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Tesla Model S

Donald Trump की Tesla Model S बिक्री की तैयारी Elon Musk से झगड़े के बाद बड़ा फैसला

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और Tesla के CEO Elon Musk के बीच बढ़ते विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। खबरों के अनुसार, ट्रंप अपनी Tesla Model S कार को बेचने या दान करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यह वही कार है जिसे उन्होंने मार्च 2025 में एलन मस्क के समर्थन में खरीदा था, लेकिन अब दोनों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं। ट्रंप और मस्क के बीच तकरार का कारण ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया जिसे उन्होंने “One Big Beautiful Bill” नाम दिया, लेकिन Elon Musk ने इसे “disgusting abomination” कहकर सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। इसी के बाद दोनों के बीच ज़बरदस्त जुबानी जंग शुरू हो गई। मस्क ने ट्रंप पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका नाम Jeffrey Epstein से जुड़े गोपनीय दस्तावेज़ों में आ सकता है। इसके जवाब में ट्रंप ने एलन मस्क को “पागल” करार देते हुए धमकी दी कि सरकार उनकी कंपनियों (Tesla और SpaceX) के कॉन्ट्रैक्ट और सब्सिडी को रद्द कर सकती है। कौन सी Tesla कार है ट्रंप के पास? Donald Trump के पास जो Tesla Model S है, वो एक Dual Motor All-Wheel Drive वैरिएंट है। इसमें: इस मॉडल को मार्च 2025 में व्हाइट हाउस डिलीवर किया गया था, जब ट्रंप और मस्क के रिश्ते अच्छे थे। विवाद का असर Tesla के स्टॉक पर ट्रंप-मस्क झगड़े का असर सीधा Tesla के शेयर पर भी पड़ा है। एक ही दिन में टेस्ला का मार्केट कैप $152 बिलियन गिर गया और मस्क की नेटवर्थ में $34 बिलियन की भारी गिरावट आई। वर्तमान में Tesla का शेयर प्राइस $295.14 पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Travel Ban अमेरिका ने 12 देशों की Entry की बंद, जानें कौन-कौन से देश हैं लिस्ट में

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर कड़ा फैसला लेते हुए 12 देशों के नागरिकों के USA entry पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इसके अलावा 7 अन्य देशों के लिए आंशिक यात्रा प्रतिबंध लागू किया गया है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और वीजा स्क्रीनिंग (Visa Screening) में पाई गई गंभीर खामियों के चलते उठाया गया है। पूरी तरह से प्रतिबंधित 12 देश (Total Entry Ban Countries): इन देशों के नागरिक अब अमेरिका में प्रवेश नहीं कर पाएंगे: Trump प्रशासन ने इन देशों पर इसलिए बैन लगाया क्योंकि इन देशों से आने वाले यात्रियों की Visa Overstay Rate काफी अधिक है और ये देश डिपोर्टेशन में सहयोग नहीं करते। आंशिक प्रतिबंध वाले 7 देश (Partial Ban Countries): इन देशों के कुछ खास कैटेगरी के यात्रियों को ही अनुमति दी जाएगी: इन देशों के यात्रियों को विशेष सुरक्षा जांच और अनुमति के बाद ही वीजा मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Elon Musk

Elon Musk Vs Trump “One Big Beautiful Bill” पर छिड़ा विवाद – मस्क बोले “Kill The Bill”

अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपति Elon Musk ने राष्ट्रपति Donald Trump के नए कानून “One Big Beautiful Bill” पर सीधा हमला बोलते हुए एक नई मुहिम छेड़ दी है – “Kill The Bill”. मस्क ने इस बिल को “घटिया और विनाशकारी” बताया है और जनता से अपील की है कि वे अपने सांसदों से संपर्क कर इसका विरोध करें। क्या है “One Big Beautiful Bill”? यह बिल अमेरिकी संसद के निचले सदन से 22 मई 2025 को पास हुआ था। इसके अंतर्गत: इसका कुल वित्तीय बोझ $4 ट्रिलियन (लगभग ₹332 लाख करोड़) बताया गया है। Elon Musk ने क्यों बोला हमला? Elon Musk, जो हाल ही में DOGE (Department of Government Efficiency) के प्रमुख पद से इस्तीफा दे चुके हैं, ने इस बिल के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला है। मस्क का कहना है: मस्क ने सोशल मीडिया पर जनता से अपील की है:“Contact your Senators. Kill the Bill.” रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद Elon Musk के इस स्टैंड के बाद खुद रिपब्लिकन पार्टी में भी दरार नजर आ रही है। सांसद Marjorie Taylor Greene, जो शुरू में इस बिल की समर्थक थीं, अब मस्क के साथ खड़ी हो गई हैं। व्हाइट हाउस का जवाब White House की प्रेस सेक्रेटरी Karoline Leavitt ने साफ कहा कि मस्क की आलोचना से सरकार की नीति नहीं बदलेगी। उनका बयान था: “Elon Musk की राय निजी है, पर यह बिल राष्ट्रीय हित में जरूरी है।” Musk की राजनीति में यू-टर्न? Elon Musk को पहले Trump समर्थक माना जाता था, लेकिन अब उनकी स्थिति बदलती दिख रही है। उन्होंने बिल का विरोध कर यह संकेत दे दिया है कि वे ट्रंप की आर्थिक नीतियों से पूरी तरह अलग सोचते हैं। यह अमेरिका की आगामी राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lee Jae Myung

Lee Jae Myung बने South Korea के नए President उनके संघर्ष से सत्ता तक का सफर

दक्षिण कोरिया को मिला नया नेता — ली जे-म्युंग (Lee Jae Myung)। 2025 में हुए असाधारण चुनावों में उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और एक नए प्रगतिशील युग की शुरुआत की। उनका चयन ऐसे समय हुआ है जब देश गहरे राजनीतिक संकट, आर्थिक सुस्ती और सामाजिक असमानता से जूझ रहा है। ली जे-म्युंग की जीत को South Korea की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Struggle से Success तक: Lee Jae Myung की प्रेरक कहानी ली जे-म्युंग का जन्म 1963 में South Korea के अंडोंग (Andong) गाँव में एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में उन्होंने फैक्ट्रियों में मजदूरी की और एक दुर्घटना में हाथ में गंभीर चोट आई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने Chung-Ang University से कानून की पढ़ाई की और फिर एक मजदूर अधिकार कार्यकर्ता और मानवाधिकार वकील के रूप में पहचान बनाई। Political Career: Mayor से President तक ली की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 2010 में Seongnam के मेयर के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने Gyeonggi Province के गवर्नर के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं, आवास योजनाओं और गरीबों के लिए लाभकारी कल्याण योजनाएं लागू कीं। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में करीबी हार के बावजूद वे राजनीति के केंद्र में बने रहे। 2025 का चुनाव और जीत की कहानी पूर्व राष्ट्रपति Yoon Suk Yeol द्वारा दिसंबर 2024 में Martial Law की घोषणा से देश में उथल-पुथल मच गई थी। इसके बाद उन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा और हटाया गया। ऐसे में 2025 के विशेष चुनाव में Lee Jae Myung ने 49.42% वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की। देश में 79.4% वोटिंग हुई, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक रही। नए राष्ट्रपति की नीतियाँ और वादे आर्थिक सुधार (Economic Reforms): विदेश नीति (Foreign Policy): समाज कल्याण (Social Welfare): Lee Jae Myung के सामने चुनौतियाँ हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Boulder Terror Attack

Boulder Terror Attack क्यों Mohamed Soliman ने Protesters को Target किया

अमेरिका के Colorado के Boulder शहर में एक शांति प्रदर्शन (Peace Protest) के दौरान एक भयानक आतंकवादी हमला (Terror Attack) हुआ, जिसने पूरे अमेरिका और विश्व में सनसनी फैला दी। क्या हुआ Boulder Terror Attack में? यह प्रदर्शन ‘Run for Their Lives’ नामक समूह द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें लोग Gaza में फंसे Israeli hostages की रिहाई की मांग कर रहे थे। इसी दौरान Mohamed Sabry Soliman नाम का 45 वर्षीय Egyptian नागरिक अचानक सामने आया और उसने Molotov Cocktails (पेट्रोल बम) और एक makeshift flamethrower से प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया। Mohamed Soliman ने क्यों किया Protesters को Target? प्राथमिक जानकारी के अनुसार, Mohamed Soliman ने ‘Free Palestine’ के नारे लगाते हुए यह हमला किया। यह हमला राजनीतिक और धार्मिक उन्माद से प्रेरित था, जिसमें वह Gaza और Israel के बीच चल रहे संघर्ष का मुद्दा लेकर हिंसा भड़काना चाहता था। Boulder Terror Attack के Victims कौन हैं? इस हमले में 8 लोग घायल हुए, जिनमें सबसे कम उम्र 52 साल और सबसे अधिक उम्र 88 साल है। घायलों में एक 88 वर्षीय Holocaust survivor भी शामिल है, जिसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी देखभाल की जा रही है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई FBI और Department of Homeland Security ने इस घटना को एक “targeted terrorist attack” करार दिया है। आरोपी Mohamed Soliman को मौके से गिरफ्तार कर अस्पताल में रखा गया है। जांच जारी है कि कहीं उसका कोई extremist connection तो नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Operation Spider Web

Ukraine का ‘Operation Spider Web’ रूस पर अब तक का सबसे बड़ा Drone Attack

1 जून 2025 को यूक्रेन ने रूस के खिलाफ एक ऐसा ड्रोन हमला किया जिसने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस ऑपरेशन को कोडनेम दिया गया – “Operation Spider Web” (ऑपरेशन स्पाइडर वेब)। यह हमला युद्ध के इतिहास में अब तक का सबसे जटिल और बड़ा ड्रोन अटैक माना जा रहा है। 1.Operation Spider Web 100 से ज़्यादा Drones से Russia पर बड़ा हमला यूक्रेन ने एक साथ 100 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च किए जो रूस के विभिन्न military airbases पर हमला करने के लिए तैयार थे। इन हमलों में रूस के 41 लड़ाकू और बमवर्षक विमान (Tu-95, Tu-22, A-50) नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। 2. Long-Range Attack: हज़ारों किलोमीटर अंदर तक पहुंचा यूक्रेन यह हमला केवल सीमा पर नहीं था। यूक्रेन ने साइबेरिया और आर्कटिक रीजन तक स्थित एयरबेस को भी निशाना बनाया, जो यूक्रेनी सीमा से हज़ारों किलोमीटर दूर हैं। 3. Hidden Drones Strategy: 18 महीनों की गुप्त तैयारी इस ऑपरेशन के लिए यूक्रेनी एजेंटों ने 18 महीने पहले से रूस में ड्रोन्स तस्करी करके उन्हें लकड़ी की झोपड़ियों और शेड्स में छिपाकर रखा था। फिर इन्हें remote control से लॉन्च किया गया। 4. बिना Western Help के किया गया ऑपरेशन यूक्रेन ने स्पष्ट किया कि यह हमला पूरी तरह से स्वदेशी (Indigenous) ड्रोन टेक्नोलॉजी और संसाधनों से किया गया है। इसमें NATO या किसी पश्चिमी देश की कोई सीधी सहायता शामिल नहीं थी। 5. Peace Talks से पहले दिखाया ताकत का प्रदर्शन यह ऑपरेशन ऐसे समय हुआ जब 2 जून को इस्तांबुल में रूस-यूक्रेन शांति वार्ता (Peace Talks) होनी थी। ऐसे में यह हमला यूक्रेन द्वारा दबाव बनाने की एक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Middle East

India Pakistan Ceasefire Trump बोले “US ने Nuclear War रोका”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान (India Pakistan) के बीच बढ़ते तनाव को रोकते हुए संभावित परमाणु युद्ध (Nuclear War) को टालने में अमेरिका की अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने कहा कि उनकी सख्त व्यापार नीति और राजनयिक दबाव के चलते दोनों देशों ने संघर्ष विराम (Ceasefire) को स्वीकार किया। Trump का दावा: “हमने रोका India-Pakistan Nuclear War Trump के अनुसार, उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों से सीधा संपर्क किया और चेतावनी दी कि “हम उन देशों से व्यापार नहीं कर सकते जो एक-दूसरे पर मिसाइल फेंक रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो यह मामला परमाणु संघर्ष में बदल सकता था। 🇮🇳 भारत का जवाब: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से टूटा पाकिस्तान का हौसला भारत सरकार ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह संघर्ष विराम अमेरिका के दबाव से नहीं, बल्कि भारत की सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक रणनीति का नतीजा है। भारतीय सैन्य सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” (Operation Sindoor) लॉन्च किया। इसके तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन कार्रवाइयों से पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हुई और उसे बातचीत के लिए मजबूर होना पड़ा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gaza

Gaza Conflict अमेरिका का 60 दिन का Ceasefire Plan और Hostage Release

अमेरिका ने पेश किया 60 दिन का Gaza Ceasefire Plan गाज़ा (Gaza) संघर्षविराम के लिए अमेरिका (US) ने पेश किया 60 दिन का Ceasefire Proposal, हो सकती है Hostage और Prisoner की बड़ी अदला-बदली वाशिंगटन/तेल अवीव/गाज़ा – अमेरिका (US) ने गाज़ा संघर्ष (Gaza Conflict) को रोकने और मानवीय संकट को कम करने के लिए एक 60 दिन के Temporary Ceasefire का प्रस्ताव दिया है। इस प्लान (Plan) के तहत इज़राइल (Israel) और हमास (Hamas) के बीच बंधकों (Hostages) और कैदियों (Prisoners) की बड़ी अदला-बदली (Swap) हो सकती है। Key Highlights इस US Proposed Ceasefire Plan के: Middle East में Diplomatic Efforts: इस प्लान को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden), मिस्र (Egypt) और कतर (Qatar) ने समर्थन दिया है। इज़राइल ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, और हमास भी जल्द ही अपनी प्रतिक्रिया देगा। Challenges: हालाँकि यह प्रस्ताव मानवीय राहत और संघर्ष विराम के लिए बड़ा कदम है, लेकिन Hamas का निरस्त्रीकरण (Disarmament) और Israel की पूरी वापसी (Complete Withdrawal) अभी भी विवादित मुद्दे बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

Trump Tariff Court Decision भारत को मिली राहत, अमेरिका के दबाव से छुटकारा

अमेरिका की एक बड़ी अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा लगाए गए कुछ अंतरराष्ट्रीय टैरिफ (Import Tariffs) को गैरकानूनी करार दिया है। इस फैसले से भारत को व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। अब भारत को अमेरिकी टैरिफ के भारी दबाव से कुछ हद तक छुटकारा मिल गया है। क्या है मामला? अमेरिका की Court of International Trade ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत जो “Retaliatory”, “Worldwide” और “Trafficking” टैरिफ लगाए थे, वे कानून के दायरे से बाहर हैं। कोर्ट ने इन्हें अवैध घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद अमेरिका अब भारत जैसे देशों पर उन Tariff के आधार पर दबाव नहीं बना सकता, जो कि IEEPA के अंतर्गत नहीं आते हैं। पहले भारत पर 26% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी गई थी, जिससे भारत पर संवेदनशील सेक्टर जैसे एग्रीकल्चर (Agriculture) को खोलने का दबाव बनाया जा रहा था। किन टैरिफ पर रहेगा असर और किन पर नहीं? इस फैसले का असर केवल उन्हीं टैरिफ पर पड़ेगा जो IEEPA के तहत लगाए गए थे। स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर जो 25% ड्यूटी लगाई गई थी, वह अब भी बरकरार है। इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को अभी कोई राहत नहीं मिलेगी। व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस ने कहा है कि सरकार राष्ट्रीय आपात स्थितियों से निपटने के लिए सभी उपलब्ध Executive Powers का इस्तेमाल करती रहेगी। इससे साफ है कि आने वाले समय में अमेरिका इस फैसले को चुनौती दे सकता है या नई रणनीति बना सकता है। भारत को क्या फायदा होगा? इस फैसले से भारत को अमेरिका के साथ व्यापारिक वार्ता में बेहतर स्थिति मिली है। अब भारत पर तत्काल टैरिफ लगाने का खतरा नहीं है और वह अपने हितों के अनुसार रणनीति बना सकता है। यह कदम भारत के लिए ट्रेड पॉलिसी (Trade Policy) को लेकर एक पॉजिटिव संकेत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Elon Musk

Elon Musk का इस्तीफा ट्रंप सरकार से Exit का कारण बना ‘Big Beautiful Bill’

टेक जगत के दिग्गज Elon Musk ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन से इस्तीफा दे दिया है। वे Department of Government Efficiency (DOGE) के प्रमुख के तौर पर सरकारी सुधारों में जुटे थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी भूमिका से हटने का ऐलान कर दिया है। Elon Musk का Government Exit – जानिए क्या बोले मस्क एलन मस्क ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा: Elon Musk vs Trump’s Big Beautiful Bill – असहमति की असली वजह मस्क के इस्तीफे का मुख्य कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘One Big Beautiful Bill’ बताया जा रहा है। यह एक विशाल कर और आव्रजन सुधार प्रस्ताव है, जिसे लेकर मस्क ने नाराजगी जताई। उन्होंने बिल को ‘Massive Spending Bill’ करार दिया और कहा: “कोई बिल बड़ा हो सकता है या खूबसूरत – लेकिन दोनों एक साथ नहीं।” यह बयान ट्रंप सरकार की नीतियों पर मस्क की असहमति को स्पष्ट करता है। क्यों नाखुश थे Elon Musk? कौन होगा Elon Musk का DOGE में अगला Successor? DOGE के अगले प्रमुख को लेकर अटकलें शुरू हो चुकी हैं। विवेक रामास्वामी का नाम संभावित विकल्पों में सामने आया है, लेकिन आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। Musk Returns to Tesla & SpaceX – अब फोकस बिजनेस पर सरकारी भूमिका से बाहर निकलने के बाद एलन मस्क अब पूरी तरह से Tesla, SpaceX और अन्य कंपनियों पर ध्यान देंगे। उनका इस्तीफा इस बात का संकेत है कि सरकारी सुधारों में प्राइवेट सेक्टर की अप्रोच को अपनाना आसान नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Editor's Picks

बिलासपुर “बादाम कांड” के बाद नया विवाद: NOC के बदले पैसे मांगने का आरोप, वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चर्चित “बादाम कांड” के बाद एक बार फिर हाउसिंग बोर्ड का दफ्तर सुर्खियों में है। इस बार वरिष्ठ सहायक पूनम बंजारे का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें उन पर NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में पूनम बंजारे खुद इन आरोपों से इनकार करती नजर आ रही हैं। वहीं, ऑफिस में बहस और हंगामा भी साफ दिखाई दे रहा है। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष ने आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। नामांतरण के लिए लोगों को काटने पड़ रहे चक्कर जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के ऑफिस में मकान और फ्लैट खरीदने के बाद नामांतरण (ट्रांसफर) के लिए लोगों को महीनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। नियमों के अनुसार आवेदन देने के बाद भी फाइलें लंबित रखी जा रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। एक महिला ने बताया कि उसने 17 मार्च 2025 को नामांतरण के लिए आवेदन किया था। 11 नवंबर 2025 को आदेश जारी होने के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक महिला पूनम बंजारे पर NOC देने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा रही है। वहीं, पूनम बंजारे इन आरोपों से साफ इनकार करती दिखती हैं। वीडियो बनते देख वह नाराज हो जाती हैं और ऑफिस में हंगामा करती नजर आती हैं। अधिकारी बोले – शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई हाउसिंग बोर्ड के संपदा अधिकारी एसके शर्मा ने कहा कि उन्हें इस वायरल वीडियो की जानकारी नहीं है।उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में कोई शिकायत आती है, तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। “बादाम कांड” से पहले ही चर्चा में था दफ्तर इससे पहले भी यही हाउसिंग बोर्ड ऑफिस “बादाम कांड” को लेकर चर्चा में आया था। दरअसल, एक युवक तरुण साहू ने नामांतरण के लिए आवेदन किया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उसकी फाइल उसे नहीं दी गई और वह महीनों तक ऑफिस के चक्कर लगाता रहा। आखिरकार परेशान होकर युवक आधा किलो बादाम लेकर ऑफिस पहुंचा और अधिकारियों की टेबल पर फेंकते हुए कहा—“इसे खाइए, याददाश्त बढ़ेगी… जब मेरी फाइल मिल जाए, तो बता दीजिए।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। 👉 ऐसी ही जमीनी और सच्ची खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
RBI

RBI ने बदले Auto Debit नियम अब बैंक खाते से पैसे कटने से पहले मिलेगा अलर्ट और ज्यादा कंट्रोल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने auto-debit यानी e-mandate नियमों में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव सीधे उन करोड़ों लोगों को प्रभावित करेगा जो EMI, SIP, OTT subscriptions, insurance premium या ऑनलाइन बिल पेमेंट के लिए auto-debit का इस्तेमाल करते हैं। नया सिस्टम डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने के साथ-साथ ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया है। RBI ने Auto-Debit नियमों में क्या बदला? RBI के नए e-mandate framework के तहत recurring payments को लेकर प्रक्रिया को अपडेट किया गया है, ताकि ग्राहकों को बेहतर सुविधा और कंट्रोल मिल सके। ₹15,000 तक के पेमेंट पर OTP की जरूरत नहीं अब ₹15,000 तक की recurring payments जैसे OTT subscription, मोबाइल बिल, बिजली-पानी बिल आदि पर हर बार OTP डालने की जरूरत नहीं होगी। इससे छोटे-मोटे डिजिटल पेमेंट बिना रुकावट अपने आप हो जाएंगे। बड़ी ट्रांजैक्शन पर सुरक्षा बनी रहेगी ₹15,000 से ज्यादा की किसी भी auto-debit ट्रांजैक्शन पर OTP या अतिरिक्त verification पहले की तरह जरूरी रहेगा। जरूरी सेवाओं के लिए ₹1 लाख तक की सुविधा Insurance premium, mutual fund SIP और credit card बिल जैसे जरूरी payments में ₹1 लाख तक की auto-debit सुविधा मिल सकती है। पेमेंट से पहले 24 घंटे का अलर्ट अनिवार्य अब किसी भी auto-debit से पहले बैंक या कंपनी को ग्राहक को कम से कम 24 घंटे पहले सूचना (notification) देना जरूरी होगा। आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा? नए नियमों का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखेगा: EMI और SIP जैसी जरूरी सेवाएं बिना रुकावट चलेंगीOTT और subscription payments आसान हो जाएंगेगलत या unauthorized debit का खतरा कम होगाहर transaction की पहले से जानकारी मिलेगीयूजर्स को अपने पैसों पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

सागर में दिल्ली नंबर कार से अवैध शराब बरामद: हादसे के बाद खुला राज, एक गिरफ्तार, 3 फरार

मध्यप्रदेश के सागर जिले में गढ़ाकोटा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली नंबर की कार से अवैध शराब बरामद की है। खास बात यह है कि यह पूरा मामला एक सड़क हादसे के बाद सामने आया। पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात सूचना मिली थी कि चनौआ खुर्द के पास बरखेड़ा गौतम मार्ग पर एक क्षतिग्रस्त कार सड़क किनारे खड़ी है और उसका चालक अंदर फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। तलाशी में मिली 9 पेटी देशी शराब जब पुलिस ने कार की तलाशी ली, तो अंदर से 9 पेटी देशी शराब बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कार और शराब को जब्त कर लिया। पकड़े गए चालक ने अपना नाम जोगेंद्र पिता वीरसिंह राजपूत बताया है। हादसे ने खोल दी तस्करी की पोल पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने तीन साथियों के साथ सागर से गढ़ाकोटा की ओर शराब लेकर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे पूरी साजिश सामने आ गई। एक गिरफ्तार, 3 आरोपी फरार गढ़ाकोटा थाना प्रभारी शुभम दुबे ने बताया कि आरोपी जोगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, उसके तीन साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। 👉 ऐसी ही ताजा और सटीक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com

जबलपुर में नौकरानी से मारपीट और ठगी: नशा देकर 6.30 लाख निकाले, CCTV में कैद हुई क्रूरता

मध्यप्रदेश के जबलपुर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नौकरानी के साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि साजिश रचकर उसके बैंक खाते से लाखों रुपये भी निकाल लिए गए। घटना आधारताल थाना क्षेत्र की है। पीड़िता पूनम बर्मन ने एएसपी सूर्यकांत शर्मा को शिकायत के साथ CCTV फुटेज भी सौंपे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मालकिन अंजू पांडे उसे थप्पड़ मार रही है और बाल पकड़कर जमीन पर घसीट रही है। नशा देकर चेक पर साइन करवाए, खाते से निकाले पैसे जानकारी के मुताबिक पूनम, अंजू पांडे के घर काम करती थी। आरोप है कि उसे नशे की गोलियां खिलाकर जबरन चेक पर साइन करवाए गए। इसके बाद उसे कार में बैठाकर बैंक ले जाया गया और खाते से पैसे निकलवा लिए गए। जब पूनम को होश आया और उसने विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई। खाते में थे 6.30 लाख रुपए, सब निकाल लिए पीड़िता की बहन हीरा बाई ने बताया कि पूनम के बैंक खाते में करीब 6 लाख 30 हजार रुपए थे, जिन्हें आरोपी ने निकलवा लिया। इतना ही नहीं, उसकी पूरी कमाई और बैंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी अपने पास रख लिए गए। “पैसे देने से मना किया तो पीटा” पूनम ने बताया कि वह कई महीनों से काम कर रही थी। अचानक उसकी मालकिन ने पैसों की मांग शुरू कर दी। जब उसने मना किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और पूरी साजिश के तहत उसके खाते से पैसे निकलवा लिए गए। पुलिस को सौंपी शिकायत, जांच जारी बुधवार को पूनम अपनी बहनों के साथ एसपी कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की शिकायत की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि CCTV फुटेज और शिकायत के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। शिवपुरी में भी शर्मनाक घटना इसी तरह का एक और मामला शिवपुरी से सामने आया है, जहां एक बस कंडक्टर ने महिला यात्री को सड़क पर फेंक दिया। महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने ज्यादा किराया देने से इनकार किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कंडक्टर ने महिला के साथ मारपीट की और गालियां दीं। इस दौरान पास खड़ा उसका मासूम बच्चा अपनी मां को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कंडक्टर का दिल नहीं पसीजा। 👉 ऐसी ही सच्ची और जमीनी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
ईरान

Middle East Tension ईरान ने पकड़े दो जहाज, भारत आ रहा पोत भी रोक दिया गया

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने समुद्री क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो जहाजों को जब्त कर लिया है। इनमें से एक जहाज दुबई से होते हुए भारत की ओर आ रहा था। इस घटना ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। जहाजों की जब्ती से मचा हड़कंप जानकारी के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने खाड़ी क्षेत्र में निगरानी के दौरान दो जहाजों को रोका और अपने कब्जे में ले लिया। बताया जा रहा है कि दोनों जहाजों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका गया, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनमें क्या माल लदा था और क्रू मेंबर कौन थे। सबसे अहम बात यह है कि जिन जहाजों में से एक भारत की ओर आ रहा था, उसका रास्ता दुबई से होकर गुजर रहा था, जिससे इस मामले में भारत की भी अप्रत्यक्ष एंट्री हो गई है। India Alert: भारत की नजर स्थिति पर भारत इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस जहाज का कोई सीधा संबंध भारत से जुड़ा है या नहीं। फिलहाल स्थिति को लेकर सावधानी बरती जा रही है। Gulf Region में बढ़ता तनाव यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब खाड़ी क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समुद्री व्यापार और शिपिंग रूट्स पर सीधा असर डाल सकती हैं। खासकर तेल और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। International Reaction भी शुरू इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया आने लगी है। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की है ताकि इस तरह की घटनाओं से वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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