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ABVP ने ICFAI विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने की मांग की, जांच रिपोर्ट में गंभीर आरोपों का दावा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के कुलपति शिवदयाल पांडे को पद से हटाने की मांग की है। परिषद ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना गया है। मानसिक उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव के आरोप ABVP का कहना है कि कुलपति पर मानसिक उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। परिषद के मुताबिक विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से मर्यादित और निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद की जाती है। ऐसे आरोप उच्च शिक्षा संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया परिषद के अनुसार छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुलपति के आचरण को अव्यावसायिक और पद की गरिमा के खिलाफ बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपों को प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना गया है। राज्यपाल से की गई कार्रवाई की मांग ABVP ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति के खिलाफ तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। परिषद ने उन्हें पद से हटाने के साथ ही विश्वविद्यालय में महिला प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। छात्र नेताओं ने उठाए सवाल प्रदेश सहमंत्री प्रथम राव फूटाने ने कहा कि जब जांच समिति गंभीर आरोपों की पुष्टि कर चुकी है, तो विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। वहीं जिला संयोजक रूपेश कुर्रे ने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के भी केंद्र होते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर कुम्हारी-पाटन भाग संयोजक डे साहब साहू ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और महिला सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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NEET पेपर लीक के विरोध में NSUI का प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज में कई कार्यकर्ता घायल

नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर बिलासपुर में बुधवार को NSUI और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और बाद में लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस दौरान कई कार्यकर्ता घायल हो गए। NSUI कार्यकर्ता सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के निवास का घेराव करने निकले थे। पुलिस ने सांसद बंगले से पहले ही बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया था। प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, जिससे पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। विधायक देवेंद्र यादव का कुर्ता फटा प्रदर्शन के दौरान भिलाई विधायक देवेंद्र यादव भी मौजूद थे। झड़प के बीच उनका कुर्ता फट गया। उग्र होती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की। इसके बाद जब प्रदर्शनकारी कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ने लगे, तब पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस कार्रवाई में 6 से अधिक कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिन्हें सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं 12 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर बाद में मुचलके पर छोड़ दिया गया। पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा सिविल लाइन CSP निमितेश सिंह ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान धक्कामुक्की में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सभी का इलाज कराया जा रहा है। NSUI ने पुलिस कार्रवाई को बताया बर्बर सिम्स अस्पताल में घायल छात्रों से मिलने पहुंचे NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर FIR दर्ज की गई तो संगठन भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा। भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस और NSUI पर निशाना साधते हुए कहा कि “यूथ कांग्रेस गुंडों की टोली बन चुकी है। जब उनकी सरकार थी तब भ्रष्टाचार पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए?” वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि 50 से अधिक छात्र और कार्यकर्ता घायल हुए हैं। कांग्रेस ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग NSUI और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन किया गया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। देश-दुनिया और मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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पत्नी की हत्या मामले में पति को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति दीपनारायण रजक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि मामले में हत्या के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह मामला बिलासपुर जिले के महमंद निवासी मनहरणलाल निर्मलकर की बेटी ममता की मौत से जुड़ा है। ममता की शादी चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम परसदा निवासी दीपनारायण रजक से हुई थी। शादी के दो साल के भीतर ही उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पहले आत्महत्या माना गया मामला घटना के समय पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे तो कमरा अंदर से बंद मिला। ममता का शव साड़ी के सहारे पंखे से लटका हुआ था। शुरुआत में मामला आत्महत्या का माना गया, लेकिन घर में उस समय केवल पति-पत्नी ही मौजूद थे, इसलिए शक पति पर गया। जांच में खुली साजिश तत्कालीन तहसीलदार एमआर गायकवाड़ ने मौके की जांच के दौरान पाया कि कमरे का दरवाजा बाहर से भी आसानी से बंद किया जा सकता था। इससे साफ हुआ कि घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ममता की मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला घोंटने और दम घुटने से हुई थी। शरीर पर कई चोटों के निशान भी मिले, जो संघर्ष और मारपीट की ओर इशारा कर रहे थे। पति की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सबूत हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि घटना के समय घर में केवल पति और पत्नी मौजूद थे। ऐसे में पत्नी की मौत कैसे हुई, इसका संतोषजनक जवाब आरोपी पति नहीं दे सका। दहेज प्रताड़ना के भी आरोप ममता के पिता ने कोर्ट को बताया कि शादी के कुछ समय बाद से ही आरोपी पति उनकी बेटी को प्रताड़ित करने लगा था। वह वॉशिंग मशीन, हर महीने नकद पैसे और पढ़ाई के खर्च के नाम पर लगातार मांग करता था। देश-दुनिया और मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की ऐसी ही महत्वपूर्ण खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में पूर्व महापौर और बेटे पर बिल्डर से मारपीट का आरोप, CCTV वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कांग्रेस के पूर्व महापौर और उनके बेटे पर एक अधेड़ बिल्डर से मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना में बिल्डर घायल हो गया। बताया जा रहा है कि कॉलोनी के रास्ते को लेकर चल रहे विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। इस पूरी घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने पूर्व महापौर राजेश पाण्डेय और उनके बेटे राहुल पाण्डेय के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। कॉलोनी के रास्ते को लेकर चल रहा था विवाद शिकायतकर्ता अमित शर्मा के मुताबिक, रविवार को कॉलोनी सोसाइटी की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में कॉलोनी के गेट के पास खराब रास्ते की सफाई और मरम्मत को लेकर चर्चा हुई। कॉलोनीवासियों ने बारिश से पहले रास्ता ठीक कराने पर सहमति जताई। इसके बाद सभी लोग कॉलोनी गेट के पास पहुंचे। इसी दौरान राजेश पाण्डेय और राहुल पाण्डेय भी वहां आ गए और रास्ते पर काम कराने का विरोध करने लगे। उनका कहना था कि सभी लोग अपने-अपने रास्ते का उपयोग करें। समस्या बताने पर भड़के पिता-पुत्र कॉलोनी के लोग हाथ जोड़कर अपनी समस्या समझाने की कोशिश कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान राजेश पाण्डेय और राहुल पाण्डेय अचानक भड़क गए। शिकायत के अनुसार राहुल पाण्डेय ने बिल्डर अमित शर्मा के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। यह भी आरोप है कि रास्ता रोकने के लिए सड़क पर लेटने की कोशिश की गई। जमीन पर गिराकर की मारपीट अमित शर्मा ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उनका पैर खींचकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि पत्थर से उनके सिर और दाहिने कंधे पर हमला किया गया। इस दौरान उनका चश्मा भी टूट गया। जान से मारने की धमकी का आरोप पीड़ित ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद कॉलोनी के लोगों में डर का माहौल है। अमित शर्मा की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने राजेश पाण्डेय और राहुल पाण्डेय के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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रायपुर में अवैध खनिज परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 8 हाइवा जब्त

रायपुर में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर चलाए गए अभियान में रेत और बोल्डर का अवैध परिवहन कर रहे 8 हाइवा वाहनों को जब्त किया गया। दस्तावेज नहीं दिखा सके चालक उप संचालक खनि प्रशासन राजेश मालवे और सहायक खनि अधिकारी उमेश भार्गव के मार्गदर्शन में गठित टीम ने नारी और धमतरी क्षेत्र से रेत लेकर आ रहे 6 हाइवा और तुमगांव क्षेत्र से बोल्डर परिवहन कर रहे 2 हाइवा वाहनों की जांच की। जांच के दौरान वाहन चालकों से खनिज परिवहन से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे जरूरी कागजात पेश नहीं कर सके। वाहनों को पुलिस की सुपुर्दगी में सौंपा गया दस्तावेज नहीं मिलने पर सभी वाहनों को अवैध खनिज परिवहन की श्रेणी में मानते हुए तुरंत जब्त कर लिया गया। कार्रवाई पूरी करने के बाद वाहनों को उपरवारा थाना और माना थाना पुलिस की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक मामले में खनिज नियमों के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अभियान लगातार जारी रहेगा खनिज विभाग ने साफ किया है कि जिले में अवैध उत्खनन और खनिज परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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यूरोप टूर पर गए रायपुर के कारोबारी अजय निहलानी का लिस्बन में निधन, हार्ट अटैक की आशंका

रायपुर के कारोबारी अजय सुंदर निहलानी का पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में निधन हो गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। वे भारत से गए 40 सदस्यीय दल के साथ एजुकेशनल टूर पर यूरोप गए थे। इस दल में रायपुर से दो लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान अजय निहलानी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की खबर मिलते ही रायपुर में परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। परिवार के अनुसार जल्द ही उनका पार्थिव शरीर रायपुर लाया जाएगा। अजय निहलानी के भाई संजय कुमार निहलानी ने बताया कि टूर में उनके साथ मौजूद नीरज बाजपेयी पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। परिवार ने स्थानीय प्रशासन, भारतीय दूतावास, एयरलाइन प्रतिनिधियों और संबंधित एजेंसियों से सहयोग की अपील की है, ताकि प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके और पार्थिव शरीर को रायपुर लाकर अंतिम संस्कार किया जा सके। परिजनों का कहना है कि सभी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अजय निहलानी का पार्थिव शरीर रायपुर लाया जाएगा। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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अवैध शराब पर कार्रवाई में लापरवाही, गोबरा नवापारा थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल निलंबित

रायपुर ग्रामीण पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए गोबरा नवापारा थाना प्रभारी निरीक्षक दीपेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं करने और कार्रवाई के दौरान संदिग्ध व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। यह आदेश रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने जारी किया है। जानकारी के अनुसार गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार जारी रहने की बात सामने आई। मामला 29 मई को सामने आया, जब ACCU रायपुर की देहात टीम ने गोबरा नवापारा स्थित लल्ला सोनवानी के ढाबे पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां अवैध शराब बिक्री होती मिली। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल भी मौके पर पहुंचे थे। एसपी कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी का व्यवहार संदिग्ध पाया गया। आरोप है कि उन्होंने आरोपी लल्ला सोनवानी से अलग जाकर बातचीत की, जिसके बाद उनकी भूमिका पर सवाल खड़े हुए। पुलिस अधीक्षक ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए दीपेश जायसवाल को निलंबित कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर ग्रामीण से संबद्ध कर दिया है। मामले की प्राथमिक जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अभिषेक झा को सौंपी गई है। उन्हें सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर ग्रामीण पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध शराब कारोबार के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में नशे के खिलाफ पंचायतों का अभियान, गांव में निकाली जागरूकता रैली

Bilaspur में नशे और अवैध शराब के खिलाफ अब ग्राम पंचायतें भी सक्रिय हो गई हैं। जिला मुख्यालय से सटे ढेका ग्राम पंचायत में गुरुवार को सरपंच और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के साथ जागरूकता रैली निकाली। इस दौरान लोगों से शराब और नशे से दूर रहने की अपील की गई। साथ ही अवैध शराब बेचने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। गांव-गांव जाकर लोगों को किया जागरूक ढेका ग्राम पंचायत के सरपंच मनीष घोरे और अन्य जनप्रतिनिधि गांव में लगातार नशामुक्ति अभियान चला रहे हैं। वे ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभाव समझा रहे हैं और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। यह अभियान लालखदान महमंद से लगे ढेका पंचायत क्षेत्र में हाईवे किनारे ढाबों और दुकानों में चल रही अवैध गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से भी चलाया जा रहा है। “अवैध दारू-गांजा बंद करो” के लगे नारे रैली के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने “अवैध दारू-गांजा बंद करो” के नारे लगाए। सरपंच मनीष घोरे ने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर अपील की कि गांव को नशामुक्त बनाने में सभी सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस अवैध शराब व मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो पंचायत किसी भी आरोपी का समर्थन नहीं करेगी। अवैध कारोबारियों को दी चेतावनी अभियान के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने ढाबों, चाय-नाश्ते की दुकानों और ठेलों की आड़ में चल रहे अवैध शराब कारोबार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे कारोबारियों को तुरंत अवैध गतिविधियां बंद करने की चेतावनी दी। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को सूचना देने की अपील ग्रामीणों को बताया गया कि नशे की वजह से गांव का माहौल खराब हो रहा है और युवाओं पर इसका गलत असर पड़ रहा है। अभियान के दौरान लोगों से अपील की गई कि किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और ग्राम पंचायत को दें। यह अभियान एसएसपी रजनेश सिंह की पहल से जुड़कर चलाया जा रहा है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में D.Ed अभ्यर्थियों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी, AAP ने सरकार को लिखा पत्र

Chhattisgarh में D.Ed अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर मामला फिर गरमा गया है। Aam Aadmi Party ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 10 जून तक पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई, तो 11 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai को पत्र लिखा है। 2300 पद खाली होने का दावा उत्तम जायसवाल ने दावा किया कि राज्य में सहायक शिक्षक के करीब 2300 पद खाली हैं। इनमें करीब 1600 पद आदिवासी महिला और पुरुष अभ्यर्थियों से जुड़े बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से पात्र अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। 153 दिनों से जारी है प्रदर्शन D.Ed अभ्यर्थी पिछले 153 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी नहीं मिलने से वे आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। AAP नेता ने कहा कि अभ्यर्थी लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला उत्तम जायसवाल ने पत्र में दावा किया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करते हुए जल्द नियुक्ति देनी चाहिए। आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का आरोप पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को कई बार गिरफ्तार किया गया। AAP का कहना है कि आंदोलनकारियों को तीन बार जेल भेजा गया और चार दिन तक हिरासत में रखा गया। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा। “सरकार जल्द फैसला ले” उत्तम जायसवाल ने कहा कि नियुक्ति में लगातार देरी के कारण कई अभ्यर्थी मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने इसे सामाजिक और मानवीय संकट बताते हुए सरकार से संवेदनशील निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 10 जून तक नियुक्ति नहीं हुई, तो 11 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: OBC भर्ती में तय सीमा से ज्यादा दिव्यांग चयन कानूनन गलत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर राज्य सरकार और चयन समिति पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि OBC वर्ग के आरक्षित पदों पर तय सीमा से ज्यादा दिव्यांग उम्मीदवारों को सिर्फ मेरिट के आधार पर नियुक्त करना कानून के खिलाफ है। 90 दिन में नई मेरिट लिस्ट बनाने के निर्देश हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा कर 90 दिनों के भीतर नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाए। भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर हुई थी याचिका यह मामला तब सामने आया जब उमेश कुमार श्रीवास, नेहा साहू और प्रमोद कुमार साहू समेत कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती में OBC वर्ग के उम्मीदवारों ने भी आवेदन किया और मेरिट सूची में जगह बनाई। तय 7% सीमा से ज्यादा दिव्यांग चयन याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि चयन समिति ने OBC कोटे में दिव्यांग उम्मीदवारों का चयन तय 7% सीमा से ज्यादा कर लिया। उदाहरण के तौर पर, व्याख्याता बायोलॉजी ई-संवर्ग के 200 पदों में OBC वर्ग के तहत 14 पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित होने चाहिए थे। लेकिन चयन समिति ने 6 दिव्यांग उम्मीदवारों को सीधे OBC कोटे में समायोजित कर दिया, जिससे सामान्य OBC उम्मीदवारों का अवसर प्रभावित हुआ। इसी तरह की प्रक्रिया शिक्षक गणित और सहायक शिक्षक विज्ञान भर्ती में भी अपनाई गई। सरकार ने मेरिट का दिया तर्क राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि चयनित दिव्यांग उम्मीदवार मेरिट में ऊंचे स्थान पर थे, इसलिए उनकी योग्यता के आधार पर चयन किया गया। हाईकोर्ट बोला- समान अवसर का उल्लंघन कोर्ट ने कहा कि चयन समिति की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है और इससे सभी वर्गों को समान अवसर नहीं मिल पाता। अधिकारियों को आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन करना चाहिए था। कोर्ट ने समझाया वर्टिकल और होरिजोंटल आरक्षण हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित इंदिरा साहनी केस और राजेश कुमार डरिया केस का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि: कानून, शिक्षा और प्रदेश की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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