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Trump Secret Flight: ईरान के डर से Air Force One बना Decoy, Catering Truck से बदला विमान

ट्रंप (Trump) की तुर्किये से ब्रिटेन वापसी को लेकर एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े संभावित खतरे को देखते हुए ट्रंप की वापसी के लिए बेहद गोपनीय प्लान तैयार किया गया था। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे राष्ट्रपति की यात्रा का पूरा तरीका बदल दिया गया। ट्रंप पहले Air Force One में सवार होते हुए नजर आए। वहां मौजूद लोगों और पत्रकारों को भी यही लगा कि राष्ट्रपति इसी विमान से आगे की यात्रा करेंगे। लेकिन कुछ समय बाद ट्रंप को एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाली एक Catering Truck के जरिए चुपचाप दूसरे विमान तक ले जाया गया। Air Force One बना ‘Decoy’ रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की वास्तविक यात्रा को छिपाने के लिए Air Force One को एक तरह के Decoy यानी भ्रम पैदा करने वाले विमान के रूप में इस्तेमाल किया गया। इसका मकसद यह था कि ट्रंप की असली लोकेशन और उनके विमान की जानकारी आसानी से सार्वजनिक न हो। बताया गया कि ट्रंप को बाद में एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान C-32A तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्होंने इसी विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भरी। पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात इसकी गोपनीयता थी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे कुछ पत्रकारों को भी विमान बदलने की जानकारी पहले से नहीं थी। एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा और मूवमेंट इस तरह रखा गया कि ट्रंप के वास्तविक विमान की पहचान करना आसान न हो। यही वजह है कि कुछ समय तक यह भ्रम बना रहा कि राष्ट्रपति Air Force One से ही ब्रिटेन जा रहे हैं। Iran Threat को लेकर बढ़ी चिंता ट्रंप की इस Secret Flight को ईरान से जुड़े संभावित खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रंप की तुर्किये से वापसी को लेकर सुरक्षा अधिकारियों ने अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी थी। इसी वजह से यात्रा के अंतिम चरण में अचानक बदलाव किया गया। हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन के हर विवरण की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक तौर पर नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ट्रंप पर तत्काल किसी हमले की पुष्टि हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे संभावित सुरक्षा खतरे से जोड़कर बताया गया है। C-32A से ब्रिटेन पहुंचे ट्रंप रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप C-32A विमान से ब्रिटेन पहुंचे। वहीं Air Force One को भी आगे भेजा गया। इस तरह राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा और Air Force One की गतिविधि को अलग रखा गया। सुरक्षा के लिहाज से यह तरीका काफी असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, लेकिन इस बार विमान बदलने की जानकारी को भी बेहद सीमित रखा गया। कतर के विमान को लेकर भी चर्चा ट्रंप की तुर्किये यात्रा के दौरान कतर से मिले Boeing 747 विमान को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। यह विमान भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जाने की योजना का हिस्सा है। हालांकि, वापसी के दौरान पुराने Air Force One का इस्तेमाल किया गया। इसके पीछे सुरक्षा और विमान की तैयारी से जुड़ी चिंताओं को वजह बताया गया है। आखिर क्यों इतना बड़ा Secret Operation? राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी जानकारी अगर पहले से सार्वजनिक हो जाए तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में विमान बदलने और वास्तविक यात्रा को कुछ समय के लिए छिपाने जैसी रणनीति का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रंप के मामले में भी यही वजह सबसे अहम मानी जा रही है। Air Force One को सामने रखकर और राष्ट्रपति को दूसरे विमान से रवाना कर सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी वास्तविक लोकेशन को ज्यादा समय तक गोपनीय रखने की कोशिश की। Trump की Secret Flight ने बढ़ाई चर्चा ट्रंप की तुर्किये से यह गुप्त उड़ान अब अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। खासकर ईरान के साथ तनाव के बीच इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ने कई सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और ऑपरेशन से जुड़े कई सुरक्षा विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। लेकिन इतना साफ है कि ट्रंप की वापसी सामान्य यात्रा जैसी नहीं थी। Air Force One में दिखाई देने से लेकर Catering Truck के जरिए दूसरे विमान तक पहुंचने तक पूरी कहानी में सुरक्षा और गोपनीयता सबसे अहम रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon का कहर! MP समेत 6 राज्यों में लगातार बारिश, UP में 25 मकान पानी में डूबे

देश के कई राज्यों में मानसून (Monsoon) की बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में पिछले 24 घंटे से बारिश का दौर जारी है। लगातार बरसात के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, निचले इलाकों में पानी भर रहा है और कई जगहों पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में कुछ राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। MP में लगातार बारिश से बढ़ी परेशानी मध्य प्रदेश में बारिश का असर कई जिलों में दिखाई दे रहा है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, मंडला और डिंडौरी समेत कई इलाकों में तेज बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कुछ जगहों पर सड़कें पानी में डूबने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भोपाल में भी लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मंडला और डिंडौरी क्षेत्र में तेज बारिश का असर खास तौर पर देखने को मिला है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। UP में गंगा का जलस्तर बढ़ा, कई मकानों पर संकट उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 25 मकानों के पानी की चपेट में आने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं। प्रशासन लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है। Rajasthan में 12 इंच तक बारिश, बांधों पर बढ़ा दबाव राजस्थान में मानसून इस समय काफी सक्रिय है। राज्य के कई जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में करीब 12 इंच तक बारिश होने से सड़कों और निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। हाड़ौती क्षेत्र में बारिश का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। झालावाड़, बारां, बूंदी और कोटा समेत आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद बांधों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ गया है। कई जगह पानी की निकासी के लिए बांधों के गेट खोलने पड़े हैं। भारी बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, जबकि कई रास्तों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। किन राज्यों में बारिश का अलर्ट? मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी बारिश की संभावना जताई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिमी भारत तक मानसून सक्रिय रहने के आसार हैं। कई इलाकों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। नदियों और बांधों पर प्रशासन की नजर लगातार बारिश के बीच प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता नदियों और बांधों का बढ़ता जलस्तर है। जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और राहत दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे उफनती नदियों, नालों और तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें। अगले कुछ दिन भी अहम मानसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले कुछ दिन कई राज्यों के लिए अहम रहने वाले हैं। लगातार बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं अत्यधिक बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ा दिया है। फिलहाल लोगों को सलाह है कि बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें और अपने इलाके की स्थानीय Weather Alert को नजरअंदाज न करें। खासकर नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की अपील को गंभीरता से लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JSSC-CGL

JSSC-CGL Paper Leak Case: 15 अभ्यर्थियों से करोड़ों की डील? CID जांच में चौंकाने वाले दावे

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच JSSC-CGL को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच कर रही CID को गिरफ्तार किए गए अभय तिवारी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब उपलब्ध कराने के बदले मोटी रकम लिए जाने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले ने उन हजारों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है, जो महीनों और वर्षों की मेहनत के बाद सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लेने का दावा CID की पूछताछ से सामने आई जानकारी के मुताबिक, बोकारो में करीब 15 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये लिए गए थे। इस हिसाब से रकम लगभग 1.80 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले करीब 65 सवाल और उनके जवाब उपलब्ध कराए गए थे। कथित तौर पर उम्मीदवारों को इन्हें याद कराया गया, ताकि परीक्षा के दौरान उन्हें सीधा फायदा मिल सके। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पेपर लीक की जांच में एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर मामला सामने आने के बाद CID की जांच अब केवल अभय तिवारी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से जुड़े सवाल या सामग्री बाहर कैसे पहुंची और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। JSSC-CGL की परीक्षा प्रक्रिया में अलग-अलग एजेंसियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां थीं। ऐसे में जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि परीक्षा से जुड़े संवेदनशील काम तक किन लोगों की पहुंच थी। CID कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के साथ-साथ पैसों के लेन-देन की भी जानकारी जुटा रही है। अभय तिवारी पर पहले से भी उठते रहे हैं सवाल अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उसकी शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी पृष्ठभूमि भी जांच के केंद्र में आ गई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसने खुद भी कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। JSSC-CGL में उसकी रैंक और उसके परिवार के कुछ सदस्यों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। CID इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाकर जानकारी जुटा रही है। JPSC-JSSC विवाद के बीच बढ़ी छात्रों की बेचैनी झारखंड में पहले से ही JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। छात्र संगठनों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार विवाद सामने आने से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का भरोसा कमजोर हो रहा है। कई अभ्यर्थी पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी साबित होती है तो सरकार को प्रभावित उम्मीदवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। अब CID की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं? अभय तिवारी से पूछताछ के बाद जांच एजेंसी के सामने कई अहम सवाल हैं। मसलन, कथित तौर पर सवाल-जवाब कहां से मिले? इन्हें अभ्यर्थियों तक किसने पहुंचाया? कितने उम्मीदवारों को इसका फायदा मिला? और इस पूरे मामले में पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल CID की जांच जारी है। ऐसे में सामने आई जानकारियों को जांच में किए गए दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी भी आरोपी को अदालत से दोष सिद्ध होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता। छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल JSSC-CGL जैसी परीक्षा सिर्फ एक एग्जाम नहीं होती। इसके पीछे हजारों युवाओं की मेहनत, समय और उम्मीद जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो सबसे ज्यादा चिंता उन उम्मीदवारों को होती है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी है। अब सबकी नजर CID की अगली कार्रवाई और सरकार के फैसले पर है। जांच में अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह झारखंड की भर्ती व्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवालों का जवाब देना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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15 अगस्त

15 अगस्त से पहले Delhi High Alert! 19 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के Posters से बढ़ी Security

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 15 अगस्त को लाल किले पर होने वाले कार्यक्रम को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। इसी बीच पुलिस ने 19 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के पोस्टर सार्वजनिक किए हैं। इन पोस्टरों के जरिए लोगों से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को पुलिस तक पहुंचाने की अपील की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पोस्टरों में इंडियन मुजाहिदीन, अल-कायदा और खालिस्तानी संगठनों से जुड़े वांटेड आरोपियों की जानकारी शामिल है। पुलिस का मकसद इन लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। 15 अगस्त को लेकर Delhi में बढ़ाई गई Security स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग लाल किले और आसपास के इलाकों में पहुंचते हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी है। लाल किले के अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, बाजार, मेट्रो स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। 19 आतंकियों के Posters क्यों लगाए गए? सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने के पीछे पुलिस का एक अहम उद्देश्य आम लोगों को जागरूक करना है। अगर किसी व्यक्ति को पोस्टर में दिखाई गई तस्वीरों या जानकारी से संबंधित कोई विश्वसनीय सूचना मिलती है, तो वह उसे पुलिस तक पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को खुद पकड़ने या उससे पूछताछ करने के बजाय पुलिस को सूचना देना ज्यादा सुरक्षित है। सुरक्षा एजेंसियां इसी तरह की सतर्कता को स्वतंत्रता दिवस से पहले महत्वपूर्ण मान रही हैं। Delhi Metro में भी Extra Checking स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली मेट्रो में भी सुरक्षा जांच बढ़ाई गई है। यात्रियों की अतिरिक्त जांच के कारण कुछ स्टेशनों पर सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से थोड़ा पहले निकलें और स्टेशन पर सुरक्षा जांच के दौरान सुरक्षाकर्मियों का सहयोग करें। भीड़ को देखते हुए यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय रखना परेशानी से बचा सकता है। Red Fort पर खास नजर 15 अगस्त का मुख्य कार्यक्रम लाल किले में होता है। प्रधानमंत्री यहां से देश को संबोधित करते हैं और स्वतंत्रता दिवस समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल होते हैं। यही वजह है कि लाल किले और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा का स्तर काफी ऊंचा रखा जाता है। सुरक्षा एजेंसियां आयोजन स्थल के साथ-साथ आसपास के इलाकों पर भी नजर रख रही हैं, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। लोगों से भी सतर्क रहने की अपील दिल्ली पुलिस की सुरक्षा तैयारियों के बीच आम लोगों की भूमिका भी अहम हो जाती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी संदिग्ध वस्तु, व्यक्ति या गतिविधि को नजरअंदाज न करें और इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। हालांकि, अफवाहों से बचना भी उतना ही जरूरी है। किसी व्यक्ति के बारे में केवल शक के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय सूचना को पुलिस तक पहुंचाना बेहतर है। 15 अगस्त को लेकर दिल्ली में कड़ी निगरानी स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच Coordination बढ़ाया गया है और महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है। 19 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के Posters जारी होने और सुरक्षा जांच बढ़ने के बाद राजधानी में सतर्कता और बढ़ गई है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता यही है कि 15 अगस्त का राष्ट्रीय समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NDA

Parliament में NDA vs Congress: Jharkhand Students के मुद्दे पर Rahul Gandhi घिरे

झारखंड में छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और इसी मुद्दे ने संसद में भी सियासी गर्मी बढ़ा दी है। मंगलवार को संसद परिसर में NDA और कांग्रेस सांसदों के बीच प्रदर्शन और बयानबाजी देखने को मिली। BJP ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि वह झारखंड क्यों नहीं गए, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने इसका जवाब दिया। मामला उस वक्त और गरमा गया जब NDA सांसदों ने संसद परिसर में मार्च किया। इस दौरान झारखंड के छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष पर राजनीति करने के आरोप लगाए गए। BJP ने पूछा- राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं गए? संसद में प्रदर्शन के दौरान BJP सांसदों ने राहुल गांधी को लेकर सवाल खड़े किए। BJP नेताओं का कहना था कि अगर कांग्रेस वास्तव में झारखंड के छात्रों की मांगों के साथ खड़ी है, तो राहुल गांधी को खुद छात्रों के बीच जाकर उनकी बात सुननी चाहिए। BJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर अलग-अलग रवैया अपनाती है। पार्टी नेताओं ने झारखंड के छात्रों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। Priyanka Gandhi ने दिया सीधा जवाब BJP के सवालों पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से पहले ही मुलाकात कर चुके हैं। प्रियंका के इस बयान के बाद BJP के उस सवाल पर कांग्रेस का पक्ष सामने आ गया, जिसमें राहुल गांधी के झारखंड नहीं जाने को मुद्दा बनाया जा रहा था। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं और उनके साथ हो रहे व्यवहार पर भी सवाल कर चुके हैं। Jharkhand में क्यों चल रहा है Student Protest? झारखंड में छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और अपनी अन्य मांगों को लेकर सरकार से जवाब चाहते हैं। कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन के कारण राज्य में माहौल गर्म है। छात्रों की कोशिश है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत करे और कोई ठोस समाधान निकाला जाए। विधानसभा मार्च के दौरान बढ़ा तनाव छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की कार्रवाई के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से प्रदर्शन के तरीके और विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए। संसद में आमने-सामने आए NDA और Congress झारखंड छात्र आंदोलन को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। NDA सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि छात्रों की आवाज उठाना राजनीति नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं को सामने लाना है। पार्टी लगातार सरकार से छात्रों की मांगों पर ध्यान देने की मांग कर रही है। आगे क्या होगा? झारखंड में छात्रों का आंदोलन जिस तरह लंबा खिंच रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है। अब नजर सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत पर है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन-सी पार्टी किस पर आरोप लगा रही है। असली मुद्दा उन हजारों छात्रों का है जो भर्ती परीक्षाओं और नौकरी की तैयारी में अपना समय और मेहनत लगा रहे हैं। छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत और पारदर्शी प्रक्रिया से निकलता है या फिर आंदोलन आगे बढ़ता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand

Jharkhand Student Protest: सरकार से दूसरी बातचीत भी बेनतीजा, 15वें दिन जारी आंदोलन

झारखंड (Jharkhand) में परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शन के 15वें दिन छात्रों और सरकार के बीच दूसरी बार बातचीत हुई, लेकिन इस बैठक में भी किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, सरकार ने छात्रों की शिकायतें और सुझाव सीधे सुनने के लिए ई-मेल और फीडबैक नंबर जारी करने की पहल की है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और जिन मुद्दों को लेकर वे सड़क पर हैं, उनका जल्द समाधान निकाला जाए। दूसरी बैठक में भी नहीं बनी बात छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हुई दूसरी बैठक में परीक्षा से जुड़े विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों ने अपनी मांगें और समस्याएं सरकार के सामने रखीं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत जरूर हुई, लेकिन ऐसा कोई फैसला नहीं हो सका जिससे आंदोलन खत्म करने पर सहमति बनती। बैठक के बाद अब छात्रों से सुझाव और शिकायतें लेने के लिए ई-मेल तथा फीडबैक नंबर उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। सरकार की यह पहल छात्रों की समस्याओं को सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अहम मानी जा रही है। 15वें दिन भी सड़कों पर छात्र परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार 15वें दिन जारी है। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन ने परीक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्र चाहते हैं कि उनकी शिकायतों पर केवल बातचीत तक सीमित न रहकर ठोस कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में छात्रों के भविष्य का सवाल होता है, इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। Feedback के लिए Email और नंबर जारी सरकार की ओर से छात्रों के सुझाव लेने के लिए ई-मेल और फीडबैक नंबर जारी करना बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब छात्र अपनी शिकायतें और सुझाव इन माध्यमों के जरिए सरकार तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि, छात्रों की मुख्य मांगों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार को मिलने वाले फीडबैक के बाद आगे क्या कदम उठाया जाता है। आंदोलन खत्म होगा या जारी रहेगा? दूसरी बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। एक तरफ सरकार बातचीत और फीडबैक के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगली बातचीत में कोई ऐसा रास्ता निकल पाएगा, जिससे 15 दिनों से चल रहा यह Student Protest खत्म हो सके। Jharkhand Student Protest से जुड़े इस मामले में छात्रों और सरकार के अगले कदम पर अब सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dolphin Typhoon

Japan में 200 Kmph का तूफान: Dolphin Typhoon से बढ़ा खतरा, Toyota ने 9 Plants में रोका Production

Japan में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। देश के कई हिस्सों में Dolphin Typhoon का असर तेजी से बढ़ रहा है। करीब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहे इस तूफान को लेकर प्रशासन ने कई इलाकों में अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश और तेज हवाओं के खतरे को देखते हुए करीब 2.6 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दिया गया है। तूफान के असर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जापान की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Toyota ने भी अपनी कई Manufacturing Units में काम रोकने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने सुरक्षा कारणों से 9 फैक्ट्रियों में उत्पादन अस्थायी रूप से बंद किया है। 200 Kmph की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान Dolphin Typhoon के कारण Japan के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को समुद्र और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। तेज हवाओं की वजह से पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन व्यवस्था बाधित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। 2.6 लाख लोगों को सुरक्षित जगह जाने का आदेश तूफान के संभावित खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने करीब 2.6 लाख लोगों के लिए Evacuation Order जारी किया है। लोगों से कहा गया है कि वे मौसम की स्थिति बिगड़ने से पहले सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाएं। खास तौर पर निचले इलाकों और उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है, जहां बाढ़ या भूस्खलन का खतरा हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। Toyota ने 9 Factories में रोका Production Dolphin Typhoon का असर जापान के Industrial Sector पर भी दिखाई दे रहा है। देश की बड़ी कार निर्माता कंपनी Toyota ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी 9 फैक्ट्रियों में काम रोक दिया है। फैक्ट्रियों में Production रोकने का फैसला कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित Transport Disruptions को देखते हुए लिया गया है। मौसम सामान्य होने और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद उत्पादन दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा। Transport और Daily Life पर भी असर तूफान के कारण जापान में सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है। कई इलाकों में लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। तेज हवाओं और बारिश के चलते Flights और अन्य Transport Services पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता इस समय लोगों को सुरक्षित रखना है। लोगों से सतर्क रहने की अपील जापानी अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक मौसम और प्रशासनिक अपडेट पर भरोसा करें। लोगों को जरूरी सामान तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है। फिलहाल Dolphin Typhoon के कारण जापान में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले घंटों में तूफान की दिशा और रफ्तार के आधार पर इसके प्रभाव में बदलाव हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

India पर 100% Tariff लगाएगा America? Trump के 500% Plan से बढ़ी चिंता

अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर Tariff यानी आयात शुल्क को लेकर हलचल बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट से रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक अहम बिल पास होने के बाद भारत पर भी संभावित टैरिफ का मुद्दा चर्चा में आ गया है। सबसे ज्यादा चर्चा 100% Tariff को लेकर हो रही है। वहीं, इस पूरे मामले में 500% टैरिफ का जिक्र भी सामने आया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर भारत पर कितना शुल्क लग सकता है और क्या अमेरिका वाकई भारतीय सामान पर 100% Tariff लगाने जा रहा है? आइए आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला। Russia से Oil खरीदना बना बड़ी वजह भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। रूस से मिलने वाला तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी रूस पर यूक्रेन युद्ध के कारण आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहते हैं। अमेरिका की कोशिश है कि रूस से तेल और दूसरी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाया जाए, ताकि रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई प्रभावित हो। यही वजह है कि भारत जैसे बड़े रूसी तेल खरीदारों पर भी अमेरिकी टैरिफ कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। US Senate ने क्या किया? अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में उन देशों के खिलाफ भी आर्थिक कार्रवाई का रास्ता बनाया गया है, जो रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा कारोबार करते हैं। प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त Tariff लगाने का अधिकार मिल सकता है। यहीं से भारत को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सीनेट से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100% टैरिफ आज से लागू हो गया है। क्या India पर तुरंत लगेगा 100% Tariff? नहीं। फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद भी कानून बनने की प्रक्रिया बाकी है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन को यह तय करना होगा कि इस प्रावधान का इस्तेमाल कब और किस देश के खिलाफ किया जाए। इसलिए अभी भारत पर 100% टैरिफ को संभावित खतरा कहना ज्यादा सही है, न कि लागू हो चुका शुल्क। फिर 500% Tariff की चर्चा क्यों? 500% टैरिफ का आंकड़ा रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़े अमेरिकी प्रस्तावों के संदर्भ में सामने आया है। ऐसे प्रावधानों में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर बहुत ऊंचा शुल्क लगाने की शक्ति देने की बात की गई है। लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है। 500% Tariff को भारत पर लागू होने वाला तय शुल्क नहीं माना जा सकता। वहीं मौजूदा चर्चा में भारत के लिए 100% तक अतिरिक्त टैरिफ की संभावना ज्यादा सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। India-US Trade पर कितना असर पड़ेगा? अगर भविष्य में भारत पर भारी टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर दोनों देशों के कारोबार पर दिखाई दे सकता है। अमेरिका में भारतीय सामान की कीमत बढ़ सकती है। इसका असर भारतीय exporters पर पड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो सकती है। दूसरी तरफ अमेरिका के लिए भी भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे। इसलिए इतना बड़ा टैरिफ सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए चुनौती बन सकता है। भारत के सामने Oil और Trade का Balance भारत के लिए मामला केवल व्यापार का नहीं है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल देश की energy security में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर बातचीत काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। Trump का अगला कदम क्या होगा? अब सबकी नजर अमेरिकी कानून की आगे की प्रक्रिया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर है। यदि कानून अंतिम रूप लेता है और अमेरिकी प्रशासन इसका इस्तेमाल करता है, तो भारत समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100% Tariff तय हो चुका है। फिलहाल यह एक संभावित कार्रवाई है, जिस पर आगे अमेरिकी प्रशासन का फैसला महत्वपूर्ण होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Salman Khan

Salman Khan की Security में तैनात पुलिसकर्मी की मौत, Galaxy Apartment के बाहर मचा हड़कंप

मुंबई से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। बॉलीवुड अभिनेता Salman Khan के बांद्रा स्थित Galaxy Apartment के बाहर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कॉन्स्टेबल की अचानक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ी और वह अचानक जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स में पुलिसकर्मी की मौत की वजह suspected heart attack बताई जा रही है। हालांकि, मौत का सही कारण मेडिकल जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। Salman Khan की Security में तैनात थे पुलिसकर्मी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक पुलिसकर्मी की ड्यूटी Salman Khan के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई थी। अभिनेता की सुरक्षा पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही है। Lawrence Bishnoi Gang की धमकियों के बाद Salman Khan की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। इसी वजह से Galaxy Apartment के आसपास भी पुलिस की अतिरिक्त तैनाती और निगरानी रखी जाती है। बताया जा रहा है कि पुलिस कॉन्स्टेबल सामान्य तरीके से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत पुलिसकर्मी को अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उनकी जांच की। हालांकि, उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को भी झकझोर दिया। ड्यूटी के दौरान इस तरह अचानक हुई मौत से आसपास कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। Lawrence Bishnoi की धमकियों के बाद बढ़ी थी सुरक्षा Salman Khan लंबे समय से Lawrence Bishnoi Gang की धमकियों के चलते कड़ी सुरक्षा में रहते हैं। अप्रैल 2024 में उनके Galaxy Apartment के बाहर गोलीबारी की घटना के बाद सुरक्षा को और मजबूत किया गया था। इसके बाद अभिनेता की सुरक्षा में पुलिस के साथ-साथ अन्य सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई। Galaxy Apartment के आसपास आने-जाने वालों पर नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाती है। हालांकि, पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत को किसी हमले या Lawrence Bishnoi Gang की गतिविधि से जोड़ने वाली कोई जानकारी सामने नहीं आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। मौत की असली वजह पर आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पुलिसकर्मी की मौत को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। शुरुआती तौर पर हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है, लेकिन अंतिम कारण मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। एक तरफ Salman Khan की सुरक्षा के कारण Galaxy Apartment हमेशा सुर्खियों में रहता है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की अचानक मौत ने इस घटना को और गंभीर बना दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Arunachal

China ने बदले नाम तो India ने उठाया बड़ा कदम, Arunachal की 27 जगहें Map पर होंगी अलग

अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को मैप पर अलग तरीके से प्रदर्शित करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन कई बार भारतीय क्षेत्र के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश कर चुका है। भारत ने साफ किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है और किसी दूसरे देश की ओर से वहां के स्थानों के नाम बदलने से जमीनी स्थिति या भारत के अधिकार में कोई बदलाव नहीं होता। 27 जगहों को Map पर अलग दिखाने का फैसला केंद्र के फैसले के तहत अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को मानचित्र पर अलग पहचान के साथ दिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों की प्रशासनिक और भौगोलिक पहचान को स्पष्ट रखना है। सरकार का यह कदम चीन की उस रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिसके तहत वह अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के लिए अपने हिसाब से नाम जारी करता रहा है। भारत पहले भी चीन की ऐसी कोशिशों को खारिज करता रहा है। China कई बार बदल चुका है नाम अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की ओर से नाम बदलने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। चीन समय-समय पर राज्य के अलग-अलग स्थानों के लिए नए नामों की सूची जारी करता रहा है। चीन इन इलाकों को अपने नक्शे में अलग तरीके से पेश करता है और इन्हें दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताने का दावा करता है। भारत ने हर बार इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारतीय पक्ष का कहना रहा है कि केवल नाम बदल देने से किसी क्षेत्र पर दावा मजबूत नहीं हो जाता। भारत का रुख साफ, Arunachal Pradesh भारत का हिस्सा अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर का महत्वपूर्ण राज्य है। चीन के साथ इसकी लंबी सीमा लगती है, जिसके कारण यह इलाका रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जाता है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि Arunachal Pradesh भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। राज्य के किसी भी इलाके के नाम में बाहरी स्तर पर बदलाव को भारत स्वीकार नहीं करता। केंद्र का ताजा कदम भी इसी रुख को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। नाम बदलने से नहीं बदलती जमीन की हकीकत किसी जगह का नाम बदलना या उसे किसी दूसरे नाम से नक्शे में दिखाना एक राजनीतिक संदेश जरूर हो सकता है, लेकिन इससे उस क्षेत्र की वास्तविक स्थिति अपने आप नहीं बदलती। भारत की ओर से चीन की ऐसी गतिविधियों पर पहले भी कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर किए जाने वाले इस तरह के प्रयास वास्तविकता को बदल नहीं सकते। यही वजह है कि 27 स्थानों को भारतीय मानचित्र पर स्पष्ट पहचान देने के फैसले को सिर्फ नक्शे से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट diplomatic message के तौर पर भी देखा जा रहा है। Border Areas पर भारत की नजर भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद लंबे समय से बना हुआ है। ऐसे में सीमा से लगे इलाकों की प्रशासनिक मौजूदगी, बुनियादी ढांचे और भौगोलिक पहचान को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज इलाकों में सड़क, संचार और अन्य सुविधाओं को बढ़ाने पर भी पिछले कुछ वर्षों में जोर दिया गया है। 27 स्थानों को Map पर अलग पहचान देने का फैसला इसी व्यापक रणनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। China को भारत का स्पष्ट संदेश केंद्र के इस फैसले से एक बात साफ है—अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत अपने रुख में कोई बदलाव नहीं करने वाला है। चीन अगर किसी भारतीय क्षेत्र के नाम बदलता है तो भारत उसे स्वीकार नहीं करता। आखिरकार नक्शे पर लिखे नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण उस क्षेत्र की वास्तविक प्रशासनिक स्थिति और वहां की जमीन पर मौजूद हकीकत होती है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत इसी आधार पर लगातार अपना पक्ष मजबूती से रखता आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मणिपुर के संगीतकार विक्रम सिंह की हत्या पर राहुल गांधी बोले- पहचान के आधार पर हिंसा चिंता की बात

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मणिपुर के दिवंगत संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विक्रम सिंह की हत्या को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि विक्रम को कथित तौर पर सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह मणिपुर से आते थे। उन्होंने कहा कि किसी युवा की हत्या अपने आप में बड़ी त्रासदी है, लेकिन किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के आधार पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है। राहुल बोले- हिंसा और नफरत का इस्तेमाल गलत राहुल गांधी ने कहा कि इस घटना में हिंसा साफ तौर पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि घटना में हिंसा, नफरत और अहंकार नजर आता है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी सोच बढ़ रही है कि अगर कोई व्यक्ति ताकतवर है तो वह दूसरे के खिलाफ हिंसा कर सकता है। राहुल गांधी ने इस रवैये को गलत बताते हुए कहा कि ताकत के आधार पर किसी के साथ हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। 8 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल विक्रम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने मंगलवार को 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, घटना 6 सितंबर 2026 की रात करीब 11:30 बजे दक्षिण दिल्ली के आश्रम इलाके में हुई। मणिपुर मूल के 54 वर्षीय संगीतकार विक्रम सिंह अपने घर के नीचे डिलीवरी बॉय और स्थानीय ढाबे के कर्मचारियों के बीच हो रहे कथित शोर और हंगामे पर आपत्ति जताने गए थे। आरोप है कि इसके बाद डिलीवरी बॉय और ढाबे के कर्मचारियों ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट की। आरोपियों ने कथित तौर पर बिल्डिंग के अंदर उनका तीन मंजिल तक पीछा किया और लात-घूंसों से हमला किया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में भारी आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि गुरुवार को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, विक्रम सिंह की मौत सीने और पेट पर गंभीर शारीरिक चोटों के कारण हुए भारी आंतरिक रक्तस्राव से हुई। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर भेदभाव के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भारत ने बांग्लादेश को 40 रन से हराया, 10वीं बार विमेंस एशिया कप के फाइनल में पहुंचा

दुबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विमेंस टी20 एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 149 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड 10वीं बार एशिया कप के फाइनल में प्रवेश किया। शेफाली वर्मा ने खेली शानदार पारी भारत की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर 24 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 21 रन का योगदान दिया। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 149 रन बनाए। दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी 150 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सकी। दीप्ति शर्मा ने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 विकेट लिए और बांग्लादेश के बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाए रखा। आखिरी ओवरों में नंदनी शर्मा ने भी महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी। बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन तक ही पहुंच सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। अब फाइनल पर भारत की नजर इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एशिया कप के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज कर रहा है और अब उसकी नजर खिताब जीतने पर होगी।

Apple ने लॉन्च किया फोल्डेबल iPhone Duo, कीमत 4.50 लाख तक; iPhone 18 Pro सीरीज भी आई

Apple ने बुधवार रात आयोजित लॉन्च इवेंट ‘Surprise and Shine’ में कई नए डिवाइस पेश किए। कंपनी ने पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है। इसके साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max समेत कुल 6 नए डिवाइस पेश किए गए। iPhone Duo को कंपनी का अब तक का सबसे महंगा iPhone बताया जा रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए तक जाती है। iPhone Duo में 7.6 इंच की मेन स्क्रीन फोल्डेबल iPhone Duo में बाहर की तरफ 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। फोन खोलने पर अंदर 7.6 इंच की मेन स्क्रीन मिलती है। कंपनी के मुताबिक, यह अब तक किसी भी iPhone में दिया गया सबसे बड़ा डिस्प्ले है। फोन में पहली बार डुअल-बैटरी सिस्टम दिए जाने की जानकारी है। इसके अलावा इसमें फिजिकल SIM कार्ड का विकल्प नहीं होगा। iPhone Duo केवल e-SIM के जरिए काम करेगा। भारत में iPhone Duo की बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। iPhone 18 Pro और Pro Max में DSLR जैसी कैमरा टेक्नोलॉजी Apple ने इस बार iPhone 18 सीरीज में केवल प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए हैं। इन दोनों मॉडल्स में सबसे ज्यादा जोर कैमरा सिस्टम पर दिया गया है। इनके मेन कैमरे में प्रोफेशनल DSLR कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी दिए जाने का दावा किया गया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए, जबकि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए रखी गई है। इन दोनों मॉडल्स की बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी। AirPods 5 और नई Apple Watch भी लॉन्च Apple के लॉन्च इवेंट में iPhone के अलावा AirPods 5, Apple Watch Series 12 और Watch Ultra 4 भी पेश किए गए। कंपनी के नए प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा चर्चा फोल्डेबल iPhone Duo की है, जिसे Apple के स्मार्टफोन लाइनअप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

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