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Social Media Vetting

US Visa में Social Media Vetting इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए नई परेशानी

अगर आप अमेरिका (USA) में पढ़ाई करने की सोच रहे हैं, तो अब वीजा (US Student Visa) पाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो सकता है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक नई पॉलिसी लागू की है, जिसके तहत अब सोशल मीडिया वेटिंग (Social Media Vetting) की जाएगी। अब छात्रों के Facebook, Instagram, X (Twitter), YouTube जैसी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को वीजा अप्रूवल से पहले गहराई से जांचा जाएगा। क्या होता है Social Media Vetting? Social Media Vetting का मतलब है वीजा अप्लाई करने वाले छात्रों की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच करना। इसमें देखा जाएगा: अगर किसी की प्रोफाइल में संदिग्ध कंटेंट पाया गया तो उसका वीजा रिजेक्ट किया जा सकता है। US Embassy ने क्यों रोके नए Visa Interview Appointments? US State Department ने दुनिया भर की सभी अमेरिकी एंबेसी और कॉन्सुलेट्स को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल नई F, M और J कैटेगरी की वीजा अपॉइंटमेंट्स (Visa Appointments) को अस्थायी रूप से रोक दें। पहले से तय इंटरव्यू अभी भी होंगेनई अपॉइंटमेंट्स रुक गई हैंइस दौरान सोशल मीडिया वेटिंग के लिए नई गाइडलाइंस बनाई जाएंगी विदेशी छात्र और Universities में बढ़ी चिंता अमेरिका के टॉप कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ ने चिंता जताई है कि इससे: छात्रों को डर है कि उनकी सोशल मीडिया एक्टिविटी के आधार पर वीजा रिजेक्ट किया जा सकता है, भले ही उनकी नीयत साफ हो। ट्रंप प्रशासन की दलील: “सुरक्षा पहले” अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि: “हमारे पास यह अधिकार है कि कौन अमेरिका में दाखिल होगा। सोशल मीडिया से हमें लोगों की सोच, इरादे और खतरे का आकलन करने में मदद मिलती है।” लेकिन आलोचक कह रहे हैं कि यह पॉलिसी freedom of speech और privacy rights का उल्लंघन है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Apple

Trump का Apple को झटका, India में बने iPhone पर लगेगा 25% टैरिफ, सभी Smartphone Brands पर असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने Apple और अन्य स्मार्टफोन कंपनियों (Smartphone Brands) को बड़ा झटका देते हुए ऐलान किया है कि अगर iPhone या अन्य स्मार्टफोन्स का निर्माण भारत (India) या किसी और देश में किया गया है, तो अमेरिका में उन्हें बेचने पर 25% का भारी टैरिफ (Import Tariff) लगेगा। ट्रंप ने साफ किया कि उनका यह फैसला सिर्फ Apple तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी कंपनियों पर लागू होगा। उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही Tim Cook से कह दिया था – आप भारत में iPhone बना सकते हैं, लेकिन अगर आप अमेरिका में बेचना चाहते हैं, तो टैरिफ देना होगा।” iPhone के लिए Airlift: Apple ने भारत से भेजे 600 टन डिवाइसेस Apple ने ट्रंप के इस टैरिफ प्लान को भांपते हुए भारत से लगभग 600 टन iPhones को अमेरिका एयरलिफ्ट कर भेजा है ताकि जून के अंत से पहले स्टॉक भर सकें। जानकारों का मानना है कि यह कदम संभावित टैरिफ से पहले की रणनीति है। सिर्फ Apple नहीं, सभी ब्रांड्स पर असर Donald Trump ने स्पष्ट कहा कि यह टैरिफ नीति केवल Apple पर लागू नहीं होगी। “अगर हम सिर्फ Apple पर टैरिफ लगाते हैं और Samsung को छूट देते हैं, तो यह अनुचित होगा,” उन्होंने कहा। इसका मतलब है कि सैमसंग, शाओमी, ओप्पो, वीवो जैसी कंपनियां भी इस नीति के दायरे में आएंगी। 🇮🇳 India की Manufacturing Strategy पर असर भारत सरकार की PLI (Production Linked Incentive) योजना के तहत Apple, Samsung जैसी कंपनियों ने भारत में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू की है। इससे भारत ग्लोबल स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है। लेकिन अब अमेरिका के इस फैसले से भारत में बने iPhones की कीमत या बिक्री पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार ने ट्रंप के इस बयान पर “wait and watch” की नीति अपनाई है। वाणिज्य विभाग के डायरेक्टर जनरल संतोश सारंगी ने कहा कि सरकार स्थिति पर नज़र रख रही है और जरूरत पड़ने पर प्रतिक्रिया देगी। क्या होगा असर? – Price Hike या Profit Loss विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में टैरिफ लागू होने पर दो ही रास्ते होंगे – या तो iPhones की कीमतें बढ़ेंगी, या Apple को अपने मुनाफे में कटौती करनी पड़ेगी। दोनों ही स्थितियाँ यूजर्स और ब्रांड्स के लिए मुश्किलें पैदा करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mohammad Yunus resignation news

Bangladesh Political Crisis: अंतरिम PM Mohammad Yunus के इस्तीफे की अटकलें तेज

Bangladesh Political Crisis 2025: बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री प्रोफेसर Mohammad Yunus के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। आधी रात को बीबीसी बांग्ला सेवा की एक रिपोर्ट ने इस खबर को हवा दी, जिसमें नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के प्रमुख Nahid Islam के हवाले से कहा गया कि यूनुस इस्तीफे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। Nahid, जो कभी यूनुस के सलाहकार रह चुके हैं, ने मीडिया से बातचीत में कहा, “सर को लगता है कि राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे वह काम नहीं कर पा रहे हैं।” गौरतलब है कि Nahid ने इसी साल यूनुस से अलग होकर अपनी पार्टी NCP की स्थापना की थी। क्या है Mohammad Yunus resignation news की वजह? दरअसल, हाल के दिनों में यूनुस सरकार और देश की सैन्य व्यवस्था के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब यूनुस सरकार ने विदेश सचिव Mohammad Jashim Uddin को पद से हटा दिया — जबकि उन्हें महज 8 महीने पहले ही सितंबर 2024 में नियुक्त किया गया था। Jashim ने सरकार की उस योजना का विरोध किया था जिसमें Rohingya शरणार्थियों के लिए मानवीय कॉरिडोर बनाने की बात कही गई थी। यह योजना यूनुस और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Khalil-ur-Rahman द्वारा लाई गई थी, जिसका मकसद म्यांमार के रखाइन राज्य से भागकर आए रोहिंग्याओं को मानवीय सहायता देना था। सेना क्यों है विरोध में? यहीं से विवाद ने गंभीर मोड़ ले लिया। बांग्लादेश की सेना ने Myanmar से Bangladesh तक प्रस्तावित humanitarian corridor का कड़ा विरोध किया। सेना का कहना है कि इस कॉरिडोर से देश की sovereignty यानी राष्ट्रीय स्वायत्तता पर खतरा मंडरा रहा है और इसका कोई ठोस कूटनीतिक लाभ भी नहीं दिख रहा। सेना प्रमुख द्वारा हाल ही में की गई एक प्रेस ब्रीफिंग को यूनुस सरकार के लिए “Final Warning” के रूप में देखा गया, जिसने राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया। Yunus की छवि पर सवाल सरकार की कूटनीतिक अस्थिरता और सेना से खुला टकराव यूनुस की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहा है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी public discourse शुरू हो चुका है। सत्ताधारी खेमे में भी दो फाड़ नजर आ रही है — एक पक्ष यूनुस के साथ है, तो दूसरा उनकी नीतियों को देश के लिए खतरा मानता है आगे क्या? Bangladesh Interim Government Crisis अब ऐसे मोड़ पर है, जहां से लौटना आसान नहीं लगता। अगर यूनुस इस्तीफा देते हैं, तो यह बांग्लादेश के इतिहास में एक और अस्थिर अध्याय होगा। वहीं, अगर वे दबाव में बिना इस्तीफा दिए कार्यकाल पूरा करते हैं, तो उन्हें सेना, राजनीतिक दलों और जनता — तीनों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। Mohammad Yunus के इस्तीफे की खबरें सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि Bangladesh के राजनीतिक और कूटनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकती हैं। Rohingya शरणार्थियों को लेकर लिए गए फैसले, सेना से मतभेद और विदेश नीति की खामियों ने इस पूरे संकट को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस पर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी रहेंगी।
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Drone Attack

Drone Attack in Moscow: मॉस्को एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, DMK सांसद Kanimozhi का Delegation बाल-बाल बचा

मॉस्को, 23 मई 2025: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच मॉस्को एयरपोर्ट (Moscow Airport) पर एक बड़ा ड्रोन हमला (Drone Attack) उस समय हुआ जब DMK सांसद कनिमोझी (Kanimozhi) के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल (Indian Delegation) रूस पहुंचने वाला था। हमले के कुछ ही समय पहले यह प्रतिनिधिमंडल विनुकोवो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Vnukovo International Airport) पर लैंड करने वाला था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। Drone Attack के चलते रूस में हड़कंप रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी एयर डिफेंस सिस्टम (Russian Air Defense) ने मॉस्को की ओर आ रहे तीन ड्रोन (Three Drones) को समय रहते मार गिराया। इस हमले के बाद मॉस्को के तीन बड़े हवाई अड्डों – Vnukovo, Domodedovo और Sheremetyevo – पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अब सभी हवाई सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। एक ही सप्ताह में 485 ड्रोन हमले इस घटना से पहले, रूस ने दावा किया था कि 19 से 22 मई के बीच उसने 485 यूक्रेनी ड्रोन (Ukrainian Drones) को मार गिराया है। इन हमलों में मॉस्को, रियाज़ान और येल्त्स जैसे इलाकों को निशाना बनाया गया। येल्त्स के एक प्लांट से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि रियाज़ान की ऑयल रिफाइनरी में भारी आग लग गई थी। विदेशी डेलीगेशन पर बढ़ते खतरे ड्रोन हमले की टाइमिंग बेहद संवेदनशील थी क्योंकि उसी समय भारतीय सांसदों का डेलीगेशन रूस में लैंड कर रहा था। हालांकि, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सदस्य सुरक्षित हैं। यह घटना अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की भूमिका Russia-Ukraine War में अब ड्रोन हमले एक महत्वपूर्ण रणनीतिक हथियार बन चुके हैं। ये हमले न केवल सैन्य, बल्कि नागरिक इलाकों और उद्योगों को भी निशाना बना रहे हैं। इससे रूस की सुरक्षा तैयारियों की भी पोल खुल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Harvard

Harvard Indian Students News: ट्रंप की कार्रवाई से 788 भारतीय छात्र संकट में SEVP रद्द

वॉशिंगटन, मई 2025 — अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति के चलते Harvard University की SEVP (Student and Exchange Visitor Program) सर्टिफिकेशन रद्द कर दी गई है। इस फैसले से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे 788 भारतीय छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। क्या है मामला? ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि हार्वर्ड ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी गतिविधियों—खासकर कैंपस में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शन—की उचित रिपोर्टिंग नहीं की। इस कारण यूनिवर्सिटी की SEVP मान्यता को निलंबित कर दिया गया है, जिससे अब वह नए या मौजूदा विदेशी छात्रों को वैध रूप से पढ़ा नहीं सकती। 🇮🇳 भारतीय छात्रों पर असर 72 घंटे में वापसी का मौका Harvard को अमेरिका सरकार की ओर से 6 प्रमुख शर्तों के साथ 72 घंटे का समय दिया गया है, जिनमें यह स्पष्ट करना शामिल है कि यूनिवर्सिटी ने किन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। यदि यूनिवर्सिटी इन शर्तों को पूरा करती है, तो उसकी SEVP मान्यता बहाल की जा सकती है। कोर्ट से आंशिक राहत इस बीच कैलिफोर्निया की एक फेडरल अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके तहत हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीज़ा को रद्द किया जाना था। अदालत ने कहा कि हर छात्र के मामले को व्यक्तिगत रूप से जांचा जाना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jewish Museum

Washington DC गोलीकांड: Capital Jewish Museum के बाहर Israeli Embassy Staff की हत्या Elias Rodriguez गिरफ्तार

वॉशिंगटन डी.सी., 22 मई 2025 — अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डी.सी. में स्थित Capital Jewish Museum के बाहर हुई गोलीबारी में इज़राइली दूतावास (Israeli Embassy) से जुड़े दो कर्मचारियों की मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षा कर्मियों ने इलियास रोड्रिगेज (Elias Rodriguez) नामक संदिग्ध को मौके से गिरफ्तार कर लिया। दोनों पीड़ित—एक पुरुष और एक महिला—American Jewish Committee द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद संग्रहालय से बाहर आ रहे थे, जब उन पर अचानक गोलियां चला दी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर ने गिरफ्तारी के दौरान “Free, Free Palestine” का नारा लगाया, जिससे यह मामला राजनीतिक या वैचारिक नफरत से प्रेरित प्रतीत होता है। FBI और पुलिस कर रही आतंकवादी साजिश की जांच इस गोलीकांड की जांच FBI और स्थानीय पुलिस आतंकवादी घटना और Hate Crime (घृणा अपराध) के तौर पर कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए दोनों लोग एक-दूसरे के नज़दीक थे और जल्द ही सगाई करने वाले थे। कौन है Elias Rodriguez? 30 वर्षीय इलियास रोड्रिगेज, शिकागो का निवासी है। सोशल मीडिया पर कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उसका संबंध Party for Socialism and Liberation (PSL) के शिकागो चैप्टर से हो सकता है, लेकिन अब तक किसी आधिकारिक स्रोत ने इसकी पुष्टि नहीं की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CPEC

CPEC विस्तार Afghanistan तक China-Pakistan की डील से India को कड़ी चुनौती

चीन (China), पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) ने एक अहम समझौते के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को अफगानिस्तान तक विस्तार देने पर सहमति जताई है। इस परियोजना का उद्देश्य अफगानिस्तान को क्षेत्रीय व्यापार, परिवहन और ऊर्जा संपर्क का केंद्र बनाना है। यह डील न सिर्फ तीनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि भारत (India) के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती भी पेश करेगी। CPEC क्या है और इसका अफगानिस्तान से क्या संबंध है? CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative (BRI) का हिस्सा है, जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से चीन के शिनजियांग तक फैला हुआ है। अब इस परियोजना को अफगानिस्तान तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे रेलवे, सड़क, ऊर्जा पाइपलाइन और व्यापार नेटवर्क को मध्य एशिया तक जोड़ा जा सके। चीन और पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस परियोजना से अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और तीनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मज़बूत होंगे। सुरक्षा और आतंकवाद: सबसे बड़ी चुनौती तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति बेहद नाजुक है। ISIS-K जैसे आतंकी संगठनों की सक्रियता ने चीन और पाकिस्तान को चिंतित कर दिया है। हाल ही में काबुल में चीन के नागरिकों और संस्थानों पर हमलों के कारण चीन ने यह स्पष्ट किया है कि अगर सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली तो वह CPEC विस्तार पर दोबारा विचार करेगा। अंतरराष्ट्रीय मान्यता और मानवाधिकार: निवेश में रोड़ा तालिबान सरकार को अभी तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है। इसके अलावा, महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों पर तालिबानी पाबंदियों को लेकर दुनिया भर में आलोचना हो रही है। इन परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास जीतना तालिबान सरकार के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। भारत की नजर से: रणनीतिक और भौगोलिक खतरा भारत शुरू से ही CPEC का विरोध करता रहा है क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। अब CPEC का विस्तार अफगानिस्तान तक होने से भारत की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह चीन और पाकिस्तान के प्रभाव को भारत की उत्तरी सीमा तक पहुंचा सकता है। हालांकि भारत भी अफगानिस्तान के साथ संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। हाल ही में भारत ने 160 अफगान ट्रकों को अटारी बॉर्डर से प्रवेश की अनुमति दी, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Golden Dome

ट्रंप का ‘Golden Dome’ प्रोजेक्ट: अमेरिका का नया अंतरिक्ष-आधारित मिसाइल डिफेंस सिस्टम

डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई और बेहद महत्वाकांक्षी मिसाइल रक्षा प्रणाली की घोषणा की है, जिसे “Golden Dome” कहा जा रहा है। यह प्रोजेक्ट अमेरिका को बैलिस्टिक, क्रूज़ और हाइपरसोनिक मिसाइल जैसे घातक हमलों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस रक्षा कवच का निर्माण ज़मीन और अंतरिक्ष दोनों क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके किया जाएगा। क्या है Golden Dome सिस्टम? Golden Dome एक ऑल-इन-वन मिसाइल डिफेंस सिस्टम होगा जो दुश्मन की मिसाइलों को उनके लॉन्च के शुरुआती चरण (boost phase) से लेकर अंतिम टकराव (terminal phase) तक हर स्टेज पर इंटरसेप्ट करने में सक्षम होगा। मुख्य विशेषताएं: लागत और लॉन्च टाइमलाइन तुलना: Golden Dome बनाम Israel का Iron Dome विशेषता Iron Dome (इज़रायल) Golden Dome (अमेरिका) कवरेज क्षेत्र सीमित क्षेत्र पूरा अमेरिका तकनीक ज़मीन आधारित इंटरसेप्टर्स अंतरिक्ष आधारित हथियार और लेज़र टारगेट शॉर्ट-रेंज रॉकेट्स बैलिस्टिक, क्रूज़, हाइपरसोनिक मिसाइल्स चुनौतियाँ और आलोचनाएं हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Joe Biden

Joe Biden को हुआ Prostate Cancer: 2022 का ‘मेरे पास कैंसर है’ वीडियो फिर हुआ वायरल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden (जो बाइडेन) को हाल ही में aggressive prostate cancer (आक्रामक प्रोस्टेट कैंसर) होने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद उनका 2022 का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उस वीडियो में बाइडेन यह कहते हुए नजर आते हैं:“इसलिए मेरे पास भी, और मेरे साथ बड़े हुए इतने सारे लोगों के पास भी कैंसर है। क्या था 2022 का मामला? यह बयान जुलाई 2022 में मैसाचुसेट्स के समरसेट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया था। उस समय Joe Biden जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बोल रहे थे और प्रदूषण के प्रभावों का जिक्र कर रहे थे। लोगों ने जब “मेरे पास कैंसर है” वाला बयान सुना, तो तुरंत चिंता जताई, लेकिन व्हाइट हाउस ने सफाई दी कि बाइडेन पुराने स्किन कैंसर (non-melanoma) की बात कर रहे थे, जिसका इलाज राष्ट्रपति बनने से पहले ही हो चुका था। अब क्यों हो रही है चर्चा? अब जब जो बाइडेन को prostate cancer हुआ है, और वह भी इतनी गंभीर अवस्था में कि हड्डियों तक फैल चुका है, तो लोगों को 2022 का वह बयान फिर से याद आ गया। वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, और कुछ लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या बाइडेन की सेहत को लेकर पहले से कुछ छिपाया गया था? सियासी प्रतिक्रियाएं भी आई सामने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा:“मेलानिया और मैं जो बाइडेन की मेडिकल स्थिति जानकर दुखी हैं। हम जिल और पूरे परिवार को शुभकामनाएं देते हैं।” वहीं बराक ओबामा ने भी बाइडेन का समर्थन करते हुए कहा कि बाइडेन हमेशा से कैंसर रिसर्च और अवेयरनेस के पक्षधर रहे हैं और वह इस बीमारी से भी मजबूती से लड़ेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mukesh Ambani Meets Donald Trump and Qatar Emir in Doha: A Powerful Moment for India

Mukesh Ambani Meets Donald Trump and Qatar Emir in Doha: A Powerful Moment for India

भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Mukesh Ambani ने दोहा में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से अहम बातचीत की। दोहा में हुई यह मुलाकात न सिर्फ कारोबारी दुनिया के लिए, बल्कि भारत के वैश्विक रिश्तों के लिहाज़ से भी बेहद अहम मानी जा रही है। क्या है इस मुलाकात का मतलब? मुकेश अंबानी की ये मीटिंग अंतरराष्ट्रीय संबंधों और निवेश की दिशा में एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। एक तरफ अमेरिका जैसी वैश्विक शक्ति के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तो दूसरी ओर कतर जैसे ऊर्जा समृद्ध देश के अमीर—इन दोनों नेताओं के साथ अंबानी की एक ही मंच पर मौजूदगी आने वाले समय में बड़ी साझेदारियों की ओर इशारा करती है। भारत के लिए गर्व की बात दुनिया के सबसे बड़े बिज़नेस लीडर्स और राजनयिकों के बीच जब कोई भारतीय चेहरा दिखता है, तो वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात होती है। मुकेश अंबानी की इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग ने भारत की ताकत और उसकी ग्लोबल पहचान को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। इस मुलाकात से भारत, अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा मिल सकती है। निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में आने वाले दिनों में नई घोषणाएं हो सकती हैं।
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KGMU में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए बना रहा था निशाना

KGMU में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार, हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए बना रहा था निशाना

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के मशहूर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक फर्जी डॉक्टर को पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर अस्पताल में लोगों से मिलता था और इलाज के नाम पर भरोसा जीतता था। लेकिन जांच में सामने आया कि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी खासतौर पर हिंदू लड़कियों को अपने निशाने पर लेता था। वह पहले दोस्ती करता, फिर धीरे-धीरे उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करता था। इसके बाद धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने की बात भी सामने आई है। अस्पताल प्रशासन को आरोपी की गतिविधियों पर शक हुआ। इसके बाद जांच की गई तो उसकी सच्चाई सामने आ गई। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि वह कब से इस तरह लोगों को गुमराह कर रहा था और उसके साथ कोई और लोग भी जुड़े हैं या नहीं।? ऐसे मामलों में सावधानी बेहद जरूरी है। किसी भी डॉक्टर से इलाज कराने से पहले उसकी पहचान और डिग्री जरूर जांच लें, ताकि इस तरह के धोखे से बचा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UP Board

UP Board Class 10th 12th Result 2026 Result से पहले जान लें Check करने का आसान तरीका

उत्तर प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए कल का दिन बेहद अहम होने वाला है। महीनों की मेहनत, परीक्षा का तनाव और रिजल्ट का इंतजार—इन सबका अंत अब होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) कल कक्षा 10वीं (High School) और 12वीं (Intermediate) का रिजल्ट जारी करने जा रहा है। इस साल करीब 52 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी, ऐसे में हर घर में उत्सुकता का माहौल है। कोई अपने नंबर को लेकर चिंतित है, तो कोई अपने सपनों के अगले कदम के बारे में सोच रहा है। कब और कैसे जारी होगा UP Board Result? बोर्ड रिजल्ट को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जारी करेगा। इसके साथ ही टॉपर्स की लिस्ट, कुल पास प्रतिशत और अन्य जरूरी आंकड़े भी सामने आएंगे। रिजल्ट जारी होते ही इसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा, जहां छात्र अपना स्कोर चेक कर सकेंगे। Step-by-Step: ऐसे करें UP Board Result 2026 चेक वेबसाइट स्लो हो तो घबराएं नहीं हर साल रिजल्ट के समय वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है। ऐसे में अगर पेज खुलने में समय लगे, तो थोड़ा इंतजार करें और दोबारा कोशिश करें। जरूरत पड़ने पर SMS के जरिए भी रिजल्ट चेक किया जा सकता है। पास होने के लिए कितने नंबर जरूरी? UP Board में पास होने के लिए हर विषय में कम से कम 33% अंक लाना जरूरी होता है। अगर किसी छात्र के नंबर कम आते हैं, तो उसे कंपार्टमेंट परीक्षा का मौका मिलेगा। मार्कशीट से जुड़ी जरूरी बात ऑनलाइन दिखने वाला रिजल्ट फिलहाल प्रोविजनल होगा। ओरिजिनल मार्कशीट छात्रों को कुछ दिनों बाद अपने स्कूल से मिलेगी, इसलिए उसे सुरक्षित रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
3 बार NEET में फेल, IIT Madras भी नहीं मिला… फिर भी बने Data Scientist, संजय बी की कहानी है प्रेरणा

3 बार NEET में फेल, IIT Madras भी नहीं मिला… फिर भी बने Data Scientist, संजय बी की कहानी है प्रेरणा

अक्सर जिंदगी में हम कुछ और चाहते हैं, लेकिन मिलता कुछ और है। 3 बार NEET में फेल, IIT Madras भी नहीं मिला ऐसे में कई लोग हार मान लेते हैं, लेकिन कुछ लोग वही रास्ता बदलकर अपनी नई पहचान बना लेते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है संजय बी की। डॉक्टर बनने का सपना, लेकिन बार-बार मिली असफलता संजय बी का सपना था डॉक्टर बनने का। इसके लिए उन्होंने NEET परीक्षा की तैयारी की, लेकिन एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार फेल हो गए। इतनी बड़ी असफलता के बाद ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन संजय ने हार नहीं मानी। IIT Madras का सपना भी रह गया अधूरा NEET में सफलता नहीं मिलने के बाद संजय ने इंजीनियरिंग की ओर रुख किया। उनका सपना था कि वो IIT Madras में पढ़ाई करें, लेकिन यहां भी उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। लगातार मिल रही नाकामियों ने उनके रास्ते जरूर कठिन बनाए, लेकिन उनका हौसला नहीं तोड़ पाए। बदला रास्ता, मिली नई मंजिल संजय ने अपनी सोच बदली और टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने डेटा और प्रोग्रामिंग सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को Data Science के क्षेत्र में मजबूत किया। आज हैं सफल Data Scientist कड़ी मेहनत और लगातार सीखने की लगन ने संजय को आज एक सफल Data Scientist बना दिया है। जो सपना डॉक्टर बनने का था, वो पूरा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने अपने लिए एक नई पहचान बना ली—और आज वो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। संजय की कहानी हमें यही सिखाती है कि— हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ceasefire Extended: Donald Trump ने कहा कि IRAN को रोज़ $500 मिलियन का नुकसान

Ceasefire Extended: Donald Trump ने कहा कि IRAN को रोज़ $500 मिलियन का नुकसान

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर (युद्धविराम) बढ़ाने के बाद बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि नाकेबंदी (ब्लॉकेड) की वजह से Iran को हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) का नुकसान हो रहा है। ट्रम्प के मुताबिक, आर्थिक दबाव के कारण ईरान की स्थिति कमजोर होती जा रही है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि इस दबाव का असर साफ दिख रहा है और ईरान बातचीत के लिए मजबूर हो सकता है। उनका मानना है कि यह रणनीति आगे भी जारी रहनी चाहिए ताकि ईरान पर दबाव बना रहे। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। ईरानी दूत ने साफ कहा कि जब तक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म नहीं की जाती, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है। उनका कहना है कि बातचीत के लिए माहौल बनाना जरूरी है और इसके लिए सबसे पहले प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। एक तरफ अमेरिका आर्थिक दबाव की नीति पर कायम है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और बढ़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Price India सोना ₹2000 चढ़ा, Silver में बड़ा उछाल

देश के सर्राफा बाजार में आज अचानक आई तेजी ने खरीदारों और निवेशकों दोनों को चौंका दिया। सुबह जैसे ही बाजार खुला, Gold और Silver के दामों में जोरदार उछाल देखने को मिला। खास बात यह रही कि Silver ने एक ही दिन में ₹4500 तक की छलांग लगाकर सबका ध्यान खींच लिया, जबकि Gold भी करीब ₹2000 तक महंगा हो गया। आज के ताजा रेट (Gold Silver Price Today) आज के बाजार भाव पर नजर डालें तो: ध्यान रहे कि शहर और ज्वेलर्स के हिसाब से इन कीमतों में थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता है। MCX Market में भी तेजी का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी आज तेजी साफ दिखी। यह संकेत देता है कि सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स मार्केट में भी खरीदारी बढ़ी है। आखिर क्यों बढ़े सोना-चांदी के दाम? इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं: इन वजहों से सोना और चांदी दोनों की मांग अचानक बढ़ गई, जिससे कीमतों में उछाल आया। बड़े शहरों में क्या है हाल? दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी आज दामों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि, स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण हर शहर में कीमत थोड़ी अलग हो सकती है। आगे क्या करें – खरीदें या रुकें? अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह फैसला थोड़ा सोच-समझकर लेना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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