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Twisha Sharma

Twisha Sharma भोपाल AIIMS में फिर हुआ पोस्टमार्टम, पति पुलिस रिमांड पर

भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद रविवार को AIIMS भोपाल में ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम शुरू किया गया। इस प्रक्रिया के लिए AIIMS दिल्ली से फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम विशेष तौर पर भोपाल पहुंची है। Twisha Sharma की मौत के बाद से ही परिवार लगातार पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठा रहा था। परिवार का कहना था कि जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। इसी वजह से दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी। AIIMS Delhi की टीम करेगी सच की जांच जानकारी के मुताबिक, AIIMS दिल्ली के वरिष्ठ फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम मेडिकल बोर्ड के रूप में भोपाल पहुंची है। डॉक्टरों की निगरानी में पूरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि जांच पूरी तरह पारदर्शी रहे। माना जा रहा है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह साफ हो सकती है। इसी रिपोर्ट पर आगे की पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई काफी हद तक निर्भर करेगी। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप ट्विशा शर्मा के परिवार ने शुरुआत से ही ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था। उनका कहना है कि शरीर पर मिले कुछ निशानों को पहली रिपोर्ट में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया। ट्विशा के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अब AIIMS की टीम से निष्पक्ष जांच की उम्मीद है और वे चाहते हैं कि उनकी बेटी को इंसाफ मिले। पति समर्थ सिंह पुलिस रिमांड पर इस मामले में पुलिस ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस दहेज प्रताड़ना, घरेलू विवाद और मौत से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है। वहीं दूसरी ओर, ससुराल पक्ष ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि ट्विशा लंबे समय से तनाव में थीं। हालांकि पुलिस अभी हर एंगल से जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पूरे देश की नजर रिपोर्ट पर ट्विशा शर्मा केस अब सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक इस मामले पर लगातार चर्चा हो रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ट्विशा की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है। अब सभी की नजर AIIMS भोपाल में हो रहे दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि माना जा रहा है कि यही रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Heatwave

Heatwave Alert: उत्तर भारत में आग उगल रही गर्मी, 47°C तक पहुंचा पारा, IMD ने जारी किया Red Alert

उत्तर भारत इस वक्त भीषण गर्मी और खतरनाक Heatwave की चपेट में है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। कई शहरों में पारा 47°C के करीब पहुंच चुका है, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की चेतावनी दी है। सड़कें दोपहर में सुनसान दिखाई दे रही हैं। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। गर्म हवाओं ने आम जिंदगी पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को हो रही है। UP से Delhi तक गर्मी का कहर उत्तर प्रदेश का बांदा इस समय देश के सबसे गर्म शहरों में शामिल हो गया है, जहां तापमान 47.6°C दर्ज किया गया। प्रयागराज, झांसी और वाराणसी में भी हालात बेहद खराब हैं। वहीं दिल्ली-NCR में भी दिन का तापमान 45°C के आसपास बना हुआ है और रात में भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल रही। राजस्थान के कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें खाली नजर आ रही हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर, नौगांव और छतरपुर जैसे इलाकों में भी तेज लू लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। IMD ने जारी किया Red Alert भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में Heatwave को लेकर Red और Orange Alert जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले 3 से 4 दिन तक उत्तर और मध्य भारत में लू का असर बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि रात का तापमान भी सामान्य से काफी ज्यादा है। यही वजह है कि लोगों को रात में भी राहत महसूस नहीं हो रही। क्यों बढ़ रही है इतनी ज्यादा गर्मी? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार: अस्पतालों में बढ़ने लगे मरीज भीषण गर्मी के चलते अस्पतालों में Heat Stroke, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और कमजोरी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को धूप में ज्यादा देर तक रहने से बचने की सलाह दी है। कई जगहों पर स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि कुछ इलाकों में दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की चेतावनी दी गई है। खुद को ऐसे रखें Safe कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग के अनुसार मई के आखिरी दिनों में कुछ राज्यों में हल्की बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल उत्तर भारत में गर्मी का यह सितम अभी कुछ दिन और जारी रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Petrol की बढ़ती कीमतों पर भाजपा सांसद की पत्नी का तंज, बोलीं- ‘अब EMI पर मिलेगा ईंधन’

Petrol की बढ़ती कीमतों पर भाजपा सांसद की पत्नी का तंज, बोलीं- ‘अब EMI पर मिलेगा ईंधन’

देश में लगातार बढ़ रहे Petrol और डीजल के दामों को लेकर लोगों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी बीच भाजपा सांसद की पत्नी का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है। उन्होंने बढ़ती कीमतों पर तंज कसते हुए कहा कि जल्द ही ऐसा समय आ सकता है जब पेट्रोल-डीजल भी EMI पर मिलने लगे और बैंक इसके लिए लोन देने लगें। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय आम लोगों के लिए बेहद मुश्किल भरा है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर सफर तक हर चीज महंगी होती जा रही है। उनका कहना था कि “इतिहास का यह बहुत खराब दौर है”, जहां आम आदमी महंगाई के बोझ से लगातार दबता जा रहा है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे महंगाई पर कटाक्ष बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो आने वाले समय में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार पर टैक्स कम करने और लोगों को राहत देने का दबाव भी बढ़ रहा है।
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लू

MP-UP और राजस्थान में लू का रेड अलर्ट, कश्मीर-उत्तराखंड में बर्फबारी

देशभर में मौसम इन दिनों दो अलग-अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक तरफ उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में लू है, तो दूसरी तरफ पहाड़ों पर बर्फबारी ने मौसम को ठंडा बना दिया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत 11 राज्यों में गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं बिहार में खराब मौसम के बीच आकाशीय बिजली गिरने से 4 लोगों की जान चली गई। UP का बांदा बना सबसे गर्म शहर भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश का बांदा सबसे ज्यादा तपता हुआ शहर रहा। यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को बेहाल कर दिया। दोपहर के समय बाजार और सड़कें लगभग खाली नजर आईं। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भी तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच गया। बिहार में बदला मौसम, बिजली गिरने से 4 मौतें जहां एक ओर गर्मी से लोग परेशान हैं, वहीं बिहार में मौसम अचानक बदल गया। कई जिलों में तेज आंधी और बारिश के दौरान बिजली गिरने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में 4 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी से बदला माहौल मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी देखने को मिली। कई जगहों पर हल्की बारिश भी हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई। पहाड़ों पर ठंडा मौसम लौटने से पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं। अगले कुछ दिन और मुश्किल भरे मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में हीटवेव जारी रह सकती है। लोगों को दोपहर में जरूरी काम होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी से बचने के लिए ज्यादा पानी पिएं, हल्के कपड़े पहनें और धूप में लंबे समय तक रहने से बचें। देश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। कहीं लू लोगों की जान पर भारी पड़ रही है, तो कहीं अचानक बदलता मौसम हादसों की वजह बन रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Twisha Case Update: समर्थ सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, BCI ने वकालत लाइसेंस किया निलंबित

Twisha Case Update: समर्थ सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, BCI ने वकालत लाइसेंस किया निलंबित

भोपाल की चर्चित Twisha मौत मामले में आरोपी समर्थ सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने समर्थ सिंह के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उसकी वकालत प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है। BCI ने उसका एडवोकेट लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद समर्थ सिंह फिलहाल किसी भी अदालत में वकालत नहीं कर सकेगा। मामले को लेकर कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सरेंडर के बाद बढ़ा दबाव ट्विषा शर्मा केस में लगातार बढ़ते विवाद और जनदबाव के बीच समर्थ सिंह ने हाल ही में कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद जांच एजेंसियां मामले की हर एंगल से पड़ताल कर रही हैं। अब BCI की कार्रवाई को भी इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। BCI ने क्यों लिया फैसला? सूत्रों के मुताबिक, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने गंभीर आरोपों और चल रही जांच को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। BCI का मानना है कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक समर्थ सिंह को वकालत प्रैक्टिस की अनुमति देना उचित नहीं होगा। परिवार और लोगों में आक्रोश ट्विषा शर्मा की मौत के बाद से परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस केस को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संगठनों और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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Twisha Sharma

CBI जांच की मांग के बीच Twisha Sharma के पति ने किया आत्मसमर्पण

मध्य प्रदेश के चर्चित ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) मौत मामले में आखिरकार बड़ा अपडेट सामने आ गया है। करीब 10 दिनों से फरार चल रहा ट्विशा शर्मा का पति शुक्रवार को कोर्ट पहुंचा और उसने सरेंडर कर दिया। इस खबर के सामने आते ही केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Twisha की मौत के बाद से परिवार लगातार इंसाफ की मांग कर रहा था। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और उन्हें लगातार परेशान किया जाता था। इसी वजह से परिवार शुरू से ही पति और ससुराल पक्ष पर सवाल उठाता रहा है। Police की लगातार दबिश के बाद किया Surrender मामले में पुलिस कई दिनों से आरोपी की तलाश कर रही थी। अलग-अलग जगहों पर दबिश भी दी गई, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आ रहा था। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। अब कोर्ट में सरेंडर के बाद पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर ट्विशा के साथ क्या हुआ था। CBI जांच की मांग ने बढ़ाया दबाव ट्विशा शर्मा केस में परिवार ने CBI जांच की मांग भी उठाई है। मामला लगातार सुर्खियों में रहने के कारण सरकार पर भी दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष जांच चाहिए ताकि सच सामने आ सके। बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली। लोग आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तेज जांच की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आवाज उठाई है। अब आगे क्या? आरोपी के सरेंडर के बाद अब सबसे अहम कड़ी पुलिस पूछताछ होगी। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश करेंगी कि घटना वाले दिन क्या हुआ था और क्या इस मामले में कोई और भी शामिल है। आने वाले दिनों में केस में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP में ‘कॉकरोच पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

MP में ‘कॉकरोच पार्टी’ की एंट्री, भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिस्टम के खिलाफ खोला मोर्चा

MP की राजनीति में एक नया और अनोखा नाम सामने आया है। “कॉकरोच पार्टी” ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को जनता की आवाज बताते हुए सिस्टम के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का दावा किया। पार्टी के सदस्यों का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि उन लोगों की लड़ाई है जो लंबे समय से भ्रष्ट और शिथिल व्यवस्था से परेशान हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी से जुड़े युवाओं ने कहा कि देश में शिक्षा, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन आम लोगों की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। खास बात यह रही कि NEET पेपर लीक से प्रभावित कुछ युवा भी इस पार्टी के साथ नजर आए। उनका कहना था कि मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और अब युवाओं को खुद आगे आकर बदलाव की लड़ाई लड़नी होगी। पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि “कॉकरोच” नाम प्रतीक है उस संघर्ष का, जो हर मुश्किल हालात में भी खत्म नहीं होता। उनका दावा है कि वे आम जनता, छात्रों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सोशल मीडिया पर भी “कॉकरोच पार्टी” को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सिस्टम के खिलाफ नई आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे अलग तरह की राजनीतिक पहल मान रहे हैं।
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Twisha Sharma

Twisha Sharma Case परिवार की मांग पर CBI जांच की सिफारिश

मध्य प्रदेश में ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत का मामला अब एक नए और अहम मोड़ पर पहुंच गया है। लगातार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे परिवार की बात को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने अब इस केस को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की सिफारिश कर दी है। सरकार की ओर से यह सिफारिश Central Bureau of Investigation (CBI) को भेजी गई है, जिससे अब इस केस की जांच के राष्ट्रीय स्तर पर जाने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। परिवार की मांग के बाद बड़ा एक्शन ट्विशा शर्मा के परिजन लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना था कि स्थानीय जांच पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए उन्होंने CBI जांच की अपील की थी। परिवार की इसी भावना और मामले की गंभीरता को देखते हुए Government of Madhya Pradesh ने यह कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि मामले की जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। अब केस CBI के हाथ में जाने की तैयारी अब इस मामले में अंतिम फैसला केंद्र सरकार और CBI द्वारा लिया जाएगा। यदि CBI इस केस को अपने हाथ में लेती है, तो पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी और हर पहलू को दोबारा खंगाला जाएगा। परिवार की भावनाएं और उम्मीदें सरकारी फैसले के बाद परिवार ने राहत की भावना जताई है। उनका कहना है कि यह कदम उनके लिए न्याय की दिशा में एक उम्मीद की किरण है, हालांकि वे अब CBI जांच की आधिकारिक शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। परिवार अभी भी यही चाहता है कि उनकी बेटी की मौत के पीछे की सच्चाई सामने आए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिले।
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Bhojshala

Bhojshala 721 साल बाद बने खास योग पर भक्तों से भरी धार की सड़कें

मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला (Bhojshala) शुक्रवार सुबह से ही आस्था का बड़ा केंद्र बनी हुई है। 721 साल बाद आए इस विशेष शुक्रवार को लेकर हजारों श्रद्धालु अखंड पूजा और दर्शन के लिए भोजशाला पहुंचे। सुबह से ही परिसर के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरा इलाका “जय मां वाग्देवी” के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से उमड़ी भक्तों की भीड़ भोजशाला में पूजा-अर्चना के लिए लोग देर रात से ही धार पहुंचने लगे थे। जैसे ही सुबह हुई, श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में पूजा में हिस्सा लिया। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का यादगार और भावुक पल बताया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वर्षों बाद शहर में ऐसा धार्मिक माहौल देखने को मिला है। बाजारों, होटल और आसपास की दुकानों में भी भारी भीड़ नजर आई। क्यों खास माना जा रहा है यह शुक्रवार? धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना के आधार पर श्रद्धालु इस शुक्रवार को बेहद दुर्लभ संयोग मान रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि करीब 721 साल बाद ऐसा अवसर आया है, जब भोजशाला में इस तरह अखंड पूजा और विशेष धार्मिक आयोजन हो रहा है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से लोग यहां पहुंचे हैं। भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी कारण यहां हर बड़े आयोजन के दौरान प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरतता है। हाल के महीनों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए सर्वे के बाद भोजशाला फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गई थी। अब इस विशेष शुक्रवार के आयोजन ने एक बार फिर लोगों का ध्यान इस ऐतिहासिक स्थल की ओर खींच लिया है। सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। श्रद्धालुओं ने बताया ऐतिहासिक दिन भोजशाला पहुंचे कई श्रद्धालुओं का कहना है कि वे इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। लोगों के चेहरों पर उत्साह और भक्ति साफ नजर आई। पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा और पूजा-अर्चना लगातार जारी रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhar Bhojshala Dispute : हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Dhar Bhojshala Dispute : हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

मध्यप्रदेश के Dhar स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट नहीं बल्कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले को मुस्लिम पक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में चुनौती दी है। मामले में आज ही सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भोजशाला परिसर का सर्वे कराने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला धार्मिक भावनाओं और पुराने समझौतों के खिलाफ है। दरअसल, धार की भोजशाला को हिंदू पक्ष मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद ASI सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले को लेकर धार शहर में भी लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई हैं। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी तरह का तनाव न फैले। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे चाहते हैं कि अदालत का फैसला सभी पक्षों के सम्मान और शांति को ध्यान में रखकर आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय हो सकती है। अब देखना होगा कि सर्वोच्च अदालत हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाती है या ASI सर्वे की प्रक्रिया जारी रहती है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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