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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीमार सास-ससुर को छोड़ने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता, तलाक बरकरार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद और तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा कि शादी के बाद भले ही नया परिवार बनता है, लेकिन इससे बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के प्रति संतान की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस और उचित वजह के बीमार सास-ससुर को छोड़कर अलग रहने के लिए पति पर लगातार दबाव बनाती है, तो ऐसा व्यवहार पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट से मिले तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। शादी के एक साल बाद शुरू हुआ विवाद मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी एक सिख युवक और पत्थलगांव निवासी महिला से जुड़ा है। दोनों की शादी 8 मार्च 2007 को हुई थी। पति के मुताबिक शादी के करीब एक साल बाद से ही दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया था। पति ने बताया कि उसके पिता गंभीर हृदय रोग से पीड़ित हैं और उनकी तीन बार हार्ट सर्जरी हो चुकी है। इसके बावजूद पत्नी लगातार उन पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाती रही। बच्चे को लेकर मायके चली जाती थी पत्नी पति का आरोप था कि उसके मना करने पर पत्नी सास-ससुर से दुर्व्यवहार करती थी और कई बार बिना बताए छोटे बेटे को लेकर मायके चली जाती थी। वर्ष 2018 में दोनों परिवारों के रिश्तेदारों के बीच सामाजिक स्तर पर समझौता कराने की कोशिश हुई। इस दौरान पत्नी ने लिखित माफीनामा भी दिया था। हालांकि, पति के अनुसार इसके बाद भी विवाद और व्यवहार में कोई खास बदलाव नहीं आया। फैमिली कोर्ट ने दिया था तलाक का आदेश लगातार विवाद से परेशान पति ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने 11 नवंबर 2024 को मानसिक क्रूरता के आधार पर पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। पत्नी ने लगाए थे 50 लाख रुपए मांगने के आरोप हाईकोर्ट में पत्नी ने आरोप लगाया कि सास के उकसाने पर पति उसे प्रताड़ित करता था। उसने यह भी दावा किया कि पेट्रोल पंप खोलने के लिए उसके मायके से 50 लाख रुपए की मांग की गई थी। पत्नी ने माफीनामे को लेकर भी आरोप लगाया कि उस पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। हाईकोर्ट ने आरोपों को बताया निराधार हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों और बयानों की जांच की। कोर्ट ने पत्नी के आरोपों को साबित करने वाला पर्याप्त आधार नहीं पाया। मामले में पत्नी के भाई और मामा ने भी गवाही दी और स्वीकार किया कि उन्होंने माफीनामा बिना किसी दबाव के पढ़ने के बाद हस्ताक्षर किया था। माता-पिता की देखभाल करना संतान की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा और उनका भरण-पोषण करना संतान का दायित्व है। शादी के बाद यह जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। कोर्ट ने माना कि पति का अपने गंभीर रूप से बीमार पिता की देखभाल के लिए माता-पिता से अलग रहने से इनकार करना स्वाभाविक और उचित था। वहीं, पत्नी द्वारा बिना उचित कारण लगातार अलग रहने का दबाव बनाना पति के लिए मानसिक प्रताड़ना और मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।
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रेलवे टिकट दलाल गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार; 3.68 लाख के 60 टिकटों का खुलासा

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में आरपीएफ ने अंतर्राज्यीय रेलवे टिकट दलाल गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के मोबाइल से करीब 3.68 लाख रुपये कीमत के 60 रेलवे आरक्षित टिकटों से जुड़ी जानकारी मिली है। मामले में आरपीएफ ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरपीएफ निरीक्षक अंबिकापुर सुनीता मिंज की जांच में सामने आया कि टिकट दलालों का नेटवर्क छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर से लेकर उत्तर प्रदेश के बनारस और भदोही तक फैला था। जांच में एक संविदा कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है, जो कथित तौर पर अवैध तरीके से रेलवे के आरक्षित टिकट बनाता था। बैकुंठपुर से बनारस तक फैला था नेटवर्क जांच में पता चला कि बैकुंठपुर के सिटी पीआरएस से टिकट तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन टिकटों को बनारस भेजा जाता था, जहां मौजूद दलाल इन्हें ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचते थे। टिकटों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए बस चालकों का इस्तेमाल किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क के जरिए टिकटों पर कमीशन और अतिरिक्त रकम कमाई जाती थी। मोबाइल में मिली 60 टिकटों की जानकारी आरपीएफ की जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट मिली। इसमें 60 रेलवे आरक्षित टिकटों से संबंधित जानकारी मौजूद थी। इन टिकटों की कुल कीमत करीब 3.68 लाख रुपये बताई गई है। जांच में 14 टिकटों पर पीएनआर और अन्य जरूरी जानकारी हाथ से लिखी हुई भी मिली। आरपीएफ अब इन टिकटों से जुड़े लेन-देन और ग्राहकों की जानकारी की भी जांच कर रही है। रेल अधिनियम के तहत 3 आरोपी गिरफ्तार आरपीएफ ने मामले में रेल अधिनियम की धारा 143 के तहत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अविनाश कुमार (35), निवासी कोरिया; संजय विश्वकर्मा (48), निवासी भदोही, उत्तर प्रदेश और रवि शंकर (38), निवासी सूरजपुर के रूप में हुई है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आरपीएफ गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। आरपीएफ की इस कार्रवाई से रेलवे टिकट तैयार करने से लेकर उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने और ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचने तक चल रहे एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
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छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश के आसार; कन्हर नदी उफान पर

छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। अगले दो दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। इस दौरान कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। राजधानी रायपुर में पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। प्रदेश में अधिकतम तापमान करीब 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड और उससे सटे पश्चिम बंगाल में बने डिप्रेशन सिस्टम के कारण छत्तीसगढ़ में बारिश हो रही है। कन्हर नदी उफान पर, निचले इलाकों में बढ़ा खतरा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में लगातार बारिश के कारण कन्हर नदी उफान पर है। इस सीजन में नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और पानी रामानुजगंज नगर के वार्ड नंबर 9 में सीसी रोड तक पहुंच गया है। नदी का पानी बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और नगर पालिका ने निगरानी बढ़ा दी है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। आज कई जिलों में बारिश का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक 19 अगस्त को छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना भी है। अगले 48 घंटे के दौरान भी प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। झारखंड का डिप्रेशन धीरे-धीरे होगा कमजोर मौसम विभाग के अनुसार झारखंड और उससे लगे पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में बना डिप्रेशन पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके अगले 24 घंटे में झारखंड और बिहार की ओर बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना है। इस मौसम प्रणाली का असर छत्तीसगढ़ में बारिश के रूप में दिखाई दे रहा है। इसके अलावा मानसून ट्रफ भी सक्रिय है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। रायपुर में बादल छाए रहेंगे राजधानी रायपुर में बुधवार को आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। शहर में कुछ दौर में बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। प्रदेश में मंगलवार को सबसे अधिक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में रिकॉर्ड हुआ।
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रायपुर में नाबालिग से 3 साल तक दुष्कर्म का आरोप, नवजात को बेचने के मामले में पिता-बुआ समेत 6 गिरफ्तार

रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म और उसके नवजात बच्चे को बेचने के आरोप का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 16 वर्षीय पीड़िता ने अपने पिता पर वर्ष 2023 से करीब तीन साल तक लगातार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने आरोपी पिता, बुआ समेत कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में पीड़िता की उम्र छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उसे अस्पताल में भर्ती कराने से जुड़े लोग भी शामिल हैं। शराब पिलाकर दुष्कर्म का आरोप, धमकी देकर कराया चुप पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वर्ष 2023 में अमलीडीह इलाके में एक रिश्तेदार के घर उसके पिता ने कथित तौर पर उसे जबरन शराब पिलाई। इसके बाद मारपीट कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बारे में किसी को बताने पर आरोपी पिता ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद भी उसका कथित तौर पर लगातार शोषण किया जाता रहा। इसी दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई। जब उसने अपनी बुआ को इसकी जानकारी दी तो आरोप है कि बुआ ने भी उसका साथ देने के बजाय उसके साथ मारपीट की और जबरन गर्भपात की दवा खिला दी। दोबारा गर्भवती हुई तो फर्जी आधार बनाकर बालिग दिखाया पुलिस के मुताबिक, गर्भपात के बाद भी पीड़िता का कथित शोषण जारी रहा। वर्ष 2025 में वह दोबारा गर्भवती हो गई। इसके बाद आरोपी पिता उसे डॉक्टर वर्षा मंडल और उसकी परिचित गीता राय के पास लेकर गया। पुलिस का आरोप है कि पीड़िता की वास्तविक उम्र छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया गया और दस्तावेजों में उसे बालिग दिखाया गया। इसके बाद उसे शादीशुदा बताकर डंगनिया स्थित वासुदेव अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में बेटे को जन्म, नवजात को बेचने का आरोप पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद आरोपियों पर नवजात को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का आरोप है। पुलिस अब नवजात से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चे को किसे सौंपा गया और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पिता-बुआ समेत 6 आरोपी गिरफ्तार पीड़िता की शिकायत के आधार पर न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने POCSO Act, Juvenile Justice Act और BNS की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता, बुआ और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में रोहित राय, साहेब मंडल, योगिता राय उर्फ गीता और बरखा वर्मा उर्फ वर्षा मंडल समेत कुल 6 लोग शामिल हैं। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है और नवजात से जुड़े तथ्यों के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और अस्पताल में भर्ती कराने की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।
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वंदे मातरम् को लेकर BJP-कांग्रेस में सियासी घमासान, दीपक बैज बोले- भाजपा देशभक्ति का पाठ न पढ़ाए

भाजपा पर देशभक्ति को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा के नेता कांग्रेस को वंदे मातरम् के सम्मान का पाठ पढ़ा रहे हैं और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को लेकर भी बयान दिए जा रहे हैं। बैज ने कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा गायन हुआ था। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति और राष्ट्रगीत के सम्मान का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है। ‘भाजपा कांग्रेस को देशभक्ति न सिखाए’ दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस आजादी के आंदोलन के समय से ही वंदे मातरम् को जनजागरण के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाने से पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। RSS-BJP से बैज की चुनौती कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा और RSS को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपने कार्यालयों में वंदे मातरम् के गायन का वीडियो जारी करें। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में लगातार वंदे मातरम् का गायन करती रही है। बैज ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग लंबे समय तक अपने कार्यालयों में तिरंगा नहीं फहराते थे, वे आज वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस को सलाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए कांग्रेस को भाजपा से सीख लेने की जरूरत नहीं है। भाजपा का पलटवार- कांग्रेस कर रही भ्रम फैलाने का काम कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। ठाकुर ने कहा कि भाजपा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को हमेशा सम्मान दिया जाता रहा है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को नियमित रूप से शामिल करती रही है और क्या भविष्य में भी इसे अपने कार्यक्रमों का हिस्सा बनाएगी। वंदे मातरम् को लेकर दोनों दलों के बीच शुरू हुई यह सियासी बहस अब बयानबाजी का रूप ले चुकी है।
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रायपुर में नाले में गिरा 4 साल का मासूम, इलाज के दौरान मौत; खुले नालों की सुरक्षा पर उठे सवाल

रायपुर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 4 साल के मासूम की मौत हो गई। महात्मा गांधी नगर वार्ड नंबर-4 में खेलते समय काव्यांश साहू नाले में गिर गया। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर नगर निगम और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। लोगों की मदद से बच्चे की तलाश शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद बच्चे को नाले से बाहर निकाला गया और तत्काल मेडिशाइन अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चा किन परिस्थितियों में नाले में गिरा। खुले नालों को लेकर व्यवस्था पर सवाल हादसे के बाद इलाके में खुले नालों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई जगह नालों के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, जिससे बच्चों और राहगीरों के लिए खतरा बना रहता है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बिलासपुर में फर्जी सर्पदंश घोटाले के आरोपी डॉक्टर फरार, 3 दर्जन से ज्यादा पोस्टमार्टम रिपोर्ट अटकी

बिलासपुर: फर्जी सर्पदंश घोटाले के आरोपी और सिम्स के फॉरेंसिक विभाग के तत्कालीन डॉक्टर डॉ. एसएन गोले के फरार होने से अब पुराने पोस्टमार्टम मामलों पर भी असर पड़ रहा है। डॉ. गोले द्वारा किए गए तीन दर्जन से ज्यादा पोस्टमार्टम की रिपोर्ट अब तक लंबित हैं। रिपोर्ट लेने के लिए मृतकों के परिजन सिम्स की पुलिस चौकी और फॉरेंसिक विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। इन लंबित रिपोर्टों में जांजगीर, मुंगेली और आसपास के जिलों के मामलों से जुड़े दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं। डॉ. गोले के फरार होने से कानूनी अड़चन बताया जा रहा है कि डॉ. गोले पिछले करीब दो महीने से सिम्स नहीं आ रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में दूसरे डॉक्टर विभाग का काम संभाल रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए पुराने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट जारी करने में परेशानी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, कई मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर डॉ. गोले के हस्ताक्षर जरूरी हैं। ऐसे में उनके फरार होने से पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। सर्पदंश घोटाले में आरोपी हैं डॉ. गोले डॉ. एसएन गोले पर सर्पदंश से मौत के फर्जी दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के मामले में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में अब तक दो दर्जन से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस डॉ. गोले की तलाश कर रही है। उनके पकड़े जाने के बाद पुराने लंबित पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने से परिवार परेशान पोस्टमार्टम रिपोर्ट मृतक के परिजनों के लिए भी कई मामलों में जरूरी दस्तावेज होती है। रिपोर्ट नहीं मिलने से एलआईसी क्लेम, दुर्घटना बीमा और अन्य कानूनी दावों की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई है। वहीं, पुलिस मामलों में भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इससे जांच और आरोपियों से संबंधित कानूनी कार्रवाई में देरी हो सकती है। डीन बोले- दूसरे डॉक्टर को जिम्मेदारी दी गई सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति के मुताबिक, डॉ. गोले कई सप्ताह से सिम्स नहीं आ रहे हैं। उनकी जगह दूसरे डॉक्टर को विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, जिन शवों का पोस्टमार्टम डॉ. गोले ने किया था, उनकी रिपोर्ट को लेकर स्थिति अलग है। पुलिस तलाश में जुटी एडिशनल एसपी पंकज पटेल ने बताया कि फरार डॉक्टर की तलाश की जा रही है। उनके पकड़े जाने के बाद पुराने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही, लंबित रिपोर्टों के कारण किसी जांच या कानूनी कार्रवाई पर असर न पड़े, इसके लिए वैधानिक रास्ता तलाशा जा रहा है। मामले में कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 एक्सप्रेस ट्रेनें 25 सितंबर से 14 अक्टूबर तक रहेंगी रद्द, उत्कल एक्सप्रेस का बदलेगा रूट

रायपुर: छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में होने वाले रेलवे निर्माण कार्य के चलते 25 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक 18 एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द किया गया है। इसके अलावा उत्कल एक्सप्रेस अलग-अलग तारीखों में बदले हुए रूट से चलेगी। वहीं, 13 अक्टूबर को गीतांजलि एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 2 घंटे की देरी से रवाना होगी। ट्रेनों के प्रभावित होने से झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। पांचवीं रेल लाइन के काम से ट्रेनों पर असर दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में बंडामुंडा केबिन-ए से राउरकेला सेक्शन के बीच पांचवीं रेल लाइन की कमीशनिंग का काम किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग चरणों में नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य और ट्रैफिक ब्लॉक लिया जाएगा। इसी वजह से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर चलने वाली कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। ये ट्रेनें रहेंगी रद्द रद्द की गई ट्रेनों में प्रमुख रूप से: समेत कुल 18 एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। गीतांजलि एक्सप्रेस भी होगी प्रभावित 12860 हावड़ा-CSMT गीतांजलि एक्सप्रेस 13 अक्टूबर को अपने निर्धारित समय से 2 घंटे की देरी से हावड़ा से रवाना होगी। इसके अलावा उत्कल एक्सप्रेस का संचालन भी कुछ तारीखों में बदले हुए मार्ग से किया जाएगा। यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस जरूर जांचें रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का रनिंग स्टेटस और शेड्यूल जरूर जांच लें। ट्रेन रद्द होने, रूट बदलने या समय में बदलाव की जानकारी पहले से मिलने पर यात्री अपनी यात्रा की योजना बदल सकते हैं।
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छत्तीसगढ़ में कॉलेज एडमिशन की तारीख बढ़ी, अब 31 अगस्त तक मिलेगा प्रवेश का मौका

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में दाखिले से वंचित छात्रों के लिए राहत की खबर है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी है। अब छात्र खाली सीटों वाले शासकीय और निजी कॉलेजों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत दाखिला ले सकेंगे। इस फैसले से उन विद्यार्थियों को फायदा होगा, जो किसी कारण से तय समय सीमा में प्रवेश नहीं ले पाए थे। खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। पहले 14 अगस्त थी अंतिम तारीख कॉलेजों में प्रवेश के लिए पहले प्राचार्य स्तर पर 31 जुलाई और कुलपति की अनुमति से 14 अगस्त तक की समय सीमा निर्धारित थी। समय सीमा खत्म होने के बाद भी प्रदेश के कई कॉलेजों में सीटें खाली रह गई थीं। वहीं, कई विद्यार्थी भी विभिन्न कारणों से समय पर प्रवेश नहीं ले सके। इसी को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब 31 अगस्त तक खाली सीटों पर प्रवेश लिया जा सकेगा। छात्रों का एक साल खराब नहीं होने देंगे: मंत्री उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के कई मेधावी विद्यार्थी व्यावहारिक कारणों से समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाए थे। उन्होंने कहा कि केवल प्रवेश की तारीख निकल जाने के कारण किसी योग्य छात्र का एक साल खराब नहीं होना चाहिए। छात्रहित को ध्यान में रखते हुए प्रवेश की तारीख बढ़ाई गई है। मंत्री ने विद्यार्थियों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है। खाली सीटों पर मिलेगा दाखिला नए आदेश के तहत जिन शासकीय और निजी कॉलेजों में सीटें उपलब्ध हैं, वहां विद्यार्थी 31 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। छात्रों को संबंधित कॉलेज में उपलब्ध पाठ्यक्रम और सीटों की जानकारी लेकर समय सीमा के भीतर प्रवेश लेना होगा।
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नर्सिंग काउंसलिंग में बड़ा बदलाव, अब हर राउंड में कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन; सरकारी कॉलेज में सीट छोड़ने पर भी नहीं छिनेगा मौका

भोपाल। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की काउंसलिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। वर्षों से लंबित प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज संगठन की मांगों को स्वीकार करते हुए विभाग ने विद्यार्थियों को काउंसलिंग में अधिक अवसर देने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब विद्यार्थी काउंसलिंग के हर राउंड में रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इससे किसी एक राउंड में रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाने वाले विद्यार्थियों को अंतिम चरण तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे अगले राउंड में भी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। प्रवेश नहीं लेना है तो स्क्रूटनी की जरूरत नहीं काउंसलिंग के दौरान यदि कोई विद्यार्थी किसी राउंड में प्रवेश नहीं लेना चाहता है, तो अब उसे स्क्रूटनी कराने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले प्रवेश नहीं लेने की स्थिति में भी विद्यार्थी को स्क्रूटनी के लिए संबंधित कॉलेज जाना पड़ता था। नए नियम से विद्यार्थियों को इस अनावश्यक प्रक्रिया और कॉलेज जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। सरकारी कॉलेज में प्रवेश नहीं लिया तो भी अगला मौका काउंसलिंग प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी नर्सिंग कॉलेज में सीट मिलने को लेकर किया गया है। यदि किसी विद्यार्थी का नाम शासकीय नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए आ जाता है, लेकिन वह वहां प्रवेश नहीं लेता, तो उसे काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाएगा। वह अगले चरण में किसी अन्य निजी नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए विकल्प चुन सकेगा। पहले सरकारी कॉलेज में नाम आने के बाद प्रवेश नहीं लेने पर विद्यार्थी को काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता था। इससे निजी कॉलेज में प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के विकल्प सीमित हो जाते थे। प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज संगठन ने किया स्वागत काउंसलिंग प्रक्रिया में किए गए इन बदलावों का प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज संगठन ने स्वागत किया है। संगठन ने विद्यार्थियों के हित में निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार जताया है। नए नियमों से विद्यार्थियों को काउंसलिंग के अलग-अलग चरणों में प्रवेश के अधिक अवसर मिलने और प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल होने की उम्मीद है।
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छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल में पहले बिक चुका प्लॉट दोबारा बेचा, 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी का केस दर्ज

भोपाल के नीलबड़ स्थित गोरा गांव में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कमलेश राजपूत ने पहले ही बिक चुके 800 वर्गफीट के प्लॉट का दोबारा सौदा कर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से 3 लाख रुपए एडवांस ले लिए। रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने आरोपी कमलेश राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम देखकर किया सौदा पुलिस के अनुसार, आरोपी ने प्लॉट के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपना नाम दिखाकर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से सौदा किया था। 800 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 3.30 लाख रुपए तय हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र ने किस्तों में आरोपी को 3 लाख रुपए एडवांस दे दिए। हालांकि, जांच में सामने आया कि आरोपी करीब दो महीने पहले ही यह प्लॉट शुभम यादव को बेच चुका था। शुभम के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री भी हो चुकी थी, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं हुआ था। रजिस्ट्री कराने नहीं पहुंचा आरोपी पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर प्लॉट का दोबारा सौदा कर रकम ले ली। जब रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, तो धर्मेंद्र को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी ने किस तरह प्लॉट का दोबारा सौदा किया और रकम लेने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

इंदौर में ‘Gen Z Protest 2.0’ जारी, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े युवा

इंदौर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन जारी है। 5 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने अपने आंदोलन को ‘Gen Z Protest 2.0’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। 19 अक्टूबर को भंवरकुआं चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें समय रहते हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुटने की अपील की गई थी। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें थीं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियों के जरिए अपनी मांगें भी रखीं। 50-60 पुलिसकर्मियों ने हटाया, प्रदर्शनकारी का दावा प्रदर्शनकारी योगित गुप्ता के मुताबिक, 19 अक्टूबर को वह अपने 10 साथियों के साथ भंवरकुआं चौराहे पर पहुंचे थे। उनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं और वे आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान करीब 50 से 60 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया। योगित ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोकने के बाद करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और वे अपनी मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।
Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

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