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Jaat Movie Review

Jaat Movie Review: Sunny Deol का Raw Desi Action और Ravana-Style Villain Hooda का Superhit मुकाबला!

Rating: ⭐⭐⭐⭐ (4/5) बॉलीवुड के देसी एक्शन सिनेमा को नई जान देने वाली फिल्म Jaat एक ऐसा एक्सपीरियंस है जो सिनेमाघर से निकलने के बाद भी आपके दिल और दिमाग पर छा जाता है। Sunny Deol की फुल-फॉर्म वापसी, Randeep Hooda का खतरनाक विलेन अवतार और डायरेक्टर Gopichand Malineni की मास-एंटरटेनर स्टोरीटेलिंग—सब मिलकर Jaat को बनाते हैं एक धमाकेदार एक्शन ड्रामा जो ना सिर्फ एंटरटेन करता है, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है। कहानी: Mythology meets Mass Action फिल्म की शुरुआत होती है 2009 के श्रीलंका के जंगली युद्धक्षेत्र से, जहां Ranatunga (Randeep Hooda) एक छुपा हुआ खजाना ढूंढ निकालता है। लेकिन ये खजाना उसे ले जाता है पावर, लालच और क्राइम के रास्ते पर। उसके साथ उसका भाई Somulu (Vineet Kumar Singh) भी है, और दोनों मिलकर बनाते हैं एक ऐसा अंडरवर्ल्ड इम्पायर जो ईस्ट कोस्ट की सियासत और सिस्टम को पूरी तरह हिला देता है। और फिर एंट्री होती है Jaat (Sunny Deol) की—एक साधारण दिखने वाला मुसाफिर, जो असल में इंसाफ का तूफान है। Jaat की पहली फाइट सीन ही बता देती है कि ये कोई आम हीरो नहीं, ये न्याय का अवतार है। फिल्म की कहानी Lord Ram vs Ravana के मॉडर्न वर्जन जैसी लगती है, जिसमें Deol का किरदार एक सामाजिक क्रांति की मिसाल बनता है। परफॉर्मेंस: Sunny Deol का दमदार कमबैक Sunny Deol एक बार फिर साबित करते हैं कि जब बात देसी एक्शन और इमोशनल इंटेंसिटी की हो, तो वो आज भी बेस्ट हैं। उनके एक्शन सीन, डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस—all scream power! उनकी शांत चाल के पीछे छुपा गुस्सा हर सीन में फील होता है। Randeep Hooda एक ग्रे-शेडेड विलेन के रोल में कमाल कर गए। Ranatunga एक ऐसा विलेन है जिसे आप नफरत तो करते हैं—but secretly admire too. उनकी परफॉर्मेंस में वो खिंचाव है जो कहानी को मजबूती देता है। Regina Cassandra as Ranatunga की पत्नी एक साइलेंट स्ट्रॉन्ग कैरेक्टर बनकर उभरती हैं। उनकी आंखों में लालच और चालाकी दोनों साफ नजर आती है। वहीं Vineet Kumar Singh अपने पहले निगेटिव रोल में एकदम खतरनाक लगे हैं। Saiyami Kher ने Vijay Lakshmi नाम की एक तेज-तर्रार पुलिस अफसर का रोल निभाया है, जो फिल्म के नैतिक संतुलन का प्रतीक है। टेक्नीकली भी फिल्म है टॉप क्लास Cinematography में श्रीलंका के शांत प्राकृतिक दृश्यों और क्रूर अंडरवर्ल्ड की दुनिया का कॉन्ट्रास्ट बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। एक्शन सीन्स इतने रियल और इम्पैक्टफुल हैं कि आप कुर्सी से चिपक जाते हैं। Background score भी शानदार है—एक-एक सीन को सही टाइम पर सही म्यूजिक के साथ पावर देता है। गाने इमोशनल कनेक्शन बढ़ाते हैं लेकिन कभी भी कहानी से भटकने नहीं देते। Social Commentary के साथ एंटरटेनमेंट का Tadka Jaat सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है, यह भ्रष्टाचार, सत्ता और सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दों पर भी कटाक्ष करती है। फिल्म में subtle तरीके से दिखाया गया है कि कैसे सिस्टम में बदलाव लाने के लिए किसी को “Jaat” बनकर सामने आना पड़ता है। अंतिम फैसला: देसी Action Lovers के लिए Must Watch अगर आप Sunny Deol के फैन हैं, या फिर असली देसी एक्शन, पावर-पैक्ड परफॉर्मेंस और इमोशनल हाई की तलाश में हैं—Jaat आपको निराश नहीं करेगी। थिएटर में सीटियां, तालियां और जोरदार चीयरिंग तय है! Produced by: Naveen Yerneni, Ravi Shankar Yalamanchili, T.G. Vishwa Prasad & Umesh Kumar BansalBanner: Mythri Movie Makers, People Media Factory, Zee Studios
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Vaibhav Suryavanshi

Young Star Vaibhav Suryavanshi का बड़ा बयान, बोले- हर रन और हर Celebration मेरे लिए खास

भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ नाम वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी नहीं, बल्कि मैदान पर जीत या बड़ी उपलब्धि के बाद किया जाने वाला उनका खास Celebration Style है। लंबे समय से फैंस यह जानना चाहते थे कि आखिर उनके इस अनोखे अंदाज के पीछे की सोच क्या है। अब खुद वैभव ने इस सवाल का जवाब देते हुए अपनी मानसिकता और क्रिकेट के प्रति नजरिया साझा किया है। वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि उनका हर सेलिब्रेशन भावनाओं से जुड़ा होता है। यह किसी को प्रभावित करने या सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए नहीं होता, बल्कि उस मेहनत का सम्मान है, जो उन्होंने उस पल तक पहुंचने के लिए की होती है। उन्होंने कहा, “मैं किसी भी चीज को हल्के में नहीं लेता। हर मैच मेरे लिए नई परीक्षा की तरह होता है। जब मेहनत का परिणाम मिलता है तो उसे महसूस करना और उसका सम्मान करना स्वाभाविक है।” हर रन और हर मैच को मानते हैं खास युवा बल्लेबाज का कहना है कि क्रिकेट में कोई भी उपलब्धि छोटी नहीं होती। चाहे एक महत्वपूर्ण पारी हो, टीम की जीत हो या कोई व्यक्तिगत रिकॉर्ड, वह हर मौके को उतनी ही गंभीरता से लेते हैं। उनके मुताबिक, यही सोच उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है। वैभव ने कहा कि वह अभी अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियों पर हैं और उन्हें लंबा सफर तय करना है। ऐसे में वह किसी भी सफलता को अंतिम मंजिल नहीं मानते, बल्कि हर मैच के बाद खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। सोशल मीडिया पर भी छाया Celebration Style हाल के मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी का सेलिब्रेशन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। क्रिकेट प्रेमियों ने उनके आत्मविश्वास और अलग अंदाज की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने उनके सेलिब्रेशन को उनकी पहचान तक बता दिया। हालांकि, वैभव का कहना है कि उनके लिए सबसे ज्यादा मायने टीम की जीत और अच्छा प्रदर्शन रखता है। टीम के लिए खेलना है सबसे बड़ा लक्ष्य वैभव सूर्यवंशी ने साफ किया कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा उनका ध्यान टीम की सफलता पर रहता है। उनका सपना भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखना और हर मौके पर टीम के लिए उपयोगी साबित होना है। उन्होंने कहा कि वह रोज नई चीजें सीखने की कोशिश करते हैं और यही वजह है कि किसी भी उपलब्धि को हल्के में नहीं लेते। उनका मानना है कि मेहनत, अनुशासन और सही सोच ही एक खिलाड़ी को लगातार आगे बढ़ाती है। फैंस के लिए क्या है संदेश? वैभव ने अपने प्रशंसकों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें मिलने वाला प्यार और समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी वह पूरी मेहनत और समर्पण के साथ मैदान पर उतरेंगे और अपने प्रदर्शन से फैंस की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। युवा बल्लेबाज की यह सोच बताती है कि वह सिर्फ प्रतिभाशाली खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि खेल के प्रति गंभीर और जिम्मेदार रवैया रखने वाले क्रिकेटर भी हैं। शायद यही कारण है कि कम उम्र में ही उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tariff

US Trade Policy: भारत के Export पर असर? अमेरिका ने लगाया 10% Extra Tariff, 60 देश भी निशाने पर

अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर 10% Extra Tariff लगाया गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर यह शुल्क 12.5% तक रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों की सप्लाई चेन में Forced Labour (जबरन मजदूरी) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की नजर अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिक गई है। क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला? अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की Section 301 के तहत यह कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में इन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ समेत कुल 60 देशों को इस दायरे में रखा गया है। भारत पर सिर्फ 10% Extra Tariff क्यों? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार जिन देशों ने Forced Labour को रोकने के लिए कुछ ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि जिन देशों के प्रयास कमजोर माने गए हैं, उनके लिए यह दर 12.5% तक तय की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश अपनी नीतियों में सुधार करते हैं तो भविष्य में इन टैरिफ की समीक्षा की जा सकती है। किन उत्पादों पर नहीं लगेगा असर? नई टैरिफ नीति में कुछ आवश्यक वस्तुओं को राहत दी गई है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) समझौते के तहत आने वाले सामान शामिल हैं। इसके अलावा अधिकांश आयातित वस्तुओं पर नया शुल्क लागू होगा। भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य निर्यात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। यदि अतिरिक्त शुल्क लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। कई देशों ने जताई नाराजगी अमेरिका के इस फैसले पर कई देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एकतरफा टैरिफ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत के लिए आगे की राह भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संवाद को मजबूत करना होगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो भविष्य में इस अतिरिक्त टैरिफ पर राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार जगत के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Layoffs

Tech Layoffs 2026: Amazon और Meta ने 40 हजार कर्मचारियों को निकाला, AI बना सबसे बड़ी वजह?

Amazon Layoffs और Meta Layoffs ने एक बार फिर दुनिया भर के टेक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 10 महीनों में दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 40 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। इन फैसलों के पीछे सबसे बड़ा कारण Artificial Intelligence (AI) पर बढ़ता निवेश, लागत में कटौती और कंपनियों का तेजी से बदलता बिजनेस मॉडल माना जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या आने वाले समय में टेक सेक्टर में नौकरी जाने का सिलसिला और तेज हो सकता है? Amazon ने क्यों घटाई अपनी Workforce? ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विस की दिग्गज कंपनी Amazon ने इस साल कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की है। जनवरी 2026 में कंपनी ने करीब 16 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद हाल ही में Artificial General Intelligence (AGI) से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स में भी टीमों का पुनर्गठन किया गया। कंपनी का कहना है कि वह AI तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में ऑटोमेशन संभव है, वहां संसाधनों का नए तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। Amazon का फोकस अब भविष्य की टेक्नोलॉजी तैयार करने पर है। Meta भी AI Strategy पर कर रही बड़ा दांव Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने भी अपने वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 8 हजार लोगों की छंटनी की है। इसके साथ ही कई नई भर्तियों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। Meta का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। इसी वजह से कंपनी अपने खर्चों को कम कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट टूल्स और नई तकनीकों पर ज्यादा निवेश कर रही है। आखिर क्यों बढ़ रही हैं Tech Layoffs? पिछले कुछ वर्षों में टेक कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्ती की थी। अब बाजार की बदलती परिस्थितियों और AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— क्या आगे भी बढ़ सकता है Layoffs का आंकड़ा? टेक इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल छंटनी पूरी तरह रुकने वाली नहीं है। आने वाले महीनों में भी कुछ कंपनियां अपने बिजनेस और AI रणनीति के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियां जरूर प्रभावित हो रही हैं, लेकिन दूसरी ओर AI Engineer, Machine Learning Specialist, Data Scientist, Cloud Engineer, Cyber Security Expert और Prompt Engineer जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी नौकरी के अवसर खत्म नहीं हो रहे, बल्कि उनका स्वरूप बदल रहा है। कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख? विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों की समझ भी उतनी ही जरूरी हो गई है। जो प्रोफेशनल समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे और AI से जुड़ी नई स्किल्स सीखेंगे, उनके लिए भविष्य में बेहतर अवसर बने रहेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।
Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk सरकार से समझौते के बाद खत्म हुई भूख हड़ताल, Written Assurance मिलने का दावा

पिछले 27 दिनों से जारी सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति के चलते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। अनशन खत्म होने के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधान के इस्तीफे की मांग इस समझौते का हिस्सा नहीं बनी है। यह घटनाक्रम पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार अपने वादों को तय समय में किस तरह लागू करती है। 27 दिनों तक चला आंदोलन, बातचीत से निकला समाधान सोनम वांगचुक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार 27 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस दौरान आंदोलन को देश के कई हिस्सों से समर्थन मिला। छात्रों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई चरणों में बातचीत हुई। शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, लेकिन लगातार संवाद के बाद दोनों पक्ष एक साझा सहमति तक पहुंचे। इसके बाद सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। किन मांगों पर बनी सहमति? अनशन खत्म करने के बाद मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन अहम मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन के दौरान उठाई गई प्रधान के इस्तीफे की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया और यह समझौते का हिस्सा नहीं है। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना था। नड्डा ने पिलाया जूस, खत्म हुआ 27 दिनों का अनशन समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा स्वयं पहुंचे और उन्होंने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आंदोलन से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। अनशन खत्म होने के साथ ही लंबे समय से जारी गतिरोध भी समाप्त हो गया। अब वादों को पूरा करने की चुनौती सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए अपना अनशन समाप्त किया है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है, उन पर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तय वादों को लागू नहीं किया गया, तो आगे की रणनीति पर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा। आंदोलन का संदेश करीब चार सप्ताह तक चला यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि कई सामाजिक और जनहित के मुद्दों को लेकर चल रही आवाज का प्रतीक बन गया। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने से फिलहाल विवाद का समाधान निकलता दिखाई दे रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब उन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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