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NEET-UG Paper Leak Case: CBI की बड़ी कार्रवाई, पुणे की लेक्चरर गिरफ्तार, फिजिक्स पेपर बांटने का आरोप

NEET-UG Paper Leak Case: CBI की बड़ी कार्रवाई, पुणे की लेक्चरर गिरफ्तार, फिजिक्स पेपर बांटने का आरोप

NEET-UG Paper Leak मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की एक लेक्चरर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि लेक्चरर ने परीक्षा से पहले फिजिक्स के प्रश्नपत्र कुछ छात्रों तक पहुंचाए थे। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में नए खुलासों की संभावना बढ़ गई है। सीबीआई पिछले कई महीनों से देशभर में फैले पेपर लीक नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी को शक है कि इस रैकेट में कई राज्यों के लोग और शिक्षा से जुड़े कुछ अन्य व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। फिजिक्स पेपर लीक करने का आरोप जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी लेक्चरर ने कथित तौर पर छात्रों को फिजिक्स के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए थे। सीबीआई ने तकनीकी और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह कार्रवाई की है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है। देशभर में फैला था नेटवर्क नीट-यूजी पेपर लीक मामला सामने आने के बाद कई राज्यों में जांच तेज कर दी गई थी। एजेंसियों को आशंका है कि पेपर लीक का नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। इससे पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी पेपर लीक मामले ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। सोशल मीडिया पर भी मामले को लेकर लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
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Twisha Case Update: समर्थ सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, BCI ने वकालत लाइसेंस किया निलंबित

Twisha Case Update: समर्थ सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, BCI ने वकालत लाइसेंस किया निलंबित

भोपाल की चर्चित Twisha मौत मामले में आरोपी समर्थ सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने समर्थ सिंह के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उसकी वकालत प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है। BCI ने उसका एडवोकेट लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद समर्थ सिंह फिलहाल किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकेगा। मामले को लेकर कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सरेंडर के बाद बढ़ा दबाव ट्विषा शर्मा केस में लगातार बढ़ते विवाद और जनदबाव के बीच समर्थ सिंह ने हाल ही में कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद जांच एजेंसियां मामले की हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं। अब BCI की कार्रवाई को भी इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। BCI ने क्यों लिया फैसला? सूत्रों के मुताबिक, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीर आरोपों और चल रही जांच को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। BCI का मानना है कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक समर्थ सिंह को वकालत प्रैक्टिस की अनुमति देना उचित नहीं होगा। परिवार और लोगों में आक्रोश ट्विषा शर्मा की मौत के बाद से परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस केस को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संगठनों और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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Bhopal : अन्ना नगर युवक मौत मामला नशामुक्ति केंद्र पर उठे सवाल, मंत्री विश्वास सारंग ने दिए सख्त जांच के निर्देश

Bhopal : अन्ना नगर युवक मौत मामला नशामुक्ति केंद्र पर उठे सवाल, मंत्री विश्वास सारंग ने दिए सख्त जांच के निर्देश

Bhopal के अन्ना नगर इलाके में 18 वर्षीय युवक एस. चंद्रू की संदिग्ध मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। युवक की मौत अवधपुरी स्थित एक नशामुक्ति केंद्र में हुई, जिसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क पर शव रखकर करीब चार घंटे तक चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। परिवार ने इस घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। इसके बाद चक्का जाम खत्म करवाया गया। मंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश मंत्री विश्वास सारंग ने पुलिस प्रशासन को मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर नशामुक्ति केंद्र की लापरवाही या किसी प्रकार की आपराधिक भूमिका सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी साफ किया कि संबंधित नशामुक्ति केंद्र को बंद किया जाएगा और उसके संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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Thalapathy Vijay: कभी लुक्स और आवाज को लेकर हुए ट्रोल, आज फिल्मों से राजनीति तक बने बड़ा नाम

Thalapathy Vijay: कभी लुक्स और आवाज को लेकर हुए ट्रोल, आज फिल्मों से राजनीति तक बने बड़ा नाम

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Thalapathy Vijay आज सिर्फ फिल्मों ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी बड़ा नाम बन चुके हैं। एक समय ऐसा था जब उनके लुक्स और आवाज को लेकर मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन अपनी मेहनत और लगातार संघर्ष के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। विजय ने अपने करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट की थी। शुरुआती दौर में उनकी फिल्मों को ज्यादा सफलता नहीं मिली और कई बार उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ने तक का मन बना लिया था। लेकिन समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और वे तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय एक फिल्म के लिए करीब ₹275 करोड़ तक फीस लेते थे, जिससे वे देश के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेताओं में गिने जाने लगे। उनकी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त रिस्पॉन्स मिलता रहा और फैंस के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। हाल ही में विजय ने राजनीति में एंट्री लेकर नई चर्चा शुरू कर दी। उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर जनता के मुद्दों पर काम करने की बात कही। उनके समर्थक उन्हें भविष्य के बड़े नेता के रूप में देख रहे हैं। फिल्मों से लेकर राजनीति तक विजय का सफर संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल माना जा रहा है।
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Bengal में महिलाओं को बड़ा तोहफा: 1 जून से सरकारी बसों में मुफ्त सफर

Bengal में महिलाओं को बड़ा तोहफा: 1 जून से सरकारी बसों में मुफ्त सफर

Bengal में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी सरकार ने महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा की है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि 1 जून 2026 से पूरे पश्चिम बंगाल में चलने वाली सभी सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक राहत देना, उनकी यात्रा को आसान बनाना और उन्हें ज्यादा सुरक्षित व आत्मनिर्भर बनाना है। इस पहल से नौकरीपेशा महिलाओं, छात्राओं और रोजाना सफर करने वाली लाखों महिलाओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, योजना को पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। महिलाओं को बस यात्रा के दौरान किसी तरह का किराया नहीं देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की परिवहन तक पहुंच बेहतर होगी और वे बिना आर्थिक चिंता के आसानी से सफर कर सकेंगी। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है और कई लोग इसे महिलाओं के लिए बड़ा कदम मान रहे हैं।
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MP में ‘कॉकरोच पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

MP में ‘कॉकरोच पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

MP की राजनीति में एक नया और अनोखा नाम सामने आया है। “कॉकरोच पार्टी” ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को जनता की आवाज बताते हुए सिस्टम के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का दावा किया। पार्टी के सदस्यों का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि उन लोगों की लड़ाई है जो लंबे समय से भ्रष्ट और शिथिल व्यवस्था से परेशान हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी से जुड़े युवाओं ने कहा कि देश में शिक्षा, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन आम लोगों की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। खास बात यह रही कि NEET पेपर लीक से प्रभावित कुछ युवा भी इस पार्टी के साथ नजर आए। उनका कहना था कि मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और अब युवाओं को खुद आगे आकर बदलाव की लड़ाई लड़नी होगी। पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि “कॉकरोच” नाम प्रतीक है उस संघर्ष का, जो हर मुश्किल हालात में भी खत्म नहीं होता। उनका दावा है कि वे आम जनता, छात्रों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सोशल मीडिया पर भी “कॉकरोच पार्टी” को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सिस्टम के खिलाफ नई आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे अलग तरह की राजनीतिक पहल मान रहे हैं।
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NEET पेपर लीक पर Rahul Gandhi का सरकार पर हमला, बोले- ‘मोदी जी ने एक शब्द नहीं कहा’

NEET पेपर लीक पर Rahul Gandhi का सरकार पर हमला, बोले- ‘मोदी जी ने एक शब्द नहीं कहा’

Rahul Gandhi ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। राहुल गांधी ने कहा, “पेपर लीक पर मोदी जी ने एक शब्द नहीं कहा। सरकार आवाज उठाने वाले छात्रों और युवाओं पर लाठियां चला रही है, लेकिन हम शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक नहीं रुकेंगे।” उन्होंने सीधे तौर पर Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और सरकार जवाबदेही से बच रही है। NEET विवाद पर बढ़ी राजनीति देशभर में NEET परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी का कहना है कि लाखों छात्र मेहनत करके परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके सपनों को तोड़ देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही।
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महंगाई का नया झटका! Sudha और Saras Dairy ने बढ़ाए दूध के दाम, आज से लागू नई कीमतें

महंगाई का नया झटका! Sudha और Saras Dairy ने बढ़ाए दूध के दाम, आज से लागू नई कीमतें

देश में बढ़ती महंगाई के बीच अब दूध की कीमतों ने भी आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बिहार की Sudha Dairy और राजस्थान की Saras Dairy ने दूध के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें गुरुवार से लागू हो गई हैं। दोनों डेयरियों की तरफ से अलग-अलग दूध व डेयरी उत्पादों की कीमतों में इजाफा किया गया है। कीमत बढ़ने का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, खासकर उन परिवारों पर जहां रोजाना दूध की खपत ज्यादा है। सुधा डेयरी ने बढ़ाए दाम पटना में सुधा डेयरी ने कई दूध वेरिएंट की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। नई कीमतों के अनुसार: बताया जा रहा है कि उत्पादन लागत, पशु आहार और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने की वजह से कीमतों में यह बदलाव किया गया है। सरस डेयरी ने भी बढ़ाई कीमतें राजस्थान में सरस डेयरी ने भी दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में इजाफा किया है। हालांकि अलग-अलग शहरों और उत्पादों के हिसाब से कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
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ईरान पर फिर सख्त दिखे Donald Trump, बोले- ‘किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे’

ईरान पर फिर सख्त दिखे Donald Trump, बोले- ‘किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे’

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहा है और आने वाले समय में क्या होगा, यह देखा जाएगा, लेकिन एक बात तय है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “अभी हम बातचीत कर रहे हैं और देखेंगे कि क्या होता है, लेकिन हम इसे किसी न किसी तरह हासिल करके ही रहेंगे। उनके पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा।” अमेरिका-ईरान तनाव फिर चर्चा में ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव की चर्चा तेज हो गई है। पिछले कुछ वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों और अमेरिका की चिंता बनी हुई है। अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जाना चाहिए, जबकि ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है। बातचीत और दबाव दोनों जारी ट्रंप के बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ ईरान पर दबाव भी बनाए रखना चाहता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर नजर बनी हुई है क्योंकि इसका असर मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा  Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा 

Bhopal के अयोध्या बायपास को NGT की मंजूरी, पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा

मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दिल्ली बेंच ने बायपास निर्माण को अनुमति दे दी है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय नियमों और शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटकी परियोजना को राहत मिली है। माना जा रहा है कि बायपास बनने से भोपाल शहर के ट्रैफिक दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण शर्तों के साथ मिली मंजूरी NGT की दिल्ली बेंच ने अपने आदेश में कहा कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तय मानकों का पालन जरूरी होगा। परियोजना से जुड़े विभागों को प्रदूषण नियंत्रण, हरियाली संरक्षण और जल स्रोतों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि यदि किसी शर्त का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लंबे समय से चल रहा था विवाद अयोध्या बायपास परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दों पर आपत्तियां उठाई गई थीं। इसी वजह से मामला NGT तक पहुंचा था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली बेंच ने यह फैसला सुनाया।
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Editor's Picks

आशीष कुमार दश

Infosys Leadership आशीष कुमार दश संभालेंगे CEO पद, पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 12.2% बढ़ा

देश की दिग्गज आईटी कंपनी Infosys के लिए जुलाई का महीना कई मायनों में खास रहा है। कंपनी ने जहां अपने नए CEO के नाम का ऐलान किया है, वहीं पहली तिमाही के शानदार नतीजों से बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। आशीष कुमार दश अब इंफोसिस की कमान संभालेंगे और उनके सामने कंपनी को टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इंफोसिस के ताजा Q1 Results के अनुसार, कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़ हो गया है। पिछले साल की इसी अवधि में इंफोसिस का मुनाफा ₹6,922 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹48,211 करोड़ पहुंच गया है। आशीष कुमार दश बने Infosys के नए CEO इंफोसिस ने नेतृत्व में बदलाव करते हुए आशीष कुमार दश को नया Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है। आईटी सेक्टर की तेज प्रतिस्पर्धा, AI क्रांति और डिजिटल बदलाव के दौर में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि नए CEO के नेतृत्व में Infosys अपने डिजिटल बिजनेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड टेक्नोलॉजी और ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ को और मजबूत करेगी। Q1 Results में Infosys का शानदार प्रदर्शन पहली तिमाही के नतीजों ने दिखाया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद Infosys की ग्रोथ रफ्तार बनी हुई है। कंपनी को डिजिटल सर्विसेज, क्लाउड सॉल्यूशन और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स से फायदा मिला है। आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से मांग को लेकर दबाव देखा जा रहा था, लेकिन इंफोसिस के बेहतर आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। AI और Digital Transformation पर रहेगा फोकस टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच AI अब कंपनियों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। Infosys भी AI आधारित सेवाओं और नए डिजिटल सॉल्यूशन पर लगातार निवेश कर रही है। नए CEO आशीष कुमार दश के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंपनी की ग्रोथ को बनाए रखना, नए क्लाइंट जोड़ना और बदलते टेक्नोलॉजी ट्रेंड के साथ आगे बढ़ना होगी। Investors की नजर अब नई रणनीति पर मजबूत तिमाही नतीजों और नए नेतृत्व के ऐलान के बाद अब निवेशकों की नजर Infosys की आने वाली रणनीति पर होगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि नए CEO के नेतृत्व में कंपनी किस तरह AI, डिजिटल सर्विसेज और इंटरनेशनल बिजनेस को आगे बढ़ाती है। कुल मिलाकर, Infosys के लिए यह दौर बदलाव और नई संभावनाओं का है। एक ओर कंपनी को नया नेतृत्व मिला है, वहीं दूसरी ओर शानदार वित्तीय प्रदर्शन ने उसकी मजबूत स्थिति को साबित किया है। Infosys Q1 Results Highlights: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Commonwealth Games 2026

Team India at Commonwealth Games 2026: तिरंगे के साथ Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain की दमदार एंट्री

कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) 2026 का आगाज शानदार उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और हजारों दर्शकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत के लिए सबसे खास पल वह रहा, जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय दल की अगुआई की। दोनों खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और गर्व पूरे देश के लिए यादगार क्षण बन गया। Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain बनीं भारत की Flag Bearer भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस बार महिला खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को ध्वजवाहक चुना। जैसे ही भारतीय दल स्टेडियम में पहुंचा, वहां मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का स्वागत किया। तिरंगे के साथ दोनों खिलाड़ियों की तस्वीरें कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। यह सम्मान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई बड़े मंचों पर गौरवान्वित कर चुकी हैं। King Charles ने किया Commonwealth Games 2026 का उद्घाटन उद्घाटन समारोह में King Charles ने आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत की घोषणा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का सबसे मजबूत जरिया भी हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना को सर्वोपरि रखने की अपील की। Opening Ceremony में दिखी संस्कृति और तकनीक की शानदार झलक ओपनिंग सेरेमनी में मेजबान देश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ पेश किया। पारंपरिक नृत्य, लाइव म्यूजिक, लेजर शो, ड्रोन डिस्प्ले और आतिशबाजी ने समारोह को यादगार बना दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में हिस्सा लिया और अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया। भारत को इन खेलों में पदकों की बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दल कई खेलों में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा प्रतिभाएं भी इस बार भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देशवासियों की उम्मीदों के साथ शुरू हुआ सफर उद्घाटन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। भारतीय खिलाड़ियों के सामने अब देश की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन द्वारा तिरंगा लेकर स्टेडियम में प्रवेश करना पूरे देश के लिए गर्व का क्षण रहा। अब खेल प्रेमियों की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत अधिक से अधिक पदक जीतकर अपना दम दिखाने की कोशिश करेगा. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tariff

US Trade Policy: भारत के Export पर असर? अमेरिका ने लगाया 10% Extra Tariff, 60 देश भी निशाने पर

अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर 10% Extra Tariff लगाया गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर यह शुल्क 12.5% तक रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों की सप्लाई चेन में Forced Labour (जबरन मजदूरी) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की नजर अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिक गई है। क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला? अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की Section 301 के तहत यह कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में इन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ समेत कुल 60 देशों को इस दायरे में रखा गया है। भारत पर सिर्फ 10% Extra Tariff क्यों? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार जिन देशों ने Forced Labour को रोकने के लिए कुछ ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि जिन देशों के प्रयास कमजोर माने गए हैं, उनके लिए यह दर 12.5% तक तय की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश अपनी नीतियों में सुधार करते हैं तो भविष्य में इन टैरिफ की समीक्षा की जा सकती है। किन उत्पादों पर नहीं लगेगा असर? नई टैरिफ नीति में कुछ आवश्यक वस्तुओं को राहत दी गई है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) समझौते के तहत आने वाले सामान शामिल हैं। इसके अलावा अधिकांश आयातित वस्तुओं पर नया शुल्क लागू होगा। भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य निर्यात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। यदि अतिरिक्त शुल्क लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। कई देशों ने जताई नाराजगी अमेरिका के इस फैसले पर कई देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एकतरफा टैरिफ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत के लिए आगे की राह भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संवाद को मजबूत करना होगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो भविष्य में इस अतिरिक्त टैरिफ पर राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार जगत के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Layoffs

Tech Layoffs 2026: Amazon और Meta ने 40 हजार कर्मचारियों को निकाला, AI बना सबसे बड़ी वजह?

Amazon Layoffs और Meta Layoffs ने एक बार फिर दुनिया भर के टेक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 10 महीनों में दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 40 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। इन फैसलों के पीछे सबसे बड़ा कारण Artificial Intelligence (AI) पर बढ़ता निवेश, लागत में कटौती और कंपनियों का तेजी से बदलता बिजनेस मॉडल माना जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या आने वाले समय में टेक सेक्टर में नौकरी जाने का सिलसिला और तेज हो सकता है? Amazon ने क्यों घटाई अपनी Workforce? ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विस की दिग्गज कंपनी Amazon ने इस साल कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की है। जनवरी 2026 में कंपनी ने करीब 16 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद हाल ही में Artificial General Intelligence (AGI) से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स में भी टीमों का पुनर्गठन किया गया। कंपनी का कहना है कि वह AI तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में ऑटोमेशन संभव है, वहां संसाधनों का नए तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। Amazon का फोकस अब भविष्य की टेक्नोलॉजी तैयार करने पर है। Meta भी AI Strategy पर कर रही बड़ा दांव Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने भी अपने वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 8 हजार लोगों की छंटनी की है। इसके साथ ही कई नई भर्तियों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। Meta का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। इसी वजह से कंपनी अपने खर्चों को कम कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट टूल्स और नई तकनीकों पर ज्यादा निवेश कर रही है। आखिर क्यों बढ़ रही हैं Tech Layoffs? पिछले कुछ वर्षों में टेक कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्ती की थी। अब बाजार की बदलती परिस्थितियों और AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— क्या आगे भी बढ़ सकता है Layoffs का आंकड़ा? टेक इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल छंटनी पूरी तरह रुकने वाली नहीं है। आने वाले महीनों में भी कुछ कंपनियां अपने बिजनेस और AI रणनीति के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियां जरूर प्रभावित हो रही हैं, लेकिन दूसरी ओर AI Engineer, Machine Learning Specialist, Data Scientist, Cloud Engineer, Cyber Security Expert और Prompt Engineer जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी नौकरी के अवसर खत्म नहीं हो रहे, बल्कि उनका स्वरूप बदल रहा है। कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख? विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों की समझ भी उतनी ही जरूरी हो गई है। जो प्रोफेशनल समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे और AI से जुड़ी नई स्किल्स सीखेंगे, उनके लिए भविष्य में बेहतर अवसर बने रहेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।

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