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Bakrid 2026: ताजमहल घूमने वालों के लिए खुशखबरी, 28 मई को 3 घंटे फ्री एंट्री

Bakrid 2026: ताजमहल घूमने वालों के लिए खुशखबरी, 28 मई को 3 घंटे फ्री एंट्री

Bakrid 2026: ताजमहल घूमने वालों के लिए खुशखबरी, 28 मई को 3 घंटे फ्री एंट्री के मौके पर आगरा आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में 28 मई को सुबह 7 बजे से 10 बजे तक पर्यटकों को बिना टिकट प्रवेश की सुविधा दी जाएगी। इस दौरान भारतीय और विदेशी दोनों तरह के पर्यटक ताजमहल परिसर में मुफ्त एंट्री कर सकेंगे। आम दिनों में भारतीय पर्यटकों के लिए 50 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 1100 रुपये का टिकट लगता है, लेकिन बकरीद के अवसर पर यह शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। हालांकि, ताजमहल के मुख्य मकबरे में प्रवेश के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट पहले की तरह लागू रहेगा। यानी जो पर्यटक मुख्य मकबरा देखना चाहते हैं, उन्हें अलग से टिकट लेना होगा। प्रशासन के मुताबिक, बकरीद के दिन बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के खास इंतजाम किए गए हैं। परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी ताकि पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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Pre Monsoon Rain Alert: 29 मई से 5 जून तक होगी झमाझम बारिश, 90% भारत होगा कवर, बांदा में पारा 47.4°C

Pre Monsoon Rain Alert: 29 मई से 5 जून तक होगी झमाझम बारिश, 90% भारत होगा कवर, बांदा में पारा 47.4°C

Pre monsoon alert : देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम राहत देने की तैयारी में है। मौसम विभाग के अनुसार 29 मई से 5 जून के बीच देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि इस दौरान करीब 90% भारत में बारिश, तेज हवाएं और आंधी का असर रहेगा। हालांकि, केरल में नमी कम होने की वजह से मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। सामान्य तौर पर मानसून जून की शुरुआत तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार अरब सागर से पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण इसकी एंट्री थोड़ी अटक गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में परिस्थितियां बेहतर होने पर मानसून फिर तेजी पकड़ सकता है। उत्तर भारत में गर्मी का कहर लगातार जारी है। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन के सबसे गर्म दिनों में से एक रहा। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें लगभग खाली दिखाई दीं। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत कई राज्यों में आने वाले दिनों में आंधी और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-मानसून बारिश किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ेगी और खरीफ फसलों की तैयारी आसान होगी। फिलहाल लोगों को सलाह दी गई है कि तेज गर्मी के दौरान जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
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45°C की भीषण गर्मी में स्कूल ने लगाई समर क्लास, विरोध पर 10 छात्रों को निकाला; नियमों पर उठा सवाल

45°C की भीषण गर्मी में स्कूल ने लगाई समर क्लास, विरोध पर 10 छात्रों को निकाला; नियमों पर उठा सवाल

भीषण गर्मी के बीच एक स्कूल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में बच्चों को समर क्लास के लिए स्कूल बुलाया जा रहा था, जबकि जिला कलेक्टर ने पहले ही गर्मी को देखते हुए इस तरह की गतिविधियों पर रोक के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने आदेशों को नजरअंदाज करते हुए क्लासेज जारी रखीं। सवाल पूछने पर 10 बच्चों को निकाला मामला तब और गंभीर हो गया जब कुछ छात्रों और अभिभावकों ने गर्मी में बच्चों को बुलाने पर सवाल उठाए।आरोप है कि इस पर स्कूल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए लगभग 10 छात्रों को स्कूल से निकाल दिया। इस घटना के बाद अभिभावकों में नाराजगी फैल गई है और मामले ने तूल पकड़ लिया है। “हम अपने नियम खुद बनाते हैं” — स्कूल का बयान सूत्रों के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर स्कूल प्रशासन की ओर से कहा गया कि “हम अपने नियम खुद बनाते हैं”, जिससे विवाद और गहरा गया। इस बयान के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। प्रशासन की नजर में मामला स्थानीय प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहा है।कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना और छात्रों को स्कूल से निकालने जैसे आरोपों को गंभीर माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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हॉस्टल में हंगामा करने वाले छात्रों पर कार्रवाई, पेरेंट्स को बुलाया गया; एफिडेविट लिया जा रहा

Indore : हॉस्टल में हंगामा करने वाले छात्रों पर कार्रवाई, पेरेंट्स को बुलाया गया; एफिडेविट लिया जा रहा

Indore : एक हॉस्टल में छात्रों द्वारा किए गए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। घटना के बाद संबंधित छात्रों के माता-पिता को बुलाकर जवाब तलब किया गया है। अर्धनग्न होकर डांस और तोड़फोड़ का आरोप रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ छात्रों ने हॉस्टल परिसर में अनुशासन तोड़ते हुए अर्धनग्न अवस्था में डांस किया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद अन्य छात्रों और स्टाफ में भी असंतोष फैल गया। पेरेंट्स और छात्रों से लिया जा रहा एफिडेविट प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छात्रों और उनके अभिभावकों से लिखित एफिडेविट (शपथ पत्र) लिया जा रहा है, जिसमें भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल न होने का आश्वासन लिया जा रहा है। हॉस्टल प्रशासन का कहना है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टल में अनुशासन बनाए रखना प्राथमिकता है। ऐसे मामलों में छात्रों पर निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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Ebola

WHO Health Emergency on Ebola: कांगो में बिगड़े हालात, भारत समेत दुनिया अलर्ट पर

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में फैले Ebola Virus outbreak ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेजी से बढ़ते मामलों और मौतों के बीच World Health Organization (WHO) ने इसे Global Health Emergency (PHEIC) घोषित कर दिया है। पड़ोसी देश युगांडा तक संक्रमण पहुंचने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। कांगो में Ebola का कहर, 20 दिनों में बिगड़े हालात कांगो के कई हिस्सों में Ebola संक्रमण तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव है। स्थानीय प्रशासन और हेल्थ टीम लगातार कंट्रोल की कोशिश में जुटी हैं, लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। नया Ebola Strain क्यों बढ़ा रहा चिंता? इस बार फैला हुआ वायरस Bundibugyo Ebola strain बताया जा रहा है, जो पहले भी खतरनाक माना गया है। इसकी वजह से चिंता और बढ़ गई है क्योंकि: WHO ने क्यों घोषित की Global Health Emergency? WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर मानते हुए कहा है कि: WHO ने इसे एक “serious public health threat” बताया है और सभी देशों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। India Ebola Alert: भारत क्यों है सतर्क? भारत में अभी तक कोई Ebola केस नहीं मिला है, लेकिन सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भारत में फिलहाल जोखिम कम है, लेकिन international travel के कारण सतर्कता जरूरी मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इबोला

इबोला वायरस खतरा बढ़ा: भारत सरकार ने जारी की नई यात्रा चेतावनी

दुनिया के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस (Ebola Virus Disease) के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए भारत सरकार ने नागरिकों के लिए एक नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल जोखिम वाले क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचें और पूरी सावधानी बरतें। सरकार का कहना है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि संभावित संक्रमण को समय रहते रोका जा सके और देश में किसी भी तरह के खतरे से बचाव किया जा सके। क्या है इबोला वायरस? Ebola Virus Disease एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। यह बीमारी तेजी से शरीर को प्रभावित कर सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। प्रमुख लक्षण: किन देशों को लेकर अलर्ट? सरकार ने किसी एक देश की स्पष्ट सूची जारी नहीं की है, लेकिन सामान्य तौर पर इबोला के मामले अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। ऐसे में इन प्रभावित क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। सरकार की ट्रैवल एडवाइजरी (Important Guidelines) भारत सरकार ने यात्रियों के लिए कुछ जरूरी निर्देश जारी किए हैं: एयरपोर्ट और बॉर्डर पर बढ़ी निगरानी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स और सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और सख्त कर दिया है। संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान और आइसोलेशन के लिए मेडिकल टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच और रोकथाम से इस वायरस के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ईरान पर फिर सख्त दिखे Donald Trump, बोले- ‘किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे’

ईरान पर फिर सख्त दिखे Donald Trump, बोले- ‘किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे’

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहा है और आने वाले समय में क्या होगा, यह देखा जाएगा, लेकिन एक बात तय है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “अभी हम बातचीत कर रहे हैं और देखेंगे कि क्या होता है, लेकिन हम इसे किसी न किसी तरह हासिल करके ही रहेंगे। उनके पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा।” अमेरिका-ईरान तनाव फिर चर्चा में ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव की चर्चा तेज हो गई है। पिछले कुछ वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों और अमेरिका की चिंता बनी हुई है। अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जाना चाहिए, जबकि ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है। बातचीत और दबाव दोनों जारी ट्रंप के बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ ईरान पर दबाव भी बनाए रखना चाहता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर नजर बनी हुई है क्योंकि इसका असर मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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गायों की सुरक्षा के लिए ‘Go-LX’ प्लेटफॉर्म लॉन्च करेंगे शंकराचार्य Avimukteshwaranand Saraswati

गायों की सुरक्षा के लिए ‘Go-LX’ प्लेटफॉर्म लॉन्च करेंगे शंकराचार्य Avimukteshwaranand Saraswati

Avimukteshwaranand Saraswati ने गायों की सुरक्षा और गौ सेवा को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब यदि कोई हिंदू परिवार किसी मजबूरी में अपनी गाय बेचना चाहता है, तो उसके लिए एक खास व्यवस्था शुरू की जाएगी। शंकराचार्य के मुताबिक, OLX की तर्ज पर ‘Go-LX’ नाम का एक प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए गाय बेचने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति उनकी संस्था से संपर्क कर सकेगा और संस्था उस गाय को खरीद लेगी। गायों को कटने से बचाने की पहल शंकराचार्य ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य गायों को कटने से बचाना और गौ सेवा को बढ़ावा देना है। उनका कहना है कि कई बार आर्थिक या अन्य कारणों से लोग अपनी गाय बेच देते हैं, जिसके बाद कई गायें गलत हाथों में पहुंच जाती हैं। उन्होंने कहा कि ‘Go-LX’ के जरिए ऐसी गायों को सुरक्षित स्थान और उचित देखभाल मिल सकेगी। तकनीक के जरिए गौ सेवा इस पहल को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि लोग आसानी से संपर्क कर सकें। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था देशभर में गौ संरक्षण से जुड़े लोगों और संस्थाओं को भी जोड़ सकती है। सोशल मीडिया पर चर्चा तेज शंकराचार्य के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इस पहल को गौ संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया, वहीं कुछ लोग इसके संचालन और व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। हालांकि, संस्था की तरफ से फिलहाल प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग तारीख और अन्य तकनीकी जानकारी साझा नहीं की गई है।
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इबोला

Delhi Airport Health Alert: इबोला को लेकर भारत सतर्क, हाई-रिस्क देशों के यात्रियों की जांच तेज

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर इबोला वायरस को लेकर सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अफ्रीकी देशों में बढ़ते संक्रमण के मामलों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चेतावनी के बाद भारत ने यह एहतियाती कदम उठाया है। हालांकि देश में अभी तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए पहले से ही सतर्क हो गई है। क्यों बढ़ी चिंता? पिछले कुछ समय से डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और साउथ सूडान जैसे देशों में इबोला वायरस के मामले रिपोर्ट हुए हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी स्थिति पर नजर रखते हुए इसे गंभीर मानते हुए देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी के बाद भारत ने एयरपोर्ट स्तर पर स्क्रीनिंग और मॉनिटरिंग को और मजबूत कर दिया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर क्या हो रहा है? IGI एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों, खासकर हाई-रिस्क देशों से आने वालों के लिए: जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। किन देशों पर खास नजर? फिलहाल जिन देशों से आने वाले यात्रियों की सख्त जांच हो रही है: इन देशों को संक्रमण जोखिम के आधार पर “हाई रिस्क जोन” में रखा गया है। इबोला के शुरुआती लक्षण स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इबोला के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं, जैसे: भारत की मौजूदा स्थिति सरकारी सूत्रों के मुताबिक: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Skoda

Skoda G.O.A.T Campaign: इंडिया में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग शुरुआत के साथ परफॉर्मेंस का नया युग

परफॉर्मेंस और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को नई पहचान देते हुए Skoda Auto India ने अपना नया ब्रांड कैंपेन “G.O.A.T – Greatest on a Track” लॉन्च किया है। इस कैंपेन के जरिए कंपनी ने अपने मशहूर G.O.A.T (Greatest of All Time) कॉन्सेप्ट को एक नया मतलब दिया है, जहां फोकस सिर्फ नाम पर नहीं बल्कि ट्रैक पर असली परफॉर्मेंस पर है। यह कैंपेन स्कोडा की उस सोच को सामने लाता है जिसमें हर कार को सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि एक “ड्राइविंग एक्सपीरियंस” माना जाता है—जहां कंट्रोल, सेफ्टी और स्पीड एक साथ महसूस होती हैं। मोटरस्पोर्ट DNA और 130 साल की विरासत पर जोर स्कोडा का कहना है कि उसकी पहचान सिर्फ कार बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 130 वर्षों की ग्लोबल इंजीनियरिंग विरासत और 125 वर्षों की मोटरस्पोर्ट हिस्ट्री से जुड़ी हुई है। कंपनी अपने RS (Rally Sport) बैज की 50+ साल की जर्नी को भी इस कैंपेन के जरिए सेलिब्रेट कर रही है। इसी के साथ ब्रांड यह संदेश दे रहा है कि उसकी हर कार में रेसिंग DNA पहले से मौजूद है—चाहे वह सिटी ड्राइव हो या हाईवे पर स्पीड। रिकॉर्ड के साथ हुई दमदार शुरुआत इस नए कैंपेन की शुरुआत एक बड़े रिकॉर्ड के साथ हुई, जिसने पूरे ऑटोमोबाइल सेक्टर का ध्यान खींचा। India Book of Records और Asia Book of Records की निगरानी में स्कोडा ने “एक ही निर्माता की कारों द्वारा सबसे तेज मल्टी-कार रिले” का रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड कोयंबटूर के CoASTT (Coimbatore Auto Sports & Technical Training) ट्रैक पर बनाया गया, जहां स्कोडा की पांच कारों ने मिलकर 12:30.97 का शानदार टाइम दर्ज किया। पिट-स्टॉप चेंज सहित यह प्रदर्शन भारत में अब तक के सबसे तेज वाहन बेड़े की उपलब्धियों में शामिल हो गया है। स्कोडा का नया फोकस: सिर्फ स्पीड नहीं, पूरा ड्राइविंग एक्सपीरियंस कंपनी के अनुसार यह कैंपेन सिर्फ स्पीड दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि उस फील को दिखाने के लिए है जो ड्राइवर को स्टीयरिंग पकड़ते ही मिलता है। स्कोडा का मानना है कि असली परफॉर्मेंस सिर्फ आंकड़ों में नहीं होती, बल्कि उसमें होती है: यही वजह है कि कंपनी “Greatest on a Track” को सिर्फ स्लोगन नहीं बल्कि एक एक्सपीरियंस के रूप में पेश कर रही है। ब्रांड की स्ट्रैटेजी और आगे की योजना स्कोडा ऑटो इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर आशिष गुप्ता के मुताबिक, हर स्कोडा कार को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह हाई लेवल परफॉर्मेंस, सेफ्टी और डायनेमिक्स दे सके। कंपनी का यह भी कहना है कि यह कैंपेन उसकी “डिफरेंशिएशन स्ट्रैटेजी” का हिस्सा है, जिसके जरिए हर सेगमेंट में बेहतर ड्राइविंग एक्सपीरियंस पहुंचाया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AAP

Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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