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61 साल की महिला Narinder Kaur ने 10वीं में 77% अंक हासिल किए, दो पोतों की दादी ने बढ़ाया परिवार का मान

61 साल की महिला Narinder Kaur ने 10वीं में 77% अंक हासिल किए, दो पोतों की दादी ने बढ़ाया परिवार का मान

हरियाणा से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां 61 साल की उम्र में एक महिला Narinder Kaur ने 10वीं की परीक्षा पास कर सभी को हैरान कर दिया। इस उम्र में पढ़ाई करना और अच्छे अंक लाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उम्र को मात देकर हासिल की सफलता Narinder Kaur ने साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। वे दो पोतों की दादी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई को जारी रखा और 10वीं की परीक्षा में 77 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनकी इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है और गांव में भी लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। परिवार और समाज के लिए प्रेरणा नरिंदर कौर का कहना है कि अगर मन में कुछ करने की इच्छा हो तो उम्र कभी रुकावट नहीं बनती। उन्होंने यह भी बताया कि घर की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए एक प्रेरणा बन गई है। लोगों ने दी बधाइयां उनकी इस सफलता के बाद सोशल मीडिया और आसपास के लोग उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो किसी भी उम्र में पढ़ाई या नए लक्ष्य शुरू करना चाहते हैं।
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CM बनते ही Vijay का बड़ा एक्शन, कमल हासन ने जताई खुशी, रजनीकांत ने साधी चुप्पी

CM बनते ही Vijay का बड़ा एक्शन, कमल हासन ने जताई खुशी, रजनीकांत ने साधी चुप्पी

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति Vijay को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक अहम और बड़ा फैसला लिया है, जिस पर पूरे तमिलनाडु में चर्चा तेज हो गई है। इस बीच कमल हासन ने इसे गर्व का पल बताया है, जबकि रजनीकांत की तरफ से अभी कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही विजय ने CM पद संभाला, उन्होंने प्रशासनिक और जनता से जुड़े कुछ बड़े बदलावों की दिशा में कदम उठाए। उनके इस एक्शन को समर्थक “नया और मजबूत नेतृत्व” बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, इस घटनाक्रम पर राजनीतिक और फिल्मी दुनिया दोनों की नजर बनी हुई है। कमल हासन ने जताई खुशी Kamal Haasan ने इस मौके पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह तमिल समाज और सिनेमा जगत दोनों के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने विजय को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं भी दीं। रजनीकांत की चुप्पी बनी चर्चा का विषय Rajinikanth की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उनकी चुप्पी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। विजय के फैसले पर लोगों की नजर Vijay के इस कदम को उनके फैंस बड़े बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि आने वाले समय में उनके फैसले राज्य की राजनीति और प्रशासन पर असर डाल सकते हैं
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अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन,

Breaking News: अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का निधन, लखनऊ में ली अंतिम सांस

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में लखनऊ में निधन। जानिए पूरी खबर, परिवार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के परिवार से जुड़ी एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और भाजपा नेता Aparna Bisht Yadav के पति प्रतीक यादव का बुधवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी और उनका इलाज लखनऊ के अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक प्रतीक यादव की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार और राजनीतिक गलियारों में इस खबर के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के पुत्र थे। हालांकि उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी और बिजनेस व फिटनेस सेक्टर में अपनी पहचान बनाई थी। वे लखनऊ में फिटनेस और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए थे। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में उनकी तबीयत लगातार खराब थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Akhilesh Yadav भी अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लेने गए थे। राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। समाजवादी पार्टी की ओर से भी आधिकारिक बयान जारी कर श्रद्धांजलि दी गई।
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उदयनिधि

Tamil Nadu Politics में भूचाल: सनातन पर बयान के बाद उदयनिधि फिर सुर्खियों में

तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर बड़े विवाद में आ गई है। चुनावी नतीजों के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में DMK नेता और मंत्री उदयनिधि (Udhayanidhi Stalin)के कथित बयान ने पूरे देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। क्या कहा गया बयान में? रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंच से उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि “सनातन को खत्म किया जाना चाहिए।” यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और अलग-अलग वर्गों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। विपक्ष का हमला और राजनीतिक प्रतिक्रिया इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक भावनाओं पर चोट बताते हुए कड़ी आलोचना की है। कई नेताओं का कहना है कि इस तरह की भाषा समाज में विभाजन पैदा कर सकती है और राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना सकती है। DMK की चुप्पी और बढ़ता विवाद अब तक DMK की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है। इसी वजह से मामला और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर बवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है। कुछ लोग इसे विचारधारा का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कई इसे भड़काऊ बयान करार दे रहे हैं। हर तरफ इस पर बहस का माहौल बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET UG

NEET UG 2026 Update: Paper Leak की आशंका से देशभर में हंगामा, NTA पर सवाल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। पेपर लीक की आशंका ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक हर जगह एक ही सवाल चर्चा में है — क्या NEET UG 2026 दोबारा कराया जाएगा? राजस्थान से शुरू हुई जांच अब कई राज्यों तक पहुंच चुकी है। वहीं, छात्रों के बीच गुस्सा और डर दोनों देखने को मिल रहा है। महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। वायरल “Guess Paper” से बढ़ा विवाद दरअसल, परीक्षा के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया और कुछ टेलीग्राम ग्रुप्स पर एक कथित “Guess Paper” वायरल हुआ। दावा किया गया कि इसमें मौजूद कई सवाल असली NEET UG 2026 पेपर से मेल खाते हैं। शुरुआती जांच में 100 से ज्यादा प्रश्न समान होने की बात सामने आई है। यही नहीं, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि लगभग 600 अंकों तक के सवाल मिलते-जुलते पाए गए। इसके बाद पेपर लीक की आशंका और गहरी हो गई। राजस्थान SOG की जांच में कई संदिग्ध हिरासत में मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जांच शुरू कर दी है। अब तक 20 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ कोचिंग कनेक्शन और ऑनलाइन ग्रुप्स भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े आरोपी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। NEET UG 2026 रद्द होगा या नहीं? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या परीक्षा रद्द होगी? फिलहाल National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 को रद्द करने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। NTA का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। लेकिन छात्रों और अभिभावकों के बीच असमंजस लगातार बढ़ रहा है। कई छात्र सोशल Media पर दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे मेहनती छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। CBI जांच की मांग तेज विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मामले की CBI जांच की मांग तेज कर दी है। कई नेताओं ने कहा कि अगर पेपर लीक साबित होता है तो यह देश की परीक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल होगा। पिछले साल NEET विवाद के बाद सरकार पहले ही आलोचनाओं का सामना कर चुकी है। ऐसे में इस बार एजेंसियों पर निष्पक्ष और तेज जांच का दबाव बढ़ गया है। छात्रों की मेहनत और मानसिक दबाव NEET जैसी परीक्षा के लिए छात्र सालों तक मेहनत करते हैं। कई अभ्यर्थी रोज 10-12 घंटे पढ़ाई कर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का सपना देखते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी खबरें छात्रों का मनोबल तोड़ देती हैं। भोपाल की एक छात्रा ने कहा, “हमने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी, लेकिन अब लग रहा है कि मेहनत का कोई मतलब ही नहीं बचा।” आगे क्या? फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है। आने वाले दिनों में SOG, NTA और केंद्र सरकार की रिपोर्ट के बाद बड़ा फैसला लिया जा सकता है। अगर जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है, तो NEET UG 2026 को लेकर कड़ा कदम उठाया जा सकता है। देशभर के लाखों छात्रों की नजर अब जांच एजेंसियों और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Himanta Biswa

Assam CM Oath Ceremony 2026: Himanta Biswa Sarma ने फिर संभाली सत्ता, PM Modi भी रहे मौजूद

असम की राजनीति में एक बार फिर NDA ने अपनी ताकत दिखा दी है। राजधानी गुवाहाटी में हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi भी मंच पर मौजूद रहे। उनके साथ कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और NDA गठबंधन के बड़े नेता समारोह में शामिल हुए। गुवाहाटी में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। भाजपा समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ जीत का जश्न मनाया। कई जगहों पर लोगों ने इसे “नए असम की शुरुआत” बताया। Himanta Sarma पर फिर जताया भरोसा Himanta Biswa Sarma को पूर्वोत्तर में भाजपा का मजबूत चेहरा माना जाता है। पिछले कार्यकाल में उनकी सरकार ने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और निवेश जैसे मुद्दों पर तेजी से काम किया। यही वजह रही कि जनता ने एक बार फिर NDA को सत्ता की कमान सौंप दी। शपथ लेने के बाद हिमंता सरमा ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के विकास, युवाओं के रोजगार और कानून व्यवस्था को और मजबूत करने पर फोकस करेगी। उन्होंने जनता का आभार जताते हुए कहा कि “असम को देश के सबसे तेज़ी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में शामिल करना हमारी प्राथमिकता होगी।” PM Modi ने कहा- पूर्वोत्तर भारत का सुनहरा समय समारोह में मौजूद Narendra Modi ने असम की नई सरकार को बधाई देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने विकास की नई रफ्तार देखी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर अब देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार असम में इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, पर्यटन और उद्योग से जुड़ी परियोजनाओं को और तेजी से आगे बढ़ाएगी। नई सरकार के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां? हालांकि NDA की वापसी के बाद अब सरकार के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां भी होंगी। हर साल आने वाली बाढ़, युवाओं के लिए रोजगार, निवेश बढ़ाना और सीमावर्ती इलाकों में विकास जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकता में रहेंगे। इसके अलावा राज्य में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं की भी उम्मीद की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमंता सरकार का दूसरा कार्यकाल विकास और प्रशासनिक फैसलों के लिहाज से काफी अहम साबित हो सकता है। विपक्ष ने भी दी प्रतिक्रिया शपथ ग्रहण के बाद विपक्षी दलों ने नई सरकार को शुभकामनाएं दीं, लेकिन साथ ही जनता से किए गए वादों को पूरा करने की याद भी दिलाई। विपक्ष का कहना है कि आने वाले समय में महंगाई, रोजगार और स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। पूर्वोत्तर में BJP की मजबूत पकड़ असम में लगातार दूसरी बार सरकार बनाना भाजपा और NDA के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। इससे साफ है कि पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक असम की यह जीत आने वाले समय में पूर्वोत्तर की राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ममता के ‘मोहरों’ पर चली अधिकारी की कलम, Suvendu सरकार के 10 बड़े फैसले

ममता के ‘मोहरों’ पर चली अधिकारी की कलम, Suvendu सरकार के 10 बड़े फैसले

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कई अहम फैसले लेकर पूर्व सरकार की नीतियों पर सीधा असर डाल दिया है। इन फैसलों को लेकर राज्य की सियासत में गर्मी बढ़ गई है, क्योंकि इन्हें ममता बनर्जी सरकार के कई पुराने फैसलों के उलट माना जा रहा है। पहली ही बैठक में लिए गए इन निर्णयों को सरकार ने “डबल इंजन विकास” और प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया है। शुभेंदु सरकार के प्रमुख फैसले BSF को जमीन ट्रांसफर का फैसला भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को जमीन देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसे 45 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीमा सुरक्षा पर फोकस घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेज़ी से काम करने का निर्देश दिया गया। Ayushman Bharat योजना लागू राज्य में केंद्र की स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई। राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं में बदलाव पहले से चल रही राज्य स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा और समायोजन की बात कही गई। जनगणना प्रक्रिया को मंजूरी राज्य में Census प्रक्रिया को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया गया। प्रशासनिक सुधार पर जोर सरकारी कामकाज में तेजी और पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए गए। केंद्र-राज्य सहयोग बढ़ाने पर फोकस केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में तेजी से लागू करने की रणनीति बनाई गई। विकास योजनाओं में तेजी अटकी हुई विकास परियोजनाओं को दोबारा गति देने की योजना तैयार की गई। पोर्टफोलियो बंटवारा पहले चरण में मंत्रियों को विभाग सौंपे गए, जिसमें ग्रामीण विकास, महिला कल्याण और जनजातीय विकास जैसे विभाग शामिल हैं। कैबिनेट विस्तार का संकेत सरकार ने संकेत दिया है कि आगे और मंत्रियों को शामिल किया जाएगा।
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PM Modi on Oil Crisis, Work From Home India,

Gulf War Oil Crisis: PM मोदी की देशवासियों से बड़ी अपील, बोले- पेट्रोल-डीजल बचाइए”

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच बढ़ती तेल कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आने वाले आर्थिक दबाव से बचाने के लिए अब पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल “बहुत संयम” के साथ करना होगा। हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने लोगों से कहा कि जहां संभव हो वहां Work From Home (WFH) अपनाया जाए, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाया जाए और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स को भी फिर से प्राथमिकता देने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक हालात के कारण भारत पर विदेशी मुद्रा का दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। ऐसे में हर लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत देश की अर्थव्यवस्था को राहत दे सकती है। विदेशी यात्रा और गोल्ड खरीदने पर भी सलाह पीएम मोदी ने लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी विदेशी यात्राएं टालने और शादी-ब्याह में सोने की खरीद कम करने की भी अपील की। उनका कहना था कि मौजूदा वैश्विक संकट में देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। क्या फिर लौटेगा कोविड वाला WFH कल्चर? प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोशल मीडिया और कॉर्पोरेट सेक्टर में फिर से Work From Home को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एशिया के कई देश बढ़ती तेल कीमतों के बीच कोविड काल जैसी रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से किसी तरह के लॉकडाउन या अनिवार्य WFH को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं इस बीच भारतीय तेल कंपनियों ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है। कंपनियों ने अफवाहों से बचने की अपील की है।
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Historic Bengal: सुवेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के पहले BJP मुख्यमंत्री, शपथ के बाद PM मोदी के छुए पैर

पश्चिम बंगाल में इतिहास रचते हुए सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले BJP मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ समारोह में PM मोदी, अमित शाह और NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। Historic Bengal: सुवेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, बंगाल में पहली बार BJP सरकार कोलकाता में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा अध्याय लिखा गया, जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ लेकर समारोह को भावनात्मक और ऐतिहासिक बना दिया। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे समारोह का केंद्र बना दिया। सुवेंदु अधिकारी मंच से उतरकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुंचे और उनके पैर छुए। प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। इस दृश्य पर कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा। 4 मंत्रियों ने भी ली शपथ सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा के चार वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, निषिथ प्रमाणिक और अशोक शामिल रहे। माना जा रहा है कि नई सरकार बंगाल में संगठन और प्रशासन दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी में है। समारोह में दिखा शक्ति प्रदर्शन कोलकाता में आयोजित इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, NDA सहयोगी दलों के नेता और भाजपा शासित राज्यों के लगभग 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। समारोह पूरी तरह शक्ति प्रदर्शन में बदल गया, जहां भाजपा ने बंगाल में अपनी ऐतिहासिक जीत का संदेश पूरे देश को देने की कोशिश की। टैगोर को श्रद्धांजलि समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच पर टैगोर की तस्वीर के सामने प्रधानमंत्री कुछ क्षण रुके और नमन किया। भाजपा नेताओं ने इसे बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने वाला संदेश बताया। 98 वर्षीय कार्यकर्ता का सम्मान बना सबसे भावुक पल कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के 98 वर्षीय कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। मंच पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री सीधे उनके पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाई और फिर उनके पैर छुए। यह दृश्य देखकर पूरा सभागार भावुक हो गया। माखनलाल सरकार ने प्रधानमंत्री को गले लगाया और कुछ देर तक दोनों मंच पर साथ खड़े रहे। भाजपा नेताओं ने इसे “कार्यकर्ता सम्मान” की सबसे बड़ी मिसाल बताया। बंगाल की राजनीति में नया दौर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के साथ राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है। लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन ने बंगाल की राजनीतिक दिशा बदल दी है। अब सबकी नजर नई सरकार के पहले फैसलों और प्रशासनिक रणनीति पर रहेगी।
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MP में 25-26 May को काम नहीं करेंगे बैंककर्मी:एसबीआई कर्मचारियों की हड़ताल; बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा असर

MP में 25-26 May को काम नहीं करेंगे बैंककर्मी:एसबीआई कर्मचारियों की हड़ताल; बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा असर

मध्य प्रदेश में 25 और 26 May को बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है। State Bank of India समेत कई बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। हड़ताल के कारण नकदी जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और शाखाओं के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित कई शहरों में इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन कुछ जगहों पर एटीएम में कैश की कमी हो सकती है। बैंक यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर यह हड़ताल की जा रही है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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