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Monsoon Session

Monsoon Session Black Dress में दिखा विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) में सियासी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। विपक्ष ने अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए मंगलवार को संसद परिसर में शक्ति प्रदर्शन किया। INDIA गठबंधन के लगभग सभी सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। विपक्ष का कहना है कि देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा नहीं हो रही है। इसी को लेकर सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और सरकार से जवाब देने की मांग उठाई। PM आवास मार्च के बाद Protest हुआ और तेज संसद में विरोध प्रदर्शन से पहले विपक्षी दल प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाल चुके हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें रास्ते में रोक दिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सड़क पर धरना दिया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे। अब उसी विरोध का दूसरा चरण संसद परिसर में देखने को मिला, जहां विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर अपना संदेश देने की कोशिश की। Black Dress में दिखी विपक्ष की एकजुटता मंगलवार सुबह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे। नेताओं ने संसद परिसर में नारेबाजी की और सरकार से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग दोहराई। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव पूरे प्रदर्शन के दौरान सांसदों के बीच मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। किन मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना? विपक्ष का आरोप है कि बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, चुनाव प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। विपक्ष चाहता है कि इन मुद्दों पर सरकार सदन में विस्तृत जवाब दे। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह संसदीय नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन लगातार हंगामे से सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। संसद की कार्यवाही पर पड़ा असर विपक्ष के प्रदर्शन का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। लोकसभा और राज्यसभा में कई बार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही बाधित रही। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। आगे क्या होगा? INDIA गठबंधन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है तो संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून सत्र के और अधिक हंगामेदार रहने की संभावना है। राजनीतिक नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कब खत्म होगा और संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चल पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ketan Agrawal

Ketan Agrawal Murder Case: Siya-Chetan की साजिश से उठा पर्दा, जांच में सामने आई नई बात

Ketan Agrawal Murder Case में जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि आरोपी Siya और Chetan ने शुरुआत में केतन अग्रवाल को जान से मारने की योजना नहीं बनाई थी, बल्कि पहले उसे अपाहिज बनाने का प्लान तैयार किया गया था। बाद में किसी वजह से साजिश का रुख बदल गया और मामला हत्या तक पहुंच गया। जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, आरोपियों का शुरुआती मकसद केतन को गंभीर नुकसान पहुंचाना था, ताकि वह सामान्य जीवन न जी सके। हालांकि बाद में उन्होंने कथित तौर पर हत्या की योजना बना ली। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर साजिश कब शुरू हुई और इसके पीछे असली वजह क्या थी। पूछताछ में सामने आई साजिश की परतें पुलिस की जांच में आरोपियों से पूछताछ, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन सबूतों से घटना से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिल सकते हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में लगी हैं कि क्या इस मामले में सिर्फ दो लोग शामिल थे या फिर किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। हत्या के पीछे क्या थी वजह? Ketan Agrawal Murder Case में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आरोपियों ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि विवाद, व्यक्तिगत दुश्मनी या किसी अन्य कारण ने इस घटना को जन्म दिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे आने वाले दिनों में कई और खुलासे होने की संभावना है। पुलिस का कहना है कि सभी सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर केतन अग्रवाल हत्याकांड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आए खुलासों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब पुलिस की जांच से ही साफ होगा कि इस साजिश की पूरी कहानी क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Market Update: Silver ने बनाया नया रिकॉर्ड, Gold भी पहुंचा ₹1.43 लाख

देश के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोना (Gold) और चांदी (Silver) ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना दिया। चांदी की कीमत में एक ही दिन में ₹3,159 प्रति किलोग्राम की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव ₹2.22 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1,150 बढ़कर ₹1.43 लाख हो गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों की भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण सोना और चांदी दोनों की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। यदि यही रुझान आगे भी जारी रहा, तो इस साल के अंत तक 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.60 लाख तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा Gold और Silver सर्राफा बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली। चांदी ने पहली बार ₹2.22 लाख प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया, जबकि सोना भी अपने नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार जानकारों के मुताबिक, यह तेजी केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है। बीते कुछ महीनों से सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग शेयर बाजार की अस्थिरता के बीच कीमती धातुओं में निवेश को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सोने-चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में तेजी के पीछे कई अहम वजहें हैं। दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताएं और महंगाई का दबाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है। वहीं, चांदी की मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योगों में इसका उपयोग बढ़ने से इसकी कीमतों को भी लगातार समर्थन मिल रहा है। क्या इस साल ₹1.60 लाख तक पहुंच सकता है Gold? कई मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग मजबूत रहती है, तो इस साल 10 ग्राम सोना ₹1.60 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है। निवेशकों के लिए क्या है सलाह? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए सोना अब भी एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है। हालांकि, रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके भाव को देखते हुए एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है। चांदी में भी भविष्य की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं, क्योंकि निवेश के साथ-साथ औद्योगिक मांग भी लगातार बढ़ रही है। आम ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर? सोना और चांदी के लगातार महंगे होने का सीधा असर आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन से पहले बढ़ती कीमतों के कारण लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है। हालांकि, ज्वेलरी कारोबारियों का मानना है कि जरूरत के मुताबिक खरीदारी जारी रहेगी, लेकिन महंगे दामों के कारण मांग में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raja Raghuvanshi

Supreme Court on Raja Raghuvanshi Murder Case: Sonam Raghuvanshi से कहा- सरेंडर करें

राजा रघुवंशी (Raja Raghuvanshi) हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। अदालत ने मुख्य आरोपी और राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी के सामने दो स्पष्ट विकल्प रख दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि या तो वह ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करें, या फिर उनकी जमानत को लेकर दाखिल याचिका पर उपलब्ध रिकॉर्ड और मेरिट के आधार पर फैसला सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया से दूरी बनाकर राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? जस्टिस एम.एम. सुन्दरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि सोनम रघुवंशी प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने तक आत्मसमर्पण कर देती हैं, तो बाद में उनकी जमानत पर कानून के अनुसार विचार किया जा सकता है। लेकिन यदि वह सरेंडर नहीं करती हैं, तो अदालत राज्य सरकार की अपील पर मेरिट के आधार पर फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र होगी। कोर्ट की इस टिप्पणी को मामले में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय हो सकती है। गिरफ्तारी को लेकर उठे सवाल सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी की ओर से गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यदि गिरफ्तारी के आधार को चुनौती देनी थी, तो यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया गया। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे कानूनी मुद्दों को उचित समय पर उठाया जाना चाहिए। क्या है Raja Raghuvanshi Murder Case? राजा रघुवंशी की मौत उस समय हुई थी जब वह अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ मेघालय में हनीमून पर गए थे। कुछ दिनों बाद उनका शव बरामद हुआ और जांच शुरू हुई। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम रघुवंशी को मुख्य आरोपी बनाया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। इस मामले में कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। बाद में हाईकोर्ट ने सोनम को जमानत दे दी थी, लेकिन मेघालय सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है। अब आगे क्या होगा? फिलहाल गेंद सोनम रघुवंशी के पाले में है। यदि वह अदालत की सलाह मानते हुए सरेंडर करती हैं, तो ट्रायल के दौरान उनकी जमानत पर दोबारा विचार हो सकता है। दूसरी ओर, यदि वह आत्मसमर्पण नहीं करती हैं, तो सुप्रीम कोर्ट उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी तथ्यों के आधार पर फैसला सुना सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आने वाली सुनवाई के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सोनम रघुवंशी अदालत के सुझाव का पालन करती हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Protest: PM आवास तक मार्च, Priyanka के साथ धरने पर बैठे कांग्रेस नेता

संसद परिसर से निकले कांग्रेस नेताओं का काफिला प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ा, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें बैरिकेड्स पर रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसद वहीं धरने पर बैठ गए। पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। Rahul Gandhi ने लगाए गंभीर आरोप धरने के दौरान राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय विरोध को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। Priyanka Gandhi बोलीं- युवाओं की आवाज नहीं दबाई जा सकती प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शन के दौरान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील रवैया अपनाने की जरूरत है। लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और इसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जा सकता। कांग्रेस का दावा- सरकार चर्चा से बच रही कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार संसद में खुली चर्चा से बच रही है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। धरने में शामिल नेताओं ने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए होना चाहिए, न कि पुलिस कार्रवाई के माध्यम से। PM House के आसपास रही हाई सिक्योरिटी प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह अलर्ट मोड पर रही। कई जगह बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन जारी रखा। सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार समाचार लिखे जाने तक केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। क्यों अहम है यह प्रदर्शन? यह विरोध केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। संसद के भीतर बहस और संसद के बाहर प्रदर्शन के जरिए विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और संसद में इस मुद्दे पर आगे क्या चर्चा होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PV Sindhu

PV Sindhu Victory: मुश्किल दौर के बाद शानदार Comeback, विराट Kohli को दिया जीत का Credit

भारतीय बैडमिंटन की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने आखिरकार दो साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए इंटरनेशनल बैडमिंटन में दमदार वापसी की है। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने खिताब अपने नाम किया और जीत के बाद ऐसा खुलासा किया, जिसने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सिंधु ने कहा कि इस कमबैक के पीछे सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि विराट कोहली (Virat Kohli) की एक सलाह ने भी बड़ी भूमिका निभाई। PV Sindhu ने बताया कि जब उनका करियर मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब विराट कोहली से हुई बातचीत ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनने की प्रेरणा दी। उसी बातचीत के बाद उन्होंने अपने खेल और सोचने के तरीके में बदलाव किया, जिसका नतीजा अब खिताब के रूप में सामने आया है। संघर्ष के दौर में मिली विराट की सीख पीवी सिंधु पिछले कुछ समय से चोट, खराब फॉर्म और लगातार हार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही थीं। कई बड़े टूर्नामेंट में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं हो पाया, जिससे उन पर सवाल भी उठने लगे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात विराट कोहली से हुई। सिंधु के मुताबिक, विराट ने उन्हें सलाह दी कि किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे जरूरी उसकी मानसिक मजबूती होती है। उन्होंने कहा कि परिणाम की चिंता छोड़कर अपने खेल पर पूरा ध्यान देना चाहिए। यह बात सिंधु के मन में बैठ गई और उन्होंने उसी दिशा में खुद को तैयार करना शुरू किया। बदली सोच, बदल गए नतीजे सिंधु का कहना है कि पहले वह जीत-हार को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचती थीं। लेकिन अब उन्होंने अपना पूरा फोकस सिर्फ बेहतर प्रदर्शन पर रखा। यही बदलाव उनके खेल में भी साफ दिखाई दिया। हालिया टूर्नामेंट में उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबले खेले। कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखा और निर्णायक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब दो साल बाद इंटरनेशनल खिताब जीत लिया। दो साल बाद फिर बनीं चैंपियन यह खिताब सिंधु के लिए सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि संघर्ष के बाद मिली बड़ी सफलता है। पिछले दो वर्षों में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, फिटनेस पर काम और मानसिक तैयारी ने उन्हें फिर से जीत की राह पर पहुंचा दिया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले भारतीय बैडमिंटन के लिए भी सकारात्मक संकेत है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सिंधु का बयान खिताब जीतने के बाद जब सिंधु ने सार्वजनिक रूप से विराट कोहली का जिक्र किया, तो सोशल मीडिया पर उनकी बातें तेजी से वायरल हो गईं। फैंस ने विराट की सोच और सिंधु की ईमानदारी दोनों की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने लिखा कि महान खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि अपने अनुभव और शब्दों से भी दूसरों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। खिलाड़ियों के लिए बड़ा संदेश पीवी सिंधु की कहानी यह बताती है कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता सिर्फ शारीरिक फिटनेस पर निर्भर नहीं होती। मानसिक मजबूती, सही मार्गदर्शन और खुद पर भरोसा भी उतना ही जरूरी होता है। कभी-कभी एक छोटी-सी सलाह पूरे करियर की दिशा बदल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sikkim

Sikkim Rain 10 लोगों की मौत के बाद तेज हुआ Rescue Operation, PM Modi ने CM Tamang से की बात

हिमालयी राज्य Sikkim एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। जगह-जगह हुए भूस्खलन (Landslide) और बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और केंद्र की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया। लगातार बारिश से बढ़ा संकट पिछले कुछ दिनों से Sikkim में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़कें ध्वस्त हो गईं और कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया। बारिश के कारण कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग बंद हो गए हैं। कई स्थानों पर बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे राहत कार्यों में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ रही हैं। 10 लोगों की मौत, कई अब भी लापता राज्य सरकार के अनुसार, राहत अभियान के दौरान अब तक 10 शव बरामद किए जा चुके हैं। कई लोग अब भी लापता हैं और उनके मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। खराब मौसम और लगातार बारिश के बावजूद राहत कार्य बिना रुके जारी है। युद्धस्तर पर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित क्षेत्रों में NDRF, SDRF, भारतीय सेना, आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। भारी मशीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। साथ ही फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा। PM Modi ने CM Tamang से की बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर राज्य के हालात की जानकारी ली। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि केंद्र सरकार राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में हरसंभव सहयोग करेगी। प्रधानमंत्री ने संबंधित एजेंसियों को राज्य सरकार के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं। Amit Shah ने भी दिया हरसंभव सहायता का भरोसा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री तमांग से बातचीत कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने एनडीआरएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने की उच्चस्तरीय समीक्षा मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत सामग्री, भोजन, दवाइयां और आवश्यक सुविधाएं बिना किसी देरी के प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जाएं। राज्य सरकार ने विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर भी तैयार किए हैं। मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा राज्य सरकार ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी राष्ट्रीय आपदा राहत मानकों के तहत हरसंभव वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। IMD ने जारी किया Heavy Rain Alert भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सिक्किम और आसपास के पहाड़ी इलाकों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न जाएं और केवल सरकारी सलाह का पालन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi on Paper Leak: संसद में बहस की मांग तेज, Kharge ने कहा- सरकार चर्चा से बच रही है

देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। अब यह मुद्दा संसद तक पहुंच चुका है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल परीक्षा प्रणाली की खामी नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर राष्ट्रीय सवाल है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। Rahul Gandhi ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवा वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं उनके सपनों और भरोसे दोनों को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका मानना है कि संसद में इस विषय पर खुली चर्चा होनी चाहिए ताकि सरकार अपनी जिम्मेदारी और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट कर सके। Speaker से मुलाकात, संसद में चर्चा की मांग लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने विपक्ष की ओर से मांग रखी कि पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए समय निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि संसद देश की जनता की आवाज है और करोड़ों छात्रों की चिंता को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर चर्चा होनी चाहिए, ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सके। Kharge का आरोप- विपक्ष को बोलने का मौका नहीं कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया जा रहा है। खड़गे ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में सभापति को पत्र लिखकर विपक्ष को पेपर लीक समेत अन्य जनहित के मुद्दों पर बोलने का समय देने की मांग की है। उनका कहना है कि विपक्ष लगातार युवाओं, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवाल उठाना चाहता है, लेकिन इन विषयों पर चर्चा से बचने की कोशिश की जा रही है। क्यों बढ़ रही है पेपर लीक पर चिंता? बीते कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की कई भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जबकि लाखों उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे छात्रों का समय, आर्थिक संसाधन और मानसिक संतुलन तीनों प्रभावित हुए हैं। इसी वजह से विपक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठा रहा है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं और दोषियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। संसद में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव पेपर लीक को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जब तक इस विषय पर सदन में चर्चा नहीं होगी और सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देगी, तब तक वह इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। छात्रों की निगाहें संसद पर देशभर के लाखों अभ्यर्थी अब संसद की कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं। उनकी उम्मीद है कि राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए ठोस फैसले लिए जाएंगे। छात्रों का मानना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक पर स्थायी समाधान समय की सबसे बड़ी जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pentagon

America vs Iran: Pentagon ने पहली बार मानी 100 सैनिकों के घायल होने की बात

America-Iran War लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब अमेरिका ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि हाल के ईरानी हमलों में उसके 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon ने कहा कि सुरक्षा कारणों और सैन्य अभियानों की संवेदनशीलता को देखते हुए इस जानकारी को तुरंत सार्वजनिक नहीं किया गया था। वहीं, इस खुलासे के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए ईरान के 9 शहरों में एयरस्ट्राइक की है। इन घटनाओं ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। Pentagon ने देर से क्यों दी जानकारी? पेंटागन के मुताबिक, घायल सैनिकों की संख्या पहले इसलिए साझा नहीं की गई क्योंकि इससे चल रहे सैन्य अभियानों और क्षेत्र में तैनात जवानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता था। अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर सैनिकों को विस्फोटों के कारण सिर और शरीर पर हल्की चोटें आई थीं। कई जवान इलाज के बाद दोबारा अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी मेडिकल निगरानी में हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जानकारी छिपाने का उद्देश्य नहीं था, बल्कि सैन्य सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी था। America ने Iran के 9 शहरों पर किया बड़ा हमला घायल सैनिकों की पुष्टि के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को और तेज कर दिया। अमेरिकी सेना ने ईरान के 9 शहरों में मौजूद कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन बेस, हथियार भंडार, कमांड सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम को लक्ष्य बनाया गया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि इन एयरस्ट्राइक का मकसद भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर होने वाले हमलों को रोकना और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। लगातार बढ़ रहा है Middle East का तनाव पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच लगातार जवाबी हमले हो रहे हैं। ईरान समर्थित समूहों द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने कई चरणों में हवाई कार्रवाई की है। ताजा एयरस्ट्राइक को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे Middle East की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया की नजर America-Iran Conflict पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर दुनिया भर के देशों की चिंता भी बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उसके सैनिकों या सैन्य ठिकानों पर दोबारा हमला होता है तो जवाब पहले से अधिक सख्त होगा। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी एयरस्ट्राइक की आलोचना करते हुए उचित जवाब देने की चेतावनी दी है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ता है या फिर कूटनीतिक प्रयास दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में सफल होते हैं। फिलहाल Middle East में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और हर नई सैन्य कार्रवाई वैश्विक राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर डाल सकती है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Delhi High Court on Sonam Wangchuk: Medanta Shift का आदेश, Health को लेकर बढ़ी चिंता

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की सेहत को लेकर चल रही चिंताओं के बीच सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। पिछले चार दिनों से वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर उनके समर्थन में प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी की और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की बात कही। हाईकोर्ट ने क्यों दिया Medanta शिफ्ट करने का आदेश? Sonam Wangchuk की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय रखी गई। इसके बाद कोर्ट ने माना कि बेहतर इलाज और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल भेजा जाना उचित होगा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि इलाज की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी या बाधा न आए। चार दिन से Safdarjung Hospital में भर्ती सोनम वांगचुक पिछले चार दिनों से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह को देखते हुए उन्हें अधिक उन्नत चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। Jantar Mantar पर समर्थकों का प्रदर्शन जारी वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं। प्रदर्शन में छात्रों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है। प्रदर्शन स्थल पर कई बार पुलिस के खिलाफ नारे भी लगाए गए। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे और पूरे इलाके पर नजर रखी गई। आखिर क्यों चर्चा में हैं Sonam Wangchuk? सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में उनका आंदोलन और स्वास्थ्य, दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने बेहतर इलाज की मांग की थी। हाईकोर्ट के ताजा आदेश को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आगे क्या होगा? हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी विस्तृत जांच और आगे का इलाज करेंगे। वहीं, जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट और आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Xi Jinping

BRICS Summit 2026: 7 साल बाद भारत पहुंचे Xi Jinping, Modi-Xi Meeting पर सबकी नजर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) शनिवार को नई दिल्ली पहुंच गए। वह BRICS Summit 2026 में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है, इसलिए उनके दिल्ली पहुंचते ही भारत-चीन रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिनपिंग का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत और चीन के रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य होने की कोशिश कर रहे हैं। 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव आया था। ऐसे में सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति का भारत आना अपने आप में अहम माना जा रहा है। 7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग शी जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच महाबलीपुरम में अनौपचारिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला। अब लंबे अंतराल के बाद जिनपिंग की दिल्ली यात्रा से यह उम्मीद जगी है कि दोनों देश बातचीत के जरिए अपने रिश्तों में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं। Modi-Xi Meeting पर सबसे ज्यादा नजर BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात सबसे बड़ा आकर्षण हो सकती है। दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। भारत और चीन के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन व्यापार असंतुलन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक से आर्थिक मोर्चे पर भी कुछ सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद की जा रही है। गलवान के बाद रिश्तों में आई थी दूरी 2020 के गलवान विवाद ने भारत-चीन संबंधों को मुश्किल दौर में पहुंचा दिया था। सीमा पर तनाव बढ़ने के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर लगातार बातचीत हुई। पिछले कुछ समय में हालात को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों के साथ दोनों देशों के बीच उड़ान, वीजा और अन्य संपर्कों को भी धीरे-धीरे बेहतर करने की कोशिश हुई है। हालांकि, सीमा विवाद अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। BRICS Summit में जुटे बड़े नेता नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit 2026 वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और Global South से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई बड़े संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, BRICS की भूमिका पर भी खास चर्चा हो रही है। भारत-चीन रिश्तों के लिए अहम मौका शी जिनपिंग का भारत दौरा सिर्फ BRICS Summit तक सीमित नहीं है। इसे भारत और चीन के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण मौके के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब सबकी नजर Modi-Xi Meeting पर है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत अगर सकारात्मक रहती है, तो इससे सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर भी आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल, शी जिनपिंग का सात साल बाद भारत पहुंचना ही दोनों देशों के रिश्तों में एक नए chapter की शुरुआत की उम्मीद जगा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saudi

Saudi Pipeline Shutdown: ड्रोन हमले से मचा हड़कंप, Hormuz Crisis के बीच Oil Supply पर नया संकट

मिडिल ईस्ट में तनाव का असर अब सीधे Global Oil Supply पर दिखाई देने लगा है। ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी एक अहम East-West Oil Pipeline को बंद कर दिया है। यह वही पाइपलाइन है, जिसके जरिए रोजाना करीब 50 लाख बैरल तक कच्चा तेल Red Sea के रास्ते भेजा जा रहा था। सऊदी का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब Strait of Hormuz को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे में एक और बड़े Oil Route का प्रभावित होना दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। ड्रोन हमले के बाद लिया गया फैसला रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के रियाद और मदीना क्षेत्र में पाइपलाइन से जुड़े ठिकानों को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। घटना के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पाइपलाइन का ऑपरेशन रोक दिया गया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। घटना के बाद इराक की ओर से भी कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है। क्या है East-West Oil Pipeline? सऊदी अरब की East-West Pipeline देश के तेल कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को Red Sea के किनारे स्थित Yanbu तक पहुंचाती है। इस रूट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तेल को Hormuz Strait से होकर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी समुद्री रास्ते में परेशानी होने पर यह पाइपलाइन Saudi Arabia के लिए एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर काम करती है। हाल में इससे करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल प्रतिदिन भेजे जाने की बात सामने आई है। Hormuz के बाद Pipeline बंद होना क्यों अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण Oil Shipping Routes में से एक है। यहां तनाव बढ़ने पर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की Supply को लेकर चिंता रहती है। ऐसे समय में सऊदी की East-West Pipeline का बंद होना अलग तरह की चुनौती पैदा करता है। जिस रास्ते को Hormuz के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, उस पर भी अब सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है। Red Sea Route पर भी दबाव मिडिल ईस्ट में संकट सिर्फ Hormuz तक सीमित नहीं है। Red Sea और Bab el-Mandeb क्षेत्र में भी लंबे समय से सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। इन इलाकों में तनाव बढ़ने से कई बार Shipping Companies को अपने रास्ते बदलने पड़े हैं। अब Saudi Oil Infrastructure पर हुए ड्रोन हमले ने Energy Supply को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। Oil Prices पर कितना असर पड़ेगा? सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े Oil Producers में शामिल है। इसलिए वहां तेल की Supply या Infrastructure में किसी बड़ी रुकावट का असर International Market पर पड़ सकता है। अगर पाइपलाइन जल्द दोबारा शुरू हो जाती है, तो बाजार में दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन अगर बंदी लंबी खिंचती है और Hormuz तथा Red Sea में भी स्थिति सामान्य नहीं होती, तो Crude Oil Prices में तेजी का खतरा बढ़ सकता है। महंगे कच्चे तेल का असर आगे चलकर Transport और Manufacturing से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक दिखाई दे सकता है। दुनिया की नजर अब Saudi Arabia पर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सऊदी अरब East-West Pipeline को कब तक बंद रखता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में Middle East में ड्रोन हमले और Shipping Security की स्थिति किस दिशा में जाती है। एक तरफ Hormuz में तनाव और दूसरी तरफ Saudi Oil Pipeline पर हमला—इन घटनाओं ने Global Energy Market की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में तेल की Supply और कीमतों पर इसका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Uttarakhand में 170 फीट लंबा पुल बहा, छत्तीसगढ़ में 3 छात्र नदी में लापता

Uttarakhand में 170 फीट लंबा पुल बहा, छत्तीसगढ़ में 3 छात्र नदी में लापता

देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। Uttarakhand से लेकर बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक बारिश और बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। कहीं पुल बह गए हैं तो कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। Uttarakhand में 170 फीट लंबा पुल बहा उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच एक करीब 170 फीट लंबा पुल नदी के तेज बहाव में बह गया। पुल के बह जाने से आसपास के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन और राहत दल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ में नदी में बहे 3 कॉलेज छात्र छत्तीसगढ़ में भी बारिश के बीच बड़ा हादसा सामने आया है। नदी में नहाने गए तीन कॉलेज छात्र लापता हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन को सूचना दी गई। राहत और बचाव दलों ने छात्रों की तलाश शुरू कर दी है। नदी के तेज बहाव के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भी मुश्किलें आ रही हैं। बिहार में 47 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से करीब 47 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में पानी घरों और सड़कों तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है तथा प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। MP और राजस्थान में भी बारिश का दौर मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है। लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। बारिश के इस दौर में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। खासकर नदियों और तेज बहाव वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Black Dog

Black Dog New Packaging: 140 साल पुरानी विरासत को मिला Modern Look

करीब 140 साल पुरानी विरासत वाले स्कॉच व्हिस्की ब्रांड Black Dog ने अपनी पैकेजिंग में बड़ा बदलाव किया है। नए पैक के जरिए ब्रांड ने अपनी पारंपरिक पहचान को बरकरार रखते हुए इसे आज के दौर के हिसाब से नया रूप देने की कोशिश की है। इस बदलाव के साथ ब्रांड ने ‘Savour the Sip’ संदेश को भी सामने रखा है। 1883 से शुरू हुई Black Dog की कहानी Black Dog की शुरुआत वर्ष 1883 में सर वाल्टर मिलार्ड से जुड़ी मानी जाती है। स्कॉटलैंड से शुरू हुआ यह ब्रांड समय के साथ भारत सहित कई बाजारों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। कंपनी के मुताबिक, नए पैकेजिंग डिजाइन में ब्रांड की पुरानी विरासत और आधुनिक विजुअल स्टाइल को एक साथ रखा गया है। पैक पर बारीक डिटेलिंग और प्रीमियम फिनिश के जरिए Black Dog की पहचान को और उभारने की कोशिश की गई है। ‘Savour the Sip’ बना नया Brand Message नई पैकेजिंग के साथ ‘Savour the Sip’ को ब्रांड के प्रमुख संदेश के तौर पर पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह विचार तेज रफ्तार जिंदगी के बीच लोगों को अनुभवों को ठहरकर महसूस करने की सोच से जुड़ा है। ब्रांड की ओर से बताया गया है कि इसकी स्कॉच व्हिस्की स्कॉटलैंड की चुनिंदा डिस्टिलरी में तैयार की जाती है। इनमें Linkwood Distillery भी शामिल है। कंपनी अपने उत्पादों की खासियत को अलग-अलग कास्क में परिपक्व होने की प्रक्रिया और स्कॉटिश माल्ट्स से जोड़ती है। Portfolio में दो प्रमुख Variants नए पैकेजिंग बदलाव के साथ Black Dog के पोर्टफोलियो में दो प्रमुख वेरिएंट को भी अलग पहचान के साथ पेश किया गया है। Black Dog Black Reserve को चुनिंदा स्कॉटिश माल्ट्स से तैयार किया गया मिश्रण बताया गया है। कंपनी के अनुसार इसमें ओक, शेरी और माल्टी फ्लेवर की परतें शामिल हैं। वहीं Black Dog Triple Gold Reserve को ट्रिपल-कास्क मैच्योर्ड स्कॉच के तौर पर पेश किया गया है। कंपनी के मुताबिक इसमें ओक, टॉफी और वनीला जैसे फ्लेवर नोट्स देखने को मिलते हैं। नई Generation पर फोकस ब्रांड का यह बदलाव केवल पैकेजिंग तक सीमित नहीं है। नए डिजाइन और संदेश के जरिए Black Dog बदलते उपभोक्ता वर्ग के साथ अपनी पहचान को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। Diageo India के वाइस प्रेसिडेंट और पोर्टफोलियो हेड वरुण कूरिच के मुताबिक, नई पैकेजिंग ब्रांड की विरासत का सम्मान करते हुए उसे आधुनिक समय के अनुरूप पेश करती है। कंपनी का फोकस ऐसे उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर है जो उत्पाद के पीछे की कारीगरी और अनुभव को महत्व देते हैं। कुल मिलाकर, Black Dog की नई Packaging उसके पुराने heritage और modern branding के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। करीब 140 साल पुरानी पहचान को बरकरार रखते हुए ब्रांड ने अपने visual identity और communication में बदलाव किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
China Southern Airlines

China Southern Airlines: 21 सितंबर से ग्वांगझू-दिल्ली सीधी उड़ान, 6 साल बाद Air Connectivity बहाल

भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय बाद एक और सकारात्मक संकेत देखने को मिला है। चीन की China Southern Airlines 21 सितंबर 2026 से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर शुरू करने जा रही है। करीब छह साल से बंद इस Direct Flight के दोबारा शुरू होने की खबर ऐसे समय आई है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर पहुंच रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान दोनों देशों के बीच सीधी यात्री उड़ानें बंद हो गई थीं। इसके बाद लंबे समय तक हवाई संपर्क पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया। अब China Southern Airlines के इस फैसले से दोनों देशों के बीच यात्रियों और कारोबारी गतिविधियों को राहत मिलने की उम्मीद है। 21 सितंबर से शुरू होगी Direct Flight China Southern Airlines की ग्वांगझू-दिल्ली उड़ान सेवा 21 सितंबर 2026 से दोबारा शुरू होगी। इससे भारत और चीन के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को एक और सीधा विकल्प मिलेगा। ग्वांगझू चीन का एक प्रमुख कारोबारी और औद्योगिक शहर है। ऐसे में दिल्ली के साथ सीधा हवाई संपर्क बहाल होने से बिजनेस ट्रैवल, पर्यटन और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को बढ़ावा मिल सकता है। शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच बड़ा अपडेट इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। उनके दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात पर भी दुनिया की नजर है। भारत और चीन के रिश्तों में 2020 के सीमा विवाद के बाद काफी तनाव देखने को मिला था। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। ऐसे में Direct Flight की वापसी को दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे सामान्य होते संबंधों के एक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। यात्रियों और कारोबारियों को क्या फायदा होगा? सीधी उड़ान शुरू होने से भारत और चीन के बीच यात्रा करने वाले लोगों को कनेक्टिंग फ्लाइट पर निर्भरता कम होगी। इससे समय की बचत हो सकती है और यात्रा पहले के मुकाबले आसान हो सकती है। खासकर कारोबारी यात्रियों, छात्रों और परिवारों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ने की स्थिति में हवाई कनेक्टिविटी की भूमिका और भी अहम हो जाएगी। China-India Relations में धीरे-धीरे बदलाव भारत और चीन के संबंध अभी भी कई संवेदनशील मुद्दों से जुड़े हुए हैं। सीमा विवाद के अलावा व्यापार और रणनीतिक मामलों पर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। इसके बावजूद हाल के महीनों में बातचीत और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम दिखाई दिए हैं। छह साल बाद ग्वांगझू-दिल्ली Direct Flight की वापसी इसी बदलाव की एक कड़ी मानी जा सकती है। अब सबकी नजर BRICS Summit के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की बातचीत और उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों की अगली दिशा पर रहेगी। कुल मिलाकर, शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच चीन की तीसरी एयरलाइन द्वारा भारत के लिए उड़ान सेवा शुरू करने का फैसला सिर्फ Aviation Sector के लिए ही नहीं, बल्कि India-China Relations के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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