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बिलासपुर में पानी भरने के विवाद में ऑटो चालक पर कुल्हाड़ी से हमला, हालत गंभीर

Bilaspur में पीने के पानी को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि ऑटो चालक पर कुल्हाड़ी और गमले से हमला कर दिया गया। घटना में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के महिमा नगर का है। मोटर पंप चालू होने पर शुरू हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, शज्जाद अली ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता है। 7 मई की रात वह काम से लौटकर घर आया था। बताया जा रहा है कि रात में शॉर्ट सर्किट के कारण मोटर पंप अपने आप चालू हो गया। सुबह जब शज्जाद पानी भरने पहुंचा, तब पड़ोसी कुनाल मानिकपुरी और उसके रिश्तेदार ने उससे विवाद शुरू कर दिया। शज्जाद ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि उसने मोटर चालू नहीं किया था। इसके बाद मामला कुछ देर के लिए शांत हो गया। घर में घुसकर किया हमला आरोप है कि बाद में कुनाल मानिकपुरी अपने साथियों के साथ शज्जाद के घर पहुंच गया। वहां गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद आरोपियों ने कुल्हाड़ी और गमले से हमला कर दिया। हमले में शज्जाद गंभीर रूप से घायल हो गया और खून से लथपथ हालत में गिर पड़ा। परिजनों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। अफवाह फैलाने का भी आरोप घायल शज्जाद का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी यह अफवाह फैला रहे हैं कि उसकी पत्नी ने उसके साथ मारपीट की थी। पीड़ित ने इस दावे को गलत और भ्रामक बताया है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलने के बाद सिरगिट्टी पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। सिविल लाइन सीएसपी निमितेश सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
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छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक बोतल में शराब बिक्री का फैसला पड़ा भारी, कई दुकानों में शराब की कमी

Chhattisgarh में प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री लागू करने के फैसले के बाद आबकारी विभाग की सप्लाई व्यवस्था गड़बड़ा गई है। अधूरी तैयारी के बीच नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेशभर की शराब दुकानों में देसी और सस्ती अंग्रेजी शराब की कमी देखने को मिल रही है। कई दुकानों में पसंदीदा ब्रांड का स्टॉक खत्म हो चुका है। वहीं डिस्टिलर्स और बोतल सप्लाई लॉबी पर सप्लाई प्रभावित करने के आरोप लग रहे हैं। सप्लाई तिथि बढ़ाने पड़ रहे आदेश जानकारी के मुताबिक कैबिनेट से फैसला होने के बाद 1 अप्रैल से डिस्टिलरियों को पीईटी प्लास्टिक बोतलों में शराब बॉटलिंग करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि अचानक लागू हुए इस फैसले के कारण डिस्टिलर्स और बोतल सप्लायरों में अफरा-तफरी मच गई। कई कारोबारी कोर्ट तक पहुंच गए। बड़ी संख्या में प्लास्टिक बोतलों की व्यवस्था नहीं होने से विभाग को दोबारा आदेश जारी कर 31 मई तक कांच की बोतलों में भी सप्लाई की अनुमति देनी पड़ी। 10 दिन तक बंद रही बॉटलिंग नई व्यवस्था के बीच कई डिस्टिलरियों में करीब 10 दिनों तक उत्पादन और बॉटलिंग का काम प्रभावित रहा। पुराना स्टॉक खत्म होने के बाद अब शराब दुकानों तक मांग के मुकाबले कम सप्लाई पहुंच रही है। इसी वजह से कई दुकानों में शराब की कमी हो गई है। सरकार को राजस्व नुकसान का अंदेशा आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में रोजाना करीब 70 करोड़ रुपए की देसी और किफायती अंग्रेजी शराब बिकती है। सप्लाई प्रभावित होने से सरकार को हर दिन 40 से 50 करोड़ रुपए तक के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मिलावट रोकने के लिए लिया गया था फैसला सरकार ने प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई का फैसला मिलावट रोकने के उद्देश्य से लिया था। लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने और सप्लायरों की मनमानी के चलते विभाग को बार-बार अपने आदेश बदलने पड़ रहे हैं। 31 मई के बाद होगी सख्ती आबकारी आयुक्त पदुम एल्मा ने बताया कि डिस्टिलर्स के साथ लगातार बैठक की जा रही है। फिलहाल प्लास्टिक और कांच दोनों बोतलों में सप्लाई जारी है। उन्होंने कहा कि 15 मई से डिस्टिलर्स प्लास्टिक बोतलों में सप्लाई बढ़ाएंगे। वहीं 31 मई के बाद सप्लाई में लापरवाही मिलने पर संबंधित डिस्टिलर्स का लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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रायपुर पुलिस की ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, नागपुर से आरोपी गिरफ्तार

Raipur पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को नागपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर नमन जग्गी और आयुष अग्रवाल को सट्टा पैनल और तकनीकी सपोर्ट उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी का नाम अंकित अग्रवाल है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में बड़े सट्टा नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। नागपुर में छिपा था आरोपी पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अंकित अग्रवाल लंबे समय से ऑनलाइन सट्टा कारोबार से जुड़ा हुआ था। वह मुख्य आरोपियों को तकनीकी सपोर्ट और सट्टा पैनल उपलब्ध कराता था। इसी पैनल के जरिए ऑनलाइन बेटिंग और पैसों का लेन-देन किया जाता था। तकनीकी इनपुट और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस को आरोपी के नागपुर में छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद टीम ने वहां दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया और रायपुर लाया गया। पहले भी पकड़े जा चुके हैं आरोपी इस मामले में पुलिस पहले ही नमन जग्गी और आयुष शर्मा को 5 मई को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कितने लोग शामिल हैं। बैंक ट्रांजैक्शन और लैपटॉप की जांच पुलिस आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। आशंका है कि करोड़ों रुपए का ऑनलाइन लेन-देन फर्जी आईडी और अलग-अलग खातों के जरिए किया गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। चार महीने में 78 आरोपी गिरफ्तार कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद साल 2026 में रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा मामलों में अब तक 15 केस दर्ज किए हैं। इन मामलों में 78 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने 67 लाख रुपए कैश, 217 मोबाइल, 20 लैपटॉप, 10 कार और 4 दोपहिया वाहन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब साढ़े 3 करोड़ रुपए बताई जा रही है। बाबू खेमानी की भी हुई थी गिरफ्तारी इससे पहले 17 अप्रैल को रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट के मास्टरमाइंड बाबू खेमानी को मुंबई से गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि उसने “3 STUMPS” नाम से ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट शुरू की थी। पुलिस उसके विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में गैस एजेंसी पर कालाबाजारी का आरोप, उपभोक्ताओं ने किया हंगामा

Bilaspur में बालाजी गैस एजेंसी के खिलाफ गुरुवार को उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए एजेंसी के बाहर हंगामा किया। बाद में कई उपभोक्ता शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट भी पहुंचे। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान करने के बाद भी उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा। वहीं कुछ लोगों को सीधे सिलेंडर दिए जा रहे हैं। “स्टॉक खत्म” कहकर लौटाया उपभोक्ताओं ने बताया कि वे घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन एजेंसी कर्मचारी “स्टॉक खत्म” होने की बात कहकर वापस भेज देते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों को बिना लाइन के सिलेंडर दे दिए जाते हैं। इसी बात को लेकर महिलाओं और बुजुर्गों ने भी नाराजगी जताई। किसी और को दे रहे सिलेंडर लोगों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन बुकिंग असली उपभोक्ता के नाम पर होती है, लेकिन सिलेंडर किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया जाता है। इस वजह से जिन लोगों ने समय पर बुकिंग की, उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हंगामे के बाद पहुंची पुलिस विवाद बढ़ने पर एजेंसी संचालक ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने की कोशिश की। हालांकि उपभोक्ता मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते रहे। कलेक्ट्रेट पहुंचकर की शिकायत हंगामे के बाद कई उपभोक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी को शिकायत दी। इसके बाद एडीएम ने खाद्य विभाग को जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी उपभोक्ता को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कलेक्टर पहले ही दे चुके हैं चेतावनी हाल ही में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने गैस वितरण व्यवस्था की समीक्षा की थी। उन्होंने साफ कहा था कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि किसी एजेंसी पर कालाबाजारी का मामला सही पाया गया, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
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बिलासपुर में आरक्षक की मौत पर बढ़ा विवाद, विधायक दिलीप लहरिया ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की

Bilaspur के श्रीराम केयर अस्पताल में आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इलाज में लापरवाही के आरोपों के बीच मस्तूरी विधायक Dilip Lahariya ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मृत आरक्षक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर यह मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा। पथरी के इलाज के दौरान हुई थी मौत जानकारी के अनुसार, सरकंडा थाने में पदस्थ आरक्षक सत्यकुमार पाटले पेट दर्द की शिकायत के बाद इलाज के लिए श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे थे। जांच में डॉक्टरों ने पथरी की समस्या बताई और ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद सत्यकुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई, लेकिन कई घंटों तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर देखने नहीं आया। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई और बाद में मौत हो गई। मौत के कारण पर बना सस्पेंस परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने पहले किडनी में इंफेक्शन बताया था, लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इस मामले में सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है। विधायक परिजनों के साथ पहुंचे कलेक्ट्रेट बुधवार को विधायक दिलीप लहरिया मृतक आरक्षक के परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर मामले की शिकायत की। विधायक ने कहा कि यह अस्पताल में लापरवाही का पहला मामला नहीं है। पहले भी अस्पताल को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। “सामान्य इलाज के लिए गया था आरक्षक” विधायक लहरिया ने कहा कि सत्यकुमार किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थे। वे सिर्फ पथरी का इलाज कराने अस्पताल गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत इलाज और लापरवाही के कारण एक जवान की जान चली गई। अब अस्पताल में हुई अन्य मौतों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले की जांच कराने और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं परिजनों ने आरोप लगाया है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें
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रायपुर में मकान से संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी

Raipur के रावाभाठा इलाके में एक मकान से संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मामला खमतराई थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस ने मौके से बैटरी, वायर, एयरगन, कैमिकल से भरी दो बोतलें और डेटोनेटर जैसी संदिग्ध सामग्री जब्त की है। बैग में मिला संदिग्ध सामान जानकारी के मुताबिक रावाभाठा इलाके में रहने वाली मितानिन पुष्पा साहू के घर बुधवार शाम एक युवक बैग लेकर पहुंचा था। युवक ने अपना नाम विनय देवांगन बताया और कुछ देर के लिए बैग रखने की बात कहकर वहां से चला गया। बैग को लेकर परिवार को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने वार्ड पार्षद अश्वनी यादव को इसकी जानकारी दी। स्थानीय लोगों के साथ पहुंचे पार्षद सूचना मिलने के बाद पार्षद अश्वनी यादव स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। गुरुवार सुबह बैग खोलकर देखा गया तो उसमें एयरगन, वायर, बैटरी और देसी बम बनाने में इस्तेमाल होने वाला संदिग्ध सामान मिला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही नॉर्थ थाना पुलिस, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। डीसीपी ने लिया जायजा मौके पर डीसीपी नॉर्थ जोन मयंक गुर्जर भी पहुंचे और जांच की स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब्त सामग्री की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सामान का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। वहीं घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि संदिग्ध सामान विनय देवांगन नाम के व्यक्ति का हो सकता है। हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस अब विनय देवांगन से पूछताछ की तैयारी कर रही है। मामले में जल्द बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
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रायपुर पुलिस में बड़ा फेरबदल: 136 अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले, तुरंत लागू आदेश

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट ने प्रशासनिक कसावट लाने के लिए बड़े स्तर पर तबादले किए हैं।जारी आदेश के अनुसार कुल 136 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एक थाने से दूसरे थाने में ट्रांसफर किया गया है। किन-किन पदों पर हुआ ट्रांसफर? सूची के मुताबिक तबादले में शामिल हैं: इन सभी को अलग-अलग थानों और यूनिट्स में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। क्यों किया गया फेरबदल? पुलिस विभाग के अनुसार यह कदम: के उद्देश्य से उठाया गया है। तुरंत लागू हुआ आदेश पुलिस कमिश्नर कार्यालय की ओर से जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। 👉 ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें: www.deshharpal.com
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बिलासपुर में फूड सेफ्टी की सख्त जांच: हॉस्पिटल कैंटीन और केक शॉप्स पर छापा, सैंपल जांच के लिए भेजे

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने रविवार को बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया। इस दौरान शहर के हॉस्पिटल कैंटीन और केक विक्रेताओं की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों की जांच की गई। टीम ने सिम्स हॉस्पिटल कैंटीन, जिला अस्पताल कैंटीन और यूटोपिया केक शॉप समेत कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। केक का सैंपल जांच के लिए भेजा गया जांच के दौरान यूटोपिया केक शॉप से केक का सैंपल लिया गया, जिसे गुणवत्ता जांच के लिए लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। 15 दिन का विशेष अभियान चल रहा है राज्य शासन और कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले में“सही दवा-शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार” थीम के तहत 15 दिवसीय अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। दुकानदारों को दिए गए सख्त निर्देश निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि: नियमों का पालन नहीं किया तो होगी कार्रवाई अधिकारियों ने साफ कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।स्वच्छता और गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आम लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। ऐसी ही अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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रायपुर में IPL का क्रेज, पहले मैच के सभी टिकट बिके

रायपुर में होने वाले IPL मैच को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 10 मई को होने वाले पहले मैच के सभी ऑनलाइन टिकट बिक चुके हैं। अब 12 मई के मैच के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो गई है। दर्शक रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की वेबसाइट के जरिए टिकट खरीद सकते हैं। कौन-कौन से मैच होंगे? सबसे सस्ती टिकट 2500 रुपए से शुरू है, लेकिन फिलहाल यह उपलब्ध नहीं दिख रही। स्टेडियम में QR कोड से मिलेगी एंट्री मैच के लिए डिजिटल M-टिकट जारी किए जाएंगे। यह व्यवस्था फर्जी एंट्री रोकने और सुरक्षा के लिए लागू की गई है। गेट टाइम और जरूरी नियम M-टिकट ट्रांसफर नियम 👉 यह सिस्टम ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए लागू किया गया है। मेरिट स्टूडेंट्स को मिलेगा फ्री एंट्री छत्तीसगढ़ में 10वीं और 12वीं बोर्ड के मेरिट स्टूडेंट्स को 10 मई का मैच मुफ्त में दिखाया जाएगा।स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी छात्रों को 10 मई सुबह 10 बजे तक SCERT रायपुर पहुंचाया जाए। टीमें कब पहुंचेंगी? स्टेडियम में सुरक्षा कड़ी शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में सुरक्षा के चलते कई सामानों पर प्रतिबंध रहेगा। दर्शकों से केवल जरूरी सामान लेकर आने की अपील की गई है। यह IPL मैच रायपुर में खेल प्रेमियों के लिए बड़ा मौका है, जहां सुरक्षा और डिजिटल सिस्टम को खास प्राथमिकता दी जा रही है। 👉 ऐसी ही अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी किए 12वीं बोर्ड के नतीजे

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस साल कुल 83.04% छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। टॉप-10 मेरिट लिस्ट में कुल 43 छात्रों ने जगह बनाई है। जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र जिज्ञासु वर्मा ने 98.60% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर बेमेतरा जिले की छात्रा ओमनी वर्मा रहीं, जिन्होंने 98.20% अंक हासिल किए।तीसरे स्थान पर रायगढ़ जिले के छात्र कृष महंत रहे, जिनके 97.80% अंक आए। इन जिलों के छात्रों का दबदबा रायगढ़, जशपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और कांकेर जैसे जिलों के छात्रों ने टॉप-10 में जगह बनाई है। इससे साफ है कि छोटे शहरों के छात्र भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। टॉपर्स को मिलेंगे 1.5 लाख रुपए राज्य सरकार ने टॉपर्स को 1.5 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। टॉपर जिज्ञासु वर्मा ने बताया कि वे आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनके पिता एक किराना दुकान चलाते हैं। टॉप-10 स्टूडेंट्स लिस्ट (CGBSE 12th 2026) इन वेबसाइट्स पर देख सकते हैं रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट CGBSE की आधिकारिक वेबसाइट सहित कुल 9 वेबसाइट्स पर देख सकते हैं। (स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपना रोल नंबर तैयार रखें) 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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