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जबलपुर में सिग्नल केबल चोरी से थमी 4 ट्रेनों की रफ्तार, सोलर कैमरों से पकड़ा गया आरोपी

जबलपुर रेलवे स्टेशन के पास रेलवे यार्ड से सिग्नल केबल चोरी होने के कारण रविवार को चार ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो गया। सिग्नल नहीं मिलने से ट्रेनें प्लेटफॉर्म पर खड़ी रहीं और करीब 30 से 60 मिनट की देरी के बाद उन्हें रवाना किया जा सका। चोरी हुई रेलवे संपत्ति की कीमत करीब 6,750 रुपये बताई गई है, लेकिन केबल कटने से रेलवे की सिग्नल व्यवस्था प्रभावित होने के कारण ट्रेनों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा। घटना के बाद आरपीएफ ने जांच शुरू की। स्टेशन के आसपास लगे सोलर पावर स्टैंड-अलोन कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालने पर दो संदिग्ध नजर आए। जांच के बाद आरपीएफ ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी की केबल बरामद कर ली है, जबकि उसके दो साथी फरार हैं। केबल कटते ही सिग्नल सिस्टम हुआ प्रभावित रविवार को जबलपुर स्टेशन पर जबलपुर-रीवा एक्सप्रेस, एलटीटी-राजगीर ट्रेन, निजामुद्दीन-जबलपुर एक्सप्रेस और लखनऊ-यशवंतपुर एक्सप्रेस रवाना होने के लिए खड़ी थीं। इसी दौरान रेलवे कर्मचारियों को सिग्नल केबल कटे होने की जानकारी मिली। इंजीनियरिंग टीम ने जबलपुर यार्ड में किलोमीटर नंबर 991/29 स्थित लोकेशन बॉक्स की जांच की। यहां सिग्नल केबल कटी हुई मिली। केबल कटने के कारण ट्रेनों को सिग्नल नहीं मिल पा रहा था। रेलवे टीम ने तत्काल केबल की मरम्मत की, जिसके बाद ट्रेनों को रवाना किया गया। 6,750 रुपये की केबल चोरी, लेकिन ट्रेनों पर पड़ा बड़ा असर आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब के अनुसार चोरी हुई रेलवे संपत्ति की अनुमानित कीमत 6,750 रुपये है। हालांकि, केबल कटने के कारण ट्रेन नंबर 11705, 13202, 22182 और 12540 के संचालन में देरी हुई। यानी कम कीमत की रेलवे संपत्ति चोरी की इस घटना से सिग्नल व्यवस्था प्रभावित हुई और कई ट्रेनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रुक गई। सोलर कैमरों ने खोला चोरी का राज जबलपुर रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में आरपीएफ ने पांच सोलर पावर स्टैंड-अलोन कैमरे लगाए हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद इन कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की गई। फुटेज में दो संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिए। जांच के आधार पर आरपीएफ ने गोहलपुर के गाजीनगर निवासी 37 वर्षीय अंसारी को गिरफ्तार किया। उसके पास से चोरी की गई सिग्नल केबल बरामद कर ली गई। भाई और साथी के साथ मिलकर काटी थी केबल पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपने भाई अकबर अंसारी और साथी जप्पू नाटी के साथ मिलकर रेलवे यार्ड में केबल चोरी की थी। तीनों सुबह करीब 7:30 बजे पानी की टंकी के पास स्थित लोहे के बॉक्स तक पहुंचे और उसे खोलकर उसमें लगी केबल काट ली। इसी दौरान रेलवे कर्मचारी को आते देखकर तीनों वहां से भाग गए और चोरी की केबल को झाड़ियों में छिपा दिया। 18 अगस्त की रात आरोपी जब झाड़ियों से केबल निकालकर ले जा रहा था, तभी आरपीएफ टीम ने उसे पकड़ लिया। दो आरोपी फरार, तलाश जारी आरपीएफ ने आरोपी के खिलाफ रेलवे प्रॉपर्टी (अनलॉफुल पजेशन) एक्ट की धारा 3(ए) और रेल अधिनियम की धारा 147 एवं 174 के तहत कार्रवाई की है। मामले में अकबर अंसारी और जप्पू नाटी अभी फरार हैं। आरपीएफ उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। आरपीएफ के अनुसार सिहोरा में दो, भिटौनी में दो और जबलपुर में पांच सोलर पावर स्टैंड-अलोन कैमरे लगाए गए हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले इन कैमरों की मदद से रेलवे क्षेत्र में निगरानी की जा रही है। इस मामले में भी कैमरों की रिकॉर्डिंग आरोपियों तक पहुंचने में अहम साबित हुई।
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ई-स्कूटी के साथ गलत चार्जर देना पड़ा भारी, सागर उपभोक्ता आयोग ने कंपनी-डीलर पर लगाया जुर्माना

सागर में ई-स्कूटी के साथ गलत क्षमता का चार्जर देने और शिकायत के बाद भी उसे नहीं बदलने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी और डीलर को उपभोक्ता को 950 वॉट का ओरिजनल चार्जर उपलब्ध कराने के साथ सेवा में कमी और मानसिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा परिवाद व्यय के रूप में 2 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। मामला सागर निवासी दुर्गेश पिता मुकेश जड़िया से जुड़ा है। उन्होंने टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक कार्यालय चेन्नई और बड़ेकुल मोटर्स, तुलसीनगर वार्ड, भोपाल रोड सागर के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। 2.19 लाख रुपए में खरीदी थी ई-स्कूटी दुर्गेश के अनुसार, उन्होंने 16 जनवरी 2025 को टीवीएस की इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदी थी। स्कूटर की कीमत 1 लाख 97 हजार 519 रुपए थी। बीमा, आरटीओ, एसेसरीज और अन्य खर्च जोड़ने के बाद इसकी कुल कीमत 2 लाख 19 हजार 300 रुपए हो गई थी। वाहन पर कंपनी की ओर से 5 साल की वारंटी/गारंटी भी दी गई थी। स्कूटर घर लाने के बाद जब उन्होंने बैटरी चार्ज की तो पूरी रात चार्ज करने के बावजूद बैटरी फुल चार्ज नहीं हुई। डिब्बे पर 950 वॉट, अंदर निकला 650 वॉट का चार्जर दुर्गेश ने इसकी शिकायत डीलर से की। जांच के दौरान पता चला कि स्कूटर में 950 वॉट का चार्जर इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन कंपनी की ओर से 950 वॉट के बॉक्स में गलती से 650 वॉट का चार्जर दे दिया गया था। डीलर ने बताया कि कंपनी को ई-मेल के जरिए इसकी जानकारी भेज दी गई है और सही चार्जर आने के बाद उसे उपलब्ध करा दिया जाएगा। हालांकि, कई बार डीलर के पास जाने के बावजूद उन्हें नया चार्जर नहीं मिला। उपभोक्ता आयोग ने एक महीने में चार्जर देने का आदेश दिया लगातार परेशान होने के बाद दुर्गेश ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार कोष्टा और सदस्य अनुभा वर्मा ने की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कंपनी और डीलर को आदेश दिया कि एक महीने के भीतर 950 वॉट का ओरिजनल चार्जर उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही सेवा में कमी और मानसिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा परिवाद व्यय के रूप में 2 हजार रुपए का भुगतान भी एक महीने के भीतर करने का आदेश दिया गया है।
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इंदौर में विकास कार्यों को लेकर एमआईसी के बड़े फैसले, कनाड़िया रोड से खजराना मंदिर तक बनेगा लिंक रोड

इंदौर शहर में विकास कार्यों को गति देने के लिए मंगलवार को नगर निगम में मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक आयोजित हुई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हुई बैठक में अवैध कॉलोनियों में निजी संपत्तियों के संपत्तिकर खाते खोलने, नामांतरण प्रक्रिया आसान करने, कनाड़िया रोड से खजराना मंदिर तक लिंक रोड बनाने और अन्नपूर्णा तालाब के पास स्ट्रीट फूड हब विकसित करने समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। अवैध कॉलोनियों के रहवासियों को राहत एमआईसी ने अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को राहत देते हुए फैसला लिया कि पूर्ण स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध होने पर निजी संपत्तियों और प्लॉट के संपत्तिकर खाते खोले जा सकेंगे। इसके लिए अधिभोगी या अधिवासी के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, शासकीय भूमि या शासकीय अतिक्रमण वाली जमीन पर संपत्तिकर जमा नहीं किया जाएगा। संपत्तियों के नामांतरण की प्रक्रिया को भी सरल बनाने के लिए एसओपी तैयार करने को मंजूरी दी गई है। स्वीमिंग पूल और स्मार्ट हब PPP मॉडल पर रणजीत हनुमान रोड स्थित ब्रह्मलीन श्री लक्ष्मणसिंह गौड़ उद्यान परिसर में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्वीमिंग पूल के निर्माण के बाद उसके संचालन और संधारण का काम पीपीपी मॉडल पर करने का निर्णय लिया गया। फूटी कोठी फ्लायओवर के नीचे उपलब्ध जमीन पर स्मार्ट हब विकसित करने और इसके संचालन-संधारण को भी पीपीपी मॉडल पर देने की मंजूरी दी गई। देवगुराड़िया में 60 टीपीडी नारियल अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग के लिए एजेंसी चयन को भी हरी झंडी दी गई। चौराहों पर दिखेगी ‘अखंड भारत’ थीम पलासिया चौराहे को मेसर्स जयदीप इस्पात एंड एलॉयज प्रा. लि. द्वारा सीएसआर के तहत गोद लिया जाएगा। यहां ‘आई लव इंदौर’ के साथ ‘अखंड भारत’ थीम पर आधारित स्मारक स्थापित किया जाएगा। राजकुमार ब्रिज के पास प्लेटफॉर्म नंबर 5 और 6 के सामने चंद्रयान की प्रतिकृति के बाकी निर्माण, सौंदर्यीकरण और संधारण का काम भी एचडी वायर प्रा. लि. द्वारा सीएसआर के तहत किया जाएगा। कनाड़िया रोड से खजराना मंदिर तक लिंक रोड शहर के प्रमुख मार्गों को आपस में जोड़ने के लिए कनाड़िया रोड से खजराना मंदिर तक लिंक रोड बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे इस क्षेत्र में यातायात और आवागमन को बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सुभाष नगर और वल्लभ नगर मार्केट में नए मार्केट के निर्माण की दिशा में भी नगर निगम कार्रवाई करेगा। अन्नपूर्णा तालाब के पास बनेगा स्ट्रीट फूड हब पथ विक्रेताओं को बेहतर सुविधा देने के लिए अन्नपूर्णा रोड स्थित तालाब के पास मौजूदा हॉकर्स जोन की जगह स्ट्रीट फूड हब विकसित किया जाएगा। यह पहल केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के निर्देशों के तहत पथ विक्रेताओं के लिए सहायता घटक के अंतर्गत की जाएगी। गणेशोत्सव और झांकी को लेकर भी फैसले अनंत चतुर्दशी पर नगर निगम परंपरा के अनुसार झांकी निकालेगा और गणेशोत्सव मनाएगा। इसके लिए अनुदान मंजूर किया गया है। इंदौर की मिलों को झांकी निर्माण के लिए अंशदान देने का भी निर्णय लिया गया। गणेशोत्सव विसर्जन चल समारोह में शामिल अखाड़ों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 15 हजार से बढ़ाकर 21 हजार रुपए करने को मंजूरी दी गई। 70 नई गेंट्री, ऑनलाइन टेंडर से मिलेंगे विज्ञापन अधिकार शहर में 70 नई गेंट्री लगाने का फैसला लिया गया है। इनके 10 साल के विज्ञापन अधिकार देने के लिए ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में कैमरा, मूवी कैमरा और व्यावसायिक फोटोग्राफरों के शुल्क बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है। हालांकि, जू का सामान्य प्रवेश शुल्क नहीं बढ़ाया जाएगा। कर्मचारियों के मेहनताना पर भी फैसला नगर निगम में कार्यरत मस्टर श्रमिकों को कलेक्टर इंदौर द्वारा निर्धारित नई दर के अनुसार मेहनताना देने की मंजूरी दी गई। कर्मचारी यूनियन की मांगों से जुड़े प्रस्ताव शासन को भेजने का भी निर्णय लिया गया। गर्मी के मौसम में लोगों को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए संपवेल पर क्लोरीनेटर समेत अन्य जरूरी सिस्टम लगाने पर भी सहमति बनी। PPP और CSR से विकास पर जोर बैठक के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि शहर के विकास को केवल पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाने के बजाय पीपीपी मॉडल, सीएसआर और जनभागीदारी के जरिए नए प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के साथ शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है।
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रायपुर में नाबालिग से 3 साल तक दुष्कर्म का आरोप, नवजात को बेचने के मामले में पिता-बुआ समेत 6 गिरफ्तार

रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म और उसके नवजात बच्चे को बेचने के आरोप का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 16 वर्षीय पीड़िता ने अपने पिता पर वर्ष 2023 से करीब तीन साल तक लगातार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने आरोपी पिता, बुआ समेत कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में पीड़िता की उम्र छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उसे अस्पताल में भर्ती कराने से जुड़े लोग भी शामिल हैं। शराब पिलाकर दुष्कर्म का आरोप, धमकी देकर कराया चुप पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2023 में अमलीडीह इलाके में एक रिश्तेदार के घर उसके पिता ने कथित तौर पर उसे जबरन शराब पिलाई। इसके बाद मारपीट कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बारे में किसी को बताने पर आरोपी पिता ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद भी उसका कथित तौर पर लगातार शोषण किया जाता रहा। इसी दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई। जब उसने अपनी बुआ को इसकी जानकारी दी तो आरोप है कि बुआ ने भी उसका साथ देने के बजाय उसके साथ मारपीट की और जबरन गर्भपात की दवा खिला दी। दोबारा गर्भवती हुई तो फर्जी आधार बनाकर बालिग दिखाया पुलिस के मुताबिक, गर्भपात के बाद भी पीड़िता का कथित शोषण जारी रहा। वर्ष 2025 में वह दोबारा गर्भवती हो गई। इसके बाद आरोपी पिता उसे डॉक्टर वर्षा मंडल और उसकी परिचित गीता राय के पास लेकर गया। पुलिस का आरोप है कि पीड़िता की वास्तविक उम्र छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया गया और दस्तावेजों में उसे बालिग दिखाया गया। इसके बाद उसे शादीशुदा बताकर डंगनिया स्थित वासुदेव अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में बेटे को जन्म, नवजात को बेचने का आरोप पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद आरोपियों पर नवजात को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का आरोप है। पुलिस अब नवजात से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चे को किसे सौंपा गया और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पिता-बुआ समेत 6 आरोपी गिरफ्तार पीड़िता की शिकायत के आधार पर न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने POCSO Act, Juvenile Justice Act और BNS की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता, बुआ और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में रोहित राय, साहेब मंडल, योगिता राय उर्फ गीता और बरखा वर्मा उर्फ वर्षा मंडल समेत कुल 6 लोग शामिल हैं। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है और नवजात से जुड़े तथ्यों के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और अस्पताल में भर्ती कराने की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।
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गुना के स्कूल में शर्मनाक हरकत: 10 छात्राओं की पानी की बोतलों में मिलाया पेशाब, परिजनों ने स्कूल में जड़ा ताला

मध्यप्रदेश के गुना जिले के एक सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा की 10 छात्राओं की पानी की बोतलों में कथित तौर पर पेशाब मिलाने का मामला सामने आया है। घटना सोमवार सुबह की बताई जा रही है। छात्राएं क्लासरूम से बाहर रंगोली बना रही थीं, इसी दौरान कुछ छात्रों ने उनकी पानी की बोतलों में पेशाब मिला दिया। बताया जा रहा है कि छात्राओं ने अनजान में बोतल का पानी पी भी लिया। बाद में जब उन्हें पानी में पेशाब मिलाए जाने की जानकारी हुई तो वे रोते हुए स्कूल की प्राचार्य के पास शिकायत लेकर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान प्राचार्य मूलचंद कौशिक ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय छात्राओं से कहा कि अगर मुंह खराब हो गया हो तो 10-10 रुपये वाली चॉकलेट खा लो। रोते हुए घर पहुंचीं छात्राएं घटना के बाद छात्राएं रोते हुए घर पहुंचीं और परिजनों को पूरी बात बताई। जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण स्कूल पहुंचे और जमकर विरोध किया। आक्रोशित लोगों ने स्कूल में ताला जड़ दिया। उन्होंने घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले को गंभीरता से नहीं लेने के आरोपों को लेकर प्राचार्य पर भी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों और परिजनों ने स्कूल परिसर में नारेबाजी की। हंगामा बढ़ने और स्थिति तनावपूर्ण होने की सूचना प्रशासन को दी गई। तहसीलदार और बीईओ मौके पर पहुंचे मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोन एसडीएम मंजूषा खत्री ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने तहसीलदार कृष्णकांत चौबे और बीईओ संतोष धाकड़ को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित छात्राओं, उनके परिजनों और कथित तौर पर घटना में शामिल छात्रों के बयान दर्ज किए। प्रशासन ने घटनाक्रम से जुड़े सभी पक्षों से जानकारी जुटाई। एसडीएम ने बीईओ को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। दो दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश एसडीएम मंजूषा खत्री ने बताया कि तहसीलदार और बीईओ को मौके पर भेजा गया था। बीईओ को दो दिन के भीतर मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्कूल की प्राचार्य को भी नोटिस जारी किया गया है। फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में कौन-कौन छात्र शामिल थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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खंडवा में 11 साल के अजीम की खदान के गड्ढे में डूबने से मौत, कपड़े-चप्पल मिलने के बाद चला पता

खंडवा में 11 साल के बच्चे की पानी में डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान अजीम के रूप में हुई है, जो सोमवार दोपहर से लापता था। देर रात चीरा खदान के गड्ढे के पास उसके कपड़े और चप्पल मिलने के बाद परिजनों को उसके पानी में डूबने की आशंका हुई। मंगलवार को स्थानीय लोगों ने खदान के गहरे गड्ढे में उसकी तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद अजीम का शव पानी के अंदर मिला। लोगों ने उसे बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में मातम पसरा है। वहीं, रहवासियों में प्रशासन की व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। दोपहर से लापता था अजीम परिजनों के मुताबिक, अजीम सोमवार दोपहर घर से निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने आसपास के मोहल्लों, रास्तों और संभावित जगहों पर उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। देर रात चीरा खदान के गड्ढे के पास अजीम के कपड़े और चप्पल मिले। इससे परिजनों को आशंका हुई कि वह पानी में गिर गया होगा। पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई। परिजनों का आरोप है कि रात में तलाश करने के बजाय सुबह तलाश करने की बात कही गई। इसके बाद स्थानीय लोग खुद गड्ढे में उतरकर अजीम की तलाश में जुट गए। गहरे पानी में लोगों ने खोजा शव रात के समय अंधेरा और गड्ढे में ज्यादा पानी होने के कारण तलाश करना मुश्किल था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने पानी में उतरकर खोजबीन जारी रखी। मंगलवार को काफी प्रयास के बाद अजीम का शव पानी के अंदर मिला। उसे बाहर निकालकर जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बारिश में तालाब जैसा हो जाता है गड्ढा हादसे के बाद चीरा खदान के गड्ढे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासी छोटे खान का आरोप है कि खदान के दोनों ओर अब कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोग यहां रहते हैं। इसके बावजूद गहरे गड्ढे को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। रहवासियों के अनुसार, बारिश के दौरान गड्ढे में पानी भर जाता है और यह तालाब जैसा दिखाई देने लगता है। आसपास रहने वाले बच्चों के लिए यह लगातार खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि गड्ढे के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग भी नहीं की गई है। पहले भी हो चुके हैं हादसे स्थानीय लोगों का दावा है कि चीरा खदान के इस गड्ढे में पहले भी डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि हादसों के बावजूद गड्ढे को बंद कराने या सुरक्षित करने के लिए स्थायी कदम नहीं उठाए गए। अजीम की मौत के बाद रहवासियों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने और गड्ढे को सुरक्षित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे खुले और पानी से भरे गड्ढों की पहचान कर समय रहते बैरिकेडिंग और सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि दोबारा किसी बच्चे की जान खतरे में न पड़े।
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स्कूल में घुसकर महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और धमकी देने वाले आरोपी को 5 साल की सजा

खंडवा में स्कूल परिसर में घुसकर महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ करने, हाथ पकड़ने, शासकीय रिकॉर्ड फाड़ने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में कोर्ट ने आरोपी गोलू निहाल को 5 साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुष्पक पाठक ने आरोपी पर 2 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि प्राथमिक शाला भवन विद्या का मंदिर है, जहां बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। ऐसे स्थान पर महिला शिक्षिका के साथ इस तरह का कृत्य गंभीर अपराध है और दोषी किसी तरह की नरमी का पात्र नहीं है। मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक रविंद्र पवार ने पैरवी की। करीब एक महीने से शिक्षिका का पीछा कर रहा था अभियोजन के अनुसार, पीड़ित महिला शिक्षिका ग्राम चिखलीखेड़ा की प्राथमिक शाला में पदस्थ हैं और रोज खिरकिया से स्कूल आती-जाती थीं। आरोपी गोलू निहाल करीब एक महीने से उनका पीछा कर उन्हें परेशान कर रहा था। 22 अगस्त 2024 को शिक्षिका ने आरोपी को स्कूल के पास समझाया था। उन्होंने उसे पीछा नहीं करने और परेशान न करने की चेतावनी भी दी, लेकिन आरोपी नहीं माना। स्कूल में घुसकर पकड़ा हाथ 23 अगस्त 2024 की सुबह करीब 10 बजे शिक्षिका स्कूल पहुंचीं। इसी दौरान आरोपी स्कूल परिसर में घुस आया। आरोप है कि उसने बुरी नीयत से शिक्षिका का हाथ पकड़ लिया और उनके साथ अभद्रता की। शिक्षिका ने विरोध करते हुए शोर मचाया तो आरोपी स्कूल के कमरे में चला गया। इसके बाद उसने वहां रखा सरकारी दाखिल-खारिज रजिस्टर फाड़ दिया। स्कूल से जाते समय आरोपी ने शिक्षिका को धमकी दी कि यदि उन्होंने घटना के बारे में किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की तो वह उन्हें गांव में नौकरी नहीं करने देगा। आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। परिचित के साथ थाने पहुंचीं शिक्षिका घटना के बाद शिक्षिका डर गईं। उन्होंने अपने परिचित के साथ थाना किल्लौद पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से फटा हुआ शासकीय रजिस्टर जब्त किया और पंचनामा तैयार किया। जांच पूरी होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया। कोर्ट ने कहा- गंभीर अपराध में नरमी नहीं सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिक्षिका के बयान समेत अन्य साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे और आरोपी के कृत्य को गंभीर बताते हुए उचित सजा की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी की कम उम्र, आर्थिक स्थिति और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए सजा में नरमी की मांग की। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि सजा का उद्देश्य केवल दोषी को सुधारना नहीं है, बल्कि गंभीर अपराधों में समाज के सामने उदाहरण पेश करना भी इसका उद्देश्य है। कोर्ट ने आरोपी को 5 साल की जेल और 2 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
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MP कैबिनेट का बड़ा फैसला: लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना 5 साल और जारी, नर्मदा मिशन को भी मंजूरी

भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महिलाओं, बेटियों, किसानों, स्वास्थ्य और नर्मदा संरक्षण से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला किया है। सरकार अगले पांच साल में लाड़ली बहना योजना पर 1,14,365 करोड़ रुपये और लाड़ली लक्ष्मी योजना पर 16,326 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बैठक में नर्मदा मिशन, स्वास्थ्य योजनाओं और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम में 35 नए पदों समेत कुल 18 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट से पहले CM मोहन यादव ने AI और युवाओं पर की बात कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लालकिले से दिए संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि 5 से 15 वर्ष के बच्चों की प्रतिभा पहचानने के लिए टैलेंट हंट अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने युवाओं के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग का बड़ा नेटवर्क तैयार करने और देश के एक करोड़ युवाओं को AI स्किल की ट्रेनिंग देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी वाले लोकतांत्रिक देश के रूप में AI के क्षेत्र में भारत की अहम भूमिका होगी। उन्होंने नशामुक्त भारत के लिए 100 सप्ताह का अभियान चलाने और इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने की बात भी कही। साथ ही सिविल डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत बताई। लाड़ली बहना योजना पर 1.14 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रस्ताव के अनुसार मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना-2023 को अगले पांच साल तक जारी रखा जाएगा। इस अवधि में योजना के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी तरह मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना को भी जारी रखने का फैसला लिया गया है। अगले पांच साल में इसके लिए 16,326 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना भी जारी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 रहेगी। योजना के लिए पांच साल में 2,137 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्वास्थ्य योजनाओं के लिए 11,835 करोड़ रुपये लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की मौजूदा योजनाओं को भी अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला हुआ है। इनमें उप स्वास्थ्य केंद्रों को जारी रखना, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना, अस्पतालों और औषधालयों के भवन निर्माण जैसी योजनाएं शामिल हैं। आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाला अतिरिक्त प्रोत्साहन भी जारी रहेगा। इन स्वास्थ्य योजनाओं के लिए पांच साल में 11,835 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। नर्मदा मिशन को मिली मंजूरी कैबिनेट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के ‘निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन’ यानी ‘नमन मिशन’ के गठन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य नर्मदा नदी के संरक्षण और उससे जुड़े विकास कार्यों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाना है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि नर्मदा को अविरल बनाए रखने के उद्देश्य से यह मिशन बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 35 प्रतिशत से अधिक आबादी नर्मदा नदी के किनारे रहती है। किसानों की 3 योजनाएं 5 साल और चलेंगी किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की 500 करोड़ रुपये से कम वित्तीय आकार वाली तीन योजनाओं को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक रहेगी। सड़क विकास निगम में 35 नए पद मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए स्वीकृत संरचना में 35 नए पद सृजित करने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा पहले से स्वीकृत 7 पदों को भी 19 सितंबर 2026 के बाद अगले पांच साल तक जारी रखने की अनुमति दी गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की योजनाएं जारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अनुसंधान, योजना एवं विकास गतिविधियों, प्रशासन और विज्ञान के प्रचार-प्रसार से जुड़ी योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी गई है। मंत्री राकेश सिंह के मुताबिक इन योजनाओं के लिए पांच साल में 492 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव है। पुलिस कर्मचारियों के चिकित्सा बिल मंजूर गृह विभाग से जुड़े दो मामलों में राज्य के बाहर निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले पुलिस कर्मचारियों के चिकित्सा बिलों के भुगतान को मंजूरी दी गई। इनमें भोपाल के निरीक्षक कर्ण सिंह और छतरपुर के सहायक उप निरीक्षक स्वर्गीय चन्द्रभान सिंह का मामला शामिल है। रिटायर्ड वनपाल की 10% पेंशन 3 साल रोकने का फैसला कैबिनेट ने सेवानिवृत्त तत्कालीन वनपाल रघुवीर सिंह यादव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसमें नुकसान की राशि की वसूली के साथ उनकी 10 प्रतिशत पेंशन तीन साल के लिए रोकने का फैसला शामिल है। कृषि विज्ञान केंद्र के लिए 20 हेक्टेयर जमीन सीहोर जिले के इछावर तहसील के ग्राम भाउखेड़ी में कृषि विज्ञान केंद्र के निर्माण के लिए ICAR के नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट को जमीन आवंटित करने की मंजूरी दी गई है। कुल 36.022 हेक्टेयर भूमि में से 20 हेक्टेयर जमीन स्थायी पट्टे पर दी जाएगी। इसके अलावा कैबिनेट ने सेवानिवृत्त सहकारी निरीक्षक प्रवीण जैन के खिलाफ विभागीय जांच, विभिन्न न्यायालयों के आदेशों के पालन और अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।
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इंदौर में पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान फटी सड़क, CCTV में कैद हुआ खौफनाक मंजर

इंदौर के गोराकुंड चौराहे के पास मंगलवार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए गए काम पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई। 24 घंटे पानी की सप्लाई के लिए बिछाई गई नई पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान अचानक पानी का दबाव बढ़ गया। इसके बाद सड़क का एक बड़ा हिस्सा फट गया। घटना का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में सड़क पर सामान्य आवाजाही के बीच अचानक जमीन के नीचे से तेज पानी निकलता दिखाई दे रहा है। घटना के समय सड़क से कार, ऑटो और बाइक सवार गुजर रहे थे। अचानक हुए धमाके जैसे हालात से लोग घबरा गए और कुछ लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से दूर भागते नजर आए। पानी के दबाव से उखड़े डामर और पेवर ब्लॉक पाइपलाइन से पानी का दबाव इतना अधिक था कि सड़क का डामर और पेवर ब्लॉक उखड़कर दूर जा गिरे। सड़क के बीचों-बीच बड़ा गड्ढा बन गया और आसपास पानी भर गया। गनीमत रही कि हादसे में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। टेस्टिंग के दौरान बढ़ा पानी का दबाव जानकारी के अनुसार, गोराकुंड क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाने के बाद इंजीनियर पानी छोड़कर उसकी टेस्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान अचानक पाइपलाइन में पानी का दबाव बढ़ गया। इसके बाद पाइपलाइन में लीकेज हुआ और पानी सड़क को चीरते हुए बाहर निकल आया। करीब 40 करोड़ की सड़क पर उठे सवाल यह सड़क ‘एरिया बेस्ड डेवलपमेंट’ के तहत एमजी रोड और आसपास के इलाकों के विकास के लिए करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क को बने अभी तीन साल भी पूरे नहीं हुए हैं। पहली ही पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान सड़क के इस तरह क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
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सागर में शराब दुकान पर पुलिसकर्मियों के हंगामे का CCTV सामने आया, गाली-गलौज और धमकी के आरोप

सागर के सानौधा थाना क्षेत्र में शराब दुकान के बाहर पुलिसकर्मियों के कथित हंगामे का CCTV फुटेज सामने आया है। मामला 16 अगस्त की रात का बताया जा रहा है। शाहपुर पुलिस चौकी क्षेत्र की शराब दुकान के बाहर रिकॉर्ड हुए फुटेज में कुछ पुलिसकर्मी दुकान कर्मचारियों से बहस करते नजर आ रहे हैं। CCTV के साथ सामने आई वॉइस रिकॉर्डिंग में एक आरक्षक कथित तौर पर कर्मचारियों से गाली-गलौज और धमकी भरे अंदाज में बात करता सुनाई दे रहा है। हालांकि, इस पूरे विवाद की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। दुकान के बाहर पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों में विवाद सामने आए CCTV फुटेज में कुछ पुलिसकर्मी शराब दुकान के बाहर दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान पुलिसकर्मियों और दुकान कर्मचारियों के बीच बातचीत के बाद विवाद जैसी स्थिति बनती नजर आती है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने कर्मचारियों से कथित तौर पर बहस की और पुलिस चौकी का हवाला देते हुए धौंस दिखाई। फुटेज में दुकान कर्मचारियों को फोन पर किसी व्यक्ति से आरक्षक की बात कराते हुए भी देखा जा सकता है। ऑडियो में ‘सेठ को बुलाओ’ कहने का दावा वायरल वॉइस रिकॉर्डिंग में एक आरक्षक के कथित तौर पर कर्मचारियों से ‘सेठ को बुलाओ’ कहने की बात सामने आ रही है। रिकॉर्डिंग में गाली-गलौज और धमकाने जैसे शब्द भी सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, रिकॉर्डिंग किस परिस्थिति में हुई और विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया संज्ञान CCTV फुटेज और ऑडियो सामने आने के बाद मामला वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आया है। पुलिस अधिकारियों द्वारा घटनाक्रम और फुटेज में नजर आ रहे पुलिसकर्मियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। चौकी प्रभारी बोले- अभी कोई शिकायत नहीं मिली मामले को लेकर शाहपुर चौकी प्रभारी ने बताया कि अब तक शराब दुकान संचालक या कर्मचारियों की ओर से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, CCTV फुटेज सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में सारंग हेलिकॉप्टर टीम दिखाएगी हवाई करतब, रायपुर पहुंचा वायुसेना का दल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। टीम सोमवार को रायपुर पहुंच गई। राज्योत्सव के दौरान नवा रायपुर अटल नगर के सेंध लेक क्षेत्र के ऊपर हेलिकॉप्टरों से रोमांचक हवाई करतब दिखाए जाएंगे। तीन दिवसीय आयोजन में होने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। स्वदेशी ध्रुव हेलिकॉप्टरों से दिखेगा वायुसेना का कौशल पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विंग कमांडर देबर्थो धर ने बताया कि सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव के जरिए प्रदर्शन करती है। टीम हवा में सटीक उड़ान, हेलिकॉप्टरों के बीच बेहतरीन तालमेल और एक साथ अलग-अलग आकृतियां बनाने के लिए जानी जाती है। प्रदर्शन के दौरान वायुसेना के जवान अपने कौशल, अनुशासन और टीमवर्क का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही स्वदेशी हेलिकॉप्टरों की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मोर के रंगों से प्रेरित है सारंग टीम की पहचान सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम के हेलिकॉप्टरों की रंग योजना भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित है। टीम का ध्येय वाक्य ‘इंस्पायर थ्रू एक्सीलेंस’ है, जिसका अर्थ उत्कृष्टता के जरिए प्रेरित करना है। सारंग टीम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है। अपने समन्वित हवाई प्रदर्शन के जरिए टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और स्वदेशी तकनीक को प्रदर्शित करती है। युवाओं को विमानन में करियर बनाने की मिलेगी प्रेरणा राज्योत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन आम लोगों के साथ विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी खास रहेगा। दर्शकों को हेलिकॉप्टरों की उड़ान और विमानन की दुनिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रदर्शन के जरिए युवाओं को विमानन क्षेत्र में करियर बनाने और देश की सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। राज्योत्सव में सारंग टीम की मौजूदगी आयोजन के रोमांच और आकर्षण को और बढ़ाएगी।

ग्वालियर में पटवारी भर्ती के नाम पर 7 युवाओं से 50 लाख की ठगी, फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर थमाए

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। ग्वालियर में सात बेरोजगार युवाओं को पटवारी बनवाने का झांसा देकर करीब 50 लाख रुपए वसूलने का आरोप है। आरोपियों ने खुद को व्यापमं का कर्मचारी और STF का अधिकारी बताकर युवाओं को भरोसे में लिया। इसके बाद उन्हें फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए गए। नौकरी नहीं मिलने और पैसे वापस न लौटाने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अरविंद नरवरिया, गोवर्धन तोमर और प्रदीप गौतम के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें तलाश में जुटी हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी के जरिए हुई मुलाकात मामले के मुताबिक, जीवाजी यूनिवर्सिटी की लॉ शाखा से जुड़े कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर निवासी महलगांव ने सात युवाओं को मुख्य आरोपी अरविंद नरवरिया से मिलवाया था। इनमें रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। आरोप है कि अरविंद युवाओं को भोपाल ले गया। वहां उसने प्रदीप गौतम का नाम बताते हुए उसे व्यापमं का कर्मचारी बताया और पटवारी की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। कुछ दिन बाद गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया, जिसे STF का अधिकारी बताया गया। प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में हुई थी डील युवाओं को पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में सौदा तय होने का आरोप है। इसके बाद किसी से दो लाख तो किसी से चार लाख रुपए एडवांस लिए गए। पीड़ितों के मुताबिक, अलग-अलग किस्तों में फोन-पे और बैंक खातों के जरिए रकम जमा कराई गई। कुल मिलाकर करीब 50 लाख रुपए लेने का आरोप है। आरोपियों ने युवाओं को जबलपुर और भोपाल ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही। इससे युवाओं को लगा कि भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए युवाओं को भरोसे में लेने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी चयन सूची और जॉइनिंग लेटर भी दिए। वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें कभी भोपाल, कभी जबलपुर और कभी भिंड ले जाया गया। आरोप है कि भिंड कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक सेवा केंद्र पर युवाओं के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया गया और उनके हस्ताक्षर लिए गए। इस घटनाक्रम के बाद वहां किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पैसे वापस मांगे तो नहीं मिली राहत पीड़ितों के मुताबिक, लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें पटवारी की नौकरी नहीं मिली। जब उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगे, तो रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। युवाओं ने धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया है। बताया गया है कि यह मामला 16 दिसंबर 2023 से अब तक की अवधि से जुड़ा है। ठगी का मामला सामने आने के बाद युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से भी रकम वापस दिलाने की मांग की। तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज शिकायत के बाद ग्वालियर के थाटीपुर थाने में सोमवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, केस में तीन आरोपियों के नाम सामने आए हैं: थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान के मुताबिक, शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

रूस में नौकरी की तलाश में गया बिलासपुर का युवक लापता, युद्ध में शामिल करने के लिए दबाव बनाने का आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का रहने वाला विनीत कुमार दुबे रूस में लापता हो गया है। वह नौकरी की तलाश में रूस गया था, लेकिन परिवार के मुताबिक 7 अक्टूबर के बाद से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। विनीत की बहन ने आरोप लगाया है कि उसे रूस में बंधक बनाकर रखा गया और युद्ध में शामिल होने से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई है। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर युवक की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। मामले में बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर विनीत की स्थिति का पता लगाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग मांगा है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए मिली थी नौकरी की जानकारी विनीत कुमार दुबे बिल्हा का रहने वाला है और उसने दसवीं तक पढ़ाई की है। परिवार के मुताबिक, उसे टेलीग्राम के एक ग्रुप के जरिए रूस में नौकरी की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह 1 अक्टूबर को मॉस्को पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद विनीत की मुश्किलें बढ़ने लगीं। उसे भारतीय दूतावास जाने नहीं दिया गया और मॉस्को के एक होटल में रोककर रखा गया। इसके बाद उसे वोल्गोग्राद भेज दिया गया, जहां उसे एक अपार्टमेंट में रखा गया था। कार में बैठाकर ले गए, फिर टूट गया संपर्क विनीत की बहन आशी दुबे के मुताबिक, 7 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे कुछ लोग उसके भाई को कार में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद से परिवार का उससे संपर्क टूट गया। बहन का आरोप है कि विनीत पर रेजिडेंसी हासिल करने और युद्ध में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे भूखा रखकर परेशान किया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विनीत को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फंसाने की धमकी देकर स्थानीय लोगों की बात मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। व्हाट्सएप के जरिए परिवार को मिली जानकारी परिवार के मुताबिक, विनीत के साथ हुई घटनाओं की जानकारी उन्हें किशोर नाम के एक युवक के जरिए मिली। किशोर ने व्हाट्सएप पर परिवार से संपर्क किया था। इसके बाद से परिजन विनीत की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और विनीत को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है। परिजनों ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से भी मदद की अपील की है। रूसी दूतावास और विदेश मंत्रालय को पुलिस ने लिखा पत्र परिवार की शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा है। पुलिस संबंधित एजेंसियों से विनीत की स्थिति की जानकारी जुटाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग की मांग कर रही है। फिलहाल विनीत कुमार दुबे कहां है और उसकी हालत कैसी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियों की मदद से जल्द उसका पता लगाया जा सकेगा और उसे सुरक्षित भारत लाया जाएगा।
MPWPCL

MPWPCL Achievement: 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़े संगठन को मिली नई पहचान

मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड (MPWPCL) के लिए गर्व की बात है। कंपनी से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका ,MVSc, मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor) प्रतिनिधि को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) डॉ. मृदु पवन हजारिका को सलाहकार MPWPCL में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को ग्रामीण महिलाओं, जनजातीय किसानों और सहकारिता के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान माना जा रहा है। यह मनोनयन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस जिम्मेदारी के जरिए विश्वविद्यालय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसान संगठनों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। MPWPCL से जुड़ी हैं करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड की शुरुआत ग्रामीण गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की जिला गरीबी उन्मूलन पहल (DPIP) के तहत शुरू हुए इस प्रयास में महिला किसानों और जनजातीय समुदायों को खास तौर पर पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MPWPCL के नेटवर्क में 16 सदस्य सहकारी समितियों एवं उत्पादक कंपनियों सहित कुल 17 संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क से करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, यह व्यवस्था लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देने में भी योगदान करती है। कंपनी का सालाना कारोबार ₹500 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, संगठित प्रयास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई पहल किस तरह बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है। NDVSU की Extension Council में क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी जानकारी के प्रसार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय की विस्तार परिषद में MPWPCL से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका का मनोनयन ग्रामीण किसानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। पोल्ट्री व्यवसाय में बेहतर उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक तरीके और व्यावसायिक प्रबंधन की जानकारी काफी मायने रखती है। ऐसी जानकारी समय पर मिलने से किसानों को अपने काम में सुधार करने और कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। विद्यार्थियों को भी मिल रहा है Practical Experience MPWPCL से वर्ष 2004 से जुड़े रहे प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक प्रबंधन को पहुंचाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी दिशा में NDVSU के सहयोग से MPWPCL और केसला पोल्ट्री सहकारी समिति (KPS) में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को पोल्ट्री व्यवसाय की वास्तविक कार्यप्रणाली, सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और किसानों के साथ सीधे काम करने का अनुभव मिल सकता है। कक्षा में पढ़ाई गई बातों को जमीन पर समझने का मौका विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होता है। वहीं, ग्रामीण संगठनों को भी नई पीढ़ी के साथ काम करने और तकनीकी जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है। महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और व्यवसाय से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी निभाना भी है। MPWPCL जैसे संगठन महिलाओं को सामूहिक रूप से व्यवसाय चलाने, बाजार से जुड़ने और अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर देते हैं। विस्तार परिषद में मनोनयन से इस तरह के अनुभवों को शैक्षणिक और तकनीकी स्तर पर साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस मनोनयन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में प्रतिनिधि का नाम और परिषद में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करना उचित होगा। MPWPCL के लिए गर्व, ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद NDVSU की विस्तार परिषद में सदस्य के रूप में डॉ. मृदु पवन हजारिका मनोनयन MPWPCL से जुड़े किसानों, कर्मचारियों और सहकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाने वाला कदम है। करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़ा नेटवर्क ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की अहमियत को सामने लाता है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो वैज्ञानिक पशुपालन, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और परिवारों को मिल सकता है, जो पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ODI Records: सचिन से गिल तक, एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाए और ऐसा रिकॉर्ड बनाए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए। भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। लेकिन जब बात एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा ODI रन बनाने की आती है, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। इस रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर सबसे आगे हैं। वहीं, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी एक ही साल में शानदार रन बनाकर इतिहास रचा था। नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि वह भी इस खास सूची में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली का नाम इस रिकॉर्ड की टॉप-5 लिस्ट में नहीं आता। ODI Cricket: एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज पुरुषों के ODI क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर के दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में ये पांच प्रदर्शन शामिल हैं। रैंक भारतीय बल्लेबाज साल रन 1 सचिन तेंदुलकर 1998 1,894 2 सौरव गांगुली 1999 1,767 3 राहुल द्रविड़ 1999 1,761 4 सचिन तेंदुलकर 1996 1,611 5 शुभमन गिल 2023 1,584 यहां कैलेंडर ईयर का मतलब 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच खेले गए ODI मैचों में बनाए गए रन हैं। इस सूची में सचिन तेंदुलकर का दो बार शामिल होना उनके शानदार करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। 1. सचिन तेंदुलकर: 1998 में बनाए 1,894 रन इस सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नाम है। उन्होंने 1998 में 34 ODI मैचों में 1,894 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने नौ शतक और सात अर्धशतक लगाए। सचिन के लिए 1998 बेहद खास साल रहा। उनकी बल्लेबाजी का अंदाज ऐसा था कि विरोधी टीमों के गेंदबाजों के सामने लगातार चुनौती बनी रहती थी। आज भी एक कैलेंडर ईयर में बनाए गए उनके 1,894 रन ODI क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में गिने जाते हैं। 2. सौरव गांगुली: 1999 में 1,767 रन भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 1999 में 1,767 रन बनाए थे। उन्होंने उस साल चार शतक और दस अर्धशतक लगाए। गांगुली की बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। एक ही साल में इतने रन बनाकर उन्होंने भारतीय ODI क्रिकेट में अपनी खास जगह बनाई। 3. राहुल द्रविड़: 1999 में 1,761 रन राहुल द्रविड़ ने भी 1999 में अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1,761 रन बनाए और इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। द्रविड़ को उनकी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने के लिए जाना जाता है। सौरव गांगुली के साथ उनका एक ही साल में इस सूची में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार उपलब्धि है। 4. सचिन तेंदुलकर: 1996 में भी दिखाया दम सचिन तेंदुलकर ने 1996 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उनके बल्ले से 1,611 ODI रन निकले, जिसमें छह शतक और नौ अर्धशतक शामिल थे। एक बल्लेबाज का अलग-अलग वर्षों में इस सूची में जगह बनाना आसान नहीं होता। सचिन ने यह उपलब्धि हासिल करके दिखाया कि उनकी निरंतरता कितनी खास थी। 5. शुभमन गिल: 2023 में 1,584 रन नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में 1,584 ODI रन बनाए थे। उन्होंने उस साल पांच शतक और नौ अर्धशतक लगाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 208 रन रहा, जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था। गिल का 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी खास था, क्योंकि उन्होंने बड़े स्कोर बनाने के साथ-साथ तेज गति से रन भी जुटाए। ICC के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल उनका ODI औसत 63.36 रहा। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> Virat Kohli टॉप-5 में क्यों नहीं हैं? विराट कोहली का नाम इस सूची में टॉप-5 में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका प्रदर्शन कम रहा है। कोहली ने 2017 में 1,460 ODI रन बनाए थे और उस साल उनका बल्लेबाजी औसत 76.84 रहा था। <Cite refs={[“turn447195search2”]}/> विराट की सबसे बड़ी ताकत लगातार रन बनाना और दबाव वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभालना रही है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। टूर्नामेंट में उनके नाम 765 रन रहे, जो पुरुषों के ODI वर्ल्ड कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रन-स्कोर है। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> यहां एक बात समझना जरूरी है: वर्ल्ड कप में बनाए गए रन और पूरे कैलेंडर ईयर में बनाए गए ODI रन अलग-अलग रिकॉर्ड हैं। इसी वजह से किसी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद बल्लेबाज इस सूची के टॉप-5 में शामिल न हो, ऐसा संभव है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड आज भी क्यों है खास? सचिन तेंदुलकर का 1998 में बनाया गया 1,894 रन का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। एक पूरे साल में इतने रन बनाने के लिए न सिर्फ अच्छी फॉर्म, बल्कि फिटनेस, निरंतरता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने 1999 में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी। वहीं, शुभमन गिल ने 2023 में दिखाया कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज भी इस स्तर का प्रदर्शन कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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