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“अभी न जाओ छोड़कर…” पर क्लासिकल डांस का जादू, कपल का वीडियो देख भावुक हुए लोग

नई दिल्ली, 30 मार्च 2025:सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक कपल बॉलीवुड के सदाबहार गीत “अभी न जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहीं…” पर ग्रेसफुल क्लासिकल डांस करते नजर आ रहा है। यह वीडियो सिर्फ डांस नहीं, बल्कि भावनाओं की एक ऐसी प्रस्तुति है जिसने लाखों लोगों के दिलों को छू लिया है। इस वायरल वीडियो में पुरुष क्लासिकल धोती-कुर्ता पहने हुए हैं और महिला पारंपरिक साड़ी में है, दोनों की केमिस्ट्री, भाव-भंगिमा और शुद्ध कथक शैली ने इंटरनेट यूज़र्स को मंत्रमुग्ध कर दिया है। बैकग्राउंड में मोहम्मद रफ़ी और आशा भोंसले की मधुर आवाज़ में गाया गया यह गीत नॉस्टेल्जिया से भर देता है, और जब उस पर ऐसा भावपूर्ण नृत्य हो, तो जादू होना तय है। वीडियो को देखने के बाद कई यूज़र्स ने इसे “आर्ट और इमोशन का मेल” बताया। कुछ लोगों ने कमेंट किया कि “यह डांस नहीं, आत्मा की आवाज़ है।” वहीं एक यूज़र ने लिखा, “आज के समय में ऐसा क्लासिकल टच बहुत कम देखने को मिलता है, यह दिल को शांति देने वाला वीडियो है।” यह वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो चुका है। जहां एक ओर रील्स और ट्रेंडिंग डांस वीडियोस में पॉप और बीट्स का बोलबाला होता है, वहीं इस कपल ने साबित कर दिया कि सादगी, भाव और शुद्धता की अपनी अलग ही खूबसूरती होती है। अभी तक इस वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है और हजारों की संख्या में लोग इसे शेयर कर चुके हैं। कई बड़े डांस प्लेटफॉर्म्स और फेमस कोरियोग्राफर्स ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है और इस कपल की तारीफ की है। देश हरपल इस कलाकार जोड़ी को सलाम करता है, जिन्होंने एक पुराने गीत में नई जान डाल दी और क्लासिकल डांस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। इस वीडियो को @SatishTangri नाम के एक यूजर ने शेयर किया है, अभी न जाओ छोड़कर pic.twitter.com/MgKMY7NMx6— satish kumar tangri (@SatishTangri) April 2, 2025
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एक्टर-डायरेक्टर मनोज कुमार का 87 वर्ष की उम्र में निधन: ‘भारत कुमार’ के रूप में देशभक्ति का अमर प्रतीक बने

देश हरपल न्यूज़ | 30 मार्च 2025हिंदी सिनेमा की दुनिया से एक भावुक खबर सामने आई है। दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और लेखक मनोज कुमार का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और शनिवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मौत से न केवल फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। अपने अभिनय और निर्देशन के जरिए उन्होंने देशभक्ति को जिस अंदाज़ में फिल्मों में उतारा, वह आज भी दर्शकों के दिलों में ज़िंदा है। भारत कुमार की पहचान: मनोज कुमार को लोग प्यार से ‘भारत कुमार’ के नाम से जानते थे। यह नाम उन्हें उनकी फिल्मों की वजह से मिला, जो देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थीं। ‘शहीद’, ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्में न सिर्फ हिट रहीं, बल्कि हर भारतीय के दिल में देश के लिए गर्व भरने का काम किया। इन फिल्मों में उन्होंने नायक के साथ-साथ निर्देशक की भूमिका भी निभाई। ‘उपकार’ और लाल बहादुर शास्त्री का योगदान: मनोज कुमार की सबसे यादगार फिल्मों में से एक ‘उपकार’ (1967) है। कम लोग जानते हैं कि यह फिल्म उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनाई थी। शास्त्री जी ने उनसे ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे पर एक फिल्म बनाने को कहा। मनोज कुमार ने उस सुझाव को अपना मिशन बना लिया और ‘उपकार’ जैसी कालजयी फिल्म रची। इस फिल्म की सफलता के बाद ही उन्हें ‘भारत कुमार’ की उपाधि मिली। राष्ट्रीय सम्मान और योगदान: मनोज कुमार को पद्मश्री (1992) और दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड (2015) से नवाजा गया। उन्होंने ना सिर्फ सिनेमा को नई दिशा दी, बल्कि समाज में जागरूकता और राष्ट्रप्रेम को भी मजबूती दी। वे उन विरले कलाकारों में से थे, जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देने में विश्वास रखते थे। एक अभिनेता, एक विचारधारा: मनोज कुमार की फिल्में हमेशा किसी सामाजिक मुद्दे को उठाती थीं—कभी गरीबी, कभी बेरोज़गारी, तो कभी पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को। उन्होंने अपनी फिल्मों के ज़रिए आम आदमी की आवाज़ को बड़े पर्दे पर जगह दी। अंतिम विदाई: मनोज कुमार के निधन के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और फिल्म जगत की हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी। उनके पार्थिव शरीर को आज शाम मुंबई में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और बाद में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। देश हरपल की श्रद्धांजलि:‘भारत कुमार’ अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बनाई फिल्मों और विचारों के जरिए वे हमेशा हमारे दिलों में ज़िंदा रहेंगे। उनका जीवन हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा है—कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि देशभक्ति और समाज परिवर्तन का माध्यम भी हो सकता है। ✦ मनोज कुमार को देश हरपल की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि।
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मेघालय की बेटियों ने AFC कप में गाया ‘माँ तुझे सलाम’, जोश और जज्बे ने जीता देश का दिल

देश हरपलAFC कप के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। मेघालय की कुछ युवतियों के एक समूह ने पूरे स्टेडियम के सामने ‘माँ तुझे सलाम’ गीत को इतने जोश और श्रद्धा से गाया कि वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा और सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। यह घटना AFC कप के एक मुकाबले के दौरान की है, जब मैच शुरू होने से पहले राष्ट्रप्रेम की एक अनोखी लहर स्टेडियम में दौड़ गई। पारंपरिक परिधानों में सजी मेघालय की इन बेटियों ने जब AR Rahman का मशहूर देशभक्ति गीत “माँ तुझे सलाम” गाना शुरू किया, तो दर्शक दीर्घा में बैठे लोग शांत हो गए और पूरे मन से इस भावनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा बने। वीडियो में देखा जा सकता है कि लड़कियों की आवाज़ और चेहरे पर उभरता गर्व, भारत के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। उनका उच्चारण, तालमेल और भाव इतने प्रभावशाली थे कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। जैसे ही उनका गायन समाप्त हुआ, स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। सोशल मीडिया पर इस वीडियो ने आग की तरह फैलते हुए लोगों के दिलों को छू लिया। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हजारों लोगों ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इन लड़कियों की सराहना की है। कई लोगों ने लिखा कि यह दृश्य “भारत की एकता और विविधता” की सच्ची मिसाल है। खास बात ये है कि मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्य से आने वाली इन लड़कियों ने यह दिखा दिया कि राष्ट्रभक्ति किसी भूगोल, जाति या भाषा की मोहताज नहीं होती। भारत के कोने-कोने में देश के लिए वही जज़्बा है, जो एकता के सूत्र में सबको बांधता है। देश हरपल इस भावुक पल को सलाम करता है और मेघालय की इन बेटियों को नमन करता है, जिन्होंने AFC कप को सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व का उत्सव बना दिया। #माँ_तुझे_सलाम #AFCकप #मेघालयकीबेटियाँ #देशहरपल #देशभक्ति
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बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात: बांग्लादेश ने किया था बैठक का अनुरोध

रिपोर्ट: देश हरपल न्यूज | दिनांक: 4 अप्रैल 2025 बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात, बांग्लादेश ने खुद रखा था अनुरोध – दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों के बीच बड़ी कूटनीतिक बातचीत बैंकॉक में BIMSTEC सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बीच एक विशेष मुलाकात हुई। यह मुलाकात अपने आप में कई राजनीतिक और कूटनीतिक संकेतों से भरी हुई मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है और देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बांग्लादेश की तरफ से हुआ था मुलाकात का अनुरोधमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक की पहल बांग्लादेश की ओर से की गई थी। मोहम्मद यूनुस जो कि एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक हैं, उन्होंने खुद पीएम मोदी से भेंट करने की इच्छा जताई थी। बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता परिवर्तन के बीच यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक संदेशों से भरी बातचीतमाना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके जरिए बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भारत को एक भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है। भारत, जो कि बांग्लादेश का सबसे करीबी और बड़ा पड़ोसी है, वहां के हालिया घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। मोहम्मद यूनुस की पीएम मोदी से मुलाकात को वहां की नई राजनीतिक व्यवस्था के संभावित संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों की पृष्ठभूमि में मुलाकात पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हुए हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वहां की सामाजिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। भारत इन मुद्दों को लेकर लगातार सतर्क रहा है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस की यह मुलाकात यह संकेत भी देती है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार या उसके समर्थक भारत से रिश्तों को और बेहतर करना चाहते हैं। यूनुस को लेकर बांग्लादेश में भी उथल-पुथलयह भी ध्यान देने योग्य है कि मोहम्मद यूनुस खुद भी बांग्लादेश की राजनीति में एक विवादित शख्सियत रहे हैं। शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी दर्ज हुए थे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी छवि एक विचारशील और परिवर्तनकारी नेता की रही है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया अध्याय?बैंकॉक में हुई इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के संभावित नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की यह बातचीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। देश और विदेश की ऐसी ही अहम खबरों के लिए जुड़े रहिए — देश हरपल न्यूज़ के साथ।
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4 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) – दैनिक राशिफल

सभी 12 राशियों का आज का राशिफल मेष: पुराने दोस्त से मुलाकात होगी, कोई पुराना विवाद सुलझ सकता है।वृषभ: निवेश के लिए दिन शुभ है, धन लाभ के योग हैं।मिथुन: रोमांटिक लाइफ में सुधार होगा, खुशखबरी मिल सकती है।कर्क: कार्यस्थल पर सतर्क रहें, कोई आपकी छवि खराब करने की कोशिश कर सकता है।सिंह: व्यापार में नए अवसर मिलेंगे, सफलता का समय है।कन्या: परिवार में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, सोच-समझकर निर्णय लें।तुला: मानसिक शांति मिलेगी, आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी।वृश्चिक: किसी से उधार लेने से बचें, वरना परेशानी हो सकती है।धनु: विदेश यात्रा के योग बन सकते हैं, नई योजनाएं बनेंगी।मकर: कार्यक्षेत्र में आपकी तारीफ होगी, प्रमोशन के योग हैं।कुंभ: परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे, मन प्रसन्न रहेगा।मीन: सेहत में सुधार होगा, लेकिन अधिक काम से बचें।
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राज्यसभा में पारित हुआ वक्फ बोर्ड बिल: विपक्ष ने जताई आपत्ति, सरकार ने बताया पारदर्शिता और विकास का कदम

देश हरपल न्यूज़ डेस्कदिनांक: 30 मार्च 2025 राज्यसभा में शनिवार को वक्फ बोर्ड से जुड़ा ‘वक्फ अमेंडमेंट बिल 2023’ लंबी चर्चा के बाद पारित हो गया। करीब 12 घंटे तक चली बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक देखने को मिली। बिल का मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, प्रभावी और आधुनिक बनाना बताया गया है, लेकिन विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया। विपक्ष का तीखा विरोध विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा: “विपक्ष के सभी लोगों ने इस बिल को स्वीकार नहीं किया, इसका मतलब साफ है कि इसमें कई खामियां हैं। ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ हर बार सही नहीं हो सकता। ये दान देने और लेने का मामला है, दान देने वाला किसी भी धर्म का हो सकता है। लेकिन आपने सिर्फ एक समुदाय को केंद्र में रखकर उनके हक छीनने की कोशिश की है।” खड़गे ने यह भी कहा कि इस बिल में संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और यह कदम ‘माइनॉरिटी राइट्स’ को कमजोर करता है। सरकार का पक्ष: पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा: “हमें उम्मीद है कि सदन इस बिल का समर्थन करेगा। 2013 में जब इसी विषय पर UMEED बिल के लिए JPC बनी थी, उसमें केवल 13 सदस्य थे। लेकिन मोदी सरकार द्वारा गठित JPC में 31 सदस्य शामिल थे। लोकतंत्र का मतलब सिर्फ आपकी बात मानना नहीं है, बल्कि तर्क और विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय लेना होता है।” उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों की लूट और अनियमितता को रोकने के लिए लाया गया है, और इसका उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि सुधार और विकास है। संजय राउत का हमला: “मुस्लिमों की इतनी चिंता जिन्ना ने भी नहीं की थी” शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा: “सरकार को मुस्लिमों की इतनी चिंता कब से होने लगी? आप तो कहते थे कि मुस्लिम जमीन और गले की चेन छीन लेंगे। 40 हजार कश्मीरी पंडितों की जमीन आज तक वापस नहीं मिली, और चीन हमारी जमीन पर कब्जा किए बैठा है। सरकार को असली चिंता उस जमीन की करनी चाहिए।” राउत के इस बयान से सदन में कुछ देर के लिए माहौल गर्म हो गया, लेकिन इसके बावजूद बहस जारी रही। बिल में क्या है खास? निष्कर्ष: वक्फ अमेंडमेंट बिल 2023 राज्यसभा से पारित हो चुका है लेकिन इसके खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक तरफ सरकार इसे सुधारवादी और पारदर्शी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक मूल्यों और अल्पसंख्यक अधिकारों पर कुठाराघात मान रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बिल के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव कैसे सामने आते हैं। देश हरपल इस मुद्दे पर आपकी राय जानना चाहता है। क्या यह बिल वाकई पारदर्शिता के लिए लाया गया है या फिर अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चोट?कमेंट करें और अपनी बात खुलकर रखें। ✍️ देश हरपल – राष्ट्रवादी सोच, बेबाक खबरें
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी की कड़ी प्रतिक्रिया, 25,000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बताया अन्याय

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में 25,000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बरकरार रखने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि वह इस निर्णय का समर्थन नहीं कर सकतीं। गौरतलब है कि शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले ही इन नियुक्तियों को अवैध करार दिया था और इन शिक्षकों को नौकरी से हटाने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिससे राज्य के हजारों शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। ममता बनर्जी का बयान ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मैं इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकती। हजारों शिक्षक जो ईमानदारी से काम कर रहे थे, उन्हें एक झटके में नौकरी से निकाल दिया गया। यह लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार इस मामले में शिक्षकों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। क्या है पूरा मामला? यह मामला पश्चिम बंगाल में स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है, जिसमें कथित घोटाले की बात सामने आई थी। एसएससी (स्टाफ सिलेक्शन कमीशन) द्वारा की गई इस भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद हाईकोर्ट ने 25,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए उन्हें बर्खास्त करने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले पर मुहर लगा दी है। शिक्षकों का विरोध और सरकार की चुनौती फैसले के बाद राज्यभर में प्रभावित शिक्षक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे ममता सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए कानूनी रास्ते तलाशे जाएं। शिक्षकों का कहना है कि सभी को गलत तरीके से नौकरी नहीं मिली थी और उनकी मेहनत बेकार जा रही है। ममता बनर्जी ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार इन शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होने देगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ कोई नई अपील करेगी या प्रभावित शिक्षकों को कोई वैकल्पिक समाधान प्रदान करेगी। राजनीतिक तकरार भी तेज इस मामले को लेकर बंगाल में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत बताया है और ममता सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि शिक्षकों की इतनी बड़ी संख्या में बर्खास्तगी से राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। आगे क्या होगा? अब देखना यह होगा कि ममता बनर्जी इस फैसले के खिलाफ कोई नया कदम उठाती हैं या नहीं। प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए अदालत से लेकर सड़कों तक संघर्ष करेंगे। वहीं, सरकार के रुख से यह स्पष्ट है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासी हलचल देखने को मिल सकती है। (देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट)
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3 अप्रैल 2025 (गुरुवार) – दैनिक राशिफल

सभी 12 राशियों का आज का राशिफल मेष: रुके हुए काम पूरे होंगे, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।वृषभ: परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे, धन लाभ के योग हैं।मिथुन: अनावश्यक खर्चों से बचें, बचत पर ध्यान दें।कर्क: कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, धैर्य रखें।सिंह: सेहत में सुधार होगा, लेकिन बाहर के खाने से बचें।कन्या: नए अवसर मिलेंगे, करियर में तरक्की होगी।तुला: प्रेम जीवन में अच्छा समय रहेगा, पार्टनर से सरप्राइज मिल सकता है।वृश्चिक: मानसिक तनाव से बचें, योग और ध्यान करें।धनु: कार्यक्षेत्र में नई चुनौतियां आ सकती हैं, सतर्क रहें।मकर: घर-परिवार में खुशहाली रहेगी, अचानक धन लाभ हो सकता है।कुंभ: मित्रों का सहयोग मिलेगा, किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होगी।मीन: विद्यार्थियों के लिए अच्छा समय है, करियर में नई दिशा मिलेगी।
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ट्रंप का ‘डर्टी-15’ लिस्ट: किन देशों पर गिरेगी भारी टैरिफ की गाज?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और 2024 के चुनावी दौड़ में फिर से मैदान में उतरे डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संभावित आर्थिक एजेंडे का एक बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने ‘डर्टी-15’ नाम से उन 15 देशों की सूची तैयार की है, जिन पर वह भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि ये देश अमेरिका के साथ व्यापार में “अनुचित लाभ” उठा रहे हैं और इसलिए इन्हें ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) देना होगा। क्या है ट्रंप की ‘डर्टी-15’ लिस्ट? ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए उन देशों की पहचान की है, जिन पर नए टैरिफ लगाए जाएंगे। इनमें चीन, भारत, मैक्सिको, जर्मनी, वियतनाम, जापान, कनाडा और कई अन्य देश शामिल हैं। ट्रंप के मुताबिक, ये देश अमेरिका के बाजारों से फायदा उठाते हैं लेकिन बदले में समान अवसर नहीं देते। किन देशों को झेलनी पड़ेगी टैरिफ की मार? इस लिस्ट में प्रमुख रूप से वे देश हैं जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, लेकिन बदले में अमेरिकी सामान पर ऊंचे शुल्क लगाते हैं या व्यापार में असंतुलन बनाए रखते हैं। भारत और चीन खासतौर पर इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि दोनों देश अमेरिका को बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर में सेवाएं और उत्पाद निर्यात करते हैं। ट्रंप की व्यापार नीति और प्रभाव ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे अमेरिका में कुछ उद्योगों को फायदा हो सकता है, लेकिन कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निर्यात पर निर्भर देशों को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप 2024 का चुनाव जीतते हैं, तो उनकी टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकती है और चीन, भारत जैसे देशों के साथ आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। भारत पर असर? भारत, जो अमेरिका के लिए एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, ट्रंप की इस नई नीति से प्रभावित हो सकता है। अगर ट्रंप भारी टैरिफ लगाते हैं, तो भारत के टेक्सटाइल, आईटी और फार्मास्युटिकल उद्योगों को नुकसान हो सकता है। क्या ट्रंप का यह फैसला वाकई अमेरिका के हित में होगा या वैश्विक व्यापार के लिए एक नई चुनौती खड़ी करेगा? यह आने वाले समय में साफ होगा।
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22 की उम्र में बनीं IPS, 28 में दिया इस्तीफा: बिहार की ‘लेडी सिंघम’ काम्या मिश्रा की पूरी कहानी

बिहार कैडर की तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मात्र 22 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनीं काम्या ने अब 28 वर्ष की उम्र में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने न केवल प्रशासनिक हलकों बल्कि आम जनता के बीच भी हलचल मचा दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों एक काबिल और लोकप्रिय अधिकारी ने छह साल की सेवा के बाद पुलिस विभाग को अलविदा कह दिया? आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी। शुरुआत से लेकर आईपीएस बनने तक काम्या मिश्रा बिहार के एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली काम्या ने बेहद कम उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास कर देश की सबसे कठिन परीक्षा में अपना लोहा मनवाया। 22 साल की उम्र में जब ज्यादातर युवा अपने करियर की दिशा तय कर रहे होते हैं, तब उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में कदम रख लिया था। बिहार कैडर मिलने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिलों में अपनी सेवाएं दीं। उनकी कार्यशैली, बेबाक अंदाज और निष्पक्ष रवैया लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। अपराधियों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई के चलते लोग उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से बुलाने लगे। पुलिस सेवा में शानदार कार्यकाल काम्या मिश्रा ने बिहार के कई संवेदनशील जिलों में अपनी सेवाएं दीं। अपराध और भ्रष्टाचार पर उनकी कड़ी निगरानी ने उन्हें जनता के बीच खास पहचान दिलाई। महिला सुरक्षा को लेकर किए गए उनके प्रयासों की भी खूब सराहना हुई। उन्होंने कई जिलों में महिला हेल्पलाइन और स्पेशल टास्क फोर्स के जरिए महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश की। उनका नाम तब और ज्यादा चर्चा में आया जब उन्होंने संगठित अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कई बार उनकी पोस्टिंग राजनीतिक दबाव में भी चर्चा का विषय बनी, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आखिर क्यों दिया इस्तीफा? काम्या मिश्रा के अचानक इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल अगस्त में ही इस्तीफा देने का मन बना लिया था और इसकी वजह पारिवारिक कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि काम्या मिश्रा प्रशासनिक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थीं और उनकी कार्यशैली को लेकर अक्सर राजनीतिक दबाव बनाया जाता था। हालांकि, उन्होंने खुद अभी तक अपने इस्तीफे की असली वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है। लेकिन यह तय है कि बिहार की ‘लेडी सिंघम’ के रूप में मशहूर काम्या मिश्रा का यह फैसला पुलिस सेवा के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। आगे क्या करेंगी काम्या मिश्रा? काम्या मिश्रा के आगे की योजनाओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वे शिक्षा या सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, जबकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे निजी क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। बहरहाल, उनकी आगे की राह चाहे जो भी हो, लेकिन काम्या मिश्रा का नाम उन गिने-चुने अधिकारियों में शामिल रहेगा जिन्होंने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी सेवा दी। उनके फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और जनता उनके भविष्य को लेकर उत्सुकता से इंतजार कर रही है। देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट
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Editor's Picks

Jitendra Mishra

Operation Sindoor के कमांडर अब Ram Mandir के CEO, Jitendra Mishra की नई भूमिका

राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (Jitendra Mishra) को राम मंदिर का पहला Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले मिश्रा अब अयोध्या में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था संभालेंगे। जीतेंद्र मिश्रा का नाम इसलिए भी खास है क्योंकि वह भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वह Western Air Command के प्रमुख रह चुके हैं और Operation Sindoor के दौरान भी पश्चिमी क्षेत्र में वायुसेना की कमान उनके पास थी। देवरिया से Air Force की ऊंची कमान तक का सफर उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से आने वाले जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक का करियर बनाया। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और अंत में वायुसेना की शीर्ष कमान में शामिल हुए। उनका सफर इसलिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है कि अब सैन्य जीवन के बाद उन्हें देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक की व्यवस्था की जिम्मेदारी मिली है। Operation Sindoor के दौरान भी संभाली थी कमान जीतेंद्र मिश्रा उस समय Western Air Command का नेतृत्व कर रहे थे, जब Operation Sindoor हुआ। इस दौरान पश्चिमी मोर्चे पर वायुसेना की ऑपरेशनल जिम्मेदारियां बेहद अहम थीं। सैन्य क्षेत्र में उनके अनुभव और बड़े स्तर पर ऑपरेशन को संभालने की क्षमता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से उन्हें CEO की जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Ram Mandir CEO के तौर पर क्या होगी जिम्मेदारी? अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और विस्तार के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से चलाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। CEO के तौर पर जीतेंद्र मिश्रा के सामने मंदिर की administrative management, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, अलग-अलग एजेंसियों के बीच coordination और रोजमर्रा के संचालन को बेहतर बनाने जैसी जिम्मेदारियां होंगी। उनका सैन्य अनुभव खास तौर पर बड़े स्तर पर लोगों और संसाधनों के प्रबंधन में काम आ सकता है। ट्रस्ट में professional management पर जोर राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को CEO की जिम्मेदारी दिया जाना मंदिर प्रशासन में professional management की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है। मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सुविधाएं और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत रखना लगातार जरूरी होता जा रहा है। जीतेंद्र मिश्रा के अनुभव से ट्रस्ट को इन व्यवस्थाओं को और बेहतर तरीके से संचालित करने की उम्मीद है। अब अयोध्या में नई भूमिका एक ओर देवरिया के भोपतपुरा गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना की शीर्ष जिम्मेदारियों तक पहुंचने वाले जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य सफर उल्लेखनीय रहा है, वहीं अब उनकी नई भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। Air Marshal से Ram Mandir CEO तक का यह सफर जीतेंद्र मिश्रा के करियर का एक नया अध्याय है। अब नजर इस बात पर होगी कि उनके नेतृत्व में राम मंदिर की प्रशासनिक और श्रद्धालु सुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं में किस तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood Crisis: 1127 मौतें, हजारों Missing; PM Balen Shah ने India की मदद को सराहा

नेपाल (Nepal) इन दिनों एक ऐसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। लगातार बारिश, Flash Flood और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में हालात बेहद मुश्किल बने हुए हैं। राहत और बचाव अभियान को शुरू हुए करीब एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। Nepal में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,127 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, करीब 4,800 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों और Rescue Teams की मदद से प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान लगातार चलाया जा रहा है। PM बालेन्द्र शाह ने Parliament में भारत का जताया आभार मुश्किल हालात के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संसद में भारत समेत पड़ोसी देशों की मदद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय पड़ोसी देशों ने सही समय पर सहायता पहुंचाई। भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री और बचाव दल उपलब्ध कराए गए हैं। इस मदद को लेकर नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति आभार जताया। दोनों देशों के बीच आपदा के समय सहयोग की यह भूमिका एक बार फिर सामने आई है। India ने भेजी Relief और Rescue Team नेपाल में आपदा की खबर सामने आने के बाद भारत ने राहत अभियान में मदद बढ़ाई। भारत की ओर से जरूरी दवाइयां और राहत सामग्री भेजी गई। इसके अलावा भारतीय Rescue Team को भी नेपाल भेजा गया, ताकि मुश्किल इलाकों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव में स्थानीय एजेंसियों की मदद की जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत कर आपदा में हुई जनहानि पर संवेदना जताई। भारत ने इस कठिन समय में नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। 7 दिन बाद भी जारी है Search Operation आपदा के एक सप्ताह बाद भी नेपाल में Search and Rescue Operation थमा नहीं है। कई इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा जमा होने के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कें और संपर्क मार्ग भी राहत कार्य में बड़ी बाधा बने हुए हैं। कई स्थानों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बलों और बचाव टीमों को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार उनकी खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। Infrastructure को भी भारी नुकसान बाढ़ ने नेपाल में सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि Infrastructure को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सड़कें, पुल, बिजली व्यवस्था और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर मलबा जमा होने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। अब सरकार के सामने राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित लोगों के Rehabilitation और Infrastructure Reconstruction की चुनौती भी है। China और दूसरे देशों से भी मिली मदद नेपाल की इस आपदा के बाद भारत के अलावा चीन और कुछ अन्य देशों की ओर से भी सहायता पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Rescue और Relief Efforts में सहयोग दिया जा रहा है। फिलहाल नेपाल के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और जरूरी सेवाओं को दोबारा बहाल करना है। संकट की घड़ी में पड़ोसी का साथ नेपाल की इस त्रासदी के बीच भारत की मदद का जिक्र दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के वक्त राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर मानवीय मदद सबसे महत्वपूर्ण होती है। नेपाल में हजारों परिवार अभी भी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में Rescue Operation से लेकर राहत और पुनर्वास तक आने वाले दिनों में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
Cabinet

Modi Cabinet में बड़ा फेरबदल संभव! Vaishnaw-Gadkari को लेकर चर्चाएं, नए चेहरों की भी एंट्री

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में एक बार फिर Cabinet Reshuffle को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में संभावित फेरबदल को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि सरकार में कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, कुछ को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और कई नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कैबिनेट में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक सूची या घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए सामने आ रही जानकारियों को फिलहाल संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है। Ashwini Vaishnaw की भूमिका पर सबकी नजर संभावित Modi Cabinet Reshuffle में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम खास तौर पर चर्चा में है। मौजूदा समय में उनके पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि फेरबदल हुआ तो उनकी भूमिका में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। वैष्णव को लेकर कहीं बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है तो कहीं उनके विभागों में फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि तभी होगी जब सरकार की ओर से आधिकारिक फैसला सामने आएगा। Nitin Gadkari के मंत्रालय को लेकर भी अटकलें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी संभावित बदलाव की चर्चा ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। कुछ रिपोर्ट्स में उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना जताई गई है। गडकरी लंबे समय से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे हैं और देश में हाईवे तथा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट उनके कार्यकाल में आगे बढ़े हैं। ऐसे में अगर उनके विभाग में बदलाव होता है तो यह कैबिनेट फेरबदल का अहम हिस्सा माना जाएगा। 17 नए चेहरों की चर्चा, लेकिन तस्वीर साफ नहीं कैबिनेट में संभावित बदलाव को लेकर 17 नए चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में नए मंत्रियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं। यही वजह है कि फिलहाल 17 नए चेहरों वाली बात को अंतिम सूची मानना सही नहीं होगा। कौन-कौन से नेता मोदी सरकार में मंत्री बनेंगे, यह फैसला बीजेपी नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। कई मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव मोदी सरकार में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। ऐसे में संभावित फेरबदल के दौरान विभागों का बंटवारा दोबारा किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाने के साथ-साथ राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन पर भी ध्यान दे सकती है। नए चेहरों को मौका देने के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव है। Performance भी बन सकता है बड़ा आधार कैबिनेट में बदलाव की चर्चाओं के बीच मंत्रियों के कामकाज और उनके मंत्रालयों की Performance पर भी नजर होने की बात सामने आ रही है। मंत्रालयों की उपलब्धियां, लंबित योजनाएं और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर उनकी प्रगति जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर फेरबदल होता है तो यह सिर्फ चेहरों को बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार के अगले चरण की प्राथमिकताओं का संकेत भी दे सकता है। चुनावी राज्यों को लेकर भी रणनीति आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कैबिनेट में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन भी अहम हो सकता है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर भी समीकरण बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर उन राज्यों पर नजर रहेगी जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संभावित Cabinet Expansion में नए राजनीतिक चेहरों को जगह मिलने की चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। आधिकारिक ऐलान के बाद ही खुलेगा पूरा पत्ता फिलहाल मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर चर्चाएं जरूर जोर पकड़ रही हैं, लेकिन Vaishnaw को प्रमोशन, Gadkari के मंत्रालय में बदलाव या 17 नए चेहरों जैसे दावों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। इसलिए इन खबरों को अभी संभावित बदलाव के तौर पर ही देखना बेहतर होगा। अगर केंद्र सरकार की ओर से Cabinet Reshuffle का ऐलान होता है, तभी यह साफ होगा कि किस मंत्री की जिम्मेदारी बदली गई और किन नए चेहरों को सरकार में जगह मिली। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amarjeet Kaur

PM Modi को लेकर Amarjeet Kaur की टिप्पणी पर घमासान, BJP ने जताई कड़ी आपत्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर CPI नेता अमरजीत कौर (Amarjeet Kaur) की एक टिप्पणी ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। उनके बयान के सामने आने के बाद BJP ने कड़ा विरोध जताया और इसे लेकर माफी की मांग की। मामला अब सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लेकर BJP और वामपंथी दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज होती दिखाई दे रही है। अमरजीत कौर के बयान पर क्यों मचा विवाद? रिपोर्टों के मुताबिक, अमरजीत कौर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की। उनके बयान को BJP ने आपत्तिजनक बताते हुए निशाने पर लिया। अमरजीत कौर की टिप्पणी सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो गई। BJP ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। BJP ने किया जोरदार पलटवार CPI नेता के बयान पर BJP की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने अमरजीत कौर के बयान की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। BJP का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियों तक नहीं ले जाना चाहिए। पार्टी ने अमरजीत कौर की टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की बात कही। माफी मांगने से अमरजीत कौर का इनकार विवाद बढ़ने के बाद जब अमरजीत कौर से माफी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने रुख से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। रिपोर्टों के अनुसार, CPI नेता ने अपने बयान को लेकर सफाई दी और BJP की आपत्ति को खारिज किया। उनका तर्क है कि विपक्षी दलों को सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री के बयानों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। इसी बात को लेकर अब दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बयान से फिर आमने-सामने BJP और Left अमरजीत कौर के बयान ने एक बार फिर BJP और Left parties के बीच राजनीतिक मतभेद को सामने ला दिया है। एक ओर BJP इसे लेकर माफी की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर CPI अपने नेता के रुख को लेकर पीछे हटती नजर नहीं आ रही। राजनीति में तीखी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन ऐसे बयानों को लेकर अक्सर सियासी विवाद बड़ा रूप ले लेते हैं। फिलहाल इस मामले में भी यही होता दिखाई दे रहा है। आगे क्या? अमरजीत कौर के बयान और BJP की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयान आने की संभावना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विवाद यहीं थमता है या फिर यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Silver

Gold-Silver Rate में बड़ा बदलाव! चांदी ₹9,000 और सोना ₹4,500 तक टूटा

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने वालों के लिए इन दिनों बाजार का रुख थोड़ा बदलता नजर आ रहा है। लगातार तेजी के बाद दोनों precious metals की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो कारोबारी दिनों में चांदी करीब ₹9,000 प्रति किलो तक सस्ती हुई, जबकि सोने के भाव में भी लगभग ₹4,500 तक की कमी दर्ज की गई। कीमती धातुओं के दाम में आई इस गिरावट के बीच PM Modi की Gold खरीदारी को लेकर की गई अपील भी चर्चा में है। हालांकि, बाजार के जानकारों के मुताबिक सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट को केवल इस अपील से जोड़ना सही नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों की उम्मीद और वैश्विक तनाव जैसे कई factors कीमतों को प्रभावित करते हैं। Silver Price में तेज गिरावट चांदी में हालिया गिरावट ने निवेशकों को खास तौर पर चौंकाया है। कुछ ही कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत में हजारों रुपये की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर को चांदी करीब ₹6,780 प्रति किलो तक नीचे आई थी। चांदी की कीमत पर घरेलू मांग के साथ-साथ international market का भी असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में कमजोरी आने पर भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ कमजोर चांदी के साथ सोने के भाव में भी गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना तीन सप्ताह से ज्यादा के निचले स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार, Spot Gold करीब 4,321 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में अमेरिकी interest rates को लेकर बदलती उम्मीदों का भी असर सोने पर पड़ा है। आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है तो सोने जैसी बिना ब्याज वाली asset की मांग पर दबाव आ सकता है। PM Modi की Gold खरीदारी टालने की अपील क्यों? सोने की कीमतों के बीच PM Modi की Gold खरीदारी को लेकर अपील एक बार फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री पहले भी लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने की अपील कर चुके हैं। इसके पीछे बड़ी वजह देश का Gold Import Bill और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से सोना मंगाकर पूरा करता है। ऐसे में Gold Import बढ़ने पर देश से बड़ी मात्रा में foreign exchange बाहर जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का Gold Import Bill करीब 72 अरब डॉलर रहा। क्या PM Modi की अपील से Gold-Silver सस्ता हुआ? यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। लेकिन सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट को केवल प्रधानमंत्री की अपील का असर मानना सही नहीं होगा। International market में चल रही हलचल, अमेरिकी monetary policy, डॉलर की चाल, महंगाई और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे कई factors कीमती धातुओं के भाव तय करते हैं। हालिया रिपोर्टों में भी सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और पश्चिम एशिया के तनाव के असर का उल्लेख किया गया है। यानी PM Modi की अपील ने Gold को लेकर चर्चा जरूर बढ़ाई है, लेकिन बाजार में कीमतों की गिरावट के पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं। Jewellery Market पर भी नजर सोने की खरीदारी को लेकर अपील के बीच jewellery industry भी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगर ग्राहक कुछ समय के लिए Gold खरीदने से दूरी बनाते हैं तो इसका असर ज्वैलरी कारोबार पर पड़ सकता है। खासकर त्योहारों और शादी के सीजन में सोने की मांग काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ज्वैलर्स के लिए आने वाले दिनों में Gold demand एक अहम factor रहने वाला है। आगे कैसी रहेगी Gold-Silver की चाल? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना और चांदी आगे भी सस्ते होंगे या फिर दोबारा तेजी लौटेगी। इसका जवाब कई global factors पर निर्भर करेगा। अमेरिकी interest rate policy, डॉलर की मजबूती, crude oil prices, global inflation और geopolitical tensions आने वाले दिनों में Gold-Silver Price की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो केवल एक दिन की गिरावट देखकर फैसला लेने के बजाय बाजार के ताजा भाव और आगे के trend पर नजर रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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