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ग्वालियर रेत फड़ गोलीकांड: मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और भतीजा गिरफ्तार, लाइसेंसी पिस्टल जब्त

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में रेत फड़ पर हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और उसके भतीजे बृजमोहन को घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को गोहद से पकड़ा गया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी पिस्टल भी जब्त कर ली है। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे रेत फड़ पर किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में BSF से रिटायर्ड आरोपी विष्णु दुबे ने बताया कि उसका सत्यभान गुर्जर और भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर से झगड़ा हुआ था। आरोपी के मुताबिक विवाद के दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे वह गुस्से में आ गया। इसके बाद वह घर गया, लाइसेंसी पिस्टल लेकर वापस लौटा और फायरिंग कर दी। गोलीबारी में भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर को पेट और सीने में दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं सत्यभान गुर्जर भी गोली लगने से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी फिलहाल महाराजपुरा थाना लॉकअप में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। आरोपी विष्णु दुबे ने पूछताछ में यह भी कहा कि यदि मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया गया तो विवाद और बढ़ सकता है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। मृतक भोला गुर्जर के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को एयरपोर्ट तिराहे पर रखकर चक्का जाम कर दिया। परिजनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और लाइसेंसी हथियार देने की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद जाम खुलवाया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस बीच घटना का CCTV वीडियो भी सामने आया है, जिसमें झगड़े के बाद आरोपी विष्णु दुबे लाइसेंसी पिस्टल से भोला और सत्यभान गुर्जर पर फायरिंग करता दिखाई दे रहा है। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से भाग निकला था। पुलिस ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
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भोपाल में डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़, STF की रेड में 700 से ज्यादा पेटियां जब्त

भोपाल के गांधी नगर इलाके में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत का अवैध कफ सिरप पकड़ा है। यह कार्रवाई डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में गुरुवार देर रात की गई। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने 700 से ज्यादा पेटियां, कफ सिरप बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और भारी मात्रा में नशीला सिरप बरामद किया। मामले में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मकान में ‘आफ कफ’ नाम से अवैध रूप से नशीला कफ सिरप तैयार किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने रात करीब 12 बजे दबिश दी। कार्रवाई शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली। छापे के दौरान मकान के अलग-अलग कमरों में कफ सिरप की बोतलें और कार्टन भरे मिले। एसटीएफ ने बरामद कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय गांधी नगर पुलिस को भी नहीं लगी। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से इलाके से अवैध नशीले कफ सिरप की सप्लाई की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद गुप्त रूप से निगरानी की जा रही थी। जिस मकान में यह अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वह किसी मालवीय नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मकान मालिक से संपर्क नहीं हो सका था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है और इसकी सप्लाई प्रदेश के किन इलाकों में की जा रही थी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रिहायशी इलाके में इस तरह का अवैध कारोबार चल रहा है।
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गुना में पारिवारिक विवाद से परेशान विवाहिता मोबाइल टावर पर चढ़ी, 3 घंटे बाद प्रशासन ने सुरक्षित उतारा

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता पारिवारिक विवाद से परेशान होकर गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने समझाइश देकर महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया। मामला गुना जिले की कुंभराज तहसील के ग्राम खेजरा रामा का है। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय निकिता की शादी करीब तीन साल पहले कुलदीप मीना से हुई थी। बताया जा रहा है कि ससुराल में लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी बात से नाराज होकर गुरुवार सुबह करीब 5 बजे निकिता गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना सुबह ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी और पटवारी प्रवीण सिंह राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। समझाइश से शांत हुआ मामला महिला काफी नाराज थी और नीचे आने को तैयार नहीं हो रही थी। ऐसे में प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए महिला से लगातार संवाद किया और भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी। अधिकारियों ने महिला से कहा कि उसकी शिकायतों पर प्रशासन और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाइश और भरोसे के बाद महिला का गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। सुरक्षित नीचे उतरने पर लोगों ने ली राहत की सांस महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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ईद पर इंदौर से दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, शहर काजी ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की उठाई मांग

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने भाईचारे, पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि गाय को दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह रोक लग सके। पानी बचाने और पर्यावरण बचाने की अपील अपने संबोधन में शहर काजी ने लोगों से पानी बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की भी अपील की। नशे के कारोबार पर जताई चिंता शहर काजी ने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशा बेच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस विषय को गंभीरता से उठा चुके हैं। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। 50 साल पुरानी परंपरा बनी मिसाल इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। इस परंपरा को लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बताया। खंडवा में भी उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बकरीद के मौके पर खंडवा के मुख्य ईदगाह समेत करीब 40 मस्जिदों में मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी नहीं दी है। साथ ही उन्होंने गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 27 जुलाई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब देश में इस मुद्दे को लेकर माहौल बदल रहा है और सभी समाजों से समर्थन मिल रहा है www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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Indore News: गांधी नगर में टेलर ने जहर खाकर दी जान, पड़ोसी की धमकियों और मारपीट से था परेशान

Indore News: गांधी नगर में टेलर ने जहर खाकर दी जान, पड़ोसी की धमकियों और मारपीट से था परेशान

मध्य प्रदेश के Indore शहर के गांधी नगर इलाके में एक टेलर की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवक ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, मृतक पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव में था। उनका आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों से उसका विवाद चल रहा था। करीब 10 दिन पहले दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी, जिसके बाद से उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं। परिवार का कहना है कि इन घटनाओं से युवक काफी परेशान रहने लगा था। घटना वाले दिन भी वह तनाव में दिखाई दे रहा था। बाद में उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। जब उसकी हालत बिगड़ी तो परिवार के लोग उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार में गहरा दुख है और इलाके में भी शोक का माहौल बना हुआ है।
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इंदौर में पानी संकट पर कांग्रेस का प्रदर्शन, राजबाड़ा में धरना; महिलाओं ने खाली मटके लेकर जताया विरोध

Indore में पानी संकट पर कांग्रेस का प्रदर्शन, राजबाड़ा में धरना; महिलाओं ने खाली मटके लेकर जताया विरोध

Indore में बढ़ते पानी संकट को लेकर बुधवार को राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजबाड़ा क्षेत्र में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं, जो खाली मटके और बोतलें लेकर विरोध जताने पहुंचीं। “लोग जहरीला पानी पी रहे हैं” — कांग्रेस का आरोप कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर के कई इलाकों में लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है और मजबूरी में दूषित पानी पीना पड़ रहा है।नेता जितेंद्र (जितू) पटवारी ने कहा कि जनता को “जहरीला पानी” पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है। नगर निगम गेट पर भी हंगामा प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम कार्यालय तक पहुंचे, जहां गेट पर जमकर नारेबाजी हुई और कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और प्रदर्शन को आगे बढ़ने से रोका। महिलाओं की भी भागीदारी धरने में शामिल महिलाओं ने खाली मटके और पानी की बोतलें दिखाकर सरकार और नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई।उनका कहना था कि कई इलाकों में नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
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Twisha case: रिटायर्ड जज सास को हाईकोर्ट का नोटिस, MP सरकार का बड़ा दावा—जांच में नहीं कर रहीं सहयोग, केस CBI को सौंपने की तैयारी

मध्य प्रदेश के चर्चित Twisha case में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में अब हाईकोर्ट ने आरोपी की सास, जो एक रिटायर्ड जज हैं, को नोटिस जारी किया है। साथ ही राज्य सरकार ने अदालत में कहा है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। अब इस केस को लेकर जांच एजेंसी बदलने की तैयारी भी तेज हो गई है और संभावना जताई जा रही है कि केस डायरी जल्द ही CBI को सौंपी जा सकती है। क्या है पूरा मामला? ट्विशा केस एक हाई-प्रोफाइल विवादित मामला है, जिसमें एक्ट्रेस से जुड़े आरोपों की जांच चल रही है। मामले में पहले ही कई स्तरों पर जांच हो चुकी है, लेकिन अब जांच की दिशा और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती इस केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज सास को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे मामले में जवाब मांगा है और यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में किसी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। MP सरकार का क्या कहना है? मध्य प्रदेश सरकार ने अदालत में कहा है कि: सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि अब केस को आगे बढ़ाने के लिए CBI जांच की जरूरत पड़ सकती है। CBI जांच की संभावना क्यों बढ़ी? अगर केस में: तो ऐसे मामलों में अदालत या सरकार CBI जांच की सिफारिश कर सकती है। आगे क्या होगा? अब इस मामले में तीन अहम बातें आगे तय होंगी:
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Bhopal के रचना टॉवर में कार में आग: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से शुरू हुई आग, फिर पूरी कार जलकर खाक

Bhopal के रचना टॉवर में कार में आग: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से शुरू हुई आग, फिर पूरी कार जलकर खाक

Bhopal के रचना टॉवर परिसर में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक कार में अचानक आग लग गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत पास खड़ी एक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (ई-स्कूटर) से हुई, जिसके बाद आग तेजी से फैलती गई और पास खड़ी कार इसकी चपेट में आ गई। कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: मौके पर मची अफरा-तफरी आग लगते ही रचना टॉवर परिसर में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।लोग तुरंत सुरक्षित दूरी पर चले गए और सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई। दमकल की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। शुरुआती आशंका: बैटरी फेल्योर? प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि: हालांकि, असली वजह की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
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Petrol

MP सहित कई राज्यों में Oil Supply Operation तेज, जनता से Panic Buying न करने की अपील

भोपाल। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की मांग अचानक बढ़ने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने राहत देने वाला कदम उठाया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने रविवार की छुट्टी के बावजूद अपने टर्मिनल और भंडारण केंद्र चालू रखे, ताकि आम लोगों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े। तेल कंपनियों का कहना है कि उनका पूरा फोकस इस समय निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने पर है। इसी वजह से सप्लाई नेटवर्क को 24 घंटे एक्टिव मोड में रखा गया। मध्य प्रदेश में इन शहरों से जारी रही सप्लाई मध्य प्रदेश में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इटारसी और रतलाम स्थित लोकेशनों से लगातार संचालन किया। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सागर और जबलपुर से सप्लाई व्यवस्था संभाली। कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ती मांग को देखते हुए स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी जिले में पेट्रोल या डीज़ल की कमी न हो। 24×7 मोड में काम कर रही हैं टीमें तेल कंपनियों ने बताया कि सप्लाई टीम, टर्मिनल स्टाफ, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और कई चयनित पेट्रोल पंप लगातार चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।उद्देश्य साफ है—देशभर में ईंधन की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे और लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस दौरान कंपनियों ने “हम सदैव आपके साथ हैं” संदेश के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। Panic Buying से बचने की अपील तेल विपणन कंपनियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी न करें। कंपनियों के अनुसार, पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों से यह भी कहा गया है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। अधिकारियों ने क्या कहा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मध्य प्रदेश राज्य कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों तक समय पर ईंधन पहुंचाना कंपनियों की प्राथमिकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Himanta

Assam बकरीद गो-वध मुक्त हो बकरीद”, CM Himanta Biswa Sarma की बड़ी Appeal

Assam में बकरीद 2026 से पहले एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। Himanta Biswa Sarma ने राज्य की कई ईदगाह कमेटियों द्वारा “गो-वध मुक्त बकरीद” मनाने के फैसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इसे समाज में भाईचारा और शांति बनाए रखने की दिशा में सकारात्मक पहल बताया। दरअसल, असम के कई जिलों में मुस्लिम संगठनों और ईदगाह कमेटियों ने इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं देने का निर्णय लिया है। कमेटियों का कहना है कि उनका उद्देश्य त्योहार को शांतिपूर्ण माहौल में मनाना और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना है। Eidgah Committees के फैसले पर CM सरमा ने जताई खुशी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में कई संगठनों ने स्वेच्छा से यह फैसला लिया है, जो सामाजिक सौहार्द को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि असम हमेशा से विविध संस्कृतियों और परंपराओं का राज्य रहा है, इसलिए आपसी सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है। सीएम ने अपने बयान में कहा, “गो-वध मुक्त बकरीद का फैसला स्वागत योग्य है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और भाईचारा मजबूत होगा।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सामाजिक एकता की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। बकरीद से पहले बढ़ी प्रशासन की तैयारी बकरीद को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। इसके साथ ही लोगों से अफवाहों से बचने और सोशल Media पर जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील भी की गई है। सामाजिक सौहार्द पर फोकस स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे फैसले समाज में तनाव कम करने और आपसी विश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी ईदगाह कमेटियों के फैसले की सराहना की है। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के दौरान संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और समझदारी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। असम में इस बार बकरीद को लेकर लिया गया यह फैसला भी उसी दिशा में देखा जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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