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CJI Surya Kant

CJI Surya Kant Controversy: NALSAR छात्रों के विरोध से मचा बवाल, BCI ने पलटा Enrolment Order

NALSAR University का विवाद अब सिर्फ एक Convocation तक सीमित नहीं रहा है। CJI Surya Kant को समारोह में Chief Guest बनाए जाने पर कुछ छात्रों की आपत्ति के बाद शुरू हुआ मामला पहले Bar Council of India (BCI) तक पहुंचा और फिर Supreme Court में भी चर्चा का विषय बन गया। सबसे ज्यादा चर्चा BCI के उस फैसले की हुई, जिसमें NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates के Enrolment पर रोक लगाने की बात कही गई थी। हालांकि घटनाक्रम ज्यादा देर तक एक जैसा नहीं रहा। BCI ने बाद में अपना फैसला बदलते हुए छात्रों को Enrolment की अनुमति दे दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने भी इस पूरे मामले में BCI की भूमिका पर सवाल उठाए। CJI सूर्यकांत को Chief Guest बनाने पर क्यों हुआ विवाद? NALSAR के Convocation समारोह में CJI सूर्यकांत को Chief Guest के तौर पर आमंत्रित किया गया था। इसी को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं और CJI को बुलाने के फैसले पर सवाल उठाए। मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब छात्रों की आपत्ति को लेकर BCI ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय से पूरे घटनाक्रम की जानकारी और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई। BCI ने 2026 बैच के Enrolment पर लगाई रोक विवाद के बीच BCI की ओर से पहले ऐसा निर्देश जारी किया गया कि NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates का Advocate के रूप में Enrolment अगले आदेश तक रोका जाए। इस फैसले से छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई। वजह साफ थी—किसी विवाद में पूरे बैच के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी। सवाल यह भी उठा कि अगर विरोध में केवल कुछ छात्र शामिल थे, तो उसका असर पूरे बैच पर क्यों पड़े? फिर BCI ने बदला अपना फैसला विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने शुरुआती आदेश में बदलाव किया। परिषद ने साफ किया कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को उनकी पसंद के State Bar Council में Enrolment कराने की अनुमति दी जाएगी। बाद में BCI ने 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद करने की बात भी कही। परिषद का कहना था कि बड़ी संख्या में छात्र इस पूरे घटनाक्रम में शामिल नहीं थे और किसी छात्र को ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए, जिसमें उसकी कोई भूमिका न हो। इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिली, जिनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद अब Professional Career शुरू होने वाला था। Supreme Court में CJI ने BCI से पूछा- दखल क्यों? मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों और उनके बीच का मामला किस तरह BCI के हस्तक्षेप का विषय बन गया। CJI की टिप्पणी ने मामले का रुख ही बदल दिया। अब चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं थी कि Convocation में किसे Chief Guest बनाया जाए, बल्कि यह सवाल भी सामने आया कि छात्रों को असहमति जताने और अपनी बात रखने की कितनी स्वतंत्रता है। छात्रों के Career पर असर का मुद्दा भी अहम इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू छात्रों का भविष्य रहा। Law की पढ़ाई पूरी करने के बाद Advocate के रूप में Enrolment किसी भी Law Graduate के Career का अहम पड़ाव होता है। ऐसे में पूरे बैच के Enrolment पर रोक की खबर ने कई छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी। बाद में BCI के फैसले में बदलाव के बाद स्थिति सामान्य हुई। विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं BCI ने 2026 बैच के खिलाफ अपनी कार्रवाई वापस ले ली है, लेकिन पूरे विवाद ने कई बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। एक तरफ छात्रों के विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार की बात है, तो दूसरी तरफ Professional Regulatory Body के अधिकार और उसकी भूमिका को लेकर बहस जारी है। NALSAR विवाद ने यह भी दिखाया कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी मुद्दे पर छात्रों की असहमति कितनी जल्दी बड़े संस्थागत विवाद का रूप ले सकती है। NALSAR विवाद से क्या निकला? फिलहाल सबसे बड़ी राहत 2026 बैच के Law Graduates को मिली है। Enrolment पर लगी रोक हट चुकी है और उनके Advocate बनने का रास्ता साफ है। वहीं, Supreme Court में CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद यह मामला छात्रों के अधिकार, विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और BCI के अधिकार क्षेत्र से जुड़े व्यापक सवालों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। यानी NALSAR का यह विवाद सिर्फ एक Convocation का मामला नहीं रह गया है। इसने छात्रों की आवाज, संस्थागत अधिकार और Professional Regulation के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर शुरू कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Census 2027

India Census 2027: इस बार पूछे जाएंगे 40 Questions, Caste से लेकर Education तक होगी जानकारी

देश में अगली जनगणना यानी Census 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गृह मंत्रालय की ओर से Population Enumeration Phase के लिए सवालों की सूची अधिसूचित कर दी गई है। इस बार जनगणना में लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार, शिक्षा, रोजगार, धर्म, जाति, भाषा और पहचान से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि जनगणना का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कई योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यक्रमों की दिशा तय करती है। Census 2027 में क्या-क्या पूछा जाएगा? जनगणना अधिकारी परिवार के सदस्यों से उनकी व्यक्तिगत और सामाजिक स्थिति से जुड़े सवाल पूछेंगे। इसमें व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र जैसी सामान्य जानकारियां शामिल होंगी। इसके अलावा वैवाहिक स्थिति, विवाह की उम्र, पति या पत्नी का नाम और माता-पिता से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। Religion और Caste की भी होगी जानकारी इस बार Census 2027 में धर्म और जाति से जुड़े सवाल खास चर्चा में हैं। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित जानकारी के साथ जाति का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही व्यक्ति की मातृभाषा और दूसरी भाषाओं के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इससे देश की सामाजिक और भाषाई तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी। Education और Job की स्थिति भी पूछी जाएगी जनगणना में लोगों की शिक्षा और रोजगार की स्थिति को भी दर्ज किया जाएगा। व्यक्ति ने कितनी पढ़ाई की है, वह पिछले वर्ष किसी आर्थिक गतिविधि में शामिल था या नहीं और उसका काम किस तरह का है—इनसे जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। जो लोग नौकरी या व्यवसाय में नहीं हैं, उनकी स्थिति से जुड़ी जानकारी भी प्रश्नावली का हिस्सा होगी। महिलाओं से बच्चों को लेकर सवाल महिलाओं से उनके जीवन में जन्मे बच्चों और वर्तमान में जीवित बच्चों से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। पिछले एक साल में बच्चे के जन्म से जुड़ा सवाल भी पूछा जाएगा। इन आंकड़ों से देश में Birth Rate और Population Growth के बदलते रुझानों को समझने में मदद मिल सकती है। Aadhaar और अन्य ID की जानकारी भी शामिल Census 2027 की प्रश्नावली में पहचान से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी मांगी जाएगी। इसमें Aadhaar, Voter ID, Passport और Driving Licence से संबंधित सवाल शामिल हैं। इसके अलावा मोबाइल नंबर और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भी प्रश्नावली में रखी गई है। COVID-19 vaccination से संबंधित सवाल भी शामिल किए गए हैं। दो चरणों में पूरी होगी जनगणना Census 2027 की पूरी प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में Houselisting and Housing Census के जरिए घरों और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। दूसरे चरण में Population Enumeration होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। सामान्य क्षेत्रों में Population Enumeration फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। Digital होगी Census 2027 इस बार की जनगणना की एक बड़ी खासियत इसका Digital Format है। सरकार ने डिजिटल माध्यम से जानकारी जुटाने और Self-Enumeration की सुविधा पर भी जोर दिया है। यानी आने वाली जनगणना में तकनीक की भूमिका पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रहने वाली है। क्यों महत्वपूर्ण है Census 2027? जनगणना से मिलने वाले आंकड़े देश की मौजूदा स्थिति की एक बड़ी तस्वीर सामने रखते हैं। कितने लोग पढ़े-लिखे हैं, कितने लोग रोजगार से जुड़े हैं, आबादी किस तरह के क्षेत्रों में रहती है और समाज में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं—इन सवालों के जवाब जनगणना के आंकड़ों से मिलते हैं। इसलिए Census 2027 आम नागरिक के लिए सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं है। घर पर जब जनगणना अधिकारी पहुंचे, तो सही और सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Awarapan 2

Emraan Hashmi की Awarapan 2 ने मचाया Craze, Shivam Pandit की वापसी पर थिएटर में जमकर तालियां

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार Emraan Hashmi ने बड़े पर्दे पर अपने चर्चित किरदार Shivam Pandit के रूप में वापसी कर ली है। 14 अगस्त को रिलीज हुई Awarapan 2 को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता थी। फिल्म देखने के बाद सामने आ रहे शुरुआती reactions में कहीं तालियों की बात हो रही है तो कहीं पुराने Awarapan की यादों की। 19 साल बाद फिर दिखा शिवम पंडित का अंदाज 2007 में आई Awarapan उस समय बॉक्स ऑफिस पर बड़ा कमाल नहीं कर पाई थी, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म ने दर्शकों के बीच खास जगह बना ली। इमरान हाशमी का शिवम पंडित वाला किरदार और फिल्म का संगीत आज भी उनके फैन्स को याद है। अब करीब 19 साल बाद Awarapan 2 के साथ वही किरदार एक नई कहानी लेकर लौटा है। यही वजह है कि फिल्म की रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर इसका खासा buzz देखने को मिल रहा था। Emraan Hashmi की स्क्रीन प्रेजेंस बनी Highlight Awarapan 2 देखने के बाद शुरुआती दर्शकों की सबसे ज्यादा तारीफ Emraan Hashmi को लेकर सामने आई है। शिवम पंडित के किरदार में उनकी intensity और emotional scenes ने पुराने फैन्स को फिर से जोड़ने का काम किया है। कुछ दर्शकों ने सोशल मीडिया पर फिल्म को entertaining बताया, जबकि कई फैन्स ने इमरान की वापसी को franchise की सबसे बड़ी ताकत माना। थिएटर में कुछ खास सीन्स के दौरान तालियों और सीटियों की आवाज भी सुनने को मिली। Action के साथ Emotion भी फिल्म में सिर्फ action और revenge पर फोकस नहीं किया गया है। कहानी में emotional moments भी हैं, जो किरदारों की परिस्थितियों को समझने का मौका देते हैं। यही balance Awarapan 2 को सिर्फ एक action movie बनने से रोकता है। हालांकि कुछ दर्शकों को कहानी की रफ्तार कुछ जगह धीमी भी लगी है। इसलिए audience reaction पूरी तरह एकतरफा नहीं कहा जा सकता। Music ने फिर दिलाई पुराने Awarapan की याद Awarapan की पहचान उसकी कहानी के साथ-साथ उसके music से भी रही है। सीक्वल में भी संगीत को काफी अहमियत दी गई है। पुराने फैन्स के लिए फिल्म के गानों और emotional background music में पुरानी फिल्म की झलक मिलती है। यही nostalgia कई दर्शकों के लिए Awarapan 2 का सबसे खास हिस्सा बन रहा है। Disha Patani समेत ये सितारे भी अहम रोल में फिल्म में Emraan Hashmi के साथ Disha Patani और Shabana Azmi जैसे कलाकार भी नजर आ रहे हैं। निर्देशन की जिम्मेदारी Nitin Kakkar ने संभाली है। फिल्म की कहानी को इस तरह आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है कि पुराने दर्शकों को शिवम पंडित से जुड़ाव महसूस हो और नए दर्शकों के लिए भी कहानी अपने दम पर खड़ी रहे। क्या Awarapan 2 है पैसा वसूल? शुरुआती audience reactions को देखकर कहा जा सकता है कि Emraan Hashmi के फैन्स को फिल्म ने निराश नहीं किया है। खासकर शिवम पंडित की वापसी, action और emotional scenes को पसंद किया जा रहा है। हालांकि फिल्म को लेकर अंतिम फैसला अभी जल्दबाजी होगा। आने वाले दिनों में Box Office Collection और दर्शकों की लंबी प्रतिक्रिया से पता चलेगा कि Awarapan 2 सिर्फ nostalgia तक सीमित रहती है या एक बड़ी theatrical hit बनती है। Awarapan 2 Verdict अगर आप Emraan Hashmi के फैन हैं या 2007 वाली Awarapan से खास लगाव रखते हैं, तो शिवम पंडित को दोबारा बड़े पर्दे पर देखना आपके लिए खास अनुभव हो सकता है। शुरुआती माहौल में फिल्म को लेकर excitement साफ नजर आ रही है और फिलहाल कई दर्शकों की जुबान पर एक ही बात है—“शिवम पंडित की वापसी पैसा वसूल लग रही है।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk का बड़ा बयान: 2047 तक विकसित देश बनने के लिए चाहिए सही Leadership

भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने देश के भविष्य, राजनीतिक नेतृत्व और मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। वांगचुक का कहना है कि भारत के पास आगे बढ़ने की पूरी क्षमता है, लेकिन केवल आर्थिक आंकड़ों से देश को विकसित राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए बेहतर नेतृत्व, मजबूत संस्थाएं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। 2047 के लक्ष्य पर वांगचुक ने जताई चिंता सोनम वांगचुक ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में भारत 2047 तक एक विकसित और सम्मानित राष्ट्र बन पाएगा। उन्होंने भारत की तुलना कुछ एशियाई देशों से करते हुए कहा कि कई छोटे देश भी अपने नागरिकों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर सुधारने में तेजी से आगे बढ़े हैं। उन्होंने श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों का उदाहरण देते हुए भारत को अपनी विकास यात्रा का ईमानदारी से आकलन करने की जरूरत बताई। वांगचुक का संदेश साफ था—भारत के पास संसाधन और प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत उस दिशा और नेतृत्व की है जो इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर सके। ‘Peaceful Revolution’ की जरूरत क्यों बता रहे हैं? वांगचुक ने देश में बदलाव के लिए ‘Peaceful Revolution’ यानी शांतिपूर्ण क्रांति की बात कही। हालांकि, उनके मुताबिक इसका मतलब हिंसा या टकराव नहीं है। वह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवस्था में सुधार की बात कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे नेताओं और जनप्रतिनिधियों को आगे लाने पर विचार करें जो ईमानदार, निडर, जिम्मेदार और देशहित को प्राथमिकता देने वाले हों। उनका मानना है कि केवल सरकार बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। बदलाव तब आता है जब नागरिक भी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक होते हैं। Political Leadership पर उठाए सवाल वांगचुक ने राजनीतिक व्यवस्था में नेतृत्व के चयन को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि देश को ऐसे लोगों की जरूरत है जो व्यक्तिगत फायदे से ऊपर उठकर लंबे समय के लिए राष्ट्रहित में फैसले ले सकें। उन्होंने लोगों से ऐसे संभावित नेताओं के नाम सुझाने को कहा, जिन पर उन्हें भरोसा है। इसके जरिए वह देश के अलग-अलग हिस्सों से अच्छे नेतृत्व की तलाश और उस पर चर्चा शुरू करना चाहते हैं। ‘Second Independence Movement’ का दिया नाम वांगचुक ने अपनी पहल को ‘India’s Second Independence Movement’ का नाम दिया है। उनका उद्देश्य इसे किसी एक पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ अभियान बनाने के बजाय व्यवस्था और नेतृत्व में सुधार की व्यापक पहल के रूप में पेश करना है। उन्होंने लोगों से अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में चर्चा बढ़ाने की अपील की। सिर्फ Economy नहीं, लोगों की जिंदगी भी मायने रखती है विकसित देश बनने की चर्चा अक्सर GDP, निवेश और Infrastructure जैसे आंकड़ों के आसपास घूमती है। लेकिन वांगचुक के सवाल का दूसरा पहलू आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, पर्यावरण, पारदर्शी प्रशासन और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं भी किसी देश के विकास की अहम पहचान होती हैं। यही वजह है कि उनका बयान सिर्फ 2047 के लक्ष्य पर सवाल नहीं है, बल्कि यह पूछता है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता कैसा होना चाहिए। अब बहस सिर्फ 2047 की नहीं, रास्ते की भी है भारत के लिए 2047 एक बड़ा लक्ष्य है। लेकिन सोनम वांगचुक के बयान ने इस लक्ष्य के साथ एक अहम सवाल जोड़ दिया है—क्या केवल लक्ष्य तय करना काफी है या उसे हासिल करने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है? उनकी ‘Peaceful Revolution’ की अपील पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस से पहले उनका संदेश देश में नेतृत्व, विकास और नागरिक भागीदारी को लेकर एक नई चर्चा जरूर खड़ी करता है। आखिर 2047 का भारत कैसा होगा, यह सिर्फ सरकारों के फैसलों से तय नहीं होगा। इसमें देश के करोड़ों नागरिकों की सोच, भागीदारी और जिम्मेदारी की भी बड़ी भूमिका होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chamoli

Chamoli Tunnel हादसा: 22 मजदूर थे अंदर, 7 की मौत के बाद 3 को बचाने में जुटीं Rescue Teams

उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम हुए Chamoli Tunnel Accident ने एक बार फिर पहाड़ों में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माणाधीन विष्णुगढ़-पीपलकोटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 3 मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अचानक सुरंग में घुसा पानी और मलबा घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे की बताई जा रही है। सुरंग के अंदर काम चल रहा था, तभी अचानक पानी और मलबा तेजी से अंदर आ गया। कुछ ही देर में सुरंग का रास्ता प्रभावित हो गया और कई मजदूर अंदर फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। NDRF, SDRF, ITBP और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरंग के अंदर पानी का स्तर बढ़ने और मलबे के कारण बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 22 मजदूर थे सुरंग के अंदर अधिकारियों के मुताबिक हादसे के समय सुरंग में कुल 22 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 3 अन्य अभी लापता हैं। कुछ घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भी पहुंचाया गया है। रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुंचा जाए। पानी और मलबा लगातार चुनौती बना हुआ है, इसलिए बचाव अभियान सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। CM पुष्कर सिंह धामी पहुंचे घटनास्थल हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और रेस्क्यू टीमों से बातचीत कर अभियान की जानकारी ली और सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ तेजी से बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। Rescue Operation में जुटी कई एजेंसियां सुरंग के भीतर हालात चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बचाव अभियान लगातार जारी है। NDRF और SDRF के साथ ITBP तथा अन्य एजेंसियां मौके पर काम कर रही हैं। पानी निकालने और मलबा हटाने के लिए उपलब्ध उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सुरंग में पानी का स्तर बढ़ने से रेस्क्यू टीमों के लिए अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद फंसे मजदूरों को जल्द सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी है। हिमालयी क्षेत्र में Tunnel Safety फिर सवालों में चमोली का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हिमालयी इलाकों में बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करता है। इस क्षेत्र की पहाड़ी संरचना, भौगोलिक अस्थिरता और अचानक बदलती परिस्थितियां सुरंग निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। फिलहाल पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर है। सात मजदूरों की मौत से उनके परिवारों में मातम है, जबकि सुरंग में लापता तीन मजदूरों के परिवारों को अब भी उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan

India-Pakistan Tension: पानी और कश्मीर पर शहबाज शरीफ का बड़ा बयान, बोले- रुख नहीं बदलेगा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को पानी के मुद्दे पर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से पहले दिए अपने संबोधन में शरीफ ने कहा कि उनके देश के पानी की हर बूंद बेहद अहम है और इसे लेकर किसी भी तरह का खतरा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन इसे उसकी कमजोरी समझना भारी पड़ सकता है। शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब India-Pakistan Relations पहले से ही पानी, कश्मीर और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण हैं। पानी के मुद्दे पर भारत को सीधा संदेश इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि पानी पाकिस्तान के लिए एक Red Line है। उनका कहना था कि अगर पाकिस्तान के जल अधिकारों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई तो देश अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जवाब देगा। शरीफ ने साथ ही कहा कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता। उनका कहना था कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है, लेकिन शांति की इस इच्छा को कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। Kashmir पर रुख बदलने को तैयार नहीं पाकिस्तान अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने Kashmir Issue का भी जिक्र किया। उन्होंने साफ किया कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर लंबे समय से सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों में रहा है। दोनों देशों के इस मामले में अलग-अलग दावे और नीतियां हैं। ऐसे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का ताजा बयान एक बार फिर इस विवाद को सुर्खियों में ले आया है। Asim Munir की Leadership की तारीफ शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की नेतृत्व क्षमता की भी तारीफ की। उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए इसे पाकिस्तान की सैन्य क्षमता से जोड़कर पेश किया। शरीफ ने कहा कि अगर भविष्य में पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती दी गई, तो देश उसका मजबूती से सामना करेगा। उनके इस बयान को पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच तालमेल के संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। Yaadgar-e-Fatah का उद्घाटन शहबाज शरीफ का यह बयान यादगार-ए-फतह के उद्घाटन कार्यक्रम में आया। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पाकिस्तान ने इस स्मारक को अपने सैनिकों और संघर्ष के दौरान जान गंवाने वालों की याद से जोड़ा है। कार्यक्रम में देश की सुरक्षा और सैन्य क्षमता को लेकर भी संदेश दिए गए। India-Pakistan Tension पर फिर बढ़ी नजर पानी और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान की ओर से आए ताजा बयानों ने India-Pakistan Tension को फिर चर्चा में ला दिया है। खासकर सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद काफी गंभीर रहे हैं। शहबाज शरीफ के बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि पाकिस्तान पानी और कश्मीर जैसे मुद्दों पर अपने पुराने रुख से पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालांकि, दोनों देशों के बीच भविष्य में बातचीत और कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की संभावना बनी रहती है।
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Air India

Air India Flight: Phuket-Delhi विमान ने खोया Control, 4 सेकेंड में 300 फीट नीचे गिरा

Phuket से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट AI2379 में 4 अगस्त को अचानक ऐसा पल आया, जिसने विमान में बैठे यात्रियों और Crew की सांसें थाम दीं। उड़ान के दौरान विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया और शुरुआती जांच में सामने आया है कि लगभग 4 सेकेंड तक विमान के कुछ अहम Flight Controls ने काम नहीं किया। Airbus की Preliminary Analysis ने इस घटना को सामान्य Turbulence से कहीं ज्यादा गंभीर Technical Incident बताया है। 4 सेकेंड तक नहीं मिला Control Input का जवाब Airbus के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, घटना के दौरान विमान के तीनों Hydraulic Systems में दबाव से जुड़ी समस्या सामने आई। इसका असर Elevator और Aileron जैसे महत्वपूर्ण Flight Controls पर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, First Officer ने विमान को नियंत्रित करने के लिए Nose-Down Input दिया, लेकिन उस समय Flight Control Surfaces ने तुरंत अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। करीब चार सेकेंड बाद सिस्टम ने दोबारा काम करना शुरू किया और पायलट विमान को संभालने में सफल रहे। इसी दौरान Autopilot भी Disconnect हुआ था। अचानक 300 फीट नीचे आया विमान AI2379 में 137 यात्री और 8 Crew Members सवार थे। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई। घटना में यात्रियों और Crew को चोटें आईं और विमान को सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतार लिया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में घायलों की संख्या में अंतर सामने आया है, जबकि हालिया Airbus Analysis में कुल 24 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। एक मिनट में कई Warning Alerts घटना के बाद सामने आए Maintenance Data ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान के सिस्टम में कम समय के भीतर Hydraulic System, Autopilot और Flight Controls से जुड़े कई Warning Alerts दर्ज हुए थे। इससे जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल है कि क्या वास्तव में तीनों Hydraulic Systems में एक साथ खराबी आई थी या किसी Sensor, Pressure Switch अथवा दूसरे Technical Component की वजह से गलत संकेत मिले। फिलहाल Final Cause तय नहीं हुआ है। शुरुआत में Turbulence माना गया, जांच में बदली तस्वीर घटना के शुरुआती विवरण में इसे Turbulence से जोड़कर देखा गया था। लेकिन जैसे-जैसे Flight Data और Maintenance Records की जानकारी सामने आई, Technical Failure का पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया। Airbus ने आगे की जांच के लिए Air India से Aircraft Maintenance Records और अन्य तकनीकी जानकारी मांगी है। AAIB इस मामले की जांच कर रहा है और Airbus तथा फ्रांस की BEA भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं। Pilot Drug Test ने भी बढ़ाई चिंता इस पूरे मामले में Pilot से जुड़ा एक अलग घटनाक्रम भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, फ्लाइट के Captain का Confirmatory Drug Test Positive आया। इसके बाद Air India ने Air India और Air India Express के सभी Pilots की Mandatory Substance Screening शुरू करने का फैसला किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक Pilot के Test Result और विमान में आई Technical Failure के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। दोनों पहलुओं की जांच अलग-अलग की जा रही है। Air India ने सभी Pilots की Screening शुरू की Air India का यह फैसला मौजूदा Regulatory Requirements से आगे बढ़कर लिया गया है। कंपनी ने अपने Group Pilots की Screening शुरू करने की जानकारी दी है। इसका उद्देश्य Flight Safety को मजबूत करना और यात्रियों का भरोसा बनाए रखना बताया गया है। अब Final Investigation Report का इंतजार Phuket-Delhi Flight AI2379 की घटना ने Aviation Safety को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तीनों Hydraulic Systems में वास्तव में एक साथ समस्या आई थी, या किसी Component/Sensor की खराबी ने ऐसी स्थिति पैदा की? फिलहाल Airbus की Preliminary Analysis से यह जरूर सामने आया है कि विमान ने कुछ सेकेंड के लिए अहम Flight Controls की क्षमता खो दी थी। लेकिन घटना की पूरी वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए AAIB की Final Investigation Report का इंतजार करना होगा। एक सामान्य उड़ान में महज कुछ सेकेंड भी कितने अहम हो सकते हैं, AI2379 की यह घटना उसकी गंभीर याद दिलाती है। विमान आखिरकार सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया, लेकिन 300 फीट की अचानक गिरावट और करीब 4 सेकेंड तक Control Response न मिलना अब Aviation Investigators के लिए सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Rate: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 10 ग्राम Gold और 1 किलो Silver का नया भाव

सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए गुरुवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। लगातार तेजी के बाद घरेलू बाजार में Gold और Silver Price में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब ₹972 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर लगभग ₹1.52 लाख पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत में ₹3,414 प्रति किलो की कमी आई और यह करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो रह गई। बाजार में आई इस नरमी का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले दिनों में शादी, त्योहार या निवेश के लिए सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। Gold Price Today: सोने के भाव में आई नरमी हालिया तेजी के बाद सोने की कीमतों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold Rate में कमजोरी देखी गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें फिलहाल कीमती धातुओं की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। भारत में सोने की कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात लागत, स्थानीय मांग और अंतरराष्ट्रीय Gold Rate भी घरेलू भाव पर असर डालते हैं। 24 कैरेट Gold Rate कितना है? गुरुवार को 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। हालांकि, अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां कीमत कुछ ऊपर-नीचे हो सकती है। आभूषण खरीदते समय यह भी ध्यान रखें कि बाजार में दिखाई जाने वाली सोने की कीमत और दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत एक जैसी नहीं होती। GST, Making Charges और अन्य शुल्क जुड़ने के बाद बिल की राशि बढ़ सकती है। 22 कैरेट और 18 कैरेट Gold का क्या भाव? सोने की कीमत उसकी शुद्धता के हिसाब से बदलती है। इसलिए सोना खरीदते समय सिर्फ प्रति 10 ग्राम कीमत देखना काफी नहीं है। कैरेट और हॉलमार्क जरूर जांचें। Silver Price Today: चांदी भी ₹3,414 सस्ती सोने के साथ चांदी के बाजार में भी दबाव रहा। गुरुवार को चांदी करीब ₹3,414 प्रति किलो टूटकर ₹2.34 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Silver Price में कमजोरी देखने को मिली। चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। चांदी की कीमत में आई यह गिरावट उन खरीदारों के लिए अहम है, जो निवेश के साथ-साथ सिक्के, बर्तन या अन्य चांदी के सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं। क्यों बदलते रहते हैं Gold-Silver Rates? सोने और चांदी की कीमतें किसी एक वजह से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीद, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और घरेलू मांग जैसे कई फैक्टर मिलकर भाव को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि सुबह और शाम के बीच भी Gold-Silver Rate में बदलाव देखने को मिल सकता है। खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी बात अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल बाजार में चल रहे रेट पर भरोसा न करें। खरीदारी से पहले BIS Hallmark, कैरेट, प्रति ग्राम कीमत, Making Charges और GST की जानकारी जरूर लें। एक दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना भी ठीक नहीं होगा कि कीमतें अब लगातार नीचे ही जाएंगी। कीमती धातुओं का बाजार तेजी से बदलता है, इसलिए खरीदारी का फैसला अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से करना बेहतर है। Gold-Silver Price पर नजर क्यों जरूरी? सोना और चांदी भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं से भी जुड़े हैं। ऐसे में कुछ रुपये की गिरावट भी बड़ी खरीदारी करने वालों के लिए मायने रखती है। फिलहाल बाजार में आई नरमी ने खरीदारों को जरूर थोड़ी राहत दी है, लेकिन आगे के भाव पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nanded Gurudwara

Nanded Gurudwara Attack: सुखबीर बादल पर हमले से मचा हड़कंप, पुलिस ने संदिग्ध पकड़ा

महाराष्ट्र के नांदेड़ (Nanded Gurudwara) में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि बादल गुरुद्वारा परिसर में मौजूद थे, तभी एक व्यक्ति ने उन पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान उनके हाथ में चोट आई, जबकि उन्हें बचाने की कोशिश में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद गुरुद्वारा परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालते हुए संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। गुरुद्वारा परिसर में अचानक हुआ हमला जानकारी के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में धार्मिक सेवा के सिलसिले में मौजूद थे। इसी दौरान एक व्यक्ति उनके नजदीक पहुंचा और हमला कर दिया। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया, जिससे स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका। हमले में बादल के हाथ में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद उनकी मेडिकल जांच कराई गई। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था संभालने के दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। हमलावर को पुलिस ने हिरासत में लिया घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमला किस वजह से किया गया और इसके पीछे आरोपी की क्या मंशा थी। फिलहाल जांच एजेंसियां घटनास्थल से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस की ओर से हमले के मकसद को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल नांदेड़ के प्रमुख धार्मिक स्थल में सुखबीर बादल जैसे बड़े राजनीतिक नेता की मौजूदगी के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संदिग्ध व्यक्ति सुरक्षा घेरे के इतने करीब कैसे पहुंचा। घटना के बाद गुरुद्वारा परिसर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों की निगरानी में आगे की कार्रवाई जारी है। सुखबीर बादल पर पहले भी हो चुका है हमला सुखबीर सिंह बादल इससे पहले दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में भी हमले की कोशिश का सामना कर चुके हैं। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया था। नांदेड़ की ताजा घटना ने एक बार फिर सुखबीर बादल की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर VIP सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल सुखबीर बादल की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार उन्हें चोट लगी है और घटना की जांच जारी है। पुलिस की जांच के बाद ही हमले की पूरी वजह और घटना से जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi-Shah Meet: कनिमोझी ने बढ़ाई सियासी हलचल, Tea Party से Rahul Gandhi और Akhilesh रहे दूर

संसद के गलियारों में इन दिनों राजनीतिक हलचल कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से जुड़ी एक चाय पार्टी चर्चा में आ गई है। इस दौरान विपक्ष की ओर से डीएमके सांसद कनिमोझी की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव वहां नजर नहीं आए। कनिमोझी की मौजूदगी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि संसद के भीतर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार तीखी बहस देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में किसी अनौपचारिक आयोजन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं का साथ दिखाई देना राजनीतिक चर्चा को हवा दे देता है। कनिमोझी की मौजूदगी ने खींचा ध्यान डीएमके सांसद कनिमोझी लंबे समय से संसद में पार्टी की प्रमुख आवाजों में शामिल रही हैं। केंद्र की नीतियों पर डीएमके का कई मुद्दों पर अलग रुख रहा है। इसके बावजूद चाय पार्टी में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी। हालांकि, किसी अनौपचारिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन में बदलाव का संकेत नहीं माना जा सकता। इसे सामान्य राजनीतिक संवाद के तौर पर भी देखा जा सकता है। Rahul Gandhi और Akhilesh Yadav क्यों नहीं आए? इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू राहुल गांधी और अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी है। दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह कहना ठीक नहीं होगा कि दोनों नेताओं ने किसी रणनीति के तहत कार्यक्रम से दूरी बनाई। संसद में विपक्षी दल कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन हर कार्यक्रम में सभी नेताओं की मौजूदगी जरूरी नहीं होती। संसद के बाहर भी जारी है Political Buzz संसद का मौजूदा सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव का गवाह रहा है। एक ओर सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। ऐसे में मोदी और शाह के साथ चाय पार्टी में कनिमोझी की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को एक नया विषय दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। क्या यह विपक्षी रणनीति में बदलाव का संकेत है? फिलहाल इसका जवाब देना जल्दबाजी होगी। किसी एक बैठक या चाय पार्टी के आधार पर विपक्षी दलों के राजनीतिक समीकरण का आकलन करना सही नहीं होगा। असली तस्वीर संसद में इन दलों के रुख और आने वाले दिनों में उनकी रणनीति से साफ होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि Modi-Shah Tea Party में Kanimozhi की मौजूदगी और Rahul Gandhi-Akhilesh Yadav की गैरमौजूदगी ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात को लेकर कोई राजनीतिक बयान सामने आता है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी-पुतिन फिर एक कार में साथ दिखे, बख्तरबंद Aurus Senat में प्रदर्शनी तक किया सफर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद दोनों नेताओं की एक तस्वीर चर्चा में है। द्विपक्षीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन एक ही कार में सवार होकर इनोप्रोम प्रदर्शनी तक पहुंचे। दोनों नेताओं के साथ सफर करने वाली यह कार रूसी राष्ट्रपति की बख्तरबंद Aurus Senat बताई जा रही है। दोनों नेताओं का एक साथ कार में जाना भारत-रूस संबंधों के बीच उनकी व्यक्तिगत बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चा का विषय बना। 12 दिन पहले भी साथ किया था सफर प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन इससे पहले करीब 12 दिन पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में भी एक साथ कार में सफर करते नजर आए थे। दोनों नेताओं के बीच इस तरह की अनौपचारिक मुलाकातें और साथ यात्रा करना भारत-रूस संबंधों के अलावा दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद को भी दर्शाता है। विदेशी नेताओं के साथ पहले भी कार में सफर कर चुके हैं मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का किसी विदेशी नेता के साथ कार में सफर करने का यह पहला मौका नहीं है। 2014 के बाद वह कई वैश्विक नेताओं के साथ कार में यात्रा कर चुके हैं। इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई विदेशी नेता शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मोदी अब तक करीब 11 बार विदेशी नेताओं के साथ कार राइड कर चुके हैं। मोदी और पुतिन की शुक्रवार की कार राइड को भी दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और नेताओं के बीच सहज संवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है।

इंदौर में सांची पॉइंट पर बड़ा हादसा, गर्म मावा कर्मचारियों पर गिरा; एक की मौत, दूसरा गंभीर

इंदौर। मांगलिया इलाके में स्थित सांची दुग्ध संघ के सांची पॉइंट पर शुक्रवार शाम पेड़े बनाने की यूनिट में बड़ा हादसा हो गया। हादसे में दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि दूसरे का अस्पताल में उपचार जारी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ज्यादा भाप बनने के कारण स्टीमर में ब्लास्ट हुआ और पेड़े बनाने के लिए इस्तेमाल हो रही कड़ाही पलट गई। कड़ाही में मौजूद गर्म मावा कर्मचारियों पर जा गिरा। एक कर्मचारी की मौत, दूसरा गंभीर घायल एसीपी पराग सैनी के मुताबिक, हादसे में विनोद कुमार चडार, निवासी सागर, और तेज सिंह पुत्र सज्जन सिंह, निवासी सिंगापुर टाउनशिप, गंभीर रूप से घायल हुए थे। इलाज के दौरान विनोद कुमार चडार की मौत हो गई। पुलिस ने उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए बॉम्बे अस्पताल भेजा है। वहीं तेज सिंह का अस्पताल में इलाज चल रहा है। भाप ज्यादा होने से कढ़ाई पलटने की बात सांची दुग्ध संघ के CEO विकास मिश्रा ने हादसे को दुर्घटना बताया है। उनके मुताबिक, यूनिट में भाप अधिक बनने के कारण कड़ाही अचानक पलट गई, जिससे गर्म मावा दोनों कर्मचारियों पर गिर गया। उन्होंने बताया कि हादसे के समय यूनिट में अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे, लेकिन उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई। सांची संघ ने लापरवाही से किया इनकार हादसे के बाद सांची दुग्ध संघ में लापरवाही के सवाल भी उठे हैं। हालांकि, CEO विकास मिश्रा ने किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि मशीनों का हर महीने मेंटेनेंस किया जाता है। उनका कहना है कि इससे पहले किसी कर्मचारी ने मशीन में खराबी, पुरानी मशीन होने या किसी तरह की लापरवाही को लेकर शिकायत नहीं की थी। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

अब QR स्कैन किए बिना होगा UPI पेमेंट, फोन को POS मशीन पर टैप करते ही ₹5 हजार तक भुगतान

मुंबई। UPI से पेमेंट करने का तरीका जल्द और आसान होने जा रहा है। अब यूजर्स को हर बार QR कोड स्कैन करने और UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होगी। NFC सपोर्ट वाले स्मार्टफोन को मर्चेंट की POS मशीन पर टैप करके पेमेंट किया जा सकेगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने शुक्रवार को UPI को और सुविधाजनक बनाने के लिए दो नए फीचर लॉन्च किए। इनमें ‘UPI Tap & Pay’ और AI आधारित ‘My UPI’ प्लेटफॉर्म शामिल हैं। मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इन फीचर्स को रोलआउट किया। UPI Tap & Pay ऐसे करेगा काम अभी UPI पेमेंट के लिए यूजर को QR कोड स्कैन करना होता है। इसके बाद राशि दर्ज करने और UPI PIN डालने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। नई UPI Tap & Pay सुविधा में NFC सपोर्ट वाले स्मार्टफोन को मर्चेंट की सपोर्टेड POS मशीन पर सिर्फ टैप करना होगा। इसके बाद पेमेंट की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। हालांकि, यह सुविधा केवल उन POS मशीनों पर काम करेगी जो इस तकनीक को सपोर्ट करती हैं। ₹5 हजार तक के पेमेंट में PIN की जरूरत नहीं नई सुविधा के तहत ₹5,000 तक के पेमेंट के लिए UPI PIN की जरूरत नहीं होगी। इससे अधिक राशि के ट्रांजैक्शन के लिए यूजर को POS मशीन की स्क्रीन या अपने UPI ऐप पर PIN दर्ज करना होगा। बिना इंटरनेट के भी हो सकेगा पेमेंट UPI Tap & Pay में फोन का मोबाइल डेटा या Wi-Fi चालू होना जरूरी नहीं होगा। POS मशीन का इंटरनेट कनेक्शन पेमेंट को नेटवर्क से कनेक्ट करेगा। Tokenization से सुरक्षित रहेगा डेटा पेमेंट के दौरान यूजर की बैंक डिटेल या UPI ID सीधे मर्चेंट के साथ साझा नहीं होगी। UPI ऐप एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड टोकन तैयार करेगा, जिसके जरिए ट्रांजैक्शन पूरा होगा। इससे संवेदनशील भुगतान जानकारी को सीधे साझा करने की जरूरत कम होगी। My UPI में AI से मिलेगी पेमेंट की जानकारी NPCI ने दूसरा फीचर ‘My UPI’ नाम से लॉन्च किया है। यह AI आधारित प्लेटफॉर्म है, जो यूजर को एक ही इंटरफेस पर UPI से जुड़ी कई जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। FiMI मॉडल पर आधारित है My UPI My UPI को NPCI के इन-हाउस FiMI यानी Finance Model for India स्मॉल लैंग्वेज मॉडल पर आधारित बताया गया है। यह प्लेटफॉर्म UPI ट्रांजैक्शन, एक्टिव ऑटो-पे मेंडेट और पेमेंट हिस्ट्री को एक जगह देखने की सुविधा देगा। संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर Safety Switch My UPI में Safety Switch फीचर भी दिया गया है। इसके जरिए यूजर को किसी संदिग्ध या संभावित धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की स्थिति में डेबिट ट्रांजैक्शन रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ऑटोमेटेड चार्जबैक सिस्टम के जरिए फेल हुए ट्रांजैक्शन के रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने का प्रावधान किया गया है। 24 घंटे AI कस्टमर सपोर्ट My UPI का AI आधारित सपोर्ट सिस्टम यूजर्स को 24 घंटे गाइडेंस देने के लिए तैयार किया गया है। यह अलग-अलग भाषाओं में UPI से जुड़े सवालों और समस्याओं को समझकर सहायता उपलब्ध कराने का काम करेगा। क्या होता है Small Language Model? Small Language Model यानी SLM आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऐसा मॉडल होता है जिसे किसी खास क्षेत्र के डेटा और जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाता है। NPCI का FiMI मॉडल पेमेंट और वित्तीय सुरक्षा से जुड़े सवालों को समझने और उनका जवाब देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने IDA को जमा किए 10 लाख रुपए, 19 सितंबर को होगा ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम

इंदौर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 19 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के मैदान को लेकर चल रही अनुमति की प्रक्रिया के बीच कांग्रेस ने करीब 10 लाख रुपए की राशि IDA के खाते में जमा कर दी है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बताया कि कांग्रेस ने 17, 18 और 19 सितंबर के लिए मैदान किराए पर लिया है। इसके लिए RTGS के माध्यम से IDA के खाते में राशि जमा की गई है। उनका कहना है कि अब अनुमति को लेकर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए और मंगलवार को आधिकारिक अनुमति मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस ने IDA को जमा किए 10.08 लाख रुपए शुक्रवार को राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के घर कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी भी मौजूद रहे। बैठक में कार्यक्रम स्थल के लिए IDA को 10 लाख 8 हजार 175 रुपए जमा करने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस ने इसके लिए पहले ही मैदान के लिए आवेदन कर रखा था। कांग्रेस इस आयोजन स्थल को कार्यक्रम के दौरान ‘भारत जोड़ो मैदान’ नाम देने की तैयारी में है। सुबह से रात तक जारी है रजिस्ट्रेशन बैठक में राहुल गांधी के कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सुबह से रात तक जारी रखी जा रही है। पार्टी का फोकस अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर है। रीजनल पार्क के सामने वाले मैदान को लेकर था विवाद राहुल गांधी का कार्यक्रम रीजनल पार्क के सामने स्थित IDA के मैदान में प्रस्तावित है। कांग्रेस ने मैदान के उपयोग के लिए IDA से अनुमति मांगी थी। IDA की ओर से कांग्रेस को मैदान के लिए 10 लाख 8 हजार 175 रुपए जमा करने की बात कही गई थी। इसके बाद कांग्रेस ने RTGS के जरिए राशि जमा कर दी है। चिंटू चौकसे बोले- कार्यक्रम में अड़ंगा डालने का प्रयास बैठक से पहले शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने आरोप लगाया कि भाजपा को राहुल गांधी के कार्यक्रमों से परेशानी है और उनके कार्यक्रमों में बाधा डालने का प्रयास किया जा रहा है। चौकसे ने कहा कि जहां-जहां राहुल गांधी के कार्यक्रम होते हैं, वहां किसी न किसी तरीके से उन्हें रोकने या बाधा डालने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि इंदौर में भी मैदान को लेकर कानून और नियमों का हवाला दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रीजनल पार्क में पहले भी कई राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। पटाखा दुकानों का उदाहरण देकर कांग्रेस ने उठाए सवाल चिंटू चौकसे ने रीजनल पार्क में पटाखा दुकानों के लिए दी जाने वाली जगह का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि पटाखा दुकानों के लिए करीब 15 दिनों तक कमर्शियल रेट पर जगह दी जाती है और इसके लिए करीब 2 लाख रुपए लिए जाते हैं। चौकसे के मुताबिक, कांग्रेस से एक दिन के कार्यक्रम के लिए पहले साढ़े 10 लाख रुपए, फिर ढाई लाख और अब करीब सवा लाख रुपए की राशि की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी है और राहुल गांधी के कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगी।

भोपाल में ट्रैफिक ACP के घर 10 लाख की चोरी, ड्यूटी पर थे अफसर; परिवार गया था उज्जैन

भोपाल। राजधानी भोपाल में चोरों ने ट्रैफिक ACP विजय दुबे के घर को निशाना बनाकर करीब 10 लाख रुपए का माल चोरी कर लिया। वारदात के समय ACP ड्यूटी पर थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य उज्जैन गए हुए थे। चोर घर से नकदी और सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हो गए। मामला कोलार थाना क्षेत्र के डीके-2 इलाके का है। पुलिस के मुताबिक, बदमाश कार से पहुंचे थे और घर के बाहर लगे गेट का ताला तोड़ने के बाद अंदर दाखिल हुए। दो गेट के ताले तोड़कर घर में घुसे चोर एसीपी आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, बदमाशों ने पहले घर के बाहरी गेट का ताला तोड़ा। इसके बाद अंदर के गेट का लॉक तोड़कर मकान में प्रवेश किया। घर में घुसने के बाद बदमाशों ने कमरों और अलमारियों की तलाशी ली। इसके बाद नकदी और सोने-चांदी के जेवर समेटकर मौके से फरार हो गए। देर रात ड्यूटी से लौटे ACP विजय दुबे ने घर का ताला टूटा देखा। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। CCTV फुटेज में संदिग्ध नजर आए पुलिस ने घटनास्थल की जांच के साथ फोरेंसिक टीम को भी बुलाया। टीम ने मौके से फिंगरप्रिंट सहित अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने पर कुछ संदिग्ध नजर आए हैं। पुलिस उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरों ने वारदात से पहले घर की रेकी की थी या उन्हें परिवार के घर से बाहर होने की जानकारी पहले से थी। कैश में लोन से बची रकम भी शामिल पुलिस के अनुसार, घर से चोरी हुई नकदी में करीब 6 लाख रुपए ऐसी रकम थी, जो पर्सनल लोन से बची हुई थी। बताया गया है कि ACP विजय दुबे ने कुछ महीने पहले करीब 20 लाख रुपए का पर्सनल लोन लिया था। पुलिस अब इस नकदी से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारी भी जुटा रही है, ताकि चोरी हुई रकम की पुष्टि की जा सके। रिश्तेदारों के जेवर भी चोरी चोर सिर्फ ACP और उनके परिवार के जेवर ही नहीं ले गए, बल्कि घर में रखे भाई-भाभी और ससुराल पक्ष के सदस्यों के आभूषण भी चोरी कर ले गए। चोरी हुए सामान में सोने और चांदी के जेवर शामिल हैं। इनकी वास्तविक कीमत का आकलन संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज मिलने के बाद किया जाएगा। VIP ड्यूटी की जानकारी थी या पहले से की गई थी रेकी? वारदात के समय ACP विजय दुबे मुख्यमंत्री की VIP ड्यूटी में तैनात थे और घर खाली था। ऐसे में पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या बदमाशों को ACP के ड्यूटी शेड्यूल की जानकारी थी या उन्होंने पहले से घर की रेकी की थी। CCTV फुटेज और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। बिल मिलने के बाद स्पष्ट होगी चोरी की कुल कीमत पुलिस के मुताबिक, फिलहाल चोरी गए जेवरों की पूरी कीमत स्पष्ट नहीं है। ACP की ओर से जेवरों के बिल और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद वास्तविक कीमत का आकलन किया जाएगा। फिलहाल पुलिस करीब 10 लाख रुपए के माल की चोरी मानकर मामले की जांच कर रही है। गांधीनगर से कोलार-मिसरोद तक चोरियों से पुलिस की चुनौती बढ़ी पुलिस के अनुसार, वारदात में शामिल बदमाशों ने इससे पहले भोपाल के गांधीनगर से लेकर कोलार और मिसरोद इलाके में भी चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। लगातार सामने आ रही चोरी की वारदातों को देखते हुए क्राइम ब्रांच समेत करीब 10 थानों की पुलिस सक्रिय है और संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

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