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पहलगाम हमले को 1 साल: इंदौर के नथानियल परिवार का दर्द आज भी जिंदा, ‘जन्नत’ की यात्रा बनी जिंदगी का सबसे बड़ा घाव

22 अप्रैल 2025… यह वो तारीख है, जिसे इंदौर का नथानियल परिवार शायद कभी नहीं भूल पाएगा। कश्मीर की खूबसूरत वादियों में सुकून तलाशने निकले इस परिवार की जिंदगी उसी दिन बिखर गई थी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन उस दिन की चीखें आज भी इस परिवार के दिलों में गूंजती हैं। घाटी में बहा खून वक्त के साथ भले ही मिट गया हो, लेकिन इंदौर के सुशील नथानियल के घर में आज भी उस दर्द की गूंज सुनाई देती है। यह हमला सिर्फ एक घटना नहीं था, बल्कि एक बेटे के सपनों और एक पत्नी की पूरी दुनिया को खत्म कर देने वाला हादसा था। “अगर मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती…” सुशील के बेटे ऑस्टिन आज भी उस दिन को याद कर कांप उठते हैं। वे बताते हैं,“पापा का सपना था कि वे इंदौर आकर मुझे विदेश पढ़ने भेजेंगे। सब कुछ तय था… लेकिन उस दिन अगर मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती, तो शायद मैं पापा के साथ होता… और शायद कहानी कुछ और होती।” ऑस्टिन की आंखों में आज भी उस दिन की तस्वीरें किसी डरावने सपने की तरह घूमती हैं। दूसरों की जान बचाते हुए खुद शहीद हो गए परिवार और चश्मदीदों के मुताबिक, जब हमला हुआ तो सुशील खुद बचने के बजाय वहां फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। यही उनका स्वभाव था—दूसरों की मदद करना। ऑस्टिन बताते हैं कि पापा उन्हें फोन करने वाले थे, लेकिन पास खड़े एक व्यक्ति ने मना किया कि फोन की आवाज आतंकियों को आकर्षित कर सकती है।सुशील ने कई लोगों को सुरक्षित निकाल दिया, लेकिन जब उनकी बारी आई, तो आतंकियों की गोली ने उनके सपनों को खत्म कर दिया। एक साल बाद भी नहीं भरे जख्म सुशील की पत्नी जेनिफर आज भी उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई हैं। उनकी आंखों के आंसू अब तक नहीं सूखे हैं।घर का माहौल आज भी खामोश है, और हर छोटी आवाज उन्हें उस दिन की गोलियों की याद दिला देती है। अब बेटे ऑस्टिन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने करियर से ज्यादा अपनी मां को संभालने की है। अधूरे रह गए सपने परिवार के मुताबिक, सुशील हमेशा कहते थे कि इंदौर में सुकून से रहेंगे और बेटे को अच्छी पढ़ाई दिलाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।जिस कश्मीर को वे सुकून की तलाश में गए थे, वहीं से उनकी लाश वापस लौटी। आज एक साल बाद भी यह परिवार सिर्फ इंसाफ का इंतजार कर रहा है। परिवार के बारे में ऐसे बना था कश्मीर ट्रिप का प्लान ऑस्टिन ने बताया कि पहले कहीं और जाने का प्लान था, लेकिन पापा के काम के चलते तारीखें नहीं मिल पा रही थीं।फिर तय हुआ कि ईस्टर सूरत में मनाया जाएगा और वहीं से घूमने जाएंगे। इंदौर से सूरत पहुंचकर परिवार ने दो दिन साथ बिताए और फिर कश्मीर जाने का प्लान बना।सूरत से वे चंडीगढ़ पहुंचे, शॉपिंग की और फिर कश्मीर के लिए रवाना हुए। पूरा परिवार इस ट्रिप को लेकर बेहद उत्साहित था।ऑस्टिन ने इस यात्रा के हर पल को फोटो और वीडियो में कैद किया था—लेकिन उन्हें क्या पता था कि ये यादें जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएंगी। 👉 देश-विदेश की ऐसी ही संवेदनशील और सच्ची खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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MP में BJP विधायक बनाम IPS विवाद: प्रीतम लोधी के बयान पर बवाल, IPS एसोसिएशन ने की कार्रवाई की मांग

मध्यप्रदेश में बीजेपी विधायक Pritam Singh Lodhi के एक बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने करैरा के एसडीओपी Ayush Jakhad पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद Madhya Pradesh IPS Association ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘भाषा अमर्यादित और निंदनीय’ आईपीएस एसोसिएशन ने प्रेस नोट जारी कर विधायक की भाषा को अमर्यादित और निंदनीय बताया। संगठन का कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की टिप्पणी न केवल अनुचित है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। अध्यक्ष ने जताई नाराजगी एसोसिएशन के अध्यक्ष Chanchal Shekhar ने कहा कि वायरल वीडियो में जिस तरह की अभद्र और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, वह सार्वजनिक जीवन की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताया। अधिकारी और परिवार पर टिप्पणी एसोसिएशन के अनुसार, वीडियो में नए नियुक्त पुलिस अधिकारी और उनके परिवार के प्रति भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इसे जनप्रतिनिधि के पद की मर्यादा के विपरीत बताते हुए संगठन ने कहा कि ऐसे व्यवहार से पूरे प्रशासनिक तंत्र पर असर पड़ता है। ‘धमकीपूर्ण व्यवहार स्वीकार्य नहीं’ एसोसिएशन ने साफ कहा कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी भाषा और आचरण में संयम रखें। इस तरह की धमकीपूर्ण भाषा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं की जा सकती। कार्रवाई की मांग Madhya Pradesh IPS Association ने विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा कि यह घटना ऐसे दिन सामने आई है, जब Civil Services Day मनाया जा रहा है, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। 👉 अधिक खबरों और अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सीहोर में युवक की सूझबूझ से बची जान: सड़क हादसे में घायल को दिया CPR, बनी जिंदगी की डोर

मध्यप्रदेश के सीहोर में एक युवक की समझदारी और हिम्मत ने सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति की जान बचा ली। फाइनेंस कंपनी में काम करने वाले रोहित मालवीय ने समय पर CPR देकर घायल को नया जीवन दे दिया। हादसा देखकर तुरंत रुके मंगलवार को रोहित मालवीय अपने गांव पिपलिया मीरा से सीहोर आ रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि सामने से आ रहा एक बाइक सवार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गिर गया। यह देखते ही रोहित ने तुरंत अपनी बाइक रोकी और एक अन्य राहगीर के साथ मदद के लिए दौड़ पड़े। हालत बिगड़ी तो शुरू किया CPR घायल की पहचान बरखेड़ी गांव के रहने वाले संतोष के रूप में हुई। हादसे के बाद उसकी सांसें धीमी पड़ने लगीं और हालत गंभीर हो गई। ऐसे में रोहित ने बिना देर किए CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। मेहनत रंग लाई, लौट आई सांसें कुछ देर की लगातार कोशिश और सही तकनीक के इस्तेमाल से संतोष की सांसें फिर से चलने लगीं और वह होश में आ गया। यह पल वहां मौजूद लोगों के लिए राहत भरा था। परिवार और एम्बुलेंस को दी सूचना रोहित ने तुरंत घायल के मोबाइल से उसके परिजनों को खबर दी और एम्बुलेंस भी बुलवाई। हालांकि एम्बुलेंस पहुंचने से पहले ही परिवार वाले मौके पर पहुंच गए और संतोष को तुरंत अस्पताल ले गए। हर तरफ हो रही सराहना रोहित मालवीय की इस बहादुरी और सूझबूझ की हर कोई तारीफ कर रहा है। समय पर की गई उनकी मदद ने एक परिवार को बड़ा दुख झेलने से बचा लिया। 👉 अधिक खबरों और अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सागर में शादी के विवाद में खूनी झगड़ा: पति-पत्नी और बेटा गिरफ्तार, दुल्हन और मां पर हमला

मध्यप्रदेश के सागर जिले में शादी के दौरान हुआ विवाद अचानक हिंसक हो गया। विनायका थाना पुलिस ने इस मामले में पति-पत्नी और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपियों को पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। शादी के दौरान हुआ विवाद पुलिस के अनुसार, 19 अप्रैल को ग्राम डिलोना निवासी प्यारी बाई (45) ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी राखी की शादी थी। बारात के आगमन स्थल को लेकर गांव के ही परमू बंसल, उनकी पत्नी पूनाबाई और बेटे रामेश्वर बंसल से विवाद हो गया। गालीगलौज से शुरू होकर हमले तक पहुंचा मामला शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने पहले गालीगलौज शुरू की। जब इसका विरोध किया गया, तो रामेश्वर बंसल ने लोहे के धारदार हथियार (बका) से हमला कर दिया। इस हमले में प्यारी बाई के सिर और हाथ में चोट आई, जबकि उनकी बेटी के गले में गंभीर चोट लगी। घटना के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला, लेकिन तब तक तीनों आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। भागने की फिराक में था आरोपी पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए टीम बनाई। मुख्य आरोपी रामेश्वर बंसल को उल्दन बेसली के यात्री प्रतीक्षालय से गिरफ्तार किया गया, जहां वह बस का इंतजार कर रहा था। वहीं, परमू बंसल और पूनाबाई को गांव के पास से पकड़ा गया। पुलिस की कार्रवाई विनायका थाना प्रभारी भूपेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया। 👉 अधिक खबरों और अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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भोपाल में लेंसकार्ट शोरूम के बाहर प्रदर्शन: ड्रेस कोड विवाद पर बढ़ा बवाल

भोपाल के न्यू मार्केट रोशनपुरा में मंगलवार को लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शोरूम के कर्मचारियों को तिलक लगाया, मंत्रोच्चार किया और कलावा बांधा। इस दौरान “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे भी लगाए गए। बहिष्कार की चेतावनी हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि संगठन लेंसकार्ट के बहिष्कार की अपील कर रहा है। उनका कहना है कि भारत में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भले ही कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने माफी मांगी हो, लेकिन संगठन इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। “अगर हमने कंपनी को आगे बढ़ाया है, तो जरूरत पड़ने पर नीचे भी ला सकते हैं,” उन्होंने चेतावनी दी। संत समिति ने भी जताई आपत्ति मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिल आनंद ने कहा कि कथित गाइडलाइन में महिलाओं को सिंदूर और कलावा पहनने से रोकने की बात सामने आई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि भारत में सनातन परंपराओं का सम्मान होना चाहिए और किसी भी कंपनी को धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने का अधिकार नहीं है। कर्मचारियों ने किया खंडन विवाद के बीच शोरूम के कर्मचारी मनीष भमारे ने कहा कि उन्हें कभी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान भी वे तिलक और कलावा लगाकर काम पर आए थे। उनके मुताबिक कंपनी की ओर से ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया था कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इस मुद्दे को एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X (ट्विटर) पर उठाया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कंपनी की सफाई विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने कहा कि लेंसकार्ट सभी धर्मों का सम्मान करता है और कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी आजादी है। हालांकि, विरोध कर रहे संगठन इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं और आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। 👉 अधिक जानकारी और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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मोहन यादव

Breaking MP BJP Nari Aakrosh Rally भोपाल में महिला शक्ति का प्रदर्शन, कांग्रेस पर CM Mohan Yadav का तीखा हमला

नगर सवंदाता l भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को बीजेपी ने “जन आक्रोश महिला रैली” का बड़ा आयोजन किया, जो अब राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में है। यह रैली महिला आरक्षण बिल पास न होने के विरोध में आयोजित की गई, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। यह विशाल रैली एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर रोशनपुरा चौराहे तक निकाली गई। पूरे मार्ग में बीजेपी महिला कार्यकर्ताओं और नेताओं का जोश देखने लायक रहा। हाथों में तख्तियां, नारेबाजी और संगठित मार्च के जरिए महिलाओं ने अपनी नाराजगी जताई। रैली के समापन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) ने मंच से कांग्रेस और प्रियंका गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि: “महिलाओं के हक की बात करने वाली कांग्रेस ने ही संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध किया, जिससे उनका असली चेहरा सामने आ गया है।” समापन के दौरान सीएम ने काले गुब्बारे छोड़कर विरोध दर्ज कराया, जो इस रैली का प्रतीकात्मक हाईलाइट बना। महिला आरक्षण बिल पर अपडेट हाल ही में संसद में पेश 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इस बिल में: वोटिंग का आंकड़ा: यही वजह रही कि बीजेपी ने इसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसकी कड़ी भोपाल की यह रैली बनी। कौन-कौन रहा मौजूद? इस रैली में बीजेपी के कई बड़े चेहरे शामिल हुए, जिनमें: यह रैली सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। बीजेपी इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है।
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Parshuram Jayanti पर इंदौर में भव्य शोभायात्रा, मुख्यमंत्री ने किए बड़े ऐलान

Parshuram Jayanti पर इंदौर में भव्य शोभायात्रा, मुख्यमंत्री ने किए बड़े ऐलान

Indore में Parshuram Jayanti के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंगा नजर आया। यह शोभायात्रा Sarv Brahmin Samaj की ओर से आयोजित की गई, जिसमें पारंपरिक झांकियां, बैंड-बाजे और धार्मिक उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav भी शामिल हुए। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए तीर्थ स्थलों के विकास और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। उनका कहना था कि सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस मौके पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज को एकजुट करने का भी संदेश देता नजर आया।
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महिला आरक्षण के समर्थन में BJP की रैली, सीएम बोले- विशेष सत्र बुलाया जाएगा

महिला आरक्षण के समर्थन में BJP की रैली, सीएम बोले- विशेष सत्र बुलाया जाएगा

Bhopal में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। BJP ने इस मुद्दे के समर्थन में आज आक्रोश रैली निकालने का ऐलान किया है। रैली से पहले मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर है और जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। उनका कहना है कि महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए और इसमें किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। सीएम ने Indian National Congress पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और आम लोगों की नजरें भी अब आने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।
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ई-रिक्शा में महिला के 5 लाख के जेवर चोरी, Gwalior में वारदात

ई-रिक्शा में महिला के 5 लाख के जेवर चोरी, Gwalior में वारदात

Gwalior में एक हैरान करने वाली चोरी की घटना सामने आई है। शादी में जा रही एक महिला के करीब 5 लाख रुपये के जेवर ई-रिक्शा में सफर के दौरान चोरी हो गए। जानकारी के अनुसार, महिला आराम से ई-रिक्शा में बैठकर अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। रास्ते में गड्ढों और खराब सड़क के कारण रिक्शा में बार-बार झटके लग रहे थे। इसी दौरान किसी ने मौके का फायदा उठाकर बैग से जेवर पार कर दिए। महिला को चोरी का पता तब चला जब वह अपने गंतव्य पर पहुंची। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर भीड़भाड़ या खराब रास्तों पर सफर करते समय अपने सामान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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Indore पुलिस चौकी में युवक की मौत, पूछताछ के दौरान बिगड़ी हालत

Indore पुलिस चौकी में युवक की मौत, पूछताछ के दौरान बिगड़ी हालत

Indore से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां एक युवक की पुलिस चौकी में मौत हो गई, जिससे इलाके में हलचल मच गई है। जानकारी के मुताबिक, युवक को चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया था और पूछताछ के लिए पुलिस चौकी लाया गया। पूछताछ के दौरान उसकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इस घटना के बाद मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। यह मामला पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा उपायों पर भी कई सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
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Editor's Picks

Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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