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Harish Rana

Harish Rana Euthanasia SC का ऐतिहासिक फैसला, लाइफ सपोर्ट हटाने की मिली अनुमति

भारत में इच्छामृत्यु (Euthanasia) को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। Supreme Court ने 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा के मामले में Passive Euthanasia की अनुमति दे दी है। यह फैसला न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर देने वाला है। फैसला सुनाते समय अदालत का माहौल भावुक हो गया और जस्टिस पारदीवाला की आवाज भी भर आई। लंबे समय से अपने बेटे को बेहोशी की हालत में देख रहे परिवार के लिए यह फैसला राहत और दर्द दोनों लेकर आया। 13 साल पहले हुई थी दर्दनाक दुर्घटना हरीश राणा साल 2013 में एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए थे। चंडीगढ़ में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गहरी चोट लगी थी। इसके बाद से वह Permanent Vegetative State में चले गए। डॉक्टरों के मुताबिक, वह पिछले 13 साल से न तो होश में आए और न ही अपने आसपास की किसी चीज़ पर प्रतिक्रिया दे पाए। उनका पूरा जीवन अस्पताल के बिस्तर, मशीनों और ट्यूब से दिए जाने वाले भोजन पर निर्भर हो गया था। पिता ने बेटे के लिए मांगी थी ‘सम्मानजनक मृत्यु’ समय के साथ परिवार के लिए यह स्थिति बेहद कठिन होती चली गई। हरीश राणा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उनका बेटा वर्षों से सिर्फ मशीनों के सहारे जीवित है और उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उनके बेटे को “Right to Die with Dignity” यानी सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार दिया जाए। परिवार का कहना था कि लगातार पीड़ा की स्थिति में उसे कृत्रिम रूप से जीवित रखना उचित नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट ने साफ की स्थिति मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखी। रिपोर्ट में कहा गया कि हरीश राणा की हालत में सुधार की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है। डॉक्टरों की राय थी कि वह लंबे समय से स्थायी वेजिटेटिव अवस्था में हैं और सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद नहीं के बराबर है। सुप्रीम कोर्ट ने दी Passive Euthanasia की अनुमति जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने हरीश राणा के लाइफ-सपोर्ट सिस्टम को हटाने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक कृत्रिम जीवन में बनाए रखना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। फैसला सुनाते वक्त भावुक हुए जज फैसला सुनाते समय अदालत में एक भावुक क्षण भी देखने को मिला। जस्टिस पारदीवाला निर्णय पढ़ते हुए कुछ पल के लिए रुक गए और उनकी आवाज भर आई। उन्होंने कहा कि यह अदालत के लिए आसान फैसला नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति को अनंत पीड़ा में बनाए रखना भी सही नहीं हो सकता। क्या होती है Passive Euthanasia Passive Euthanasia का मतलब है कि मरीज को जानबूझकर कोई घातक दवा नहीं दी जाती। इसके बजाय जीवन बनाए रखने वाले उपकरण या इलाज को धीरे-धीरे हटा दिया जाता है ताकि मृत्यु प्राकृतिक रूप से हो सके। भारत में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में Right to Die with Dignity को मान्यता दी थी और कुछ शर्तों के साथ Passive Euthanasia को कानूनी माना था। क्यों महत्वपूर्ण है हरीश राणा केस हरीश राणा का मामला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह उन मामलों में से एक है जहां सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद किसी व्यक्ति के लिए Passive Euthanasia की अनुमति दी है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है, जहां मरीज लंबे समय तक कोमा में हो और उसके ठीक होने की कोई संभावना न बची हो। हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक कानूनी केस नहीं है। यह एक परिवार की लंबी पीड़ा, उम्मीद और अंततः एक कठिन लेकिन मानवीय फैसले की कहानी भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IndiGo CEO पीटर एलबर्स का इस्तीफा, राहुल भाटिया ने संभाली कमान

IndiGo CEO पीटर एलबर्स का इस्तीफा, राहुल भाटिया ने संभाली कमान

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी IndiGo के CEO Pieter Elbers ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद कंपनी की कमान अब Rahul Bhatia को सौंपी गई है। कंपनी की ओर से बताया गया है कि यह फैसला प्रबंधन स्तर पर बदलाव के तहत लिया गया है। पीटर एलबर्स के कार्यकाल में IndiGo ने कई नए अंतरराष्ट्रीय रूट शुरू किए और अपने नेटवर्क का विस्तार किया। अब राहुल भाटिया के नेतृत्व में कंपनी से उम्मीद की जा रही है कि वह भारतीय एविएशन बाजार में अपनी मजबूत स्थिति को और आगे बढ़ाएगी। ईरान की 7 महिला खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया में मिली शरण दूसरी बड़ी खबर अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से आई है। Iran की 7 महिला खिलाड़ियों को Australia ने शरण दे दी है। बताया जा रहा है कि इन खिलाड़ियों ने अपने देश में सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा की चिंता जताई थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने मानवीय आधार पर उन्हें शरण देने का फैसला लिया। इस कदम को महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय में भी इस फैसले की चर्चा हो रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कई राज्यों में Commercial LPG Cylinder की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

कई राज्यों में Commercial LPG Cylinder की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

देश के कई राज्यों में इन दिनों Commercial LPG Cylinder की सप्लाई अचानक रुक गई है। इससे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट चलाने वालों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई जगहों पर कारोबारियों का कहना है कि उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही, जिससे खाना बनाना मुश्किल हो गया है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने Essential Commodity Act (आवश्यक वस्तु अधिनियम) लागू कर दिया है। इसका मकसद गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक गैस सिलेंडर की सप्लाई सही तरीके से पहुंच सके। होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की बढ़ी चिंता गैस की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट चला रहे लोगों को हो रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो उन्हें अपना कारोबार कुछ समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। एक रेस्टोरेंट संचालक ने कहा,“हमारा पूरा काम गैस पर ही चलता है। अगर सिलेंडर नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनेगा? ऐसे में दुकान बंद करने की नौबत आ सकती है।” सरकार की सख्ती सरकार का कहना है कि गैस की कमी को लेकर शिकायतें मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। Essential Commodity Act लागू होने के बाद अब प्रशासन जमाखोरी करने वालों और ज्यादा कीमत पर गैस बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा। आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर अगर कॉमर्शियल गैस की समस्या जल्दी हल नहीं हुई तो इसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। होटल-रेस्टोरेंट बंद होने से लोगों को बाहर खाने-पीने की सुविधा कम हो सकती है और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kejriwal

दिल्ली शराब घोटाला केस में नया मोड़ Kejriwal-Sisodia समेत 23 आरोपियों को High Court नोटिस

दिल्ली की चर्चित शराब नीति (Excise Policy) मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। Delhi High Court ने इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia और अन्य आरोपियों सहित कुल 23 लोगों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन सभी से जांच एजेंसी की अपील पर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह मामला दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और अब एक बार फिर अदालत में इसकी सुनवाई से राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। कैसे फिर से अदालत पहुंचा Delhi Liquor Policy Case दरअसल, इस मामले में पहले दिल्ली की Rouse Avenue Court ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज (आरोपों से मुक्त) किया जाता है। लेकिन जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी। एजेंसी का मानना है कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। इसी वजह से CBI ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। High Court की सुनवाई में क्या हुआ CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ अहम कदम उठाए: अब अदालत अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का फैसला करेगी। क्या है पूरा Delhi Excise Policy Controversy यह विवाद दिल्ली सरकार की 2021-22 की नई शराब नीति से जुड़ा है। उस समय सरकार ने शराब की बिक्री से जुड़े नियमों में कई बदलाव किए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि: इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation के साथ-साथ Enforcement Directorate (ED) भी कर रही है। क्यों अहम है यह मामला दिल्ली की राजनीति में यह केस सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा भी बन चुका है। पिछले कुछ सालों में इस मामले को लेकर कई बार गिरफ्तारी, पूछताछ और अदालत में सुनवाई हुई है। अब जब हाई कोर्ट ने दोबारा नोटिस जारी किया है, तो यह साफ है कि मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले समय में अदालत का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN युद्ध को लेकर संसद में हंगामा, लोकसभा में शोर-शराबा, जयशंकर बोले– भारतीयों को पहले ही किया था अलर्ट

IRAN युद्ध को लेकर संसद में हंगामा, लोकसभा में शोर-शराबा, जयशंकर बोले– भारतीयों को पहले ही किया था अलर्ट

IRAN में चल रहे युद्ध और उससे भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इस संघर्ष का असर भारतीयों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को साफ स्थिति बतानी चाहिए। इसी मांग को लेकर सदन में काफी शोर-शराबा हुआ। वहीं राज्यसभा में भी यही मुद्दा उठा। विपक्ष ने चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर संसद को भरोसे में लेना चाहिए। इस बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार पहले से ही सतर्क है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को जनवरी महीने में ही संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया था। जयशंकर ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए भी सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। गौरतलब है कि ईरान में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण पूरे गल्फ क्षेत्र में चिंता का माहौल है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, इसलिए भारत सरकार भी इस मामले को गंभीरता से देख रही है। सरकार का कहना है कि भारतीय दूतावासों के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LPG

Gas Price ईरान तनाव का असर, घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा

भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की वृद्धि कर दी है। वहीं 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 115 रुपये का इजाफा किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है। Middle East tension का असर भारत तक मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़े संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल और गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह का संकट सीधे भारत के ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। सरकार ने LPG production बढ़ाने के दिए निर्देश संभावित गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों को पेट्रोकेमिकल उद्योग की बजाय घरेलू LPG उत्पादन में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित न हो और आम लोगों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। आम परिवारों के बजट पर असर LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर असर पड़ना तय है। कई घरों में पहले से ही महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है, ऐसे में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है। हालांकि सरकार का कहना है कि वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाने और घरेलू उत्पादन मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में गैस की उपलब्धता बनी रहे। आगे क्या हो सकता है ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो LPG के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार पर सभी की नजर बनी रहेगी। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट के हालात ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Rahim

पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में Ram Rahim बरी, High Court ने रद्द की उम्रकैद

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह (Ram Rahim)को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ी कानूनी राहत मिली है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया है। करीब सात साल पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हालांकि इस मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखी गई है। 2002 का बहुचर्चित मामला यह मामला साल 2002 का है, जब हरियाणा के सिरसा में स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर गोलीबारी की गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई थी। छत्रपति अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादित मुद्दों और आरोपों पर लगातार खबरें प्रकाशित कर रहे थे। उस समय यह घटना पूरे क्षेत्र में सनसनी का कारण बनी थी। CBI जांच के बाद हुई थी उम्रकैद मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। लंबी जांच और अदालती सुनवाई के बाद साल 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह को हत्या की साजिश का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही तीन अन्य आरोपियों को भी सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने क्यों दिया राहत Ram Rahim ने निचली अदालत के फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सबूतों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखना उचित नहीं है। हालांकि बाकी तीन दोषियों के खिलाफ सजा को कायम रखा गया है। जेल में ही रहेंगे राम रहीम हालांकि इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएंगे। वे साध्वियों के यौन शोषण से जुड़े एक अन्य मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं। इसलिए कानूनी तौर पर उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है। देशभर में फिर चर्चा में आया मामला हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड चर्चा में आ गया है। लगभग दो दशक पुराने इस मामले का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal

Nepal Election KP Sharma Oli पीछे, Balen Shah 6000 वोटों से आगे, नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव

Nepal की राजनीति में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आम चुनावों की मतगणना के शुरुआती रुझानों में पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli अपनी सीट पर पीछे चल रहे हैं, जबकि काठमांडू के पूर्व मेयर Balendra Shah ने मजबूत बढ़त बना ली है। प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक बालेन शाह करीब 6000 वोटों से आगे चल रहे हैं। यह रुझान Nepal की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है। झापा सीट पर कड़ा मुकाबला चुनाव परिणामों की गिनती के दौरान सामने आए रुझानों में देखा गया कि झापा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे केपी शर्मा ओली को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, बालेन शाह को युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। शुरुआती मतगणना में शाह को लगभग 10 हजार से अधिक वोट मिले हैं, जबकि ओली लगभग 4 हजार वोटों के आसपास बताए जा रहे हैं। RSP पार्टी को भी मिल रही बढ़त बालेन शाह से जुड़ी पार्टी Rastriya Swatantra Party (RSP) भी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करती नजर आ रही है। शुरुआती रुझानों के अनुसार पार्टी करीब 47 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम नेपाल में पारंपरिक राजनीति के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को भी दिखाता है। नेपाल की संसद में कितनी सीटें? Nepal की संसद में कुल 275 सीटें हैं। इनमें सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत का आंकड़ा पार करना जरूरी होता है। युवाओं का बदलता रुख इस चुनाव में एक दिलचस्प बात यह भी है कि बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है। यही वजह है कि नए चेहरे और अपेक्षाकृत नई पार्टियों को लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है। यदि शुरुआती रुझान अंतिम नतीजों में भी कायम रहते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India को रूस से तेल खरीदने की मिली राहत: अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दी छूट

India को रूस से तेल खरीदने की मिली राहत: अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दी छूट

India के लिए राहत भरी खबर है। रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत को अस्थायी छूट दे दी है। यह छूट 3 अप्रैल तक के लिए दी गई है। माना जा रहा है कि इससे फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा। दरअसल, ईरान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने की सीमित अनुमति दी है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। भारत भी इस छूट का फायदा उठा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस से तेल की सप्लाई जारी रहती है तो भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम रहेगी। इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, यह छूट फिलहाल 3 अप्रैल तक ही है। इसके बाद अमेरिका क्या फैसला लेता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अगर आगे भी छूट मिलती रही तो भारत के लिए तेल की आपूर्ति और कीमतों के मामले में स्थिति स्थिर रह सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khamenei

India’s Tribute to Khamenei भारत ने दूतावास में जताई संवेदना और शोक

भारत (India) ने ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के निधन पर पहली बार आधिकारिक तौर पर शोक (condolence) व्यक्त किया है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री (Foreign Secretary Vikram Misri) नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास (Iran Embassy) पहुंचे और वहां शोक पुस्तिका (Condolence Book) पर हस्ताक्षर कर भारत सरकार की संवेदना और सम्मान व्यक्त किया। यह कदम भारत की कूटनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश सचिव मिस्री ने दूतावास में ईरानी राजदूत से मुलाकात भी की और भारत सरकार की ओर से दिवंगत नेता के प्रति श्रद्धा अर्पित की। यह कदम न केवल औपचारिक शोक है, बल्कि वर्तमान तनावपूर्ण मध्य पूर्व (Middle East) हालात में एक सकारात्मक कूटनीतिक संदेश (Diplomatic Message) भी माना जा रहा है। क्या हुआ था – पृष्ठभूमि (Background of the Incident) अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को संयुक्त अमेरिका और इज़राइल (USA-Israel) के हवाई हमलों में हुआ था। ईरानी अधिकारियों ने इसे “शहादत” बताया। उनके निधन ने ईरान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल पैदा की है। ईरान दूतावास में शोक पुस्तिका (Condolence Book at Iran Embassy) ईरान के नई दिल्ली स्थित दूतावास में शोक पुस्तिका को 5, 6 और 9 मार्च को जनता और कूटनीतिक समुदाय के लिए खोला गया। इसमें देश के राजनीतिक प्रतिनिधि, दूतावास कर्मचारी और आम नागरिक अपनी संवेदनाएँ दर्ज कर सकते हैं। इससे पहले कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया है और मध्य पूर्व में शांति की आवश्यकता पर जोर दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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