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Trump Security Alert: ईरान के खतरे के बीच ट्रंप ने बदला Plane, ट्रक से पहुंचे दूसरे विमान तक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की हालिया यात्रा से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने सबको हैरान कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान से संभावित खतरे की आशंका के चलते ट्रंप को Air Force One से हटाकर दूसरे सैन्य विमान में ले जाया गया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया और ट्रंप को एक कैटरिंग ट्रक की आड़ में दूसरे विमान तक पहुंचाया गया। ट्रंप ने अब इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा है कि विमान बदलने का फैसला सुरक्षा अधिकारियों की सलाह पर लिया गया था। उनके मुताबिक, अगर किसी हमले का खतरा होता तो Air Force One भी निशाने पर आ सकता था। Air Force One से अचानक बदला गया प्लान रिपोर्टों के अनुसार, NATO समिट के बाद तुर्की से वापसी के दौरान ट्रंप को पहले Air Force One पर लाया गया था। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने आखिरी समय में प्लान बदल दिया। ट्रंप को एक कैटरिंग ट्रक के जरिए चुपचाप दूसरे सैन्य विमान तक ले जाया गया। इसके बाद वह C-32A विमान से रवाना हुए। वहीं Air Force One को भी तय योजना के मुताबिक उड़ाया गया, ताकि बाहर से देखने वालों को यही लगे कि राष्ट्रपति उसी विमान में हैं। इस पूरी रणनीति का मकसद ट्रंप की वास्तविक लोकेशन को छिपाना था। ईरान से खतरे की वजह से लिया गया फैसला अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एजेंसियां पहले से सतर्क थीं। रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति के विमान को बदलने का फैसला किया गया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें सुरक्षा टीम ने विमान बदलने की सलाह दी थी। उन्होंने खुद इस फैसले को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई और कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की बात मानना जरूरी है। ट्रंप बोले- दूसरा विमान भी खतरे से बाहर नहीं था Trump के बयान का एक और हिस्सा खास चर्चा में है। उन्होंने संकेत दिया कि जिस दूसरे विमान में उन्हें भेजा गया, वह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं था। उनके मुताबिक, अगर कोई हमला होता तो Air Force One को निशाना बनाया जा सकता था। ऐसे में विमान बदलने की रणनीति का उद्देश्य राष्ट्रपति की लोकेशन को लेकर भ्रम पैदा करना था। यानी एक तरफ Air Force One आसमान में था और दूसरी तरफ ट्रंप दूसरे विमान से अपनी यात्रा कर रहे थे। पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि Air Force One में मौजूद कई पत्रकारों और कर्मचारियों को भी शुरुआत में ट्रंप के विमान बदलने की जानकारी नहीं थी। उन्हें यही लगा कि राष्ट्रपति उनके साथ उसी विमान में सफर कर रहे हैं। बाद में जब ट्रंप के दूसरे विमान से रवाना होने की जानकारी सामने आई, तब पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हुई। क्यों खास है यह मामला? अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में अचानक रूट, समय या विमान बदलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार जिस तरह Air Force One को संभावित decoy के तौर पर इस्तेमाल किया गया और ट्रंप को कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचाया गया, उसने इस घटना को खास बना दिया है। इससे यह भी पता चलता है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के दौरान उनकी वास्तविक लोकेशन को छिपाने के लिए किस स्तर तक गोपनीय रणनीति अपनाई जा सकती है। सुरक्षा या बड़ा जोखिम? ट्रंप के विमान बदलने की खबर सामने आने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। समर्थकों का मानना है कि संभावित खतरे की स्थिति में राष्ट्रपति की लोकेशन छिपाना जरूरी कदम था। वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि Air Force One में मौजूद अन्य लोगों को इस तरह के सुरक्षा बदलाव की जानकारी क्यों नहीं दी गई। फिलहाल इतना साफ है कि ईरान से संभावित खतरे के बीच ट्रंप की यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद असामान्य कदम उठाया। Air Force One को decoy बनाकर राष्ट्रपति को दूसरे विमान से भेजने का यह ऑपरेशन अमेरिकी राष्ट्रपति सुरक्षा व्यवस्था के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में शामिल हो गया है।
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Monsoon Session

Monsoon Session Update: संसद में फिर हंगामा, Lok Sabha-Rajya Sabha की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित

संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। सत्र खत्म होने में सिर्फ दो दिन बाकी हैं, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही। बुधवार को विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सदन के बाहर भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया और कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के आज सदन में बयान देने की संभावना पर सबकी नजर बनी हुई है। दोपहर 2 बजे तक स्थगित हुई कार्यवाही बुधवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध जताया। लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र के अब केवल दो दिन बचे हैं। ऐसे में सदन का समय सरकार और विपक्ष दोनों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। सरकार जहां अपने लंबित विधायी एजेंडे को पूरा करना चाहती है, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग कर रहा है। Amit Shah के बयान का इंतजार संसद की आज की कार्यवाही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बयान को लेकर खास चर्चा है। विपक्ष लंबे समय से कुछ अहम मुद्दों पर गृह मंत्री के जवाब की मांग कर रहा है। ऐसे में अगर अमित शाह सदन में बयान देते हैं तो उसके बाद विपक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। संसद के अंतिम दिनों में यह मुद्दा सियासी माहौल को और गरमा सकता है। FCRA Bill पर भी नजर मानसून सत्र में FCRA Amendment Bill भी सरकार और विपक्ष के बीच प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। Foreign Contribution Regulation Act में प्रस्तावित बदलावों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस विधेयक पर सहमति बनाने के लिए इसे संसदीय समिति के पास भेजने की संभावना पर भी विचार हुआ है। हालांकि, इस पर सरकार और विपक्ष के बीच क्या रास्ता निकलता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। हंगामे के बीच विधायी काम जारी संसद में लगातार हंगामे के बावजूद सरकार ने कई विधायी काम आगे बढ़ाए हैं। लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष के विरोध के बीच दो विधेयक पारित किए गए। इनमें केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक और National Cooperative Development Corporation से जुड़ा विधेयक शामिल था। राज्यसभा में भी Tribunals Reforms Bill, 2026 पारित किया गया। इससे संकेत मिलता है कि सरकार सत्र के बचे हुए समय में अपने एजेंडे को पूरा करने की कोशिश कर रही है। आखिरी दो दिन होंगे अहम अब संसद के पास कामकाज के लिए सिर्फ दो दिन बचे हैं। ऐसे में आने वाले दो दिन यह तय करेंगे कि सरकार अपने जरूरी विधायी काम कितने पूरे कर पाती है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरने में सफल रहता है। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर Amit Shah के संभावित बयान, FCRA Bill और सदन में जारी गतिरोध पर है। अगर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो अंतिम दो दिन कुछ महत्वपूर्ण काम हो सकते हैं, लेकिन हंगामा जारी रहा तो संसद का कीमती समय फिर प्रभावित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Alert: MP में 3 दिन से लगातार बारिश, Mumbai में Landslide; Bihar में बिजली से मौतें

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) इस समय जमकर बरस रहा है। मध्य प्रदेश में लगातार तीसरे दिन बारिश का दौर जारी है और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वहीं मुंबई में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड की घटना ने चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से कई लोगों की जान चली गई। लगातार बिगड़ते मौसम ने प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। MP में लगातार बारिश, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। भोपाल समेत प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है। सड़कों पर जलजमाव से यातायात प्रभावित हुआ है, जबकि कई जगहों पर लोगों को रोजमर्रा के काम में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भोपाल में बारिश का असर सरकारी दफ्तरों और पुलिस थानों तक भी पहुंच गया। ईंटखेड़ी थाना परिसर में पानी भरने के बाद पुलिसकर्मियों को रिकॉर्ड और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। लगातार बारिश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Mumbai में Landslide से मचा हड़कंप मुंबई में भारी बारिश के बीच लैंडस्लाइड की घटना सामने आई। कुर्ला इलाके में मलबा गिरने के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मुंबई में लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या सामने आई है। मौसम विभाग ने भी शहर में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। ऐसे में लोगों को जलभराव और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। Bihar में आकाशीय बिजली बनी जानलेवा बिहार में भी बारिश के साथ आकाशीय बिजली लोगों के लिए खतरा बन रही है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिजली गिरने की घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई है। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। आकाशीय बिजली के खतरे को देखते हुए लोगों से कहा गया है कि बारिश और गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को नियमानुसार आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया भी की जा रही है। कई राज्यों में Monsoon का असर मानसून की सक्रियता के कारण देश के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर चल रहा है। मध्य प्रदेश में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात, मुंबई में लैंडस्लाइड और बिहार में बिजली गिरने की घटनाओं ने मौसम की गंभीरता को सामने ला दिया है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए लोगों को जरूरी होने पर ही घर से निकलने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। खासकर नदी-नालों, निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। कुल मिलाकर, देश के कई हिस्सों में मानसून ने अपना असर तेज कर दिया है। एक तरफ बारिश गर्मी से राहत दे रही है, तो दूसरी तरफ लगातार तेज बारिश अब कई इलाकों में परेशानी और खतरे का कारण भी बन रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BSE

BSE को मिली Nifty 50 में जगह, Wipro बाहर; जानें 30 सितंबर से क्या बदलेगा

भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े benchmark index Nifty 50 में जल्द ही बड़ा बदलाव होने वाला है। NSE Indices की छमाही समीक्षा में BSE Ltd. को Nifty 50 में शामिल करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही दिग्गज IT कंपनी Wipro Ltd. अब इस प्रमुख इंडेक्स का हिस्सा नहीं रहेगी। यह बदलाव 30 सितंबर 2026 से लागू होगा। यानी 29 सितंबर को बाजार बंद होने के बाद Nifty 50 की नई तस्वीर सामने आएगी। BSE को क्यों मिली Nifty 50 में जगह? NSE Indices के मुताबिक BSE का 6 महीने का औसत free-float market capitalisation करीब ₹1.41 लाख करोड़ रहा। वहीं Nifty 50 की सबसे छोटी मौजूदा कंपनी Wipro का औसत free-float market cap करीब ₹55,930 करोड़ था। इंडेक्स में शामिल होने के नियमों के मुताबिक BSE का औसत free-float market cap Wipro के मुकाबले जरूरी स्तर से काफी ऊपर रहा। इसी आधार पर BSE को Nifty 50 में जगह मिली है। सीधी भाषा में कहें तो बाजार में BSE का बढ़ता आकार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी अब उसे Nifty 50 की शीर्ष कंपनियों की सूची तक ले आई है। Wipro की Nifty 50 से होगी Exit इस बदलाव का दूसरा बड़ा पहलू Wipro का Nifty 50 से बाहर होना है। कंपनी लंबे समय से इस benchmark index का हिस्सा रही है, लेकिन अब इसका free-float market capitalisation इंडेक्स की मौजूदा जरूरत के मुकाबले कम हो गया है। Wipro को Nifty 50 से हटाकर Nifty Next 50 में शामिल किया जाएगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी के कारोबार पर कोई सीधा फैसला हो गया है। यह मुख्य रूप से इंडेक्स के तय नियमों और बाजार पूंजीकरण से जुड़ा बदलाव है। 30 सितंबर से लागू होगा नया बदलाव NSE Indices ने साफ किया है कि बदलाव 29 सितंबर 2026 को बाजार बंद होने के बाद प्रभावी होंगे। इसके बाद 30 सितंबर से Nifty 50 में BSE की जगह पक्की हो जाएगी और Wipro बाहर होगी। यह बदलाव सिर्फ इंडेक्स की सूची तक सीमित नहीं है। Nifty 50 को ट्रैक करने वाले कई passive funds और ETFs को भी अपनी holdings में बदलाव करना पड़ सकता है। इसी वजह से बदलाव की तारीख के आसपास संबंधित शेयरों में खरीद-बिक्री बढ़ सकती है। BSE Share में क्यों बढ़ी हलचल? BSE के Nifty 50 में शामिल होने की खबर बाजार के लिए काफी अहम रही। Reuters के अनुसार घोषणा के बाद BSE के शेयर में करीब 4 फीसदी की तेजी देखने को मिली, जबकि Wipro के शेयर में करीब 1.1 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, शेयर बाजार में किसी कंपनी के इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने को देखकर अकेले निवेश का फैसला करना ठीक नहीं है। शेयर की कीमत पर कंपनी के नतीजे, valuation, बाजार की स्थिति और कई दूसरे factors भी असर डालते हैं। Nifty 50 के लिए क्या बदलेगा? Nifty 50 को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख benchmark माना जाता है। इसमें देश की बड़ी और प्रमुख कंपनियां शामिल होती हैं। समय-समय पर NSE Indices इसकी समीक्षा करता है, ताकि इंडेक्स बदलती market conditions को बेहतर तरीके से दर्शा सके। BSE की entry इसी बदलती तस्वीर की एक मिसाल है। एक तरफ stock exchange कारोबार से जुड़ी कंपनी का बाजार में बढ़ता महत्व नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ लंबे समय से Nifty 50 में मौजूद Wipro को अब Next 50 में जाना होगा। निवेशकों की नजर अब सितंबर के बदलाव पर फिलहाल बाजार की नजर 30 सितंबर 2026 पर है। उस दिन से Nifty 50 में BSE की नई पारी शुरू होगी और Wipro की benchmark index से विदाई हो जाएगी। यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार में बदलते market dynamics की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में निवेशक BSE और Wipro दोनों के शेयरों में होने वाली गतिविधियों के साथ-साथ Nifty 50 में होने वाले दूसरे बदलावों पर भी नजर रखेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold-Silver Rate: सोने में फिर आया बड़ा उछाल, अगस्त में ₹9,630 महंगा; चांदी भी चमकी

सोना खरीदने वालों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर है। देश के सर्राफा बाजार में Gold Price में तेज उछाल देखने को मिला है। सोने की कीमत एक दिन में ₹1,849 बढ़कर करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है। खास बात यह है कि अगस्त की शुरुआत से ही सोने के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं और अब तक इसमें करीब ₹9,630 की बढ़ोतरी हो चुकी है। सोने के साथ-साथ चांदी ने भी तेजी का नया दौर देखा है। Silver Price में एक दिन में ₹15,985 का बड़ा उछाल आया और चांदी करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। अगस्त में सोने ने बढ़ाया खरीदारी का खर्च अगस्त महीने में Gold Rate में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। अब तक सोना करीब ₹9,630 महंगा हो चुका है। ऐसे में जिन लोगों के घर में शादी या कोई बड़ा समारोह है, उनके लिए गहनों की खरीदारी पहले के मुकाबले काफी महंगी पड़ सकती है। सोने की कीमत में इतनी तेजी के बाद आम खरीदार अब बाजार में भाव देखकर ही खरीदारी का फैसला कर रहे हैं। कई लोग जरूरत की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने पर भी विचार कर सकते हैं। Silver Price में भी जोरदार उछाल चांदी की कीमतों ने भी इस बार तेजी के मामले में सोने को पीछे छोड़ दिया है। एक दिन में ही Silver Rate में ₹15,985 की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद चांदी करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो के भाव पर पहुंच गई। चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर बाजार की मांग और निवेशकों की गतिविधियों का असर दिखाई देता है। क्यों महंगा हो रहा है Gold और Silver? सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल भी अहम भूमिका निभाती है। निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने पर अक्सर Gold की कीमतों को सहारा मिलता है। इसके अलावा डॉलर की चाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के भाव और घरेलू मांग जैसे कई कारक भी सोने-चांदी के रेट को प्रभावित करते हैं। खरीदारों के लिए बढ़ी मुश्किल Gold Price के लगातार बढ़ने से सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें आने वाले दिनों में आभूषण खरीदने हैं। शादी और त्योहारों के सीजन में सोने की मांग बढ़ने के साथ कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के साथ आम खरीदारों की नजर भी अब अगले कुछ दिनों के Gold Rate और Silver Rate पर रहेगी। Gold-Silver Price की एक नजर हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonia Gandhi

Manmohan Singh की Legacy पर Sonia Gandhi बोलीं- इतिहास ईमानदारी और काम को याद रखेगा

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi)ने एक बार फिर खुलकर अपनी बात रखी है। सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह भले ही अपने शांत और सहज स्वभाव के लिए जाने जाते थे, लेकिन देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर उनका प्रभाव बेहद गहरा था। उनका मानना है कि आने वाले समय में इतिहास मनमोहन सिंह को एक ईमानदार और बेहद प्रभावशाली प्रधानमंत्री के तौर पर याद करेगा। सोनिया गांधी ने यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद की है, जिसमें कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कार्यवाही को बंद करने का रास्ता साफ हुआ। 29 जुलाई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया और 2015 में विशेष अदालत की ओर से लिए गए संज्ञान से जुड़े आदेश को भी रद्द कर दिया। Coal case में मिली राहत को सोनिया ने बताया अहम पड़ाव सोनिया गांधी ने अपने लेख में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मनमोहन सिंह की सार्वजनिक छवि के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में लंबे समय तक पूर्व प्रधानमंत्री की ईमानदारी और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पूरे प्रकरण को नए नजरिए से देखने की जरूरत है। सोनिया के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने के साथ निचली अदालत की उन टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए, जिनके लिए पर्याप्त ठोस आधार नहीं था। ‘शांत, सरल लेकिन बेहद प्रभावशाली PM’ सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए उन्हें शांत और सौम्य नेता बताया। उनके अनुसार, सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में दस वर्षों तक देश का नेतृत्व किया और उनकी सरकार के दौरान आर्थिक विकास तथा कई सामाजिक योजनाओं पर काम हुआ। सोनिया ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में उनकी विश्वसनीयता थी। उनके मुताबिक, समय बीतने के साथ उनके काम और योगदान का मूल्यांकन राजनीतिक आरोपों से अलग होकर किया जाएगा। BJP सरकार पर भी सोनिया गांधी का निशाना मनमोहन सिंह की विरासत की चर्चा करते हुए सोनिया गांधी ने मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ CBI और ED जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। यह सोनिया गांधी का राजनीतिक आरोप है। BJP की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर विरोध जताया जाता रहा है। आर्थिक सुधारों में मनमोहन सिंह की बड़ी भूमिका मनमोहन सिंह का नाम भारत के आर्थिक इतिहास में खास तौर पर 1991 के आर्थिक सुधारों से जुड़ा रहा है। उस समय वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के साथ मिलकर आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया। बाद में 2004 में वे देश के प्रधानमंत्री बने और लगातार दो कार्यकाल तक इस पद पर रहे। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में RTI, ग्रामीण रोजगार और कई सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं को लेकर बड़े फैसले हुए। फिर चर्चा में आई मनमोहन सिंह की Legacy मनमोहन सिंह के निधन के बाद भी उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर देश में बहस जारी रही है। समर्थक उनकी आर्थिक समझ, सादगी और व्यक्तिगत ईमानदारी को उनकी सबसे बड़ी पहचान मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी सरकार के दौरान सामने आए विवादों और राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। अब कोयला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोनिया गांधी की टिप्पणी ने एक बार फिर मनमोहन सिंह की Legacy को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सोनिया गांधी का कहना है कि समय के साथ मनमोहन सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों से ज्यादा उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, काम और ईमानदारी को याद किया जाएगा। यही वजह है कि उनके बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि भारतीय राजनीति और इतिहास में मनमोहन सिंह की भूमिका को आने वाली पीढ़ियां किस नजरिए से देखेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gautam Adani

Gautam Adani को US Court से राहत, Bribery और Fraud के आरोपों वाला केस हुआ खत्म

अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी (Gautam Adani) को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी संघीय अदालत ने अडाणी और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला नवंबर 2024 में सामने आया था और तब से ही अडाणी समूह के लिए बड़ी कानूनी चुनौती बना हुआ था। अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि अडाणी और उनके सहयोगियों ने भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई थी। साथ ही आरोप था कि इस कथित योजना की जानकारी अमेरिकी निवेशकों से छिपाई गई। अडाणी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया था। 2024 में शुरू हुआ था Adani का US Case इस पूरे विवाद की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी। अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी और अन्य लोगों पर कथित रिश्वत योजना से जुड़े आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष का कहना था कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए अधिकारियों को कथित तौर पर करीब 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। इसके अलावा अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की गतिविधियों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी नहीं देने का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, अडाणी समूह ने शुरुआत से ही किसी भी गलत काम से इनकार किया। Justice Department ने केस आगे बढ़ाने से किया इनकार मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी Justice Department ने अभियोजन को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद मामला अदालत के सामने पहुंचा। अमेरिकी जिला जज निकोलस गारॉफिस ने पहले DOJ से इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करने को कहा था। अमेरिकी सरकार की ओर से दलील दी गई कि मामले का बड़ा हिस्सा अमेरिका के बाहर हुई कथित गतिविधियों से जुड़ा है और इसे अमेरिकी कानून के तहत साबित करना मुश्किल हो सकता है। अभियोजन पक्ष ने मामले की विदेशी प्रकृति और कानूनी जटिलताओं को भी अपने फैसले की वजह बताया। अमेरिकी कोर्ट ने 10 अगस्त को खत्म किया मामला आखिरकार 10 अगस्त 2026 को अमेरिकी अदालत ने गौतम अडाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज कर दिए। इस फैसले के साथ 2024 से चल रहा हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामला अमेरिकी अदालत में समाप्त हो गया। हालांकि, फैसले के दौरान जज ने Justice Department की ओर से केस छोड़ने की प्रक्रिया को लेकर चिंता भी जताई। उनका सवाल मुख्य रूप से इस बात पर था कि मामले को खत्म करने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया गया और क्या जांच में शामिल अधिकारियों की राय को पर्याप्त महत्व दिया गया था। Adani Group के लिए बड़ी राहत अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला अडाणी समूह के लिए इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह मामला लंबे समय से कंपनी की अंतरराष्ट्रीय छवि और कारोबार पर नजर रखने वाले निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। फैसले के बाद अडाणी समूह की कई कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक 11 अगस्त को समूह की कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। गौतम अडाणी ने फैसले का किया स्वागत केस खारिज होने के बाद गौतम अडाणी ने अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनका विश्वास सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में बना रहा। अडाणी के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 में आरोप सामने आने के बाद इस मामले ने दुनियाभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब अमेरिकी आपराधिक केस खत्म होने से समूह को इस मोर्चे पर राहत मिली है। क्या अब अडाणी पर कोई मामला नहीं बचा? यहां एक बात समझना जरूरी है। अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक केस खारिज किए जाने का मतलब यह नहीं है कि अडाणी से जुड़े हर अमेरिकी कानूनी या नियामकीय मामले का भी अंत हो गया है। इससे संबंधित कुछ civil और regulatory proceedings अलग प्रक्रिया के तहत चल सकती हैं। Reuters के अनुसार, अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी ने संबंधित अमेरिकी Securities and Exchange Commission मामले में भुगतान को लेकर समझौता किया था। यानी फिलहाल सबसे बड़ी खबर यह है कि 2024 में शुरू हुआ अमेरिकी आपराधिक रिश्वत और Fraud Case अब अदालत में खत्म हो गया है। इससे गौतम अडाणी और Adani Group को निश्चित तौर पर बड़ी कानूनी राहत मिली है, जबकि इससे जुड़े अन्य मामलों की स्थिति अलग हो सकती है। Adani Case की पूरी कहानी: 2024 में लगे गंभीर आरोपों से लेकर Justice Department के केस वापस लेने और अब अमेरिकी कोर्ट द्वारा आरोप खारिज किए जाने तक यह मामला करीब दो साल तक चर्चा में रहा। ताजा फैसले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस कानूनी राहत का अडाणी समूह के कारोबार और निवेशकों के भरोसे पर आगे क्या असर पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Colombia

Colombia Earthquake: 7.4 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 132 की मौत, 570 घायल

दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया (Colombia) सोमवार को आए शक्तिशाली भूकंप से बुरी तरह हिल गया। पश्चिमी हिस्से में आए 7.4 magnitude के भूकंप ने कई शहरों में तबाही मचा दी। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में 132 लोगों की मौत हुई है, जबकि 570 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव का काम अभी भी जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भूकंप का असर इतना व्यापक रहा कि कई इलाकों में घर, अस्पताल, स्कूल और दूसरी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। शुरुआती आकलन के अनुसार 86 इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह लोग मलबे में फंसे हुए हैं और बचाव दल लगातार उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिमी Colombia में सबसे ज्यादा तबाही भूकंप का केंद्र चोको क्षेत्र के सैन जोसे डेल पालमार के आसपास बताया गया है। इसके झटके कैली, पेरेइरा, क्विब्दो, मनीसालेस और आर्मेनिया जैसे शहरों में भी महसूस किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक देश के 32 शहरों पर भूकंप का गंभीर असर पड़ा है। पांच विभागीय राजधानियों को रेड अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप के झटके महसूस होते ही बड़ी संख्या में लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूरदराज के इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से राहत टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी चुनौती बन गया है। 1,500 से ज्यादा घरों को नुकसान भूकंप के बाद सामने आई तस्वीरों में कई इलाकों में इमारतों के मलबे में तब्दील होने की स्थिति दिखाई दी। 1,500 से ज्यादा घर प्रभावित हुए हैं, जबकि दर्जनों इमारतें पूरी तरह गिर गईं। कई स्कूल और अस्पताल भी नुकसान की चपेट में आए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जो अब भी मलबे के नीचे या क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास फंसे हो सकते हैं। राहतकर्मी और स्थानीय लोग मिलकर लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। Hospitals में बढ़ा दबाव, मरीज भी फंसे भूकंप ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित किया है। कुछ अस्पतालों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है और कई जगह बड़ी संख्या में घायल लोगों को इलाज के लिए लाया गया। कैली में अस्पताल से जुड़े हिस्सों में भी नुकसान की खबर सामने आई है। अचानक बढ़े मरीजों की संख्या के कारण मेडिकल टीमों पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। सात Airports पर काम बंद भूकंप का असर सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि air connectivity पर भी पड़ा है। नुकसान और सुरक्षा जांच के चलते सात एयरपोर्ट पर संचालन रोक दिया गया। इनमें कैली, पेरेइरा, मनीसालेस, क्विब्दो, आर्मेनिया, कार्टागो और बुएनावेंतुरा के एयरपोर्ट शामिल बताए गए हैं। एयरपोर्ट बंद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। साथ ही राहत और बचाव टीमों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। Aftershocks ने बढ़ाई चिंता मुख्य भूकंप के बाद कई aftershocks भी महसूस किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार रात तक करीब 21 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए थे। इससे पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस नहीं जाने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Colombia में National Emergency घोषित हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल राहत और बचाव अभियान पर है। प्रभावित इलाकों में जरूरी संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। भूकंप के बाद कुछ शहरों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करने की अपील की है। International help के लिए आगे आए देश इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद कोलंबिया के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद भी सामने आई है। अमेरिका ने राहत और मानवीय सहायता के लिए 15.5 मिलियन डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा दूसरे देशों ने भी सहायता की पेशकश की है। फिलहाल कोलंबिया में राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है। जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों से जानकारी सामने आएगी, नुकसान और हताहतों का आंकड़ा बदल सकता है। प्रशासन की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाई जाए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Suvendu Adhikari

West Bengal में बड़ा अपडेट! Suvendu Adhikari के Helicopter की Emergency Landing

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को लेकर जा रहे हेलिकॉप्टर की मंगलवार को कोलाघाट में अचानक Emergency Landing करानी पड़ी। हेलिकॉप्टर के रास्ते में मौसम खराब होने के बाद पायलट ने उड़ान जारी रखने के बजाय एहतियातन उसे सुरक्षित जगह पर उतारने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी दमदम से केशपुर के लिए हेलिकॉप्टर से रवाना हुए थे। उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर के केशपुर में स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि देने से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होना था। इसी दौरान मौसम ने अचानक करवट ली और उड़ान में परेशानी की स्थिति बनी। कोलाघाट में खुले मैदान में हुई Precautionary Landing खराब मौसम को देखते हुए पायलट ने जोखिम लेने के बजाय हेलिकॉप्टर को पूर्व मेदिनीपुर के कोलाघाट में एक खुले मैदान में उतार दिया। इसे एहतियाती लैंडिंग बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना में मुख्यमंत्री या हेलिकॉप्टर में सवार किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं है। हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के बाद कुछ देर के लिए मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रभावित हुआ, लेकिन यात्रा पूरी तरह नहीं रुकी। सुवेंदु अधिकारी ने इसके बाद सड़क मार्ग से केशपुर के लिए अपनी यात्रा जारी रखी और निर्धारित कार्यक्रम में पहुंचने की कोशिश की। मौसम बना परेशानी की मुख्य वजह इस घटना में सबसे अहम बात मौसम की स्थिति रही। रिपोर्टों के मुताबिक, इलाके में inclement weather यानी खराब मौसम के कारण पायलट ने हेलिकॉप्टर को आगे ले जाना सुरक्षित नहीं समझा। ऐसे हालात में उड़ान को रोककर सुरक्षित स्थान पर लैंडिंग करना एहतियाती कदम माना जाता है। घटना के बाद मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की Emergency Landing की खबर तेजी से सामने आई। हालांकि, शुरुआती जानकारी से साफ है कि यह किसी बड़े हादसे के बजाय खराब मौसम के कारण की गई precautionary landing थी। मुख्यमंत्री सुरक्षित रहे और उन्होंने सड़क मार्ग से अपनी आगे की यात्रा जारी रखी। क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर? मानसून के दौरान पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में हेलिकॉप्टर उड़ानों के लिए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है। कोलाघाट में हुई यह लैंडिंग भी इसी तरह के एहतियाती फैसले का उदाहरण है, जहां पायलट ने परिस्थिति को देखते हुए उड़ान जारी रखने के बजाय सुरक्षित लैंडिंग को प्राथमिकता दी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

West Bengal SIR विवाद में Supreme Court का सख्त रुख, ECI से मांगा अपीलों का पूरा डेटा

पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग यानी ECI से SIR से जुड़ी अपीलों और उनके निपटारे की स्थिति पर जानकारी मांगी। कोर्ट का रुख इस बात का संकेत है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर अदालत पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रही है। यह मामला कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका से जुड़ा है। याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान प्रभावित मतदाताओं की ओर से दाखिल की गई अपीलों के जल्द निपटारे की मांग की गई है। Supreme Court ने ECI से क्या जानकारी मांगी? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़े कितने मामलों में अपील दाखिल की गई, उनमें से कितने मामलों का फैसला हो चुका है और कितने अभी लंबित हैं। अदालत का फोकस इस बात पर है कि जिन लोगों ने मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर आपत्ति या दावा पेश किया है, उनकी अपीलों पर कार्रवाई किस स्थिति में है। इससे यह भी पता चलेगा कि अपीलीय स्तर पर मामलों का निपटारा किस गति से हो रहा है। क्या है Bengal SIR विवाद? Special Intensive Revision यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन जांच और उसे अपडेट करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाता है, ताकि पात्र लोगों के नाम सूची में बने रहें और गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जा सके। हालांकि, पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद भी काफी बढ़ गया है। विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए गए हैं कि प्रक्रिया के दौरान वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित न हों। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना चुनावी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। अपील करने वाले मतदाताओं के लिए मामला अहम SIR प्रक्रिया में जिन मतदाताओं के नाम या विवरण को लेकर आपत्ति सामने आती है, उनके लिए अपील की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अब यह सवाल अहम हो गया है कि दाखिल की गई अपीलों पर कितनी तेजी से फैसला हो रहा है। अदालत द्वारा ECI से डेटा मांगे जाने के बाद अब आयोग को मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अधीर रंजन चौधरी की याचिका क्यों महत्वपूर्ण? कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर SIR से जुड़े मामलों की अपीलों के निपटारे की मांग की है। उनका तर्क है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में समय पर फैसला होना जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लोगों के मतदान के अधिकार से है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपीलीय ट्रिब्यूनलों के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है। हालांकि, अदालत ने मामलों के निपटारे से जुड़ा डेटा मांगकर यह साफ कर दिया है कि वह पूरी प्रक्रिया की स्थिति जानना चाहती है। अब ECI के जवाब पर नजर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार है। आयोग की ओर से पेश किए जाने वाले आंकड़ों से यह स्पष्ट हो सकता है कि SIR से जुड़ी कितनी अपीलें सामने आईं, कितनों पर फैसला हो चुका है और कितने मामले अभी बाकी हैं। Bengal SIR Latest Update: पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई इसलिए अहम है, क्योंकि अब चर्चा केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े मामलों की सुनवाई और अपीलों के निपटारे पर भी अदालत की नजर है। आने वाली सुनवाई में ECI का जवाब इस मामले की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मणिपुर के संगीतकार विक्रम सिंह की हत्या पर राहुल गांधी बोले- पहचान के आधार पर हिंसा चिंता की बात

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मणिपुर के दिवंगत संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विक्रम सिंह की हत्या को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि विक्रम को कथित तौर पर सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह मणिपुर से आते थे। उन्होंने कहा कि किसी युवा की हत्या अपने आप में बड़ी त्रासदी है, लेकिन किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के आधार पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है। राहुल बोले- हिंसा और नफरत का इस्तेमाल गलत राहुल गांधी ने कहा कि इस घटना में हिंसा साफ तौर पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि घटना में हिंसा, नफरत और अहंकार नजर आता है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी सोच बढ़ रही है कि अगर कोई व्यक्ति ताकतवर है तो वह दूसरे के खिलाफ हिंसा कर सकता है। राहुल गांधी ने इस रवैये को गलत बताते हुए कहा कि ताकत के आधार पर किसी के साथ हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। 8 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल विक्रम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने मंगलवार को 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, घटना 6 सितंबर 2026 की रात करीब 11:30 बजे दक्षिण दिल्ली के आश्रम इलाके में हुई। मणिपुर मूल के 54 वर्षीय संगीतकार विक्रम सिंह अपने घर के नीचे डिलीवरी बॉय और स्थानीय ढाबे के कर्मचारियों के बीच हो रहे कथित शोर और हंगामे पर आपत्ति जताने गए थे। आरोप है कि इसके बाद डिलीवरी बॉय और ढाबे के कर्मचारियों ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट की। आरोपियों ने कथित तौर पर बिल्डिंग के अंदर उनका तीन मंजिल तक पीछा किया और लात-घूंसों से हमला किया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में भारी आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि गुरुवार को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, विक्रम सिंह की मौत सीने और पेट पर गंभीर शारीरिक चोटों के कारण हुए भारी आंतरिक रक्तस्राव से हुई। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर भेदभाव के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भारत ने बांग्लादेश को 40 रन से हराया, 10वीं बार विमेंस एशिया कप के फाइनल में पहुंचा

दुबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विमेंस टी20 एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 149 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड 10वीं बार एशिया कप के फाइनल में प्रवेश किया। शेफाली वर्मा ने खेली शानदार पारी भारत की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर 24 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 21 रन का योगदान दिया। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 149 रन बनाए। दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी 150 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सकी। दीप्ति शर्मा ने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 विकेट लिए और बांग्लादेश के बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाए रखा। आखिरी ओवरों में नंदनी शर्मा ने भी महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी। बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन तक ही पहुंच सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। अब फाइनल पर भारत की नजर इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एशिया कप के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज कर रहा है और अब उसकी नजर खिताब जीतने पर होगी।

Apple ने लॉन्च किया फोल्डेबल iPhone Duo, कीमत 4.50 लाख तक; iPhone 18 Pro सीरीज भी आई

Apple ने बुधवार रात आयोजित लॉन्च इवेंट ‘Surprise and Shine’ में कई नए डिवाइस पेश किए। कंपनी ने पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है। इसके साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max समेत कुल 6 नए डिवाइस पेश किए गए। iPhone Duo को कंपनी का अब तक का सबसे महंगा iPhone बताया जा रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए तक जाती है। iPhone Duo में 7.6 इंच की मेन स्क्रीन फोल्डेबल iPhone Duo में बाहर की तरफ 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। फोन खोलने पर अंदर 7.6 इंच की मेन स्क्रीन मिलती है। कंपनी के मुताबिक, यह अब तक किसी भी iPhone में दिया गया सबसे बड़ा डिस्प्ले है। फोन में पहली बार डुअल-बैटरी सिस्टम दिए जाने की जानकारी है। इसके अलावा इसमें फिजिकल SIM कार्ड का विकल्प नहीं होगा। iPhone Duo केवल e-SIM के जरिए काम करेगा। भारत में iPhone Duo की बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। iPhone 18 Pro और Pro Max में DSLR जैसी कैमरा टेक्नोलॉजी Apple ने इस बार iPhone 18 सीरीज में केवल प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए हैं। इन दोनों मॉडल्स में सबसे ज्यादा जोर कैमरा सिस्टम पर दिया गया है। इनके मेन कैमरे में प्रोफेशनल DSLR कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी दिए जाने का दावा किया गया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए, जबकि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए रखी गई है। इन दोनों मॉडल्स की बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी। AirPods 5 और नई Apple Watch भी लॉन्च Apple के लॉन्च इवेंट में iPhone के अलावा AirPods 5, Apple Watch Series 12 और Watch Ultra 4 भी पेश किए गए। कंपनी के नए प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा चर्चा फोल्डेबल iPhone Duo की है, जिसे Apple के स्मार्टफोन लाइनअप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

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