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रायपुर में सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं का प्रदर्शन, NSUI के 5 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे

Raipur: छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में युवाओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर NSUI, विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान NSUI के पांच कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ताओं में हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपने खून से “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” लिखकर विरोध दर्ज कराया और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की। इधर, धमतरी में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने गांधी मैदान में एक दिवसीय अनशन किया। वहीं बीजापुर में बस्तर संभाग के आदिवासी युवा छात्र संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सोनम वांगचुक की मांगों पर सकारात्मक पहल करने की अपील की। छात्रों ने कहा- यह भविष्य की लड़ाई प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए रायपुर में रहकर शिक्षा सुधार और सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था लागू करने की मांग की। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। पहले दिन भी जुटे थे सैकड़ों लोग रविवार को आंदोलन के पहले दिन भी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 500 से अधिक छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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राम मंदिर ट्रस्ट पर कांग्रेस के गंभीर आरोप: चढ़ावे में अनियमितता की निष्पक्ष जांच की मांग

रायपुर। रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं और उनके नाम पर एकत्र किए गए चंदे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। गुरुवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में विकास उपाध्याय ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने विश्वास और श्रद्धा के साथ दान दिया था। ऐसे में चंदे के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। आस्था और विश्वास का विषय बताया विकास उपाध्याय ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यदि चंदे या चढ़ावे में किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस्तीफों पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफों और मीडिया में सामने आई खबरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि ट्रस्ट का संचालन पूरी तरह पारदर्शी है तो स्वतंत्र जांच कराने में संकोच क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और किसी भी तरह के संदेह का समाधान हो सके। नोट: यह आरोप कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए हैं। संबंधित ट्रस्ट, भाजपा, आरएसएस या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आई है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नाबालिग की गर्भसमापन याचिका, मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भसमापन (अबॉर्शन) की अनुमति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 20 जुलाई 2026 तक हाईकोर्ट में पेश करने को कहा है। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, नाबालिग हुई गर्भवती मामला रायपुर जिले का है, जहां एक युवक पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई। शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी पीड़िता की गर्भावस्था से जुड़ी समस्या बनी रही। इसके चलते नाबालिग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भसमापन की अनुमति मांगी। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया है। हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड गठित करने के दिए निर्देश सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि किसी भी आदेश से पहले पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि रायपुर के CMHO विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करें, जिसमें स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) भी शामिल हों। मेडिकल बोर्ड यह जांच करेगा कि गर्भसमापन सुरक्षित रूप से किया जा सकता है या नहीं और इससे पीड़िता के जीवन या स्वास्थ्य पर कोई गंभीर खतरा तो नहीं होगा। पीड़िता की गोपनीयता और सुरक्षा का विशेष ध्यान अदालत ने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान परिवार की सहमति से एक वयस्क महिला सदस्य की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साथ ही पीड़िता की पहचान, गोपनीयता और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि उसे किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। 20 जुलाई तक सौंपनी होगी मेडिकल रिपोर्ट हाईकोर्ट ने CMHO को निर्देश दिया है कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट 20 जुलाई 2026 तक अदालत में प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट में गर्भसमापन की चिकित्सकीय संभावना, उससे जुड़े जोखिम और संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद ही हाईकोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेगा। (पीड़िता की पहचान कानून के अनुसार गोपनीय रखी गई है।) छत्तीसगढ़, न्यायालय और प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए पढ़ते रहें DeshHarPal। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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अमरकंटक एक्सप्रेस के स्लीपर यात्रियों को बड़ी राहत, अब किराए पर मिलेगा बेडरोल

दुर्ग। दुर्ग-भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस में सफर करने वाले स्लीपर क्लास यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें भी यात्रा के दौरान किराए पर बेडरोल (चादर और तकिया) की सुविधा मिलेगी। रेलवे ने इस सेवा के संचालन के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया है, जिसका अनुबंध वर्ष 2031 तक रहेगा। अब स्लीपर क्लास में भी मिलेगी बेडरोल सुविधा अब स्लीपर क्लास के यात्री अपनी जरूरत के अनुसार बेडरोल किराए पर ले सकेंगे। इसके लिए रेलवे ने अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए हैं। इन ट्रेनों में मिलेगी सुविधा यह सुविधा फिलहाल ट्रेन नंबर 12853 (दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस) और ट्रेन नंबर 12854 (भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस) में उपलब्ध रहेगी। अब तक यह सुविधा केवल एसी कोच के यात्रियों को ही मिलती थी, लेकिन अब स्लीपर क्लास के यात्रियों को भी लंबी दूरी की यात्रा के दौरान अधिक आरामदायक सफर का लाभ मिलेगा। रेलवे का कहना है कि इस नई व्यवस्था से यात्रियों को अपनी चादर और तकिया साथ ले जाने की आवश्यकता कम होगी, जिससे उनकी यात्रा पहले से अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनेगी। रेलवे, ट्रेनों और यात्रियों से जुड़ी ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें DeshHarPal। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में महतारी वंदन योजना पर हंगामा, कांग्रेस का वॉकआउट; साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन सदन में महतारी वंदन योजना, राशन व्यवस्था और अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला। कांग्रेस ने महतारी वंदन योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा और जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया। महतारी वंदन योजना से 1.55 लाख महिलाओं के नाम हटने पर विवाद प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि महतारी वंदन योजना के लाभार्थियों की संख्या 70.09 लाख से घटकर 68.54 लाख रह गई है। इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि करीब 1.55 लाख महिलाओं के नाम मृत्यु, ई-केवाईसी नहीं कराने, आयकरदाता बनने या अन्य पात्रता संबंधी कारणों से सूची से हटाए गए हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और बाद में वॉकआउट कर दिया। राशन वितरण व्यवस्था पर भी उठे सवाल प्रश्नकाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सवाल उठाए। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि यदि शिकायत और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सामूहिक विवाह में नकली मंगलसूत्र का मुद्दा भी गूंजा कांग्रेस विधायक और पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित तौर पर नकली मंगलसूत्र दिए जाने का मामला उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि संबंधित एजेंसी के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जवाब में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बालोद जिले से इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कार्रवाई का प्रश्न नहीं उठता। साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश करते हुए विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव रखा। अब इस प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा होगी। कांग्रेस सरकार को कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बुलडोजर कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा अपनी योजनाओं और विकास कार्यों का पक्ष रखेगी। विधानसभा में किसके पास कितना संख्या बल? वर्तमान विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक, कांग्रेस के 35 विधायक और 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं। ऐसे में संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। अब तक कोई अविश्वास प्रस्ताव सफल नहीं हुआ छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक 9 अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन कोई भी प्रस्ताव सरकार के खिलाफ पारित नहीं हो सका। इन सभी मामलों में सरकारें बहुमत साबित करने में सफल रहीं। वर्ष 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ हुई 24 घंटे 25 मिनट की चर्चा विधानसभा के इतिहास की सबसे लंबी बहस मानी जाती है। इस बार विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव राज्य गठन के बाद 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। छत्तीसगढ़ की राजनीति, विधानसभा की कार्यवाही और अन्य महत्वपूर्ण खबरों के लिए पढ़ते रहें — DeshHarPal. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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रायपुर में भक्ति और उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

रायपुर। राजधानी रायपुर गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आई। गायत्री नगर स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपराओं के बीच निकाली गई। “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने निभाई ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका अपनी धर्मपत्नी के साथ तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद रहे। दोनों ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने सनातन परंपरा के अनुसार स्वर्ण झाड़ू से रथ मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई कर ‘छेरा पहरा’ की ऐतिहासिक परंपरा निभाई। यह परंपरा सेवा, समानता और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती है। सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता का महापर्व जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष एवं रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, सेवा और जनभागीदारी का महापर्व है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मंदिर से मौसी मंदिर तक निकली रथयात्रा रथयात्रा गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर खम्हारडीह थाना, बीटीआई ग्राउंड होते हुए मौसी मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने पुष्पवर्षा, आरती और भजन-कीर्तन के साथ भगवान का स्वागत किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों के भजन-कीर्तन, आकर्षक झांकियां, ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, झूमर, करमा और सुवा नृत्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे। सजे-धजे रथों और भक्तों की अपार आस्था ने राजधानी रायपुर में पुरी धाम जैसा आध्यात्मिक माहौल बना दिया। श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम यात्रा मार्ग पर पेयजल, चिकित्सा सहायता, विश्राम स्थल और महाप्रसाद वितरण के लिए कई सेवा शिविर लगाए गए। नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवकों ने समन्वय के साथ व्यवस्थाएं संभालीं, जिससे रथयात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। मौसी मंदिर में महाआरती और महाप्रसाद रथयात्रा के अंतिम पड़ाव पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रह मौसी मंदिर पहुंचे। यहां वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना, महाआरती और महाप्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि और मानव कल्याण की कामना करते हुए भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में कारोबार करना होगा आसान: विधानसभा से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026’ पारित, MSME को बड़ी राहत

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ को पारित कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ रिस्क बेस्ड (Risk-Based) और ट्रस्ट बेस्ड (Trust-Based) बिजनेस परमिशन सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से उद्योग स्थापित करने और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी, जिससे खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़ा लाभ मिलेगा। जोखिम के आधार पर मिलेगी अनुमति नई व्यवस्था के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का वर्गीकरण उनके आकार और गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा। इससे छोटे कारोबारियों को अनावश्यक जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। सेल्फ सर्टिफिकेशन को मिलेगा बढ़ावा अधिनियम के तहत कम जोखिम वाले उद्यमों में बार-बार विभागीय निरीक्षण की आवश्यकता कम होगी। ऐसे मामलों में सेल्फ सर्टिफिकेशन या लाइसेंसधारी इंजीनियर, आर्किटेक्ट अथवा अधिकृत विशेषज्ञ के प्रमाणन के आधार पर अनुमति दी जा सकेगी। सरकार का दावा है कि इससे अनुमति प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। हर साल लाइसेंस नवीनीकरण की बाध्यता खत्म नए कानून के तहत उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति का नवीनीकरण कराने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली लागू होने से उद्यमियों का समय और लागत दोनों कम होंगे तथा वे कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। MSME को मिलेंगी कई अहम सुविधाएं नई व्यवस्था में MSME इकाइयों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं— हालांकि, अधिक जोखिम वाली परियोजनाओं में तकनीकी जांच और भौतिक निरीक्षण की प्रक्रिया जारी रहेगी। 8 विभागों की 43 सेवाएं होंगी शामिल इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार के 8 विभागों की 43 सेवाओं को जोखिम आधारित अनुमति प्रणाली में शामिल किया गया है। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार कार्यपालिका परिषद की मंजूरी से नई सेवाओं को भी जोड़ा जा सकेगा। तीन स्तर पर होगी निगरानी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। 15 लाख से अधिक MSME को होगा लाभ सरकार का अनुमान है कि इस सुधार का लाभ राज्य के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मिलेगा। भरोसे, स्व-घोषणा और समयबद्ध सेवाओं पर आधारित नई व्यवस्था से कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय और लागत कम होगी, जबकि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी के सभी आवश्यक प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। निवेश को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार का मानना है कि ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ राज्य में निवेश को आकर्षित करने, उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ में अधिक पारदर्शी, सरल और निवेश-अनुकूल कारोबारी वातावरण विकसित होने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़, उद्योग, निवेश और कारोबार से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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महादेव बेटिंग ऐप केस: स्पोर्ट्स प्रेजेंटर शेफाली बग्गा से ED की पूछताछ, हवाला कनेक्शन की जांच तेज

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पोर्ट्स प्रेजेंटर और टीवी हस्ती शेफाली बग्गा से रायपुर स्थित अपने जोनल कार्यालय में पूछताछ की। जांच एजेंसी उनके कथित वित्तीय और डिजिटल संबंधों की पड़ताल कर रही है। ईडी के अनुसार, जांच का केंद्र बिंदु शेफाली बग्गा और महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे कथित हवाला ऑपरेटर खंजन जगदीश कुमार ठक्कर के बीच संभावित संबंध हैं। हालांकि, एजेंसी ने अभी तक इस मामले में किसी भी आरोप को अदालत में सिद्ध नहीं बताया है। ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स के प्रचार की जांच जांच एजेंसी का दावा है कि शेफाली बग्गा कथित तौर पर विदेश, विशेषकर दुबई और लंदन से संचालित होने वाले कुछ ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म्स के प्रचार से जुड़ी रही हैं। ईडी को जांच के दौरान कुछ डिजिटल सामग्री और प्रमोशनल कंटेंट मिले हैं, जिनमें कथित रूप से बेटिंग ऐप्स का प्रचार दिखाई देता है। एजेंसी इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। बेटिंग टिप्स देने के आरोपों की भी जांच सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या शेफाली बग्गा केवल प्रचार तक सीमित थीं या कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े खिलाड़ियों को टिप्स भी उपलब्ध कराती थीं। ईडी इन दावों से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। टेलीग्राम चैनल भी जांच के दायरे में ईडी सूत्रों के अनुसार, शेफाली बग्गा से जुड़े एक टेलीग्राम चैनल की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग के प्रचार-प्रसार या अन्य गतिविधियों के लिए किया गया था। साथ ही चैनल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और संभावित वित्तीय लेन-देन की भी जांच जारी है। हवाला नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही ED ईडी का दावा है कि खंजन जगदीश कुमार ठक्कर महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़े कथित हवाला लेन-देन का प्रमुख संचालक रहा है। एजेंसी अब शेफाली बग्गा और ठक्कर के बीच कथित आर्थिक लेन-देन तथा अन्य संभावित संबंधों की जांच कर रही है। स्पोर्ट्स एंकरिंग और टीवी से जुड़ा है नाम शेफाली बग्गा स्पोर्ट्स एंकरिंग की दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह टीवी रियलिटी शो ‘बिग बॉस 13’ में भी बतौर प्रतिभागी नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रमुख क्रिकेट आयोजनों की एंकरिंग की है और सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी मौजूदगी है। नोट: फिलहाल इस मामले में जांच जारी है। एजेंसी द्वारा की जा रही पूछताछ और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। छत्तीसगढ़, अपराध और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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स्पंज आयरन से भरे ट्रक की हेराफेरी: 7 लाख की ठगी में दो आरोपी गिरफ्तार, फर्जी नंबर प्लेट लगाकर छिपाई पहचान

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला थाना क्षेत्र में स्पंज आयरन से भरे ट्रक की हेराफेरी कर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने महाराष्ट्र भेजे जा रहे माल को रास्ते में ही बेच दिया और ट्रक की पहचान छिपाने के लिए उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगा दी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 50 हजार रुपये नकद, फर्जी नंबर प्लेट लगा ट्रक और अन्य सामान सहित करीब 15 लाख रुपये का मशरूका बरामद किया है। महाराष्ट्र भेजने के बजाय उरला में बेच दिया माल पुलिस के अनुसार, एक निजी कंपनी ने ट्रक क्रमांक CG 08 AT 3321 में करीब 35 टन 870 किलोग्राम स्पंज आयरन, जिसकी कीमत लगभग 7.07 लाख रुपये थी, महाराष्ट्र भेजने के लिए लोड किया था। लेकिन ट्रक चालक ने रास्ते में बीमारी सहित अन्य बहाने बनाकर वाहन को निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंचाया। कुछ समय बाद चालक और वाहन मालिक दोनों से संपर्क भी टूट गया। शिकायत मिलने पर उरला थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच से मिले अहम सुराग पुलिस उपायुक्त (उत्तर) दीपमाला कश्यप के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर वाहन मालिक गुमान साहू और उसके साथी मोहम्मद मुख्तार को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने चालक रहीमान साहू के साथ मिलकर स्पंज आयरन को रास्ते में ही बेच दिया था। इसके बाद ट्रक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर उसकी असली पहचान छिपा दी गई। फाइनेंस की किश्त जमा करने से खुला मामला जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहन की फाइनेंस किश्त जमा कर रहे थे। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले और पूरे मामले का खुलासा हो गया। फरार चालक की तलाश जारी पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है। वहीं, इस मामले में शामिल चालक रहीमान साहू सहित अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों और अपराध से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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नकटी बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस की 14 किमी पदयात्रा, राज्यपाल से मुलाकात नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस ने बुधवार को राजभवन तक लगभग 14 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली। पदयात्रा वीआईपी चौक होते हुए लोकभवन तक पहुंची, लेकिन कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल से मुलाकात नहीं हो सकी। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर मुलाकात का समय नहीं मिलता, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। रास्ते में सड़क पर बैठकर किया भोजन पदयात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और नकटी गांव के प्रभावित परिवारों ने सड़क पर बैठकर सामूहिक भोजन किया। पार्टी ने इसे प्रभावित लोगों के समर्थन और एकजुटता का प्रतीक बताया। मेक इन इंडिया चौक पर पुलिस से धक्का-मुक्की पदयात्रा जब मेक इन इंडिया चौक के पास पहुंची, तब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पुलिस पर मारपीट का आरोप भी लगाया। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गांव में ही पुनर्वास की मांग प्रदर्शन के दौरान प्रभावित परिवारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “नकटी में ही घर बनाओ” के नारे लगाए। उनका कहना था कि जिन परिवारों के मकानों पर कार्रवाई हुई है, उनका पुनर्वास उसी गांव में किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ है और सरकार को पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए। नोट: कांग्रेस ने बुलडोजर कार्रवाई का विरोध करते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की कोशिश की। पार्टी ने कहा है कि यदि जल्द मुलाकात नहीं होती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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