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मोहन यादव कैबिनेट के बड़े फैसले: अब आबादी जमीन की मिलेगी रजिस्ट्री, बच्चों को सिलाई की हुई यूनिफॉर्म देगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट बैठक में कई बड़े और जनहित से जुड़े फैसले लिए गए। सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के लाखों परिवारों को उनकी आबादी वाली जमीन के रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज देने का फैसला किया है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब तैयार सिलाई की हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी। स्वामित्व योजना से लाखों परिवारों को फायदा एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे के जरिए गांवों में आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का चिह्नांकन किया गया था। पहले लोगों को केवल स्वामित्व पत्र दिए गए थे, लेकिन अब सरकार इन संपत्तियों की रजिस्ट्री कराकर पंजीकृत दस्तावेज भी देगी। प्रदेश के 55 जिलों में करीब 48.80 लाख निजी और लगभग 19 लाख सरकारी संपत्तियों को चिह्नित किया गया है। खास बात यह है कि रजिस्ट्री में लगने वाला पंचायत उपकर और पंजीयन शुल्क सरकार खुद वहन करेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 3800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि पंजीकृत दस्तावेज मिलने के बाद लोगों को बैंक लोन सहित अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। मध्यप्रदेश ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। अब बच्चों को मिलेगी सिलाई की हुई यूनिफॉर्म कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को तैयार यूनिफॉर्म देने का निर्णय लिया है। अब तक विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के जरिए 600 रुपए भेजे जाते थे, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने व्यवस्था बदलने का फैसला किया। नई व्यवस्था के तहत टेंडर प्रक्रिया से कपड़ा खरीदा जाएगा और बच्चों के लिए यूनिफॉर्म सिलवाकर सीधे उपलब्ध कराई जाएगी। गेहूं खरीदी और यूसीसी पर भी हुई चर्चा कैबिनेट बैठक में गेहूं खरीदी की समीक्षा भी की गई। सरकार ने दावा किया कि इस साल देश में सबसे ज्यादा गेहूं खरीदी मध्यप्रदेश में हुई है। इसके अलावा समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार के अनुसार सुझाव लेने की प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। गोरस एप लॉन्च, दूध उत्पादन में बढ़ोतरी मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि प्रदेश में दूध उत्पादन 9 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 11 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। पशुपालकों को मौसम, पशु आहार और पशुओं की देखभाल से जुड़ी जानकारी देने के लिए “गोरस” मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया है। पीएम सूर्यघर योजना में 4 लाख घरों तक पहुंचा सोलर सिस्टम सरकार ने बताया कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक 4 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। लक्ष्य इसे बढ़ाकर 6 लाख घरों तक पहुंचाने का है। वहीं जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 2 लाख से ज्यादा जल संरचनाओं पर काम किया जा चुका है। किसानों की मिट्टी परिवहन समस्या का मुद्दा उठा कैबिनेट बैठक के दौरान राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने किसानों और ग्रामीणों की एक बड़ी समस्या भी उठाई। उन्होंने कहा कि तालाबों और खेतों से निकाली जाने वाली मिट्टी के परिवहन में खनिज विभाग और प्रशासन कई बार रोक लगा देता है, जिससे किसानों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने संसाधनों से तालाबों का गहरीकरण करते हैं, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में मिट्टी को खेतों तक ले जाने पर रोक लगाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को व्यावहारिक समाधान तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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Bhopal Water Supply News

Breaking News: भोपाल में 36 घंटे पानी का संकट, कोलार लाइन बंद होने से 75 इलाके प्रभावित

भोपाल। राजधानी भोपाल के लाखों नागरिकों के लिए जरूरी खबर है। कोलार जलापूर्ति परियोजना में आवश्यक तकनीकी कार्य और रखरखाव के चलते शहर के कई हिस्सों में पानी की सप्लाई प्रभावित होने जा रही है। नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार करीब 75 इलाकों में जल वितरण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जिसके चलते लोगों को पहले से पानी का पर्याप्त भंडारण करने की सलाह दी गई है। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का बड़ा हिस्सा कोलार और नर्मदा परियोजनाओं पर निर्भर है। विशेषज्ञों के अनुसार कोलार लाइन में किसी भी प्रकार का शटडाउन या तकनीकी कार्य होने पर बड़ी आबादी प्रभावित होती है। हाल के वर्षों में भी कई बार मेंटेनेंस और पाइपलाइन लीकेज के कारण जलापूर्ति बाधित हुई है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य भविष्य में बेहतर और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि शटडाउन की अवधि के दौरान कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच पाएगा या कम दबाव से सप्लाई होगी। ऐसे में नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है। नागरिक क्या करें? क्यों महत्वपूर्ण है कोलार परियोजना? भोपाल की जलापूर्ति का बड़ा हिस्सा कोलार परियोजना से आता है। शहर में बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग के बीच यह परियोजना राजधानी की प्रमुख लाइफलाइन मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तकनीकी बाधा का सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ता है। यदि आप भोपाल के कोलार, अरेरा, शाहपुरा, टीटी नगर, न्यू मार्केट या आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं तो अगले 36 घंटों के लिए पानी की व्यवस्था पहले से कर लेना बेहतर होगा। नगर निगम द्वारा सप्लाई बहाल होने के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
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MP में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹44 महंगा | भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में नए रेट लागू, 3 महीने में ₹1300 की बढ़ोतरी

MP में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹44 महंगा | भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में नए रेट लागू, 3 महीने में ₹1300 की बढ़ोतरी

MP में कारोबारियों के लिए बड़ी खबर है। कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों की लागत पर सीधा असर पड़ेगा। Madhya Pradesh में कमर्शियल गैस सिलेंडर अब ₹44 तक महंगा हो गया है। पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही कीमतों ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रमुख शहरों में नए रेट राज्य के प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम इस प्रकार हैं: 3 महीने में ₹1300 की बढ़ोतरी पिछले तीन महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग ₹1300 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार बढ़ती लागत से होटल और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। कारोबारियों की चिंता बढ़ी व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती गैस कीमतों का सीधा असर खाने-पीने की चीजों और सर्विस चार्ज पर पड़ सकता है। इससे महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। आगे क्या? फिलहाल कीमतों में राहत की कोई घोषणा नहीं की गई है, जिससे आने वाले दिनों में भी महंगाई का दबाव बना रह सकता है।
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Cockroach Janta Party के फाउंडर 6 जून को भारत लौटेंगे | शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, इंस्टा फॉलोअर्स 2 करोड़ पार

Cockroach Janta Party के फाउंडर 6 जून को भारत लौटेंगे | शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, इंस्टा फॉलोअर्स 2 करोड़ पार

राजनीतिक और सोशल मीडिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। Cockroach Janta Party के फाउंडर 6 जून को भारत लौटने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रदर्शन देश की राजधानी New Delhi के Jantar Mantar पर किया जाएगा। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ी लोकप्रियता इस संगठन की लोकप्रियता सोशल मीडिया पर भी तेजी से बढ़ी है। इसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स अब 2 करोड़ के पार पहुंच चुके हैं, जिससे यह युवा वर्ग में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या है आगे की योजना? फाउंडर के भारत लौटने के बाद आंदोलन को और तेज करने की योजना बनाई जा रही है। संगठन का दावा है कि वे शिक्षा और व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर यह कदम उठा रहे हैं। चर्चा में संगठन इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों जगह हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें 6 जून के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।
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Weather update : मानसून 2–3 दिन में केरल पहुंचेगा | देशभर में हीटवेव खत्म, कई राज्यों में बारिश और ओले का असर

Weather update : मानसून 2–3 दिन में केरल पहुंचेगा | देशभर में हीटवेव खत्म, कई राज्यों में बारिश और ओले का असर

Weather update : देश में मौसम ने बड़ा बदलाव ले लिया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 2–3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल पहुंच सकता है। इसके साथ ही लंबे समय से चल रही गर्मी और हीटवेव की स्थिति अब लगभग खत्म हो गई है। देशभर में मौसम में बड़ा बदलाव India के कई हिस्सों में अब मौसम सुहावना हो गया है। जहां एक तरफ गर्मी से राहत मिली है, वहीं कई राज्यों में आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया है। राजस्थान में ओलावृष्टि Rajasthan के 3 जिलों में अचानक मौसम बदलने से ओले गिरे हैं। इससे फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है और किसानों की चिंता बढ़ गई है। मध्य प्रदेश और बिहार में आंधी-बारिश Madhya Pradesh और Bihar समेत कुल 5 राज्यों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई है। कई जगह पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी खबरें हैं। केरल में मानसून की एंट्री जल्द मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून सबसे पहले Kerala में दस्तक देगा। इसके बाद धीरे-धीरे यह देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ेगा।
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Bhopal में 2–3 जून को पानी की सप्लाई बाधित | Kolar Water Line Maintenance का असर, 75 इलाकों में परेशानी

Bhopal में 2–3 जून को पानी की सप्लाई बाधित | Kolar Water Line Maintenance का असर, 75 इलाकों में परेशानी

Bhopal के कई इलाकों में 2 और 3 जून को पानी की सप्लाई प्रभावित रहने वाली है। नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कोलार जल सप्लाई लाइन से जुड़े क्षेत्रों में मरम्मत और मेंटेनेंस कार्य किया जाएगा, जिसके कारण करीब 75 इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से बाधित रहेगी। स्थानीय लोगों को इस दौरान पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन ने पहले से ही पानी स्टोर करके रखने की सलाह दी है। किन इलाकों पर होगा सबसे ज्यादा असर? कोलार लाइन से जुड़े कई रिहायशी और शहरी क्षेत्रों में पानी की सप्लाई रुक सकती है। इनमें मुख्य रूप से वे इलाके शामिल हैं जो सीधे कोलार जल परियोजना पर निर्भर हैं। प्रशासन की अपील नगर निगम ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे 2–3 जून के लिए पहले से पानी का संग्रह कर लें और पानी का उपयोग सावधानी से करें। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद सप्लाई सामान्य कर दी जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार मेंटेनेंस के दौरान पानी की समस्या बढ़ जाती है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यह कार्य लंबे समय के बेहतर जल आपूर्ति के लिए जरूरी है।
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MP में ‘Bhaskar Samadhan’ लॉन्च | सरकार और जनता के बीच बनेगा सेतु, भोपाल–इंदौर से होगी शुरुआत

MP में मुख्यमंत्री ने एक नई डिजिटल पहल ‘भास्कर समाधान’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य सरकार और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि लोगों की समस्याओं को तेजी और पारदर्शिता के साथ हल किया जा सके। यह प्लेटफॉर्म ‘भास्कर’ के सहयोग से विकसित किया गया है, जो एक माध्यम के रूप में काम करेगा और जनता की शिकायतों व सुझावों को सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचाएगा। पहले चरण में भोपाल और इंदौर शामिल इस योजना के पहले चरण में केवल भोपाल और इंदौर के नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यहां के लोग अपनी समस्याएं ऑनलाइन पोस्ट कर सकेंगे, जिन्हें संबंधित विभागों तक भेजकर समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। क्या है ‘भास्कर समाधान’? ‘भास्कर समाधान’ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका मकसद जनता की समस्याओं को तेजी से दर्ज करना और उनका समाधान सुनिश्चित करना है। इससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का दावा सरकार का कहना है कि इस पहल से जनता को अपनी शिकायतों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समाधान प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो जाएगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह पहल वास्तव में उनकी समस्याओं के समाधान में मददगार साबित होगी और सरकारी व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।
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Twisha केस में बड़ा अपडेट | CBI ने किया सीन रीक्रिएशन, परिवार के सामने जांच, डॉक्टर से भी होगी पूछताछ

Twisha केस में बड़ा अपडेट | CBI ने किया सीन रीक्रिएशन, परिवार के सामने जांच, डॉक्टर से भी होगी पूछताछ

Twisha केस में जांच तेज हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation ने मामले की गहराई से पड़ताल करते हुए घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन किया है। परिवार की मौजूदगी में सीन रीक्रिएशन जांच के दौरान CBI टीम ने सास और पति की मौजूदगी में घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना कैसे हुई और किन परिस्थितियों में मामला सामने आया। डॉक्टर से होगी पूछताछ जांच एजेंसी अब उस डॉक्टर से भी पूछताछ करने की तैयारी में है, जिसने कथित तौर पर गर्भपात (abortion) को लेकर सलाह दी थी। माना जा रहा है कि इस बयान और मेडिकल सलाह की भूमिका भी केस में अहम हो सकती है। मामले की जांच तेज CBI हर एंगल से जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। परिवार और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सबूतों की बारीकी से जांच की जा रही है। आगे की कार्रवाई अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएगा। फिलहाल केस संवेदनशील चरण में है और हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
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बिलासपुर में पूर्व महापौर और बेटे पर बिल्डर से मारपीट का आरोप, CCTV वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कांग्रेस के पूर्व महापौर और उनके बेटे पर एक अधेड़ बिल्डर से मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना में बिल्डर घायल हो गया। बताया जा रहा है कि कॉलोनी के रास्ते को लेकर चल रहे विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। इस पूरी घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने पूर्व महापौर राजेश पाण्डेय और उनके बेटे राहुल पाण्डेय के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। कॉलोनी के रास्ते को लेकर चल रहा था विवाद शिकायतकर्ता अमित शर्मा के मुताबिक, रविवार को कॉलोनी सोसाइटी की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में कॉलोनी के गेट के पास खराब रास्ते की सफाई और मरम्मत को लेकर चर्चा हुई। कॉलोनीवासियों ने बारिश से पहले रास्ता ठीक कराने पर सहमति जताई। इसके बाद सभी लोग कॉलोनी गेट के पास पहुंचे। इसी दौरान राजेश पाण्डेय और राहुल पाण्डेय भी वहां आ गए और रास्ते पर काम कराने का विरोध करने लगे। उनका कहना था कि सभी लोग अपने-अपने रास्ते का उपयोग करें। समस्या बताने पर भड़के पिता-पुत्र कॉलोनी के लोग हाथ जोड़कर अपनी समस्या समझाने की कोशिश कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान राजेश पाण्डेय और राहुल पाण्डेय अचानक भड़क गए। शिकायत के अनुसार राहुल पाण्डेय ने बिल्डर अमित शर्मा के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। यह भी आरोप है कि रास्ता रोकने के लिए सड़क पर लेटने की कोशिश की गई। जमीन पर गिराकर की मारपीट अमित शर्मा ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उनका पैर खींचकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि पत्थर से उनके सिर और दाहिने कंधे पर हमला किया गया। इस दौरान उनका चश्मा भी टूट गया। जान से मारने की धमकी का आरोप पीड़ित ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद कॉलोनी के लोगों में डर का माहौल है। अमित शर्मा की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने राजेश पाण्डेय और राहुल पाण्डेय के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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JEE एडवांस 2026 में जिले के तीन छात्रों का चयन, जुड़वां भाई-बहन ने भी लहराया परचम

JEE एडवांस 2026 का परीक्षा परिणाम घोषित हो गया है। जिले के तीन छात्रों ने परीक्षा में सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इनमें जुड़वां भाई-बहन भी शामिल हैं। वहीं एक छात्र के पिता पीएचई विभाग में एसडीओ पद पर पदस्थ हैं। व्योम नीखरा ने हासिल की 459वीं ऑल इंडिया रैंक जानकारी के अनुसार, जिले के व्योम नीखरा, पृथ्वीश भोज और प्रियांशी भोज का चयन JEE एडवांस 2026 में हुआ है। व्योम नीखरा ने ऑल इंडिया 459वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता सुधींद्रनाथ नीखरा राघौगढ़ (गुना) में पीएचई विभाग में एसडीओ के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले व्योम ने CBSE 12वीं परीक्षा में 94 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। व्योम समाजसेवी इंजीनियर डीएन नीखरा के भतीजे हैं। उनकी इस सफलता पर परिवार, शुभचिंतकों और सामाजिक बंधुओं ने खुशी जताते हुए बधाई दी है। जुड़वां भाई-बहन ने भी पास की परीक्षा दूसरी ओर NFL कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह भोज और विज्ञान शिक्षिका मंजू भोज के दोनों बच्चों ने भी JEE एडवांस परीक्षा में सफलता हासिल की है। दोनों जुड़वां भाई-बहन हैं। पृथ्वीश भोज ने ऑल इंडिया SC वर्ग में 115वीं रैंक प्राप्त की है। वहीं उनकी बहन प्रियांशी भोज ने SC वर्ग में 1424वीं रैंक हासिल की है। दोनों बच्चों की सफलता से परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। सभी ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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