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ग्राम सभा के दौरान प्रभारी सचिव से मारपीट: पानी के किराये को लेकर पंचायत भवन में घुसे 4 आरोपी

सागर जिले के सानौधा थाना क्षेत्र के ग्राम पड़रिया में पानी के किराये को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि ग्राम सभा की बैठक के दौरान रोजगार सहायक और प्रभारी सचिव के साथ जमकर मारपीट कर दी गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपियों द्वारा हमला करते हुए देखा जा सकता है। पानी के पैसे मांगने पहुंचे थे आरोपी पुलिस के अनुसार, ग्राम पड़रिया में पदस्थ रोजगार सहायक और अतिरिक्त सचिव मुकेश कुर्मी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि गांव में पानी की कमी के चलते 17 अप्रैल से पंचायत द्वारा साहब सिंह चौहान के निजी बोर से किराये पर पानी लिया जा रहा था। ग्राम सभा के दौरान हुआ विवाद 5 जून की दोपहर मुकेश पंचायत भवन में ग्राम सभा की बैठक में व्यस्त थे। इसी दौरान साहब सिंह चौहान वहां पहुंचे और पानी के किराये की राशि मांगने लगे। मुकेश ने सरपंच से बात कर भुगतान कराने की बात कही, जिससे साहब सिंह नाराज हो गए। डंडे, लात-घूंसों से की पिटाई आरोप है कि विवाद बढ़ने पर साहब सिंह का भाई गुड्डू उर्फ इमरत सिंह चौहान और उनके बेटे नीतेश व निशांत भी मौके पर पहुंच गए। चारों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और विरोध करने पर मुकेश कुर्मी के साथ मारपीट की। पीड़ित के मुताबिक, गुड्डू ने डंडे से हमला किया, जबकि अन्य आरोपियों ने पकड़कर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई की गई। सरकारी दस्तावेज भी फाड़े मारपीट के दौरान आरोपियों ने पंचायत भवन में रखे सरकारी रजिस्टर और अन्य दस्तावेज भी फाड़ दिए। घटना के समय मौजूद ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। पुलिस ने दर्ज किया केस पुलिस ने पीड़ित प्रभारी सचिव की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सचिवों और रोजगार सहायकों में नाराजगी घटना के विरोध में रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों ने सागर एसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया ह अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सागर में बड़ा अनाज घोटाला? वेयरहाउस में पहुंचा 90% मिट्टी मिला गेहूं, जांच के आदेश

सागर के गंभीरिया स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस में मिट्टी मिला अमानक गेहूं पहुंचने का मामला सामने आया है। ट्रक में करीब 600 बोरियां भरकर गेहूं लाया गया था, लेकिन जांच में बोरियों में लगभग 10 प्रतिशत गेहूं और 90 प्रतिशत मिट्टी होने का दावा किया गया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। कर्मचारी को हुआ शक, खुली मिलावट की पोल जानकारी के अनुसार, लक्ष्मी नगर स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस को वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन की सांईखेड़ा ब्रांच ने करीब एक माह पहले अधिग्रहित किया था। यहां विभिन्न उपार्जन केंद्रों से गेहूं लाकर संग्रहित किया जा रहा है। इसी दौरान ट्रक क्रमांक MP 15 ZR 9190 करीब 600 बोरियां लेकर वेयर हाउस पहुंचा। मजदूर जब बोरियां उतार रहे थे, तभी वेयर हाउस की निगरानी कर रहे कर्मचारी को गेहूं की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। जांच करने पर बोरियों में बड़ी मात्रा में मिट्टी भरी मिली। सुपरवाइजर ने तुरंत लौटाई खेप वेयरहाउस सुपरवाइजर ने बोरियों में मिलावटी और अमानक गेहूं पाए जाने के बाद पूरी खेप वापस लौटा दी। इसके बाद मामले की जानकारी प्रशासन को दी गई। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने दिए जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिभा पाल ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। सोमवार को प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम वेयर हाउस पहुंची और गेहूं की गुणवत्ता, खरीद प्रक्रिया, परिवहन और उसके स्रोत की जांच शुरू की। गेहूं कहां से आया, कौन जिम्मेदार? जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गेहूं कहां से लाया गया, किसके द्वारा खरीदा गया और इसमें इतनी बड़ी मिलावट कैसे हुई। स्थानीय स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत: बढ़ेगा वेतन, वित्त विभाग ने जारी किए आदेश

मध्य प्रदेश के एक लाख से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने उनके पारिश्रमिक में 4.46 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू करने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने सोमवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। पिछले साल से ज्यादा बढ़ा पारिश्रमिक इस बार संविदा कर्मचारियों को मिलने वाली वृद्धि दर पिछले साल की तुलना में अधिक है। वर्ष 2025 में संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में 3.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 4.46 प्रतिशत हो गई है। CPI के आधार पर तय होती है बढ़ोतरी वित्त विभाग ने यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के आधार पर जारी किया है। इस नीति के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर हर साल संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाती है। डेढ़ लाख में से सिर्फ एक लाख कर्मचारियों को फायदा प्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन नई बढ़ोतरी का लाभ सभी को नहीं मिलेगा। जिन विभागों में अभी तक 2023 की संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां के कर्मचारियों को इस बढ़ोतरी का फायदा नहीं दिया जाएगा। ऐसे में करीब एक लाख कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिल पाएगा। संघ ने उठाई सभी विभागों में लागू करने की मांग संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि जिन विभागों में अभी तक नई संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां भी कर्मचारियों को CPI आधारित पारिश्रमिक वृद्धि का लाभ दिया जाए। संघ का कहना है कि सभी संविदा कर्मचारियों को समान रूप से फायदा मिलना चाहिए। कर्मचारियों में खुशी का माहौल सरकार के इस फैसले के बाद संविदा कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। महंगाई के दौर में वेतन वृद्धि को कर्मचारियों ने राहत देने वाला कदम बताया है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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Congress

MP Election Buzz: Congress में अंदरूनी खींचतान या रणनीति? मीनाक्षी का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल अब खुलकर दिखाई देने लगी है। नेताओं के बयान, पार्टी के भीतर की गतिविधियां और लगातार बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इसी बीच Congress नेता मीनाक्षी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनाव में पार्टी मजबूती से जीत दर्ज करेगी। हालांकि, मीनाक्षी के इस बयान के बीच कांग्रेस को एक बड़ा झटका भी लगा है। दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले नेता ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। Meenakshi का भरोसा- Congress मजबूत है मीडिया से बातचीत के दौरान मीनाक्षी ने कहा कि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता और नेता मिलकर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस लोगों के मुद्दों को लेकर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठन कमजोर नहीं होता। कांग्रेस पहले भी चुनौतियों से उभरी है और इस बार भी जनता का समर्थन पार्टी को मिलेगा। Digvijaya समर्थक Gyanchandani का इस्तीफा बना चर्चा का विषय कांग्रेस के भीतर उस समय हलचल तेज हो गई जब दिग्विजय सिंह समर्थक माने जाने वाले ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के अंदर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह किसी व्यक्ति का निजी फैसला है और पार्टी पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। संगठन अभी भी पूरी तरह सक्रिय और मजबूत है। Kailash Vijayvargiya ने Congress पर साधा निशाना बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि विकास चाहने वाले लोग बीजेपी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीजेपी सरकार ने लगातार विकास कार्य किए हैं और जनता इन्हीं कामों के आधार पर वोट करेगी। विजयवर्गीय ने कहा कि सड़क, बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सरकार ने कई बड़े काम किए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर केवल बयानबाजी और अंदरूनी राजनीति करने का आरोप लगाया। चुनाव नजदीक, सियासी बयानबाजी तेज जैसे-जैसे मध्य प्रदेश में चुनाव करीब आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होती जा रही हैं। कांग्रेस जहां खुद को एकजुट दिखाने में लगी है, वहीं बीजेपी विकास के मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है। अब आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों बड़ी पार्टियां चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गुना में दिनदहाड़े जानलेवा हमला: पीड़ित परिवार ने SP ऑफिस पहुंचकर लगाई सुरक्षा की गुहार

गुना शहर के वंदना कॉन्वेंट स्कूल के पास गुरुवार को हुए जानलेवा हमले के मामले में शनिवार को पीड़ित परिवार समाज के लोगों के साथ एसपी ऑफिस पहुंचा। परिवार ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार उनका पीछा कर जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। घटना के बाद से परिवार दहशत में है। पुराने जमीन विवाद से जुड़ा मामला परिजनों के मुताबिक आरोपियों के साथ उनका लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। बमोरी इलाके में नरेश चौकसे के नाम पर एक प्लॉट की रजिस्ट्री है, जिस पर आरोपी कब्जा करना चाहते थे। बताया गया कि पहले कलेक्टर से शिकायत के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर प्लॉट को अतिक्रमण मुक्त कराया था। इसी रंजिश में आरोपियों ने हमला किया। मंदिर से लौट रहे युवक पर हमला पीड़ित परिवार के अनुसार, विंध्याचल कॉलोनी निवासी नरेश चौकसे गुरुवार को मंदिर से दर्शन कर स्कूटर से घर लौट रहे थे। जैसे ही वे वंदना कॉन्वेंट स्कूल की घाटी के पास पहुंचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे संतोष किरार, उसका बेटा सूरज और अन्य बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि बदमाशों ने स्कूटर पर लाठी मारकर उन्हें गिराया और फिर लाठी-डंडों व लोहे के पाइप से बेरहमी से हमला किया। जब नरेश ने बचने की कोशिश की तो एक आरोपी ने कट्टा निकालकर धमकाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हूटर की आवाज सुनकर भागे आरोपी हमले के दौरान सड़क से गुजर रहे एक वाहन के हूटर की आवाज सुनाई दी। बदमाशों को लगा कि पुलिस आ गई है, जिसके बाद वे धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। परिवार का आरोप है कि दिनदहाड़े हुए हमले के बावजूद किसी ने बीच-बचाव की कोशिश नहीं की। पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग पीड़ित परिवार ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, सुरक्षा और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि आवेदन के आधार पर जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। पढ़ें देश और प्रदेश की ताजा खबरें: www.deshharpal.com
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खंडवा-इंदौर हाईवे पर दर्दनाक हादसा, आंधी में गिरे पेड़ से टकराई बाइक; 4 महीने पहले हुई शादी, युवक की मौत

खंडवा-इंदौर हाईवे पर छैगांवमाखन थाना क्षेत्र के ग्राम दोंदवाड़ा के पास शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। आंधी के कारण सड़क पर गिरे पेड़ से एक बाइक टकरा गई। हादसे में 22 वर्षीय युवक सावन मालाकार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी घायल हो गई। पारिवारिक कार्यक्रम से लौट रहे थे पति-पत्नी जानकारी के मुताबिक, सावन मालाकार अपनी पत्नी के साथ बड़वाह से एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होकर खंडवा लौट रहा था। परिजनों ने बताया कि दोनों की शादी महज 4 महीने पहले ही हुई थी। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। अंधेरे में दिखाई नहीं दिया पेड़ परिजनों के अनुसार, सावन निवासी गणेश तलाई, खंडवा अपनी बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान तेज आंधी के कारण हाईवे पर एक पेड़ गिर गया था। रात का अंधेरा होने की वजह से सावन को सड़क पर पड़ा पेड़ दिखाई नहीं दिया और बाइक सीधे उससे जा टकराई। सिर में गंभीर चोट लगने से गई जान टक्कर इतनी जोरदार थी कि सावन बाइक से उछलकर सिर के बल सड़क पर जा गिरा। उसके सिर में गंभीर चोट आई और ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उसकी पत्नी को भी चोटें आई हैं। घायल पत्नी हाईवे पर मांगती रही मदद हादसे के बाद घायल पत्नी अपने पति को उठाने की कोशिश करती रही। उसने राहगीरों से मदद भी मांगी, लेकिन रात का समय होने के कारण हाईवे पर ट्रैफिक बहुत कम था। पति को बचाने की कोशिश में वह खुद भी खून से लथपथ हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव शनिवार दोपहर जिला अस्पताल स्थित मेडिकल कॉलेज में सावन के शव का पोस्टमार्टम किया गया। हादसे की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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गुना में पहली बार होगा पंचमुखी पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव, 5 इंद्र-5 कुबेर समेत दिखेंगे दुर्लभ दृश्य

गुना में जल्द ही जैन समाज का ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक आयोजन मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के सानिध्य में होगा। खास बात यह है कि जैन इतिहास में पहली बार ऐसा पंचमुखी पंचकल्याणक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी प्रमुख पात्रों की संख्या पांच-पांच होगी। महोत्सव में 5 कुबेर, 5 यज्ञ नायक, 5 ईशान इंद्र और 5 सनत कुमार इंद्र शामिल होंगे। इसके अलावा भगवान के माता-पिता के रूप में 5 सौभाग्यशाली जोड़े बनाए जाएंगे। आयोजन के दौरान 5 नीलांजना नृत्य, 5 दीक्षाएं और 5 आहार जैसे दुर्लभ दृश्य भी देखने को मिलेंगे। मुनि सुधासागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुना का यह पंचकल्याणक बेहद अलौकिक और विशेष होगा। उन्होंने कहा कि उनके सानिध्य में अब तक देश में ऐसा आयोजन कहीं नहीं हुआ है। जैसे पंचमुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व होता है, उसी तरह यह पंचमुखी पंचकल्याणक भी ऐतिहासिक साबित होगा। मुनिश्री ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ गुना ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के कल्याण का माध्यम बनेगा। उन्होंने संकेत दिए कि इस दौरान इतनी मूर्तियों को सूर्य मंत्र दिया जाएगा कि संभव है कुछ नई मुनि दीक्षाएं भी हों। उन्होंने श्रद्धालुओं से अभी से मंत्र जाप शुरू करने का आह्वान किया। इस दौरान अंचल के कमलश्री परिवार ने अपना निजी सीमंधर जिनालय मंदिर सकल जैन समाज को समर्पित कर दिया। यह मंदिर अब बजरंगगढ़ कमेटी के अंतर्गत संचालित होगा। मुनिश्री ने परिवार को मंगल आशीर्वाद भी दिया। महोत्सव की तैयारियों के तहत शनिवार सुबह शहर में प्रभातफेरी निकाली गई। यात्रा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नसियांजी पहुंची। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के विरोध में भोपाल में पैदल मार्च आज

राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ संयुक्त रूप से पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह पैदल मार्च शुक्रवार शाम 4:30 बजे जहांगीराबाद स्थित जिंसी चौकी से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव वापस लेने की मांग करेंगे। स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला ने विदेशों में रहकर भारत की आजादी की लड़ाई को मजबूत किया और देश की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई थी। ऐसे व्यक्तित्व के नाम को हटाने का प्रयास स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का अपमान है। नए विश्वविद्यालय खोलने की मांग मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि प्रदेश को नए और विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की जरूरत है, न कि पुराने संस्थानों के नाम बदलने की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना चाहती है तो नए विश्वविद्यालय खोले जाएं, लेकिन ऐतिहासिक पहचान और विरासत से जुड़े संस्थानों के नाम नहीं बदले जाने चाहिए। प्रस्ताव वापस लेने की मांग विरोध कर रहे संगठनों ने सरकार से कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह फैसला भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर सीधा आघात है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। नागरिकों से शामिल होने की अपील आयोजकों ने शहरवासियों, छात्र-छात्राओं और समाज के सभी वर्गों से पैदल मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक नाम का मुद्दा नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत को बचाने की लड़ाई है। भोपाल और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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इंदौर में खूंखार कुत्ते का आतंक, 40 से ज्यादा लोगों को काटा, अस्पताल स्टाफ भी घायल

मध्य प्रदेश के इंदौर में शुक्रवार को एक आवारा कुत्ते ने जमकर आतंक मचाया। सांवेर रोड इलाके में कुत्ते ने डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स, मरीज, सिक्योरिटी गार्ड और राहगीरों समेत 40 से ज्यादा लोगों को काटकर घायल कर दिया। पीड़ितों में 16 से अधिक लोग अरबिंदो अस्पताल से जुड़े बताए जा रहे हैं। घटना की शुरुआत सुबह करीब 8 बजे अरबिंदो अस्पताल परिसर से हुई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार कुत्ता पिछले हिस्से से अस्पताल में घुसा और सबसे पहले स्टाफ पर हमला किया। इसके बाद वह सांवेर रोड और आसपास के कई इलाकों में घूमता रहा और लोगों को काटता गया। कई इलाकों में फैला दहशत का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुत्ता अरबिंदो अस्पताल से निकलकर रेवती रेंज, बरदरी गांव, एलएनसीटी कॉलेज, रेनेसा कॉलेज, नरसिंह मुंजी कॉलेज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गया। लगातार हो रहे हमलों के कारण इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों, छात्रों और कर्मचारियों में भय का माहौल है। कई लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। नगर निगम ने चलाया अभियान घटना के बाद शनिवार को नगर निगम की दो टीमें अरबिंदो अस्पताल पहुंचीं और कुत्तों को पकड़ने का अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घेराबंदी कर अब तक 23 कुत्तों को पकड़ा है। हालांकि, वह कुत्ता अब तक पकड़ में नहीं आया है जिसने 40 से ज्यादा लोगों पर हमला किया था। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हमले में घायल लोगों का इलाज अरबिंदो अस्पताल और अन्य चिकित्सा संस्थानों में किया गया। सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी उपचार दिया गया। इलाज कराने वालों में डॉ. स्मृति, डॉ. अक्षिता, सचिन राजपूत, अंजनी शर्मा, सीमा, शोभा, परिणीता, कुसुम, प्रणव गुप्ता, गोविंदा, विष्णु, अफसर, राजीव धाकड़ और आर्यन समेत कई लोग शामिल हैं। रोज सामने आ रहे 200 डॉग बाइट केस शहर में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शासकीय हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक (लाल अस्पताल) के प्रभारी डॉ. रुपेंद्र पटेल के मुताबिक, इंदौर में रोजाना करीब 200 लोग डॉग बाइट के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों और अस्पताल प्रबंधन ने नगर निगम से मांग की है कि हमला करने वाले कुत्ते को जल्द पकड़कर लोगों को राहत दी जाए। इंदौर और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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Monsoon

Goa में Monsoon की एंट्री, Kerala में Heavy Rain Alert; MP और छत्तीसगढ़ को अभी इंतजार

देश के कई हिस्सों में लोग तेज गर्मी और उमस से परेशान हैं, लेकिन अब राहत की खबर सामने आ रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon) ने Goa में एंट्री कर ली है और इसके साथ ही बारिश की गतिविधियां तेज होने लगी हैं। हालांकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि मौसम विभाग ने इन राज्यों में मानसून देर से पहुंचने का अनुमान जताया है। उधर Kerala में लगातार हो रही भारी बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए गए हैं। Kerala में बारिश का कहर, Wayanad-Kasaragod में Alert Kerala के Wayanad और Kasaragod जिलों में पिछले 24 घंटों से लगातार तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का फैसला लिया है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रेकिंग और पर्यटन गतिविधियों पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें। Goa पहुंचा Monsoon, मौसम हुआ सुहाना अरब सागर में बने अनुकूल मौसमीय सिस्टम की वजह से मानसून Goa तक पहुंच चुका है। बारिश शुरू होने के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। Goa के बीच और पर्यटन स्थलों पर भी बारिश का असर साफ दिखाई देने लगा है। MP-Chhattisgarh में मानसून की एंट्री में देरी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फिलहाल प्री-मानसून एक्टिविटी देखने को मिल रही है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रायपुर और दुर्ग समेत कई शहरों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश का दौर जारी है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार इन राज्यों में मानसून की आधिकारिक एंट्री सामान्य तारीख से कुछ दिन देर से हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक आंधी, बिजली गिरने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। किसानों की बढ़ी चिंता, बारिश का इंतजार खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक आने के साथ किसानों की नजरें मानसून पर टिकी हुई हैं। अच्छी बारिश खेती के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। कई किसान अब मानसून की स्थायी बारिश शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि बुवाई का काम समय पर शुरू हो सके। वहीं शहरों में रहने वाले लोग भी लगातार बढ़ रही गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जून के दूसरे सप्ताह से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। फिलहाल पूरे देश में मानसून की चाल पर नजर बनी हुई है और आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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