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झीरम घाटी केस: 10 दोषियों की मौत की सजा अब हाईकोर्ट में, डेथ रेफरेंस के जरिए होगी फैसले की समीक्षा

13 साल पुराने बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में जगदलपुर की NIA स्पेशल कोर्ट से 10 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गई है। NIA स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट भेज दिया है। हाईकोर्ट में इसे क्रिमिनल रेफरेंस/डेथ रेफरेंस के तौर पर दर्ज किया गया है। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ट्रायल कोर्ट के फैसले, पेश किए गए सबूतों और दोषसिद्धि के आधार की समीक्षा करेगी। 2013 में हुआ था झीरम घाटी नक्सली हमला 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 साल चली सुनवाई के बाद 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर की NIA स्पेशल कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद 16 सितंबर को सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई। मौत की सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी कानून के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट भेजा जाता है। पुराने CrPC की धारा 366 के तहत सेशन कोर्ट की मौत की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे। वर्तमान BNSS में भी इसी तरह का प्रावधान धारा 407 में है। इसका मतलब है कि NIA स्पेशल कोर्ट के फैसले के बाद अब मामले का अगला महत्वपूर्ण न्यायिक चरण हाईकोर्ट में होगा। हाईकोर्ट रिकॉर्ड, सबूत और दोषसिद्धि की समीक्षा करेगा। हाईकोर्ट में किन बिंदुओं पर होगी समीक्षा? डेथ रेफरेंस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें अभियोजन के सबूत, गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य शामिल होंगे। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को दोषी ठहराने और मौत की सजा देने के लिए जो कारण बताए हैं, हाईकोर्ट उनकी भी समीक्षा करेगा। पुराने CrPC की धारा 368 के तहत हाईकोर्ट के पास मौत की सजा की पुष्टि करने के अलावा अन्य सजा देने, दोषसिद्धि में बदलाव करने या उसे खत्म करने, नए सिरे से ट्रायल का आदेश देने और आरोपी को बरी करने जैसी शक्तियां थीं। पहले दोषसिद्धि, फिर सजा पर हुई सुनवाई झीरम मामले में NIA स्पेशल कोर्ट ने पहले 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 16 सितंबर को सजा सुनाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इन 10 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा NIA स्पेशल कोर्ट ने जिन 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है, उनके नाम हैं: इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। अब आगे क्या होगा? हाईकोर्ट में डेथ रेफरेंस के दौरान ट्रायल कोर्ट के फैसले की कानूनी समीक्षा होगी। इसके अलावा दोषियों की ओर से अपील भी दायर की जा सकती है। फिलहाल NIA स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा अंतिम नहीं है। हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही इस सजा को लागू किया जा सकता है। हाईकोर्ट मामले के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद आगे का फैसला करेगा।
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छत्तीसगढ़ BJP में संगठनात्मक बदलाव पर कांग्रेस के सवाल, 1500 करोड़ की कथित वसूली वाले वायरल वीडियो की जांच की मांग

छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के बाद कांग्रेस ने कई सवाल उठाए हैं। प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय को झारखंड की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि झारखंड में संगठन महामंत्री रहे कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ भेजा गया है। 24 सितंबर को हुए इस बदलाव को लेकर कांग्रेस ने 1500 करोड़ रुपए की कथित वसूली से जुड़े वायरल वीडियो का मुद्दा भी उठाया है। वायरल वीडियो को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा विधायक की शिकायत के बाद सामने आए एक वायरल वीडियो में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का नाम लेते हुए 1500 करोड़ रुपए की कथित वसूली का दावा किया गया था। भाजपा ने इस वीडियो को फर्जी बताया था। कांग्रेस का कहना है कि अगर वीडियो फर्जी है तो इसकी सच्चाई जांच के जरिए सामने आनी चाहिए। केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग धनंजय सिंह ठाकुर ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि वीडियो फर्जी है तो उसे तैयार करने और प्रसारित करने वालों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि यदि वीडियो में आर्थिक लेन-देन को लेकर लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। पार्टी ने केंद्र सरकार से सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से जांच कराने की मांग की है। संगठनात्मक फेरबदल पर भी सवाल कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पवन साय को छत्तीसगढ़ से हटाकर झारखंड भेजे जाने के बाद संगठनात्मक बदलाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी बदलने से वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की जांच का मुद्दा खत्म नहीं होता। ठाकुर ने सरकार से पूरे मामले की जांच कर वास्तविकता जनता के सामने रखने की मांग की। साथ ही उन्होंने सरकारी निर्माण कार्यों के टेंडर और सामान-सर्विस की सप्लाई में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की भी मांग की।
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रायपुर में कारोबारी को ऑयल गिरने का झांसा देकर रोका, कार से बैग चोरी; CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

राजधानी रायपुर में कार सवार कारोबारी को कार से ऑयल गिरने का झांसा देकर रोकने और मौका पाकर कार से बैग चोरी करने का मामला सामने आया है। घटना 24 सितंबर की सुबह करीब 11:40 बजे फाफाडीह ओवरब्रिज के पास हुई। कारोबारी की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फाफाडीह ओवरब्रिज के पास रोका पुलिस के मुताबिक, नेचर सिटी अमलीडीह निवासी कारोबारी कौस्तुभ धर्माधिकारी रावाभाठा स्थित कैप्स आइसक्रीम फैक्ट्री के संचालक हैं। 24 सितंबर को वह कार नंबर CG04PS7590 से घर से ऑफिस जा रहे थे। फाफाडीह ओवरब्रिज के पास एक युवक ने उन्हें बताया कि कार के बोनट के सामने ऑयल गिर रहा है। कुछ दूर आगे जाने के बाद एक अन्य युवक ने भी कारोबारी को इसी बारे में बताया। बोनट की फोटो खींचने के दौरान बैग चोरी इसके बाद कारोबारी ने कार को यू-टर्न लेकर सड़क किनारे खड़ा किया और सर्विस सेंटर में फोन किया। सर्विस सेंटर की ओर से उन्हें बोनट की फोटो भेजने के लिए कहा गया। कारोबारी कार से नीचे उतरे और बोनट की फोटो खींचकर सर्विस सेंटर को भेजने लगे। इसी दौरान अज्ञात आरोपी कार से ब्राउन रंग का बैग चोरी कर फरार हो गए। बैग में 25 हजार रुपए और जरूरी दस्तावेज कार में वापस लौटने पर कारोबारी को बैग गायब मिला। बैग में 25 हजार रुपए नकद, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंक ऑफ बड़ौदा की चेकबुक, बैंक से जुड़े कागजात, ऑफिस के दस्तावेज और चाबियां रखी थीं। घटना के बाद कारोबारी ने अपने परिचित प्रशांत सुब्रमण्या और शारदाचरण पटेल को मामले की जानकारी दी। इसके बाद थाने पहुंचकर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। CCTV फुटेज से आरोपियों की तलाश पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फाफाडीह ओवरब्रिज और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके।
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राहुल गांधी का आरोप- छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में हुई ‘वोट चोरी’, CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में करीब 55 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।  राहुल गांधी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के चुनाव में भी वोट चोरी हुई है और उनके तकनीकी विशेषज्ञों ने चुनाव आयोग की कथित गलती पकड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार की CEC के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने उनकी आपत्ति नहीं मानी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को कानून से ऊपर रखा है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से स्वतंत्र रहना चाहिए। ये सभी आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों का जिक्र राहुल गांधी ने अपने आरोपों के दौरान छत्तीसगढ़ के अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का भी जिक्र किया। उन्होंने इन राज्यों में सत्ता विरोधी रुझान अचानक खत्म होने पर सवाल उठाया। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।  बोले- ‘वोट चोरी के बाद कानून चोरी’ राहुल गांधी ने कहा कि अगर वोट चोरी के जरिए किसी को चुनाव में जीत मिलती है और उन्हीं वोटों से चुने गए सांसद कानून बनाते हैं, तो मामला सिर्फ वोट चोरी तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ से जोड़ा। राहुल गांधी के मुताबिक, मतदाताओं के जनादेश से जुड़ी कथित गड़बड़ी का असर संसद और कानून बनाने की प्रक्रिया की वैधता पर भी पड़ता है।  छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े छत्तीसगढ़ के 2023 विधानसभा चुनाव में कुल 90 सीटों में BJP ने 54 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 35 सीटें मिली थीं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) को एक सीट मिली थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक BJP को 46.27% और कांग्रेस को 42.23% वोट मिले थे।  दोनों प्रमुख दलों के वोट शेयर में करीब 4 प्रतिशत का अंतर था, जबकि सीटों के परिणाम में अंतर अधिक रहा। चुनाव आयोग ने इन परिणामों का विस्तृत सांख्यिकीय रिकॉर्ड भी जारी किया है।  इन चुनाव परिणामों का उल्लेख राहुल गांधी के मौजूदा आरोपों के संदर्भ में किया गया है; उपलब्ध चुनाव आयोग के आंकड़े अपने आप में ‘वोट चोरी’ के आरोप को साबित नहीं करते। EVM को लेकर कांग्रेस ने उठाए थे सवाल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि जनता ने जो जनादेश दिया है, वह स्वीकार है और समीक्षा के बाद हार के कारणों का पता चलेगा। EVM को लेकर उठ रहे सवालों पर बघेल ने कहा था कि जब भी इस मुद्दे पर बात होती है तो BJP को आपत्ति होती है और उन्होंने सवाल उठाया था कि ऐसा क्यों है।
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बिलासपुर का पहला कन्वेंशन सेंटर अब तक अधूरा, कमिश्नर ने 30 सितंबर तक काम पूरा करने के दिए निर्देश

बिलासपुर। शहर का पहला सर्वसुविधायुक्त कन्वेंशन सेंटर अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। 28 जून को उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शहर के अधूरे विकास कार्यों का निरीक्षण कर उन्हें तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम कमिश्नर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के एमडी प्रकाश कुमार सर्वे ने कोनी स्थित कन्वेंशन सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने ठेकेदार को 30 सितंबर तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। फिलहाल सेंटर में अंतिम चरण का निर्माण और फिनिशिंग का काम जारी है। स्मार्ट सिटी के कई प्रोजेक्ट अब भी अधूरे स्मार्ट सिटी योजना के तहत बिलासपुर में शुरू की गई कई परियोजनाएं तय समय-सीमा बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं। इनमें प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं: 28 जून के निरीक्षण के दौरान भी कन्वेंशन सेंटर, मल्टीलेवल पार्किंग और एसटीपी सहित कई निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई थी। निगम प्रशासन ने समय पर काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की बात कही थी। डेडलाइन के बाद भी निर्माण कार्य में देरी अधूरे प्रोजेक्ट्स को लेकर ठेकेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कुछ ठेकेदार कम दर पर काम हासिल करने के बाद निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाते। डेडलाइन निकलने के बाद निगम की ओर से जारी नोटिसों का समय पर जवाब नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। पेनाल्टी का प्रावधान होने के बावजूद निर्माण कार्यों की रफ्तार में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात कही जा रही है। इससे आम लोगों को परियोजनाओं का लाभ मिलने में देरी हो रही है। कन्वेंशन सेंटर की कुर्सियों को लेकर भी हुआ था विवाद कन्वेंशन सेंटर में सिटिंग अरेंजमेंट में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर भी चर्चा हुई थी। स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक (तकनीकी) एसपी साहू के अनुसार, पूर्ववर्ती शासनकाल में ऑडिटोरियम में 650 की जगह 1,000 कुर्सियां लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, उनके मुताबिक यह बदलाव मूल डिजाइन में शामिल नहीं था, इसलिए स्मार्ट सिटी की ओर से इसे अस्वीकृत कर दिया गया। एक ही परिसर में कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक के अनुसार, कन्वेंशन सेंटर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक ही परिसर में शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा सकें। भवन के संचालन और रखरखाव के खर्च का दबाव कम करने के लिए दुकानों और हॉल का किराया तय किया जा रहा है। इससे सालाना करीब 1 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। कन्वेंशन सेंटर में क्या-क्या होगा? फ्लोर प्रस्तावित सुविधा ग्राउंड फ्लोर 16 दुकानें फर्स्ट फ्लोर 16 दुकानें और कार्यालय के लिए जगह सेकेंड फ्लोर 500 सीटों वाली लाइब्रेरी थर्ड फ्लोर 650 सीटों वाला ऑडिटोरियम कोनी क्षेत्र में करीब 29.51 करोड़ रुपए की लागत से कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इसका अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है और फिनिशिंग का काम चल रहा है। नालंदा परिसर का भी किया निरीक्षण नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने मधुबन में निर्माणाधीन नालंदा परिसर और एकेडमिक ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी और इंजीनियरों को कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखने को कहा, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
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रायपुर के सरकारी अस्पताल में अब मुफ्त मिलेगा 40 हजार रुपए तक का हार्ट अटैक इंजेक्शन, ACI में TNK-tPA उपलब्ध

रायपुर। हार्ट अटैक के इलाज में इस्तेमाल होने वाला 35 से 40 हजार रुपए तक की कीमत वाला महंगा इंजेक्शन अब रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए टेनेक्टेप्लेस (TNK-tPA) इंजेक्शन की व्यवस्था की गई है। मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरत पड़ने पर यह इंजेक्शन अस्पताल में ही लगाया जाएगा। इससे इमरजेंसी के दौरान मरीज के परिजनों को बाहर से महंगा इंजेक्शन खरीदने के लिए हजारों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। खून का थक्का घोलने में मदद करता है TNK-tPA हार्ट अटैक के दौरान कई बार हृदय की नसों में खून का थक्का जम जाता है, जिससे दिल तक रक्त पहुंचने में रुकावट आती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज की हालत के आधार पर TNK-tPA इंजेक्शन देने का निर्णय ले सकते हैं। यह दवा खून के थक्के को घोलने में मदद करती है। ACI में इस इंजेक्शन के 20 mg, 30 mg और 40 mg के विकल्प उपलब्ध हैं। इसके अलावा 15 लाख IU स्ट्रेप्टोकाइनेज इंजेक्शन भी अस्पताल में रखा गया है। समय पर इलाज मिलने से मरीजों को फायदा हार्ट अटैक के मामलों में इलाज शुरू करने में देरी गंभीर साबित हो सकती है। अस्पताल में जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध होने से डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार तुरंत उपचार शुरू कर सकते हैं। इस व्यवस्था से मरीजों के परिजनों को इमरजेंसी के दौरान बाहर जाकर महंगी दवाएं खरीदने की परेशानी से भी राहत मिलेगी। TNK के अलावा कई महंगी दवाएं भी मुफ्त ACI में हृदय रोगियों के लिए TNK इंजेक्शन के अलावा कई आधुनिक और महंगी दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें शामिल हैं: अस्पताल में मरीजों को ये दवाएं उनकी बीमारी और चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर दी जाती हैं। 21 से 22 हजार रुपए तक की दवा भी उपलब्ध कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, मावाकैम्टेन दवा की बाजार कीमत लगभग 21 से 22 हजार रुपए तक बताई गई है। वहीं TNK इंजेक्शन की कीमत करीब 35 से 40 हजार रुपए तक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक कीमत कंपनी, ब्रांड और डोज के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सरकारी अस्पताल में इन दवाओं के मुफ्त उपलब्ध होने से गंभीर हृदय रोगियों के परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है। एंजियोग्राफी में इस्तेमाल होने वाला कॉन्ट्रास्ट मीडिया भी उपलब्ध ACI में एंजियोग्राफी के दौरान इस्तेमाल होने वाला कॉन्ट्रास्ट मीडिया भी उपलब्ध है। इसमें ऑम्निपेक और विजिपेक शामिल हैं। इसके अलावा एनोक्सापारिन, हेपरिन, नाइट्रोग्लिसरीन, निकोरैंडिल और लिडोकेन जैसी जरूरी दवाएं भी अस्पताल की सप्लाई में मौजूद हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, गंभीर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए बाहर से दवाएं खरीदने की जरूरत कम से कम पड़े।
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मोदी के जन्मदिन पर कांग्रेस का हमला, 43 सवालों के साथ केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार को घेरा

रायपुर/बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। रायपुर और बिलासपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल को लेकर रोजगार, महंगाई और आर्थिक नीतियों से जुड़े सवाल उठाए। कांग्रेस ने ‘सेवा संकल्प’ अभियान के बजाय बेरोजगारी, महंगाई और अधूरे वादों पर सरकार से जवाब मांगा। पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने कुल 43 सवालों का आरोप पत्र भी रखा। रोजगार और महंगाई को लेकर सवाल प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद केंद्र सरकार रोजगार, महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई वादों को पूरा नहीं कर सकी है। कांग्रेस ने हर साल 2 करोड़ रोजगार देने और महंगाई कम करने के वादे पर सरकार से जवाब मांगा। इसके अलावा नोटबंदी, जीएसटी और बड़े कारोबारियों के कर्ज माफ किए जाने जैसे मुद्दों को भी उठाया गया। पार्टी नेताओं ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और रुपये की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आम जनता को महंगाई से राहत देने के बजाय उस पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। 43 सवालों के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना कांग्रेस के आरोप पत्र में 15 लाख रुपये के कथित वादे, नोटबंदी के परिणाम और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े सवाल शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और चुनावी वादों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। ‘मोदी की गारंटी’ पर भी कांग्रेस के सवाल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। पार्टी नेताओं ने एक लाख सरकारी नौकरियों, 500 रुपये में गैस सिलेंडर और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे वादों पर सवाल उठाए। इसके अलावा महतारी वंदन योजना के लाभ और गोठान योजना बंद किए जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा। जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ उपलब्धियों का हिसाब मांगने की बात कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने में कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उनके 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों और वादों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रमों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दीप प्रज्ज्वलन से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए जाएंगे।
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छत्तीसगढ़ में ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम पर सियासत, कांग्रेस ने खर्च और टेंडर को लेकर उठाए सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ में ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीये जलाने का दावा किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को जनता की स्वस्फूर्त भागीदारी बताया। वहीं, कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने आयोजन में इस्तेमाल किए गए दीयों और तेल की खरीद को लेकर सवाल उठाए हैं। CM साय बोले- लोगों ने स्वस्फूर्त होकर जलाए दीये मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम में लोगों ने स्वस्फूर्त होकर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देशवासियों की सेवा कर रहे हैं और लोग सड़कों पर उतरकर दीये जलाते हुए उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को जनभागीदारी का कार्यक्रम बताया। कांग्रेस ने खर्च को लेकर पूछे सवाल कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम में हुए खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि प्रदेशभर में इतने दीयों और तेल की खरीद के लिए पैसा कहां से आया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या दीयों और तेल की खरीद के लिए कोई टेंडर जारी किया गया था। कांग्रेस की ओर से आयोजन में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं और खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है। खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग कांग्रेस नेता ने कार्यक्रम में इस्तेमाल हुए संसाधनों और उनकी खरीद प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि, आयोजन पर हुए कुल खर्च, खरीद प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेताओं के बयानों के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रदेश की प्रमुख खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।
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रायपुर में मोबाइल चोरी-लूट के अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा, 5 गिरफ्तार; 100 वारदातों का पता चला

रायपुर की कबीर नगर पुलिस ने मोबाइल चोरी और लूट करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह रायपुर से चोरी और लूटे गए मोबाइल फोन ओडिशा भेजता था। वहां मोबाइल का लॉक खोलने के बाद उन्हें राजस्थान में बेच दिया जाता था। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान करीब 100 मोबाइल चोरी और लूट की घटनाओं का खुलासा होने की बात सामने आई है। आरोपियों के कब्जे से 14 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप जब्त किए गए हैं। सीसीटीवी फुटेज से मिला पहला सुराग पुलिस के अनुसार, मोबाइल चोरी और लूट की घटनाओं की जांच के दौरान टीम ने अलग-अलग स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी दौरान एक फुटेज में शहजाद अली उर्फ भिंडी दिखाई दिया। पुलिस ने उसे रावाभाटा क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि वह पहले भी मोबाइल लूट के मामले में जेल जा चुका है। इसके बाद पुलिस ने उसके संपर्कों और नेटवर्क की जानकारी जुटानी शुरू की। जेल में बनी पहचान से तैयार हुआ नेटवर्क शहजाद की निशानदेही पर पुलिस ने गौरव मझखंड और कृष दीप को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि रायपुर में चोरी और लूटे गए मोबाइल फोन स्थानीय स्तर पर नहीं बेचे जाते थे। इन मोबाइल फोन को ओडिशा के राजखरीयार क्षेत्र में रहने वाले भोदेव मेहर तक पहुंचाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, भोदेव मोबाइल दुकान की आड़ में चोरी के फोन का लॉक खोलता था। इसके बाद मोबाइल को सेकंड हैंड फोन बताकर बेचने की तैयारी की जाती थी। लॉक नहीं खुलने पर बदला जाता था मदरबोर्ड पुलिस का दावा है कि जिन मोबाइल फोन का लॉक नहीं खुल पाता था, उनमें मदरबोर्ड बदलकर उनकी पहचान बदलने की कोशिश की जाती थी। कुछ मोबाइल फोन को अनलॉक करने के लिए राजस्थान के कोटा निवासी आकाश परेटा के पास भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार, आकाश तकनीकी माध्यमों से मोबाइल का लॉक खोलने और उन्हें बाजार में बेचने में मदद करता था। रायपुर, ओडिशा और राजस्थान से गिरफ्तारी कबीर नगर पुलिस और साइबर टीम ने मोबाइल की कथित सप्लाई चेन को ट्रेस करते हुए रायपुर, ओडिशा और राजस्थान से आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और मोबाइल चोरी व लूट की बाकी घटनाओं के संबंध में जानकारी जुटा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है। अपराध और छत्तीसगढ़ की स्थानीय खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।
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छत्तीसगढ़ में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी, 25 से अधिक खेल संघों के साथ बैठक

छत्तीसगढ़ में खेल गतिविधियों को गति देने और अधिक खिलाड़ियों तक खेल सुविधाएं पहुंचाने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को खेल संचालक आकांक्षा शिक्षा खलखो ने राज्य के 25 से अधिक खेल संघों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में बस्तर, सरगुजा और दूरस्थ अनुसूचित क्षेत्रों सहित सभी जिलों में खेल गतिविधियों को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा की गई। सभी खेल संघों को भेजना होगा वार्षिक कैलेंडर बैठक में खेल संचालक ने सभी राज्य खेल संघों को अपना वार्षिक खेल कैलेंडर खेल संचालनालय को अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए। इससे पूरे वर्ष आयोजित होने वाली खेल गतिविधियों की जानकारी विभाग के पास उपलब्ध रहेगी। साथ ही, खेल आयोजनों के क्रियान्वयन और प्रगति की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। 33 जिलों में खेल संघों के पंजीयन पर जोर विभाग ने प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला स्तरीय खेल संघों के चरणबद्ध पंजीयन और विभागीय मान्यता की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर खेल गतिविधियों को मजबूत करना और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। टॉप-100 एथलीट्स की जानकारी जल्द देने के निर्देश बैठक में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों से संबंधित जारी टॉप-100 एथलीट्स सूची की लंबित जानकारी जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया। खेल संघों को खिलाड़ियों से जुड़ा डेटा समय पर विभाग को उपलब्ध कराने और विभाग के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए। खेल संघों के साथ समन्वय के लिए बनेगी रिव्यू समिति खेल संघों और विभाग के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने के लिए संयुक्त रिव्यू समिति गठित करने की घोषणा की गई। यह समिति खेल गतिविधियों की प्रगति, संघों की समस्याओं और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी। डोपिंग जागरूकता सेमिनार का होगा आयोजन खिलाड़ियों को डोपिंग के दुष्प्रभावों और नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा खेल संस्थाओं के पंजीयन से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसाइटी कार्यालय के साथ समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में संयुक्त संचालक प्रभाकर पाण्डेय, उप संचालक (वित्त) रवि अग्रवाल, सहायक संचालक रुस्तम सारंग, खेल अधिकारी गिरीश शुक्ला और विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी मौजूद रहे। अधिक खेल और छत्तीसगढ़ की स्थानीय खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।
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न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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