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गुरुपूर्णिमा स्पेशल: गिरिराज जी की परिक्रमा के लिए मथुरा जाने वाली ट्रेनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सफर हुआ मुश्किल

गुरुपूर्णिमा (10 जुलाई) के पावन अवसर पर गिरिराज जी की परिक्रमा के लिए मथुरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से रेलवे और बस सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी देशभर से हजारों भक्त मथुरा की ओर रवाना हो रहे हैं, जिससे ट्रेनों और बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। ट्रेनों में भीड़ का आलम – लटककर कर रहे हैं सफर मथुरा की तरफ जाने वाली लगभग सभी ट्रेनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग जिस भी ट्रेन में थोड़ी सी जगह देख रहे हैं, उसी में लटककर यात्रा कर रहे हैं। ट्रेनों का मथुरा पर स्टॉपेज न होने पर यात्री चेन पुलिंग का सहारा ले रहे हैं।ग्वालियर से गुजरने वाली अधिकतर ट्रेनों के रिजर्व कोच अब जनरल कोच जैसे नजर आ रहे हैं। सीट बुक कराने वाले यात्रियों को भी केवल खड़े होकर यात्रा करनी पड़ रही है। जत्थों में आ रहे श्रद्धालु – जयकारों के साथ हो रही चढ़ाई स्टेशनों पर श्रद्धालुओं के जत्थे “गिर्राज जी महाराज की जय” के जयकारों के साथ ट्रेनों में सवार हो रहे हैं। ट्रेनों में जगह न मिलने के कारण अब लोग कार और बसों से मथुरा जा रहे हैं। अधिकतर यात्री सुबह 5 बजे निकलकर 10 बजे तक मथुरा पहुंचते हैं और 11-12 बजे के बीच परिक्रमा शुरू करते हैं। मथुरा में प्रवेश से पहले ही रोकी जा रही गाड़ियां भीड़ के कारण स्थानीय प्रशासन ने ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए वाहनों को शहर से 4-5 किलोमीटर पहले ही रोकना शुरू कर दिया है। इससे परिक्रमा का समय दोपहर 2-3 बजे शुरू होकर देर रात 10-11 बजे तक खिंच रहा है। वहीं जिन श्रद्धालुओं ने पहले से होटल बुक कर रखा है, वही रुक पा रहे हैं, अन्य लोगों को लौटना पड़ रहा है। बसों और टैक्सियों का किराया हुआ महंगा ग्वालियर व आस-पास के शहरों से चलने वाली सभी बसें खचाखच भरी हुई हैं। हालत यह है कि गैलरी तक में खड़े होने की जगह नहीं है। प्राइवेट बस संचालक मनमाफिक किराया वसूल रहे हैं। टैक्सियों का किराया भी 4000-4500 से बढ़कर अब 5000-5500 रुपए तक पहुंच गया है। बावजूद इसके, टैक्सियों को भी 5-7 किमी पहले ही रोक दिया जा रहा है। यात्रियों की परेशानी – “पानी भी नहीं मिल रहा” स्टेशन पर मौजूद महिला श्रद्धालु मंजू ने बताया, “मैं पिछले 2 घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रही हूं। अगर ट्रेन नहीं आई, तो दूसरी ट्रेन पकड़ लूंगी। स्टेशन पर पीने का पानी तक नहीं मिल रहा, टिकट भी नहीं ले पा रही हूं।”वहीं यात्री बलवीर ने कहा, “मैं मथुरा जा रहा हूं, लेकिन ट्रेन एक घंटे लेट है और हर कोच में भीड़ है। गिर्राज जी की परिक्रमा करने की भावना ही हमें खींच रही है।” 📌 Permalink: https://deshharpal.com/gurupurnima-mathura-train-crowd-2025📌 Website: www.deshharpal.com
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बिलासपुर रेलवे जोन में टिकट माफिया पर बड़ा एक्शन, ढाई साल में 756 दलालों से 2.43 करोड़ के टिकट जब्त

बिलासपुर।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने अवैध टिकट दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले ढाई साल में बिलासपुर, रायपुर और नागपुर रेल मंडल में 756 से ज्यादा टिकट दलालों को पकड़ा गया है और इनसे 2.43 करोड़ रुपए के ई-टिकट जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और वाणिज्य विभाग की संयुक्त मुहिम का हिस्सा है। ई-टिकट सिस्टम में सेंध, यात्रियों को हो रही थी परेशानी ये टिकट दलाल IRCTC के ई-टिकट सिस्टम में सेंध लगाकर आम यात्रियों के लिए कृत्रिम संकट खड़ा कर देते हैं। बाद में यही टिकट मनमानी कीमतों पर बेचते हैं। इससे असली यात्रियों को न तो समय पर टिकट मिल पाता है और न ही सही कीमत पर। 1 जनवरी से 30 जून 2025 तक 136 दलाल पकड़े गए ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के पहले 6 महीनों में ही 136 अवैध दलाल पकड़े गए हैं। इनके पास से 33.30 लाख रुपए के टिकट जब्त किए गए। 2023 और 2024 में हुआ बड़ा खुलासा जून में ही 30 दलाल सलाखों के पीछे रेलवे हर महीने 2 से 3 स्पेशल ड्राइव चलाकर टिकट माफिया पर शिकंजा कस रहा है। हाल ही में जून में 30 अवैध दलालों को गिरफ्तार किया गया है। इस अभियान में RPF की गुप्तचर शाखा भी सक्रिय रूप से शामिल है। Deshharpal का निवेदन – टिकट हमेशा IRCTC जैसे आधिकारिक माध्यमों से ही बुक करें। और ऐसी ही सच्ची, असरदार खबरों के लिए जुड़े रहिए – www.deshharpal.com
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खंडवा में कॉलेज छात्रा से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार; सोशल मीडिया से नंबर लेकर रची थी साजिश

खंडवा।मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता की शिकायत पर मोघट रोड थाना पुलिस ने केस दर्ज करते हुए आरोपी को महज 12 घंटे में गिरफ्तार कर लिया। बैतूल की रहने वाली है पीड़िता 19 साल की यह छात्रा बैतूल जिले की रहने वाली है और खंडवा में रहकर सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रही है। वह कॉलेज के छात्रावास में रहती है। आरोपी राजेश मस्कोले, उसी के गांव का रहने वाला है और दोनों परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे। सोशल मीडिया से निकाला नंबर, बनाया प्लान पुलिस के अनुसार आरोपी राजेश किसी काम से खंडवा आया था। उसने पीड़िता का मोबाइल नंबर एक सोशल मीडिया ग्रुप से चुराया और संपर्क किया। फिर मिलने के बहाने उसे शहर के नागचून पार्क के पास एक सुनसान रास्ते पर ले गया और वहां जबरन दुष्कर्म किया। धमकी दी, इसलिए नहीं की शिकायत यह घटना 28 जून की शाम करीब 5:30 बजे की है। जब छात्रा ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। डर के चलते उसने तुरंत किसी को कुछ नहीं बताया। बाद में वह अपने गांव गई और परिजनों को पूरी बात बताई। परिजनों के सहयोग से वह खंडवा लौटी और थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता की मदद से आरोपी गिरफ्तार टीआई धीरेश धारवाल के मुताबिक, पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया। आरोपी खंडवा में ही छिपा हुआ था, लेकिन पुलिस ने उसे ट्रैक कर शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। शाम तक उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। Deshharpal पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद करता है और इस अपराध की कड़ी निंदा करता है।ऐसी खबरों से जुड़ी हर अपडेट पढ़ने के लिए विज़िट करें – www.deshharpal.com
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ग्वालियर की चेतकपुरी सड़क बार-बार धंसी, दो इंजीनियर सस्पेंड, ठेकेदार पर अब तक चुप्पी

ग्वालियर।ग्वालियर में महल रोड के नाम से जानी जाने वाली नवनिर्मित चेतकपुरी सड़क लगातार धंसती जा रही है। महज़ 12 दिनों में 10 बार इस सड़क के धंसने ने प्रशासन की पोल खोल दी है। अब इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के दो कार्यपालन यंत्री – पवन सिंघल और सुरेश अहिरवार को निलंबित कर दिया गया है। यह फैसला जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट के निर्देश पर हुआ। प्रभारी मंत्री खुद सड़क नहीं देखने पहुंचे गौर करने वाली बात ये है कि मंत्री सिलावट दो दिन से ग्वालियर में मौजूद हैं, लेकिन इतनी बड़ी घटना के बाद भी चेतकपुरी सड़क का निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। जब सवाल उठा तो उन्होंने शनिवार को आने की बात कही। सीएम के दौरे पर ‘आप’ का घेराव शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ग्वालियर में रहेंगे। इस मौके पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता ज़िला अध्यक्ष अमिताभ पांडे के नेतृत्व में सीएम का घेराव कर ज्ञापन सौंपेंगे। वे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। इंजीनियर सस्पेंड, ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं! नगर निगम ने इंजीनियरों को तो निलंबित कर दिया, लेकिन सड़क निर्माण करने वाली ठेकेदार कंपनी HNS और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बनाने वाली जैन एंड राय कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि जानकारों का मानना है कि ठेकेदार की लापरवाही भी उतनी ही बड़ी है। बार-बार धंसने के 3 बड़े कारण प्रोजेक्ट का स्कोप 📢 जनता की आवाज़ उठाता रहेगा Deshharpal!🔗 www.deshharpal.com पर पढ़ें देश, प्रदेश और आपके शहर की सच्ची खबरें।
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फर्जी मान्यता रैकेट में CBI का शिकंजा: रावतपुरा सरकार, इंडेक्स चेयरमैन और पूर्व UGC प्रमुख आरोपी

भोपाल।देशभर के मेडिकल कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता दिलवाने के मामले में CBI ने बड़ा खुलासा किया है। इस घोटाले में रावतपुरा सरकार उर्फ रविशंकर महाराज, इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया, और पूर्व UGC चेयरमैन व DAVV के पूर्व कुलपति डीपी सिंह को आरोपी बनाया गया है। CBI की एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि कॉलेजों को मान्यता दिलाने और उसका रिन्यूअल कराने के बदले मोटी रिश्वत वसूली जा रही थी। भारी रिश्वत लेकर दिलवाई जा रही थी मान्यता CBI के मुताबिक, सुरेश भदौरिया की गहरी पैठ स्वास्थ्य मंत्रालय में थी। वह कॉलेजों को नियमों को ताक पर रखकर फर्जी मान्यता दिलवाता था। इसके बदले 3 से 5 करोड़ तक की रिश्वत वसूल की जाती थी। यही नहीं, निरीक्षण के दौरान कॉलेज में अस्थायी डॉक्टरों को स्थायी दिखाने के लिए फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस का भी सहारा लिया गया। पूर्व UGC प्रमुख डीपी सिंह की संदिग्ध भूमिका एफआईआर में डीपी सिंह का नाम भी शामिल किया गया है। वह पहले DAVV और BHU के कुलपति रह चुके हैं और अप्रैल 2024 से TISS (टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज) के चांसलर हैं। आरोप है कि उन्होंने रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज को NMC की पॉजिटिव रिपोर्ट दिलवाने में मदद की। CBI अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। सिस्टम के अंदर से मिल रही थी जानकारी CBI ने स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी चंदन कुमार को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि वह सुरेश भदौरिया को NMC निरीक्षण से जुड़ी गोपनीय जानकारियाँ—जैसे टीम कब आएगी, कौन-कौन सदस्य होंगे—पहले ही लीक कर देता था। मामला दर्ज होते ही भदौरिया फरार हो गया है। रावतपुरा सरकार कॉलेज से शुरू हुई थी जांच CBI की जांच रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज से शुरू हुई थी, जहां से यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि देशभर में 40 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज इस रैकेट में शामिल हैं। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज का नाम भी इसी कड़ी में सामने आया। दलाल नेटवर्क और साठगांठ इस पूरे मामले में एक संगठित दलाल नेटवर्क सक्रिय था। भदौरिया और रविशंकर महाराज दोनों भिंड जिले के लहार क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने मिलकर पूरे देश में मेडिकल, डेंटल, फार्मेसी और मैनेजमेंट कॉलेजों को मालवांचल यूनिवर्सिटी से जोड़कर एक जाल बिछाया। भदौरिया खुद यूनिवर्सिटी और मयंक वेलफेयर सोसायटी का संचालन करते हैं। ऐसी ही भरोसेमंद और बेबाक खबरों के लिए पढ़ते रहिए – www.deshharpal.com
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अब बिलासपुर को मिलेगा मेडिकल सिटी का तोहफा, नहीं जाना पड़ेगा रायपुर इलाज के लिए

एजुकेशन हब के बाद अब बिलासपुर मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। शहर में जल्द ही मेडिकल सिटी विकसित की जाएगी, जहां मरीजों को एक ही स्थान पर तमाम जांच और इलाज की सुविधाएं मिलेंगी। यह परियोजना ना केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव लाएगी, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी आसान बनाएगी। कई बार जांच के लिए जाना पड़ता था बाहर अभी तक बिलासपुर के मरीजों को जटिल जांचों और विशेष इलाज के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर या रायपुर तक का सफर करना पड़ता है। शहर में जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो जैसे बड़े अस्पताल तो हैं, लेकिन कई आधुनिक मेडिकल सुविधाओं का एकीकृत केंद्र अब तक नहीं था। अब एक ही जगह होगा इलाज और जांच नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने बताया कि मेडिकल सिटी की योजना पूरी तरह तैयार है। इसमें आधुनिक जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, और मल्टी-स्पेशियलिटी हेल्थ सेंटर्स एक ही परिसर में मौजूद होंगे। परियोजना के लिए फंडिंग का तरीका भी तय है— कहां बनेगी मेडिकल सिटी? ये हैं संभावित स्थान नगर निगम फिलहाल तीन प्रमुख जगहों पर जमीन तलाश रहा है: डीपीआर तैयार होगा, फिर आगे की प्रक्रिया शुरू प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए सबसे पहले डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाएगी। इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति होगी और शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। जमीन फाइनल होते ही निर्माण और विकास की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। Deshharpal की खास राय: बिलासपुर के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ी सौगात की तरह है। मेडिकल सिटी बनने से आम आदमी को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और साथ ही आसपास के जिलों के लोगों को भी फायदा मिलेगा। उम्मीद है कि यह योजना जल्द ही साकार होगी और छत्तीसगढ़ को हेल्थकेयर के क्षेत्र में एक नई पहचान देगी। 📌www.deshharpal.com – आपके शहर, आपके सरोकार की आवाज
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25 लाख की ठगी: रिटायर्ड फौजी को बेची सरकारी जमीन, 15 साल बाद फिर किया दावा, अब खुद दर्ज कराई FIR

देश सेवा के बाद शांति से खेती करना चाह रहे एक रिटायर्ड फौजी के साथ दिल दहला देने वाला धोखा हुआ है। सेना से रिटायर देवप्रकाश दुबे को मझगवां गांव के रहने वाले रिखीराम और उसके बेटों ने मिलकर ठगा। सरकारी जमीन को अपनी बताकर 25 लाख रुपए ऐंठ लिए और अब जब पैसे वापस मांगे गए तो उल्टा उनके खिलाफ हरिजन थाने में मारपीट और जातिसूचक शब्दों की शिकायत दर्ज करा दी। कब, क्या हुआ – घटनाक्रम की पूरी कहानी शिकायत पर उल्टा केस कर दिया देवप्रकाश ने जब पैसे वापस मांगे तो रिखीराम ने खुद हरिजन कल्याण थाने में जाकर उनके खिलाफ शिकायत कर दी — कि मारपीट हुई, जातिसूचक गालियां दी गईं और जमीन पर कब्जा किया गया। लेकिन जब दुबे ने चेक और लेनदेन के दस्तावेज दिखाए तो पुलिस ने उस शिकायत को खारिज कर दिया। जमीन की कहानी भी दोहरी निकली रिखीराम पहले ही यह जमीन रमेश सोनी को बेच चुका था, और बाद में दुबे को। अब भी वह इसी जमीन को अन्य लोगों को दिखाकर बेचने की कोशिश कर रहा है। इस तरह देवप्रकाश ने कुल मिलाकर 25 लाख रुपए गवां दिए और अब हाथ में कुछ नहीं है। पुलिस कर रही जांच थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने बताया: “शिकायतकर्ता को सरकारी जमीन बेची गई है और आरोपी ने कई बार अलग-अलग समय पर पैसे लिए हैं। मामला गंभीर धोखाधड़ी का है। जांच शुरू कर दी गई है, जल्द दोनों पक्षों को थाने बुलाया जाएगा।” 🔴 विशेष अपील:देश की सेवा करने वाले एक ईमानदार फौजी के साथ हुआ यह धोखा समाज के लिए चेतावनी है। इस मामले में दोषी पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और रिटायर्ड सैनिक इस तरह ठगा न जाए। अगर आप भी किसी प्रॉपर्टी डील में पैसा लगा रहे हैं तो पहले उसके दस्तावेज और जमीन की स्थिति जरूर जांच लें। सरकारी जमीन को बेचने का अधिकार किसी के पास नहीं होता। 📌 जुड़े रहिए www.deshharpal.comके साथ – आपके हक की आवाज
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22 साल बाद मांगा भरण-पोषण, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला की याचिका की खारिज

रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला की 22 साल बाद भरण-पोषण की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इतने लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब महिला को भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार नहीं बनता। हाईकोर्ट ने इस फैसले में फैमिली कोर्ट के आदेश को भी सही ठहराया है। क्या था मामला? दुर्ग निवासी एक महिला ने अपने पति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 144 के तहत याचिका दाखिल की थी। उसने अंतरिम राहत के तौर पर हर महीने 40 हजार रुपए भरण-पोषण और 25 हजार रुपए मुकदमे के खर्च की मांग की थी। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि महिला 22 साल तक शांत रही, और अब अचानक से भरण-पोषण मांगना तर्कसंगत नहीं है। इसी फैसले के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका लगाई थी। महिला थी पटवारी, बाद में हुई बर्खास्त याचिका में महिला ने बताया कि वर्ष 2002 में पति और सास ने उसे और उसके बेटे को घर से निकाल दिया था। इसके बाद वह 2007 में पटवारी के पद पर नियुक्त हुई, लेकिन एक आपराधिक मामले में फंसने के चलते 2019 में बर्खास्त कर दी गई। अब वह बेरोजगार है और जीवन यापन के लिए भरण-पोषण की जरूरत बता रही है। पति ने निकाला, इसलिए हकदार: महिला का तर्क महिला ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि चूंकि पति ने ही उसे घर से निकाला, इसलिए वह पत्नी होने के नाते भरण-पोषण की हकदार है। उसने बताया कि अपनी सारी जमा पूंजी बेटे की पढ़ाई और बीमार पिता की दवाओं में खर्च कर दी है। हाईकोर्ट ने नहीं माना महिला का पक्ष लेकिन हाईकोर्ट महिला के तर्कों से सहमत नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि महिला ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर इतने वर्षों तक चुप क्यों रही, और अब अचानक भरण-पोषण की जरूरत क्यों पड़ी। चूंकि वह पहले सरकारी सेवा में थी, इसलिए माना जा सकता है कि उसके पास कुछ न कुछ आर्थिक संसाधन अवश्य हैं। DeshHarpal का विश्लेषण: यह मामला बताता है कि भरण-पोषण जैसे अधिकारों के लिए भी न्यायिक प्रक्रिया में समय और परिस्थिति की निरंतरता मायने रखती है। यदि कोई पक्ष लम्बे समय तक निष्क्रिय रहता है, तो अदालतें उससे उचित कारणों की अपेक्षा रखती हैं। www.deshharpal.com — जहां हम लाते हैं आपके लिए कानून, समाज और व्यवस्था से जुड़ी सबसे अहम खबरें, निष्पक्ष और सरल भाषा में।
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केदारनाथ से लौट रहे यात्रियों की बस अलकनंदा में गिरी, 3 की मौत, 9 लापता, सभी एक ही परिवार से जुड़े

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है, जहां चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की मिनी ट्रैवलर बस अलकनंदा नदी में गिर गई। हादसे में 3 लोगों की मौत, 8 घायल और 9 अब भी लापता बताए जा रहे हैं। यात्रियों का यह ग्रुप राजस्थान के उदयपुर और गोगुंदा इलाके से था, जो केदारनाथ दर्शन के बाद बद्रीनाथ जा रहा था। ट्रक की टक्कर से मिनी ट्रैवलर नदी में गिरी गुरुवार सुबह घोलतीर क्षेत्र, रुद्रप्रयाग में एक ट्रक ने पीछे से मिनी ट्रैवलर को टक्कर मार दी, जिससे वह सीधे गहरी खाई से लुढ़कती हुई अलकनंदा नदी में जा गिरी। हादसे के वक्त बस में कुल 20 लोग सवार थे, जिनमें से 7 लोग राजस्थान के थे। ट्रैवलर गिरते ही कुछ यात्री पहाड़ी पर लटकते हुए बच गए, जिन्हें बाद में एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने बाहर निकाला। सभी यात्री सोनी परिवार से, एक साथ कर रहे थे यात्रा हादसे का शिकार हुए यात्रियों में अधिकतर गोगुंदा निवासी सोनी परिवार के सदस्य हैं। ललित सोनी, जो वर्तमान में सूरत में ज्वैलरी का व्यापार करते हैं, अपने पूरे परिवार और रिश्तेदारों के साथ चारधाम यात्रा पर निकले थे। उनके साथ पत्नी, चार बच्चे, बहनें, दामाद, मां और अन्य पारिवारिक सदस्य मौजूद थे। रिश्तेदारों से मिली जानकारी, कुछ घायल अस्पताल में भर्ती ललित सोनी के रिश्तेदार कुंदन सोनी, जो उदयपुर में रहते हैं, ने बताया कि 10 दिन पहले परिवार केदारनाथ दर्शन कर चुका था और अब बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हुआ था। उन्होंने बताया कि “हमारी बात ईश्वर सोनी और भावना से हुई है, जो घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।” रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, NDRF और SDRF मौके पर घटनास्थल पर NDRF और SDRF की टीमों के साथ स्थानीय पुलिस राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है। लापता लोगों की तलाश जारी है और घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया है। उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा: “रुद्रप्रयाग में टेंपो ट्रैवलर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर अत्यंत दुखद है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। मैं ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।” Permalink(https://deshharpal.com): rudraprayag-bus-accident-alknanda-rajasthan-tourists-dead-missing
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दौसा (राजस्थान) में दर्दनाक वारदात: 6 महीने की बच्ची की संदिग्ध मौत, मां ने पिता पर दीवार से पटककर हत्या करने का आरोप लगाया

राजस्थान के दौसा जिले के कोलवा थाना क्षेत्र में एक 6 महीने की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है। मां गीता देवी ने पति राजेंद्र प्रजापति पर नशे में बच्ची को दीवार से पटककर मारने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। यह घटना गुरुवार सुबह सामने आई, जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गई है। बच्ची को पिता ने नशे में दीवार पर पटका: मां का आरोप कोलवा थाना प्रभारी अजय सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मृत बच्ची की पहचान परी (6 माह) के रूप में हुई है। गीता देवी का कहना है कि बुधवार रात पति राजेंद्र शराब के नशे में था। आपसी झगड़े के बाद उसने गुस्से में आकर बच्ची को दीवार पर फेंक दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। झगड़े के बाद मां घर छोड़कर गई थी, बच्ची पिता के पास थी परिजनों के अनुसार, घरेलू विवाद के चलते गीता देवी बुधवार रात अपनी बड़ी बेटी को लेकर घर से बाहर चली गई थी। इस दौरान परी अपने पिता राजेंद्र के पास थी। गुरुवार सुबह जब गीता घर लौटी, तो बच्ची मृत अवस्था में पड़ी मिली। जांच में जुटी एफएसएल टीम, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस ने बताया कि बच्ची के शरीर पर कोई स्पष्ट चोट के निशान नहीं मिले हैं। लेकिन मां की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) टीम को दौसा से बुलाया गया है, जो मौके पर जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शराब का आदी है आरोपी, पहले भी करता था झगड़े प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राजेंद्र शराब पीने का आदी है और अक्सर घर में नशे की हालत में मारपीट करता था। पति-पत्नी के बीच पहले से ही लंबे समय से विवाद चल रहा था। दंपती की तीन बेटियां हैं। राजेंद्र के भाई ने दी सफाई राजेंद्र के बड़े भाई गिरिराज ने बच्ची का शव हॉस्पिटल में पहुंचाया और बताया कि “मुझे दोनों के बीच झगड़े की कोई जानकारी नहीं थी। मैं करीब 100 मीटर दूर दूसरे मकान में रहता हूं।” 🔗 Permalink(www.deshharpal.com): dausa-baby-murder-father-accused-koalwa-police-investigation
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Gold Silver Market Update: रिकॉर्ड तेजी के बाद फिसले दाम

महंगाई के दौर में सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए बुधवार का दिन राहत भरा रहा। सर्राफा बाजार से आई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। 10 ग्राम सोना ₹558 सस्ता हो गया है, जबकि चांदी के भाव में ₹744 प्रति किलोग्राम की कमी आई है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार ऊंचाई पर बने रहने के बाद कीमती धातुओं में आई यह नरमी आम खरीदारों के साथ-साथ निवेशकों का भी ध्यान खींच रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की रणनीति में बदलाव का असर सीधे सोने-चांदी की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। आज कितना है सोने का भाव? ताजा बाजार दरों के अनुसार, 24 कैरेट सोना करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई है। कैरेट के हिसाब से Gold Rate शहर, टैक्स और ज्वेलर्स के अनुसार इन कीमतों में मामूली अंतर संभव है। चांदी के भाव में भी आई गिरावट सोने के साथ-साथ चांदी भी सस्ती हुई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी का भाव करीब ₹2,48,400 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले चांदी लगातार तेजी के दौर में थी, लेकिन अब बाजार में कुछ नरमी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में आई यह गिरावट फिलहाल सीमित हो सकती है, क्योंकि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। क्यों घटे सोना और चांदी के दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों से जुड़े फैसलों पर टिकी हुई है। ऐसे माहौल में कई निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसका असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा। इसके अलावा डॉलर की मजबूती, वैश्विक आर्थिक आंकड़े और मध्य पूर्व में चल रहे घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्या यह खरीदारी का सही समय है? ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए मौजूदा गिरावट एक अच्छा मौका मानी जा रही है। खासकर शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए कई खरीदार इस समय बाजार पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी से पहले हॉलमार्क, शुद्धता और स्थानीय बाजार के ताजा रेट की जांच जरूर कर लें। निवेश के नजरिए से भी एकमुश्त निवेश की बजाय चरणबद्ध खरीदारी अधिक सुरक्षित मानी जाती है। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाओं और केंद्रीय बैंकों के फैसलों का असर सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए निवेशकों और खरीदारों दोनों को बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। फिलहाल, कीमतों में आई यह गिरावट उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है जो लंबे समय से सोना या चांदी खरीदने का इंतजार कर रहे थे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में पुरानी बैटरियों के अवैध कारोबार पर सख्ती, बिना रजिस्ट्रेशन खरीद-बिक्री करने वालों पर होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में पुरानी और खराब बैटरियों के अवैध कारोबार पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण और आवश्यक दस्तावेजों के पुरानी बैटरियों का खरीद-बिक्री, भंडारण या परिवहन करना कानूनन अपराध है। मंडल के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के कई क्षेत्रों में कबाड़ और पुरानी बैटरियों का कारोबार नियमों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। केवल पंजीकृत कारोबारी ही कर सकेंगे कारोबार पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बताया कि बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2022 के तहत पुरानी और खराब बैटरियों का संग्रहण, भंडारण, परिवहन और रीसाइक्लिंग केवल अधिकृत एवं पंजीकृत संस्थाओं द्वारा ही किया जा सकता है। संबंधित कारोबारियों के लिए खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े सभी दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है। खुले में बैटरियां रखने पर भी होगी कार्रवाई मंडल ने चेतावनी दी है कि खुले स्थान पर पुरानी बैटरियों का ढेर लगाना, बिना अनुमति उनका भंडारण करना या अवैध तरीके से खरीद-बिक्री करना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रदेश में चलेगा विशेष जांच अभियान पर्यावरण संरक्षण मंडल जल्द ही राज्यभर में विशेष जांच अभियान शुरू करने जा रहा है। अभियान के दौरान स्क्रैप डीलर, कबाड़ कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और बैटरी व्यापार से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान गंभीर अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लोगों से सहयोग की अपील मंडल ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी क्षेत्र में पुरानी बैटरियों का अवैध भंडारण, परिवहन या कारोबार होता दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय या पर्यावरण संरक्षण मंडल को देने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसे अवैध कारोबारों पर रोक लगाना जरूरी है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com

रायपुर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को जोन-7 की कमान

रायपुर नगर निगम में प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के लिए जिम्मेदारियों का नया बंटवारा किया गया है। निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने आदेश जारी कर कई अधिकारियों को अतिरिक्त दायित्व सौंपे हैं। जारी आदेश के अनुसार स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को जोन क्रमांक-7 के प्रभारी जोन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को मिली नई जिम्मेदारी निगम प्रशासन ने डॉ. तृप्ति पाणिग्रही को मुख्यालय स्वास्थ्य अधिकारी, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना और पंजीयक जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन के दायित्वों से मुक्त करते हुए जोन-7 की जिम्मेदारी सौंपी है। नगर निगम का मानना है कि इस बदलाव से जोन स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन में तेजी आएगी। जागृति साहू और डॉ. अंजलि शर्मा को अतिरिक्त प्रभार आदेश के मुताबिक उपायुक्त जागृति साहू को उनके वर्तमान कार्यों के साथ पंजीयक जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीयन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा को उनके मौजूदा दायित्वों के साथ प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिकारियों के बीच कार्यों के पुनर्वितरण का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बेहतर समन्वय और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करना है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com

रायपुर की प्यास बुझाएगा गजराज बांध! 230 एकड़ जलाशय को शहर की नई लाइफलाइन बनाने की तैयारी

रायपुर की बढ़ती आबादी और भविष्य की पेयजल जरूरतों को देखते हुए गजराज बांध को बड़े जल भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल शुरू हो गई है। कमल विहार स्थित करीब 230 एकड़ क्षेत्र में फैले इस बांध को राजधानी की नई पेयजल लाइफलाइन बनाने की योजना पर काम किया जाएगा। बुधवार को लोकभवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर महापौर मीनल चौबे और नगर निगम अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की। पेयजल के लिए उपयोगी बनाया जाएगा गजराज बांध बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में गजराज बांध का सिंचाई कार्यों में प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है। यदि आवश्यक मरम्मत और विकास कार्य किए जाएं तो इसे रायपुर शहर के लिए एक महत्वपूर्ण पेयजल स्रोत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से शहर को भविष्य में शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी तथा जल संकट की संभावित चुनौतियों से भी निपटा जा सकेगा। विभागों के समन्वय से आगे बढ़ेगी योजना राज्यपाल ने महापौर और संबंधित अधिकारियों को विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहर की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर गंभीरता से काम किया जाना चाहिए। बढ़ती आबादी के बीच अहम कदम रायपुर की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही पेयजल की मांग में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे में 230 एकड़ में फैले गजराज बांध को जल भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना को राजधानी के भविष्य की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह योजना मूर्त रूप लेती है तो आने वाले वर्षों में गजराज बांध रायपुर की जल आपूर्ति व्यवस्था का प्रमुख आधार बन सकता है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
G7

G7 Meeting 2026: होर्मुज में भारतीयों की मौत पर PM Modi ने उठाई आवाज, Trump भी रहे मौजूद

फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा मजबूती से उठाया। खास बात यह रही कि जब प्रधानमंत्री मोदी यह बात रख रहे थे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी बैठक में मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा केवल किसी एक देश का विषय नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। होर्मुज में भारतीयों की मौत पर जताई चिंता हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव के बीच कुछ भारतीय नागरिकों और नाविकों की मौत की खबरों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। G7 के वर्किंग सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस संवेदनशील मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जो लोग समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, उन्हें किसी भी तरह के संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए। Global Trade पर पड़ रहा है असर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव या अवरोध केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के बड़े हिस्से में पहुंचने वाला कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाती है। संवाद और कूटनीति पर दिया जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन इन समस्याओं का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और सहयोग में छिपा है। उन्होंने देशों से आपसी विश्वास बढ़ाने और कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता देने की अपील की। मोदी ने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि सभी देश मिलकर काम करें और संघर्ष की जगह बातचीत को महत्व दें। ट्रम्प की मौजूदगी में भारत ने रखा अपना पक्ष G7 बैठक में डोनाल्ड ट्रम्प समेत कई बड़े वैश्विक नेता मौजूद थे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भारतीय नागरिकों की मौत और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाना भारत की सक्रिय कूटनीति का संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस मंच के जरिए साफ संदेश दिया है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों और समुद्री क्षेत्र में कार्यरत नागरिकों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। G7 Summit में Middle East Crisis रहा प्रमुख मुद्दा इस वर्ष G7 Summit में मध्य पूर्व का तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत ने भी अपने हितों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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