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भोपाल की फैक्ट्री में भीषण आग, लकड़ी और केमिकल से रातभर धधकती रहीं लपटें

Bhopal के गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित शुभम एंटरप्राइजेस फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में लकड़ी, प्लाईवुड, केमिकल और थिनर रखा था, जिसके कारण आग तेजी से फैल गई। नगर निगम की दमकल टीम ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि शनिवार दोपहर तक फैक्ट्री के अंदर कई जगह आग सुलगती रही। रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन आग लगने की घटना शुक्रवार-शनिवार की देर रात की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही गांधीनगर, गोविंदपुरा, कोलार, बैरागढ़, फतेहगढ़, आईएसबीटी और कबाड़खाना फायर स्टेशन से दमकलें मौके पर पहुंचीं। आग बुझाने के लिए पानी के कई टैंकर भी लगाए गए। सुबह करीब 9 बजे तक आग की बड़ी लपटों पर काबू पाया गया, लेकिन लकड़ी और केमिकल की वजह से अंदर आग लगातार सुलगती रही। फैक्ट्री में बनते हैं दरवाजे और ब्लैक बोर्ड जानकारी के मुताबिक, शुभम एंटरप्राइजेस में प्लाईवुड, लकड़ी के दरवाजे और ब्लैक बोर्ड बनाए जाते हैं। फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में लकड़ी का सामान और ज्वलनशील केमिकल रखा था। इसी वजह से पानी डालने के बाद भी आग पूरी तरह नहीं बुझ पा रही थी। फायर फाइटर पंकज यादव ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए दो जेसीबी मशीनों की मदद से फैक्ट्री का हिस्सा तोड़ा गया। इसके बाद लकड़ी को अलग-अलग कर आग बुझाने का काम किया गया। आसपास की फैक्ट्रियों को बचाया गया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फैक्ट्री के आसपास तीन से चार अन्य फैक्ट्रियां भी मौजूद थीं। आग उन तक न पहुंचे, इसके लिए दमकलकर्मियों ने लगातार पानी डालकर आग को फैलने से रोका। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हादसे में करोड़ों रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। आग बुझाने में करीब 100 टैंकर पानी का इस्तेमाल किया गया। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में नशे के खिलाफ पंचायतों का अभियान, गांव में निकाली जागरूकता रैली

Bilaspur में नशे और अवैध शराब के खिलाफ अब ग्राम पंचायतें भी सक्रिय हो गई हैं। जिला मुख्यालय से सटे ढेका ग्राम पंचायत में गुरुवार को सरपंच और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के साथ जागरूकता रैली निकाली। इस दौरान लोगों से शराब और नशे से दूर रहने की अपील की गई। साथ ही अवैध शराब बेचने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। गांव-गांव जाकर लोगों को किया जागरूक ढेका ग्राम पंचायत के सरपंच मनीष घोरे और अन्य जनप्रतिनिधि गांव में लगातार नशामुक्ति अभियान चला रहे हैं। वे ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभाव समझा रहे हैं और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। यह अभियान लालखदान महमंद से लगे ढेका पंचायत क्षेत्र में हाईवे किनारे ढाबों और दुकानों में चल रही अवैध गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से भी चलाया जा रहा है। “अवैध दारू-गांजा बंद करो” के लगे नारे रैली के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने “अवैध दारू-गांजा बंद करो” के नारे लगाए। सरपंच मनीष घोरे ने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर अपील की कि गांव को नशामुक्त बनाने में सभी सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस अवैध शराब व मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो पंचायत किसी भी आरोपी का समर्थन नहीं करेगी। अवैध कारोबारियों को दी चेतावनी अभियान के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने ढाबों, चाय-नाश्ते की दुकानों और ठेलों की आड़ में चल रहे अवैध शराब कारोबार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे कारोबारियों को तुरंत अवैध गतिविधियां बंद करने की चेतावनी दी। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को सूचना देने की अपील ग्रामीणों को बताया गया कि नशे की वजह से गांव का माहौल खराब हो रहा है और युवाओं पर इसका गलत असर पड़ रहा है। अभियान के दौरान लोगों से अपील की गई कि किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और ग्राम पंचायत को दें। यह अभियान एसएसपी रजनेश सिंह की पहल से जुड़कर चलाया जा रहा है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में D.Ed अभ्यर्थियों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी, AAP ने सरकार को लिखा पत्र

Chhattisgarh में D.Ed अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर मामला फिर गरमा गया है। Aam Aadmi Party ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 10 जून तक पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई, तो 11 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai को पत्र लिखा है। 2300 पद खाली होने का दावा उत्तम जायसवाल ने दावा किया कि राज्य में सहायक शिक्षक के करीब 2300 पद खाली हैं। इनमें करीब 1600 पद आदिवासी महिला और पुरुष अभ्यर्थियों से जुड़े बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से पात्र अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। 153 दिनों से जारी है प्रदर्शन D.Ed अभ्यर्थी पिछले 153 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी नहीं मिलने से वे आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। AAP नेता ने कहा कि अभ्यर्थी लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला उत्तम जायसवाल ने पत्र में दावा किया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करते हुए जल्द नियुक्ति देनी चाहिए। आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का आरोप पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को कई बार गिरफ्तार किया गया। AAP का कहना है कि आंदोलनकारियों को तीन बार जेल भेजा गया और चार दिन तक हिरासत में रखा गया। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा। “सरकार जल्द फैसला ले” उत्तम जायसवाल ने कहा कि नियुक्ति में लगातार देरी के कारण कई अभ्यर्थी मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने इसे सामाजिक और मानवीय संकट बताते हुए सरकार से संवेदनशील निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 10 जून तक नियुक्ति नहीं हुई, तो 11 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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सागर में शिवरात्रि जुलूस में हमला करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 3 महीने से था फरार

Sagar जिले के देवरी में शिवरात्रि जुलूस के दौरान हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने तीन महीने से फरार चल रहे मुख्य आरोपी 19 वर्षीय मयंक यादव को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शुक्रवार को मुखबिर की सूचना के आधार पर पकड़ा गया। पूछताछ के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। शिव बारात में हुआ था विवाद जानकारी के अनुसार, 15 फरवरी को देवरी थाना क्षेत्र में शिव बारात निकाली जा रही थी। इसी दौरान जुलूस में तलवार लाने की बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और मारपीट की स्थिति बन गई। आरोप है कि मयंक यादव, देव उर्फ देवरा यादव और ओम यादव ने कार्यक्रम के आयोजक अनिल उर्फ अन्ना कोष्टी पर हमला कर दिया। आयोजक पर चाकू से किया हमला हमले के दौरान मयंक यादव ने अनिल पर चाकू से वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तुरंत देवरी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे सागर रेफर कर दिया था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद देवरी थाना प्रभारी हरिराम मानकर ने बताया कि आरोपियों की तलाश लगातार की जा रही थी। मामले में एक नाबालिग आरोपी को पहले ही पकड़ा जा चुका है। शुक्रवार को लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने मयंक यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया है। एक आरोपी अब भी फरार पुलिस के मुताबिक इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपी ओम यादव अभी भी फरार है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जबलपुर में किसान को मारी गोली, पुरानी रंजिश में कट्टे से किया हमला

Jabalpur जिले के पाटन थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह एक किसान को गोली मार दी गई। ग्राम खमदेही में खेत जा रहे किसान पर बाइक सवार युवक ने कट्टे से फायर कर दिया। गोली किसान के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल किसान को पहले पाटन स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया। खेत जाते समय हुआ हमला जानकारी के अनुसार, खमदेही गांव निवासी धर्मेंद्र रैकवार शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अपने खेत की ओर जा रहा था। इसी दौरान गांव के बाहर बाइक से पहुंचे रामनारायण पटेल ने उसे रोक लिया। दोनों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में आरोपी ने कट्टा निकालकर फायर कर दिया। गोली धर्मेंद्र के पेट में लगी और वह मौके पर ही गिर पड़ा। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। छह महीने पुरानी रंजिश गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल किसान को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। घायल धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि करीब छह महीने पहले रामनारायण के खेत में काम करने वाले कर्मचारियों से उसका विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी। पीड़ित का आरोप है कि उसी पुरानी रंजिश के चलते उस पर हमला किया गया। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पाटन थाना प्रभारी गोपेंद्र सिंह बघेल पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और घायल के बयान दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में मामला पुरानी दुश्मनी से जुड़ा नजर आ रहा है। टीआई गोपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि धर्मेंद्र खेत जाने से पहले गांव के नए सामुदायिक केंद्र में पानी डालने के लिए रुका था। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और मौका मिलते ही गोली चला दी। पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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Gwalior Crime News: उधार के पैसे मांगने पर युवक को पेट्रोल डालकर जलाया, 4 महीने बाद दर्ज हुई FIR

Gwalior Crime News: उधार के पैसे मांगने पर युवक को पेट्रोल डालकर जलाया, 4 महीने बाद दर्ज हुई FIR

मध्य प्रदेश के Gwalior से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने आरोप लगाया है कि उधार दिए गए पैसे वापस मांगने पर एक महिला ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसा युवक करीब चार महीने तक अस्पताल में भर्ती रहा। इलाज के बाद अब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पैसे मांगने पर हुआ विवाद जानकारी के मुताबिक, युवक ने महिला को कुछ समय पहले उधार पैसे दिए थे। जब उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो दोनों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद इतना बढ़ गया कि महिला ने पेट्रोल डालकर युवक को आग के हवाले कर दिया। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती रहा युवक घटना में युवक बुरी तरह झुलस गया था। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका लंबे समय तक इलाज चला। करीब चार महीने तक अस्पताल में रहने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। अब दर्ज कराई शिकायत इलाज पूरा होने के बाद युवक ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस जुटी जांच में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पीड़ित के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। न्याय की उम्मीद चार महीने तक दर्द और इलाज का सामना करने के बाद युवक अब न्याय की उम्मीद कर रहा है। वहीं, पुलिस का कहना है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि छोटे विवाद भी कभी-कभी गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
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Twisha Case Update: सास और पति 5 दिन की CBI रिमांड पर, आमने-सामने पूछताछ करेगी जांच एजेंसी

Twisha Case Update: सास और पति 5 दिन की CBI रिमांड पर, आमने-सामने पूछताछ करेगी जांच एजेंसी

Twisha case में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मामले की जांच कर रही CBI को बड़ी सफलता मिली है। कोर्ट ने अभिनेत्री के पति और सास को 5 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच एजेंसी दोनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी ताकि मामले से जुड़े अहम सवालों के जवाब मिल सकें। CBI अधिकारियों का मानना है कि संयुक्त पूछताछ से घटना के दिन और उससे पहले की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। जांच एजेंसी कई बिंदुओं पर दोनों के बयानों का मिलान भी करेगी। आखिरी घंटों का होगा वर्चुअल रीक्रिएशन मामले की तह तक पहुंचने के लिए CBI आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। जांच एजेंसी अभिनेत्री के जीवन के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन करने की तैयारी में है। इसके जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि घटना से पहले घर के अंदर क्या-क्या हुआ था और कौन-कौन सी गतिविधियां हुई थीं। आमने-सामने पूछताछ से खुल सकते हैं नए राज CBI का मानना है कि पति और सास से अलग-अलग पूछताछ के दौरान कई जानकारियां सामने आई हैं। अब दोनों को आमने-सामने बैठाकर सवाल पूछे जाएंगे। इससे बयानों में किसी तरह के विरोधाभास या नई जानकारी सामने आने की संभावना है। डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच जांच एजेंसी मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, चैट और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों को भी बारीकी से खंगाला जा रहा है। परिवार और फैंस को जांच रिपोर्ट का इंतजार ट्विशा केस ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अभिनेत्री के परिवार के साथ-साथ उनके प्रशंसक भी मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। CBI का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और तकनीकी जांच से इस मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मामले की जांच कर रही CBI को बड़ी सफलता मिली है। कोर्ट ने अभिनेत्री के पति और सास को 5 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच एजेंसी दोनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी ताकि मामले से जुड़े अहम सवालों के जवाब मिल सकें। CBI अधिकारियों का मानना है कि संयुक्त पूछताछ से घटना के दिन और उससे पहले की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। जांच एजेंसी कई बिंदुओं पर दोनों के बयानों का मिलान भी करेगी। आखिरी घंटों का होगा वर्चुअल रीक्रिएशन मामले की तह तक पहुंचने के लिए CBI आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। जांच एजेंसी अभिनेत्री के जीवन के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन करने की तैयारी में है। इसके जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि घटना से पहले घर के अंदर क्या-क्या हुआ था और कौन-कौन सी गतिविधियां हुई थीं। आमने-सामने पूछताछ से खुल सकते हैं नए राज CBI का मानना है कि पति और सास से अलग-अलग पूछताछ के दौरान कई जानकारियां सामने आई हैं। अब दोनों को आमने-सामने बैठाकर सवाल पूछे जाएंगे। इससे बयानों में किसी तरह के विरोधाभास या नई जानकारी सामने आने की संभावना है। डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच जांच एजेंसी मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, चैट और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा फॉरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों को भी बारीकी से खंगाला जा रहा है। परिवार और फैंस को जांच रिपोर्ट का इंतजार ट्विशा केस ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अभिनेत्री के परिवार के साथ-साथ उनके प्रशंसक भी मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। CBI का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और तकनीकी जांच से इस मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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MP Teachers News: 1.5 लाख शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 1 साल का अतिरिक्त समय

MP Teachers News: 1.5 लाख शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने दिया 1 साल का अतिरिक्त समय

MP के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत देते हुए कोर्ट ने पात्रता परीक्षा पास करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आवश्यक योग्यता और पात्रता परीक्षा बेहद जरूरी है। क्या है पूरा मामला? मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने अभी तक TET परीक्षा पास नहीं की है। इस मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सभी संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर TET पास करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देना सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में पात्रता परीक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि कई शिक्षक लंबे समय से सेवा दे रहे हैं, इसलिए उन्हें राहत देते हुए TET पास करने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया है। 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ेगा असर इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों पर पड़ेगा। अब उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर TET परीक्षा पास करनी होगी। यदि शिक्षक तय समय में पात्रता परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उनके भविष्य को लेकर प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। पात्रता परीक्षा से यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक आवश्यक शैक्षणिक मानकों को पूरा करते हों। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि शिक्षक तय समय सीमा के भीतर TET परीक्षा पास कर पाते हैं या नहीं।
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ओंकारेश्वर में RTO और ट्रैफिक पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 13 यात्री बसों पर जुर्माना; 4 ऑटो जब्त

तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त रूप से सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली 13 यात्री बसों पर कार्रवाई करते हुए 44 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला गया। वहीं बिना जरूरी दस्तावेजों के चल रहे 4 ऑटो रिक्शा भी जब्त किए गए हैं। अभियान के दौरान जब्त किए गए ऑटो रिक्शा को मांधाता थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया गया है। कार्रवाई से वाहन चालकों में हड़कंप की स्थिति रही। 52 यात्री बसों की हुई जांच अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दीपक मांझी ने बताया कि जांच अभियान के दौरान कुल 52 यात्री बसों की जांच की गई। इस दौरान बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की बारीकी से जांच की गई। जिन वाहनों में दस्तावेजों की कमी या अन्य अनियमितताएं मिलीं, उनके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस परिवहन विभाग का कहना है कि ओंकारेश्वर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने साफ किया है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए आगे भी इस तरह के सघन जांच अभियान लगातार चलाए जाएंगे। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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पुणे पोर्श केस में फिर मचा बवाल: जमानत के बाद पार्टी करता दिखा आरोपी परिवार, पीड़ितों के परिजनों में नाराजगी

महाराष्ट्र के पुणे में मई 2024 में हुए चर्चित पोर्श कार हादसे को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में आरोपी नाबालिग के पिता को जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आरोपी परिवार पार्टी करता और डांस करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है। यह मामला पुणे के कल्याणी नगर इलाके का है, जहां तेज रफ्तार पोर्श कार ने दो आईटी इंजीनियरों को कुचल दिया था। हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। बताया गया था कि कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था। एमपी के दो इंजीनियरों की गई थी जान मृतकों में मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी अश्विनी कोष्ठा और उमरिया के रहने वाले एक अन्य युवा इंजीनियर शामिल थे। हादसे के बाद पूरे देश में गुस्सा देखने को मिला था और जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम पर भी सवाल उठे थे। घटना के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। वहीं आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। वायरल वीडियो पर भड़का पीड़ित परिवार अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। जबलपुर निवासी मृतक इंजीनियर अश्विनी कोष्ठा के पिता ने आरोपी परिवार के व्यवहार को बेहद असंवेदनशील बताया है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार की लापरवाही से दो युवाओं की जान चली गई, उसी परिवार का इस तरह जश्न मनाना पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि आरोपी परिवार में न शर्म बची है और न ही संवेदनशीलता। इस तरह की हरकतें न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसी हैं। पीड़ित परिवार ने आरोपी को मिली जमानत पर दोबारा विचार करने की मांग भी की है। आरोपी परिवार ने दी सफाई वहीं आरोपी परिवार ने वायरल वीडियो को पुराना बताया है। परिवार का कहना है कि यह वीडियो 2 सितंबर 2023 का है, जब गोवा में उनकी 25वीं शादी की सालगिरह मनाई गई थी। परिवार ने आरोप लगाया कि वीडियो को गलत तरीके से पेश कर माहौल बनाया जा रहा है। आरोपी पक्ष का यह भी कहना है कि यह उनका निजी वीडियो है, जिसे बिना अनुमति सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। उन्होंने वीडियो लीक करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है। सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग लगातार इस केस में सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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