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जबलपुर: भगवान श्रीराम पर अभद्र टिप्पणी करने वाला स्कूल संचालक अखिलेश मेबन केरल से गिरफ्तार, भारी सुरक्षा में लाया गया जबलपुर

देश हरपल संवाददाता | 7 अप्रैल 2025 भगवान श्रीराम के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करने वाले स्कूल संचालक अखिलेश मेबन को जबलपुर पुलिस ने केरल के कोच्चि एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया है। रविवार को उसे भारी पुलिस सुरक्षा के बीच जबलपुर लाया गया। वर्तमान में उसे पुलिस कंट्रोल रूम में कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे और हर स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए थे। 📍क्या है पूरा मामला? अखिलेश मेबन जबलपुर में ‘जॉय स्कूल’ नाम से एक निजी शिक्षण संस्थान का संचालन करता था। हाल ही में उसने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का प्रयोग करते हुए टिप्पणी की थी। इस पोस्ट के वायरल होते ही जबलपुर और आसपास के इलाकों में जन आक्रोश फूट पड़ा। विभिन्न हिन्दू संगठनों और आम नागरिकों ने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी । 🚓 फरार होने के बाद के घटनाक्रम सूत्रों के मुताबिक, जब इस पूरे मामले में पुलिस ने जांच शुरू की, तो अखिलेश मेबन जबलपुर से फरार हो गया था। प्रारंभिक जानकारी में पता चला कि वह उमरिया जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बांधवगढ़ में स्थित एक रिसॉर्ट में छिपा हुआ था। जब पुलिस की टीम वहां पहुँची, तब तक वह वहाँ से निकल चुका था। इसके बाद लोकेशन ट्रेस करते हुए पता चला कि वह केरल भाग गया है। ✈️ कोच्चि एयरपोर्ट से दबोचा गया मध्य प्रदेश पुलिस ने केरल पुलिस की सहायता से ऑपरेशन को अंजाम दिया और कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अखिलेश को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच फ्लाइट से जबलपुर लाया गया, जहाँ अब उसे पुलिस कंट्रोल रूम में रखा गया है। 🔐 पुलिस की अगली कार्यवाही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में देश की धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और साइबर अपराध की धाराओं के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी। पुलिस साइबर सेल के जरिए यह भी जांच कर रही है कि कहीं यह टिप्पणी किसी प्रोपेगेंडा का हिस्सा तो नहीं थी। 🗣️ जनता और हिन्दू संगठनों की प्रतिक्रिया इस गिरफ्तारी से जनता में संतोष का माहौल है, वहीं हिन्दू संगठनों ने प्रशासन की तत्परता की सराहना की है। लेकिन साथ ही यह मांग भी की है कि आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार की हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।
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Daily Horoscope :7 अप्रैल 2025 (सोमवार)दैनिक राशिफल

मेष: आज कार्य में तेजी आएगी। कोई रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।वृषभ: किसी नजदीकी व्यक्ति से मतभेद हो सकता है। खर्चों पर नियंत्रण रखें।मिथुन: नौकरी में तरक्की के योग हैं। मान-सम्मान बढ़ेगा।कर्क: कार्यक्षेत्र में नया अवसर मिलेगा। यात्रा से लाभ संभव है।सिंह: मन अशांत रह सकता है। किसी पुरानी बात को लेकर तनाव हो सकता है।कन्या: प्रेम संबंधों में सुधार होगा। व्यवसाय में लाभ मिलेगा।तुला: परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। धन लाभ के संकेत हैं।वृश्चिक: कामकाज में व्यस्तता रहेगी। कोई नया कार्य शुरू कर सकते हैं।धनु: शिक्षा व प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। दोस्तों से सहयोग मिलेगा।मकर: आज निवेश सोच-समझकर करें। घर में मेहमान आ सकते हैं।कुंभ: भाग्य का साथ मिलेगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।मीन: वाहन चलाते समय सावधानी रखें। अनावश्यक वाद-विवाद से बचें।
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Amit Shah Visit to Dantewada:बस्तर में अमित शाह का गरिमामय स्वागत,

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), देश हरपल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह शनिवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आयोजित बस्तर पंडुम महोत्सव में शामिल हुए। यहां उनके स्वागत के लिए खास इंतज़ाम किए गए थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें गौर सींग मुकुट पहनाकर सम्मानित किया और कोंडागांव की विश्वप्रसिद्ध ढोकरा आर्ट की कलाकृति भेंट की। साथ ही बस्तर पंडुम का प्रतीक चिह्न भी उन्हें प्रदान किया गया। बस्तर पंडुम एक पारंपरिक आदिवासी उत्सव है, जो बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाने का माध्यम बनता जा रहा है। इस वर्ष यह आयोजन और भी भव्य रूप में सामने आया, जिसमें ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत विभिन्न राज्यों के 27 हजार कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “जहां पहले गोलियों की आवाजें गूंजती थीं, अब वहां स्कूल की घंटियां बज रही हैं।” उन्होंने कहा कि यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदी के ‘डबल इंजन सरकार’ के संकल्प और गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा बलों की मेहनत का परिणाम है। इससे पहले गृहमंत्री शाह जगदलपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा दंतेवाड़ा पहुंचे और मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन कर राज्य और बस्तर की शांति व समृद्धि की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि “मां दंतेश्वरी की पूजा कर हमने नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है।” सीएम साय ने कहा कि बस्तर में विकास की नई रफ्तार देखी जा रही है। पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी मंच साझा करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य है कि अगले एक साल में बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाए।” उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के कैंप खुलने से गांवों में शांति और शिक्षा का माहौल बन रहा है। बस्तर पंडुम का यह आयोजन न सिर्फ एक सांस्कृतिक पर्व बन गया है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि बस्तर अब भय नहीं, उत्सव की धरती है। जहां पहले नक्सलवाद की छाया थी, अब वहां विकास और विश्वास का उजाला फैल रहा है।
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राज्यसभा में पारित हुआ वक्फ बोर्ड बिल: विपक्ष ने जताई आपत्ति, सरकार ने बताया पारदर्शिता और विकास का कदम

देश हरपल न्यूज़ डेस्कदिनांक: 30 मार्च 2025 राज्यसभा में शनिवार को वक्फ बोर्ड से जुड़ा ‘वक्फ अमेंडमेंट बिल 2023’ लंबी चर्चा के बाद पारित हो गया। करीब 12 घंटे तक चली बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक देखने को मिली। बिल का मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, प्रभावी और आधुनिक बनाना बताया गया है, लेकिन विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया। विपक्ष का तीखा विरोध विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा: “विपक्ष के सभी लोगों ने इस बिल को स्वीकार नहीं किया, इसका मतलब साफ है कि इसमें कई खामियां हैं। ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ हर बार सही नहीं हो सकता। ये दान देने और लेने का मामला है, दान देने वाला किसी भी धर्म का हो सकता है। लेकिन आपने सिर्फ एक समुदाय को केंद्र में रखकर उनके हक छीनने की कोशिश की है।” खड़गे ने यह भी कहा कि इस बिल में संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और यह कदम ‘माइनॉरिटी राइट्स’ को कमजोर करता है। सरकार का पक्ष: पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ने बिल का समर्थन करते हुए कहा: “हमें उम्मीद है कि सदन इस बिल का समर्थन करेगा। 2013 में जब इसी विषय पर UMEED बिल के लिए JPC बनी थी, उसमें केवल 13 सदस्य थे। लेकिन मोदी सरकार द्वारा गठित JPC में 31 सदस्य शामिल थे। लोकतंत्र का मतलब सिर्फ आपकी बात मानना नहीं है, बल्कि तर्क और विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय लेना होता है।” उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों की लूट और अनियमितता को रोकने के लिए लाया गया है, और इसका उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि सुधार और विकास है। संजय राउत का हमला: “मुस्लिमों की इतनी चिंता जिन्ना ने भी नहीं की थी” शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा: “सरकार को मुस्लिमों की इतनी चिंता कब से होने लगी? आप तो कहते थे कि मुस्लिम जमीन और गले की चेन छीन लेंगे। 40 हजार कश्मीरी पंडितों की जमीन आज तक वापस नहीं मिली, और चीन हमारी जमीन पर कब्जा किए बैठा है। सरकार को असली चिंता उस जमीन की करनी चाहिए।” राउत के इस बयान से सदन में कुछ देर के लिए माहौल गर्म हो गया, लेकिन इसके बावजूद बहस जारी रही। बिल में क्या है खास? निष्कर्ष: वक्फ अमेंडमेंट बिल 2023 राज्यसभा से पारित हो चुका है लेकिन इसके खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक तरफ सरकार इसे सुधारवादी और पारदर्शी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक मूल्यों और अल्पसंख्यक अधिकारों पर कुठाराघात मान रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बिल के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव कैसे सामने आते हैं। देश हरपल इस मुद्दे पर आपकी राय जानना चाहता है। क्या यह बिल वाकई पारदर्शिता के लिए लाया गया है या फिर अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चोट?कमेंट करें और अपनी बात खुलकर रखें। ✍️ देश हरपल – राष्ट्रवादी सोच, बेबाक खबरें
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी की कड़ी प्रतिक्रिया, 25,000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बताया अन्याय

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य में 25,000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बरकरार रखने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि वह इस निर्णय का समर्थन नहीं कर सकतीं। गौरतलब है कि शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले ही इन नियुक्तियों को अवैध करार दिया था और इन शिक्षकों को नौकरी से हटाने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिससे राज्य के हजारों शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। ममता बनर्जी का बयान ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मैं इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकती। हजारों शिक्षक जो ईमानदारी से काम कर रहे थे, उन्हें एक झटके में नौकरी से निकाल दिया गया। यह लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार इस मामले में शिक्षकों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। क्या है पूरा मामला? यह मामला पश्चिम बंगाल में स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है, जिसमें कथित घोटाले की बात सामने आई थी। एसएससी (स्टाफ सिलेक्शन कमीशन) द्वारा की गई इस भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद हाईकोर्ट ने 25,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए उन्हें बर्खास्त करने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले पर मुहर लगा दी है। शिक्षकों का विरोध और सरकार की चुनौती फैसले के बाद राज्यभर में प्रभावित शिक्षक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे ममता सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए कानूनी रास्ते तलाशे जाएं। शिक्षकों का कहना है कि सभी को गलत तरीके से नौकरी नहीं मिली थी और उनकी मेहनत बेकार जा रही है। ममता बनर्जी ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार इन शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होने देगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ कोई नई अपील करेगी या प्रभावित शिक्षकों को कोई वैकल्पिक समाधान प्रदान करेगी। राजनीतिक तकरार भी तेज इस मामले को लेकर बंगाल में राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत बताया है और ममता सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि शिक्षकों की इतनी बड़ी संख्या में बर्खास्तगी से राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। आगे क्या होगा? अब देखना यह होगा कि ममता बनर्जी इस फैसले के खिलाफ कोई नया कदम उठाती हैं या नहीं। प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए अदालत से लेकर सड़कों तक संघर्ष करेंगे। वहीं, सरकार के रुख से यह स्पष्ट है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासी हलचल देखने को मिल सकती है। (देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट)
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नवरात्रि का छठा दिन - माँ कात्यायनी

नवरात्रि का छठा दिन – माँ कात्यायनी

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो महिषासुर मर्दिनी के रूप में जानी जाती हैं। माँ कात्यायनी सिंह पर विराजमान होती हैं और उनके हाथों में तलवार और कमल सुशोभित होते हैं।माँ का प्रिय रंग हरा है, जो संतुलन और विकास का प्रतीक माना जाता है
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नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को दी कई सौगातें

नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को दी कई सौगातें, भोपाल, सागर, ग्वालियर और मुरैना को बड़ा तोहफा

मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य को नई सड़कों और बाईपास परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे यातायात सुगम होगा, ट्रैफिक जाम की समस्या दूर होगी और सफर का समय कम होगा। भोपाल, ग्वालियर, मुरैना और सागर सहित कई जिलों को इन प्रोजेक्ट्स का फायदा मिलेगा। ग्वालियर-मुरैना को मिला एक्सेस कंट्रोल्ड बाईपास नितिन गडकरी ने ग्वालियर शहर के पश्चिमी हिस्से में 28.5 किमी लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4-लेन बाईपास को मंजूरी दी है। 1347.6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-46, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे को कनेक्ट करेगी। इससे लॉन्ग-डिस्टेंस ट्रैफिक और माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, जिससे यात्रा समय कम होगा और सड़क यातायात सुगम बनेगा। सागर को भी बड़ी सौगात सागर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-146 पर लहदरा गांव जंक्शन से बेरखेड़ी गुरु गांव जंक्शन तक 20.2 किमी का ग्रीनफील्ड 4-लेन बाईपास बनाने के लिए 688.31 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। यह प्रोजेक्ट शहर के अंदर ट्रैफिक जाम की समस्या को हल करेगा और यात्रा का समय कम करेगा। इसके अलावा, विदिशा और सागर जिले के राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक 10.08 किमी सड़क को 4-लेन बनाने के लिए 731.36 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। यह सड़क भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा होगी और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 व राष्ट्रीय राजमार्ग-346 को कनेक्ट करेगी। इससे राहतगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित और तेज़ यात्रा का लाभ मिलेगा। भोपाल के लिए 1535.66 करोड़ की परियोजना राजधानी भोपाल के संदलपुर से नसरुल्लागंज बाईपास तक राष्ट्रीय राजमार्ग-146B के 43.2 किमी हिस्से को 4-लेन में अपग्रेड करने के लिए 1535.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-47, राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और राष्ट्रीय राजमार्ग-45 को जोड़ने का काम करेगी। इससे भारी ट्रैफिक से राहत मिलेगी और सफर आसान होगा। MP को मिली बड़ी सौगात, नेताओं ने जताई खुशी मध्य प्रदेश के सांसदों और विधायकों ने हाल ही में नितिन गडकरी से नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने की मांग की थी। अब जब इन प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिल गई है, तो प्रदेश के नेताओं और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से मध्य प्रदेश में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों को सुरक्षित एवं तेज़ सफर मिलेगा।
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BREAKING NEWS:वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में कल 12 बजे होगी चर्चा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, बड़ा सियासी संग्राम तय

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विधेयक कल दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिस पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इस चर्चा को 12 घंटे तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा टकराव हो सकता है। क्या है वक्फ संशोधन विधेयक? वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को नियंत्रित करता है। हालांकि, समय-समय पर इस अधिनियम को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं? विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे समुदाय के खिलाफ बताया और कहा,“सरकार बिना सभी पक्षों को सुने यह विधेयक लाना चाहती है, जो पूरी तरह अनुचित है। यह मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।” कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“यह कानून देश के लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। केवल 8 घंटे की चर्चा काफी नहीं है।” योगी आदित्यनाथ का समर्थन, कहा- बदलाव समय की मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा,“देश में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग बहुत ज़रूरी है। यह संशोधन पारदर्शिता लाने और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जा रहा है।” योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि,“वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से विवाद और अनियमितताएं रही हैं। अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, तो वह राष्ट्रहित और समाजहित में है।” विधेयक के समर्थक और विरोधी कौन? इस विधेयक को लेकर दो खेमे बन चुके हैं।✅ समर्थक (BJP, JDU, AIADMK) – इन दलों का कहना है कि यह विधेयक संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।❌ विरोधी (SP, Congress, TMC, AIMIM, Left) – विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इस कानून के ज़रिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करना चाहती है और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अब आगे क्या होगा? निष्कर्ष: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ साजिश करार दे रहा है। कल संसद में होने वाली बहस के बाद ही यह तय होगा कि यह विधेयक पास होगा या नहीं।
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ईद-उल-फितर पर मध्यप्रदेश में वक्फ अमेंडमेंट बिल का विरोध, फिलिस्तीन के समर्थन में बैनर

Bhopal भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश में सोमवार को ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा हैं । राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रतलाम सहित सभी शहरों में ईदगाह और मस्जिदों में नमाज-ए-खास अदा की गई और अमन-चैन तथा खुशहाली की दुआ मांगी गई। हालांकि, इस बार ईद की नमाज के दौरान भोपाल में कुछ मुस्लिम धर्मावलंबियों ने काली पट्टी बांधकर वक्फ अमेंडमेंट बिल का विरोध किया। वहीं, ईदगाह के बाहर कुछ युवा फिलिस्तीन के समर्थन में बैनर लेकर खड़े नजर आए। मोती मस्जिद में भी यमन और फिलिस्तीन के साथ-साथ वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए विशेष दुआ की गई। क्या है वक्फ अमेंडमेंट बिल और क्यों हो रहा विरोध? केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ अमेंडमेंट बिल को लेकर मुस्लिम समाज के कुछ वर्गों में असंतोष देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस बिल से वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उनके प्रबंधन पर असर पड़ेगा। हालांकि, सरकार का दावा है कि यह बिल पारदर्शिता लाने और अवैध कब्जों को रोकने के लिए लाया गया है। मंत्री विश्वास सारंग का बयान – ‘बिना पढ़े विरोध गलत’ मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने इस विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,“जो लोग बिना बिल पढ़े इसका विरोध कर रहे हैं, वे गुमराह हैं। जब पाकिस्तान आतंकवादी हमला करता है, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार होते हैं और कश्मीर में पंडितों पर जुल्म किया जाता है, तब ये लोग काली पट्टी क्यों नहीं बांधते?” सारंग ने आगे कहा कि वक्फ संपत्तियों का वास्तविक लाभ गरीब मुस्लिमों को नहीं मिला है, बल्कि इसका फायदा केवल अमीर मुस्लिम नेताओं और अवैध कब्जेदारों ने उठाया है। उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में लगाए गए बैनरों पर भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,“भारत में फिरकापरस्ती और उन्माद फैलाने की कोशिश को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” भोपाल में शांतिपूर्ण माहौल, पुलिस सतर्क हालांकि, विरोध प्रदर्शन के बावजूद भोपाल और अन्य शहरों में ईद का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा रहा हैं । पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं । मध्यप्रदेश में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ अमेंडमेंट बिल और फिलिस्तीन के समर्थन को लेकर और क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।
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भोपाल में बोहरा समुदाय ने मनाई ईद-उल-फित्र

भोपाल में बोहरा समुदाय ने उत्साह के साथ मनाई ईद-उल-फित्र, सुबह 6 बजे अदा की गई विशेष नमाज

भोपाल, 30 मार्च: राजधानी भोपाल में शनिवार को बोहरा समुदाय ने बड़े हर्षोल्लास के साथ ईद-उल-फित्र का त्योहार मनाया। इस खास मौके पर समुदाय के लोगों ने सुबह 6 बजे विशेष नमाज अदा की और एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। ईद की नमाज और जश्न का माहौल भोपाल में दाऊदी बोहरा समाज के लोग सुबह ही मस्जिदों और ईदगाह में जमा हो गए। समाज के प्रमुख धार्मिक स्थल पर बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने ईद की नमाज पढ़ी। इस दौरान खुशियों का माहौल देखने को मिला। ईद की नमाज के बाद लोगों ने आपसी भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा देते हुए एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएं दीं। हिलाल कमेटी करेगी चांद देखने पर फैसला दूसरी ओर, भोपाल की मोती मस्जिद में आज हिलाल कमेटी की अहम बैठक बुलाई गई है, जहां ईद के चांद को लेकर निर्णय लिया जाएगा। चांद दिखने की पुष्टि के बाद अन्य मुस्लिम समुदायों के लिए भी ईद की तिथि तय की जाएगी। बाजारों में दिखी रौनक, सेवइयों की रही मांग ईद-उल-फित्र से पहले राजधानी भोपाल के बाजारों में भारी भीड़ देखने को मिली। खासतौर पर चौक बाजार, जुमेराती और इब्राहिमपुरा में सेवइयां, मेवे, कपड़े और अन्य सामान की जमकर खरीदारी हुई। मिठाइयों की दुकानों पर भी लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भाईचारे और खुशियों का संदेश बोहरा समाज के धर्मगुरुओं ने इस अवसर पर लोगों को भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फित्र का पर्व हमें जरूरतमंदों की मदद करने और समाज में एकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। भोपाल में ईद-उल-फित्र की खुशियों के साथ लोग आपसी सद्भावना को और मजबूत कर रहे हैं।
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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