नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले भारत और चीन के रिश्तों को लेकर हलचल बढ़ गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। उनका यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला India Visit होगा। सबसे ज्यादा नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Xi Jinping की Bilateral Meeting पर है।
2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे Xi Jinping
शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई थी। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बड़ा झटका दिया।
सीमा पर तनाव के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक रिश्ते मुश्किल दौर से गुजरे। राजनीतिक बातचीत, कारोबार और निवेश पर भी इसका असर दिखाई दिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की है।
Modi-Xi Meeting पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच LAC, Border Peace, Trade और Economic Relations जैसे कई अहम मुद्दे हैं।
अगर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होती है, तो सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालिया रिपोर्टों में भी इस बैठक में LAC की स्थिति और तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की संभावना जताई गई है।
Galwan Clash के बाद बदले भारत-चीन के रिश्ते
2020 की गलवान झड़प भारत-चीन संबंधों के लिए एक बड़ा turning point साबित हुई थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई।
समय के साथ सीमा पर स्थिति को संभालने के लिए दोनों पक्षों ने बातचीत का रास्ता बनाए रखा। अब BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी और जिनपिंग की आमने-सामने बातचीत को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
Trade और Business Relations भी बड़ा मुद्दा
भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही चुनौती नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन इसके साथ कई तरह की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।
चीनी कंपनियों के निवेश, वीजा, तकनीक और संवेदनशील क्षेत्रों में कारोबार को लेकर भारत सतर्क रहा है। वहीं कुछ भारतीय कारोबारी भी चीन के साथ व्यापार करते समय अलग-अलग व्यावसायिक और नियामकीय अड़चनों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत से Economic Relations को लेकर भी कोई सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है।
BRICS Summit में बड़े नेताओं का जमावड़ा
12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में BRICS Summit आयोजित हो रहा है। भारत इस बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा से निपटने और महत्वपूर्ण Supply Chains जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से यह Summit काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
क्या India-China Relations में आएगा नया मोड़?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि Modi-Xi Meeting से भारत और चीन के रिश्तों को कितनी नई दिशा मिलती है। दोनों देशों के बीच अभी भी कई मतभेद हैं, लेकिन हाल के महीनों में संवाद और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें दिखाई दी हैं।
अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो इससे सीमा पर शांति, व्यापार और दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक केवल एक बैठक से वर्षों से चले आ रहे मतभेद खत्म नहीं होंगे।
फिलहाल दुनिया की नजर BRICS Summit पर है और खासतौर पर इस बात पर कि PM Modi और Xi Jinping की मुलाकात में क्या बातचीत होती है और भारत-चीन रिश्तों के लिए इससे क्या संदेश निकलता है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!


