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रायपुर में ट्रैफिक जाम से राहत के लिए 10 नई QRT तैनात, पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

राजधानी रायपुर में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने 10 नई क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित की हैं। आधुनिक वाहनों और आवश्यक उपकरणों से लैस ये टीमें ट्रैफिक जाम या सड़क पर यातायात बाधित होने की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति सामान्य करेंगी। हाल ही में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा जताई गई नाराजगी के बाद इस पहल को तेजी से लागू किया गया। पुलिस कमिश्नर ने नई QRT के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यातायात पुलिस ने नागरिकों की सुविधा के लिए 9479210632 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। यदि किसी स्थान पर ट्रैफिक जाम, सड़क पर वाहन खराब होने, सड़क दुर्घटना या अन्य किसी कारण से यातायात प्रभावित होता है, तो नागरिक इस नंबर पर सूचना दे सकते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नई QRT को आधुनिक संचार प्रणाली और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ये टीमें सड़क दुर्घटनाओं, वीआईपी मूवमेंट और अचानक उत्पन्न होने वाली यातायात संबंधी समस्याओं के दौरान भी त्वरित कार्रवाई करेंगी। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि शहर में कहीं भी ट्रैफिक जाम या सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही QRT बिना देरी के मौके पर पहुंचेगी। टीम का उद्देश्य कम से कम समय में यातायात को सुचारु बनाना है, ताकि लोगों को लंबे समय तक जाम में फंसना न पड़े।
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रायपुर में कारोबारी को हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल का आरोप, दो युवतियों पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक कारोबारी को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। कारोबारी की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो युवतियों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, अवैध उगाही और धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता कारोबारी जयंत चौधरी के अनुसार, दोनों युवतियों ने धोखे से उनकी फोटो और वीडियो बना लिए। इसके बाद कथित तौर पर मामला सार्वजनिक नहीं करने के बदले बड़ी रकम की मांग की गई। कारोबारी का आरोप है कि बदनामी के डर से उन्होंने 25 जून को तरुण नगर हाट बाजार के पास दोनों युवतियों को 25 हजार रुपये नकद दिए। इसके बावजूद ब्लैकमेलिंग का सिलसिला जारी रहा। शिकायत के मुताबिक, 1 जुलाई को दोनों युवतियां कारोबारी के कार्यालय के बेसमेंट तक पहुंच गईं और कार में रखे पैसों से भरे बैग तक पहुंचने की कोशिश की। वहीं 10 जुलाई को वे कार्यालय पहुंचीं और कर्मचारियों के सामने कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए दोबारा पैसे नहीं देने पर रेप के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। सिविल लाइन थाना पुलिस ने कारोबारी की शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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कांग्रेस में नेतृत्व बदलाव की चर्चा के बीच भाजपा का हमला, बोली- 3 साल में टीम तक नहीं बना सके दीपक बैज

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चाओं के बीच भाजपा ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने आरोप लगाया कि बैज अपने तीन साल के कार्यकाल में पूरी प्रदेश कार्यकारिणी तक गठित नहीं कर सके, जो कांग्रेस की गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी का प्रमाण है। भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन से प्रदेश अध्यक्ष बने दीपक बैज संगठन पर प्रभावी पकड़ बनाने में विफल रहे। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के अलग-अलग खेमों में बंटी रही, जिसके कारण प्रदेश संगठन मजबूत नहीं हो सका। उज्ज्वल दीपक ने दावा किया कि बैज अपने कार्यकाल में 10 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री और 252 सदस्यों वाली पूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी तक नहीं बना पाए। भाजपा के अनुसार, यह कांग्रेस के कमजोर संगठनात्मक ढांचे और आंतरिक खींचतान को दर्शाता है। भाजपा ने चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। प्रवक्ता ने कहा कि बैज के कार्यकाल में कांग्रेस को विधानसभा, लोकसभा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में लगातार हार का सामना करना पड़ा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बैज अपनी पारंपरिक चित्रकोट विधानसभा सीट भी नहीं बचा सके। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में आज भी गुटबाजी समाप्त नहीं हुई है और पार्टी के वरिष्ठ नेता अलग-अलग खेमों में बंटे हुए हैं। पार्टी का कहना है कि संगठन को मजबूत करने के बजाय कांग्रेस अंदरूनी राजनीति में उलझी हुई है।
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छत्तीसगढ़ में बड़ा पुलिस प्रशासनिक फेरबदल, 24 IPS अधिकारियों के तबादले, 12 जिलों के SP बदले

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। राज्य सरकार ने 24 आईपीएस अधिकारियों का तबादला करते हुए 12 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की नई पदस्थापना की है। यह बदलाव करीब 167 दिन पहले जारी पिछली तबादला सूची के बाद किया गया है। राजनांदगांव रेंज को मिला नया आईजी तबादला सूची के अनुसार, अजय कुमार यादव को नेताजी सुभाषचंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी के निदेशक पद से हटाकर राजनांदगांव रेंज का नया पुलिस महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया गया है। वहीं, राजनांदगांव रेंज के तत्कालीन आईजी बालाजी राव सोमावर को पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर भेजा गया है। इसके अलावा बस्तर आईजी प्रशांत कुमार अग्रवाल की भी पुलिस मुख्यालय में नई पदस्थापना की गई है। कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का बड़ा कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच सरकार ने कई जिलों में पुलिस नेतृत्व बदलने का फैसला लिया है। कोरिया जिले में भाजपा नेता को कार समेत जिंदा जलाने की घटना के बाद एसपी हरीश राठौर का तबादला किया गया है। वहीं, जुआ-सट्टा की शिकायतों के बाद बलौदाबाजार एसपी भावना गुप्ता को भी पुलिस मुख्यालय वापस बुला लिया गया है। 12 जिलों के नए एसपी नियुक्त सरकार ने कई जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति की है। प्रमुख नियुक्तियां इस प्रकार हैं— इसके अलावा रायपुर जोन के तीन डीसीपी को बस्तर भेजा गया है, जबकि रॉबिन्सन गुरिया को गरियाबंद के एसपी पद से रायपुर नगर पुलिस में डीसीपी (पश्चिम) बनाया गया है। कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य में कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, पुलिसिंग में सुधार लाने तथा विभिन्न जिलों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। अधिक जानकारी देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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श्रावणी मेला 2026: महादेवसाल स्टेशन पर 8 ट्रेनों का अस्थायी ठहराव, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी सुविधा

बिलासपुर। श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे ने महादेवसाल स्टेशन पर 4 जोड़ी यानी 8 ट्रेनों का अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी, जिससे महादेवसाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में काफी सहूलियत मिलेगी। दक्षिण पूर्व रेलवे के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली साउथ बिहार एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस और टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस का इस अवधि में महादेवसाल स्टेशन पर अस्थायी स्टॉपेज रहेगा। इन ट्रेनों का रहेगा अस्थायी ठहराव श्रद्धालुओं को होगी यात्रा में आसानी रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, श्रावणी मेले के दौरान महादेवसाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी को देखते हुए एक महीने के लिए इन ट्रेनों का महादेवसाल स्टेशन पर अस्थायी ठहराव दिया गया है, ताकि यात्रियों को मंदिर तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा से पहले ट्रेन के समय और स्टॉपेज की जानकारी की पुष्टि कर लें। अधिक जानकारी रेलवे और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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यात्रियों के लिए राहत: शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में लगेगा अतिरिक्त AC-3 कोच, बढ़ेंगी कन्फर्म सीटें

बिलासपुर। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और कन्फर्म बर्थ की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल ने शालीमार-एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस में अस्थायी रूप से एक अतिरिक्त एसी-3 टियर (AC-3) कोच लगाने का निर्णय लिया है। रेलवे के इस फैसले से यात्रा के दौरान अधिक यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ेगी। इन ट्रेनों में लगेगा अतिरिक्त AC-3 कोच रेल प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार— यात्रियों को मिलेगा फायदा रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त कोच लगाए जाने से वेटिंग लिस्ट कम होगी और अधिक यात्रियों को कन्फर्म बर्थ मिल सकेगी। रेल प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपनी टिकट और ट्रेन की स्थिति की जानकारी अवश्य जांचने की अपील की है। अधिक जानकारी रेलवे और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में मानसून ने पूरे प्रदेश को किया कवर, सरगुजा में आकाशीय बिजली गिरने से 3 की मौत

छत्तीसगढ़ में मानसून ने अब पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है। मौसम विभाग के अनुसार 22 जून को राज्य में प्रवेश करने वाला मानसून अब सभी जिलों तक पहुंच चुका है। हालांकि, बारिश के साथ आकाशीय बिजली भी कहर बरपा रही है। सरगुजा जिले में सोमवार शाम बिजली गिरने से दो बच्चों और एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई। पेड़ के नीचे खड़े थे बच्चे, अचानक गिरी बिजली यह दर्दनाक घटना सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र के डुमकी गांव की है। सोमवार शाम कुछ बच्चे आम बीनने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान बैल चरा रहे राम साय (36) भी वहां पहुंच गए। तभी अचानक पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई और चारों उसकी चपेट में आ गए। हादसे में 5 वर्षीय सागर, 9 वर्षीय रानी और 36 वर्षीय राम साय की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं सागर की 12 वर्षीय बड़ी बहन श्रद्धा गंभीर रूप से झुलस गई, जिसका इलाज जारी है। बिलासपुर में तेज बारिश और आंधी से जनजीवन प्रभावित सोमवार शाम बिलासपुर में तेज आंधी और बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया। कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ कार पर गिर गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि कार में सवार लोग सुरक्षित बच गए। पेड़ गिरने से बिजली के तार भी टूट गए, जिसके चलते आसपास के इलाके में कुछ समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। 22 जून को दंतेवाड़ा से हुई थी मानसून की एंट्री दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा जिले से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। इसके बाद धीरे-धीरे यह पूरे प्रदेश में फैलता गया। 30 जून को उत्तर और उत्तर-पूर्व छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में भी मानसून पहुंच गया। हालांकि इन इलाकों में पहले से ही प्री-मानसून बारिश हो रही थी। अगले चार दिन भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की अपील की गई है। इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून मानसून रायपुर, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर सहित कई जिलों में पहले ही सक्रिय हो चुका था। 30 जून को सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ में भी मानसून ने दस्तक दे दी। धिक जानकारी और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में बड़ा एक्शन: 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस, कई संस्थान सील

लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ में भी प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई, जिसमें भारी लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार रात SDRF और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग जिले में सरप्राइज निरीक्षण किया। जांच के दौरान इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और अन्य सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां मिलने पर 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया गया। संस्थानों को व्यवस्थाएं सुधारने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। वहीं गंभीर अनियमितता पाए जाने पर रामा कोचिंग, कैड एकेडमी मोशन, मोशन कोटा स्टडी सर्किल और वेदांतु को सील कर दिया गया। दुर्ग में सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले में करीब 150 से 200 कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जिनमें सबसे अधिक भिलाई के न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र में स्थित हैं। जांच के दौरान एक भी ऐसा संस्थान नहीं मिला जहां सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा हो। कई कोचिंग सेंटरों में फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर पाए गए, जबकि कई जगह उन्हें सही तरीके से लगाया ही नहीं गया था। अधिकांश संस्थानों में इमरजेंसी एग्जिट नहीं मिला और कई भवनों में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था। आपात स्थिति में फंस सकते हैं छात्र निरीक्षण के दौरान कई इमारतों में बेहद संकरी सीढ़ियां मिलीं, जहां एक समय में केवल एक छात्र ही आ-जा सकता है। अधिकारियों ने आशंका जताई कि किसी आपदा की स्थिति में छात्रों की सुरक्षित निकासी बेहद मुश्किल हो सकती है। एसडीआरएफ टीम ने मौके पर ही 62 संस्थानों को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। बिलासपुर में उड़ान एकेडमी सील बिलासपुर में पुलिस, नगर निगम और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने छह कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच में उड़ान आईएएस, चंद्रा एकेडमी, आचार्य एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग, प्रीमियर एकेडमी और पटेल ट्यूटोरियल में विभिन्न प्रकार की खामियां पाई गईं। सबसे गंभीर अनियमितताएं उड़ान आईएएस में मिलीं। यहां केवल एक प्रवेश-द्वार था, फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद नहीं था, लिफ्ट की व्यवस्था नहीं थी और बड़ी संख्या में छात्रों के अनुपात में पर्याप्त जगह भी उपलब्ध नहीं थी। इसके चलते नगर निगम ने संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर में भी कई संस्थानों को नोटिस रायपुर में 23 और 24 जून को सात प्रमुख कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया। जांच में अनअकैडमी, विद्यापीठ और एलन में सुरक्षा व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। वहीं अकादजा, आरसीसी एकेडमी, आभा लाइब्रेरी और टुटेजा एकेडमी में फायर एनओसी, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय में सुधार नहीं हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ सीलिंग समेत अन्य कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं, इसलिए फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और भवन सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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CBSE छात्रों को बड़ी राहत: अब री-वेरिफिकेशन के बाद भी कर सकेंगे उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड ने छात्रों के लिए एक नई और महत्वपूर्ण व्यवस्था शुरू की है। अब वे छात्र, जिन्होंने अपने बोर्ड परीक्षा परिणाम में अंकों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था और जांच के बाद भी उनके नंबरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, अपनी उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) की फिजिकल जांच करवा सकेंगे। बोर्ड ने इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। नई व्यवस्था के तहत छात्र सीधे सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) जाकर अपनी कॉपी की जांच कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी, जिनके वेरिफिकेशन का परिणाम “No Change” रहा है। पहली बार लागू हुई नई व्यवस्था सीबीएसई ने पहली बार यह कदम उठाया है। इससे पहले वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों के पास अपनी उत्तर पुस्तिका की दोबारा फिजिकल जांच कराने का कोई विकल्प नहीं होता था। बोर्ड का मानना है कि इस फैसले से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। छात्रों को मिलेगा संदेह दूर करने का मौका कई छात्र ऐसे होते हैं जिन्हें वेरिफिकेशन के बाद भी अपनी कॉपी की जांच को लेकर शंका बनी रहती है। अब उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका को प्रत्यक्ष रूप से देखने और अपनी शंकाओं का समाधान करने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों का बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत होगा। जल्द जारी होगा शेड्यूल सीबीएसई ने बताया है कि उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों में विस्तृत प्रक्रिया और समय-सारणी (Schedule) जल्द जारी की जाएगी। छात्रों को इसके लिए बोर्ड की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। 12वीं री-इवैल्यूएशन के परिणाम भी जारी इधर, सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के री-इवैल्यूएशन (Re-evaluation) के परिणाम भी चरणबद्ध तरीके से जारी करने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड के अनुसार अब तक प्राप्त 87 प्रतिशत से अधिक आवेदनों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। बाकी आवेदनों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है और जल्द ही अपडेटेड रिजल्ट जारी किए जाएंगे। छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला? यह नया नियम उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आया है जो अपने परिणाम को लेकर असमंजस में रहते हैं। अब वे सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी उत्तर पुस्तिका की वास्तविक जांच कराकर पूरी पारदर्शिता के साथ अपनी शंकाओं का समाधान कर सकेंगे। अधिक शिक्षा और करियर से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में तेज रफ्तार हाईवा का कहर, स्कूटी सवार युवक की मौत; दो साथी गंभीर घायल

बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि स्कूटी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घायलों का इलाज सिम्स अस्पताल में जारी है। रात 2 बजे हुआ हादसा पुलिस के अनुसार दुर्घटना रायपुर रोड स्थित सिरगिट्टी मोड़ के पास रात करीब 2 बजे हुई। स्कूटी पर सवार तीन युवक सिरगिट्टी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान चकरभाठा की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार हाईवा ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। मौके पर हुई युवक की मौत टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी सवार आकाश वर्मा (22) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके साथी अजय श्रीवास और दीपक श्रीवास गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सिम्स अस्पताल में चल रहा इलाज सूचना मिलते ही सिरगिट्टी पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया। दोनों घायलों को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाईवा जब्त, चालक गिरफ्तार सिरगिट्टी थाना प्रभारी यशवंत प्रताप सिंह ने बताया कि दुर्घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हादसे में शामिल हाईवा वाहन को जब्त कर लिया है। साथ ही चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। परिवार में पसरा मातम युवा बेटे की अचानक मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं घायल युवकों के परिवार अस्पताल में उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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