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Tarique Rahman

Tarique Rahman Swearing-in में PM Modi को Invite करने की तैयारी BNP का बड़ा संकेत

बांग्लादेश (Bangladesh) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हालिया संसदीय चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) को स्पष्ट बहुमत मिला है और पार्टी के वरिष्ठ नेता Tarique Rahman देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इसी बीच एक अहम कूटनीतिक संकेत सामने आया है—BNP की ओर से भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को शपथ ग्रहण समारोह (Swearing-in Ceremony) में आमंत्रित किए जाने की तैयारी चल रही है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक BNP नई सरकार की शुरुआत सकारात्मक संदेश के साथ करना चाहती है। पार्टी के कुछ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि क्षेत्रीय देशों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित करने की योजना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। हालांकि अभी तक औपचारिक निमंत्रण (Official Invitation) जारी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है। चुनाव के बाद बढ़ा संवाद चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी थी। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच मजबूत और सहयोगात्मक रिश्तों को आगे बढ़ाने की बात कही गई। BNP ने भी इस शुभकामना के लिए आभार जताया और संकेत दिया कि नई सरकार क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देगी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाती है। India-Bangladesh Relations पर क्या असर पड़ेगा? भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार (Trade), सीमा सुरक्षा (Border Security), ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जैसे कई रणनीतिक मुद्दे जुड़े हैं। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री मोदी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होते हैं, तो यह दोनों देशों के बीच भरोसे और निरंतरता का मजबूत संदेश होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निमंत्रण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संकेत हो सकता है कि ढाका (Dhaka) नई सरकार के तहत भारत के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना चाहता है। लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी बांग्लादेश और भारत के बीच केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते भी गहरे हैं। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से लेकर व्यापार जगत तक—हर किसी की नजर इस नई शुरुआत पर टिकी है। नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत की भागीदारी अगर होती है, तो इसे दक्षिण एशिया (South Asia) की राजनीति में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khalistan

Khalistan Terror Case Update US Federal Court का बड़ा फैसला, 24 साल की सजा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहे खालिस्तानी टेरर प्लॉट केस (Khalistan Terror Case) में बड़ा फैसला सामने आया है। अमेरिकी अदालत ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की जेल की सजा सुनाई है। उन पर खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप था, जिसे उन्होंने अदालत में स्वीकार कर लिया। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक चर्चाओं का भी बड़ा विषय बन गया है। क्या था पूरा Murder Conspiracy मामला? अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कथित साजिश न्यूयॉर्क में रची गई थी, जहां पन्नू रह रहे थे। अभियोजन पक्ष का कहना है कि निखिल गुप्ता ने एक व्यक्ति को सुपारी देकर पन्नू की हत्या करवाने की योजना बनाई थी। हालांकि, जिसे गुप्ता ने ‘हिटमैन’ समझा, वह दरअसल अमेरिकी एजेंसी का एक गुप्त सहयोगी निकला। यहीं से पूरी साजिश का खुलासा हुआ और जांच एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई कर दी। अदालत में सुनवाई के दौरान गुप्ता ने हत्या की साजिश (Murder-for-Hire Plot) से जुड़े आरोपों को स्वीकार किया। अदालत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए 24 वर्ष की सजा सुनाई। कोर्ट का सख्त रुख संघीय अदालत ने साफ कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की धरती पर किसी व्यक्ति की हत्या की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि इस तरह की योजना न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरे सिस्टम की सुरक्षा के लिए खतरा है। सजा संघीय कानूनों के तहत तय की गई और इसे एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। पन्नू क्यों हैं विवादों में? गुरपतवंत सिंह पन्नू लंबे समय से खालिस्तान की मांग को लेकर सक्रिय रहे हैं। भारत सरकार ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में नामित किया है। वहीं, अमेरिका में वे राजनीतिक गतिविधियों का दावा करते रहे हैं। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है। भारत-अमेरिका संबंधों पर असर इस केस ने दोनों देशों के रिश्तों में नई चर्चा को जन्म दिया है। राजनयिक स्तर पर बातचीत और जांच की प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मामले के दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं, खासकर सुरक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के संदर्भ में। एक मानवीय पहलू भी कानूनी और राजनीतिक बहसों के बीच यह मामला यह भी याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय साजिशों के पीछे कई स्तरों पर जटिल नेटवर्क काम करते हैं। अदालत में गुनाह कबूल करने के बाद यह साफ है कि कानून की पकड़ से बच पाना आसान नहीं। यह फैसला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां किस तरह समन्वय के साथ काम करती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BNP

PM Modi की बधाई के बाद BNP का पहला Reaction India के साथ क्या होगी नई Strategy

बांग्लादेश में हुए ताज़ा आम चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज करने वाली Bangladesh Nationalist Party (BNP) अब नई सरकार के गठन की तैयारी में जुट गई है। चुनाव परिणाम सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ढाका पर टिक गईं, खासकर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर उत्सुकता रही। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने चुनावी जीत पर बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने की इच्छा जताई। उनके संदेश के बाद BNP की ओर से भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पहला आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसने आने वाले समय की कूटनीतिक दिशा का संकेत दे दिया है। PM Modi की बधाई, क्षेत्रीय सहयोग पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में बांग्लादेश की जनता को शांतिपूर्ण और सफल चुनाव के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद खास हैं, और दोनों देशों को मिलकर क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए काम करना चाहिए। यह संदेश सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और साझेदारी की एक मजबूत झलक भी माना जा रहा है। BNP का जवाब: “समानता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि” बधाई संदेश के जवाब में BNP ने भारत का आभार जताया और साफ किया कि उसकी सरकार पड़ोसी देशों के साथ “आपसी सम्मान, समानता और राष्ट्रीय हित” के आधार पर रिश्ते आगे बढ़ाएगी। पार्टी के बयान में कहा गया कि नई सरकार संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगी। भारत के साथ व्यापार, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत जारी रहेगी, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। इस बयान से यह साफ है कि BNP टकराव की बजाय संवाद और संतुलन की नीति अपनाना चाहती है। India-Bangladesh Relations का भविष्य भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, ऊर्जा, ट्रांजिट और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी क्षेत्रीय विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई सरकार के आने के बाद कुछ नीतिगत प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी बरकरार रहने की संभावना अधिक है। आम लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के आम नागरिक भी स्थिर और मजबूत रिश्तों की उम्मीद रखते हैं। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर व्यापार और आवाजाही के अवसर सीधे तौर पर उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। बंपर जीत के बाद BNP का पहला बयान यह संकेत देता है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संवाद की डोर बनी रहेगी। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि नई सरकार अपने वादों को किस तरह नीतियों में बदलती है और भारत के साथ संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Election 2026 Tarique Rahman की सत्ता में वापसी की तैयारी

Bangladesh में राजनीतिक बदलाव की हवा बह रही है। लगभग 20 साल बाद BNP (Bangladesh Nationalist Party) ने चुनावी मैदान में जीत दर्ज की है और अब देश की जनता के सामने नए नेतृत्व की उम्मीदें हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना बहुत मजबूत दिखाई दे रही है। इतिहास में एक बड़ा मोड़ यह जीत BNP के लिए सिर्फ सत्ता में वापसी नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। अगर तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह देश को 35 साल बाद पहला पुरुष प्रधानमंत्री देगा। पिछले तीन दशकों में देश की राजनीति में दो प्रमुख महिला नेता—शेख हसीना और खालिदा जिया— का वर्चस्व रहा है। Tarique Rahman का राजनीतिक सफर तारिक रहमान BNP के संस्थापक पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। पार्टी में लंबे समय से उन्हें वास्तविक नेतृत्वकर्ता माना जाता रहा है। विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारी में अहम भूमिका निभाई। जनता की उम्मीदें और चुनौतियाँ नई सरकार के गठन के बाद जनता की नजरें इन मुख्य मुद्दों पर रहेंगी: बांग्लादेश के इस नए राजनीतिक अध्याय में जनता की आशाएँ और नेतृत्व की जिम्मेदारी दोनों ही बहुत बड़ी हैं। तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ BNP के लिए, बल्कि पूरे देश के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

Dal vs Deal India-US Trade Agreement में Pulses पर क्यों अटक गई बात? समझिए Red Line Strategy

India-US Trade Agreement 2026 इस समय वैश्विक व्यापार की सबसे चर्चित खबरों में से एक है। जहां एक तरफ दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ “दाल” यानी pulses इस समझौते की सबसे संवेदनशील कड़ी बनकर सामने आई। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि व्हाइट हाउस को अपनी फैक्टशीट में बदलाव करना पड़ा? और क्यों कहा जा रहा है कि भारत की “Red Line” के आगे अमेरिका को झुकना पड़ा? क्या है India-US Trade Deal 2026? फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम (interim) व्यापार समझौते की घोषणा हुई। इस डील का मुख्य उद्देश्य: अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर लगने वाले ऊंचे टैरिफ कम करने पर सहमति जताई। बदले में भारत भी कुछ अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलने को तैयार हुआ। कागज पर यह डील “win-win” दिख रही थी। लेकिन असली कहानी यहां से शुरू होती है। ‘Dal’ क्यों बनी सबसे बड़ा मुद्दा? भारत दुनिया के सबसे बड़े दाल उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। दाल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि: शुरुआती अमेरिकी फैक्टशीट में “certain pulses” पर टैरिफ में राहत का उल्लेख किया गया था। इसका मतलब यह माना गया कि भारत अमेरिकी दालों के लिए अपना बाजार अधिक खोल सकता है। यहीं से विवाद शुरू हुआ। किसानों और कृषि संगठनों को आशंका थी कि अगर अमेरिकी दालें कम शुल्क पर भारत आएंगी, तो घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं। इससे स्थानीय किसानों को सीधा नुकसान होगा। भारत की ‘Red Line’ क्या थी? ट्रेड नेगोशिएशन में “Red Line” का मतलब होता है — वह सीमा जिसे कोई देश पार नहीं करेगा। भारत ने साफ संकेत दिया कि: White House ने क्या बदला? विवाद बढ़ने और भारत की सख्त स्थिति के बाद व्हाइट हाउस ने अपनी फैक्टशीट में संशोधन किया। बदलाव इस प्रकार थे: “Certain Pulses” का उल्लेख हटाया गया नई फैक्टशीट में दालों का सीधा जिक्र नहीं किया गया। इससे यह संकेत गया कि pulses पर कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धता नहीं है। “Committed” से “Intends” पहले कहा गया था कि भारत 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने के लिए committed है। बाद में इसे बदलकर “intends to buy” कर दिया गया।यह भाषा कानूनी और राजनीतिक रूप से कम कठोर मानी जाती है। डिजिटल टैक्स पर भी नरमी डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने जैसी सख्त भाषा को भी नरम किया गया। इन संशोधनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका ने भारत की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति में बदलाव किया। किसानों की प्रतिक्रिया और घरेलू राजनीति डील की शुरुआती खबर के बाद कई किसान संगठनों ने चिंता जताई। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए कि क्या यह समझौता कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेगा। क्या यह Trump का U-Turn था? अमेरिकी राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव पर चर्चा हुई। कुछ विश्लेषकों ने इसे “softening of stance” यानी रुख नरम करना बताया। ट्रंप प्रशासन पर अमेरिकी कृषि लॉबी का दबाव था कि भारत अपना बाजार खोले। लेकिन भारत के स्पष्ट रुख के कारण दस्तावेज़ की भाषा बदलनी पड़ी। इसलिए कई रिपोर्टों में इसे “Trump took his finger off India’s sensitive pulse” जैसी अभिव्यक्ति दी गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Election 2026 चुनाव के साथ Referendum क्यों? India की बढ़ी चिंता

Bangladesh में 12 फरवरी 2026 को होने वाला आम चुनाव इस बार सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ भी माना जा रहा है। खास बात यह है कि आम चुनाव के साथ-साथ एक राष्ट्रीय Referendum (जनमत संग्रह) भी कराया जा रहा है। यानी जनता को एक ही दिन दो बड़े फैसले लेने हैं — नई सरकार चुनना और संविधान में प्रस्तावित बदलावों पर अपनी मुहर लगाना। यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ बांग्लादेश के लिए अहम है, बल्कि पड़ोसी देश भारत भी इसे बेहद करीब से देख रहा है। क्या है ‘July Charter’ Referendum? इस बार के Referendum में मतदाताओं से “July Charter” नाम के एक सुधार पैकेज पर हां या ना में वोट देने को कहा जाएगा। यह चार्टर 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल और जनआंदोलनों के बाद तैयार किया गया था। इसमें मुख्य प्रस्ताव शामिल हैं: सरकार का कहना है कि ये बदलाव लोकतंत्र को संतुलित और पारदर्शी बनाएंगे। हालांकि, विपक्ष और कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इतने बड़े संवैधानिक बदलावों को एक ही “हां या ना” सवाल में समेटना मतदाताओं के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। राजनीतिक मुकाबला: कौन है मैदान में? इस चुनाव में मुख्य मुकाबला BNP (Bangladesh Nationalist Party) और जमात-ए-इस्लामी जैसे दलों के बीच सिमटता दिख रहा है। राजनीतिक माहौल काफी ध्रुवीकृत हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और शासन को लेकर असंतोष ने राजनीतिक बहस को तेज किया है। यही वजह है कि यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि नीति और व्यवस्था में बदलाव की मांग से भी जुड़ा हुआ है। अल्पसंख्यक सुरक्षा और सामाजिक तनाव चुनाव से पहले कुछ क्षेत्रों में हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आई हैं। अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। कुछ संगठनों ने सुरक्षा की गारंटी मिलने तक चुनाव बहिष्कार की बात भी कही है। ऐसे माहौल में प्रशासन के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराना बड़ी चुनौती बन गया है। India क्यों है Concerned? भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं — चाहे वह व्यापार हो, कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स हों या सुरक्षा सहयोग। भारत की चिंता के मुख्य कारण हैं: नई दिल्ली आधिकारिक तौर पर इसे बांग्लादेश का आंतरिक मामला मानती है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। क्या दांव पर लगा है? यह चुनाव और Referendum मिलकर बांग्लादेश की लोकतांत्रिक संरचना को नई दिशा दे सकते हैं।अगर जनता July Charter को मंजूरी देती है, तो देश की संवैधानिक व्यवस्था में बड़े बदलाव संभव हैं।अगर इसे खारिज किया जाता है, तो राजनीतिक अनिश्चितता और बहस लंबी खिंच सकती है। साफ है कि 12 फरवरी सिर्फ एक मतदान तिथि नहीं, बल्कि Bangladesh के भविष्य का फैसला करने वाला दिन है। दक्षिण एशिया की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में कई नए समीकरण पैदा कर सकता है — और इसी वजह से ढाका से लेकर नई दिल्ली तक सबकी नजरें इस चुनाव पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Canada

Canada स्कूल शूटिंग से कांपा टंबलर रिज, शूटर समेत 9 मृत; प्रधानमंत्री ने विदेश दौरा छोड़ा

कनाडा ( Canada) से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के छोटे से शहर टंबलर रिज (Tumbler Ridge) में एक स्कूल के भीतर हुई गोलीबारी में शूटर समेत 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 25 लोग घायल हैं। यह घटना न सिर्फ कनाडा बल्कि वैश्विक स्तर पर स्कूलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्या है पूरा मामला? यह घटना 10 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 1:20 बजे (स्थानीय समय) हुई। टंबलर रिज सेकेंडरी स्कूल में उस समय पढ़ाई चल रही थी। इस स्कूल में कक्षा 7 से 12 तक के करीब 175 छात्र पढ़ते हैं। अचानक एक हथियारबंद व्यक्ति स्कूल परिसर में दाखिल हुआ और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी की आवाज सुनते ही स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। छात्र और शिक्षक जान बचाने के लिए क्लासरूम में छिप गए। कुछ बच्चों ने खिड़कियों से बाहर भागने की कोशिश की, तो कुछ फर्श पर लेटकर मदद का इंतजार करते रहे। मौत और घायलों की स्थिति पुलिस के अनुसार, इस हमले में 9 लोगों की मौत हुई है, जिनमें खुद शूटर भी शामिल है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शूटर ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की।इसके अलावा 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर लगातार उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरे इलाके में दहशत घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके में लॉकडाउन लगा दिया गया। पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में हालात काबू में आने पर लॉकडाउन हटाया गया, लेकिन शहर में अब भी डर और सन्नाटा है। स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सभी स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री Mark Carney का बड़ा फैसला इस दर्दनाक घटना के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने गहरा शोक जताया। उन्होंने कहा कि यह हमला “दिल तोड़ देने वाला” है और देश इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने अपना Germany Visit रद्द कर दिया। उन्हें जर्मनी में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेना था, लेकिन उन्होंने कहा कि इस समय उनकी प्राथमिकता अपने देश के लोगों के साथ रहना है। जांच जारी, कई सवाल बाकी पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि शूटर ने यह कदम क्यों उठाया। उसका मकसद क्या था, हथियार उसे कहां से मिला और क्या वह किसी मानसिक दबाव में था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Indian-Style Promises in Bangladesh Polls किसान कार्ड, Skill Development

Bangladesh एक बार फिर ऐसे चुनावी मोड़ पर खड़ा है, जहाँ सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा, लोकतांत्रिक भरोसा और सामाजिक नीतियों का भविष्य तय होना है।12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से पहले जो सबसे दिलचस्प बात सामने आ रही है, वह है — चुनावी वादों की भाषा और मॉडल, जो कई मायनों में भारत के चुनावी एजेंडे से मिलती-जुलती दिखाई दे रही है। किसान कार्ड, कौशल विकास, मिड-डे मील जैसी योजनाओं ने इस चुनाव को सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा बड़ा मुद्दा बना दिया है। चुनाव की पृष्ठभूमि: सत्ता बदली, सियासत बदली यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह शेख हसीना और अवामी लीग के सत्ता से बाहर होने के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है। लंबे समय तक सत्ता में रही अवामी लीग इस बार चुनावी मैदान में नहीं है, और देश का राजनीतिक केंद्र पूरी तरह बदल चुका है। अब मुख्य मुकाबला है: साथ ही, इसी चुनाव के साथ संवैधानिक जनमत संग्रह (Referendum) भी हो रहा है, जिसने चुनाव को और ज्यादा अहम बना दिया है। Indian-Style Promises: क्या वाकई ‘नकल’, या बदलती राजनीति? BNP के चुनावी घोषणापत्र ने सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरी हैं। वजह साफ है — इसमें शामिल कई वादे भारतीय चुनावों की याद दिलाते हैं। प्रमुख वादे जो चर्चा में हैं: यही कारण है कि मीडिया में यह सवाल उठ रहा है —क्या बांग्लादेश (Bangladesh)भारतीय चुनावी मॉडल को कॉपी कर रहा है? असल में, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीधी “नकल” नहीं, बल्कि लोकप्रिय और परखे हुए वेलफेयर मॉडल को अपनाने की रणनीति है। जनता का मूड: वादों से आगे भी सवाल हालांकि घोषणापत्र आकर्षक हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत थोड़ी अलग तस्वीर दिखाती है। मतदाता सिर्फ योजनाएँ नहीं देख रहे, वे पूछ रहे हैं: पिछले कुछ महीनों में BNP और जमात समर्थकों के बीच झड़पों ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है। India और China फैक्टर भी मैदान में इस चुनाव में विदेश नीति भी एक अहम मुद्दा बन गई है। यानी यह चुनाव सिर्फ ढाका की राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की कूटनीति से भी जुड़ा है। Bangladesh Election 2026 अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं रह गया है।यह चुनाव तय करेगा कि: किसान कार्ड, कौशल विकास और मिड-डे मील जैसे वादे सुनने में परिचित लग सकते हैं, लेकिन असली परीक्षा उनकी ज़मीन पर अमल की होगी। 12 फरवरी को आने वाला फैसला सिर्फ सरकार नहीं चुनेगा, बल्कि यह बताएगा कि बांग्लादेश किस रास्ते पर चलना चाहता है — वादों के भरोसे या बदलाव की उम्मीद के साथ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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US Tariff Cut का असर India–US Trade Deal से AYUSH और Nutraceutical Industry में नई जान

भारत और अमेरिका के बीच हुए India–US Interim Trade Deal 2025 ने भारतीय AYUSH और Nutraceutical सेक्टर के लिए नए अवसरों के दरवाज़े खोल दिए हैं। इस समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ में भारी कटौती की गई है, जिससे खासतौर पर आयुर्वेद, हर्बल और न्यूट्रास्यूटिकल कंपनियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी टैरिफ में कटौती से राहत अब तक भारतीय AYUSH और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों पर अमेरिका में लगभग 50 प्रतिशत तक टैरिफ लग रहा था। इस कारण भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया था।नए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद यह टैरिफ करीब 18 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है, जिससे भारतीय उत्पाद अब पहले की तुलना में ज्यादा किफायती दामों पर उपलब्ध हो सकेंगे। AYUSH और Nutraceutical सेक्टर क्यों है खास? भारत का AYUSH सेक्टर — जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और हर्बल उत्पाद शामिल हैं — दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेरिका जैसे बड़े बाजार मेंअश्वगंधा, हल्दी, अदरक, नीम, हर्बल एक्सट्रैक्ट्स और आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ में कटौती से भारतीय कंपनियों को न केवल लागत में राहत मिलेगी, बल्कि वे अमेरिकी ब्रांड्स और अन्य देशों के सप्लायर्स के साथ बेहतर तरीके से मुकाबला कर पाएंगी। निर्यात में तेजी की उम्मीद आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का AYUSH निर्यात अमेरिका को लगभग 688 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। नए टैरिफ स्ट्रक्चर के लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में इस आंकड़े के और बढ़ने की संभावना है। Pharmanza Herbal जैसी कंपनियों का मानना है कि यह बदलाव छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए भी बड़ा मौका साबित होगा, जो अब तक ऊंचे टैक्स के कारण अमेरिकी बाजार में कदम रखने से हिचकिचा रहे थे। सिर्फ AYUSH नहीं, कई सेक्टर होंगे मजबूत India–US Interim Trade Deal का असर केवल AYUSH और न्यूट्रास्यूटिकल तक सीमित नहीं है।इससे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और होम डेकोर जैसे कई भारतीय निर्यात सेक्टरों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं भारत ने भी अमेरिका से आने वाले कुछ औद्योगिक और चुनिंदा कृषि उत्पादों पर टैरिफ में आंशिक राहत देने पर सहमति जताई है, जबकि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। भारतीय ब्रांड्स के लिए क्या बदलेगा? इस व्यापार समझौते के बाद भारतीय कंपनियों को हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Islamabad

Islamabad Blast शिया समुदाय पर लक्षित आत्मघाती हमला

इस्लामाबाद, पाकिस्तान — शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को इस्लामाबाद (Islamabad) के तरलाई इलाके में स्थित शिया मस्जिद इमाम बारगाह (Imambargah) में जुमे की नमाज़ के दौरान एक भयानक आत्मघाती विस्फोट (Suicide Blast) हुआ। घटना के समय मस्जिद में भारी भीड़ थी, और विस्फोट के कारण 10 लोगों की मौत हुई जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का विवरण स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमलावर ने मस्जिद के मुख्य द्वार पर खुद को विस्फोट कर लिया। धमाके की आवाज पूरे इलाके में सुनी गई और मलबा चारों ओर बिखर गया।लोग खून से लथपथ और घायल स्थिति में बाहर भागते दिखे। तत्काल पुलिस और राहत टीमें (Rescue Teams) मौके पर पहुंची और घायल लोगों को अस्पताल ले जाया गया। मुख्य बिंदु: सुरक्षा और प्रतिक्रिया (Security & Response) इस्लामाबाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और इमरजेंसी (Emergency) घोषित कर दी। सुरक्षा एजेंसियाँ घटनास्थल पर फोरेंसिक जांच कर रही हैं। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट है कि यह धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने वाला आतंकी हमला (Targeted Terror Attack) था। सामाजिक और मानवीय प्रभाव (Social & Human Impact) यह हमला न केवल इस्लामाबाद बल्कि पूरे पाकिस्तान में शिया समुदाय और अन्य धार्मिक समूहों के लिए चिंता का विषय बन गया है।घायलों के परिवार सदमे में हैं और स्थानीय प्रशासन उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रहा है। स्थानीय लोग और विश्व समुदाय इस हमले की निंदा कर रहे हैं। सामाजिक मीडिया पर भी “Prayers for Islamabad” और “Shia Mosque Blast” ट्रेंड कर रहा है। इस्लामाबाद में यह आत्मघाती हमला पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर करता है।स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है और जनता से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amir Khan की तीसरी शादी की चर्चाओं पर राखी गुलजार का बयान, बोलीं- खुशी का उम्र से कोई संबंध नहीं

Amir Khan की तीसरी शादी की चर्चाओं पर राखी गुलजार का बयान, बोलीं- खुशी का उम्र से कोई संबंध नहीं

बॉलीवुड अभिनेता Amir khan की तीसरी शादी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच दिग्गज अभिनेत्री Rakhi Gulzar ने उनका खुलकर समर्थन किया है। जहां कुछ लोग आमिर के फैसले की आलोचना कर रहे हैं, वहीं राखी का मानना है कि शादी और खुशहाल जीवन का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता। एक इंटरव्यू में राखी गुलजार ने कहा कि 60 साल की उम्र में शादी करने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Robert De Niro भी दो बार शादी कर चुके हैं और 80 साल की उम्र के बाद पिता बने हैं। उनके अनुसार, खुशी और रिश्ते उम्र नहीं देखते, बल्कि व्यक्ति की भावनाओं और जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। राखी ने अपनी निजी जिंदगी का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने Gulzar से शादी की थी, तब उनकी उम्र 40 वर्ष थी। उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते की सफलता का आधार आपसी समझ, सम्मान और खुशी होती है, न कि उम्र। सोशल Media पर आमिर खान की कथित तीसरी शादी को लेकर बहस जारी है, लेकिन राखी गुलजार के बयान ने इस चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को अपनी खुशी और जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है।
Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एकजुट कर एक मजबूत मंच बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सहयोगी दलों के बीच एकजुटता और साझा सोच की कमी के कारण गठबंधन कमजोर पड़ गया। एक इंटरव्यू के दौरान संजय झा से पूछा गया कि वर्ष 2023 में इंडिया गठबंधन की पहली बैठक पटना में नीतीश कुमार के आवास पर हुई थी, फिर जेडीयू उससे अलग क्यों हो गई। इस पर उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी दलों का एक दिशा में काम करना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। संजय झा ने आरोप लगाते हुए कहा कि “दो लोगों ने इंडिया अलायंस को खत्म कर दिया। उनका नाम ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल है।” उनके अनुसार चुनाव के दौरान गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट रणनीति का अभाव दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी गठबंधन में शामिल दलों के बीच साझा लक्ष्य और समन्वय नहीं होता, तो उसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ता है। यही वजह रही कि विपक्षी एकता की कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। संजय झा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि उनके इस आरोप पर इंडिया गठबंधन के अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
CBI Raid in 661 Crore Fund Scam: हरियाणा-चंडीगढ़ में 6 ठिकानों पर छापेमारी

CBI Raid in 661 Crore Fund Scam: हरियाणा-चंडीगढ़ में 6 ठिकानों पर छापेमारी

हरियाणा और चंडीगढ़ में सामने आए 661 करोड़ रुपये के कथित सरकारी फंड घोटाले की जांच तेज हो गई है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 6 जून को चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर के 6 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़ा है, जिसमें IDFC First Bank और AU Finance Bank के माध्यम से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जांच के दौरान हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के फंड में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। सीबीआई की जांच में चंडीगढ़ नगर निगम और CREST (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी) के खातों में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर भी तलाशी ली गई। इसके अलावा मामले से जुड़े अधिकारियों और निजी कंपनियों के परिसरों की भी जांच की गई। जांच के दायरे में आई Vipam Consultancy Pvt. Ltd. और उसके निदेशक के ठिकानों पर भी सीबीआई की टीम ने दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसी अब जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामले की आगे की पड़ताल कर रही है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी फंड के इस्तेमाल और निगरा
Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर शहर के कई इलाकों में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है। इंटरनेट बंद होने का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ सकता है जो अपने रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर हैं। छात्रों की पढ़ाई, ऑनलाइन भुगतान, व्यापारिक गतिविधियां और डिजिटल सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानें। स्थानीय लोगों का मानना है कि इंटरनेट बंद होने से असुविधा जरूर होगी, लेकिन यदि इससे शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहती है तो सभी को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
तमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहास

तमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहास

Bangladesh क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) का नया अध्यक्ष चुना गया है। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है। इससे पहले वह बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने अप्रैल में BCB के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था। इसके बाद तमीम इकबाल को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बाद में जांच समिति की सिफारिशों और प्रशासनिक बदलावों के आधार पर बोर्ड में नई व्यवस्था लागू की गई। यह फैसला पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए चुनावों को लेकर लगे आरोपों की जांच के बाद गठित पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। समिति ने क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। 37 वर्षीय तमीम इकबाल अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं। क्रिकेट के मैदान पर अपनी शानदार बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचान बनाने वाले तमीम से अब क्रिकेट प्रशंसकों को बोर्ड प्रशासन में भी सकारात्मक बदलावों की उम्मीद है। बांग्लादेश क्रिकेट के लिए यह एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि तमीम इकबाल अपने अनुभव का उपयोग कर देश के क्रिकेट को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

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