Nepal में अगस्त के आखिर में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में घर, सड़कें और पुल बह गए, जबकि हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इस मुश्किल वक्त में भारत लगातार नेपाल के साथ खड़ा है। भारत ने अब 35 टन राहत सामग्री लेकर 8वीं खेप नेपाल भेजी है, जो काठमांडू पहुंच गई है। इस मदद के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान और Rescue Equipment पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। Nepal Flood में 1367 से ज्यादा लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को शुरू हुई इस भीषण आपदा के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। Reuters के मुताबिक कम से कम 1,367 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रही हैं। इस आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के टूटने से आई भारी बाढ़ बताई जा रही है। तेज बहाव के साथ पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आईं और रास्ते में आने वाले कई गांवों तथा Infrastructure को भारी नुकसान पहुंचा। India ने भेजी 8वीं राहत खेप भारत ने मानवीय सहायता के तहत भारतीय वायुसेना के विमान से 35 टन राहत और बचाव सामग्री नेपाल भेजी है। यह नेपाल के लिए भेजी गई भारत की आठवीं राहत खेप है। इससे पहले भी भारत कई चरणों में राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम नेपाल भेज चुका है। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल में Rescue और Forensic Operations में भी सहयोग कर रहे हैं। इससे प्रभावित लोगों की तलाश और आपदा में जान गंवाने वालों की पहचान के प्रयासों को मजबूती मिल रही है। सड़कें और पुल टूटे, Rescue Operation में बड़ी चुनौती बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में सड़क और पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। यही वजह है कि राहत टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं है। कई जगह Helicopter पहले से Search and Rescue Mission में लगे हैं। ऐसे में नेपाल की सेना अब Drones की मदद से राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचा रही है। इन ड्रोन के जरिए भोजन, दवाइयां, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें उन जगहों तक भेजी जा रही हैं, जहां सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। हजारों लोग अभी भी Missing बाढ़ के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं। कई मामलों में शवों की पहचान भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। भारत ने पहले ही Forensic Experts और अन्य विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है। जरूरत पड़ने पर DNA आधारित पहचान की प्रक्रिया भी मददगार साबित हो रही है। भारत में भी कुछ परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान के लिए DNA Samples जमा कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान नेपाल में इस आपदा से सिर्फ लोगों की जान नहीं गई, बल्कि बड़े पैमाने पर Infrastructure को नुकसान पहुंचा है। सड़कें, पुल, घर और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। नेपाल अब राहत के साथ-साथ आने वाले समय में Reconstruction की तैयारी भी कर रहा है। सरकार ने शुरुआती Recovery और Reconstruction के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत बताई है। इसका मकसद प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी व्यवस्था करने के साथ जरूरी Infrastructure को दोबारा खड़ा करना है। भारत की मदद से बढ़ी उम्मीद नेपाल इस समय अपने हाल के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। हजारों परिवार अपनों की तलाश में हैं और कई इलाकों में सामान्य जिंदगी वापस लाने की कोशिश जारी है। ऐसे समय में भारत की लगातार राहत सहायता पड़ोसी देश के लिए महत्वपूर्ण है। 35 टन की 8वीं राहत खेप के काठमांडू पहुंचने से Search, Rescue और राहत अभियान को जरूरी सामान मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना और नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हालात बहाल करना है।