अमेरिका ने H1B Visa पर नया $1 लाख (लगभग ₹85 लाख) का अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया है, जो भारतीय प्रोफेशनल्स और अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस कदम से H1B वीजा धारकों की संख्या में गिरावट, अमेरिकी कंपनियों की हायरिंग लागत में वृद्धि और भारतीय IT सेक्टर पर असर हो सकता है। H1B Visa Fee Hike का असर JPMorgan Chase & Co. के अनुसार, इस नई नीति के कारण हर महीने करीब 5,500 कम वर्क परमिट जारी हो सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2024 में कुल 141,000 नए H1B आवेदन में से लगभग 65,000 आवेदन विदेशों से थे — और इन्हें इस शुल्क वृद्धि से सबसे अधिक नुकसान होगा। अमेरिकी कंपनियों और कर्मचारियों पर प्रभाव इस नीति से अमेरिकी कंपनियों के लिए हायरिंग लागत बढ़ जाएगी, जिससे वे विदेशी टैलेंट को हायर करने में हिचकिचा सकती हैं। Amazon, Microsoft और JPMorgan जैसी बड़ी कंपनियों ने H1B कर्मचारियों को अमेरिका छोड़ने से बचने की चेतावनी दी है, ताकि वीजा रिन्यूअल और पुनः प्रवेश में कठिनाई न हो। भारतीय IT इंडस्ट्री और सरकार की प्रतिक्रिया भारतीय सरकार ने अमेरिका से इस नए नियम पर स्पष्टता मांगी है। वहीं, NASSCOM का कहना है कि इस नई फीस का असर भारतीय IT कंपनियों पर सीमित होगा, क्योंकि कंपनियां अब H1B वीजा पर निर्भरता कम कर रही हैं और अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती व अपस्किलिंग पर जोर दे रही हैं। आर्थिक और सामाजिक प्रभाव विश्लेषकों का कहना है कि H1B Visa शुल्क वृद्धि से अमेरिका में H1B वीजा धारकों की संख्या घट सकती है, जिससे भारत को भेजे जाने वाले रेमिटेंस में कमी आ सकती है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपया की कीमत पर भी असर डालेगा। हेल्थकेयर सेक्टर में विदेशी डॉक्टरों की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। H1B Visa Fee Hike एक बड़ा बदलाव है, जिसका असर भारतीय प्रोफेशनल्स, अमेरिकी कंपनियों और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालीन होगा। भारतीय IT कंपनियों को नए माहौल में अपनी हायरिंग रणनीतियों को बदलना पड़ेगा, और भारत-अमेरिका रोजगार संबंधों में नए स्वरूप देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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