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Thailand

Thailand Train Accident चलती ट्रेन पर गिरा Heavy Crane

Nakhon Ratchasima, Thailand: 14 जनवरी 2026 की सुबह थाईलैंड के नाखोन राचसीमा प्रांत में एक भयानक रेल हादसा हुआ। यहां चलती ट्रेन पर हाई-स्पीड रेल निर्माण साइट की भारी क्रेन (Heavy Crane) गिर गई, जिससे 22 लोगों की मौत और 30 से अधिक यात्रियों के घायल होने की खबर है। घटना के समय ट्रेन बैंकॉक से उबोन राचथानी की ओर जा रही थी, जब निर्माण स्थल की क्रेन अचानक ट्रेन पर गिर पड़ी। इसके कारण ट्रेन के कई डिब्बे ट्रैक से उतर गए और कुछ में आग लग गई। हादसे की यह तस्वीर न सिर्फ यात्रियों के लिए डरावनी थी, बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई। हादसे की वजह और शुरुआती जानकारी अधिकारियों ने बताया कि क्रेन गिरने का अभी तक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन शुरुआती अनुमान यह है कि निर्माण क्षेत्र की सुरक्षा मानकों में कोई चूक हुई हो सकती है। ट्रेन हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव दल (Rescue Team) मौके पर पहुंच गए और घायल यात्रियों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रभावित लोगों की स्थिति घायलों में कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। मृतकों के परिवारों को स्थानीय प्रशासन (Local Authorities) ने तत्काल सहायता देने की घोषणा की है। हादसे ने वहां के लोगों में गहरी शोक और चिंता की लहर पैदा कर दी है। सुरक्षा और भविष्य की तैयारी थाईलैंड सरकार ने हादसे के कारणों की पूरी जांच (Investigation) शुरू कर दी है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि रेलवे और निर्माण क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों को और कड़ा किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran vs US फांसी की आशंका के बीच Trump Warning, Tehran ने किया पलटवार

ईरान (Iran) इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। देशभर में सरकार-विरोधी प्रदर्शन तेज़ हैं, सड़कों पर लोग अपने हक़ और आज़ादी की आवाज़ उठा रहे हैं, और दूसरी ओर सरकार सख़्ती से इन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच एक प्रदर्शनकारी को सरेआम फांसी दिए जाने की खबरों ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। क्या हो रहा है ईरान में? पिछले कुछ हफ्तों से ईरान के कई बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। आर्थिक परेशानियाँ, राजनीतिक असंतोष और नागरिक आज़ादियों से जुड़े मुद्दों ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है। इन प्रदर्शनों के दौरान झड़पें हुई हैं, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ हुईं और सैकड़ों नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों की मौत की रिपोर्टें सामने आई हैं।इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी कई इलाकों में पाबंदियाँ लगाई गईं ताकि सूचनाओं का प्रसार रोका जा सके। फांसी की खबर और वैश्विक चिंता इन सबके बीच एक युवा प्रदर्शनकारी को मौत की सज़ा दिए जाने और उसे सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने की आशंका ने माहौल को और विस्फोटक बना दिया है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे दमन की नई और खतरनाक मिसाल बताया है। Trump Warning: “कड़ी कार्रवाई होगी” अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को फांसी देती है या हिंसा बढ़ाती है, तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा।ट्रम्प ने ईरान के लोगों से विरोध जारी रखने की अपील भी की और यह संदेश दिया कि दुनिया उनकी स्थिति को देख रही है। Tehran का पलटवार ट्रम्प की चेतावनी पर तेहरान ने भी कड़ा रुख अपनाया। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रम्प और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर ही हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए उन्हें “मुख्य हत्यारा” करार दिया।ईरान का कहना है कि बाहरी ताकतें देश के आंतरिक मामलों में दखल देकर अस्थिरता पैदा कर रही हैं। क्यों बढ़ रहा है अंतरराष्ट्रीय तनाव? Iran के भीतर जो शुरू हुआ था, वह अब वैश्विक राजनीति का मुद्दा बन गया है। अमेरिका, यूरोप और कई मानवाधिकार संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह मौत की सज़ा और हिंसा बंद करे। दूसरी ओर ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। आम लोगों की कहानी इस पूरे संघर्ष के बीच सबसे ज़्यादा असर आम ईरानियों पर पड़ रहा है—वे परिवार जो अपने बच्चों को खो चुके हैं, वे युवा जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में सड़कों पर उतरे थे, और वे लोग जो हर दिन डर के साए में जी रहे हैं।दुनिया के लिए यह सिर्फ़ एक राजनीतिक टकराव हो सकता है, लेकिन ईरान के लोगों के लिए यह ज़िंदगी और आज़ादी की लड़ाई बन चुकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Tariff Policy ईरान से कारोबार किया तो अमेरिका में 25% टैक्स तय

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस देश पर अमेरिका के साथ होने वाले पूरे व्यापार पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने इसे “तुरंत लागू और अंतिम फैसला” बताया है। यह घोषणा सोशल मीडिया के ज़रिए आई, लेकिन असर पूरी दुनिया के बाज़ारों और कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ता दिख रहा है। क्या है Trump Iran Tariff Policy? सरल शब्दों में कहें तो ट्रंप का कहना है— “अगर कोई देश ईरान से खरीद-फरोख्त करता है, तो उसे अमेरिका से होने वाले हर व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैक्स देना होगा।” मतलब यह कि ईरान के साथ तेल, गैस, केमिकल, फूड या किसी भी तरह का कारोबार करने वाले देशों को अमेरिकी बाज़ार में अपने सामान को 25% महंगे शुल्क के साथ बेचना पड़ेगा। यह फैसला क्यों लिया गया? यह कदम ऐसे समय पर आया है जब ईरान में राजनीतिक अशांति और विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से ईरान पर दबाव बनाना चाहता है ताकि उसकी नीतियों में बदलाव आए।ट्रंप की रणनीति साफ दिखती है—ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना ताकि उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़े। कौन-कौन से देश होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित? ईरान के साथ व्यापार करने वाले कई बड़े देश अब मुश्किल में हैं, जिनमें शामिल हैं: इन देशों को अब दो रास्तों में से एक चुनना होगा—या तो ईरान के साथ व्यापार घटाएँ, या अमेरिका के साथ अपने निर्यात को महंगा होने दें। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत का ईरान के साथ सीधा तेल आयात पहले से कम है, लेकिन खाद्य सामग्री, रसायन, फार्मा और मशीनरी जैसे कई सेक्टरों में व्यापार अब भी चलता है।अगर भारत ईरान के साथ यह कारोबार जारी रखता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात 25% टैरिफ के कारण महंगा हो सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा घटेगी। दूसरी ओर, ईरान भारत के लिए रणनीतिक साझेदार भी रहा है—चाहे वह चाबहार पोर्ट हो या मध्य एशिया तक पहुंच का रास्ता। ऐसे में भारत के सामने आर्थिक और कूटनीतिक संतुलन साधने की चुनौती होगी। वैश्विक बाजारों में क्यों मची हलचल? ट्रंप का यह टैरिफ सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है।विशेषज्ञों का मानना है कि इससे: कई देशों के लिए यह स्थिति “या तो अमेरिका, या ईरान” जैसा कठिन चुनाव बन सकती है। कानूनी और व्यावहारिक सवाल हालांकि ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा कर दी है, लेकिन इसके कानूनी ढांचे और लागू करने के तरीके अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं।क्या यह सभी उत्पादों पर लगेगा?क्या कुछ सेक्टरों को छूट मिलेगी?इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि यह नीति कितनी सख्ती से लागू होती है। Trump Iran Tariff News केवल ईरान की कहानी नहीं है—यह पूरी दुनिया के व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित करने वाला फैसला है।अगर यह नीति पूरी ताकत से लागू होती है, तो कई देशों को अपनी विदेश नीति और व्यापार रणनीति दोबारा सोचनी पड़ेगी। दुनिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ आर्थिक फैसले सीधे राजनीति को और राजनीति सीधे आम लोगों की जेब को प्रभावित करती है। अब देखना यह है कि देश इस चुनौती से कैसे निपटते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran Anti-Government Protest तेहरान से Mashhad तक प्रदर्शन जारी

ईरान (Iran) में सरकार-विरोधी प्रदर्शन अब 16वें दिन भी लगातार जारी हैं। ये आंदोलन पहले आर्थिक संकट और गिरती हुई रियाल के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब ये व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांग में बदल गया है। तेहरान, मशहद, तब्रिज, क़ोम और जहेदान जैसे शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर Supreme Leader आयतोल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ा दमन किया है। इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, हजारों लोग गिरफ्तार हुए हैं और कई जगहों पर गोलियों का उपयोग भी किया गया है। इसके कारण दर्जनों लोग मारे गए और हजारों लोग हिरासत में हैं। विदेशों को दोष देने का आरोप Iran के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल इन विरोध प्रदर्शनों को भड़काने में शामिल हैं। अराघची ने कहा कि ये देश शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक संघर्ष में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, तेहरान ने इस बाबत UN Security Council को पत्र भेजा है। हालांकि, विशेषज्ञ और मानवाधिकार संगठन मानते हैं कि यह प्रदर्शन देश के अंदर की समस्याओं — जैसे आर्थिक संकट, राजनीतिक दबाव और लंबे समय से चली आ रही नाराजगी — के कारण हैं। विदेशी हस्तक्षेप का आरोप अक्सर सरकार की कठोर कार्रवाई को सही ठहराने के लिए लगाया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती सरकार ने हाल ही में उन लोगों पर सख्त कार्रवाई की है, जिन पर इज़राइल की खुफिया एजेंसी Mossad के लिए जासूसी का आरोप था। यह कदम विरोध प्रदर्शन और विदेशी हस्तक्षेप के बीच बढ़ते तनाव को दिखाता है। जनता की उम्मीद और आंदोलन ईरानी जनता अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गई है। यह आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की दिशा में बढ़ रहा है। हर दिन नए शहरों में प्रदर्शन होते हैं, और लोगों की आवाज़ तेज़ होती जा रही है। Iran Protest 2026 न सिर्फ़ एक आर्थिक संघर्ष है, बल्कि यह जनता की आवाज़, उम्मीद और बदलाव की मांग का प्रतीक बन गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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US

US Sanctions Law 2025 रूस से तेल खरीदने पर 500% Tariff का खतरा

अमेरिका ने रूस के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए “Sanctioning Russia Act 2025” को हरी झंडी दे दी है। इस नए कानून की सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत रूस से तेल और ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।इस फैसले का असर सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि India, China, Brazil जैसे देशों और पूरी दुनिया के Stock Market पर भी दिखने लगा है। US Sanctions Law 2025 क्या है? (What is Sanctioning Russia Act?) इस कानून का मकसद रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना है, ताकि उसकी तेल और गैस से होने वाली कमाई पर रोक लग सके।अमेरिका का मानना है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। इसी वजह से अमेरिका अब ऐसे देशों पर: India पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है? भारत पिछले कुछ समय से रूस से कच्चा तेल सस्ते दामों पर खरीद रहा है। इससे: लेकिन अगर अमेरिका ने यह 500% Tariff लागू कर दिया, तो: यानी सस्ता तेल मिलने का फायदा कहीं महंगा न पड़ जाए। Stock Market क्यों गिरा? (Market Fall Reasons) इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में डर साफ दिखा। असल में बाजार को सबसे ज्यादा डर अनिश्चितता (Uncertainty) का है। निवेशक नहीं जानते कि यह कानून कब और कितनी सख्ती से लागू होगा। Global Oil Market में क्या बदलेगा? अगर रूस से तेल खरीदना मुश्किल हुआ तो: हालांकि इसी बीच अमेरिका ने Venezuela Oil Sanctions में राहत के संकेत दिए हैं, जिससे भारत को कुछ वैकल्पिक रास्ते मिल सकते हैं। यह भारत के लिए एक छोटी लेकिन अहम राहत मानी जा रही है। India-US Relations पर असर पड़ेगा? भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन यह कानून दोनों देशों के रिश्तों की परीक्षा ले सकता है।अब भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं: आने वाले दिनों में Diplomatic Talks और Trade Negotiations तेज होने की संभावना है। आगे क्या हो सकता है? (What’s Next?) अभी यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी संसद में आगे की प्रक्रिया बाकी है।लेकिन इतना तय है कि: निवेशकों और सरकारों – दोनों को अब हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Administration का Global Exit UN और International Organizations से अमेरिका बाहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) ने एक ऐतिहासिक और विवादित कदम उठाते हुए United States of America (USA) को 66 संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय संगठनों (International Organizations) से बाहर निकालने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ये संस्थाएं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों और आर्थिक प्राथमिकताओं के खिलाफ हैं। यह कदम अमेरिका की वैश्विक भूमिका में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है और दुनिया भर के देशों की नजरें अब इस फैसले पर टिकी हैं। किन संगठनों से हटेगा अमेरिका? इस निर्णय में शामिल हैं: प्रमुख संस्थाएं जिनसे अमेरिका हट रहा है: ट्रंप प्रशासन का तर्क व्हाइट हाउस का कहना है कि ये संगठन: प्रशासन का मानना है कि इन संगठनों में खर्च होने वाले संसाधनों को घरेलू प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित किया जाएगा। प्रक्रिया और समयसीमा अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया दुनिया भर में इस फैसले की आलोचना की गई है: व्यापक संदर्भ ट्रंप प्रशासन की “America First” नीति लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दूरी बनाए रखने की कोशिश रही है। इससे पहले भी अमेरिका: से बाहर निकल चुका है या उनकी फंडिंग रोक चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला न केवल अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा मोड़ है, बल्कि वैश्विक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी असर डाल सकता है। आने वाले महीनों में इस कदम के दीर्घकालिक परिणाम साफ होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela के राष्ट्रपति Nicolas Maduro न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश, बोले- मुझे जबरन उठाया गया

Venezuela के राष्ट्रपति Nicolas Maduro न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश, बोले- मुझे जबरन उठाया गया

Venezuela के राष्ट्रपति Nicolas Maduro को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया गया। इस दौरान मादुरो ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें किडनैप किया गया है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध बताया। कोर्ट में पेशी के दौरान मादुरो ने कहा कि यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और उनका किसी भी तरह के अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया है। मादुरो के मुताबिक, यह कार्रवाई वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी से न सिर्फ वेनेजुएला, बल्कि दुनिया भर के लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी गरमा गई है। कई देशों ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है, जबकि कुछ देशों ने इसे कानून के दायरे में बताया है। वहीं, वेनेजुएला में मादुरो के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल न्यूयॉर्क कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और पूरी दुनिया की नजर इस हाई-प्रोफाइल केस पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ट्रंप

ट्रंप बोले: Modi ने Russia Oil Import घटाकर मुझे खुश किया India-US Trade Tension बढ़ सकती है

ट्रंप का बयान: मोदी ने मेरी नाखुशी समझी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि भारत के रूस से तेल आयात घटाने का कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर उठाया। ट्रंप ने बताया कि मोदी “बहुत समझदार और अच्छे नेता” हैं और उन्हें पता था कि ट्रंप रूस से तेल खरीद जारी रखने पर नाखुश होंगे। एयर फ़ोर्स वन पर चेतावनी: Extra Tariffs की संभावना ट्रंप ने यह बयान एयर फ़ोर्स वन पर रिपोर्टर्स से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल की खरीद जारी रखता है तो अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ (extra tariffs) लगा सकता है, जो भारत के लिए “काफी नकारात्मक” होगा। India-US Trade Relation पर असर विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम India-US trade relationship पर प्रभाव डाल सकता है। ट्रंप प्रशासन पहले भी भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे चुका है, जिसमें रूस से तेल खरीदना एक बड़ा कारण रहा। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतें भारत ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतें सर्वोपरि हैं। भारत का कहना है कि रूस से ऊर्जा खरीदने का उद्देश्य घरेलू मांग को पूरा करना और पेट्रोलियम बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। रूस पर पश्चिमी दबाव और भारत की रणनीति अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर दबाव बढ़ाया है और ऊर्जा खरीद पर निगरानी रखी हुई है। ऐसे में भारत का निर्णय संतुलन बनाने और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रयास माना जा रहा है। भविष्य में India-US Trade Dynamics विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले समय में India-US trade dynamics में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है, खासकर ऊर्जा और टैरिफ नीतियों को लेकर। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर वेनेजुएला को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की शर्तें नहीं मानी गईं तो हालात और ज्यादा खराब किए जा सकते हैं। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और जनता की परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में इस तरह की धमकी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। UNSC में आज इमरजेंसी मीटिंग ट्रम्प के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आज आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति, अमेरिका के रुख और इससे वैश्विक शांति पर पड़ने वाले असर पर चर्चा होगी। कई देशों ने अमेरिका के इस कड़े रवैये पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ देश वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाली की बात कर रहे हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान राजनीतिक टकराव का सीधा असर वेनेजुएला की जनता पर पड़ रहा है। खाने-पीने की कमी, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोग अब अंतरराष्ट्रीय तनाव से और डरे हुए हैं। लोगों को उम्मीद है कि UNSC की बैठक से कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। दुनिया भर की नजरें अब इस बैठक और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump vs Venezuela Maduro Arrest Claim के बाद Caracas में Explosions से हड़कंप

अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्तों में शनिवार को उस वक्त भूचाल आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा किया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी को अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। यह दावा ऐसे समय पर आया है जब वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस (Caracas) समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों और सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। Trump का बड़ा बयान, दुनिया में हलचल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह कार्रवाई “बड़े पैमाने पर किए गए सैन्य ऑपरेशन” का हिस्सा थी। उन्होंने इसे अमेरिका की एक “सफल रणनीतिक कार्रवाई” बताया और कहा कि जल्द ही इस पर आधिकारिक ब्रीफिंग दी जाएगी। ट्रंप के इस बयान के बाद दुनियाभर के मीडिया और सरकारों में हलचल मच गई। हालांकि, अब तक मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन या स्वतंत्र एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Caracas में धमाके, लोगों में डर का माहौल स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार तड़के कराकस और आसपास के इलाकों में कई जोरदार विस्फोट सुने गए। कुछ इलाकों में बिजली गुल हो गई और आसमान में धुएँ के गुबार देखे गए।इन घटनाओं के बाद आम लोगों में डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। Venezuela सरकार का पलटवार वेनेज़ुएला सरकार ने अमेरिकी दावों को “झूठा और भड़काऊ प्रचार” बताया है। सरकारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने देश की संप्रभुता पर हमला किया है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मादुरो सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। पहले से तनावपूर्ण थे US–Venezuela संबंध अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका, मादुरो सरकार पर जैसे गंभीर आरोप लगाता रहा है। ट्रंप पहले भी मादुरो को “नार्को-टेररिस्ट” कह चुके हैं और उन पर इनाम तक घोषित किया गया था। अभी क्या है सच्चाई? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है किक्या वाकई Nicolas Maduro गिरफ्तार हो चुके हैं? ट्रंप का दावा ज़रूर सुर्खियों में है, लेकिन जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं कही जा सकती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बॉलीवुड अभिनेता Amir khan की तीसरी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच दिग्गज अभिनेत्री Rakhi Gulzar ने उनका खुलकर समर्थन किया है। जहां कुछ लोग आमिर के फैसले की आलोचना कर रहे हैं, वहीं राखी का मानना है कि शादी और खुशहाल जीवन का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता। एक इंटरव्यू में राखी गुलजार ने कहा कि 60 साल की उम्र में शादी करने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Robert De Niro भी दो बार शादी कर चुके हैं और 80 साल की उम्र के बाद पिता बने हैं। उनके अनुसार, खुशी और रिश्ते उम्र नहीं देखते, बल्कि व्यक्ति की भावनाओं और जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। राखी ने अपनी निजी जिंदगी का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने Gulzar से शादी की थी, तब उनकी उम्र 40 वर्ष थी। उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते की सफलता का आधार आपसी समझ, सम्मान और खुशी होती है, न कि उम्र। सोशल Media पर आमिर खान की कथित तीसरी शादी को लेकर बहस जारी है, लेकिन राखी गुलजार के बयान ने इस चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को अपनी खुशी और जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है।
Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एकजुट कर एक मजबूत मंच बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सहयोगी दलों के बीच एकजुटता और साझा सोच की कमी के कारण गठबंधन कमजोर पड़ गया। एक इंटरव्यू के दौरान संजय झा से पूछा गया कि वर्ष 2023 में इंडिया गठबंधन की पहली बैठक पटना में नीतीश कुमार के आवास पर हुई थी, फिर जेडीयू उससे अलग क्यों हो गई। इस पर उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी दलों का एक दिशा में काम करना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। संजय झा ने आरोप लगाते हुए कहा कि “दो लोगों ने इंडिया अलायंस को खत्म कर दिया। उनका नाम ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल है।” उनके अनुसार चुनाव के दौरान गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट रणनीति का अभाव दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी गठबंधन में शामिल दलों के बीच साझा लक्ष्य और समन्वय नहीं होता, तो उसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ता है। यही वजह रही कि विपक्षी एकता की कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। संजय झा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि उनके इस आरोप पर इंडिया गठबंधन के अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
CBI Raid in 661 Crore Fund Scam: हरियाणा-चंडीगढ़ में 6 ठिकानों पर छापेमारी

CBI Raid in 661 Crore Fund Scam: हरियाणा-चंडीगढ़ में 6 ठिकानों पर छापेमारी

हरियाणा और चंडीगढ़ में सामने आए 661 करोड़ रुपये के कथित सरकारी फंड घोटाले की जांच तेज हो गई है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 6 जून को चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर के 6 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़ा है, जिसमें IDFC First Bank और AU Finance Bank के माध्यम से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जांच के दौरान हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के फंड में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। सीबीआई की जांच में चंडीगढ़ नगर निगम और CREST (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी) के खातों में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर भी तलाशी ली गई। इसके अलावा मामले से जुड़े अधिकारियों और निजी कंपनियों के परिसरों की भी जांच की गई। जांच के दायरे में आई Vipam Consultancy Pvt. Ltd. और उसके निदेशक के ठिकानों पर भी सीबीआई की टीम ने दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसी अब जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामले की आगे की पड़ताल कर रही है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी फंड के इस्तेमाल और निगरा
Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर शहर के कई इलाकों में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है। इंटरनेट बंद होने का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ सकता है जो अपने रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर हैं। छात्रों की पढ़ाई, ऑनलाइन भुगतान, व्यापारिक गतिविधियां और डिजिटल सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानें। स्थानीय लोगों का मानना है कि इंटरनेट बंद होने से असुविधा जरूर होगी, लेकिन यदि इससे शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहती है तो सभी को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
तमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहास

तमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहास

Bangladesh क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) का नया अध्यक्ष चुना गया है। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है। इससे पहले वह बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने अप्रैल में BCB के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था। इसके बाद तमीम इकबाल को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बाद में जांच समिति की सिफारिशों और प्रशासनिक बदलावों के आधार पर बोर्ड में नई व्यवस्था लागू की गई। यह फैसला पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए चुनावों को लेकर लगे आरोपों की जांच के बाद गठित पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। समिति ने क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। 37 वर्षीय तमीम इकबाल अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं। क्रिकेट के मैदान पर अपनी शानदार बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचान बनाने वाले तमीम से अब क्रिकेट प्रशंसकों को बोर्ड प्रशासन में भी सकारात्मक बदलावों की उम्मीद है। बांग्लादेश क्रिकेट के लिए यह एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि तमीम इकबाल अपने अनुभव का उपयोग कर देश के क्रिकेट को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

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