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सीहोर के अस्पताल में घड़ी के अंदर मिला संदिग्ध कैमरा, महिला स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप; मंत्री को सौंपा ज्ञापन

सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड मिलने से हड़कंप मच गया। घटना 13 अगस्त की बताई जा रही है। अस्पताल में काम करने वाली महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने इसे निजता और कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला स्वास्थ्यकर्मियों और नर्सिंग स्टाफ ने सीहोर से गुजर रहे राजस्व मंत्री एवं इछावर विधायक करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर उन्हें ज्ञापन सौंपा। घड़ी के अंदर मिला कैमरा और मेमोरी कार्ड अस्पताल कर्मचारियों के मुताबिक, एक कमरे में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड मिला। अस्पताल में बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्यकर्मी काम करती हैं। ऐसे में किसी उपकरण का इस तरह लगाया जाना कर्मचारियों की निजता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि कैमरा किसने, कब और किस उद्देश्य से लगाया था। इसके साथ ही अस्पताल के अन्य कमरों और स्थानों की भी जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं और भी ऐसे उपकरण तो नहीं लगाए गए। मंत्री का काफिला रोककर सौंपा ज्ञापन मामले को लेकर नाराज महिला स्वास्थ्यकर्मी और नर्सिंग स्टाफ ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर अपनी शिकायत रखी। कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। मंत्री ने कर्मचारियों की बात सुनी और मामले में जांच व आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। कार्रवाई में देरी का लगाया आरोप महिला कर्मचारियों का आरोप है कि संदिग्ध कैमरा मिलने के बाद भी विभागीय स्तर पर मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी वजह से उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधि के सामने अपनी शिकायत रखने के लिए आगे आना पड़ा। कर्मचारियों ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि निष्पक्ष जांच हो और कैमरा लगाने वाले व्यक्ति की पहचान के साथ पूरे मामले की सच्चाई सामने आए। कर्मचारियों के अनुसार, मिला हुआ संदिग्ध उपकरण संबंधित अधिकारियों को सुरक्षित सौंप दिया गया है। BMO बोले- नियमों के तहत कार्रवाई जारी बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के BMO डॉ. नवीन मेहर ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत निष्पक्ष कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घड़ी में मिला उपकरण वास्तव में कैमरा था, उसे किसने लगाया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
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इंदौर में PM आवास योजना के फ्लैटों पर निगम की बड़ी कार्रवाई, 15 आवासीय इकाइयां सील

इंदौर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अमलतास परिसर में आवंटित आवासीय इकाइयों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नगर निगम ने कार्रवाई की है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर शुक्रवार को जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 15 आवासीय इकाइयों को सील किया गया। वहीं, फ्लैटों में नियमों के विपरीत संचालित दुकानों का सामान भी जब्त किया गया। कहीं मवेशी पाले जा रहे थे, कहीं दुकानें मिलीं निरीक्षण के दौरान टीम को कई आवासीय इकाइयों में नियमों के विपरीत गतिविधियां मिलीं। कुछ फ्लैटों में मवेशी पाले जा रहे थे, जबकि कुछ हितग्राहियों ने अपने आवास किराये पर देकर वहां दूसरी गतिविधियां संचालित कर रखी थीं। कई आवासीय इकाइयों में रहने के बजाय दुकानें संचालित होती मिलीं। निगम ने इन मामलों को आवास आवंटन की शर्तों का उल्लंघन माना और कार्रवाई की। 20 हजार जमा कर बाकी 1.80 लाख नहीं चुकाए जांच के दौरान कुछ हितग्राहियों के आवास आवंटन से जुड़ी राशि भी बकाया मिली। बताया गया कि कुछ हितग्राहियों ने शुरुआती 20 हजार रुपए जमा किए थे, लेकिन शेष 1.80 लाख रुपए की राशि अब तक जमा नहीं की। निगम ने ऐसे हितग्राहियों को बकाया राशि जमा करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। राशि जमा नहीं की तो आवंटन होगा निरस्त नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में बकाया राशि जमा नहीं करने पर आवास खाली कराया जाएगा और आवंटन निरस्त किया जा सकता है। इसके बाद आवास किसी अन्य पात्र हितग्राही को आवंटित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। मुनादी के जरिए बकायादार हितग्राहियों को भी चेतावनी दी गई है कि समय पर राशि जमा नहीं करने पर पहले जमा की गई राशि राजसात करने के साथ आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम रही मौजूद कार्रवाई के दौरान तेजाजी नगर थाना प्रभारी, क्षेत्रीय तहसीलदार, कार्यपालन यंत्री मितेश सिंगोड, सीएलटीसी संतोषी गुप्ता सहित नगर निगम की रिमूवल टीम और पुलिस बल मौजूद रहा। निगम अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित मकानों का उपयोग तय नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है।
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बिलासपुर में मकान के बेसमेंट से टनों कृषि दवाइयां जब्त, बिना लाइसेंस भंडारण का आरोप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कृषि विभाग ने एक मकान के बेसमेंट से बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां जब्त की हैं। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो कृषि दवाओं और खाद के भंडारण से जुड़े जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा काफी ज्यादा है और इसकी तौल व लिस्टिंग का काम किया जा रहा है। आशंका है कि कृषि दवाइयां उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मंगाई गई थीं और बिलासपुर में बिक्री के लिए रखी गई थीं। लोखंडी के मकान में मिला स्टॉक कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि लोखंडी इलाके में एक मकान के बेसमेंट में बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि दवाइयां रखी गई हैं। सूचना के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बेसमेंट की जांच शुरू की। जांच के दौरान बड़ी संख्या में कृषि दवाइयां और अन्य सामग्री मिली। विभाग अब बरामद स्टॉक से जुड़े दस्तावेज और लाइसेंस की जांच कर रहा है। एक्सपायर या नकली दवाओं की भी आशंका कार्रवाई के दौरान मिली कुछ कृषि दवाओं के एक्सपायर या नकली होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं के सैंपल की जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कोई दवा नकली या निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। अगर ऐसा पाया जाता है तो मामले में आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिना लाइसेंस भंडारण की जांच कृषि दवाओं और कीटनाशकों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियम और लाइसेंस जरूरी होते हैं। बेसमेंट में इतनी बड़ी मात्रा में कृषि सामग्री मिलने के बाद विभाग ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि दवाइयां कहां से लाई गईं, किसके नाम पर थीं और इन्हें रखने या बेचने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक नहीं मिला जिस मकान के बेसमेंट से कृषि दवाइयां बरामद हुई हैं, वह गाजियाबाद निवासी आशु सिंह पाल का बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। फिलहाल कृषि विभाग ने बरामद सामग्री को जब्त कर लिया है। स्टॉक की गिनती और तौल के बाद पूरी सूची तैयार की जा रही है। दस्तावेजों और दवाओं की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। एसएसपी ने पुलिस टीम को भेजा मामले की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने भी इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सकरी थाना पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा टनों में है। फिलहाल उसकी गिनती, तौल और लिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। कार्रवाई के दौरान संयुक्त संचालक कृषि राजेश राठौर, सहायक संचालक कृषि अनिल शुक्ला, सहायक संचालक शशांक शिंदे समेत कृषि विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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गुना में 3.74 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का मामला, DPM भोपाल अटैच

गुना में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सामने आई 3.74 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी के मामले में अब जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) पर भी कार्रवाई हुई है। राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को भोपाल अटैच कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, गुना में चल रही जांच पूरी होने तक DPM को जिला मुख्यालय से हटाया गया है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, पोर्टल पर दर्ज जानकारी और बैंक खातों की जांच की जा रही है। LOKOS पोर्टल के आंकड़ों से सामने आई गड़बड़ी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में स्व-सहायता समूह और उनके सामुदायिक संगठन बनाए गए हैं। इन समूहों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी भारत सरकार के LOKOS पोर्टल पर दर्ज की जाती है। पोर्टल पर समूहों को मिली राशि, भुगतान की तारीख और अन्य वित्तीय जानकारी का रिकॉर्ड रहता है। इसी रिकॉर्ड का मिशन की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (FDM) से मिलान किया गया था। 90.25 लाख रुपए की राशि पर उठे सवाल मई में FDM और LOKOS पोर्टल के आंकड़ों के मिलान के दौरान प्रतिज्ञा सीएलएफ, विकासखंड गुना से संबंधित करीब 90.25 लाख रुपए की राशि में अंतर सामने आया। FDM पोर्टल पर यह राशि दिखाई दे रही थी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच में इतनी राशि की वास्तविक प्राप्ति नहीं मिली। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई। जिला और राज्य स्तर पर जांच जारी मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत CEO ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम को वित्तीय गड़बड़ी की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मामले की शिकायत राज्य स्तर पर भी की गई, जिसके आधार पर राज्य की टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल वित्तीय अभिलेखों, पोर्टल पर की गई प्रविष्टियों और संबंधित बैंक खातों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक DPM भोपाल अटैच मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को जांच पूरी होने तक भोपाल अटैच कर दिया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पोर्टल पर दर्ज राशि और बैंक खातों में वास्तविक लेन-देन के बीच अंतर कैसे आया और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता हुई। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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मध्यप्रदेश की जेलों में अब बंदियों की होगी साइको-सोशल काउंसलिंग, भोपाल सेंट्रल जेल में खुलेगा पहला सेंटर

मध्यप्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार में सुधार के लिए नई पहल शुरू की जा रही है। अब बंदियों को केवल सजा काटने तक सीमित रखने के बजाय उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए जेल विभाग की ओर से भोपाल केंद्रीय जेल में पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके परिणामों के आधार पर इस व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग और RRU के बीच हुआ MOU इस पहल के लिए मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर, गुजरात के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू हुआ है। जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की पहल पर जेल मुख्यालय में हुए एमओयू कार्यक्रम में विशेष महानिदेशक जी. अखेतो सेमा, उप महानिरीक्षक (कल्याण) एमआर पटेल सहित जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। RRU की ओर से डॉ. नूरिन चौधरी, डॉ. गीतेश कुमार सिंह, प्रदीप रूसिया, तनु पी चंदेल और शुभम जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 28 जेल अधिकारी-कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर RRU की साइको-सोशल काउंसलिंग योजना का अध्ययन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों को भोपाल बुलाकर 6 से 12 जुलाई तक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश की अलग-अलग जेलों के 28 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें मेल नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी शामिल रहे। प्रशिक्षण में मानसिक तनाव से गुजर रहे बंदियों की पहचान करने और उनकी काउंसलिंग करने के तरीके बताए गए। प्रशिक्षण के बाद बंदियों की काउंसलिंग शुरू प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने संबंधित जेलों में जाकर तनावग्रस्त बंदियों की काउंसलिंग की। जेल महानिदेशक ने काउंसलिंग से मिले फीडबैक और परिणामों की समीक्षा की। जेल विभाग के अनुसार, शुरुआती स्तर पर बंदियों के मानसिक सुधार की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए RRU के साथ एमओयू की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। गुजरात में मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे एमओयू के तहत जेल विभाग के चयनित अधिकारी और कर्मचारी राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर जाकर मास्टर ट्रेनर कोर्स करेंगे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी जेल विभाग में मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करेंगे और प्रदेश की अन्य जेलों के अधिकारियों-कर्मचारियों को साइको-सोशल काउंसलिंग का प्रशिक्षण देंगे। इससे जेलों में मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान, उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें जरूरी मनो-सामाजिक सहयोग देने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सकेगा। भोपाल केंद्रीय जेल से होगी शुरुआत जेल विभाग की इस योजना का पहला चरण केंद्रीय जेल भोपाल से शुरू होगा। यहां साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर सेंटर और काउंसलिंग व्यवस्था को प्रदेश की अन्य जेलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जेल विभाग का उद्देश्य बंदियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने, भावनात्मक संतुलन कायम करने और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन की दिशा में सहयोग देना है, ताकि जेल से बाहर आने के बाद वे बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सकें।
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बड़वानी में बीईओ को हटाने की मांग पर प्रदर्शन, सेंधवा विधायक को डेढ़ घंटे कार्यालय में रोका

बड़वानी जिले के निवाली में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मनोज मराठे को पद से हटाने और निलंबित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी को पुलिस ने उनके कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक रोककर रखा। विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली में चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा और कार्रवाई का लिखित आदेश नहीं मिलने के बाद वे 300 से अधिक समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए। बीईओ को निलंबित करने की मांग जयस की ओर से बीईओ मनोज मराठे को हटाने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से निवाली में धरना दिया जा रहा है। बताया गया है कि बीईओ के खिलाफ सेंधवा ग्रामीण थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज है और उन पर एक शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। इसी मामले को लेकर विधायक मोंटू सोलंकी भी आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे। उन्होंने बीईओ के वित्तीय अधिकार तत्काल वापस लेने और उन्हें निलंबित करने की मांग की। अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन विधायक को कार्यालय में रोके जाने के दौरान सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने उनसे चर्चा की। पुलिस और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का मौखिक आश्वासन दिया गया, लेकिन विधायक को निलंबन से संबंधित कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद विधायक अपने समर्थकों के साथ निवाली के लिए रवाना हो गए। विधायक ने प्रशासन पर लगाए संरक्षण के आरोप विधायक मोंटू सोलंकी ने आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में आरोपी अधिकारी को शासन और प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीईओ के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की और आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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मध्यप्रदेश में IAS अफसरों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, 10 जिला पंचायत CEO समेत नगर निगम आयुक्त बदले

मोहन सरकार ने मध्यप्रदेश में IAS अधिकारियों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी तबादला आदेश में 2016 से 2024 बैच तक के कई IAS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इस फेरबदल में 10 जिलों के जिला पंचायत CEO बदले गए हैं। इसके अलावा ग्वालियर और सतना नगर निगम के आयुक्तों का भी तबादला किया गया है। तबादला सूची में अधिकारियों को जिला पंचायत CEO, अपर कलेक्टर और SDM के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों में उप सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। कई अधिकारियों को नगर निगमों में आयुक्त और अपर आयुक्त के पद पर भी भेजा गया है। ग्वालियर और सतना नगर निगम आयुक्त बदले 2018 बैच के अभिषेक चौधरी को जिला पंचायत धार के CEO पद से हटाकर नगर पालिक निगम ग्वालियर का आयुक्त बनाया गया है। वहीं ग्वालियर नगर निगम के आयुक्त संघ प्रिय को जिला पंचायत सिंगरौली का CEO नियुक्त किया गया है। 2019 बैच के डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को जिला पंचायत खंडवा के CEO पद से नगर निगम सतना का आयुक्त बनाया गया है। उन्हें CEO स्मार्ट सिटी सतना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। 2016 से 2018 बैच के प्रमुख तबादले 2019 से 2021 बैच में भी बदलाव 2019 से 2021 बैच के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से: 2022 बैच के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी 2022 बैच के अधिकारियों में भी बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। ईश्वर्य वर्मा को CEO जिला पंचायत खंडवा और आशीष को अपर आयुक्त, नगर निगम इंदौर बनाया गया है। वहीं कार्तिकेय जायसवाल को CEO जिला पंचायत श्योपुर और विशाल धाकड़ को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा: 2024 बैच के सहायक कलेक्टरों को SDM की जिम्मेदारी तबादला आदेश में 2024 बैच के कई सहायक कलेक्टरों को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM की जिम्मेदारी दी गई है। श्रद्धा शुक्ला की भी पदस्थापना आदेश में श्रद्धा शुक्ला (2022) को अपर कलेक्टर, जिला खंडवा के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में उनके लिए फिलहाल पदस्थापना की प्रतीक्षा और कनिष्ठ वेतनमान से संबंधित उल्लेख भी किया गया है। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद प्रदेश के कई जिलों में जिला पंचायत, नगरीय प्रशासन और राजस्व स्तर पर अधिकारियों की नई टीम के साथ कामकाज शुरू होगा।
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छिंदवाड़ा में गर्भवती महिला को 8 किमी डोली में ले गए ग्रामीण, अस्पताल में गर्भस्थ शिशु की मौत

छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव ब्लॉक के चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में सड़क की बदहाल स्थिति ने एक गर्भवती महिला के परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद गांव तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को डोली में बैठाकर करीब 8 किलोमीटर तक दुर्गम रास्ते से पैदल पहुंचाया। गांव से बाहर एंबुलेंस मिलने के बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की हालत गंभीर होने पर उसे ICU में भर्ती किया गया है। 8 किलोमीटर तक डोली में लेकर चले ग्रामीण जानकारी के मुताबिक, चीटीपाठा जामुनडोंग निवासी सोनू मलगाम की पत्नी कुस्तरिया को गुरुवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, टोले तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सरपंच, परिजनों और ग्रामीणों ने लकड़ी और कपड़े की मदद से डोली तैयार की। महिला को डोली में बैठाकर ग्रामीण पैदल ही गांव से बाहर की ओर निकल पड़े। करीब 8 किलोमीटर का पथरीला और कठिन रास्ता तय करने के बाद महिला को गोप गांव तक पहुंचाया गया। यहां से 108 एंबुलेंस की मदद से उसे दमुआ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने पर गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि परिजनों के मुताबिक, महिला को अस्पताल पहुंचाने से पहले काफी दूरी तक दुर्गम रास्ते पर डोली के सहारे ले जाना पड़ा। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने गर्भ में ही शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे ICU में भर्ती किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। 125 परिवार, लेकिन पक्की सड़क का इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में करीब 125 परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां लंबे समय से पक्की सड़क सहित कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2016 से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रस्ताव रखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने दावा किया कि पहले भी तीन गर्भवती महिलाओं की मौत समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण हुई है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव तक पक्की सड़क बनाने और आपात स्थिति में एंबुलेंस की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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भोपाल के रेस्टोरेंट-बार में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, एक्सपायर कोल्ड्रिंक्स और खराब खाद्य सामग्री मिली

भोपाल में नगर निगम की म्युनिसिपल कोर्ट ने शुक्रवार को बंसल वन स्थित रेस्टोरेंट और बार में बड़ी कार्रवाई की। चलित न्यायालय की टीम ने कई प्रतिष्ठानों के किचन और खाद्य सामग्री की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर एक्सपायर कोल्ड्रिंक्स मिलीं, जबकि फ्रीज में शाकाहारी और मांसाहारी खाना एक साथ रखा हुआ पाया गया। टीम ने मौके पर ही जुर्माने की कार्रवाई की। चलित न्यायालय की कार्रवाई दोपहर करीब 1:30 बजे शुरू हुई और लगभग दो घंटे तक चली। इस दौरान टीम ने फर्जी कैफे, रोमियो लेन, फ्लाइंग सॉसर, रास्ता, माय बार, आयबरी, कव्वाली और संकल्प रेस्टोरेंट एंड बार सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। किचन में पहुंचकर खुद जांची खाद्य सामग्री मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने रेस्टोरेंट और बार के किचन में जाकर वहां रखी खाद्य सामग्री और ग्राहकों को परोसे जाने वाले भोजन की स्थिति देखी। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर एक्सपायर कोल्ड्रिंक्स मिलीं। वहीं फ्रीज में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री को एक साथ रखा गया था। किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी जांची गई। नगर निगम की टीम ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 तथा मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत जरूरी व्यवस्थाओं की जांच की। 30 से ज्यादा वाहनों के काफिले के साथ पहुंची टीम नगर निगम की विशेष टीम 30 से ज्यादा वाहनों के काफिले के साथ बंसल वन पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से रेस्टोरेंट और बार संचालकों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान निगम के जोन और वार्ड प्रभारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने एक-एक कर कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए, स्टाफ को लगाई फटकार जांच के दौरान टीम ने भोजन और कोल्ड्रिंक्स के सैंपल भी लिए। किचन में गंदगी और खाद्य सामग्री के रखरखाव में लापरवाही मिलने पर संबंधित स्टाफ को फटकार लगाई गई। नगर निगम की ओर से मौके पर ही जुर्माने की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों ने साफ-सफाई और खाद्य सामग्री को निर्धारित मानकों के अनुसार रखने के निर्देश दिए।
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बिलासपुर में तालाब में डूबे दो सगे भाई, छोटे को बचाने के लिए बड़े भाई ने लगाई छलांग

बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में दो सगे भाइयों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। दोनों बच्चे अपने पिता के साथ तालाब के पास गए थे। इसी दौरान छोटा भाई पानी में फिसलकर गहरे हिस्से में चला गया। उसे बचाने के लिए बड़ा भाई भी तालाब में कूद गया, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण दोनों डूब गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। एक साथ दो बेटों की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता से कुछ दूर जाते ही हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, चिल्हाटी निवासी भक्त प्रहलाद पैकरा किसान हैं। गुरुवार शाम वह अपने दोनों बेटों दीपू पैकरा (7) और चींटू पैकरा (4) को लेकर तालाब के पास गए थे। बताया जा रहा है कि पिता बच्चों को तालाब किनारे छोड़कर कुछ दूर चले गए और मोबाइल पर बात करने लगे। इसी दौरान तालाब के पास खेल रहा चार वर्षीय चींटू अचानक फिसलकर पानी में गिर गया और गहरे हिस्से में चला गया। छोटे भाई को बचाने तालाब में कूदा बड़ा भाई छोटे भाई को पानी में डूबता देखकर सात वर्षीय दीपू उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गया। बताया जा रहा है कि तालाब की गहराई अधिक थी और बच्चों को इसका अंदाजा नहीं था। देखते ही देखते दोनों बच्चे पानी में डूब गए। युवक ने देखा तो ग्रामीणों को बुलाया हादसे के दौरान एक युवक की नजर तालाब में डूब रहे दोनों बच्चों पर पड़ी। उसने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तालाब में उतरकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला। परिजन और ग्रामीण दोनों बच्चों को लेकर तत्काल पचपेड़ी अस्पताल पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मस्तूरी अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित किया मस्तूरी अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पचपेड़ी पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक साथ दो मासूम बेटों की मौत से परिवार में गम का माहौल है। गांव में भी इस हादसे के बाद शोक की लहर है।
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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में सारंग हेलिकॉप्टर टीम दिखाएगी हवाई करतब, रायपुर पहुंचा वायुसेना का दल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। टीम सोमवार को रायपुर पहुंच गई। राज्योत्सव के दौरान नवा रायपुर अटल नगर के सेंध लेक क्षेत्र के ऊपर हेलिकॉप्टरों से रोमांचक हवाई करतब दिखाए जाएंगे। तीन दिवसीय आयोजन में होने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। स्वदेशी ध्रुव हेलिकॉप्टरों से दिखेगा वायुसेना का कौशल पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विंग कमांडर देबर्थो धर ने बताया कि सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव के जरिए प्रदर्शन करती है। टीम हवा में सटीक उड़ान, हेलिकॉप्टरों के बीच बेहतरीन तालमेल और एक साथ अलग-अलग आकृतियां बनाने के लिए जानी जाती है। प्रदर्शन के दौरान वायुसेना के जवान अपने कौशल, अनुशासन और टीमवर्क का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही स्वदेशी हेलिकॉप्टरों की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मोर के रंगों से प्रेरित है सारंग टीम की पहचान सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम के हेलिकॉप्टरों की रंग योजना भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित है। टीम का ध्येय वाक्य ‘इंस्पायर थ्रू एक्सीलेंस’ है, जिसका अर्थ उत्कृष्टता के जरिए प्रेरित करना है। सारंग टीम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है। अपने समन्वित हवाई प्रदर्शन के जरिए टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और स्वदेशी तकनीक को प्रदर्शित करती है। युवाओं को विमानन में करियर बनाने की मिलेगी प्रेरणा राज्योत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन आम लोगों के साथ विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी खास रहेगा। दर्शकों को हेलिकॉप्टरों की उड़ान और विमानन की दुनिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रदर्शन के जरिए युवाओं को विमानन क्षेत्र में करियर बनाने और देश की सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। राज्योत्सव में सारंग टीम की मौजूदगी आयोजन के रोमांच और आकर्षण को और बढ़ाएगी।

ग्वालियर में पटवारी भर्ती के नाम पर 7 युवाओं से 50 लाख की ठगी, फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर थमाए

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। ग्वालियर में सात बेरोजगार युवाओं को पटवारी बनवाने का झांसा देकर करीब 50 लाख रुपए वसूलने का आरोप है। आरोपियों ने खुद को व्यापमं का कर्मचारी और STF का अधिकारी बताकर युवाओं को भरोसे में लिया। इसके बाद उन्हें फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए गए। नौकरी नहीं मिलने और पैसे वापस न लौटाने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अरविंद नरवरिया, गोवर्धन तोमर और प्रदीप गौतम के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें तलाश में जुटी हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी के जरिए हुई मुलाकात मामले के मुताबिक, जीवाजी यूनिवर्सिटी की लॉ शाखा से जुड़े कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर निवासी महलगांव ने सात युवाओं को मुख्य आरोपी अरविंद नरवरिया से मिलवाया था। इनमें रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। आरोप है कि अरविंद युवाओं को भोपाल ले गया। वहां उसने प्रदीप गौतम का नाम बताते हुए उसे व्यापमं का कर्मचारी बताया और पटवारी की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। कुछ दिन बाद गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया, जिसे STF का अधिकारी बताया गया। प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में हुई थी डील युवाओं को पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में सौदा तय होने का आरोप है। इसके बाद किसी से दो लाख तो किसी से चार लाख रुपए एडवांस लिए गए। पीड़ितों के मुताबिक, अलग-अलग किस्तों में फोन-पे और बैंक खातों के जरिए रकम जमा कराई गई। कुल मिलाकर करीब 50 लाख रुपए लेने का आरोप है। आरोपियों ने युवाओं को जबलपुर और भोपाल ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही। इससे युवाओं को लगा कि भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए युवाओं को भरोसे में लेने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी चयन सूची और जॉइनिंग लेटर भी दिए। वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें कभी भोपाल, कभी जबलपुर और कभी भिंड ले जाया गया। आरोप है कि भिंड कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक सेवा केंद्र पर युवाओं के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया गया और उनके हस्ताक्षर लिए गए। इस घटनाक्रम के बाद वहां किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पैसे वापस मांगे तो नहीं मिली राहत पीड़ितों के मुताबिक, लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें पटवारी की नौकरी नहीं मिली। जब उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगे, तो रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। युवाओं ने धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया है। बताया गया है कि यह मामला 16 दिसंबर 2023 से अब तक की अवधि से जुड़ा है। ठगी का मामला सामने आने के बाद युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से भी रकम वापस दिलाने की मांग की। तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज शिकायत के बाद ग्वालियर के थाटीपुर थाने में सोमवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, केस में तीन आरोपियों के नाम सामने आए हैं: थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान के मुताबिक, शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

रूस में नौकरी की तलाश में गया बिलासपुर का युवक लापता, युद्ध में शामिल करने के लिए दबाव बनाने का आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का रहने वाला विनीत कुमार दुबे रूस में लापता हो गया है। वह नौकरी की तलाश में रूस गया था, लेकिन परिवार के मुताबिक 7 अक्टूबर के बाद से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। विनीत की बहन ने आरोप लगाया है कि उसे रूस में बंधक बनाकर रखा गया और युद्ध में शामिल होने से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई है। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर युवक की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। मामले में बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर विनीत की स्थिति का पता लगाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग मांगा है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए मिली थी नौकरी की जानकारी विनीत कुमार दुबे बिल्हा का रहने वाला है और उसने दसवीं तक पढ़ाई की है। परिवार के मुताबिक, उसे टेलीग्राम के एक ग्रुप के जरिए रूस में नौकरी की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह 1 अक्टूबर को मॉस्को पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद विनीत की मुश्किलें बढ़ने लगीं। उसे भारतीय दूतावास जाने नहीं दिया गया और मॉस्को के एक होटल में रोककर रखा गया। इसके बाद उसे वोल्गोग्राद भेज दिया गया, जहां उसे एक अपार्टमेंट में रखा गया था। कार में बैठाकर ले गए, फिर टूट गया संपर्क विनीत की बहन आशी दुबे के मुताबिक, 7 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे कुछ लोग उसके भाई को कार में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद से परिवार का उससे संपर्क टूट गया। बहन का आरोप है कि विनीत पर रेजिडेंसी हासिल करने और युद्ध में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे भूखा रखकर परेशान किया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विनीत को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फंसाने की धमकी देकर स्थानीय लोगों की बात मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। व्हाट्सएप के जरिए परिवार को मिली जानकारी परिवार के मुताबिक, विनीत के साथ हुई घटनाओं की जानकारी उन्हें किशोर नाम के एक युवक के जरिए मिली। किशोर ने व्हाट्सएप पर परिवार से संपर्क किया था। इसके बाद से परिजन विनीत की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और विनीत को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है। परिजनों ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से भी मदद की अपील की है। रूसी दूतावास और विदेश मंत्रालय को पुलिस ने लिखा पत्र परिवार की शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा है। पुलिस संबंधित एजेंसियों से विनीत की स्थिति की जानकारी जुटाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग की मांग कर रही है। फिलहाल विनीत कुमार दुबे कहां है और उसकी हालत कैसी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियों की मदद से जल्द उसका पता लगाया जा सकेगा और उसे सुरक्षित भारत लाया जाएगा।
MPWPCL

MPWPCL Achievement: 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़े संगठन को मिली नई पहचान

मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड (MPWPCL) के लिए गर्व की बात है। कंपनी से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका ,MVSc, मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor) प्रतिनिधि को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) डॉ. मृदु पवन हजारिका को सलाहकार MPWPCL में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को ग्रामीण महिलाओं, जनजातीय किसानों और सहकारिता के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान माना जा रहा है। यह मनोनयन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस जिम्मेदारी के जरिए विश्वविद्यालय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसान संगठनों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। MPWPCL से जुड़ी हैं करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड की शुरुआत ग्रामीण गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की जिला गरीबी उन्मूलन पहल (DPIP) के तहत शुरू हुए इस प्रयास में महिला किसानों और जनजातीय समुदायों को खास तौर पर पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MPWPCL के नेटवर्क में 16 सदस्य सहकारी समितियों एवं उत्पादक कंपनियों सहित कुल 17 संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क से करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, यह व्यवस्था लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देने में भी योगदान करती है। कंपनी का सालाना कारोबार ₹500 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, संगठित प्रयास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई पहल किस तरह बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है। NDVSU की Extension Council में क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी जानकारी के प्रसार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय की विस्तार परिषद में MPWPCL से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका का मनोनयन ग्रामीण किसानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। पोल्ट्री व्यवसाय में बेहतर उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक तरीके और व्यावसायिक प्रबंधन की जानकारी काफी मायने रखती है। ऐसी जानकारी समय पर मिलने से किसानों को अपने काम में सुधार करने और कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। विद्यार्थियों को भी मिल रहा है Practical Experience MPWPCL से वर्ष 2004 से जुड़े रहे प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक प्रबंधन को पहुंचाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी दिशा में NDVSU के सहयोग से MPWPCL और केसला पोल्ट्री सहकारी समिति (KPS) में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को पोल्ट्री व्यवसाय की वास्तविक कार्यप्रणाली, सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और किसानों के साथ सीधे काम करने का अनुभव मिल सकता है। कक्षा में पढ़ाई गई बातों को जमीन पर समझने का मौका विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होता है। वहीं, ग्रामीण संगठनों को भी नई पीढ़ी के साथ काम करने और तकनीकी जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है। महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और व्यवसाय से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी निभाना भी है। MPWPCL जैसे संगठन महिलाओं को सामूहिक रूप से व्यवसाय चलाने, बाजार से जुड़ने और अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर देते हैं। विस्तार परिषद में मनोनयन से इस तरह के अनुभवों को शैक्षणिक और तकनीकी स्तर पर साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस मनोनयन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में प्रतिनिधि का नाम और परिषद में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करना उचित होगा। MPWPCL के लिए गर्व, ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद NDVSU की विस्तार परिषद में सदस्य के रूप में डॉ. मृदु पवन हजारिका मनोनयन MPWPCL से जुड़े किसानों, कर्मचारियों और सहकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाने वाला कदम है। करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़ा नेटवर्क ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की अहमियत को सामने लाता है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो वैज्ञानिक पशुपालन, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और परिवारों को मिल सकता है, जो पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
ODI

ODI Records: सचिन से गिल तक, एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाए और ऐसा रिकॉर्ड बनाए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए। भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। लेकिन जब बात एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा ODI रन बनाने की आती है, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। इस रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर सबसे आगे हैं। वहीं, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी एक ही साल में शानदार रन बनाकर इतिहास रचा था। नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि वह भी इस खास सूची में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली का नाम इस रिकॉर्ड की टॉप-5 लिस्ट में नहीं आता। ODI Cricket: एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज पुरुषों के ODI क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर के दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में ये पांच प्रदर्शन शामिल हैं। रैंक भारतीय बल्लेबाज साल रन 1 सचिन तेंदुलकर 1998 1,894 2 सौरव गांगुली 1999 1,767 3 राहुल द्रविड़ 1999 1,761 4 सचिन तेंदुलकर 1996 1,611 5 शुभमन गिल 2023 1,584 यहां कैलेंडर ईयर का मतलब 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच खेले गए ODI मैचों में बनाए गए रन हैं। इस सूची में सचिन तेंदुलकर का दो बार शामिल होना उनके शानदार करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। 1. सचिन तेंदुलकर: 1998 में बनाए 1,894 रन इस सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नाम है। उन्होंने 1998 में 34 ODI मैचों में 1,894 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने नौ शतक और सात अर्धशतक लगाए। सचिन के लिए 1998 बेहद खास साल रहा। उनकी बल्लेबाजी का अंदाज ऐसा था कि विरोधी टीमों के गेंदबाजों के सामने लगातार चुनौती बनी रहती थी। आज भी एक कैलेंडर ईयर में बनाए गए उनके 1,894 रन ODI क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में गिने जाते हैं। 2. सौरव गांगुली: 1999 में 1,767 रन भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 1999 में 1,767 रन बनाए थे। उन्होंने उस साल चार शतक और दस अर्धशतक लगाए। गांगुली की बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। एक ही साल में इतने रन बनाकर उन्होंने भारतीय ODI क्रिकेट में अपनी खास जगह बनाई। 3. राहुल द्रविड़: 1999 में 1,761 रन राहुल द्रविड़ ने भी 1999 में अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1,761 रन बनाए और इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। द्रविड़ को उनकी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने के लिए जाना जाता है। सौरव गांगुली के साथ उनका एक ही साल में इस सूची में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार उपलब्धि है। 4. सचिन तेंदुलकर: 1996 में भी दिखाया दम सचिन तेंदुलकर ने 1996 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उनके बल्ले से 1,611 ODI रन निकले, जिसमें छह शतक और नौ अर्धशतक शामिल थे। एक बल्लेबाज का अलग-अलग वर्षों में इस सूची में जगह बनाना आसान नहीं होता। सचिन ने यह उपलब्धि हासिल करके दिखाया कि उनकी निरंतरता कितनी खास थी। 5. शुभमन गिल: 2023 में 1,584 रन नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में 1,584 ODI रन बनाए थे। उन्होंने उस साल पांच शतक और नौ अर्धशतक लगाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 208 रन रहा, जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था। गिल का 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी खास था, क्योंकि उन्होंने बड़े स्कोर बनाने के साथ-साथ तेज गति से रन भी जुटाए। ICC के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल उनका ODI औसत 63.36 रहा। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> Virat Kohli टॉप-5 में क्यों नहीं हैं? विराट कोहली का नाम इस सूची में टॉप-5 में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका प्रदर्शन कम रहा है। कोहली ने 2017 में 1,460 ODI रन बनाए थे और उस साल उनका बल्लेबाजी औसत 76.84 रहा था। <Cite refs={[“turn447195search2”]}/> विराट की सबसे बड़ी ताकत लगातार रन बनाना और दबाव वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभालना रही है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। टूर्नामेंट में उनके नाम 765 रन रहे, जो पुरुषों के ODI वर्ल्ड कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रन-स्कोर है। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> यहां एक बात समझना जरूरी है: वर्ल्ड कप में बनाए गए रन और पूरे कैलेंडर ईयर में बनाए गए ODI रन अलग-अलग रिकॉर्ड हैं। इसी वजह से किसी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद बल्लेबाज इस सूची के टॉप-5 में शामिल न हो, ऐसा संभव है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड आज भी क्यों है खास? सचिन तेंदुलकर का 1998 में बनाया गया 1,894 रन का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। एक पूरे साल में इतने रन बनाने के लिए न सिर्फ अच्छी फॉर्म, बल्कि फिटनेस, निरंतरता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने 1999 में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी। वहीं, शुभमन गिल ने 2023 में दिखाया कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज भी इस स्तर का प्रदर्शन कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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