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सीहोर में अब तक 26.75 इंच बारिश, पिछले साल से 0.74 इंच कम; अगले 48 घंटे भी बारिश के आसार

सीहोर। जिले में मानसूनी गतिविधियों के चलते रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। कहीं रिमझिम तो कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। भू-अभिलेख विभाग की ओर से 16 अगस्त को जारी दैनिक वर्षा आंकड़ों के अनुसार, सीहोर जिले में 1 जून से अब तक औसतन 26.75 इंच बारिश दर्ज की गई है। सीहोर में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश 1 जून से 16 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक सीहोर वर्षामापी केंद्र में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसके बाद रहटी में 29.58 इंच, भैरूंदा में 27.12 इंच और बुधनी में 26.37 इंच बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में आष्टा में 26.18 इंच, इछावर में 25.82 इंच, श्यामपुर में 24.75 इंच और जावर में सबसे कम 21.45 इंच बारिश हुई है। पिछले साल के मुकाबले 0.74 इंच कम बारिश पिछले साल इसी अवधि तक सीहोर जिले में औसतन 27.49 इंच बारिश हुई थी। इस साल यह आंकड़ा 26.75 इंच है। यानी पिछले साल की तुलना में अब तक करीब 0.74 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। जिले की सामान्य औसत वार्षिक बारिश 45.21 इंच है। ऐसे में सीहोर में अभी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा होने में काफी बारिश बाकी है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मानसूनी सिस्टम और सक्रिय ट्रफ लाइन के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में लगातार नमी पहुंच रही है। इसके प्रभाव से सीहोर और आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला बना हुआ है। अगले 48 घंटे भी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। जिले के कई हिस्सों में रिमझिम से लेकर हल्की और मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की भी संभावना है। ऐसे में मौसम का यह दौर अगले दो दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है।
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गोपाल भार्गव बोले- भाजपा का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘कुत्तों की चिंता नहीं की जाती’

सागर। रहली विधानसभा से 9 बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता अपने आप को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री भी है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान मंच से संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “लोग तो ऐसे भौंकते रहते हैं। हाथी अपनी मस्त चाल चलता है और कुत्ते उसके पीछे लगे रहते हैं। कुत्तों की चिंता नहीं की जाती।” बोले- 2-4 चीटियां मिलकर गन्ना नहीं खींच सकतीं गोपाल भार्गव ने कहा कि ऐसी कोशिश करने वालों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता खुद को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र है और सभी लोग बराबर हैं। कोई सेवक के रूप में काम कर रहा है तो कोई जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। भार्गव ने इसी दौरान उदाहरण देते हुए कहा कि “2-4 चीटियां मिलकर गन्ने को नहीं खींच सकतीं।” निवास बोर्ड पर चिपकाया गया था ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ का पर्चा दरअसल, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति ने गढ़ाकोटा स्थित गोपाल भार्गव के निवास ‘गणनायक’ के बाहर सड़क पर लगे निवास बोर्ड पर ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ लिखा हुआ पंपलेट चिपका दिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। वीर दुर्गादास राठौर जयंती कार्यक्रम के दौरान जब एक व्यक्ति ने इसी घटना का जिक्र किया, तब गोपाल भार्गव ने मंच से यह बयान दिया। ‘सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं’ भार्गव के बयान का संदेश साफ था कि राजनीतिक पद या भूमिका को लेकर किसी बाहरी व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी में महत्वपूर्ण है और लोकतंत्र में सभी को बराबर अधिकार प्राप्त हैं।
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भोपाल में राजा भोज नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप का समापन, CM बोले- हर विधानसभा में बनेगा स्टेडियम

भोपाल। राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (रैंकिंग)-2026 के तीसरे संस्करण का रविवार को भोपाल के बोट क्लब में समापन हुआ। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्टेडियम विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन स्टेडियमों में अलग-अलग खेलों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए खुशी की बात है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर हिस्से की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर देना है। 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा चैंपियनशिप में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने 110 रेस में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल (NSS) भोपाल ने पहला स्थान हासिल किया। नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब (NYSC) गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। तीन साल में 16वें-17वें से तीसरे स्थान पर पहुंचा MP CM मोहन यादव ने कहा कि खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति लगातार बेहतर हुई है। तीन साल पहले तक प्रदेश देश में खेलों के मामले में 16वें-17वें स्थान के आसपास था, लेकिन अब वह तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने इसका श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और सरकार की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता को दिया। CM ने कहा कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की उपलब्धियां दिखाई दे रही हैं। 18 खेलों की 11 अकादमियां संचालित मुख्यमंत्री के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्तमान में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियां संचालित हैं। सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के साथ उनकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में खेलों को शिक्षा का हिस्सा बनाने के साथ कोच के करियर को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी रखी गई हैं। खिलाड़ियों के साथ उनके प्रशिक्षकों के भविष्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर निशाना कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के बयानों की आलोचना करते हुए उनसे देश से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना से जुड़ा है। सारंग बोले- बड़े तालाब का खेल और पर्यटन में हो रहा उपयोग खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री का खेलों के प्रति जुड़ाव लगातार दिखाई दे रहा है। उन्होंने भोपाल के बड़े तालाब को खेल और पर्यटन दोनों के लिए उपयोगी बताया। सारंग ने कहा कि प्रदेश खेलों में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है और 18 खेलों की 11 अकादमियां खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार कर रही हैं। उन्होंने भोपाल में खेल संग्रहालय बनाने की दिशा में पहल करने का आग्रह भी मुख्यमंत्री से किया। खिलाड़ियों को किया गया सम्मानित समारोह में अलग-अलग खेलों में प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इनमें कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य, शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल, पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा, कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े शामिल रहे। 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। NSS भोपाल चैंपियन, NYSC गोवा उपविजेता राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप-2026 में NSS भोपाल विजेता रहा। टीम में वायु चंद्रवंशी, माही वर्मा, तुलसी पटले, एकलव्य वायम, वंशिका शिकारवार, आर्यन पाटीदार, प्रार्थना मोई, अंकित सिसोदिया, समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। टीम में शशांक जाधव, हृदय जोशी, मोह रिजवान, शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल थे। अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों ने दिखाया हुनर चैंपियनशिप के दौरान खिलाड़ियों ने भोपाल के अपर लेक की लहरों पर सेलिंग का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। खिलाड़ियों ने संतुलन, गति और तकनीक के जरिए अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। वाटर स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन रहा भोपाल भोपाल की झीलें सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग और केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए अनुकूल हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी। अकादमी में सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग, केनोइंग और स्लालम की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक हासिल किए हैं। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।
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MP में कंप्यूटर ऑपरेटरों पर सरकार का बड़ा फैसला, 30 दिन में CPCT और साइबर सिक्योरिटी कोर्स जरूरी

भोपाल: मध्य प्रदेश के नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषद में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। अब ऑपरेटरों को तकनीकी दक्षता के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़ी अनिवार्य योग्यताएं पूरी करनी होंगी। इसके लिए 30 दिन की समय-सीमा दी गई है। तय समय में शर्तें पूरी नहीं करने वालों के मानदेय या वेतन भुगतान पर रोक लग सकती है। यह आदेश संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास की अपर आयुक्त मिशा सिंह की ओर से जारी किया गया है। आदेश सभी नगर निगम आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को भेजा गया है। क्यों लिया गया फैसला? विभाग के अनुसार नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटर कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन पोर्टल और आईटी आधारित प्रणालियों का संचालन करते हैं। इनमें नागरिक सेवाओं, राजस्व, योजनाओं और अन्य विभागीय कार्यों से जुड़ा डेटा शामिल होता है। सरकारी डेटा की सुरक्षा और ऑनलाइन कामकाज को बेहतर बनाने के लिए ऑपरेटरों की तकनीकी दक्षता और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी मजबूत करना जरूरी माना गया है। CPCT पास करना अनिवार्य नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए CPCT (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा पास होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा उन्हें केंद्र सरकार के iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से जुड़े कम से कम 10 सर्टिफिकेट कोर्स पूरे करने होंगे। 50 क्रेडिट पॉइंट भी जरूरी ऑपरेटरों को iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों को पूरा करके कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने होंगे। इन कोर्स में कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, Microsoft Word और Excel, डेटा एंट्री, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सेफ्टी जैसे विषय शामिल हैं। AI और डेटा मैनेजमेंट की भी ट्रेनिंग जारी सूची में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कोर्स भी शामिल किए गए हैं। इनमें ‘AI Using Google Bard and ChatGPT for Beginners’ जैसे कोर्स बताए गए हैं। इसके साथ ही Data Driven Decision Making और Responsible Data Management जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण लेना होगा। 30 दिन में शर्तें पूरी नहीं कीं तो वेतन पर असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में अनिवार्य योग्यताएं और प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले ऑपरेटरों के संबंध में आगे नियोजन में रखने या हटाने तथा मानदेय/वेतन भुगतान की कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी। यानी 30 दिन की समय-सीमा कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करने पर उनकी नौकरी या भुगतान प्रभावित हो सकता है। नगर निकायों में कितने कंप्यूटर ऑपरेटर? किसी निकाय में कंप्यूटर ऑपरेटरों की वास्तविक संख्या स्वीकृत पदों, आउटसोर्स व्यवस्था, जनसंख्या, वार्डों और विभागों की जरूरत पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर अनुमान इस तरह बताया जाता है— बड़े नगर निगमों में अलग-अलग जोन और विभाग होने के कारण ऑपरेटरों की संख्या ज्यादा हो सकती है। इन विभागों में होता है कंप्यूटर ऑपरेटरों का काम कंप्यूटर ऑपरेटर आमतौर पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, संपत्ति कर, जलकर, राजस्व, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्थापना, लेखा और अन्य ऑनलाइन नागरिक सेवाओं से जुड़े काम संभालते हैं। ऐसे में सरकार का फोकस तकनीकी दक्षता के साथ सरकारी डेटा और ऑनलाइन सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने पर है।
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PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर विधायक आरिफ मसूद ने उठाए सवाल, मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र नहीं होने पर जताई नाराजगी

भोपाल: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख किए जाने के बाद भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम नहीं लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। मसूद ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा कि देश की आजादी की लड़ाई किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम थी। मसूद ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा के दौरान मुस्लिम सेनानियों का उल्लेख नहीं होना अफसोसजनक है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले पर देश से माफी मांगने की मांग भी की है। ‘मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी मिलेंगे’ अपने ज्ञापन में आरिफ मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख किया, लेकिन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यदि इंडिया गेट स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल या अंडमान-निकोबार की सेलुलर जेल की दीवारों पर दर्ज नाम देखें तो उन्हें मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी मिलेंगे। मसूद ने दावा किया कि 1757 से 1947 तक चले आजादी के संघर्ष से जुड़े दस्तावेजों में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के अनेक प्रमाण मिलते हैं। मजनू शाह फकीर और 1857 के विद्रोह का दिया उदाहरण विधायक ने अपने ज्ञापन में बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में वर्णित फकीर एवं संन्यासी विद्रोह का उल्लेख किया। उन्होंने मजनू शाह फकीर और उनके साथियों को अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले प्रमुख नामों में बताया। मसूद के अनुसार, मजनू शाह के बाद मूसा शाह, चिराग अली और नूरुल मोहम्मद ने भी इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1857 के विद्रोह का जिक्र करते हुए अहमदुल्ला शाह मदरासी के योगदान का भी उल्लेख किया। मसूद ने कहा कि उन्होंने दिल्ली, पटना, फैजाबाद और कलकत्ता समेत कई क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों की कार्रवाई का भी किया जिक्र ज्ञापन में मसूद ने 1857 के दौरान मुस्लिम उलेमा और अन्य लोगों पर अंग्रेजों की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि विद्रोह को दबाने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बिना मुकदमे के फांसी दी गई थी। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और लेखकों के संदर्भ दिए हैं। ‘आजादी के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित न करें’ आरिफ मसूद ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों ने योगदान दिया था। ऐसे में सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को समान सम्मान मिलना चाहिए। मसूद ने प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर कहा कि मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं किए जाने से उन लोगों के योगदान की तौहीन हुई है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पर माफी मांगने की मांग की है।
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शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर ले जाते समय मरीज की मौत, बेटे ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर किए गए 50 वर्षीय हरिराम प्रजापति की रास्ते में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद बेटे अरुण प्रजापति ने शव के पास बैठकर वीडियो बनाया और डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ तथा एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर किए जाने की बात कही है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पैरों में दर्द और मुंह खोलने में परेशानी मामला खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव का है। अरुण के मुताबिक, दोपहर में उनके पिता हरिराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके पैरों में दर्द था और मुंह भी नहीं खुल पा रहा था। परिजन उन्हें पहले खनियाधाना के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां कुछ घंटे उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बेटे का आरोप- डॉक्टर और स्टाफ ने ठीक से इलाज नहीं किया अरुण का आरोप है कि रात में शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उनके पिता का उचित इलाज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मरीज के उपचार पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल में गेम खेल रहे थे। अरुण के मुताबिक, जब उन्होंने पिता का इलाज करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ से कहा तो उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस के लिए 4:30 बजे फोन, 6 बजे पहुंची अरुण ने एंबुलेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, सुबह करीब 4:30 बजे एंबुलेंस के लिए फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस करीब 6 बजे पहुंची। इसके बाद हरिराम को ग्वालियर ले जाने की तैयारी की गई। बेटे का कहना है कि इस दौरान समय निकलता गया और पिता की हालत लगातार बिगड़ती गई। ड्राइवर से तेज चलाने को कहा, रास्ते में मौत अरुण के मुताबिक, ग्वालियर जाते समय उन्होंने एंबुलेंस चालक से वाहन तेज चलाने के लिए कहा, लेकिन चालक ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने से इनकार कर दिया। ग्वालियर पहुंचने से पहले ही हरिराम की हालत और बिगड़ गई और रास्ते में उनकी मौत हो गई। अरुण के अनुसार, सुबह करीब 7:30 बजे ग्वालियर पहुंचने से पहले पिता ने दम तोड़ दिया। बेटे ने लगाए गंभीर आरोप अरुण ने वीडियो में आरोप लगाया कि उनके पिता की मौत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और एंबुलेंस व्यवस्था की कथित लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप बेटे के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने क्या कहा? मेडिकल कॉलेज अधीक्षक आशुतोष चौरसी ने बताया कि मरीज रात करीब 3 बजे रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा था। उस समय मेडिकल कॉलेज के सभी बेड फुल थे। डॉक्टरों ने मरीज को प्राथमिक उपचार दिया और इसके बाद उसे ग्वालियर रेफर कर दिया गया। जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति मामले में एक तरफ परिवार ने इलाज में लापरवाही और एंबुलेंस मिलने में देरी के आरोप लगाए हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने और बेड उपलब्ध नहीं होने के बाद ग्वालियर रेफर किए जाने की बात कही है। अब मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज के अस्पताल पहुंचने का समय, दिए गए उपचार, रेफर करने का चिकित्सकीय कारण और एंबुलेंस कॉल व पहुंचने के समय की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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सिम्स के इंटर्न डॉक्टरों ने बढ़ाया स्टाइपेंड मांगा, विधायक अमर अग्रवाल से की मुलाकात

बिलासपुर: बिलासपुर के सिम्स में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शहर विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता अमर अग्रवाल से मुलाकात की। डॉक्टरों ने अपनी मांगों और समस्याओं से जुड़ा ज्ञापन विधायक को सौंपकर सरकार के सामने उनकी बात रखने का आग्रह किया। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल प्रदेशभर में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। इसी कड़ी में सिम्स के इंटर्न डॉक्टर भी अपनी मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और रोजमर्रा की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसलिए इसमें उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए। विधायक को सौंपा ज्ञापन इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक अमर अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। उन्होंने स्टाइपेंड बढ़ाने समेत अन्य मांगों का ज्ञापन सौंपा और सरकार के स्तर पर मामले को उठाने का अनुरोध किया। स्वास्थ्य और वित्त मंत्री से बात करेंगे विधायक अमर अग्रवाल ने डॉक्टरों की मांग को गंभीरता से लेते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य मंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात कर इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग उनके सामने रखेंगे। विधायक ने कहा कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुन रही है। उन्होंने डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों के हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता की बात कही।
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स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों को बांटे जा रहे लड्डुओं में मिले कीड़े, 40 किलो मिठाई जब्त; दुकान सील

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्कूली बच्चों को बांटने के लिए लाए गए लड्डुओं में कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया। मामला धमनाई पंचायत के सोनगुड़ारिया गांव का है। यहां माध्यमिक स्कूल के बच्चों के लिए करीब 40 किलो लड्डू लाए गए थे। लड्डू वितरण के दौरान करीब 8 साल की एक बच्ची ने लड्डू में कीड़े होने की शिकायत की। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत वितरण रुकवा दिया और पुलिस को सूचना दी। बच्चों को लड्डू खाने से रोका ग्रामीणों के मुताबिक, शिकायत सामने आने तक लड्डुओं का वितरण शुरू हो चुका था। मामला सामने आने के बाद बच्चों को लड्डू खाने से रोक दिया गया। इस दौरान दो बच्चों के पेट में दर्द की शिकायत भी सामने आई। मामले की जानकारी तहसीलदार और एसडीएम को दी गई, जिसके बाद खाद्य विभाग की टीम को भी कार्रवाई के लिए सूचना दी गई। दुकान से लड्डू जब्त, दुकान सील शिकायत के बाद खाद्य विभाग की टीम खजराना स्थित उस दुकान पर पहुंची, जहां से पंचायत ने लड्डू खरीदे थे। टीम ने दुकान से लड्डू जब्त किए और दुकान को सील करने की कार्रवाई की। खाद्य विभाग ने लड्डुओं के सैंपल भी लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरपंच ने खरीदे थे 40 किलो लड्डू धमनाई पंचायत के सरपंच सीताराम चौहान ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में बच्चों को बांटने के लिए करीब 40 किलो लड्डू खजराना स्थित योगेश शर्मा की दुकान से खरीदे गए थे। वितरण के दौरान बच्चों ने लड्डुओं में कीड़े होने की शिकायत की, जिसके बाद तत्काल वितरण रोक दिया गया। नायब तहसीलदार योगेश मेश्राम ने बताया कि शिकायत के बाद खाद्य विभाग को सूचना दी गई थी। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लड्डू जब्त किए और दुकान सील कर दी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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CM Mohan Yadav

CM Mohan Yadav का Development Vision: 2027 युवा वर्ष, रोजगार और Skill पर रहेगा Focus

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav)ने तिरंगा फहराया और प्रदेशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में CM मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं। इस दौरान युवाओं और रोजगार को लेकर उन्होंने बड़ा ऐलान किया। 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने के साथ हर साल करीब 1 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह ऐलान प्रदेश के उन युवाओं के लिए खास माना जा रहा है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के बेहतर अवसर तलाश रहे हैं। सरकार का फोकस केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि निजी क्षेत्र, उद्योग, Skill Development और स्वरोजगार के जरिए भी अवसर बढ़ाने पर रहेगा। 2027 होगा Youth Year CM मोहन यादव ने 2027 को Youth Year यानी युवा वर्ष के रूप में मनाने की बात कही। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की कोशिश है कि युवाओं को बदलते Job Market के हिसाब से तैयार किया जाए। इसके लिए Skill Training, आधुनिक तकनीक और Entrepreneurship को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। हर साल 1 लाख रोजगार का Target मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रोजगार के मोर्चे पर बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। प्रदेश में हर साल करीब 1 लाख रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकारी भर्तियों के साथ Private Sector में रोजगार बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। नए उद्योग और निवेश आने से स्थानीय स्तर पर Jobs के अवसर बढ़ाने की कोशिश होगी। Youth को Job Seeker नहीं, Job Creator बनाने पर जोर CM मोहन यादव के रोडमैप में युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें Job Creator बनाने पर भी जोर दिखाई दिया। Startup, छोटे कारोबार और स्वरोजगार के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका फायदा खासतौर पर उन युवाओं को मिल सकता है, जो अपना Business या Startup शुरू करना चाहते हैं लेकिन उन्हें Training, Guidance या शुरुआती अवसरों की जरूरत होती है। MP के Development में गांव और छोटे शहर भी शामिल मुख्यमंत्री ने प्रदेश के समग्र विकास पर भी जोर दिया। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ विकास का लाभ गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कही गई। CM मोहन यादव के अनुसार, प्रदेश की Growth Story में हर क्षेत्र और हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। बेहतर Infrastructure के साथ नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी सरकार का फोकस रहेगा। अब नजर Implementation पर स्वतंत्रता दिवस पर CM मोहन यादव की ओर से रखे गए रोजगार और युवा विकास के लक्ष्य निश्चित तौर पर बड़े हैं। हालांकि इन घोषणाओं का वास्तविक असर योजनाओं के Implementation के बाद ही साफ होगा। हर साल 1 लाख रोजगार के लक्ष्य के तहत कितनी नई नौकरियां बनती हैं, कितने उद्योग निवेश करते हैं और युवाओं को Skill Training का कितना लाभ मिलता है, यह आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव के संदेश से साफ है कि मध्य प्रदेश की आने वाली विकास यात्रा में Youth Power, रोजगार, Skill Development और Entrepreneurship को खास जगह दी जाएगी। 2027 को युवा वर्ष बनाने का फैसला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Madhya Pradesh: विकास, विरासत और आत्मनिर्भरता की नई पहचान

स्वतंत्रता की भावना केवल तिरंगे और नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के विकास, आत्मनिर्भरता और समाज की प्रगति में भी दिखाई देती है। Madhya Pradesh ने भी इसी सोच के साथ शिक्षा, उद्योग, कृषि, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाए हैं। राज्य में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर लगातार काम हुआ है। शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की कोशिशों ने विकास की रफ्तार बढ़ाई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहरों में अधोसंरचना के विस्तार ने प्रदेश की तस्वीर बदलने में भूमिका निभाई है। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश ने नई संभावनाओं पर जोर दिया है। विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए गए हैं। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों के लिए सिंचाई, आधुनिक कृषि तकनीक, फसल विविधीकरण और बाजार तक बेहतर पहुंच पर जोर दिया गया है। वहीं, महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं ने बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया है। मध्य प्रदेश की पहचान उसकी संस्कृति, पर्यटन और आध्यात्मिक विरासत से भी है। उज्जैन, महाकाल लोक, खजुराहो, सांची, ओरछा, पचमढ़ी और कान्हा जैसे स्थलों ने प्रदेश को देश-विदेश के पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है। आज मध्य प्रदेश की कहानी केवल विकास के आंकड़ों की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की कहानी है जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से प्रदेश और देश को आगे बढ़ा रहे हैं। स्वतंत्र भारत की यही भावना मध्य प्रदेश की बदलती तस्वीर में भी साफ दिखाई देती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में सारंग हेलिकॉप्टर टीम दिखाएगी हवाई करतब, रायपुर पहुंचा वायुसेना का दल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। टीम सोमवार को रायपुर पहुंच गई। राज्योत्सव के दौरान नवा रायपुर अटल नगर के सेंध लेक क्षेत्र के ऊपर हेलिकॉप्टरों से रोमांचक हवाई करतब दिखाए जाएंगे। तीन दिवसीय आयोजन में होने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। स्वदेशी ध्रुव हेलिकॉप्टरों से दिखेगा वायुसेना का कौशल पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विंग कमांडर देबर्थो धर ने बताया कि सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव के जरिए प्रदर्शन करती है। टीम हवा में सटीक उड़ान, हेलिकॉप्टरों के बीच बेहतरीन तालमेल और एक साथ अलग-अलग आकृतियां बनाने के लिए जानी जाती है। प्रदर्शन के दौरान वायुसेना के जवान अपने कौशल, अनुशासन और टीमवर्क का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही स्वदेशी हेलिकॉप्टरों की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मोर के रंगों से प्रेरित है सारंग टीम की पहचान सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम के हेलिकॉप्टरों की रंग योजना भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित है। टीम का ध्येय वाक्य ‘इंस्पायर थ्रू एक्सीलेंस’ है, जिसका अर्थ उत्कृष्टता के जरिए प्रेरित करना है। सारंग टीम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है। अपने समन्वित हवाई प्रदर्शन के जरिए टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और स्वदेशी तकनीक को प्रदर्शित करती है। युवाओं को विमानन में करियर बनाने की मिलेगी प्रेरणा राज्योत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन आम लोगों के साथ विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी खास रहेगा। दर्शकों को हेलिकॉप्टरों की उड़ान और विमानन की दुनिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रदर्शन के जरिए युवाओं को विमानन क्षेत्र में करियर बनाने और देश की सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। राज्योत्सव में सारंग टीम की मौजूदगी आयोजन के रोमांच और आकर्षण को और बढ़ाएगी।

ग्वालियर में पटवारी भर्ती के नाम पर 7 युवाओं से 50 लाख की ठगी, फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर थमाए

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। ग्वालियर में सात बेरोजगार युवाओं को पटवारी बनवाने का झांसा देकर करीब 50 लाख रुपए वसूलने का आरोप है। आरोपियों ने खुद को व्यापमं का कर्मचारी और STF का अधिकारी बताकर युवाओं को भरोसे में लिया। इसके बाद उन्हें फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए गए। नौकरी नहीं मिलने और पैसे वापस न लौटाने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अरविंद नरवरिया, गोवर्धन तोमर और प्रदीप गौतम के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें तलाश में जुटी हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी के जरिए हुई मुलाकात मामले के मुताबिक, जीवाजी यूनिवर्सिटी की लॉ शाखा से जुड़े कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर निवासी महलगांव ने सात युवाओं को मुख्य आरोपी अरविंद नरवरिया से मिलवाया था। इनमें रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। आरोप है कि अरविंद युवाओं को भोपाल ले गया। वहां उसने प्रदीप गौतम का नाम बताते हुए उसे व्यापमं का कर्मचारी बताया और पटवारी की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। कुछ दिन बाद गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया, जिसे STF का अधिकारी बताया गया। प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में हुई थी डील युवाओं को पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में सौदा तय होने का आरोप है। इसके बाद किसी से दो लाख तो किसी से चार लाख रुपए एडवांस लिए गए। पीड़ितों के मुताबिक, अलग-अलग किस्तों में फोन-पे और बैंक खातों के जरिए रकम जमा कराई गई। कुल मिलाकर करीब 50 लाख रुपए लेने का आरोप है। आरोपियों ने युवाओं को जबलपुर और भोपाल ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही। इससे युवाओं को लगा कि भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए युवाओं को भरोसे में लेने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी चयन सूची और जॉइनिंग लेटर भी दिए। वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें कभी भोपाल, कभी जबलपुर और कभी भिंड ले जाया गया। आरोप है कि भिंड कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक सेवा केंद्र पर युवाओं के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया गया और उनके हस्ताक्षर लिए गए। इस घटनाक्रम के बाद वहां किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पैसे वापस मांगे तो नहीं मिली राहत पीड़ितों के मुताबिक, लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें पटवारी की नौकरी नहीं मिली। जब उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगे, तो रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। युवाओं ने धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया है। बताया गया है कि यह मामला 16 दिसंबर 2023 से अब तक की अवधि से जुड़ा है। ठगी का मामला सामने आने के बाद युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से भी रकम वापस दिलाने की मांग की। तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज शिकायत के बाद ग्वालियर के थाटीपुर थाने में सोमवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, केस में तीन आरोपियों के नाम सामने आए हैं: थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान के मुताबिक, शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

रूस में नौकरी की तलाश में गया बिलासपुर का युवक लापता, युद्ध में शामिल करने के लिए दबाव बनाने का आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का रहने वाला विनीत कुमार दुबे रूस में लापता हो गया है। वह नौकरी की तलाश में रूस गया था, लेकिन परिवार के मुताबिक 7 अक्टूबर के बाद से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। विनीत की बहन ने आरोप लगाया है कि उसे रूस में बंधक बनाकर रखा गया और युद्ध में शामिल होने से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई है। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर युवक की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। मामले में बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर विनीत की स्थिति का पता लगाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग मांगा है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए मिली थी नौकरी की जानकारी विनीत कुमार दुबे बिल्हा का रहने वाला है और उसने दसवीं तक पढ़ाई की है। परिवार के मुताबिक, उसे टेलीग्राम के एक ग्रुप के जरिए रूस में नौकरी की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह 1 अक्टूबर को मॉस्को पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद विनीत की मुश्किलें बढ़ने लगीं। उसे भारतीय दूतावास जाने नहीं दिया गया और मॉस्को के एक होटल में रोककर रखा गया। इसके बाद उसे वोल्गोग्राद भेज दिया गया, जहां उसे एक अपार्टमेंट में रखा गया था। कार में बैठाकर ले गए, फिर टूट गया संपर्क विनीत की बहन आशी दुबे के मुताबिक, 7 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे कुछ लोग उसके भाई को कार में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद से परिवार का उससे संपर्क टूट गया। बहन का आरोप है कि विनीत पर रेजिडेंसी हासिल करने और युद्ध में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे भूखा रखकर परेशान किया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विनीत को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फंसाने की धमकी देकर स्थानीय लोगों की बात मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। व्हाट्सएप के जरिए परिवार को मिली जानकारी परिवार के मुताबिक, विनीत के साथ हुई घटनाओं की जानकारी उन्हें किशोर नाम के एक युवक के जरिए मिली। किशोर ने व्हाट्सएप पर परिवार से संपर्क किया था। इसके बाद से परिजन विनीत की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और विनीत को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है। परिजनों ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से भी मदद की अपील की है। रूसी दूतावास और विदेश मंत्रालय को पुलिस ने लिखा पत्र परिवार की शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा है। पुलिस संबंधित एजेंसियों से विनीत की स्थिति की जानकारी जुटाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग की मांग कर रही है। फिलहाल विनीत कुमार दुबे कहां है और उसकी हालत कैसी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियों की मदद से जल्द उसका पता लगाया जा सकेगा और उसे सुरक्षित भारत लाया जाएगा।
MPWPCL

MPWPCL Achievement: 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़े संगठन को मिली नई पहचान

मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड (MPWPCL) के लिए गर्व की बात है। कंपनी से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका ,MVSc, मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor) प्रतिनिधि को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) डॉ. मृदु पवन हजारिका को सलाहकार MPWPCL में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को ग्रामीण महिलाओं, जनजातीय किसानों और सहकारिता के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान माना जा रहा है। यह मनोनयन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस जिम्मेदारी के जरिए विश्वविद्यालय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसान संगठनों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। MPWPCL से जुड़ी हैं करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड की शुरुआत ग्रामीण गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की जिला गरीबी उन्मूलन पहल (DPIP) के तहत शुरू हुए इस प्रयास में महिला किसानों और जनजातीय समुदायों को खास तौर पर पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MPWPCL के नेटवर्क में 16 सदस्य सहकारी समितियों एवं उत्पादक कंपनियों सहित कुल 17 संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क से करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, यह व्यवस्था लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देने में भी योगदान करती है। कंपनी का सालाना कारोबार ₹500 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, संगठित प्रयास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई पहल किस तरह बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है। NDVSU की Extension Council में क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी जानकारी के प्रसार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय की विस्तार परिषद में MPWPCL से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका का मनोनयन ग्रामीण किसानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। पोल्ट्री व्यवसाय में बेहतर उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक तरीके और व्यावसायिक प्रबंधन की जानकारी काफी मायने रखती है। ऐसी जानकारी समय पर मिलने से किसानों को अपने काम में सुधार करने और कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। विद्यार्थियों को भी मिल रहा है Practical Experience MPWPCL से वर्ष 2004 से जुड़े रहे प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक प्रबंधन को पहुंचाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी दिशा में NDVSU के सहयोग से MPWPCL और केसला पोल्ट्री सहकारी समिति (KPS) में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को पोल्ट्री व्यवसाय की वास्तविक कार्यप्रणाली, सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और किसानों के साथ सीधे काम करने का अनुभव मिल सकता है। कक्षा में पढ़ाई गई बातों को जमीन पर समझने का मौका विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होता है। वहीं, ग्रामीण संगठनों को भी नई पीढ़ी के साथ काम करने और तकनीकी जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है। महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और व्यवसाय से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी निभाना भी है। MPWPCL जैसे संगठन महिलाओं को सामूहिक रूप से व्यवसाय चलाने, बाजार से जुड़ने और अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर देते हैं। विस्तार परिषद में मनोनयन से इस तरह के अनुभवों को शैक्षणिक और तकनीकी स्तर पर साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस मनोनयन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में प्रतिनिधि का नाम और परिषद में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करना उचित होगा। MPWPCL के लिए गर्व, ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद NDVSU की विस्तार परिषद में सदस्य के रूप में डॉ. मृदु पवन हजारिका मनोनयन MPWPCL से जुड़े किसानों, कर्मचारियों और सहकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाने वाला कदम है। करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़ा नेटवर्क ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की अहमियत को सामने लाता है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो वैज्ञानिक पशुपालन, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और परिवारों को मिल सकता है, जो पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
ODI

ODI Records: सचिन से गिल तक, एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाए और ऐसा रिकॉर्ड बनाए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए। भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। लेकिन जब बात एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा ODI रन बनाने की आती है, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। इस रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर सबसे आगे हैं। वहीं, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी एक ही साल में शानदार रन बनाकर इतिहास रचा था। नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि वह भी इस खास सूची में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली का नाम इस रिकॉर्ड की टॉप-5 लिस्ट में नहीं आता। ODI Cricket: एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज पुरुषों के ODI क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर के दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में ये पांच प्रदर्शन शामिल हैं। रैंक भारतीय बल्लेबाज साल रन 1 सचिन तेंदुलकर 1998 1,894 2 सौरव गांगुली 1999 1,767 3 राहुल द्रविड़ 1999 1,761 4 सचिन तेंदुलकर 1996 1,611 5 शुभमन गिल 2023 1,584 यहां कैलेंडर ईयर का मतलब 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच खेले गए ODI मैचों में बनाए गए रन हैं। इस सूची में सचिन तेंदुलकर का दो बार शामिल होना उनके शानदार करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। 1. सचिन तेंदुलकर: 1998 में बनाए 1,894 रन इस सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नाम है। उन्होंने 1998 में 34 ODI मैचों में 1,894 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने नौ शतक और सात अर्धशतक लगाए। सचिन के लिए 1998 बेहद खास साल रहा। उनकी बल्लेबाजी का अंदाज ऐसा था कि विरोधी टीमों के गेंदबाजों के सामने लगातार चुनौती बनी रहती थी। आज भी एक कैलेंडर ईयर में बनाए गए उनके 1,894 रन ODI क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में गिने जाते हैं। 2. सौरव गांगुली: 1999 में 1,767 रन भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 1999 में 1,767 रन बनाए थे। उन्होंने उस साल चार शतक और दस अर्धशतक लगाए। गांगुली की बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। एक ही साल में इतने रन बनाकर उन्होंने भारतीय ODI क्रिकेट में अपनी खास जगह बनाई। 3. राहुल द्रविड़: 1999 में 1,761 रन राहुल द्रविड़ ने भी 1999 में अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1,761 रन बनाए और इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। द्रविड़ को उनकी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने के लिए जाना जाता है। सौरव गांगुली के साथ उनका एक ही साल में इस सूची में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार उपलब्धि है। 4. सचिन तेंदुलकर: 1996 में भी दिखाया दम सचिन तेंदुलकर ने 1996 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उनके बल्ले से 1,611 ODI रन निकले, जिसमें छह शतक और नौ अर्धशतक शामिल थे। एक बल्लेबाज का अलग-अलग वर्षों में इस सूची में जगह बनाना आसान नहीं होता। सचिन ने यह उपलब्धि हासिल करके दिखाया कि उनकी निरंतरता कितनी खास थी। 5. शुभमन गिल: 2023 में 1,584 रन नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में 1,584 ODI रन बनाए थे। उन्होंने उस साल पांच शतक और नौ अर्धशतक लगाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 208 रन रहा, जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था। गिल का 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी खास था, क्योंकि उन्होंने बड़े स्कोर बनाने के साथ-साथ तेज गति से रन भी जुटाए। ICC के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल उनका ODI औसत 63.36 रहा। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> Virat Kohli टॉप-5 में क्यों नहीं हैं? विराट कोहली का नाम इस सूची में टॉप-5 में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका प्रदर्शन कम रहा है। कोहली ने 2017 में 1,460 ODI रन बनाए थे और उस साल उनका बल्लेबाजी औसत 76.84 रहा था। <Cite refs={[“turn447195search2”]}/> विराट की सबसे बड़ी ताकत लगातार रन बनाना और दबाव वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभालना रही है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। टूर्नामेंट में उनके नाम 765 रन रहे, जो पुरुषों के ODI वर्ल्ड कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रन-स्कोर है। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> यहां एक बात समझना जरूरी है: वर्ल्ड कप में बनाए गए रन और पूरे कैलेंडर ईयर में बनाए गए ODI रन अलग-अलग रिकॉर्ड हैं। इसी वजह से किसी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद बल्लेबाज इस सूची के टॉप-5 में शामिल न हो, ऐसा संभव है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड आज भी क्यों है खास? सचिन तेंदुलकर का 1998 में बनाया गया 1,894 रन का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। एक पूरे साल में इतने रन बनाने के लिए न सिर्फ अच्छी फॉर्म, बल्कि फिटनेस, निरंतरता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने 1999 में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी। वहीं, शुभमन गिल ने 2023 में दिखाया कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज भी इस स्तर का प्रदर्शन कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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