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सोशल मीडिया पर बंदूक की फोटो, घर पहुंची पुलिस तो मिला 1 करोड़ कैश; नोट गिनने मशीन मंगानी पड़ी

सागर। सोशल मीडिया पर बंदूक के साथ फोटो डालना एक युवक को भारी पड़ गया। पुलिस फोटो की जांच करते हुए युवक के घर पहुंची। तलाशी के दौरान बंदूक तो बरामद नहीं हुई, लेकिन घर से भारी मात्रा में नकदी मिलने पर पुलिस के होश उड़ गए। रकम इतनी ज्यादा थी कि नोट गिनने के लिए मशीन मंगानी पड़ी। मामले की जांच के लिए राजस्व और आयकर विभाग की टीमों को भी बुलाया गया है। मामला गोपालगंज थाना क्षेत्र के तिली तिगड्डा इलाके का है। युवक की पहचान सौरभ अहिरवार के रूप में हुई है। वह अपने भाई अंकित और मां के साथ रहता है। दोनों भाई किराए की टैक्सी चलाने का काम करते हैं। उनके पिता जगदीश अहिरवार का निधन हो चुका है। बंदूक की फोटो के बाद घर पहुंची पुलिस पुलिस को सोशल मीडिया पर सौरभ की बंदूक के साथ फोटो मिली थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी जानकारी जुटाई और रविवार को उसके घर पहुंचकर तलाशी ली। हालांकि तलाशी के दौरान बंदूक नहीं मिली, लेकिन घर में बड़ी मात्रा में नकदी देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। नोटों की संख्या ज्यादा होने के कारण पुलिस ने मशीन मंगाकर रकम की गिनती शुरू की। एडिशनल एसपी नरेंद्र सोलंकी के मुताबिक, अब तक करीब 1 करोड़ रुपए की गिनती हो चुकी है। रिश्तेदार के पैसे होने का दावा परिजनों ने पुलिस को बताया कि बरामद रकम उनकी नहीं है, बल्कि भोपाल के चूना भट्टी निवासी एक रिश्तेदार की है। बताया गया है कि वह रिश्तेदार PWD में इंजीनियर है। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी रकम घर में क्यों रखी गई थी और इसका स्रोत क्या है। एसपी भी मौके पर पहुंचे मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अनुराग सुजानिया भी मौके पर पहुंचे। परिवार के सदस्यों को घर के अंदर ही रखा गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने फिलहाल मीडिया को परिवार से बातचीत की अनुमति नहीं दी है। पुलिस अब बरामद नकदी के स्रोत, सोशल मीडिया पर वायरल बंदूक की फोटो और युवक के संबंध में मिली अन्य जानकारियों की जांच कर रही है। आयकर और राजस्व विभाग की जांच के बाद ही नकदी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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बिना नंबर प्लेट कार में पुलिस हूटर, रोकने पर महिला ने किया हंगामा; वीडियो वायरल

ग्वालियर के पॉश सिटी सेंटर इलाके में रविवार दोपहर ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हो गया। माधवनगर गेट के सामने ट्रैफिक पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की एक कार को रोका। कार में अवैध रूप से पुलिस का हूटर लगा हुआ था और उसे एक युवक चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, कार संदिग्ध लगने पर जवानों ने चालक को रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने वाहन आगे ले जाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने बैरिकेड लगाकर कार को रोक लिया। मां-बेटे के पास नहीं था ड्राइविंग लाइसेंस जांच के दौरान सामने आया कि कार चला रहे युवक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। उसकी मां के पास भी DL नहीं मिला। कार पर नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी और उसमें पुलिस का हूटर लगाया गया था। कार रुकने के बाद महिला सड़क पर उतर आई और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से बहस करने लगी। महिला ने कथित तौर पर एक टीआई का नाम लेते हुए पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाने की कोशिश की। चालान काटने पर बोली- कोर्ट में भुगतूंगी महिला ने पुलिसकर्मियों से कहा कि चालान काटना है तो काट दो, वह कोर्ट में इसका सामना करेगी। इस दौरान पुलिस जवानों से गाली-गलौज और बहस का भी आरोप है। हंगामा बढ़ने पर मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो के आधार पर जांच ट्रैफिक पुलिस ने वाहन और वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कार में पुलिस का हूटर किस अनुमति के तहत लगाया गया था और वाहन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
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रायपुर में न्यायिक अधिकारियों का एक दिवसीय सेमिनार, 141 अधिकारियों ने लिया हिस्सा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से रायपुर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए न्यू सर्किट हाउस में एक दिवसीय न्यायिक सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार और महासमुंद जिलों के कुल 141 न्यायिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश भी मौजूद रहे। कानून और तकनीक में बदलाव के साथ अपडेट रहें न्यायिक अधिकारी मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समय के साथ कानून, तकनीक और समाज में लगातार बदलाव हो रहा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए जरूरी है कि वे नई कानूनी व्यवस्थाओं और तकनीकी बदलावों की जानकारी लगातार हासिल करते रहें। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों का खुद को अपडेट रखना बेहद जरूरी है। आर्थिक अपराधों में साक्ष्यों की सावधानी से जांच जरूरी न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि ऑनलाइन लेन-देन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण आर्थिक अपराध पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गए हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023 लागू होने के बाद आपराधिक न्याय व्यवस्था में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को नए कानूनी प्रावधानों की सही जानकारी रखने के साथ साक्ष्यों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए। उन्होंने दीवानी मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। दस्तावेजों की वैधता, प्रमाण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, स्टांप, पंजीयन और आपत्तियों से जुड़े पहलुओं का मामले के फैसले पर सीधा असर पड़ सकता है। जीरो और ई-एफआईआर से शिकायत दर्ज करना आसान सेमिनार में आपराधिक मामलों में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जीरो एफआईआर और ई-एफआईआर जैसी व्यवस्थाओं से अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान और तेज हुई है। इन व्यवस्थाओं से लोगों को अपराध किसी भी क्षेत्र में होने की स्थिति में न्याय व्यवस्था तक पहुंचने में मदद मिलती है। चेक बाउंस मामलों के जल्द निपटारे पर जोर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चेक अनादरण यानी चेक बाउंस से जुड़े मामले अदालतों में लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा हैं। इनके जल्द निपटारे के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान यानी ADR, मध्यस्थता और समझौते जैसे तरीकों को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा और पक्षकारों के विवादों का जल्द समाधान भी संभव होगा। साथ ही उनके कारोबारी और व्यक्तिगत संबंधों को बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। समय पर, पारदर्शी और निष्पक्ष न्याय पर जोर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सेमिनार में चर्चा किए गए विषयों का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को तेज, प्रभावी, तकनीक के अनुकूल, कानून सम्मत और आम लोगों के लिए सुगम बनाना है। उन्होंने कहा कि समाज न्यायपालिका से केवल सही फैसला ही नहीं, बल्कि समय पर, पारदर्शी और निष्पक्ष न्याय की भी अपेक्षा करता है। सेमिनार में भारतीय न्याय संहिता के बाद आर्थिक अपराधों की चुनौतियां, दीवानी मामलों में दस्तावेजों की ग्राह्यता, जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वैधता और चेक अनादरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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नर्सिंग काउंसलिंग में बड़ा बदलाव, अब हर राउंड में कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन; सरकारी कॉलेज में सीट छोड़ने पर भी नहीं छिनेगा मौका

भोपाल। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की काउंसलिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। वर्षों से लंबित प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज संगठन की मांगों को स्वीकार करते हुए विभाग ने विद्यार्थियों को काउंसलिंग में अधिक अवसर देने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब विद्यार्थी काउंसलिंग के हर राउंड में रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इससे किसी एक राउंड में रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाने वाले विद्यार्थियों को अंतिम चरण तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे अगले राउंड में भी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। प्रवेश नहीं लेना है तो स्क्रूटनी की जरूरत नहीं काउंसलिंग के दौरान यदि कोई विद्यार्थी किसी राउंड में प्रवेश नहीं लेना चाहता है, तो अब उसे स्क्रूटनी कराने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले प्रवेश नहीं लेने की स्थिति में भी विद्यार्थी को स्क्रूटनी के लिए संबंधित कॉलेज जाना पड़ता था। नए नियम से विद्यार्थियों को इस अनावश्यक प्रक्रिया और कॉलेज जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। सरकारी कॉलेज में प्रवेश नहीं लिया तो भी अगला मौका काउंसलिंग प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी नर्सिंग कॉलेज में सीट मिलने को लेकर किया गया है। यदि किसी विद्यार्थी का नाम शासकीय नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए आ जाता है, लेकिन वह वहां प्रवेश नहीं लेता, तो उसे काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाएगा। वह अगले चरण में किसी अन्य निजी नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए विकल्प चुन सकेगा। पहले सरकारी कॉलेज में नाम आने के बाद प्रवेश नहीं लेने पर विद्यार्थी को काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता था। इससे निजी कॉलेज में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के विकल्प सीमित हो जाते थे। प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज संगठन ने किया स्वागत काउंसलिंग प्रक्रिया में किए गए इन बदलावों का प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज संगठन ने स्वागत किया है। संगठन ने विद्यार्थियों के हित में निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार जताया है। नए नियमों से विद्यार्थियों को काउंसलिंग के अलग-अलग चरणों में प्रवेश के अधिक अवसर मिलने और प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल होने की उम्मीद है।
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इंदौर में नशे और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई, 5 आरोपी गिरफ्तार

इंदौर। शहर में नशे और अवैध शराब के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। खजराना पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़कर उनके कब्जे से करीब 100 ग्राम एमडी ड्रग बरामद की है। वहीं, चंदन नगर पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस के ड्राय डे पर अवैध रूप से शराब बेचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से हजारों रुपए कीमत की शराब जब्त की गई है। खजराना में 100 ग्राम एमडी ड्रग जब्त खजराना टीआई मनोज सेंधव की टीम ने कार्रवाई करते हुए राहुल पिता मनोहर परमार, निवासी चाणक्यपुरी, सिविल लाइंस, देवास को गिरफ्तार किया है। उसके साथ एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों के कब्जे से करीब 100 ग्राम एमडी ड्रग बरामद हुई। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों इलाके में एक अन्य व्यक्ति को ड्रग की डिलीवरी करने के लिए पहुंचे थे। पुलिस अब ड्रग की सप्लाई और इससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में आरोपियों से पूछताछ कर रही है। ड्राय डे पर शराब बेचते तीन गिरफ्तार उधर, चंदन नगर पुलिस ने 15 अगस्त को ड्राय डे के दौरान अवैध रूप से शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सत्या पिता कालू वसुनिया, निवासी चंदन नगर, रईस पिता मोहम्मद शकुर पठान, निवासी सहयोग नगर और प्रदीप पिता ओमप्रकाश सेन, निवासी सिरपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हजारों रुपए कीमत की शराब जब्त की है। जिलाबदर के बावजूद इलाके में कर रहा था शराब का कारोबार पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल रईस को कुछ समय पहले ही जिलाबदर किया गया था। इसके बावजूद वह इलाके में रहकर कथित तौर पर अवैध शराब का कारोबार कर रहा था। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अवैध शराब के कारोबार से जुड़े नेटवर्क की भी जानकारी जुटा रही है।
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नाबालिग छात्रा को अश्लील मैसेज और शादी का दबाव, पीटी टीचर पर भाई को छात्रों से पिटवाने का आरोप

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूल के एक पीटी टीचर पर नाबालिग छात्रा को अश्लील मैसेज भेजने और शादी के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा है। आरोप है कि परिजनों की समझाइश के बावजूद शिक्षक की हरकतें नहीं रुकीं। शनिवार को छात्रा के भाई के दोबारा समझाने पहुंचने पर विवाद बढ़ गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसके बाद शिक्षक ने हाईस्कूल के कुछ छात्रों से छात्रा के भाई की लोहे की रॉड से पिटाई करवा दी। हमले में युवक के हाथ में चोट आई है। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी ने भी मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। मामला रघुनाथनगर थाना क्षेत्र का है। पीटी टीचर पर अश्लील मैसेज भेजने का आरोप जानकारी के मुताबिक, आरोपी पीटी टीचर का नाम संदीप गुप्ता (28) है। वह स्वामी आत्मानंद स्कूल में पदस्थ है। वहीं, कथित पीड़ित छात्रा 10वीं कक्षा में पढ़ती है। आरोप है कि शिक्षक मोबाइल मैसेज के जरिए छात्रा से बातचीत करता था और उसे अश्लील मैसेज भेजता था। परिजनों के मुताबिक, शिक्षक छात्रा पर शादी करने का दबाव भी बना रहा था। छात्रा ने परेशान होकर इसकी जानकारी अपने परिवार को दी। इसके बाद परिजनों ने शिक्षक को समझाकर छात्रा से इस तरह की बातचीत नहीं करने को कहा। समझाने पहुंचे भाई से विवाद परिजनों का आरोप है कि समझाइश के बाद भी शिक्षक की हरकतें जारी रहीं। इसके बाद 15 अगस्त को छात्रा का भाई शिक्षक को समझाने स्कूल पहुंचा। बातचीत के दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसके बाद शिक्षक ने स्कूल परिसर में मौजूद हाईस्कूल के कुछ छात्रों को छात्रा के भाई की पिटाई करने के लिए कहा। छात्रों से रॉड से पिटाई कराने का आरोप पीड़ित पक्ष के अनुसार, छात्रों ने युवक के साथ मारपीट की और लोहे की रॉड से हमला किया। इस घटना में उसके हाथ में चोट आई है। घटना के बाद परिवार ने पुलिस से शिकायत की और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस मोबाइल मैसेज और दूसरे सबूतों की कर रही जांच शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में छात्रा और शिक्षक के बीच हुए मोबाइल मैसेज, मारपीट की घटना, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों को शामिल किया जा रहा है। वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से भी मामले की विभागीय जांच के लिए टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने के बाद आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। परिजनों का आरोप- पहले भी की थी शिकायत पीड़ित परिवार का कहना है कि शिक्षक की कथित हरकतों को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी और उसे समझाया गया था। उनका आरोप है कि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होने के कारण विवाद बढ़ गया। फिलहाल पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है।
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67 इंटरनेशनल मेडल जीतने वाले पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा बोले- नौकरी नहीं मिली तो मेडल नीलाम कर दूंगा

भिलाई। जिस बेटे को देश के लिए मेडल जीतने के काबिल बनाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया और पिता ने मजदूरी कर उसकी पढ़ाई, डाइट और जिम का खर्च उठाया, आज वही बेटा सरकारी मदद के इंतजार में आर्थिक संकट से जूझ रहा है। छत्तीसगढ़ के पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा ने कहा है कि अगर इस बार भी उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी नहीं मिली, तो वह अपने 67 इंटरनेशनल मेडल नीलाम कर देंगे। उनका कहना है कि नीलामी से मिलने वाली रकम से माता-पिता का कर्ज चुकाएंगे और छोटा कारोबार शुरू करेंगे। श्रीमंत ने यह बात 15 अगस्त को दुर्ग बटालियन में आयोजित मुख्य समारोह में सम्मानित किए जाने के बाद कही। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम अरुण साव ने उनका सम्मान किया। मेडल नीलाम कर कर्ज चुकाने की बात श्रीमंत ने कहा कि उन्होंने करीब 15 साल के खेल करियर में भारत के लिए 67 इंटरनेशनल मेडल जीते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक शहीद राजीव पांडे पुरस्कार और सरकारी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अगर इस बार भी सरकार की ओर से मदद नहीं मिली तो वह अपने 67 इंटरनेशनल मेडल सरकार को सौंपकर उनकी नीलामी करने का कदम उठाएंगे। इससे मिलने वाली राशि से माता-पिता का कर्ज चुकाने और छोटा कारोबार शुरू करने की योजना है। श्रीमंत ने खेल छोड़ने की बात भी कही है। मां ने मंगलसूत्र गिरवी रखा, पिता ने मजदूरी कर उठाया खर्च श्रीमंत ने बताया कि उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में उनके माता-पिता ने काफी संघर्ष किया। उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया था। वहीं, पिता ने मजदूरी करके बेटे की पढ़ाई, डाइट और जिम का खर्च उठाया। परिवार को उम्मीद थी कि श्रीमंत देश के लिए मेडल जीतेंगे और आगे उन्हें सरकारी नौकरी मिलेगी, जिससे घर की आर्थिक स्थिति सुधर सकेगी। इसी उम्मीद में परिवार पर कर्ज बढ़ता चला गया। कई साल से पुरस्कार के लिए कर रहे आवेदन श्रीमंत के मुताबिक, वह कई वर्षों से शहीद राजीव पांडे पुरस्कार के लिए आवेदन कर रहे हैं। हर बार अपनी खेल उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा किया, लेकिन अब तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिला। उनका कहना है कि 67 अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के बावजूद उन्हें राज्य का यह खेल सम्मान और सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। 2032 पैरालंपिक में गोल्ड जीतना है सपना श्रीमंत का सपना 2032 पैरालंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। पैरा आर्म रेसलिंग को पैरालंपिक में शामिल किए जाने की उम्मीद के बीच वह इसकी तैयारी कर रहे थे। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज ने उनके सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी मिलने से उनके 15 साल के संघर्ष और माता-पिता के त्याग को सम्मान मिलेगा। विश्व नंबर-3 और एशिया नंबर-1 होने का दावा भिलाई निवासी श्रीमंत झा जन्म से दिव्यांग हैं। करीब 15 साल के खेल करियर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। श्रीमंत के अनुसार, उन्होंने अब तक 67 इंटरनेशनल मेडल जीते हैं और वह पैरा आर्म रेसलिंग में विश्व में नंबर-3 तथा एशिया में नंबर-1 रह चुके हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनकी खेल उपलब्धियों और मेरिट को देखते हुए उन्हें शहीद राजीव पांडे पुरस्कार के साथ सरकारी नौकरी दी जाए।
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खंडवा में सीसी रोड निर्माण पर सवाल, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का लगाया आरोप

खंडवा। जिले के मोहद गांव में बीड़-मूंदी हाईवे पर बन रही सीसी रोड की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम रखी जा रही है और बालू रेत की जगह डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने रात में भी निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत की है। शिकायत सामने आने के बाद PWD ने ठेकेदार को नोटिस जारी करने और इंजीनियर को मौके पर जांच के लिए भेजने की बात कही है। तीन साल के संघर्ष के बाद शुरू हुआ सड़क निर्माण बीड-मूंदी हाईवे के तहत मोहद गांव में टू-लेन सीसी रोड का निर्माण होना था। ग्रामीणों के मुताबिक, बजट की कमी का हवाला देकर सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर करीब तीन साल तक प्रयास किए। बाद में PWD ने सड़क निर्माण के लिए करीब एक करोड़ रुपए मंजूर किए, जिसके बाद काम दोबारा शुरू हुआ। सड़क निर्माण का ठेका खंडवा की एक कंपनी को मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी पेटी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए काम करा रही है। 12 बोरी की जगह 4 बोरी सीमेंट डालने का आरोप ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सीमेंट-कांक्रीट तैयार करने के दौरान निर्धारित मात्रा में सीमेंट नहीं डाला जा रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, विभागीय अधिकारियों ने एक मिक्सर में 12 बोरी सीमेंट डालने की जानकारी दी थी, लेकिन मौके पर कथित तौर पर सिर्फ 4 बोरी सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में बालू रेत के स्थान पर डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ तो सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। PWD ने कहा- गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी PWD के कार्यपालन यंत्री नरेंद्र सिंह मंडलोई ने कहा कि सड़क का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मापदंडों के अनुसार कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। विभागीय इंजीनियर को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। साइट पर टाइमकीपर और अन्य कर्मचारी भी मौजूद हैं। मंडलोई के मुताबिक, यदि रात के समय नियमों के विपरीत निर्माण कार्य कराया जा रहा है तो उसे बंद कराया जाएगा। विभाग की जांच के बाद ही निर्माण सामग्री और सीमेंट की मात्रा को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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भोपाल में 2 महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने का लगाया आरोप

भोपाल। छोला मंदिर थाना क्षेत्र की नवजीवन कॉलोनी में दो महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि 14 अगस्त को आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। मृतका की पहचान लक्ष्मी पिता हलके राम (2 माह) के रूप में हुई है। वह नवजीवन कॉलोनी, छोला में रहती थी। परिवार मूल रूप से सिरोंज का रहने वाला है। बच्ची परिवार की इकलौती बेटी थी और उसका एक बड़ा भाई है। टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने का दावा परिजनों के मुताबिक, 14 अगस्त को लक्ष्मी को आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया गया था। वहां उसे पोलियो की दवा पिलाने के साथ टीकाकरण किया गया। बच्ची के पिता हलके राम का दावा है कि उसे पोलियो की सात बूंद दवा पिलाई गई और तीन इंजेक्शन भी लगाए गए। परिवार का कहना है कि आंगनवाड़ी से घर लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। पिता ने लगाया ओवरडोज का आरोप बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि दो महीने की बच्ची को पोलियो की सात बूंद दवा देने के अलावा तीन इंजेक्शन लगाए गए। उनका दावा है कि दवा के ओवरडोज के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हुई। हालांकि, पुलिस ने अभी मौत की वजह की पुष्टि नहीं की है। टीकाकरण और दवा से संबंधित परिजनों के आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच छोला मंदिर थाना पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के अनुसार, परिजनों के बयान में टीका लगने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। पीएम रिपोर्ट से सामने आएगा मौत का कारण पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह पता चलेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि टीकाकरण या दवा से मौत का कोई संबंध था या किसी अन्य कारण से बच्ची की हालत बिगड़ी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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राष्ट्रपति पदक से सम्मानित रामावतार सिंह और पुरस्कार विजेता अर्चना धुरंधर की सेवा को सलाम

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस विभाग के दो अधिकारियों की सेवा और उपलब्धियां खास चर्चा में हैं। एक ओर रामावतार सिंह हैं, जिन्हें विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP सुरक्षा, चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वहीं दूसरी ओर रायपुर शहर की एकमात्र महिला टीआई अर्चना धुरंधर हैं। महिलाओं और अवयस्क बच्चों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निराकरण और पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार मिल चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP मूवमेंट बड़ी चुनौती रामावतार सिंह ने अपने सेवाकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी ड्यूटी की। उनका कहना है कि ऐसे इलाकों में VIP मूवमेंट सामान्य शहरों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सुरक्षा के लिए पहले से विस्तृत प्लानिंग करनी पड़ती है। VIP के रूट, फोर्स की तैनाती, जवानों के ठहरने की व्यवस्था और पूरे सुरक्षा बंदोबस्त की मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर तैयारी की जाती थी। नक्सल गतिविधियों वाले क्षेत्रों में रूट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता था। उन्होंने बताया कि VIP ड्यूटी सिर्फ सड़क पर जवान तैनात करने तक सीमित नहीं होती। कार्यक्रम स्थल, आने-जाने वाले रास्तों और आसपास के इलाकों का आकलन कर फोर्स की जरूरत और उसकी तैनाती तय की जाती है। चुनाव और कानून-व्यवस्था में भी निभाई जिम्मेदारी रामावतार सिंह ने निर्वाचन ड्यूटी के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। चुनाव के समय संवेदनशील इलाकों और मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। उनके लंबे सेवाकाल में VIP बंदोबस्त, निर्वाचन ड्यूटी और कानून-व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। इन्हीं विशेष सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। सम्मानित अधिकारियों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर रहा, जिसे उन्होंने गर्व का पल बताया। महिलाओं और बच्चों के मामलों में भरोसा सबसे जरूरी अर्चना धुरंधर का पुलिसिंग का क्षेत्र अलग है। वह महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करती हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात धैर्य से सुनना और उसे भरोसा दिलाना सबसे जरूरी होता है। कई महिलाएं और बच्चे डर या परेशानी की स्थिति में थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पहले उन्हें सहज किया जाता है। इसके बाद पूरी बात सुनकर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। अर्चना के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता को यह भरोसा होता है कि उसकी समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है, तब वह अपनी बात खुलकर बता पाता है। 4 साल की बच्ची का मामला आज भी याद अर्चना ने अपने सेवाकाल के एक मामले को याद करते हुए बताया कि 2011 में राजनांदगांव में महिला चौकी प्रभारी रहते हुए उनके पास 4 साल की बच्ची से रेप का मामला आया था। मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित बचाया गया और आरोपी को सजा दिलाई गई। अर्चना के मुताबिक, वह बच्ची आज भी उनके करीब है। वह इस मामले को अपने सेवाकाल की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में मानती हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि बच्ची को समय पर न्याय मिला और आरोपी को सजा हुई। 2008 से पुलिस सेवा में हैं अर्चना अर्चना धुरंधर वर्ष 2008 से सब इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में हैं। वह अपने पुरस्कारों का श्रेय वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों, कर्मचारियों और काउंसलर्स की पूरी टीम को देती हैं। उनके अनुसार, राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार महिलाओं और अवयस्क बच्चों की शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के कार्य के लिए दिए गए हैं। दो अलग जिम्मेदारियां, लक्ष्य एक- सेवा रामावतार सिंह और अर्चना धुरंधर की जिम्मेदारियां भले अलग रही हों, लेकिन दोनों के काम का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाना रहा है। रामावतार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, VIP मूवमेंट और चुनाव जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जबकि अर्चना ने महिलाओं और बच्चों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुना और उनके समाधान के लिए काम किया। एक अधिकारी को विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक मिला, तो दूसरी अधिकारी को महिलाओं और बच्चों के मामलों में उल्लेखनीय कार्य के लिए राज्यपाल और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में सारंग हेलिकॉप्टर टीम दिखाएगी हवाई करतब, रायपुर पहुंचा वायुसेना का दल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। टीम सोमवार को रायपुर पहुंच गई। राज्योत्सव के दौरान नवा रायपुर अटल नगर के सेंध लेक क्षेत्र के ऊपर हेलिकॉप्टरों से रोमांचक हवाई करतब दिखाए जाएंगे। तीन दिवसीय आयोजन में होने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। स्वदेशी ध्रुव हेलिकॉप्टरों से दिखेगा वायुसेना का कौशल पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विंग कमांडर देबर्थो धर ने बताया कि सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव के जरिए प्रदर्शन करती है। टीम हवा में सटीक उड़ान, हेलिकॉप्टरों के बीच बेहतरीन तालमेल और एक साथ अलग-अलग आकृतियां बनाने के लिए जानी जाती है। प्रदर्शन के दौरान वायुसेना के जवान अपने कौशल, अनुशासन और टीमवर्क का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही स्वदेशी हेलिकॉप्टरों की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मोर के रंगों से प्रेरित है सारंग टीम की पहचान सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम के हेलिकॉप्टरों की रंग योजना भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित है। टीम का ध्येय वाक्य ‘इंस्पायर थ्रू एक्सीलेंस’ है, जिसका अर्थ उत्कृष्टता के जरिए प्रेरित करना है। सारंग टीम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है। अपने समन्वित हवाई प्रदर्शन के जरिए टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और स्वदेशी तकनीक को प्रदर्शित करती है। युवाओं को विमानन में करियर बनाने की मिलेगी प्रेरणा राज्योत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन आम लोगों के साथ विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी खास रहेगा। दर्शकों को हेलिकॉप्टरों की उड़ान और विमानन की दुनिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रदर्शन के जरिए युवाओं को विमानन क्षेत्र में करियर बनाने और देश की सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। राज्योत्सव में सारंग टीम की मौजूदगी आयोजन के रोमांच और आकर्षण को और बढ़ाएगी।

ग्वालियर में पटवारी भर्ती के नाम पर 7 युवाओं से 50 लाख की ठगी, फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर थमाए

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। ग्वालियर में सात बेरोजगार युवाओं को पटवारी बनवाने का झांसा देकर करीब 50 लाख रुपए वसूलने का आरोप है। आरोपियों ने खुद को व्यापमं का कर्मचारी और STF का अधिकारी बताकर युवाओं को भरोसे में लिया। इसके बाद उन्हें फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए गए। नौकरी नहीं मिलने और पैसे वापस न लौटाने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अरविंद नरवरिया, गोवर्धन तोमर और प्रदीप गौतम के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें तलाश में जुटी हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी के जरिए हुई मुलाकात मामले के मुताबिक, जीवाजी यूनिवर्सिटी की लॉ शाखा से जुड़े कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर निवासी महलगांव ने सात युवाओं को मुख्य आरोपी अरविंद नरवरिया से मिलवाया था। इनमें रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। आरोप है कि अरविंद युवाओं को भोपाल ले गया। वहां उसने प्रदीप गौतम का नाम बताते हुए उसे व्यापमं का कर्मचारी बताया और पटवारी की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। कुछ दिन बाद गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया, जिसे STF का अधिकारी बताया गया। प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में हुई थी डील युवाओं को पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में सौदा तय होने का आरोप है। इसके बाद किसी से दो लाख तो किसी से चार लाख रुपए एडवांस लिए गए। पीड़ितों के मुताबिक, अलग-अलग किस्तों में फोन-पे और बैंक खातों के जरिए रकम जमा कराई गई। कुल मिलाकर करीब 50 लाख रुपए लेने का आरोप है। आरोपियों ने युवाओं को जबलपुर और भोपाल ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही। इससे युवाओं को लगा कि भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए युवाओं को भरोसे में लेने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी चयन सूची और जॉइनिंग लेटर भी दिए। वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें कभी भोपाल, कभी जबलपुर और कभी भिंड ले जाया गया। आरोप है कि भिंड कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक सेवा केंद्र पर युवाओं के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया गया और उनके हस्ताक्षर लिए गए। इस घटनाक्रम के बाद वहां किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पैसे वापस मांगे तो नहीं मिली राहत पीड़ितों के मुताबिक, लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें पटवारी की नौकरी नहीं मिली। जब उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगे, तो रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। युवाओं ने धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया है। बताया गया है कि यह मामला 16 दिसंबर 2023 से अब तक की अवधि से जुड़ा है। ठगी का मामला सामने आने के बाद युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से भी रकम वापस दिलाने की मांग की। तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज शिकायत के बाद ग्वालियर के थाटीपुर थाने में सोमवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, केस में तीन आरोपियों के नाम सामने आए हैं: थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान के मुताबिक, शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

रूस में नौकरी की तलाश में गया बिलासपुर का युवक लापता, युद्ध में शामिल करने के लिए दबाव बनाने का आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का रहने वाला विनीत कुमार दुबे रूस में लापता हो गया है। वह नौकरी की तलाश में रूस गया था, लेकिन परिवार के मुताबिक 7 अक्टूबर के बाद से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। विनीत की बहन ने आरोप लगाया है कि उसे रूस में बंधक बनाकर रखा गया और युद्ध में शामिल होने से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई है। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर युवक की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। मामले में बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर विनीत की स्थिति का पता लगाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग मांगा है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए मिली थी नौकरी की जानकारी विनीत कुमार दुबे बिल्हा का रहने वाला है और उसने दसवीं तक पढ़ाई की है। परिवार के मुताबिक, उसे टेलीग्राम के एक ग्रुप के जरिए रूस में नौकरी की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह 1 अक्टूबर को मॉस्को पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद विनीत की मुश्किलें बढ़ने लगीं। उसे भारतीय दूतावास जाने नहीं दिया गया और मॉस्को के एक होटल में रोककर रखा गया। इसके बाद उसे वोल्गोग्राद भेज दिया गया, जहां उसे एक अपार्टमेंट में रखा गया था। कार में बैठाकर ले गए, फिर टूट गया संपर्क विनीत की बहन आशी दुबे के मुताबिक, 7 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे कुछ लोग उसके भाई को कार में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद से परिवार का उससे संपर्क टूट गया। बहन का आरोप है कि विनीत पर रेजिडेंसी हासिल करने और युद्ध में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे भूखा रखकर परेशान किया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विनीत को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फंसाने की धमकी देकर स्थानीय लोगों की बात मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। व्हाट्सएप के जरिए परिवार को मिली जानकारी परिवार के मुताबिक, विनीत के साथ हुई घटनाओं की जानकारी उन्हें किशोर नाम के एक युवक के जरिए मिली। किशोर ने व्हाट्सएप पर परिवार से संपर्क किया था। इसके बाद से परिजन विनीत की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और विनीत को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है। परिजनों ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से भी मदद की अपील की है। रूसी दूतावास और विदेश मंत्रालय को पुलिस ने लिखा पत्र परिवार की शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा है। पुलिस संबंधित एजेंसियों से विनीत की स्थिति की जानकारी जुटाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग की मांग कर रही है। फिलहाल विनीत कुमार दुबे कहां है और उसकी हालत कैसी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियों की मदद से जल्द उसका पता लगाया जा सकेगा और उसे सुरक्षित भारत लाया जाएगा।
MPWPCL

MPWPCL Achievement: 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़े संगठन को मिली नई पहचान

मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड (MPWPCL) के लिए गर्व की बात है। कंपनी से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका ,MVSc, मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor) प्रतिनिधि को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) डॉ. मृदु पवन हजारिका को सलाहकार MPWPCL में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को ग्रामीण महिलाओं, जनजातीय किसानों और सहकारिता के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान माना जा रहा है। यह मनोनयन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस जिम्मेदारी के जरिए विश्वविद्यालय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसान संगठनों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। MPWPCL से जुड़ी हैं करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड की शुरुआत ग्रामीण गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की जिला गरीबी उन्मूलन पहल (DPIP) के तहत शुरू हुए इस प्रयास में महिला किसानों और जनजातीय समुदायों को खास तौर पर पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MPWPCL के नेटवर्क में 16 सदस्य सहकारी समितियों एवं उत्पादक कंपनियों सहित कुल 17 संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क से करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, यह व्यवस्था लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देने में भी योगदान करती है। कंपनी का सालाना कारोबार ₹500 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, संगठित प्रयास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई पहल किस तरह बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है। NDVSU की Extension Council में क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी जानकारी के प्रसार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय की विस्तार परिषद में MPWPCL से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका का मनोनयन ग्रामीण किसानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। पोल्ट्री व्यवसाय में बेहतर उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक तरीके और व्यावसायिक प्रबंधन की जानकारी काफी मायने रखती है। ऐसी जानकारी समय पर मिलने से किसानों को अपने काम में सुधार करने और कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। विद्यार्थियों को भी मिल रहा है Practical Experience MPWPCL से वर्ष 2004 से जुड़े रहे प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक प्रबंधन को पहुंचाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी दिशा में NDVSU के सहयोग से MPWPCL और केसला पोल्ट्री सहकारी समिति (KPS) में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को पोल्ट्री व्यवसाय की वास्तविक कार्यप्रणाली, सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और किसानों के साथ सीधे काम करने का अनुभव मिल सकता है। कक्षा में पढ़ाई गई बातों को जमीन पर समझने का मौका विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होता है। वहीं, ग्रामीण संगठनों को भी नई पीढ़ी के साथ काम करने और तकनीकी जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है। महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और व्यवसाय से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी निभाना भी है। MPWPCL जैसे संगठन महिलाओं को सामूहिक रूप से व्यवसाय चलाने, बाजार से जुड़ने और अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर देते हैं। विस्तार परिषद में मनोनयन से इस तरह के अनुभवों को शैक्षणिक और तकनीकी स्तर पर साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस मनोनयन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में प्रतिनिधि का नाम और परिषद में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करना उचित होगा। MPWPCL के लिए गर्व, ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद NDVSU की विस्तार परिषद में सदस्य के रूप में डॉ. मृदु पवन हजारिका मनोनयन MPWPCL से जुड़े किसानों, कर्मचारियों और सहकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाने वाला कदम है। करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़ा नेटवर्क ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की अहमियत को सामने लाता है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो वैज्ञानिक पशुपालन, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और परिवारों को मिल सकता है, जो पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
ODI

ODI Records: सचिन से गिल तक, एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाए और ऐसा रिकॉर्ड बनाए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए। भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। लेकिन जब बात एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा ODI रन बनाने की आती है, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। इस रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर सबसे आगे हैं। वहीं, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी एक ही साल में शानदार रन बनाकर इतिहास रचा था। नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि वह भी इस खास सूची में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली का नाम इस रिकॉर्ड की टॉप-5 लिस्ट में नहीं आता। ODI Cricket: एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज पुरुषों के ODI क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर के दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में ये पांच प्रदर्शन शामिल हैं। रैंक भारतीय बल्लेबाज साल रन 1 सचिन तेंदुलकर 1998 1,894 2 सौरव गांगुली 1999 1,767 3 राहुल द्रविड़ 1999 1,761 4 सचिन तेंदुलकर 1996 1,611 5 शुभमन गिल 2023 1,584 यहां कैलेंडर ईयर का मतलब 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच खेले गए ODI मैचों में बनाए गए रन हैं। इस सूची में सचिन तेंदुलकर का दो बार शामिल होना उनके शानदार करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। 1. सचिन तेंदुलकर: 1998 में बनाए 1,894 रन इस सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नाम है। उन्होंने 1998 में 34 ODI मैचों में 1,894 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने नौ शतक और सात अर्धशतक लगाए। सचिन के लिए 1998 बेहद खास साल रहा। उनकी बल्लेबाजी का अंदाज ऐसा था कि विरोधी टीमों के गेंदबाजों के सामने लगातार चुनौती बनी रहती थी। आज भी एक कैलेंडर ईयर में बनाए गए उनके 1,894 रन ODI क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में गिने जाते हैं। 2. सौरव गांगुली: 1999 में 1,767 रन भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 1999 में 1,767 रन बनाए थे। उन्होंने उस साल चार शतक और दस अर्धशतक लगाए। गांगुली की बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। एक ही साल में इतने रन बनाकर उन्होंने भारतीय ODI क्रिकेट में अपनी खास जगह बनाई। 3. राहुल द्रविड़: 1999 में 1,761 रन राहुल द्रविड़ ने भी 1999 में अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1,761 रन बनाए और इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। द्रविड़ को उनकी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने के लिए जाना जाता है। सौरव गांगुली के साथ उनका एक ही साल में इस सूची में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार उपलब्धि है। 4. सचिन तेंदुलकर: 1996 में भी दिखाया दम सचिन तेंदुलकर ने 1996 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उनके बल्ले से 1,611 ODI रन निकले, जिसमें छह शतक और नौ अर्धशतक शामिल थे। एक बल्लेबाज का अलग-अलग वर्षों में इस सूची में जगह बनाना आसान नहीं होता। सचिन ने यह उपलब्धि हासिल करके दिखाया कि उनकी निरंतरता कितनी खास थी। 5. शुभमन गिल: 2023 में 1,584 रन नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में 1,584 ODI रन बनाए थे। उन्होंने उस साल पांच शतक और नौ अर्धशतक लगाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 208 रन रहा, जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था। गिल का 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी खास था, क्योंकि उन्होंने बड़े स्कोर बनाने के साथ-साथ तेज गति से रन भी जुटाए। ICC के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल उनका ODI औसत 63.36 रहा। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> Virat Kohli टॉप-5 में क्यों नहीं हैं? विराट कोहली का नाम इस सूची में टॉप-5 में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका प्रदर्शन कम रहा है। कोहली ने 2017 में 1,460 ODI रन बनाए थे और उस साल उनका बल्लेबाजी औसत 76.84 रहा था। <Cite refs={[“turn447195search2”]}/> विराट की सबसे बड़ी ताकत लगातार रन बनाना और दबाव वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभालना रही है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। टूर्नामेंट में उनके नाम 765 रन रहे, जो पुरुषों के ODI वर्ल्ड कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रन-स्कोर है। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> यहां एक बात समझना जरूरी है: वर्ल्ड कप में बनाए गए रन और पूरे कैलेंडर ईयर में बनाए गए ODI रन अलग-अलग रिकॉर्ड हैं। इसी वजह से किसी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद बल्लेबाज इस सूची के टॉप-5 में शामिल न हो, ऐसा संभव है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड आज भी क्यों है खास? सचिन तेंदुलकर का 1998 में बनाया गया 1,894 रन का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। एक पूरे साल में इतने रन बनाने के लिए न सिर्फ अच्छी फॉर्म, बल्कि फिटनेस, निरंतरता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने 1999 में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी। वहीं, शुभमन गिल ने 2023 में दिखाया कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज भी इस स्तर का प्रदर्शन कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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