच की। अब IIT इंदौर की टीम गुरुवार को एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करेगी। इस जांच के बाद स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। सोशल मीडिया से श्रद्धालुओं को मिली जानकारी सती गेट के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने मंदिर में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं देखी। अब दर्शन के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े हो रहे हैं। नासिक से पहुंचे अनिल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमानजी की रील देखी थी। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आकर दर्शन करने का फैसला किया। नागपुर से आए महेश टिचकुले ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आने का निर्णय लिया। वहीं, राजस्थान के अजमेर से आए सुशील खंडेलवाल महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि घर पर सोशल मीडिया रील देखने के दौरान उन्हें खड़े हनुमान मंदिर के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां दर्शन करने पहुंचे। प्रशासन ने कहा- प्रतिमा हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा तथा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रेस नोट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन ने श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने के लिए मशीन अथवा मानवीय तरीके से कोई प्रयास नहीं किया गया है। भक्तों ने प्रशासन के दावे पर उठाए सवाल प्रशासन की सफाई के बाद कुछ श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास से संबंधित वीडियो उनके पास मौजूद हैं और अधिकारी चाहें तो उन्हें दिखाया जा सकता है। मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए हनुमानजी की प्रतिमा को यहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रशासन प्रतिमा हटाने के किसी प्रयास से इनकार कर रहा है तो उनके पास इसके संबंध में वीडियो मौजूद हैं। शैलू यादव के मुताबिक, नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। उन्होंने रात में कटर मशीन लाए जाने का भी दावा किया है। उनके अनुसार इन घटनाओं से जुड़े वीडियो उनके पास सुरक्षित हैं। फिलहाल प्रतिमा को हटाने को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर है। IIT इंदौर की आगामी जांच और प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल: 10वीं-12वीं परीक्षा के आवेदन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की नवंबर 2026 सत्र की हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक छात्र-छात्राएं 10 अक्टूबर 2026 तक सामान्य शुल्क के साथ प्रवेश एवं परीक्षा आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं। जो परीक्षार्थी निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं कर पाएंगे, उन्हें भी विलंब शुल्क के साथ आवेदन करने का अवसर दिया गया है। 500 रुपए विलंब शुल्क के साथ आवेदन का मौका सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की अंतिम तारीख निकलने के बाद परीक्षार्थी 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आवेदन जमा कर सकेंगे। इस अवधि में आवेदन करने के लिए 500 रुपए विलंब शुल्क देना होगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। अध्ययन केंद्र से मिलेगी पूरी जानकारी परीक्षा एवं प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी के लिए छात्र अपने नजदीकी मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। अध्ययन केंद्र पर विद्यार्थियों को आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, शुल्क और परीक्षा से संबंधित अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। वेबसाइट से डाउनलोड करें आवेदन फॉर्म परीक्षा एवं प्रवेश के लिए आवेदन फॉर्म छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। फॉर्म डाउनलोड करने के बाद उसे सावधानीपूर्वक भरना होगा। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर संबंधित मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्र में जमा करना होगा। छात्र आवेदन जमा करने से पहले फॉर्म में दर्ज सभी जानकारी और जरूरी दस्तावेजों की जांच जरूर कर लें, ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो।

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