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Iran Crisis: आखिरी फैसले से पहले Situation Room पहुंचे ट्रंप, बोले- जल्द खत्म होगी नौसैनिक घेराबंदी

Iran Crisis: आखिरी फैसले से पहले Situation Room पहुंचे ट्रंप, बोले- जल्द खत्म होगी नौसैनिक घेराबंदी

अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ईरान को लेकर अहम रणनीतिक फैसले पर विचार करने के लिए ‘सिचुएशन रूम’ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संकेत दिए कि क्षेत्र में जारी नौसैनिक घेराबंदी जल्द खत्म हो सकती है। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच ईरान को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है, जिसके बाद कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। क्या बोले ट्रंप? ट्रंप ने कहा कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही स्थिति को सामान्य बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समुद्री मार्गों पर जारी तनाव और नौसैनिक गतिविधियों में कमी आ सकती है। क्यों अहम है यह फैसला? मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से तनाव का माहौल बना हुआ है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिला है। ऐसे में अमेरिका की ओर से लिया जाने वाला कोई भी फैसला वैश्विक व्यापार, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
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Twisha Sharma Death Case: भोपाल की रहस्यमयी मौत मामले में नया मोड़, सास गिरिबाला सिंह की CDR सुरक्षित रखने के आदेश

Twisha Sharma Death Case: भोपाल की रहस्यमयी मौत मामले में नया मोड़, सास गिरिबाला सिंह की CDR सुरक्षित रखने के आदेश

भोपाल की Twisha Sharma की रहस्यमयी मौत का मामला पिछले कई दिनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस केस में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और भी उलझता जा रहा है। घटना से पहले और बाद की CCTV फुटेज, पति समर्थ सिंह का फरार होना और बाद में आत्मसमर्पण करना, साथ ही सास गिरिबाला सिंह के बयानों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। अब इस केस में कानूनी प्रक्रिया भी तेज हो गई है। मामले की जांच CBI को सौंपे जाने के बाद पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी बीच मामले की जांच कर रही SIT ने कोर्ट में गिरिबाला सिंह की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को लेकर जवाब पेश किया है। SIT ने बताया कि गिरिबाला सिंह, समर्थ सिंह और ट्विशा शर्मा की 12 मई से 20 मई तक की CDR सुरक्षित रखने के लिए संबंधित मोबाइल कंपनियों को पत्र भेजे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही मोबाइल कंपनियों से डेटा प्राप्त होगा, उसे केस डायरी में शामिल किया जाएगा। जांच एजेंसियों का मानना है कि कॉल रिकॉर्ड से कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती हैं, जिससे केस की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलेगी। बता दें कि ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने कोर्ट में इस संबंध में अर्जी दाखिल की थी। परिवार का आरोप है कि ट्विशा की मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने कई लोगों से बातचीत की थी, जिनमें कुछ प्रभावशाली लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
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Voter List Revision पर Supreme Court का बड़ा फैसला, SIR को बताया वैध;

Voter List Revision पर Supreme Court का बड़ा फैसला, SIR को बताया वैध; 10 राज्यों और 3 UT में 7.41 करोड़ नाम

देश में Voter List Revision को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा प्रक्रिया को अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के तहत मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने का अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से जुड़ा है, दो जगह दर्ज है या वह पात्र नहीं है, तो आयोग उसे हटाने की कार्रवाई कर सकता है। चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए अभियान के दौरान करीब 7.41 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इनमें मृत मतदाता, डुप्लीकेट एंट्री और स्थान बदल चुके लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सवाल भी उठाए हैं। कई नेताओं का कहना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटने से असली मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और जांच के बाद ही की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वोटर लिस्ट का सही और पारदर्शी होना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनती है।
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Pakistan का बयान: इजराइल को देश नहीं मानेंगे, विचारधारा से समझौता नहीं; ट्रंप के बयान के बाद फिर बढ़ी चर्चा

Pakistan का बयान: इजराइल को देश नहीं मानेंगे, विचारधारा से समझौता नहीं; ट्रंप के बयान के बाद फिर बढ़ी चर्चा

Pakistan ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देगा। इस बयान के साथ ही पाकिस्तान ने कहा कि वह अपनी विचारधारा और नीति से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल को लेकर मुस्लिम देशों के रुख पर लगातार चर्चा हो रही है। ट्रंप के बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ संबंध सुधारने की अपील की थी, यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। ट्रंप के बयान के बाद कई देशों की नीतियों और रुख को लेकर बहस तेज हो गई है, लेकिन पाकिस्तान ने अपने पुराने स्टैंड को दोहराया है। पाकिस्तान का सख्त रुख पाकिस्तान के अनुसार, इजराइल को मान्यता देने का सवाल उसकी विदेश नीति और धार्मिक-राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा हुआ है।सरकार का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे पर उसका रुख पहले जैसा ही रहेगा। वैश्विक संदर्भ मध्य पूर्व में लगातार बदलते राजनीतिक हालात के बीच कई मुस्लिम देशों ने इजराइल के साथ रिश्तों में बदलाव किया है, लेकिन पाकिस्तान अब भी अपने पुराने रुख पर कायम है।
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कर्नाटक सियासत: सिद्धारमैया 28 मई को बुलाई कैबिनेट ब्रेकफास्ट मीटिंग, CM पद से इस्तीफे की अटकलें तेज

karnataka सियासत: सिद्धारमैया 28 मई को बुलाई कैबिनेट ब्रेकफास्ट मीटिंग, CM पद से इस्तीफे की अटकलें तेज

karnataka की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई को अपने आवास पर कैबिनेट ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई है, जिसके बाद उनके CM पद से इस्तीफा देने की अटकलें और तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह मीटिंग सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाली अहम मुलाकात मानी जा रही है। ब्रेकफास्ट मीटिंग बनी चर्चा का केंद्र 28 मई को बुलाई गई इस बैठक में पूरे कैबिनेट को आमंत्रित किया गया है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस मीटिंग के जरिए कांग्रेस हाईकमान के निर्देशों और राज्य नेतृत्व को लेकर अंतिम फैसला हो सकता है। हालांकि अभी तक कांग्रेस या मुख्यमंत्री की तरफ से इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस्तीफे की अटकलें क्यों बढ़ीं? पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है।दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं—राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे—के साथ हुई बैठकों के बाद यह अटकलें और मजबूत हो गई हैं कि राज्य में बड़ा बदलाव हो सकता है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का नाम भी नए नेतृत्व को लेकर लगातार सामने आ रहा है। दिल्ली में हुई बैठकों के बाद बढ़ी सस्पेंस हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों के बाद कर्नाटक की सियासत में हलचल बढ़ गई है।सूत्रों का कहना है कि पार्टी राज्य में सत्ता संतुलन और नेतृत्व बदलाव को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है।
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अहमदाबाद प्लेन क्रैश साइट पर फिर बनेगा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्टल, ₹105 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

Ahmedabad प्लेन क्रैश साइट पर फिर बनेगा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्टल, ₹105 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

Ahmedabad में जहां पिछले साल भीषण विमान हादसा हुआ था, उसी हॉस्टल परिसर को अब फिर से नए रूप में बनाया जाएगा। गुजरात सरकार ने यहां सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टर हॉस्टल बनाने का फैसला किया है, जिस पर करीब ₹105 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस नए प्रोजेक्ट के तहत कुल 236 सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। पुरानी इमारत को हादसे में गंभीर नुकसान होने के बाद अब उसे हटाकर आधुनिक सुविधाओं वाला नया हॉस्टल बनाया जाएगा। कैसा होगा नया हॉस्टल? सरकारी जानकारी के मुताबिक नया हॉस्टल बेहद आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इसमें डॉक्टरों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था की जाएगी।परियोजना में हॉस्टल के साथ-साथ कैंटीन और अन्य जरूरी मेडिकल सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जाएगा। खर्च और सहयोग इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹105 करोड़ है।रिपोर्ट्स के अनुसार, इस निर्माण में टाटा ग्रुप की ओर से भी आर्थिक सहयोग दिया जाएगा, क्योंकि एयर इंडिया उसी समूह का हिस्सा है। क्यों लिया गया यह फैसला? 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे में मेडिकल कॉलेज का हॉस्टल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।इसके बाद छात्रों और डॉक्टरों को वहां से हटाना पड़ा और इमारत को असुरक्षित घोषित किया गया।
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America Iran Conflict, Hormuz Strait Attack,

US-Iran Conflict: सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिका का बड़ा हमला, होर्मुज स्ट्रेट में बोट्स और मिसाइल साइट तबाह

मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता के दौरान अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास बड़ी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि ईरान समर्थित तत्व समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा रहे थे, जिसके बाद अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह हमला किया गया। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के नजदीक कई संदिग्ध बोट्स को निशाना बनाया। इसके साथ ही बंदर अब्बास पोर्ट के पास मौजूद सरफेस-टू-एयर मिसाइल साइट पर भी एयरस्ट्राइक की गई। हमले के बाद इलाके में धुएं के बड़े गुबार देखे गए। अमेरिका ने क्या कहा? सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “सेल्फ-डिफेंस” के तहत की गई है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और अमेरिकी नौसेना के जहाजों को खतरा था। हॉकिन्स ने कहा: “हम क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” हालांकि अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी भी सीजफायर वार्ता को जारी रखना चाहता है और हालात को बड़े युद्ध में बदलने से बचना चाहता है। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर सीधे ग्लोबल ऑयल मार्केट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार अब तक ईरान की ओर से इस हमले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तेहरान इस कार्रवाई को “उकसावे वाली सैन्य हरकत” मान सकता है। सूत्रों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देश दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। क्या रुक जाएगी शांति वार्ता? डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हमले से अमेरिका-ईरान वार्ता में अस्थायी रुकावट आ सकती है, लेकिन फिलहाल बातचीत पूरी तरह टूटती नहीं दिख रही। दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वे तनाव को सीमित रखें। यह भी पढ़ें: America-Iran के बीच तनाव कम होने के संकेत, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर बनी सहमति
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गुलमर्ग रोपवे में तकनीकी खराबी, 300 पर्यटकों का 7 घंटे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन: हवा में फंसी 65 ट्रॉली, 500 फीट ऊंचाई पर थे लोग

gulmarg रोपवे में तकनीकी खराबी, 300 पर्यटकों का 7 घंटे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन: हवा में फंसी 65 ट्रॉली, 500 फीट ऊंचाई पर थे लोग

कश्मीर के मशहूर टूरिस्ट स्पॉट gulmarg में रविवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रोपवे (गोंडोला) में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इस दौरान करीब 300 पर्यटक फंस गए और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक: 7 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे के बाद प्रशासन और रेस्क्यू टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।करीब 7 घंटे तक लगातार ऑपरेशन चलाया गया। पर्यटकों में दहशत हवा में फंसे पर्यटकों के बीच डर और तनाव का माहौल था। कई लोग परिवारों के साथ थे और घंटों तक मदद का इंतजार करते रहे। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। शुरुआती कारण क्या हो सकता है? अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में: फिलहाल विस्तृत जांच जारी है। प्रशासन की कार्रवाई
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ट्रंप का Abraham Accords दांव: पाकिस्तान के सामने फिलीस्तीन नीति की बड़ी परीक्षा

ट्रंप का Abraham Accords दांव: पाकिस्तान के सामने फिलीस्तीन नीति की बड़ी परीक्षा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर मिडिल ईस्ट की राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने अब्राहम अकॉर्ड (Abraham Accords) को आगे बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है। इस कदम के तहत कुछ मुस्लिम देशों को इज़राइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन इस पूरी रणनीति के बीच सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान के सामने खड़ा हो गया है—क्या वह फिलीस्तीन के समर्थन वाले अपने पुराने रुख को बदल पाएगा? क्या है अब्राहम अकॉर्ड? अब्राहम अकॉर्ड 2020 में शुरू हुआ एक कूटनीतिक समझौता है, जिसके तहत कुछ अरब देशों ने इज़राइल के साथ आधिकारिक संबंध स्थापित किए थे। इसमें यूएई, बहरीन और मोरक्को जैसे देश शामिल हैं। अब ट्रंप चाहते हैं कि इस समझौते को और आगे बढ़ाया जाए और ज्यादा मुस्लिम देशों को इसमें जोड़ा जाए। पाकिस्तान पर क्यों बढ़ा दबाव? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की योजना में पाकिस्तान जैसे देशों को भी इज़राइल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान के लिए यह फैसला आसान नहीं है। 🇵🇰 पाकिस्तान का पुराना स्टैंड सबसे बड़ी चुनौती: फिलीस्तीन का मुद्दा पाकिस्तान में इज़राइल को लेकर सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक विरोध भी है। पाकिस्तान के सामने दुविधा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक कठिन स्थिति में फंसा है: फिलीस्तीन के हक का सवाल पाकिस्तान का रुख अभी भी स्पष्ट है—वह मानता है कि पहले फिलीस्तीन को एक स्वतंत्र देश का दर्जा मिलना चाहिए, उसके बाद ही किसी भी तरह के इज़राइल से संबंधों पर विचार किया जा सकता है।
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डिफेंस सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, लॉन्च हुआ 300 KM रेंज वाला ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट सिस्टम

डिफेंस सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, लॉन्च हुआ 300 KM रेंज वाला ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट सिस्टम

भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। महाराष्ट्र के शिर्डी में देश का पहला 300 KM रेंज वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ लॉन्च किया गया। इस खास मौके पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh भी मौजूद रहे। ‘सूर्यास्त्र’ को भारत की रक्षा क्षमता के लिए बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। यह लंबी दूरी तक बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सिस्टम के जरिए 150 से 300 किलोमीटर तक लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है। इस रॉकेट सिस्टम को शिर्डी स्थित NIBE Group के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स में लॉन्च किया गया। यहां मिसाइल, रॉकेट सिस्टम, आर्टिलरी और आधुनिक ड्रोन तकनीक से जुड़े उपकरण तैयार किए जाएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जो देश अपने हथियार खुद बनाता है, वही अपना भविष्य खुद तय करता है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातकों में शामिल हो सकता है। हाल ही में ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज में ‘सूर्यास्त्र’ का सफल परीक्षण भी किया गया था। बताया जा रहा है कि यह सिस्टम बेहद कम समय में कई रॉकेट दागने की क्षमता रखता है और आधुनिक युद्ध रणनीति में भारतीय सेना को बड़ी मजबूती देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्वदेशी तकनीक भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश में रक्षा उत्पादन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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