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बिलासपुर में विवाहिता की संदिग्ध मौत, शरीर पर मिले चोट के निशान; मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप

बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में एक 28 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के शरीर पर चोट के निशान मिलने के बाद मायके पक्ष ने इसे हत्या बताते हुए पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पति का दावा है कि उसकी पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 2019 में हुई थी शादी जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के मधुपुर निवासी अदिति मौर्य (28) की शादी 10 फरवरी 2019 को बिलासपुर के दयालबंद मधुबन रोड निवासी रविकांत मौर्य से हुई थी। दंपती की 13 महीने की एक बेटी भी है। रविकांत तिफरा सब्जी मंडी में व्यवसाय करता है। पति का दावा- फांसी लगाने की कोशिश की थी पुलिस को दिए बयान में रविकांत ने बताया कि वह अपनी बेटी के साथ ऊपर कमरे में सो रहा था, जबकि अदिति नीचे थी। जब वह नीचे पहुंचा तो पत्नी बेड पर पड़ी मिली। उसका कहना है कि अदिति ने सिल्क की साड़ी से फांसी लगाने की कोशिश की थी, लेकिन फंदा खुलने के कारण वह नीचे गिर गई। शादी के बाद से प्रताड़ना का आरोप मृतका के भाई अखिलेश वर्मा ने आरोप लगाया है कि शादी के कुछ समय बाद से ही अदिति को पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि अदिति अक्सर फोन पर मारपीट और उत्पीड़न की जानकारी देती थी। उनका आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से अदिति से सीधे बात नहीं हो पा रही थी। जब भी परिवार वाले संपर्क करने की कोशिश करते थे, पति किसी न किसी बहाने से बात नहीं करवाता था। दूसरी महिला से संबंध को लेकर था विवाद मृतका के भाई अभिषेक वर्मा ने आरोप लगाया कि रविकांत का किसी दूसरी महिला से संबंध था। उनके मुताबिक, एक सप्ताह पहले अदिति ने पति के मोबाइल चैट का वीडियो बनाकर अपनी बड़ी बहन को भेजा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। 23 जून को मारपीट का आरोप मायके पक्ष का दावा है कि 23 जून को भी अदिति के साथ मारपीट की गई थी। जब परिवार वालों ने ससुराल पक्ष से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा है। कुछ देर बाद अदिति की मौत की खबर मिली। सूचना मिलने पर परिजन उत्तर प्रदेश से बिलासपुर पहुंचे, जहां अस्पताल में उन्हें अदिति की मौत की जानकारी दी गई। शरीर पर मिले चोट के निशान परिजनों का आरोप है कि अदिति के हाथ, पैर, गर्दन और कान पर चोट के निशान थे। उनका कहना है कि जिस जगह फांसी लगाने की बात कही जा रही है, वहां परिस्थितियां संदिग्ध हैं। उन्होंने पुलिस को आवेदन देकर हत्या की आशंका जताई है। मृतका के भाई और अन्य परिजनों ने पति रविकांत मौर्य, सास-ससुर, ननद और नंदोई पर हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने कमरे और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट का इंतजार शुरू कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस आत्महत्या और हत्या दोनों एंगल से मामले की जांच कर रही है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में पुरानी बैटरियों के अवैध कारोबार पर सख्ती, बिना रजिस्ट्रेशन खरीद-बिक्री करने वालों पर होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में पुरानी और खराब बैटरियों के अवैध कारोबार पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेजों के पुरानी बैटरियों का खरीद-बिक्री, भंडारण या परिवहन करना कानूनन अपराध है। मंडल के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के कई क्षेत्रों में कबाड़ और पुरानी बैटरियों का कारोबार नियमों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। केवल पंजीकृत कारोबारी ही कर सकेंगे कारोबार पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बताया कि बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2022 के तहत पुरानी और खराब बैटरियों का संग्रहण, भंडारण, परिवहन और रीसाइक्लिंग केवल अधिकृत एवं पंजीकृत संस्थाओं द्वारा ही किया जा सकता है। संबंधित कारोबारियों के लिए खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े सभी दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है। खुले में बैटरियां रखने पर भी होगी कार्रवाई मंडल ने चेतावनी दी है कि खुले स्थान पर पुरानी बैटरियों का ढेर लगाना, बिना अनुमति उनका भंडारण करना या अवैध तरीके से खरीद-बिक्री करना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रदेश में चलेगा विशेष जांच अभियान पर्यावरण संरक्षण मंडल जल्द ही राज्यभर में विशेष जांच अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान के दौरान स्क्रैप डीलर, कबाड़ कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और बैटरी व्यापार से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान गंभीर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लोगों से सहयोग की अपील मंडल ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी क्षेत्र में पुरानी बैटरियों का अवैध भंडारण, परिवहन या कारोबार होता दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय या पर्यावरण संरक्षण मंडल को देने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसे अवैध कारोबारों पर रोक लगाना जरूरी है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में पुरानी बैटरियों के अवैध कारोबार पर सख्ती, बिना रजिस्ट्रेशन खरीद-बिक्री करने वालों पर होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में पुरानी और खराब बैटरियों के अवैध कारोबार पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेजों के पुरानी बैटरियों का खरीद-बिक्री, भंडारण या परिवहन करना कानूनन अपराध है। मंडल के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के कई क्षेत्रों में कबाड़ और पुरानी बैटरियों का कारोबार नियमों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। केवल पंजीकृत कारोबारी ही कर सकेंगे कारोबार पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बताया कि बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2022 के तहत पुरानी और खराब बैटरियों का संग्रहण, भंडारण, परिवहन और रीसाइक्लिंग केवल अधिकृत एवं पंजीकृत संस्थाओं द्वारा ही किया जा सकता है। संबंधित कारोबारियों के लिए खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े सभी दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है। खुले में बैटरियां रखने पर भी होगी कार्रवाई मंडल ने चेतावनी दी है कि खुले स्थान पर पुरानी बैटरियों का ढेर लगाना, बिना अनुमति उनका भंडारण करना या अवैध तरीके से खरीद-बिक्री करना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रदेश में चलेगा विशेष जांच अभियान पर्यावरण संरक्षण मंडल जल्द ही राज्यभर में विशेष जांच अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान के दौरान स्क्रैप डीलर, कबाड़ कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और बैटरी व्यापार से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान गंभीर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लोगों से सहयोग की अपील मंडल ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी क्षेत्र में पुरानी बैटरियों का अवैध भंडारण, परिवहन या कारोबार होता दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय या पर्यावरण संरक्षण मंडल को देने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसे अवैध कारोबारों पर रोक लगाना जरूरी है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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रायपुर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को जोन-7 की कमान

रायपुर नगर निगम में प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के लिए जिम्मेदारियों का नया बंटवारा किया गया है। निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने आदेश जारी कर कई अधिकारियों को अतिरिक्त दायित्व सौंपे हैं। जारी आदेश के अनुसार स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को जोन क्रमांक-7 के प्रभारी जोन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को मिली नई जिम्मेदारी निगम प्रशासन ने डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को मुख्यालय स्वास्थ्य अधिकारी, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना और पंजीयक जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन के दायित्वों से मुक्त करते हुए जोन-7 की जिम्मेदारी सौंपी है। नगर निगम का मानना है कि इस बदलाव से जोन स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन में तेजी आएगी। जागृति साहू और डॉ. अंजलि शर्मा को अतिरिक्त प्रभार आदेश के मुताबिक उपायुक्त जागृति साहू को उनके वर्तमान कार्यों के साथ पंजीयक जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा को उनके मौजूदा दायित्वों के साथ प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिकारियों के बीच कार्यों के पुनर्वितरण का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करना है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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रायपुर की प्यास बुझाएगा गजराज बांध! 230 एकड़ जलाशय को शहर की नई लाइफलाइन बनाने की तैयारी

रायपुर की बढ़ती आबादी और भविष्य की पेयजल जरूरतों को देखते हुए गजराज बांध को बड़े जल भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। कमल विहार स्थित करीब 230 एकड़ क्षेत्र में फैले इस बांध को राजधानी की नई पेयजल लाइफलाइन बनाने की योजना पर काम किया जाएगा। बुधवार को लोकभवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर महापौर मीनल चौबे और नगर निगम अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की। पेयजल के लिए उपयोगी बनाया जाएगा गजराज बांध बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में गजराज बांध का सिंचाई कार्यों में प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है। यदि आवश्यक मरम्मत और विकास कार्य किए जाएं तो इसे रायपुर शहर के लिए एक महत्वपूर्ण पेयजल स्रोत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से शहर को भविष्य में शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी तथा जल संकट की संभावित चुनौतियों से भी निपटा जा सकेगा। विभागों के समन्वय से आगे बढ़ेगी योजना राज्यपाल ने महापौर और संबंधित अधिकारियों को विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहर की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए। बढ़ती आबादी के बीच अहम कदम रायपुर की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही पेयजल की मांग में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे में 230 एकड़ में फैले गजराज बांध को जल भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना को राजधानी के भविष्य की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह योजना मूर्त रूप लेती है तो आने वाले वर्षों में गजराज बांध रायपुर की जल आपूर्ति व्यवस्था का प्रमुख आधार बन सकता है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में कबाड़ कारोबारी का अपहरण जैसा कांड! गोदाम में बंधक बनाकर पीटा, पत्नी से वसूले 2.70 लाख रुपए

बिलासपुर में कबाड़ कारोबार को लेकर विवाद अब हिंसक रूप लेता नजर आ रहा है। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में एक कबाड़ कारोबारी और उसके साले को कथित तौर पर गोदाम में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटने और परिवार से लाखों रुपए वसूलने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कई आरोपियों के खिलाफ डकैती समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार गणेश नगर चुचुहियापारा निवासी सैय्यद प्रिंस बक्शी सिलपहरी क्षेत्र में कबाड़ का कारोबार करते हैं। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि 11 जून की दोपहर उन्हें राहुल कबाड़ी का फोन आया, जिसने तिफरा स्थित एक गोदाम में बुलाया। वह अपने साले मोहम्मद अमन के साथ वहां पहुंचे थे। गोदाम में बंधक बनाकर की मारपीट शिकायत के मुताबिक गोदाम में पहले से मौजूद फिरोज मेमन, राहुल कबाड़ी, सफीर और अन्य लोगों ने उनसे कबाड़ कारोबार को लेकर पूछताछ शुरू की। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें और उनके साले को गोदाम में बंधक बनाकर रखा गया। वहीं कुछ लोगों को उनकी निगरानी के लिए तैनात कर दिया गया था। दुकान और वाहन पर भी कब्जे का आरोप शिकायत के अनुसार मारपीट के दौरान कुछ आरोपी सिलपहरी स्थित उनकी दुकान और गोदाम भी पहुंचे। वहां कर्मचारियों से पूछताछ की गई और सामान की तलाशी ली गई। आरोप है कि इस दौरान कुछ सामान उठाने के साथ ही उनका छोटा हाथी वाहन भी जबरन अपने कब्जे में ले लिया गया। पत्नी से वसूले 2.70 लाख रुपए पीड़ित ने आरोप लगाया कि आरोपियों के कुछ साथी उनके घर पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर घर की तलाशी ली। परिवार को डराने-धमकाने के बाद उनकी पत्नी से 2 लाख 70 हजार रुपए ले लिए गए। शिकायत के मुताबिक रुपए मिलने के बाद शाम करीब 5 बजे उन्हें और उनके साले को छोड़ा गया। कई आरोपियों पर केस दर्ज सिरगिट्टी पुलिस ने मामले की जांच के बाद फिरोज मेमन, रोहित कबाड़ी, राहुल कबाड़ी, रितिक कबाड़ी, सफीर, तौसिफ कबाड़ी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। कारोबार की प्रतिस्पर्धा से जुड़ा विवाद प्राथमिक जांच में मामला कबाड़ कारोबार में प्रतिस्पर्धा से जुड़ा बताया जा रहा है। क्षेत्र में कबाड़ कारोबार को लेकर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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‘धन दोगुना’ करने का झांसा देकर व्यापारी से 2.50 लाख की ठगी, खुद को अयोध्या का पंडित बताने वाला आरोपी गिरफ्तार

बिलासपुर में एक व्यापारी को रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाकर 2.50 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने खुद को अयोध्या का पंडित (महाराज) बताकर व्यापारी को अपने जाल में फंसाया था। वारदात को अंजाम देने के बाद वह दुर्ग में जाकर छिप गया था, जहां से पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम रोगदा निवासी 57 वर्षीय जनकराम साहू किराना व्यवसायी हैं। 12 जून को वे खरीदारी के लिए बिलासपुर के व्यापार विहार पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात दो व्यक्तियों से हुई, जिन्होंने खुद को अयोध्या का पंडित बताकर उनसे बातचीत शुरू की। अमीर बनाने का दिया लालच आरोपियों ने व्यापारी को विश्वास में लेकर दावा किया कि वे विशेष पूजा और विधि के जरिए धन को दोगुना कर सकते हैं। उनकी बातों में आकर जनकराम साहू ने अपने पैसों से भरा बैग आरोपियों को सौंप दिया। मौका मिलते ही दोनों ठग 2 लाख 50 हजार रुपए लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच ठगी का अहसास होने पर व्यापारी ने तारबाहर थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर तारबाहर थाना और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित की गई। CCTV और तकनीकी जांच से मिला सुराग पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी दुर्ग जिले में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस ने दुर्ग के केला बाड़ी क्षेत्र में दबिश देकर मुख्य आरोपी हैदर अली अंसारी (60) को गिरफ्तार कर लिया। पहले भी दर्ज हैं कई मामले पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ पहले से चोरी और धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। वहीं इस मामले का दूसरा आरोपी वासिम खान अभी फरार है। उसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि धन दोगुना करने, चमत्कार दिखाने या तंत्र-मंत्र के नाम पर पैसे मांगने वाले लोगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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महिला पत्रकार के खिलाफ FIR और चार्जशीट रद्द, हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करते हुए कहा है कि बिना किसी ठोस कारण के जांच और चार्जशीट दाखिल करने में 6 साल से अधिक की देरी करना आरोपी को प्रताड़ित करने के समान है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले त्वरित न्याय और शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन माना। यह फैसला रमेश सिन्हा और रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। 2018 की घटना से जुड़ा मामला याचिकाकर्ता श्रिया पांडेय वर्ष 2018 में एक न्यूज चैनल में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थीं। उस दौरान पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था। 20 जून 2018 को आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों की पत्नियों को महिला थाने में बैठाए जाने की सूचना मिलने पर श्रिया अपनी टीम के साथ जानकारी लेने महिला थाना पहुंची थीं। पत्रकार पर दर्ज कर दिया गया था केस याचिका के अनुसार, जानकारी मांगने पर पुलिसकर्मियों ने सहयोग नहीं किया और बाद में श्रिया पांडेय के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर दिया गया था। हाईकोर्ट पहुंची पत्रकार पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए श्रिया पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना वर्ष 2018 की थी, जबकि पुलिस ने चार्जशीट नवंबर 2024 में पेश की। इस छह साल की देरी को लेकर पुलिस विभाग कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका। कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला अदालत ने केस डायरी और चार्जशीट का अवलोकन करने के बाद कहा कि पूरा मामला केवल पुलिसकर्मियों और उनसे जुड़े गवाहों के बयानों पर आधारित था। घटनास्थल पर कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं और पत्रकार द्वारा अपराध किए जाने का कोई प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। कानून के दुरुपयोग पर अदालत की टिप्पणी डिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसे मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक मुकदमे की प्रक्रिया में उलझाकर रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ट्रेनों में महिलाओं के बैग और जेवर चुराने वाला अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा गया, 4 महिलाएं गिरफ्तार

बिलासपुर। रेलवे यात्रियों को निशाना बनाकर ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय महिला गिरोह का जीआरपी बिलासपुर ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने महाराष्ट्र की चार महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने ट्रेनों में महिलाओं के हैंडबैग, नकदी और जेवरात चोरी करने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रही सात अन्य महिलाओं को भी गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच जीआरपी थाना प्रभारी विश्वनाथ चक्रवर्ती ने बताया कि पामगढ़ निवासी दिनेश कुमार पंकज की पत्नी ने ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के जनरल कोच से करीब 95 हजार रुपये मूल्य के जेवरात से भरे हैंडबैग की चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान रेलवे स्टेशन पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस को देखकर भागने लगीं आरोपी महिलाएं चेकिंग के दौरान महाराष्ट्र की चार महिलाएं संदिग्ध अवस्था में घूमती हुई मिलीं। पुलिस को देखकर वे भागने लगीं, लेकिन घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया गया। पूछताछ में महिलाओं ने अपना संबंध नागपुर के अंजनी थाना क्षेत्र से बताया। रायपुर से रायगढ़ के बीच ट्रेनों में करती थीं चोरी पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे संगठित गिरोह के रूप में रायपुर से रायगढ़ के बीच चलने वाली ट्रेनों में महिलाओं को निशाना बनाती थीं। गिरोह महिलाओं के हैंडबैग, नकदी और सोने-चांदी के जेवरात चोरी कर फरार हो जाता था। नागपुर में बेच दिए जाते थे चोरी के जेवर आरोपियों ने बताया कि चोरी किए गए जेवरात नागपुर की ज्वेलरी दुकानों में बेच दिए जाते थे। इसके बाद मिली रकम को गिरोह के सदस्यों के बीच बांट लिया जाता था। 24 हजार रुपये नकद बरामद पुलिस ने गिरफ्तार महिलाओं के कब्जे से कुल 24 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इनमें पूनम विनेश मानकर और अरुणा विट्ठल उइके के पास से 10-10 हजार रुपये, जबकि अनीता मंगल सिंह और चैत्रा लोढ़े के पास से 2-2 हजार रुपये मिले हैं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। एसी कोच में चोरी करने वाला आरोपी भी गिरफ्तार जीआरपी ने एक अन्य कार्रवाई में उधमपुर-दुर्ग एक्सप्रेस के एसी कोच में चोरी करने वाले आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। ग्वालियर निवासी यात्री जय सावनानी के बैग से सोने की चेन और 25 हजार रुपये नकद चोरी हुए थे। साइबर सेल की मदद से आरोपी तक पहुंची पुलिस जांच के दौरान साइबर सेल की मदद से दुर्ग निवासी फरहान तासिरखान (39) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 25 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। उसे भी न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। स्टेशन पर चोरी की नीयत से घूम रही 7 महिलाएं भी पकड़ी गईं जीआरपी की नियमित जांच के दौरान रेलवे प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध रूप से घूम रही सात महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार सभी महिलाएं महाराष्ट्र की रहने वाली हैं और चोरी की नीयत से स्टेशन परिसर में घूम रही थीं। यात्रियों से सतर्क रहने की अपील जीआरपी ने यात्रियों से यात्रा के दौरान अपने सामान और कीमती वस्तुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में निगरानी बढ़ा दी गई है और ऐसे गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें —www.deshharpal.com
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बिलासपुर को मिलेगी नई फोरलेन सड़क, 75 करोड़ की लागत से बनेगा कोनी-मोपका बाइपास

बिलासपुर के लोगों को जल्द ही बेहतर यातायात सुविधा मिलने वाली है। शहर के कोनी-मोपका बाइपास रोड को अब फोरलेन सीमेंट कांक्रीट सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 75.73 करोड़ रुपये का टेंडर स्वीकृत कर दिया गया है। 13.4 किलोमीटर लंबी होगी सड़क प्रस्तावित फोरलेन सड़क की लंबाई 13.4 किलोमीटर होगी। इस सड़क के निर्माण से शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगी। बारिश में होती थी सबसे ज्यादा परेशानी वर्तमान में कोनी-मोपका बाइपास रोड की स्थिति बारिश के मौसम में काफी खराब हो जाती है। सड़क पर कीचड़ और गड्ढों के कारण वाहन अक्सर फंस जाते हैं, जिससे लंबा जाम लगने की समस्या पैदा होती है। नई सीमेंट कांक्रीट सड़क बनने के बाद इस परेशानी से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। 24 महीने में पूरा होगा निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के एसडीओ सुनील चंद्रा के अनुसार, सड़क निर्माण का कार्य दुर्ग की एनसी नाहर कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी को 75.73 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना पूरी करनी होगी। विभाग ने निर्माण कार्य को 24 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शहर में नहीं आएंगे भारी वाहन यह फोरलेन सड़क कटघोरा एनएच-130 और सीपत एनएच-130 (ए) को आपस में जोड़ेगी। सड़क बनने के बाद भारी वाहन शहर के अंदर प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे शहर के मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और आम नागरिकों को भी राहत मिलेगी। पहले ही पूरा हो चुका है भूमि अधिग्रहण इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य वर्ष 2010 से 2016 के बीच पूरा कर लिया गया था। अब टेंडर स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। गुणवत्ता और समय-सीमा पर रहेगा फोकस उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने विभागीय अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि परियोजना को निर्धारित समय में पूरा कर जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ दिलाया जाए। अधिक जानकारी और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें —www.deshharpal.com
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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