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Indonesia में Earthquake का बड़ा झटका: 7.7 तीव्रता, Tsunami Alert के बाद सुरक्षित जगह पहुंचे लोग

इंडोनेशिया (Indonesia) में शनिवार, 15 अगस्त 2026 की सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने Flores Island और आसपास के इलाकों में दहशत फैला दी। जोरदार झटकों के बाद अधिकारियों ने Tsunami Warning जारी की, जिसके चलते तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई। बाद में समुद्र के स्तर में बड़ा बदलाव नहीं मिलने पर सुनामी चेतावनी हटा दी गई। इस भूकंप में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सुबह-सुबह आया जोरदार झटका US Geological Survey (USGS) के मुताबिक भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:58 बजे आया। इसका केंद्र Flores Island के उत्तरी तट से दूर समुद्र में, Ende शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई, जिससे जमीन पर झटकों का असर काफी तेज महसूस हुआ। झटके इतने तेज थे कि कई जगह लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कुछ इलाकों में अस्पतालों से मरीजों को भी खुले और सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। Tsunami Alert से मची अफरा-तफरी समुद्र के नीचे आए इस शक्तिशाली भूकंप के बाद इंडोनेशियाई अधिकारियों ने कई तटीय इलाकों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की। लोगों को समुद्र तट और निचले इलाकों से दूर रहने तथा ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा गया। चेतावनी के बाद Flores के कई हिस्सों में लोगों ने तेजी से सुरक्षित जगहों का रुख किया। हालांकि, समुद्र के स्तर की निगरानी के बाद अधिकारियों ने पाया कि बड़े पैमाने पर सुनामी का खतरा नहीं है। इसके बाद करीब तीन घंटे के भीतर Tsunami Warning हटा दी गई। भूकंप के बाद लगातार Aftershocks मुख्य भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स भी आए। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती अवधि में 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। लगातार झटकों के कारण लोगों में डर बना रहा और कई परिवार कुछ समय तक घरों में लौटने से बचते रहे। दो लोगों की मौत, इमारतों को नुकसान इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक भूकंप में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है। प्रभावित इलाकों में घरों और दूसरी इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबर है। Maumere क्षेत्र में भी कुछ संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। Indonesia में क्यों आते हैं इतने भूकंप? इंडोनेशिया Pacific Ring of Fire में स्थित है। यह इलाका कई सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के संपर्क क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर देखने को मिलती हैं। Flores में आए इस शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर स्थानीय लोगों को सतर्क कर दिया है। फिलहाल प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं और आफ्टरशॉक्स के बीच स्थिति का आकलन किया जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

Independence Day 2026: लाल बांधनी पगड़ी में PM Modi, 13 साल के Looks में हर बार दिखी नई झलक

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन देशभर की नजरों में रहता है। लेकिन हर साल एक और चीज लोगों का ध्यान खींचती है—PM Modi का Independence Day Look। इस बार प्रधानमंत्री लाल रंग की पारंपरिक राजस्थानी बांधनी पगड़ी में नजर आए। पगड़ी के रंग और डिजाइन ने उनके पूरे लुक में देशी रंग भर दिया। सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ लाल बांधनी पगड़ी में प्रधानमंत्री का अंदाज बेहद पारंपरिक नजर आया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनके इस लुक की चर्चा देखने को मिली। लाल राजस्थानी पगड़ी ने खींचा लोगों का ध्यान इस बार प्रधानमंत्री मोदी की पगड़ी में राजस्थान की मशहूर बांधनी कला की झलक देखने को मिली। लाल रंग और पारंपरिक पैटर्न ने इसे खास बना दिया। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर भारतीय परंपरा से जुड़े परिधान को जगह देना भी लोगों के लिए आकर्षण का विषय रहा। PM Modi के पहनावे में क्षेत्रीय संस्कृति की झलक पहले भी कई बार दिखाई देती रही है। यही वजह है कि उनके Independence Day Look का इंतजार भाषण की तरह ही खास रहता है। 13 साल में हर बार दिखा नया अंदाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया था। तब से अब तक उनके पहनावे में लगातार बदलाव देखने को मिला है। खास तौर पर उनकी पगड़ी और साफा हर साल अलग रंग और डिजाइन में नजर आया। कभी चमकीले रंगों ने ध्यान खींचा, तो कभी पारंपरिक भारतीय शैलियों ने। इन अलग-अलग लुक में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति की झलक दिखाई देती रही है। यही सिलसिला इस बार भी जारी रहा और राजस्थान की बांधनी पगड़ी ने प्रधानमंत्री के Independence Day Look को अलग पहचान दे दी। PM Modi के लुक में दिखती है भारतीय संस्कृति प्रधानमंत्री मोदी का स्वतंत्रता दिवस का पहनावा केवल एक Style Statement नहीं रहता। उनके कपड़ों में अक्सर भारत की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय संस्कृति की झलक दिखाई देती है। इस बार राजस्थानी बांधनी पगड़ी ने भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखा। बांधनी राजस्थान और गुजरात की प्रसिद्ध पारंपरिक रंगाई कला है, जिसमें कपड़े पर छोटे-छोटे पैटर्न बनाए जाते हैं। हर साल क्यों चर्चा में रहता है PM का साफा? स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की पगड़ी की खास बात यह है कि इसमें हर बार कुछ नया देखने को मिलता है। रंग, डिजाइन और शैली में बदलाव के कारण लोगों की नजर उनके लुक पर भी रहती है। प्रधानमंत्री के 13 साल के Independence Day Looks पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि पगड़ी के जरिए अलग-अलग भारतीय परंपराओं को सामने लाने की कोशिश रही है। इस बार लाल राजस्थानी बांधनी पगड़ी ने एक बार फिर इस परंपरा को आगे बढ़ाया। लाल किले से संदेश के साथ दिखी परंपरा की झलक स्वतंत्रता दिवस देश के लिए गर्व और उत्सव का दिन है। ऐसे में प्रधानमंत्री का पारंपरिक भारतीय पहनावा समारोह की तस्वीरों को और खास बना देता है। इस बार लाल पगड़ी में नजर आए पीएम मोदी का लुक भी इसी वजह से चर्चा में रहा। PM Modi Independence Day Look में इस बार राजस्थान की बांधनी परंपरा की झलक देखने को मिली। 13 वर्षों से चले आ रहे इस सिलसिले में हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री का अंदाज अलग रहा और उनकी लाल राजस्थानी पगड़ी ने समारोह में भारतीय संस्कृति का रंग जोड़ दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Independence Day

Vande Mataram से गूंजा Red Fort: Independence Day पर PM Modi ने बताया आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप

स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने आने वाले वर्षों की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) पर जोर देते हुए कहा कि अब देश को अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा। प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में भारत की बदलती तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने करीब 12 साल में विकास की रफ्तार को नई दिशा दी है। उन्होंने तकनीक, उत्पादन, अर्थव्यवस्था और देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब बड़े लक्ष्य तय करने की स्थिति में पहुंच चुका है। दूसरे देशों पर निर्भर नहीं, अपनी ताकत पर भरोसा पीएम मोदी के भाषण में Self-Reliant India सबसे अहम संदेशों में रहा। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जरूरत की चीजों के लिए बाहरी निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए देश में उत्पादन बढ़ाना, नई तकनीक विकसित करना और युवाओं को अवसर देना जरूरी है। प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता इतनी मजबूत करना है कि भारत वैश्विक स्तर पर मजबूती से खड़ा हो सके। 12 साल में बदली देश की रफ्तार प्रधानमंत्री ने बीते 12 वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने कई क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। सड़क, रेलवे, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में हुए बदलावों को उन्होंने देश की बढ़ती क्षमता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत को अब छोटे सपनों तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। देश के सामने बड़े लक्ष्य हैं और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी ताकत से काम करना होगा। 2047 तक Viksit Bharat का लक्ष्य लाल किले से प्रधानमंत्री ने Viksit Bharat@2047 के संकल्प को भी दोहराया। भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका को प्रधानमंत्री ने खास तौर पर रेखांकित किया। नई पीढ़ी की ऊर्जा, innovation और technology को भारत के अगले चरण के विकास से जोड़कर देखा गया। पहली बार Red Fort से गूंजा Vande Mataram इस स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे खास बातों में से एक लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन रहा। राष्ट्रगीत की प्रस्तुति ने समारोह के माहौल को भावनात्मक बना दिया। आजादी के आंदोलन से गहराई से जुड़ा ‘वंदे मातरम्’ जब लाल किले से गूंजा, तो समारोह में मौजूद लोगों के साथ देशभर में इसे देखने-सुनने वालों के लिए भी यह पल खास बन गया। Youth Power को बताया भारत की बड़ी ताकत प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत के सपने को देश की युवा शक्ति से जोड़ते हुए युवाओं से innovation, entrepreneurship और technology के क्षेत्र में आगे आने की अपील की। आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नए अवसर और नए कारोबार पैदा करने वाला भी बन सकता है। भारत की बड़ी युवा आबादी को देश की आर्थिक और तकनीकी ताकत में बदलना आने वाले वर्षों की अहम चुनौती और संभावना दोनों है। आत्मनिर्भरता के साथ दुनिया में मजबूत भूमिका प्रधानमंत्री के संबोधन का सार केवल देश के भीतर विकास तक सीमित नहीं रहा। संदेश यह भी था कि भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करते हुए दुनिया में अपनी भूमिका और बढ़ाए। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र तक भारत की घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर आने वाले समय में भी जारी रहने के संकेत मिले। इसका सीधा असर रोजगार, निवेश और देश की आर्थिक ताकत पर पड़ सकता है। स्वतंत्रता दिवस पर PM Modi का बड़ा संदेश इस बार लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश तीन बड़े बिंदुओं के आसपास नजर आया—आत्मनिर्भर भारत, तेज विकास और Viksit Bharat@2047। वहीं पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने समारोह में देशभक्ति और इतिहास की भावना को और मजबूत किया। देश के सामने अब सवाल केवल विकास की गति का नहीं, बल्कि यह भी है कि भारत अपनी क्षमता का इस्तेमाल कितनी तेजी से करता है। प्रधानमंत्री का संदेश साफ था—भारत को अपनी ताकत पर भरोसा करना होगा और बड़े सपनों को पूरा करने के लिए मिलकर आगे बढ़ना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Masoud Pezeshkian

Masoud Pezeshkian India Visit: BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति, India-Iran Relations पर फोकस

नई दिल्ली में सितंबर में होने वाला BRICS Summit 2026 इस बार सिर्फ आर्थिक सहयोग की बैठकों तक सीमित नहीं रहने वाला है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) भी भारत पहुंचेंगे और शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में पेजेशकियान की मौजूदगी को India-Iran Relations के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पेजेशकियान का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। यही वजह है कि नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक के दौरान आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और वैश्विक कूटनीति पर भी नजर रहेगी। BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। संगठन में शामिल होने के बाद यह पहली बार है जब राष्ट्रपति पेजेशकियान भारत में BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनकी मौजूदगी से संगठन में ईरान की भूमिका और भारत के साथ उसके संबंधों पर चर्चा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत की अध्यक्षता में इस साल BRICS का फोकस Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability जैसे मुद्दों पर है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विकास और बदलती वैश्विक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर बातचीत हो सकती है। PM Modi से मुलाकात पर भी रहेंगी निगाहें पेजेशकियान के भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात भी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में BRICS Summit के दौरान दोनों नेताओं की बैठक होती है तो India-Iran Relations को लेकर कुछ महत्वपूर्ण संकेत सामने आ सकते हैं। खासकर ऐसे वक्त में जब पश्चिम एशिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। Chabahar Port और Connectivity भी अहम मुद्दे भारत और ईरान के रिश्तों में Chabahar Port की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक संपर्क बढ़ाने का एक अहम रास्ता माना जाता है। पेजेशकियान की यात्रा के दौरान कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की उम्मीद है। दोनों देशों के लिए यह दौरा पुराने संबंधों को नई दिशा देने का अवसर बन सकता है। West Asia Crisis के बीच क्यों खास है दौरा? पेजेशकियान ऐसे समय भारत आ रहे हैं जब West Asia में तनाव का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान के जरिए क्षेत्र में स्थिरता की जरूरत पर जोर देता रहा है। BRICS में बढ़ रहा ईरान का प्रभाव BRICS में ईरान की एंट्री के बाद संगठन का दायरा और व्यापक हुआ है। ईरान अब आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत और ईरान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत जहां BRICS के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखेगा, वहीं ईरान के लिए यह अपने आर्थिक और कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने का अवसर होगा। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पेजेशकियान का दौरा? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tiranga Yatra

CM का सख्त संदेश: भारत को आंख दिखाने वालों को मिलेगा जवाब, Tiranga Yatra में गूंजा Akhand Bharat

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले निकली तिरंगा यात्रा (Tiranga Yatra) में देशभक्ति के साथ Akhand Bharat का मुद्दा भी चर्चा में रहा। हाथों में तिरंगा लेकर बड़ी संख्या में लोग यात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह भारत माता के जयकारे और देशभक्ति के नारों से माहौल उत्साह से भर गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का भारत पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। देश अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत दुश्मन की हर कार्रवाई का जवाब देने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर उसके घर में घुसकर भी कार्रवाई कर सकता है। तिरंगा यात्रा में दिखा देशभक्ति का जोश तिरंगा यात्रा में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उत्साह के साथ नजर आए। कई लोगों के हाथों में तिरंगा था तो कुछ लोग देशभक्ति के नारे लगाते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ रहे थे। कार्यक्रम का माहौल ऐसा था कि रास्ते से गुजर रहे लोग भी कुछ देर रुककर यात्रा को देखते नजर आए। आयोजकों की ओर से लोगों से देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने की अपील की गई। Rameshwar ने लाहौर-ढाका में तिरंगा फहराने की बात कही कार्यक्रम के दौरान रामेश्वर ने अखंड भारत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत काफी व्यापक रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने लाहौर और ढाका में तिरंगा फहराने की बात कही। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, यह बयान राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय भी बन सकता है। फिलहाल तिरंगा यात्रा के मंच से दिया गया यह संदेश कार्यक्रम की प्रमुख चर्चाओं में शामिल रहा। CM ने युवाओं से किया देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरंगा सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है। इसके पीछे करोड़ों भारतीयों की भावनाएं, स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और देश के लिए दिए गए बलिदानों की कहानी जुड़ी है। उन्होंने युवाओं से देश की एकता, अखंडता और विकास में अपनी भूमिका निभाने की अपील की। उनका कहना था कि मजबूत भारत केवल सरकार या सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की इसमें भूमिका है। Independence Day से पहले राष्ट्रीय एकता का संदेश स्वतंत्रता दिवस से पहले हुई इस Tiranga Yatra ने शहर में देशभक्ति का माहौल बनाया। कार्यक्रम में सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता और देश के गौरव से जुड़े मुद्दों पर जोर दिया गया। तिरंगे के साथ निकली इस यात्रा में एक तरफ जहां आजादी के पर्व का उत्साह नजर आया, वहीं दूसरी तरफ Akhand Bharat को लेकर दिए गए बयानों ने इसे राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना दिया। आने वाले दिनों में इन बयानों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Flood UP के 16 जिलों में बाढ़, नावों से आवाजाही; Bihar से Himachal तक बारिश का कहर

मानसून (Monsoon) की तेज बारिश ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में बाढ़ और जलभराव से हालात परेशान करने वाले हैं। कई कॉलोनियों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिसके बाद लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। बिहार के छपरा में भी बारिश और जलभराव ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं हिमाचल प्रदेश में बारिश के बीच हुए Landslide ने रेल ट्रैक और यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। UP के 16 जिलों में Flood का असर उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बाद कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। इसका असर आसपास के गांवों और शहरों में साफ दिखाई दे रहा है। 16 जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं। कॉलोनियों में घरों के आसपास पानी जमा होने से लोगों को जरूरी काम के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। कुछ स्थानों पर राहत और बचाव के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कॉलोनियों में नाव बनी सहारा शहरों में जलभराव की स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है। जिन सड़कों पर आम दिनों में वाहन दौड़ते थे, वहां अब पानी जमा है। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है। प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं। जरूरत वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। Chhapra में 100 दुकानों में घुसा पानी बिहार के छपरा में भी भारी बारिश के बाद बाजार प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 दुकानों में पानी घुस गया। व्यापारियों के सामने अब दुकानों में रखे सामान को बचाने की चुनौती है। दुकानदारों का कहना है कि जलभराव से कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। बाजार में पानी जमा होने के कारण ग्राहक भी आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। अगर जलनिकासी में देरी होती है तो व्यापारियों की परेशानी और बढ़ सकती है। Himachal में Landslide से Rail Track पर संकट हिमाचल प्रदेश में बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में Landslide का खतरा बढ़ गया है। कई जगह पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है। रेल ट्रैक पर मलबा आने की स्थिति में ट्रेनों की आवाजाही रोकनी या सीमित करनी पड़ सकती है। रेलवे और प्रशासन की टीमें प्रभावित हिस्सों की जांच कर रही हैं और रास्ता साफ करने का काम किया जा रहा है। लोगों के लिए बढ़ी मुश्किल UP से Bihar और Himachal तक सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि मानसून इस समय कई इलाकों में चुनौती बन गया है। मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ और Waterlogging ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है, जबकि पहाड़ी इलाकों में Landslide और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। बारिश के बीच प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे पानी से भरी सड़कों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। आगे भी सतर्क रहने की जरूरत मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में प्रभावित जिलों में राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत रखना जरूरी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना और जलभराव वाले इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करना है। फिलहाल UP, Bihar और Himachal में बारिश से पैदा हुए हालात पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहता है, इसी पर कई प्रभावित इलाकों की स्थिति निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Bomb Threat High Court समेत 6 जगहों को धमकी, जांच में जुटीं Agencies

स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले दिल्ली (Delhi) में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब राजधानी की करीब छह जगहों को बम से उड़ाने की धमकी वाले ईमेल मिले। खबर सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं और संबंधित स्थानों पर जांच शुरू कर दी गई। धमकी ऐसे समय मिली है, जब 15 अगस्त को लेकर दिल्ली में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी है। प्रमुख सरकारी इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। Delhi High Court को भी मिला धमकी भरा Email मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धमकी पाने वाली जगहों में Delhi High Court और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) भी शामिल हैं। ईमेल मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और सुरक्षा टीमों ने परिसर की जांच की। Delhi हाई कोर्ट में धमकी की सूचना मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, शुरुआती जांच में किसी संदिग्ध विस्फोटक की पुष्टि नहीं हुई है। Independence Day से पहले क्यों बढ़ी चिंता? 15 अगस्त को दिल्ली में बड़े स्तर पर Independence Day समारोह आयोजित होते हैं। इस दौरान राजधानी में बड़ी संख्या में लोग भी अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रहते हैं। ऐसे में धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं। पुलिस की टीमें ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संदेश किसने भेजा और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी। सुरक्षा व्यवस्था हुई और सख्त धमकी की खबर के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट, कोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर आने-जाने वालों की निगरानी की जा रही है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा टीमों को अलर्ट किया गया है। दिल्ली में Independence Day को देखते हुए पहले से ही कई स्तरों पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में ताजा धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। जांच जारी, लोगों से अफवाहों से बचने की अपील फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। धमकी वाले ईमेल की सत्यता और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति या समूह के बारे में जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। सुरक्षा एजेंसियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता राजधानी में Independence Day समारोह को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है। आम लोगों से भी अपील है कि वे किसी भी अपुष्ट खबर या अफवाह को सोशल मीडिया पर आगे न बढ़ाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। निष्कर्ष: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मिली इस धमकी ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां ईमेल के स्रोत और उसकी गंभीरता का पता लगाने में जुटी हैं। फिलहाल किसी वास्तविक विस्फोटक की पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Japan

Japan Weather चिबा में मूसलाधार बारिश से तबाही, 4 की मौत और 7 हजार यात्री हुए परेशान

जापान (Japan) के चिबा प्रीफेक्चर में गुरुवार को हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कुछ इलाकों में महज एक घंटे में 115 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि चिबा शहर में 12 घंटे के भीतर 348 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। इतनी तेज बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइनें जलमग्न हो गईं, कई घरों में पानी घुस गया और बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई। अधिकारियों के मुताबिक इस आपदा में कम से कम 4 लोगों की मौत हुई है और एक व्यक्ति लापता बताया गया है। एक घंटे में महीने भर जितनी बारिश बारिश की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिबा में एक घंटे में 115 मिमी पानी बरसा। यह मात्रा आमतौर पर अगस्त के पूरे महीने में होने वाली बारिश के आसपास है। वहीं 12 घंटे में 348 मिमी बारिश ने पुराने रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। मौसम विभाग के मुताबिक गर्म और नम हवा के ऊपर मौजूद ठंडी हवा के साथ मिलने से बेहद तेज बारिश की स्थिति बनी। पहली बार जारी हुई Level-5 की सबसे ऊंची चेतावनी हालात बिगड़ने पर Japan Meteorological Agency (JMA) ने चिबा के कई हिस्सों के लिए Level-5 की सबसे ऊंची भारी बारिश और भूस्खलन चेतावनी जारी की। रिपोर्टों के मुताबिक प्रीफेक्चर में इस स्तर की चेतावनी पहली बार जारी की गई। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई और 4 लाख से ज्यादा लोगों के लिए evacuation orders/advisories जारी किए गए। Narita Airport पर 7 हजार यात्रियों की रात एयरपोर्ट में गुजरी भारी बारिश का सबसे बड़ा असर Transport Network पर पड़ा। बाढ़ के कारण कई ट्रेन सेवाएं रोक दी गईं और प्रमुख सड़कें भी प्रभावित हुईं। इसका सीधा असर Narita International Airport पर पड़ा, जहां करीब 7,000 यात्री रातभर फंसे रहे। यात्रियों के लिए एयरपोर्ट प्रशासन ने पानी, खाने-पीने का सामान, कंबल और sleeping bags उपलब्ध कराए। कुछ रेल सेवाएं शुक्रवार को सीमित रूप से दोबारा शुरू हुईं, जिससे यात्रियों को एयरपोर्ट से निकलने में थोड़ी राहत मिली। एयरपोर्ट खुद चालू रहा, हालांकि उड़ानों पर देरी का असर पड़ा। बिजली गुल, सड़कों पर सैलाब तेज बारिश के कारण चिबा और आसपास के इलाकों में हजारों घरों की बिजली चली गई। अलग-अलग समय पर बिजली कटौती से प्रभावित घरों की संख्या काफी बढ़ गई थी और शुक्रवार सुबह भी 22 हजार से ज्यादा घरों में बिजली आपूर्ति प्रभावित थी। कई इलाकों में पानी भरने के कारण वाहन सड़कों पर फंस गए और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। राहत और Rescue Operation जारी स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा है। जापानी सेना के जवान भी राहत कार्य में लगाए गए हैं। बारिश की तीव्रता कम होने के बाद भी अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि जमीन में पानी भर जाने के कारण Flood और Landslide का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। चिबा के गवर्नर तोशिहितो कुमागाई ने इस घटना को बेहद असामान्य बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे आपदा प्रबंधन अनुभव के बावजूद उन्होंने ऐसी स्थिति पहले नहीं देखी थी। Japan Rain Disaster ने बढ़ाई चिंता जापान में इस समय छुट्टियों का व्यस्त दौर चल रहा है, इसलिए Transport Disruption का असर यात्रियों पर और ज्यादा पड़ा। रिकॉर्ड बारिश ने एक बार फिर दिखाया कि बेहद आधुनिक Infrastructure वाला देश भी अचानक होने वाली Extreme Weather घटनाओं के सामने बड़ी चुनौती का सामना कर सकता है। फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने, बिजली और परिवहन व्यवस्था बहाल करने तथा बाढ़ और भूस्खलन के संभावित खतरे से निपटने पर है। मौसम विभाग ने भी लोगों को निचले इलाकों, नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WPI

WPI Data July: महंगाई में मामूली कमी से राहत, खाने-पीने की चीजों की कीमतें बनीं चुनौती

महंगाई को लेकर जुलाई के आंकड़ों ने थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन आम आदमी की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Wholesale Price Inflation यानी WPI Inflation जुलाई में घटकर 9.78% रह गई, जबकि जून में यह 9.87% थी। यानी एक महीने में थोक महंगाई दर में मामूली कमी दर्ज की गई। हालांकि, आंकड़ों की तस्वीर सिर्फ राहत वाली नहीं है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई के दबाव को बनाए रखा है। दूसरी ओर Fuel और Electricity सेक्टर में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे कुल थोक महंगाई दर को नीचे आने में मदद मिली। July WPI Inflation में मामूली गिरावट जुलाई में WPI Inflation का 9.78% पर आना अर्थव्यवस्था के लिए हल्की राहत माना जा सकता है। जून में यह आंकड़ा 9.87% था। यानी थोक स्तर पर कीमतों का दबाव थोड़ा कम हुआ है। हालांकि, सिर्फ 0.09 प्रतिशत अंक की गिरावट को बड़ी राहत कहना जल्दबाजी होगी। बाजार में कई जरूरी सामान की कीमतें अभी भी उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल रही हैं। Food Prices ने बढ़ाई चिंता महंगाई की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल Food Prices को लेकर है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ता है। सब्जियां, खाद्य उत्पाद और रोजमर्रा के इस्तेमाल की दूसरी चीजें महंगी होने पर परिवारों का खर्च बढ़ जाता है। यही वजह है कि थोक महंगाई में मामूली गिरावट के बावजूद आम लोगों को बाजार में राहत उतनी महसूस नहीं होती। Fuel और Electricity से मिली राहत जुलाई के आंकड़ों में Fuel & Power सेक्टर ने कुछ राहत दी। ईंधन और बिजली की कीमतों में नरमी का असर थोक महंगाई के कुल आंकड़े पर पड़ा। ऊर्जा की कीमतें अर्थव्यवस्था के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करती हैं। Transport से लेकर Manufacturing तक, ईंधन की लागत बढ़ने पर उसका असर कई दूसरे उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई देता है। ऐसे में इस क्षेत्र में नरमी महंगाई के लिए सकारात्मक संकेत है। WPI और Retail Inflation में अंतर समझना जरूरी यहां एक बात समझना जरूरी है कि WPI Inflation और Retail Inflation एक जैसी चीजें नहीं हैं। WPI यानी Wholesale Price Index थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है। वहीं Retail Inflation यानी CPI आम उपभोक्ता के स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। इसलिए WPI में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि बाजार में हर सामान सस्ता हो गया है। किसी एक श्रेणी में कीमतें घट सकती हैं, जबकि दूसरी जरूरी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर? जुलाई के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर मिली-जुली है। एक तरफ थोक महंगाई में थोड़ी कमी आई है और Fuel-Power सेक्टर से राहत मिली है। दूसरी तरफ खाद्य वस्तुओं की कीमतें लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। घर चलाने वाले परिवारों के लिए असली राहत तब मानी जाएगी, जब रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान की कीमतों में भी स्थिरता आए। सिर्फ महंगाई दर में मामूली गिरावट से घरेलू बजट पर दबाव तुरंत कम नहीं होता। आगे किन चीजों पर रहेगी नजर? आने वाले महीनों में मानसून, कृषि उत्पादन, खाद्य पदार्थों की Supply, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू मांग महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल जुलाई के WPI आंकड़ों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि महंगाई के मोर्चे पर दबाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह राहत की तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। Food Prices में स्थिरता आने पर ही आम लोगों को महंगाई से वास्तविक राहत महसूस हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJI Surya Kant

CJI Surya Kant Controversy: NALSAR छात्रों के विरोध से मचा बवाल, BCI ने पलटा Enrolment Order

NALSAR University का विवाद अब सिर्फ एक Convocation तक सीमित नहीं रहा है। CJI Surya Kant को समारोह में Chief Guest बनाए जाने पर कुछ छात्रों की आपत्ति के बाद शुरू हुआ मामला पहले Bar Council of India (BCI) तक पहुंचा और फिर Supreme Court में भी चर्चा का विषय बन गया। सबसे ज्यादा चर्चा BCI के उस फैसले की हुई, जिसमें NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates के Enrolment पर रोक लगाने की बात कही गई थी। हालांकि घटनाक्रम ज्यादा देर तक एक जैसा नहीं रहा। BCI ने बाद में अपना फैसला बदलते हुए छात्रों को Enrolment की अनुमति दे दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने भी इस पूरे मामले में BCI की भूमिका पर सवाल उठाए। CJI सूर्यकांत को Chief Guest बनाने पर क्यों हुआ विवाद? NALSAR के Convocation समारोह में CJI सूर्यकांत को Chief Guest के तौर पर आमंत्रित किया गया था। इसी को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं और CJI को बुलाने के फैसले पर सवाल उठाए। मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब छात्रों की आपत्ति को लेकर BCI ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय से पूरे घटनाक्रम की जानकारी और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई। BCI ने 2026 बैच के Enrolment पर लगाई रोक विवाद के बीच BCI की ओर से पहले ऐसा निर्देश जारी किया गया कि NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates का Advocate के रूप में Enrolment अगले आदेश तक रोका जाए। इस फैसले से छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई। वजह साफ थी—किसी विवाद में पूरे बैच के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी। सवाल यह भी उठा कि अगर विरोध में केवल कुछ छात्र शामिल थे, तो उसका असर पूरे बैच पर क्यों पड़े? फिर BCI ने बदला अपना फैसला विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने शुरुआती आदेश में बदलाव किया। परिषद ने साफ किया कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को उनकी पसंद के State Bar Council में Enrolment कराने की अनुमति दी जाएगी। बाद में BCI ने 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद करने की बात भी कही। परिषद का कहना था कि बड़ी संख्या में छात्र इस पूरे घटनाक्रम में शामिल नहीं थे और किसी छात्र को ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए, जिसमें उसकी कोई भूमिका न हो। इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिली, जिनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद अब Professional Career शुरू होने वाला था। Supreme Court में CJI ने BCI से पूछा- दखल क्यों? मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों और उनके बीच का मामला किस तरह BCI के हस्तक्षेप का विषय बन गया। CJI की टिप्पणी ने मामले का रुख ही बदल दिया। अब चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं थी कि Convocation में किसे Chief Guest बनाया जाए, बल्कि यह सवाल भी सामने आया कि छात्रों को असहमति जताने और अपनी बात रखने की कितनी स्वतंत्रता है। छात्रों के Career पर असर का मुद्दा भी अहम इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू छात्रों का भविष्य रहा। Law की पढ़ाई पूरी करने के बाद Advocate के रूप में Enrolment किसी भी Law Graduate के Career का अहम पड़ाव होता है। ऐसे में पूरे बैच के Enrolment पर रोक की खबर ने कई छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी। बाद में BCI के फैसले में बदलाव के बाद स्थिति सामान्य हुई। विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं BCI ने 2026 बैच के खिलाफ अपनी कार्रवाई वापस ले ली है, लेकिन पूरे विवाद ने कई बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। एक तरफ छात्रों के विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार की बात है, तो दूसरी तरफ Professional Regulatory Body के अधिकार और उसकी भूमिका को लेकर बहस जारी है। NALSAR विवाद ने यह भी दिखाया कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी मुद्दे पर छात्रों की असहमति कितनी जल्दी बड़े संस्थागत विवाद का रूप ले सकती है। NALSAR विवाद से क्या निकला? फिलहाल सबसे बड़ी राहत 2026 बैच के Law Graduates को मिली है। Enrolment पर लगी रोक हट चुकी है और उनके Advocate बनने का रास्ता साफ है। वहीं, Supreme Court में CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद यह मामला छात्रों के अधिकार, विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और BCI के अधिकार क्षेत्र से जुड़े व्यापक सवालों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। यानी NALSAR का यह विवाद सिर्फ एक Convocation का मामला नहीं रह गया है। इसने छात्रों की आवाज, संस्थागत अधिकार और Professional Regulation के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर शुरू कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मणिपुर के संगीतकार विक्रम सिंह की हत्या पर राहुल गांधी बोले- पहचान के आधार पर हिंसा चिंता की बात

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मणिपुर के दिवंगत संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विक्रम सिंह की हत्या को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि विक्रम को कथित तौर पर सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह मणिपुर से आते थे। उन्होंने कहा कि किसी युवा की हत्या अपने आप में बड़ी त्रासदी है, लेकिन किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के आधार पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है। राहुल बोले- हिंसा और नफरत का इस्तेमाल गलत राहुल गांधी ने कहा कि इस घटना में हिंसा साफ तौर पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि घटना में हिंसा, नफरत और अहंकार नजर आता है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी सोच बढ़ रही है कि अगर कोई व्यक्ति ताकतवर है तो वह दूसरे के खिलाफ हिंसा कर सकता है। राहुल गांधी ने इस रवैये को गलत बताते हुए कहा कि ताकत के आधार पर किसी के साथ हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। 8 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल विक्रम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने मंगलवार को 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, घटना 6 सितंबर 2026 की रात करीब 11:30 बजे दक्षिण दिल्ली के आश्रम इलाके में हुई। मणिपुर मूल के 54 वर्षीय संगीतकार विक्रम सिंह अपने घर के नीचे डिलीवरी बॉय और स्थानीय ढाबे के कर्मचारियों के बीच हो रहे कथित शोर और हंगामे पर आपत्ति जताने गए थे। आरोप है कि इसके बाद डिलीवरी बॉय और ढाबे के कर्मचारियों ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट की। आरोपियों ने कथित तौर पर बिल्डिंग के अंदर उनका तीन मंजिल तक पीछा किया और लात-घूंसों से हमला किया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में भारी आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि गुरुवार को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, विक्रम सिंह की मौत सीने और पेट पर गंभीर शारीरिक चोटों के कारण हुए भारी आंतरिक रक्तस्राव से हुई। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर भेदभाव के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भारत ने बांग्लादेश को 40 रन से हराया, 10वीं बार विमेंस एशिया कप के फाइनल में पहुंचा

दुबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विमेंस टी20 एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 149 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड 10वीं बार एशिया कप के फाइनल में प्रवेश किया। शेफाली वर्मा ने खेली शानदार पारी भारत की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर 24 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 21 रन का योगदान दिया। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 149 रन बनाए। दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी 150 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सकी। दीप्ति शर्मा ने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 विकेट लिए और बांग्लादेश के बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाए रखा। आखिरी ओवरों में नंदनी शर्मा ने भी महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी। बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन तक ही पहुंच सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। अब फाइनल पर भारत की नजर इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एशिया कप के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज कर रहा है और अब उसकी नजर खिताब जीतने पर होगी।

Apple ने लॉन्च किया फोल्डेबल iPhone Duo, कीमत 4.50 लाख तक; iPhone 18 Pro सीरीज भी आई

Apple ने बुधवार रात आयोजित लॉन्च इवेंट ‘Surprise and Shine’ में कई नए डिवाइस पेश किए। कंपनी ने पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है। इसके साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max समेत कुल 6 नए डिवाइस पेश किए गए। iPhone Duo को कंपनी का अब तक का सबसे महंगा iPhone बताया जा रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए तक जाती है। iPhone Duo में 7.6 इंच की मेन स्क्रीन फोल्डेबल iPhone Duo में बाहर की तरफ 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। फोन खोलने पर अंदर 7.6 इंच की मेन स्क्रीन मिलती है। कंपनी के मुताबिक, यह अब तक किसी भी iPhone में दिया गया सबसे बड़ा डिस्प्ले है। फोन में पहली बार डुअल-बैटरी सिस्टम दिए जाने की जानकारी है। इसके अलावा इसमें फिजिकल SIM कार्ड का विकल्प नहीं होगा। iPhone Duo केवल e-SIM के जरिए काम करेगा। भारत में iPhone Duo की बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। iPhone 18 Pro और Pro Max में DSLR जैसी कैमरा टेक्नोलॉजी Apple ने इस बार iPhone 18 सीरीज में केवल प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए हैं। इन दोनों मॉडल्स में सबसे ज्यादा जोर कैमरा सिस्टम पर दिया गया है। इनके मेन कैमरे में प्रोफेशनल DSLR कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी दिए जाने का दावा किया गया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए, जबकि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए रखी गई है। इन दोनों मॉडल्स की बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी। AirPods 5 और नई Apple Watch भी लॉन्च Apple के लॉन्च इवेंट में iPhone के अलावा AirPods 5, Apple Watch Series 12 और Watch Ultra 4 भी पेश किए गए। कंपनी के नए प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा चर्चा फोल्डेबल iPhone Duo की है, जिसे Apple के स्मार्टफोन लाइनअप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

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