पिछले कुछ हफ्तों में सर्राफा बाजार ने ऐसा उतार-चढ़ाव देखा है, जिसने आम निवेशकों से लेकर बड़े ट्रेडर्स तक सभी को हैरान कर दिया है। जहां आमतौर पर वैश्विक तनाव के समय सोना सुरक्षित निवेश (safe haven) माना जाता है, वहीं इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सोने (Gold) की कीमतों में पिछले करीब 24 दिनों में ₹20,000 से ₹25,000 तक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं चांदी (Silver) भी पीछे नहीं रही और इसमें ₹60,000 से ₹65,000 तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सिर्फ एक दिन में ही सोना ₹10,000 से ज्यादा और चांदी ₹30,000 तक सस्ती हो गई। क्या है गिरावट की असली वजह? 1. मजबूत हुआ डॉलर, कमजोर पड़ा सोना वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने की चमक फीकी कर दी है। निवेशक अब सोने की बजाय डॉलर को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। इसका सीधा असर सोने की मांग पर पड़ा है। ब्याज दरों का दबाव कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का खतरा है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग सोने से पैसा निकालकर FD और बॉन्ड जैसे विकल्पों में निवेश करने लगते हैं, जिससे सोने की कीमत गिरती है। तेल की बढ़ती कीमतें मध्य-पूर्व में तनाव के कारण तेल महंगा हो गया है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और निवेशकों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। मुनाफावसूली सोना कुछ समय पहले अपने उच्चतम स्तर पर था। ऐसे में कई निवेशकों ने मुनाफा निकालने के लिए बिक्री शुरू कर दी। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतें नीचे आ गईं। नकदी की जरूरत शेयर बाजार में गिरावट के चलते निवेशकों को नुकसान की भरपाई करनी पड़ी। इसके लिए उन्होंने सोना और चांदी बेचना शुरू किया, जिससे कीमतों पर और दबाव आया। क्या इस बार safe haven नहीं रहा सोना? इस बार सबसे दिलचस्प बात यह है कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद सोना तेजी नहीं दिखा पाया।इसका कारण साफ है — निवेशकों का फोकस अब सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि रिटर्न और तुरंत उपलब्ध नकदी (liquidity) पर भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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