मुंबई में अपने सपनों को पूरा करने आए कई कलाकारों के लिए संघर्ष का दौर आसान नहीं होता। कई बार लंबे इंतजार के बाद भी काम नहीं मिलता और इंसान वापस लौटने का फैसला कर लेता है। Composer धीरेंद्र के साथ भी कुछ ऐसा ही होने वाला था। वह मुंबई छोड़ने का मन बना चुके थे, तभी उन्हें ‘हनुमान अंश’ के लिए संगीत तैयार करने का मौका मिला।
धीरेंद्र के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का ऑफर उनके लिए किसी उम्मीद की तरह आया। उन्होंने बताया कि धुन बनाने से पहले उन्होंने बाबा जी का स्मरण किया और इसके बाद कुछ ही मिनटों में उनके मन में धुन तैयार हो गई।
मुंबई छोड़ने का बना लिया था मन
धीरेंद्र ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि मुंबई में काम की तलाश के दौरान कई मुश्किलें आईं। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने शहर छोड़कर वापस जाने का फैसला कर लिया था।
इसी बीच उन्हें ‘हनुमान अंश’ से जुड़ा ऑफर मिला। धीरेंद्र के लिए यह मौका सिर्फ एक नया प्रोजेक्ट नहीं था, बल्कि उनके सफर में एक नया मोड़ लेकर आया।
बाबा जी का स्मरण किया और बन गई धुन
धीरेंद्र ने बताया कि जब उन्हें प्रोजेक्ट के लिए संगीत तैयार करना था, तब उन्होंने पहले बाबा जी का स्मरण किया। इसके बाद उन्होंने धुन पर काम शुरू किया।
उनके मुताबिक, करीब 5 मिनट में धुन तैयार हो गई। धीरेंद्र के लिए यह अनुभव काफी खास रहा और उन्होंने इसे अपने जीवन का यादगार पल बताया।
‘हनुमान अंश’ से जुड़ना रहा खास अनुभव
हनुमान जी से जुड़ी कहानी और भावनाओं वाले प्रोजेक्ट में संगीत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे विषय में धुन सिर्फ कानों को अच्छी लगना ही नहीं, बल्कि कहानी की भावनाओं को भी दर्शाती है।


