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भोपाल में ट्रैफिक ACP के घर 10 लाख की चोरी, ड्यूटी पर थे अफसर; परिवार गया था उज्जैन

भोपाल। राजधानी भोपाल में चोरों ने ट्रैफिक ACP विजय दुबे के घर को निशाना बनाकर करीब 10 लाख रुपए का माल चोरी कर लिया। वारदात के समय ACP ड्यूटी पर थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य उज्जैन गए हुए थे। चोर घर से नकदी और सोने-चांदी के जेवर लेकर फरार हो गए। मामला कोलार थाना क्षेत्र के डीके-2 इलाके का है। पुलिस के मुताबिक, बदमाश कार से पहुंचे थे और घर के बाहर लगे गेट का ताला तोड़ने के बाद अंदर दाखिल हुए। दो गेट के ताले तोड़कर घर में घुसे चोर एसीपी आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, बदमाशों ने पहले घर के बाहरी गेट का ताला तोड़ा। इसके बाद अंदर के गेट का लॉक तोड़कर मकान में प्रवेश किया। घर में घुसने के बाद बदमाशों ने कमरों और अलमारियों की तलाशी ली। इसके बाद नकदी और सोने-चांदी के जेवर समेटकर मौके से फरार हो गए। देर रात ड्यूटी से लौटे ACP विजय दुबे ने घर का ताला टूटा देखा। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। CCTV फुटेज में संदिग्ध नजर आए पुलिस ने घटनास्थल की जांच के साथ फोरेंसिक टीम को भी बुलाया। टीम ने मौके से फिंगरप्रिंट सहित अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने पर कुछ संदिग्ध नजर आए हैं। पुलिस उनकी पहचान करने का प्रयास कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरों ने वारदात से पहले घर की रेकी की थी या उन्हें परिवार के घर से बाहर होने की जानकारी पहले से थी। कैश में लोन से बची रकम भी शामिल पुलिस के अनुसार, घर से चोरी हुई नकदी में करीब 6 लाख रुपए ऐसी रकम थी, जो पर्सनल लोन से बची हुई थी। बताया गया है कि ACP विजय दुबे ने कुछ महीने पहले करीब 20 लाख रुपए का पर्सनल लोन लिया था। पुलिस अब इस नकदी से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारी भी जुटा रही है, ताकि चोरी हुई रकम की पुष्टि की जा सके। रिश्तेदारों के जेवर भी चोरी चोर सिर्फ ACP और उनके परिवार के जेवर ही नहीं ले गए, बल्कि घर में रखे भाई-भाभी और ससुराल पक्ष के सदस्यों के आभूषण भी चोरी कर ले गए। चोरी हुए सामान में सोने और चांदी के जेवर शामिल हैं। इनकी वास्तविक कीमत का आकलन संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज मिलने के बाद किया जाएगा। VIP ड्यूटी की जानकारी थी या पहले से की गई थी रेकी? वारदात के समय ACP विजय दुबे मुख्यमंत्री की VIP ड्यूटी में तैनात थे और घर खाली था। ऐसे में पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या बदमाशों को ACP के ड्यूटी शेड्यूल की जानकारी थी या उन्होंने पहले से घर की रेकी की थी। CCTV फुटेज और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। बिल मिलने के बाद स्पष्ट होगी चोरी की कुल कीमत पुलिस के मुताबिक, फिलहाल चोरी गए जेवरों की पूरी कीमत स्पष्ट नहीं है। ACP की ओर से जेवरों के बिल और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद वास्तविक कीमत का आकलन किया जाएगा। फिलहाल पुलिस करीब 10 लाख रुपए के माल की चोरी मानकर मामले की जांच कर रही है। गांधीनगर से कोलार-मिसरोद तक चोरियों से पुलिस की चुनौती बढ़ी पुलिस के अनुसार, वारदात में शामिल बदमाशों ने इससे पहले भोपाल के गांधीनगर से लेकर कोलार और मिसरोद इलाके में भी चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। लगातार सामने आ रही चोरी की वारदातों को देखते हुए क्राइम ब्रांच समेत करीब 10 थानों की पुलिस सक्रिय है और संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
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विराट कोहली की वर्ल्ड कप जगह पर राजकुमार शर्मा बोले- बहस की जरूरत नहीं, प्रदर्शन से दे रहे जवाब

विराट कोहली के बचपन के कोच राजकुमार शर्मा ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप में उनकी जगह को लेकर चल रही चर्चाओं पर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि कोहली की टीम में जगह पर बहस करने की जरूरत ही नहीं है। वह अपने प्रदर्शन और फिटनेस के जरिए लगातार खुद को साबित कर रहे हैं। राजकुमार शर्मा ने रोहित शर्मा को भी शानदार खिलाड़ी और मैच विनर बताया। वहीं, दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने कहा है कि विराट कोहली जब भी उपलब्ध होंगे, वह दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेलेंगे। राजकुमार बोले- कोहली की जगह पर बहस की जरूरत नहीं राजकुमार शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि हाल के मुकाबलों में विराट कोहली के प्रदर्शन को देखते हुए 2027 वर्ल्ड कप में उनकी जगह को लेकर चर्चा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोहली को अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है। उनकी मेहनत और वर्क एथिक उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाती है। राजकुमार के मुताबिक, कोहली ने न केवल भारतीय क्रिकेटरों बल्कि पूरे देश को फिटनेस के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने विराट को लेकर कहा कि भगवान ने उन्हें क्रिकेट के लिए बनाया है और उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हें इतना बड़ा खिलाड़ी बनाया है। रोहित शर्मा भी मैच विनर, भविष्य पर चर्चा से ज्यादा खेल जरूरी रोहित शर्मा को लेकर राजकुमार शर्मा ने कहा कि उनकी उम्र या भविष्य को लेकर चर्चा करने के बजाय उनके खेल पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने रोहित को शानदार खिलाड़ी बताते हुए कहा कि अपने दिन पर वह अकेले दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। रोहित और कोहली के भविष्य पर चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि 2027 वनडे वर्ल्ड कप में अभी समय है और चयनकर्ता टीम में युवा खिलाड़ियों को भी तैयार कर रहे हैं। चयनकर्ताओं ने साफ किया- फॉर्म और फिटनेस के आधार पर होगा चयन रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई में चयन समिति के स्तर पर रोहित शर्मा और विराट कोहली को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में आराम देने पर चर्चा हुई थी। हालांकि, बाद में दोनों को टीम में बनाए रखा गया। चयनकर्ताओं का मानना था कि दोनों अब सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलते हैं, इसलिए उन्हें मैच प्रैक्टिस देना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि वर्ल्ड कप से पहले किसी भी खिलाड़ी की जगह स्थायी नहीं मानी जा सकती और चयन फॉर्म तथा फिटनेस के आधार पर होगा। शुभमन गिल ने भी विराट को भविष्य की योजना में बताया था शामिल 2027 वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर कप्तान शुभमन गिल भी विराट कोहली के भविष्य पर संकेत दे चुके हैं। जुलाई में गिल ने कहा था कि विराट टीम की भविष्य की योजना का हिस्सा हैं। गिल के मुताबिक, कोहली टीम मैनेजमेंट के साथ साउथ अफ्रीका में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए टीम कॉम्बिनेशन पर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान उन खिलाड़ियों पर भी बातचीत हो रही थी, जिन्हें भविष्य में टीम में आजमाया जा सकता है। गिल ने रोहित शर्मा और विराट कोहली को पिछले एक दशक में भारतीय बल्लेबाजी का आधार बताया था। वहीं, BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने जून में कहा था कि 2027 वर्ल्ड कप की टीम और खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर फैसले बोर्डरूम का विषय हैं और इस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं होनी चाहिए। रोहित और कोहली अब सिर्फ वनडे क्रिकेट खेल रहे विराट कोहली और रोहित शर्मा अब सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलते हैं। दोनों ने 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। इससे पहले 2024 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद दोनों ने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट से भी संन्यास ले लिया था। विराट फिर दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेलेंगे DDCA अध्यक्ष रोहन जेटली ने विराट कोहली को लेकर एक और अहम अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि जब भी कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच उपलब्ध होंगे, वह दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट जरूर खेलेंगे। विराट ने 2025 में करीब 13 साल बाद रणजी ट्रॉफी में वापसी की थी। उन्होंने दिल्ली की ओर से रेलवे के खिलाफ मुकाबला खेला था। इसी साल उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में भी दिल्ली के लिए मैच खेले थे। अब घरेलू क्रिकेट में उनकी उपलब्धता को लेकर DDCA की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
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मोहना में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का जिला स्तरीय शिविर, मौके पर हो रहा समस्याओं का समाधान

ग्वालियर। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत ग्वालियर जिले का पांचवां जिला स्तरीय शिविर शुक्रवार को मोहना में आयोजित किया जा रहा है। शिविर में नगर पंचायत मोहना के सभी वार्डों और बस्तियों के रहवासियों की समस्याएं सुनी जा रही हैं और उनका मौके पर ही निराकरण करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों ने किया नगर पंचायत क्षेत्र का निरीक्षण शिविर शुरू होने से पहले विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारियों ने नगर पंचायत मोहना के अलग-अलग क्षेत्रों का भ्रमण किया। अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित संस्थाओं और व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा स्थानीय स्तर पर सामने आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उद्योग और इन्फ्लुएंसर संवाद भी होगा शिविर में जनसंवाद के साथ उद्योग और इन्फ्लुएंसर संवाद का भी आयोजन किया जा रहा है। इसमें एमएसएमई, वृहद और कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमी शामिल होंगे। उद्यमी अपने अनुभव साझा करने के साथ उद्योगों से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों को अधिकारियों के सामने रखेंगे। संबंधित विभागों के माध्यम से इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। जनता से सीधा संवाद अभियान का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेशभर में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं की पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा सके। अभियान के तहत प्रशासन का फोकस आम लोगों की शिकायतों और समस्याओं का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करने पर है। मोहना में आयोजित शिविर को भी इसी उद्देश्य से जोड़ा गया है।
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भोपाल में रियल एस्टेट कारोबारी के घर फायरिंग का आरोप, अवैध प्लॉटिंग की शिकायत से जुड़ा विवाद

भोपाल। रातीबड़ थाना क्षेत्र के गोरेगांव में अवैध प्लॉटिंग की शिकायत करने वाले 60 वर्षीयp रियल एस्टेट कारोबारी के घर आधी रात कथित फायरिंग का मामला सामने आया है। कारोबारी संतोष सिंह तोमर का आरोप है कि गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात करीब ढाई बजे आधा दर्जन से ज्यादा लोग SUV से उनके घर पहुंचे और गेट के बाहर दो राउंड फायर किए। कारोबारी का दावा है कि फायरिंग के बाद बदमाशों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गए। उन्होंने गांव में रहने वाले लखन मारण पर संदेह जताया है। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल फायरिंग की पुष्टि नहीं की है। अवैध प्लॉटिंग की शिकायत के बाद विवाद का आरोप संतोष सिंह तोमर के मुताबिक, लखन मारण इलाके में कथित तौर पर अवैध प्लॉटिंग कर रहा था, जिसकी उन्होंने शिकायत की थी। कारोबारी का कहना है कि शिकायत के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। उनका आरोप है कि उन्हें पहले फोन पर धमकी दी गई थी। कथित तौर पर कहा गया था कि उन्हें न तो कारोबार करने दिया जाएगा और न ही इलाके में रहने दिया जाएगा। कारोबारी का दावा है कि फोन पर धमकी मिलने के कुछ समय बाद ही कुछ लोग उनके घर के बाहर पहुंचे और फायरिंग की। SUV से पहुंचे बदमाश, CCTV में घटनाक्रम कैद होने का दावा फरियादी के अनुसार, रात करीब ढाई बजे एक SUV से आधा दर्जन से अधिक लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने गेट के बाहर फायरिंग की और जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग गए। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच की। कारोबारी का कहना है कि घर और आसपास लगे CCTV कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है। कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत कारोबारी का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन अभी तक FIR दर्ज नहीं की गई है। कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने कथित फायरिंग को अवैध प्लॉटिंग की शिकायत के बाद शुरू हुए विवाद से जोड़ते हुए पूरे मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पुलिस बोली- CCTV में गोली चलाते नहीं दिखा कोई व्यक्ति रातीबड़ थाना प्रभारी रासबिहारी शर्मा ने बताया कि फिलहाल पुलिस ने गोली चलने की पुष्टि नहीं की है। पुलिस टीम CCTV फुटेज की जांच कर रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक, अब तक सामने आए CCTV फुटेज में कोई व्यक्ति गोली चलाते हुए दिखाई नहीं दे रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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रायपुर में अनोखी गणेश प्रतिमाएं तैयार, बांस से लेकर धूप-अगरबत्ती और दाल से बनाई मूर्तियां

रायपुर। गणेशोत्सव से पहले रायपुर में भगवान गणेश की अनोखी और आकर्षक प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इस बार शहर के मूर्तिकार पारंपरिक मिट्टी के साथ-साथ बांस, पूजा सामग्री, मोती, दाल, चना, भुट्टे और धूप-अगरबत्ती जैसी अलग-अलग चीजों से गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई प्रतिमाएं ग्राहकों की पसंद और उनके बताए आइडिया के अनुसार तैयार की जा रही हैं। कुछ विशेष प्रतिमाओं को बनाने में करीब तीन महीने तक का समय लगा है। सीमित संख्या में तैयार होने वाली इन प्रतिमाओं के लिए समितियां पहले ही प्री-ऑर्डर दे देती हैं। 30 साल से गणेश प्रतिमाएं बना रहा यादव परिवार रायपुर के रायपुरा इलाके में रहने वाला शिवचरण यादव का परिवार करीब 30 साल से गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहा है। उनके दोनों बेटे भी पिछले करीब 15 साल से इस काम में पिता का साथ दे रहे हैं। परिवार के सदस्य राहुल यादव बताते हैं कि ग्राहक अपनी पसंद की थीम और डिजाइन बताते हैं। इसके बाद उसमें अपनी क्रिएटिविटी और नए आइडिया जोड़कर प्रतिमा तैयार की जाती है। रामसागर पारा की एक गणेश समिति पिछले 17 साल से इसी परिवार से प्रतिमा बनवा रही है। मूर्तिकारों के पास सीमित संख्या में ही ऑर्डर लिए जाते हैं और समितियां आमतौर पर करीब तीन महीने पहले अपनी पसंद की प्रतिमा बुक कर देती हैं। बांस से बनाई गई खास गणेश प्रतिमा इस बार बांस से बनाई गई गणेश प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रही है। इसकी खासियत है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। प्रतिमा को लकड़ी, पेपर और बांस की मदद से तैयार किया गया है। मूर्तिकार के मुताबिक, इस प्रतिमा को बनाने का काम करीब तीन महीने पहले शुरू किया गया था। बांस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर एक-एक हिस्से को जोड़ते हुए गणेश जी का आकार दिया गया है। इसके लिए पहले बांस की ऊपरी छाल हटाई जाती है और फिर उसे जरूरत के मुताबिक काटकर आकार दिया जाता है। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 40 से 50 हजार रुपए की लागत आने की जानकारी दी गई है। इस तरह की प्रतिमाएं सीमित संख्या में तैयार की जाती हैं और इन्हें मुख्य रूप से प्री-ऑर्डर पर बनाया जाता है। पूजा सामग्री से तैयार गणेश प्रतिमा मूर्तिकारों ने पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से भी गणेश प्रतिमा तैयार की है। इसमें नारियल की जूट से प्रतिमा का मूल आकार बनाया गया है। प्रतिमा की धोती में जनेऊ लगाया गया है, जबकि माला कमल गट्टे से तैयार की गई है। इसके अलावा रुद्राक्ष, मौली धागे और मोतियों का इस्तेमाल सजावट के लिए किया गया है। मोतियों से तैयार की गई प्रतिमाओं को लोग गृह प्रवेश या गिफ्ट के तौर पर भी पसंद कर रहे हैं। धूप-अगरबत्ती से बनी 12 फीट की प्रतिमा इस साल धूप-अगरबत्ती से तैयार की गई 12 फीट की गणेश प्रतिमा भी खास आकर्षण है। इसे बनाने में करीब तीन महीने का समय लगा है। प्रतिमा में अलग-अलग रंग की धूप स्टिक का इस्तेमाल किया गया है। गीली धूप की मदद से माला, पुष्प और कड़े जैसी सजावट तैयार की गई है। मूर्तिकार के मुताबिक, गणेश समिति ने अपनी पसंद का स्ट्रक्चर बताया था और उसी डिजाइन के आधार पर प्रतिमा तैयार की गई। उन्होंने बताया कि मिट्टी की प्रतिमा की तुलना में ऐसी प्रतिमाएं कुछ मामलों में आसान होती हैं, क्योंकि ये अपेक्षाकृत हल्की होती हैं और काम के दौरान इन्हें जरूरत के अनुसार स्थानांतरित किया जा सकता है। मसूर दाल, चना और भुट्टे से भी बनी गणेश प्रतिमा रायपुर में इस बार खाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों से भी गणेश प्रतिमा तैयार की गई है। इसमें मसूर दाल, चना और भुट्टे का इस्तेमाल किया गया है। अलग-अलग खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से सजाकर गणेश जी का आकार दिया गया है। पारंपरिक मिट्टी के बजाय खाने की सामग्री से तैयार यह प्रतिमा लोगों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन रही है। ग्राहकों के आइडिया से तैयार हो रही हैं अनोखी प्रतिमाएं मूर्तिकार राहुल यादव के मुताबिक, अब गणेश प्रतिमाओं को लेकर ग्राहकों की पसंद भी बदल रही है। लोग पहले से अलग और अनोखी थीम चाहते हैं। वे अपनी कल्पना और डिजाइन का आइडिया मूर्तिकारों को बताते हैं। इसके बाद मूर्तिकार उस आइडिया में अपनी क्रिएटिविटी जोड़कर प्रतिमा तैयार करते हैं। यही वजह है कि इस बार रायपुर में गणेशोत्सव के लिए कई ऐसी प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं, जो पारंपरिक मूर्तियों से बिल्कुल अलग नजर आएंगी।
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रायपुर के स्पा सेंटर पर पुलिस की दबिश, संचालक और मैनेजर पर पीटा एक्ट में केस

रायपुर। रायपुर के देवेंद्र नगर इलाके में पुलिस ने एक स्पा सेंटर पर कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, श्याम स्क्वायर स्थित इशवा लग्जरी स्पा सेंटर में जांच के दौरान आपत्तिजनक सामग्री मिली। मामले में पुलिस ने स्पा सेंटर के संचालक और मैनेजर के खिलाफ अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (पीटा एक्ट), 1956 के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई 10 सितंबर को एसीपी स्नेहिल साहू के नेतृत्व में सिविल लाइन और देवेंद्र नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की। दूसरे राज्यों से युवतियों को बुलाने का आरोप पुलिस के अनुसार, स्पा सेंटर में दूसरे राज्यों से युवतियों को बुलाकर काम कराया जा रहा था। पूछताछ के दौरान वहां मौजूद कुछ युवतियों ने संचालक और मैनेजर पर जबरन देह व्यापार कराने का आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि युवतियों के बयानों और मौके से मिली सामग्री के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। संचालक और मैनेजर पर पीटा एक्ट में केस पुलिस ने कार्रवाई के बाद स्पा सेंटर के संचालक हरविंदर सिंह ग्रोवर, निवासी टिकरापारा और मैनेजर मुकेश कुमार वर्मा, निवासी भिलाई-3 के खिलाफ मामला दर्ज किया है। दोनों के खिलाफ देवेंद्र नगर थाने में अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (PITA Act), 1956 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। स्पा सेंटर की गतिविधियों की जांच जारी पुलिस अब स्पा सेंटर से जुड़े दस्तावेजों, वहां काम करने वाली युवतियों और संचालक-मैनेजर की भूमिका की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवतियों को दूसरे राज्यों से किस माध्यम से रायपुर लाया गया और स्पा सेंटर में उनकी नियुक्ति किस तरह हुई। इसके अलावा पुलिस यह जानकारी भी जुटा रही है कि सेंटर में कथित गतिविधियां कब से संचालित हो रही थीं और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं। फिलहाल पुलिस ने आरोपों और जांच के दौरान मिली सामग्री के आधार पर कार्रवाई शुरू की है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
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सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
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MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
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इंदौर में H1N1 संक्रमित महिला की मौत, कोविड-19 भी मिला था पॉजिटिव

इंदौर। इंदौर के एक निजी अस्पताल में H1N1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमित महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला शाजापुर की रहने वाली थी और करीब 10 दिन से इंदौर के अस्पताल में भर्ती थी। गुरुवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। महिला एक सरकारी डॉक्टर की पत्नी बताई गई है। नजदीकी लोगों के मुताबिक महिला को 28 अगस्त से बुखार, खांसी और सर्दी के लक्षण थे। 1 सितंबर को हुई H1N1 जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए इंदौर लाया गया। वहीं, 2 सितंबर की रिपोर्ट में महिला के इन्फ्लुएंजा के साथ कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई। महिला शाजापुर के आदित्य नगर की रहने वाली बताई गई है। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक भी पहुंची है। इससे पहले उज्जैन की महिला की हुई थी मौत इससे पहले उज्जैन के ऋषि नगर निवासी 60 वर्षीय सरोज नागर की भी करीब दो सप्ताह पहले इंदौर के कोकिलाबेन अस्पताल में स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इंदौर लाया गया था, जहां करीब 16 दिन तक इलाज चला। जांच में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसे मध्य प्रदेश में इस सीजन में स्वाइन फ्लू से पहली मौत बताया गया था। वहीं, पिछले सप्ताह धार की एक स्वाइन फ्लू संक्रमित महिला को भी इलाज के लिए इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। क्या है स्वाइन फ्लू? स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस से होने वाला इन्फ्लुएंजा संक्रमण है। यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू की तरह हो सकते हैं, जिनमें बुखार, खांसी और सर्दी जैसे लक्षण शामिल हैं। यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों और श्वसन कणों के संपर्क में आने से फैल सकता है। कैसे फैलता है H1N1 संक्रमण? H1N1 संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक श्वसन बूंदों और कणों के जरिए फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। 2009 में H1N1 के व्यापक प्रसार के दौरान इसे लेकर काफी चिंता देखी गई थी। हालांकि, अच्छी तरह पकाए गए सूअर के मांस से H1N1 संक्रमण होने का जोखिम नहीं माना जाता, क्योंकि पर्याप्त तापमान पर खाना पकाने से वायरस नष्ट हो जाता है। लक्षण दिखने पर सावधानी जरूरी बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या फ्लू जैसे लक्षण होने पर विशेष रूप से गंभीर लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। संक्रमण की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच के आधार पर की जानी चाहिए। इंदौर में सामने आए इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग तक जानकारी पहुंचने से स्थानीय स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ने की संभावना है।
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बिलासपुर में कांग्रेस का संगठन प्रशिक्षण शुरू, ब्लॉक अध्यक्षों को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति

बिलासपुर। आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार से बिलासपुर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, PCC चीफ दीपक बैज और वरिष्ठ नेता ताम्रध्वज साहू समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 सितंबर तक चलेगा। इसमें ब्लॉक अध्यक्षों को संगठन विस्तार, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी बनाने की रणनीति समझाई जा रही है। कांग्रेस का फोकस ब्लॉक स्तर से संगठन को मजबूत करते हुए गांव और बूथ तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है। 22 सितंबर तक अलग-अलग संभागों में प्रशिक्षण कांग्रेस का प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 सितंबर तक अलग-अलग संभागों में आयोजित किया जाएगा। बिलासपुर के बाद 15 सितंबर को सरगुजा संभाग में ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इसके बाद 20 सितंबर को रायपुर संभाग में प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। वहीं, बस्तर और दुर्ग संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले ही पूरा हो चुका है। दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना बिलासपुर पहुंचे PCC चीफ दीपक बैज ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए सरकार के पोस्टर अभियान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “पोस्टर चमकाने से चेहरा नहीं चमकता।” बैज ने आरोप लगाया कि सरकार के पास पोस्टर वार के अलावा जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए कुछ नहीं है। रोजगार, किसान और स्वास्थ्य के मुद्दे उठाए दीपक बैज ने कहा कि सरकार को रोजगार, किसानों, शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का चेहरा चमकाने के लिए 1,100 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। बैज ने दावा किया कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा सरकार और मंत्री खर्च कर रहे हैं, जबकि गांवों में विकास कार्यों की स्थिति ठीक नहीं है। बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों को पार्टी की नीतियों और संगठनात्मक गतिविधियों को गांव और बूथ स्तर तक पहुंचाने की रणनीति बताई जा रही है। पार्टी का लक्ष्य ब्लॉक अध्यक्षों के माध्यम से स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना और बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करना है। प्रशिक्षण में संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं से संपर्क और चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
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भोपाल में RGPV की बस डिवाइडर पर चढ़कर बिजली के खंभे से टकराई, 11 घायल; छात्र वेंटिलेटर पर

भोपाल। राजधानी भोपाल में शुक्रवार सुबह वीआईपी रोड पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) की बस हादसे का शिकार हो गई। राजा भोज प्रतिमा के आगे घुमावदार मोड़ पर बस डिवाइडर पर चढ़कर बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसे के बाद बस एक तरफ करीब 75 प्रतिशत तक झुक गई, जिससे अंदर बैठे छात्रों और कर्मचारियों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में आठ विद्यार्थियों और स्टाफ के तीन सदस्यों समेत कुल 11 लोग घायल हुए हैं। सीहोर निवासी छात्र अजय परमार की हालत गंभीर बताई गई है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है, जबकि छात्र बसंत कुमार के पैर में गंभीर चोट आने के बाद ऑपरेशन करना पड़ा। पुलिस ने बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आधा घंटा लेट थी बस, तेज रफ्तार से चलाने का आरोप बस में सवार छात्रों के मुताबिक, बस निर्धारित समय से करीब आधा घंटा देरी से चल रही थी। आरोप है कि इसी वजह से चालक तेज रफ्तार में बस चला रहा था। हादसे से महज दो मिनट पहले एक छात्र ने मैसेज के जरिए प्रबंधन से चालक की लापरवाही की शिकायत भी की थी। छात्रों के इन आरोपों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कॉलेज पहुंचने में देरी के कारण बस तेज गति से चलाए जाने की आशंका जताई गई है। मोड़ पर बस को नियंत्रित नहीं कर पाया चालक कोहेफिजा थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर के मुताबिक, बस सुबह 12 नंबर स्टॉप से विद्यार्थियों और स्टाफ को लेकर रवाना हुई थी। रास्ते में अन्य यात्री भी बस में सवार हुए। वीआईपी रोड पर साजिदा नगर मस्जिद के पास घुमावदार मोड़ पर चालक बस को नियंत्रित नहीं कर पाया। पुलिस के अनुसार, बस चालक की तरफ के डिवाइडर पर चढ़ गई और बिजली के खंभे से टकराकर एक ओर झुक गई। हादसे के बाद बस को सीधा कर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। छात्रों ने बताया, अचानक ब्रेक लगाने से हुआ हादसा छात्र सुमित के मुताबिक, वह माता मंदिर से बस में सवार हुआ था। उसने बताया कि बस करीब आधा घंटा लेट थी और चालक तेज गति से वाहन चला रहा था। सुमित के अनुसार, वीआईपी रोड पर करबला के पास घुमावदार मोड़ आने पर चालक ने अचानक ब्रेक लगाए। इसी दौरान बस का अगला पहिया डिवाइडर पर चढ़ गया और बस अनियंत्रित हो गई। छात्रा खुशी गौर ने बताया कि वह चालक के सामने वाली तरफ की सीट पर बैठी थी। राजा भोज प्रतिमा और करबला के बीच मोड़ पर बस डिवाइडर से टकराई तो उसने कूदकर अपनी जान बचाई। खुशी के मुताबिक, हादसे के दौरान एक छात्र के ऊपर सीट गिर गई, जिससे उसके गले और हाथ में गंभीर चोटें आईं। नौ घायलों को अस्पताल से छुट्टी, दो का इलाज जारी हादसे के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने बस में सवार विद्यार्थियों और कर्मचारियों को बाहर निकालकर हमीदिया अस्पताल पहुंचाया। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नौ घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। सीहोर निवासी अजय परमार की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। वहीं, बसंत कुमार के पैर में फ्रैक्चर होने पर ऑपरेशन किया गया। छात्रा खुशी गौर की आंख के ऊपर भी चोट आई है। घटना की सूचना मिलने के बाद RGPV के स्टाफ और कुलगुरु डॉ. आलोक शर्मा अस्पताल पहुंचे और घायलों के उपचार की जानकारी ली। बसों की अधिकतम गति 50 किमी प्रति घंटा निर्धारित RGPV की बसें आउटसोर्स व्यवस्था के तहत संचालित होती हैं। करीब 20 बसें अलग-अलग रूट पर विद्यार्थियों और कर्मचारियों को विश्वविद्यालय तथा UIT-RGPV तक पहुंचाती हैं। दुर्घटनाग्रस्त बस रूट नंबर 12 पर चलती है। यह दाना पानी से 10 नंबर, 11 नंबर, अरेरा कॉलोनी और माता मंदिर होते हुए वीआईपी रोड के रास्ते कॉलेज पहुंचती है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक, बसों की अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। हादसे के बाद बस की गति और चालक की लापरवाही से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। कुलगुरु बोले- सभी बसों में लगेंगे स्पीड गवर्नर, GPS से होगी ट्रैकिंग RGPV के कुलगुरु डॉ. आलोक शर्मा ने कहा कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। सभी बसों में स्पीड गवर्नर लगाने और GPS के जरिए उनकी ट्रैकिंग सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी। कुलगुरु के मुताबिक, टेंडर की शर्तों के अनुसार बसों की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। शुरुआती जानकारी में दुर्घटनाग्रस्त बस में स्पीड गवर्नर नहीं होने और चालक की लापरवाही की आशंका सामने आई है। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना में तेज रफ्तार, तकनीकी कमी या अन्य किसी कारण की कितनी भूमिका थी।

इंदौर में LIG से नौलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने PIL खारिज की

इंदौर। इंदौर में LIG चौराहे से नौलखा चौराहे तक प्रस्तावित 6.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने परियोजना के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट ने निर्माण की तकनीकी निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने और परियोजना की कुल लागत व निर्माण पूरा होने की संभावित समय-सीमा सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डिवीजन बेंच ने 26 अक्टूबर को यह आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि परियोजना से जुड़ी तकनीकी चिंताओं पर विचार करना जरूरी है, लेकिन इनके आधार पर पूरे प्रोजेक्ट को रोकना उचित नहीं होगा। नौ चौराहों पर अलग-अलग फ्लाईओवर बनाने का दिया था सुझाव चार्टर्ड इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता अतुल शेठ ने एलिवेटेड कॉरिडोर के विकल्प के रूप में प्रमुख चौराहों पर अलग-अलग फ्लाईओवर या ग्रेड सेपरेटर बनाने का सुझाव दिया था। उन्होंने MR-9, LIG, इंडस्ट्री हाउस, गिटार, पलासिया, गीताभवन, शिवाजी वाटिका, GPO और नौलखा चौराहे पर फ्लाईओवर बनाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलों में एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट के ट्रैफिक सर्वे और इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के तकनीकी अध्ययन का हवाला दिया। उनका तर्क था कि AB रोड पर ज्यादातर वाहन लंबी दूरी तक सीधे चलने के बजाय एक-दो चौराहों के बाद मुड़ जाते हैं। ऐसे में पूरे हिस्से पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के बजाय अलग-अलग चौराहों पर फ्लाईओवर बनाना अधिक उपयोगी हो सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, 5 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट में अलग-अलग चौराहों पर फ्लाईओवर बनाने से यातायात दक्षता में 42% से अधिक सुधार की संभावना जताई गई थी, जबकि एलिवेटेड कॉरिडोर से मिलने वाला लाभ 10% से कम बताया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन अध्ययनों की पर्याप्त तुलना किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाया गया। हालांकि, ये आंकड़े याचिकाकर्ता की दलीलों का हिस्सा थे। कोर्ट ने इन्हें अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना। सरकार ने बताया भविष्य की जरूरतों के लिए जरूरी राज्य सरकार ने परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि AB रोड पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और जमीन पर सड़क चौड़ी करने की गुंजाइश सीमित है। प्रस्तावित कॉरिडोर से मौजूदा छह लेन के अलावा चार अतिरिक्त लेन उपलब्ध होंगी। इससे वर्तमान और भविष्य की यातायात जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। वहीं, इंदौर उत्थान अभियान समिति ने भी परियोजना के समर्थन में दलील दी। समिति के मुताबिक, अलग-अलग फ्लाईओवर बनाने से वाहनों को बार-बार ऊपर चढ़ना और नीचे उतरना पड़ेगा। फ्लाईओवर से उतरने वाले वाहनों के सामान्य यातायात में शामिल होने पर जाम की आशंका बनी रह सकती है। इससे ईंधन की खपत बढ़ने की संभावना भी जताई गई। BRTS हटने के बाद बदले यातायात के हालात हाईकोर्ट ने माना कि इंदौर में बढ़ते यातायात को देखते हुए सड़क की अतिरिक्त क्षमता विकसित करने की जरूरत है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट फरवरी-मार्च 2024 की थी, जब शहर में BRTS संचालित था। BRTS हटने के बाद सड़क पर अतिरिक्त जगह उपलब्ध हुई, लेकिन आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात का दबाव भी बढ़ा है। कोर्ट के मुताबिक, पुराने सर्वे का आकलन मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करना जरूरी है। पीठ ने कहा कि अलग-अलग चौराहों पर छोटे फ्लाईओवर कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं, लेकिन उनसे सड़क की कुल क्षमता उतनी नहीं बढ़ेगी। फ्लाईओवर से उतरने वाले वाहनों के सामान्य यातायात में मिलने पर जाम की आशंका भी बनी रह सकती है। हर महीने निर्माण की समीक्षा करेगी उच्चस्तरीय समिति हाईकोर्ट ने परियोजना की तकनीकी निगरानी के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति में PWD और IDA के दो-दो सदस्य, एसजीएसआईटीएस के दो सदस्य, याचिकाकर्ता अतुल शेठ और इंदौर उत्थान अभियान समिति के दो सदस्य शामिल होंगे। समिति के सदस्यों के लिए सिविल या स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में BE या BTech की न्यूनतम योग्यता निर्धारित की गई है। एसजीएसआईटीएस की ओर से नामित अनुभवी प्राध्यापकों को छोड़कर अन्य सदस्यों के पास पुल निर्माण का अनुभव होना चाहिए। समिति महीने में कम से कम एक बार निर्माण कार्य की समीक्षा करेगी और तकनीकी समस्याओं पर PWD को सलाह देगी। जरूरत पड़ने पर मुख्य अभियंता अतिरिक्त बैठक बुला सकेंगे। समिति के फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाएंगे। 350 करोड़ से 750 करोड़ रुपये तक लागत पहुंचने का दावा याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वर्ष 2019-20 में परियोजना की लागत करीब 350 करोड़ रुपये बताई गई थी। उनके मुताबिक, छह साल में कई बदलाव होने के बावजूद परियोजना की अंतिम लागत स्पष्ट नहीं है। याचिकाकर्ता ने बिजली की लाइनों और अन्य सुविधाओं को शिफ्ट करने का खर्च जोड़कर कुल लागत 700 से 750 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई। हालांकि, ये आंकड़े याचिकाकर्ता के दावे हैं। हाईकोर्ट ने परियोजना की अंतिम लागत तय नहीं की है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को परियोजना की कुल लागत और निर्माण पूरा होने की संभावित समय-सीमा सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। नीतिगत फैसले में हस्तक्षेप का पर्याप्त आधार नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर राज्य सरकार का नीतिगत निर्णय है। जब तक दुर्भावना, अवैधता या मनमानी साबित न हो, ऐसे निर्णय में न्यायिक हस्तक्षेप का पर्याप्त आधार नहीं बनता। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख किया गया। जनहित याचिका खारिज होने के बाद परियोजना आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब निर्माण की तकनीकी निगरानी, लागत और संभावित समय-सीमा को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों के पालन पर नजर रहेगी।

भारत से व्यापार पर बैन के बावजूद पाकिस्तान में भारतीय सामान की मांग बढ़ी, तीसरे देशों के जरिए हो रही सप्लाई

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे व्यापार पर रोक के बावजूद पाकिस्तानी बाजार में भारतीय सामान की मांग बढ़ने का दावा किया गया है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के दौरान पाकिस्तान ने भारत से 61.74 मिलियन डॉलर का सामान आयात किया। उपलब्ध आंकड़ों में यह रकम पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 69% अधिक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में पाकिस्तान ने भारत से करीब ₹3,478 करोड़ का सामान खरीदा था। वहीं, इस अवधि में पाकिस्तान से भारत को होने वाला आयात शून्य रहने की बात कही गई है। सीधे व्यापार पर रोक, फिर कैसे पहुंच रहा भारतीय सामान? 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे व्यापार पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद भारतीय उत्पादों की मांग पूरी करने के लिए तीसरे देशों के जरिए व्यापार होने की बात सामने आई है। व्यापार से जुड़े दावों के मुताबिक, कुछ कारोबारी भारत में बने सामान को पहले दुबई, सिंगापुर या श्रीलंका जैसे देशों में भेजते हैं। इसके बाद वहां से उसे पाकिस्तान पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया में सामान की पैकेजिंग और दस्तावेजों में बदलाव किए जाने की भी बात कही गई है। हालांकि, किसी उत्पाद का तीसरे देश से होकर गुजरना अपने आप में गैरकानूनी नहीं होता। उसकी वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यापार, मूल देश की जानकारी, सीमा शुल्क और संबंधित प्रतिबंधों के नियमों का पालन किया गया है या नहीं। तीसरे देशों के जरिए व्यापार कैसे होता है? व्यापार के इस तरीके को समझने के लिए तीन प्रमुख चरण बताए जाते हैं: GTRI का अनुमान: अनौपचारिक व्यापार सालाना 10 अरब डॉलर से ज्यादा? थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के हवाले से दावा किया गया है कि तीसरे देशों के माध्यम से भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला अनौपचारिक व्यापार सालाना 10 अरब डॉलर यानी करीब ₹83,000 करोड़ से अधिक हो सकता है। यह आंकड़ा एक अनुमान है। इसे भारत-पाकिस्तान के बीच दर्ज आधिकारिक व्यापार के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को महंगा पड़ सकता है भारतीय सामान सीधे व्यापार के बजाय तीसरे देशों के जरिए सामान पहुंचाने पर परिवहन, भंडारण और अन्य कारोबारी खर्च बढ़ सकते हैं। ऐसे में भारतीय उत्पाद पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को अधिक कीमत पर मिलने की संभावना रहती है। फिलहाल, भारत-पाकिस्तान के बीच प्रत्यक्ष व्यापार पर लगी रोक के बावजूद भारतीय सामान की मांग और तीसरे देशों के जरिए होने वाली आपूर्ति को लेकर व्यापारिक दावे चर्चा में हैं। इन दावों के वास्तविक पैमाने और संबंधित लेन-देन की वैधता का आकलन करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत है।
MLC Election Results 2026: यूपी, बिहार और कर्नाटक में BJP की बड़ी जीत

MLC Election Results 2026: यूपी, बिहार और कर्नाटक में BJP की बड़ी जीत

MLC Election Results 2026 के नतीजों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक से आए चुनावी नतीजों ने राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इन राज्यों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है, जबकि बिहार में अनंत सिंह के भाई का तीसरे स्थान पर रहना चर्चा का विषय बन गया है। यूपी, बिहार और कर्नाटक में बीजेपी का प्रदर्शन विधान परिषद चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने कई सीटों पर अपनी मजबूत स्थिति दिखाई है। इन परिणामों को पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला देखने को मिला, वहीं नतीजों के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं। बिहार में अनंत सिंह के भाई तीसरे नंबर पर बिहार के चुनावी नतीजों में अनंत सिंह के भाई का तीसरे स्थान पर रहना चर्चा में है। चुनाव में उम्मीदवारों के प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, इस परिणाम का राज्य की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। चुनावी नतीजों पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर चुनाव परिणाम किसी भी राजनीतिक दल के लिए जनता के रुख को समझने का एक अहम संकेत होते हैं। यूपी, बिहार और कर्नाटक के इन नतीजों के बाद राजनीतिक दल अपनी आगामी रणनीति पर ध्यान देंगे। खासकर बिहार में चुनावी प्रदर्शन को लेकर आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दिवाली से पहले सोना-चांदी सस्ता, अक्टूबर में सोना ₹7,000 और चांदी ₹20,000 तक गिरी

नई दिल्ली। दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 27 अक्टूबर को भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में कमी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर ₹279 गिरकर करीब ₹1.41 लाख रह गया। वहीं, चांदी की कीमत ₹1,980 प्रति किलो घटकर करीब ₹1.92 लाख पर आ गई। अक्टूबर में अब तक सोना करीब ₹7,000 और चांदी लगभग ₹20,000 सस्ती हो चुकी है। इससे पहले सितंबर में भी दोनों धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट आई थी। उस महीने सोना करीब ₹8,000 और चांदी लगभग ₹15,000 सस्ती हुई थी। सितंबर में भी गिरे थे सोने-चांदी के भाव दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त को सोने की कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम थी, जो 30 सितंबर तक घटकर ₹1.48 लाख रह गई। इसी तरह चांदी का भाव ₹2.37 लाख प्रति किलो से गिरकर ₹2.22 लाख पर आ गया था। लगातार गिरावट के बीच निवेशकों और खरीदारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में कीमतें और नीचे जाएंगी या बाजार में फिर तेजी लौटेगी। क्या आगे भी जारी रहेगी कीमतों में गिरावट? विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल सोने-चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कीमतों पर वैश्विक ब्याज दरों, आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारकों का असर पड़ता है। एक्सपर्ट की सलाह: किस्तों में करें खरीदारी कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के मुताबिक, सोने-चांदी की खरीदारी एक साथ करने के बजाय किस्तों में करना बेहतर रणनीति हो सकती है। खरीदार कुछ मात्रा अभी खरीद सकते हैं और बाकी खरीदारी 15 से 20 दिन के अंतराल पर कर सकते हैं। उनकी सलाह है कि निवेश के लिए केवल एक-दो महीने का नजरिया रखने के बजाय छह महीने से एक साल तक की अवधि को ध्यान में रखा जाए। हालांकि, निवेश से पहले अपनी जरूरत, बजट और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें सोना खरीदते समय ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का हॉलमार्क जरूर जांचें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की पुष्टि करने में मदद मिलती है। आभूषण पर हॉलमार्क और उससे जुड़ी पहचान की जानकारी ध्यान से देखें। केवल किसी अल्फान्यूमेरिक नंबर को देखकर ही सोने की शुद्धता तय न करें। 2. वजन और कीमत की पुष्टि करें सोना खरीदने से पहले उसका वजन और उस दिन का बाजार भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमतें अलग-अलग होती हैं। बिल में सोने की कीमत, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स की जानकारी भी जरूर देखें। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके 1. मैग्नेट टेस्ट: शुद्ध चांदी आमतौर पर चुंबक से नहीं चिपकती। हालांकि, केवल इस जांच के आधार पर चांदी के असली या नकली होने का फैसला नहीं किया जा सकता। 2. आइस टेस्ट: चांदी में ऊष्मा तेजी से संचरित होती है, इसलिए उसके संपर्क में रखी बर्फ तेजी से पिघल सकती है। लेकिन यह जांच भी चांदी की शुद्धता का पक्का प्रमाण नहीं है। 3. स्मेल टेस्ट: शुद्ध चांदी में आमतौर पर तेज धातु जैसी गंध नहीं होती। हालांकि, गंध के आधार पर चांदी की प्रामाणिकता तय करना भरोसेमंद तरीका नहीं है। 4. क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी काला निशान आ सकता है। यह चांदी की सतह पर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण हो सकता है, लेकिन इससे उसकी शुद्धता की पुष्टि नहीं होती। चांदी की शुद्धता की सही जांच के लिए प्रमाणित विक्रेता से खरीदारी करें और जरूरत पड़ने पर अधिकृत जांच केंद्र की मदद लें।

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