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BJP की सागर नगर मंडल की कार्यकारिणी घोषित:6 मंडल उपाध्यक्ष-2 महामंत्री बनाए; आईटी सेल की जिम्मेदारी जयश्री को सौंपी

भारतीय जनता पार्टी ने सागर विधानसभा के अंतर्गत सागर नगर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। यह सूची मंडल अध्यक्ष अमित बैसाखिया ने भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी की सहमति से जारी की। नई टीम में प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं: इसके अलावा मंडल की कार्यकारिणी में 43 अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। पार्टी संगठन ने इन नियुक्तियों के जरिए मंडल को और अधिक सक्रिय और सशक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। — देश हरपल https://deshharpal.com/ पल-पल की खबर हरपल
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ब्लैकमेलिंग से तंग आकर हेड f ने किया सुसाइड:इंदौर में युवती रुपए मांग रही थी,झूठे केस में फंसाने की दे रही थी धमकी

इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब वहां स्थित सरकारी क्वार्टर में तैनात हेड कांस्टेबल विनोद यादव ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में सामने आया है कि कनाड़िया क्षेत्र की एक युवती उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी। वह रुपये नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी। बुधवार देर रात पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह, एएसपी सोनू डाबर, टीआई आर.डी. कानवा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डिप्रेशन में थे कांस्टेबल पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विनोद यादव काफी समय से मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन में थे। टीआई सीबी सिंह ने दी जानकारी: “घटना एमआईजी थाने के पीछे बने सरकारी क्वार्टर की है। विनोद यादव परदेशीपुरा थाने में पदस्थ थे और बुधवार को ड्यूटी खत्म करने के बाद उन्होंने फांसी लगा ली।” मौके पर एफएसएल टीम भी पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह साफ हो गया है कि आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव और ब्लैकमेलिंग एक बड़ी वजह रही है। पुलिस अब युवती से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। deshharpal.com — पल-पल की खबर हरपल
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NEET UG रिजल्ट मामले में आज सुनवाई:अब उज्जैन सहित 50 से ज्यादा याचिककर्ता; रिज्वाइंडर के लिए मांगा जाएगा समय, रिएक्जाम कराने की मांग भी

NEET-UG परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और बिजली कटौती के चलते प्रभावित हुए छात्रों की याचिका पर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आज रिवाइंडर दाखिल किया जाएगा। इस मामले में 25 से अधिक परीक्षा केंद्रों से जुड़े 50 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। इन छात्रों की प्रमुख मांग है कि दोबारा परीक्षा (Re-exam) कराई जाए ताकि उनका भविष्य खराब न हो। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मृदुल भटनागर ने बताया कि इन छात्रों में कई ऐसे हैं जिन्होंने तीन-चार बार परीक्षा दी है और उन्होंने कड़ी मेहनत की थी। क्या है मामला? 4 मई को हुई NEET-UG परीक्षा के दौरान इंदौर और उज्जैन सहित कई शहरों में तेज आंधी और बारिश के कारण बिजली गुल हो गई थी। इंदौर के 49 सेंटरों में से लगभग 25 केंद्रों पर छात्रों को अंधेरे में परीक्षा देनी पड़ी। कई जगहों पर छात्रों ने मोमबत्तियों और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पेपर हल किया। घुप्प अंधेरे में कई छात्र प्रश्नपत्र तक ठीक से नहीं पढ़ पाए। उज्जैन के शासकीय माधव महाविद्यालय में भी बिजली जाने से परीक्षा बाधित हुई। यहां छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ कक्षों में लाइट जाने के बाद अतिरिक्त समय मिला, लेकिन रूम नंबर 212 के छात्रों को न तो अतिरिक्त समय मिला और न ही समय पर परीक्षा शुरू हो सकी। अब उज्जैन के भी 5 से ज्यादा छात्र याचिकाकर्ताओं में शामिल हो चुके हैं। NTA की दलील क्या रही? 16 मई को हुई पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NTA की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट में पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि पूरे परिणाम पर रोक लगाने से सैकड़ों छात्रों पर असर पड़ेगा। हालांकि NTA ने यह स्वीकार किया कि कुछ केंद्रों पर बिजली की समस्या हुई थी, लेकिन वहां मोमबत्ती और जनरेटर के जरिए व्यवस्था की गई थी। NTA का यह भी कहना है कि परीक्षा समर सीज़न में थी और सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे। लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक हालात NTA के दावों से काफी अलग थे। क्या है छात्रों की मांग? प्रभावित छात्रों की स्पष्ट मांग है कि जिन 25 परीक्षा केंद्रों में परीक्षा प्रभावित हुई, वहां फिर से परीक्षा कराई जाए। छात्रों का कहना है कि खराब व्यवस्था के कारण उनका एक साल बर्बाद होने की कगार पर है, क्योंकि NEET के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है—न मेडिकल, न नर्सिंग, न आयुर्वेद या होम्योपैथी। क्या हो सकता है अगला कदम? आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष कोर्ट से दोबारा परीक्षा की मांग को लेकर मजबूत तर्क पेश करेगा। साथ ही कोर्ट से अनुरोध किया जाएगा कि रिवाइंडर दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट NTA और बिजली कंपनी के जवाबों के आधार पर क्या फैसला सुनाता है। “देश हरपल”https://deshharpal.com/ इस अहम मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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मारुति वैन में आग लगी, जिंदा जला ड्राइवर:खेत की फेंसिंग में फंसा था ड्राइविंग सीट का गेट; शव की पहचान भी मुश्किल

बीना में बुधवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां चलते-चलते एक मारुति वैन में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि ड्राइवर जिंदा जल गया और शव की हालत इतनी खराब है कि उसकी पहचान तक नहीं हो सकी है। खेत की फेंसिंग में फंसी वैन, बाहर नहीं निकल सका ड्राइवर यह हादसा आगासौद थाना क्षेत्र में देहरी और सेमरखेड़ी गांव के बीच दोपहर करीब 12 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वैन सड़क किनारे एक खेत की फेंसिंग में फंस गई थी। ड्राइवर की ओर का दरवाजा फेंसिंग में अटक गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और वैन में ही फंस गया। गैस किट की वजह से तेजी से भड़की आग! स्थानीय लोगों ने बताया कि वैन में शायद गैस किट लगी थी। आग लगते ही महज 10-15 मिनट में पूरी वैन जलकर खाक हो गई। लोगों ने बताया कि उन्होंने ड्राइवर की चीखें सुनीं, लेकिन आग की तेज़ी और हालात की वजह से कोई भी उसकी मदद नहीं कर सका। कौन था ड्राइवर, अब तक रहस्य पुलिस ने बताया कि जल चुकी वैन का रजिस्ट्रेशन नंबर MP04 CB 2153 है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह वैन अक्सर इलाके में किराना का सामान बेचने आती थी, लेकिन वैन चलाने वाले शख्स का नाम या पता उन्हें नहीं मालूम। जिस खेत की फेंसिंग में वैन फंसी, वह देहरी गांव के किसान कैलाश पटेल का बताया जा रहा है। जांच जारी, आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। आगासौद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैन के रजिस्ट्रेशन से अब मृतक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। देशहरपाल(deshharpal.com)की संवेदना: ये हादसा एक दर्दनाक चेतावनी है कि वाहनों में गैस किट का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाए और सुरक्षा उपायों की अनदेखी न की जाए। देशहरपाल मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।
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जबलपुर के पूर्व शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष पर इनाम घोषित:कांग्रेसी नेता के साथ मिलकर किया था JDA की जमीन का फर्जीवाड़ा, एक माह से फरार

जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने वाले गिरोह के दो मुख्य आरोपियों—यूथ कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जतिन राज और उनके सहयोगी मनोज नामदेव—की गिरफ्तारी के लिए अब पुलिस ने कमर कस ली है। एसपी संपत उपाध्याय ने दोनों फरार आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। कांग्रेस से जुड़ा चेहरा, अब भगोड़ा जतिन राज पहले एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस में पदाधिकारी रह चुके हैं। वे पार्षद भी रह चुके हैं और कांग्रेस के कई चुनाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। लेकिन अब वही चेहरा जमीन के गोरखधंधे में मुख्य साजिशकर्ता बन चुका है। मनोज नामदेव के साथ मिलकर जतिन राज ने JDA की एक योजना में शामिल जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे लाखों में बेच डाला। पुलिस ने इस मामले में सैफ नगर निवासी कयाज उर्फ शुभम उर्फ शिवम को गिरफ्तार किया है, जिसने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं। ऐसे हुआ खुलासा दरअसल, एक माह पहले कयाज उर्फ शुभम JDA दफ्तर पहुंचा और खुद को विजय नगर निवासी केपी लटोरिया का बेटा बताकर एक जमीन को अपने नाम करने की कोशिश की। उसने नकली आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगाए। लेकिन JDA के CEO दीपक वैद्य को शक हुआ। जब दस्तावेजों की जांच करवाई गई तो मालूम पड़ा कि जिनके नाम पर शुभम जमीन लेना चाहता था, वे दोनों पति-पत्नी पहले ही गुजर चुके हैं और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। इसके बाद JDA ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और शुभम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में शुभम ने कबूल किया कि वह जतिन राज और मनोज नामदेव के साथ मिलकर JDA की खाली पड़ी जमीनों की जानकारी निकालता था। फिर नकली वारिस तैयार कर जमीनों पर कब्जा किया जाता था और उन्हें लाखों में बेच दिया जाता था। पुलिस की दबिश, लेकिन अभी तक आरोपी लापता ओमती थाना पुलिस जतिन और मनोज को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक दोनों फरार हैं। पुलिस ने उनके घरों पर भी छापे मारे, लेकिन वहां से कोई सुराग नहीं मिला। एसपी ने ओमती थाना प्रभारी को दोनों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही इनाम घोषित कर आम जनता से भी सूचना देने की अपील की है। देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: अगर आपके पास जतिन राज या मनोज नामदेव के संबंध में कोई भी जानकारी है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और घोटाले रोकने के लिए नागरिकों की सतर्कता बेहद जरूरी है।
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ग्वालियर HC में अंबेडकर प्रतिमा विवाद राजस्थान-दिल्ली-हरियाणा पहुंचा:भीम सेना की जयपुर हाईकोर्ट से ऋषि मनु की मूर्ति हटाने की चेतावनी, दोनों पक्ष बना रहे रणनीति

ग्वालियर हाईकोर्ट में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक पहुंच चुका है। खासकर जब से भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर इस मुद्दे में कूदे हैं, तब से हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। भीम सेना ने सरकारों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ग्वालियर हाईकोर्ट में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगाई गई, तो जयपुर हाईकोर्ट में लगी मनु ऋषि की प्रतिमा को हटाने के लिए आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस बयान के बाद दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और एमपी की इंटेलिजेंस एजेंसियां अलर्ट पर आ गई हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद? पूरा मामला 19 फरवरी 2025 को शुरू हुआ था, जब ग्वालियर हाईकोर्ट में कुछ अधिवक्ताओं ने चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा लगाने की मांग की थी। मौखिक सहमति के बाद पीडब्ल्यूडी ने प्लेटफार्म भी तैयार करा दिया और वकीलों ने आपसी सहयोग से मूर्ति बनवाने का ऑर्डर दे दिया। लेकिन बाद में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि उन्हें न तो सूचना दी गई, न ही बिल्डिंग कमेटी से इजाजत ली गई। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और मामला जातिगत खेमों में बंट गया—एक ओर एससी-एसटी वर्ग के वकील, दूसरी ओर सनातन परंपरा से जुड़े अधिवक्ता। सोशल मीडिया पर पोस्टर वार, चेतावनी से खौफ भीम सेना ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्टर और वीडियो जारी कर सरकार को खुली चेतावनी दी है। अध्यक्ष सतपाल तंवर ने कहा कि “डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को रोकना संविधान और दलित समाज का अपमान है। अगर मूर्ति नहीं लगी, तो हम जयपुर में मनु की प्रतिमा को नहीं रहने देंगे।” भीम सेना की इस खुली धमकी के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने अलर्ट मोड पर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एमपी सरकार ने इस मामले पर बयानबाजी से बचने की हिदायत दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। 14 मई को भड़का विवाद, अब सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी 14 मई को मूर्ति स्थापना के दिन जब वकीलों का एक पक्ष कोर्ट परिसर में मूर्ति स्थापित करने पहुंचा, तो बार एसोसिएशन ने विरोध करते हुए विवाद को नया मोड़ दे दिया। देखते ही देखते यह मामला जातिगत टकराव में बदल गया। अब दोनों पक्ष लगातार बैठकें कर रहे हैं। 19 मई को दोनों पक्षों ने जबलपुर में चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी, जिसमें उन्हें फिलहाल माहौल शांत रखने और समाज में सौहार्द बनाए रखने की सलाह दी गई है। हालांकि, वकीलों के बीच इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। क्या बोले सतपाल तंवर? गुरुग्राम में मीडिया से बातचीत करते हुए सतपाल तंवर ने कहा, “डॉ. अंबेडकर ने इस देश के संविधान को बनाया और करोड़ों शोषितों को सम्मान दिया। ऐसे में उनकी प्रतिमा को रोकना सरासर गलत है। अगर जरूरत पड़ी, तो हम सड़कों पर उतरेंगे। ये सिर्फ मूर्ति की बात नहीं, हमारे सम्मान और अधिकार की बात है।” 👉 देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: यह मामला संविधान, न्याय और सामाजिक समरसता से जुड़ा है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें और विवाद को बातचीत से सुलझाएं।
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पूर्व विधायक के एटीएम का क्लोन बनाया, 6.83 लाख उड़ाए:भोपाल में 54 ट्रांजेक्शन कर जालसाजों ने निकाली रकम, जांच शुरू

भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी में रहने वाले पूर्व विधायक रामकिशन चौहान साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। उनके पंजाब नेशनल बैंक खाते से एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर 6 लाख 83 हजार रुपए उड़ा लिए गए। यह मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रामकिशन चौहान, जो कभी भोजपुर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं, को 5 मई को 92 रुपए की ट्रांजेक्शन का एसएमएस मिला। शक होने पर उन्होंने बैंक जाकर स्टेटमेंट निकाली, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। 2 फरवरी से 1 मई के बीच उनके खाते से 54 बार ट्रांजेक्शन कर कुल 6.83 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। इस फर्जीवाड़े को लेकर उन्होंने तत्काल पुलिस को शिकायत दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए बुधवार को केस दर्ज कर लिया गया। बूथ से क्लोनिंग कर रची गई साजिश(deshharpal.com) पुलिस जांच में पता चला है कि फरवरी में रामकिशन चौहान ने अरेरा कॉलोनी के एक एटीएम से पैसे निकाले थे। संभावना जताई जा रही है कि उसी दौरान उनका एटीएम कार्ड स्किमिंग डिवाइस के ज़रिए क्लोन कर लिया गया। इसके बाद फर्जी कार्ड से बार-बार ट्रांजेक्शन कर यह साइबर ठगी की गई। अब पुलिस एटीएम बूथ के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। फिलहाल मामले की तफ्तीश जारी है और साइबर टीम इस हाई-प्रोफाइल ठगी के पीछे छिपे गिरोह का पता लगाने में जुटी है। 👉 आम जनता से अपील है कि एटीएम का इस्तेमाल करते वक्त सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।
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एक्सीडेंट में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को मिलेंगे 25000:डॉ. मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला; मोदी करेंगे इंदौर मेट्रो, दतिया-सतना एयरपोर्ट का लोकार्पण

मध्यप्रदेश में सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वालों को अब सरकार इनाम देगी। यदि कोई व्यक्ति एक्सीडेंट के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है, तो उसे 25,000 रुपए का इनाम दिया जाएगा। इस योजना का नाम “राहवीर योजना” रखा गया है। इस फैसले की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा में हुई कैबिनेट बैठक में की गई। कैसे मिलेगा इनाम? बैठक से जुड़े अन्य बड़े फैसले कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को भोपाल आएंगे। ऐतिहासिक माहौल में हुई बैठक(deshharpal.com) बैठक इंदौर के राजवाड़ा के गणेश हॉल में आयोजित हुई। खास बात ये रही कि हॉल में देवी अहिल्या की मूर्ति को मुख्यमंत्री से आगे रखा गया। सीएम ने मूर्ति के सामने पुष्प अर्पित कर नमन किया।मुख्यमंत्री और कुछ मंत्री धोती-कुर्ता और भगवा दुपट्टा पहनकर पहुंचे। सुरक्षा के चलते मंत्रियों के साथ आए OSD और अधिकारियों को कड़ी चेकिंग के बाद ही प्रवेश मिला। हालांकि, अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में आए मंत्री विजय शाह इस बैठक से अनुपस्थित रहे।
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निगम के रिटायर्ड इंजीनियर अंतरसिंह की मुश्किलें बढ़ी:EOW ने शुरू की जांच; बेटे को परमिशन फाइलों से फायदा देने का आरोप

खंडवा नगर निगम के रिटायर्ड कार्यपालन यंत्री (इंजीनियर) अंतरसिंह तंवर की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। एक पुराने मामले में विभागीय जांच के बाद अब EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने भी केस दर्ज कर लिया है। यह शिकायत पहले नगर निगम स्तर पर की गई थी, जिसकी जांच पूरी हो चुकी है। अब इसी आधार पर भोपाल EOW में केस दर्ज होने के बाद इंदौर ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला? आरोप है कि नगर निगम में कार्यरत रहने के दौरान अंतरसिंह तंवर ने अपने बेटे साई चंद्र सिंह जो कि एक आर्किटेक्ट हैं, को भवन निर्माण की परमिशन दिलाने में पद का दुरुपयोग किया। इस मामले में EOW इंदौर के इंस्पेक्टर संजय शुक्ला ने खंडवा नगर निगम कमिश्नर को नोटिस भेजकर एक सप्ताह (यानी 26 मई तक) में पूरी जानकारी भेजने को कहा है। ईओडब्ल्यू ने इन पांच बिंदुओं पर मांगी जानकारी: पहले भी हुई थी शिकायत(deshharpal.com) चार महीने पहले इसी मामले की शिकायत इंदौर स्थित नगरीय प्रशासन विभाग के संभागीय कार्यालय में हुई थी। इसके बाद खंडवा नगर निगम कमिश्नर प्रियंका राजावत को जांच के निर्देश दिए गए थे। कमिश्नर के अनुसार, जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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Indore Sarafa Bazaar, CM Mohan Yadav Indore Visit,

CM Mohan Yadav Indore Visit: CM Mohan Yadav ने कैबिनेट के साथ उठाया इंदौर के स्वाद का लुत्फ

इंदौर (देश हरपल):CM Mohan Yadav Indore Visit- मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध इंदौर का सर्राफा बाजार केवल गहनों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की रातों में जगमगाने वाली स्ट्रीट फूड गलियों के लिए भी देशभर में जाना जाता है। इसी स्वाद और संस्कार को करीब से महसूस करने पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी कैबिनेट टीम के साथ। मुख्यमंत्री का इंदौर दौरा प्रशासनिक था, लेकिन सर्राफा बाजार की ओर उनका रुख इस दौरे को खास बना गया। जैसे ही उन्होंने बाजार में प्रवेश किया, वहां की रात्रिकालीन चहल-पहल, तेज मसालों की खुशबू, और लोकप्रिय व्यंजन जैसे गराडू, जोशी डही बड़े, भुट्टे का किस, मालपुए, और रबड़ी का स्वाद सभी मंत्रियों ने बड़े चाव से लिया। सीएम मोहन यादव ने कहा, “इंदौर केवल सफाई के लिए ही नहीं, अपने विशिष्ट स्वाद और अतिथ्य परंपरा के लिए भी राष्ट्रीय पहचान रखता है। यहां आकर हर बार कुछ नया अनुभव होता है।” इस अवसर पर शहरवासियों और व्यापारियों ने भी मुख्यमंत्री और मंत्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने सेल्फी और बातचीत का अवसर भी पाया। सर्राफा के दुकानदारों ने बताया कि इससे न सिर्फ बाजार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में स्थानीय खानपान संस्कृति को नई पहचान भी मिलती है। इंदौर की यह यात्रा न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है , बल्कि Madhya Pradesh Cabinet के लिए इंदौर टूरिज्म, स्ट्रीट फूड कल्चर, और जनता से जुड़ाव की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी बनकर उभरी।
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जबलपुर में NSUI और कांग्रेस का प्रदर्शन, वाटर कैनन से खदेड़े गए कार्यकर्ता

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में जबलपुर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर NSUI ने सांकेतिक अर्थी यात्रा निकाली, जबकि शाम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मालवीय चौक पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अर्थी यात्रा को पुलिस ने रोका NSUI कार्यकर्ताओं की अर्थी यात्रा सिविल लाइन स्थित साईं मंदिर से शुरू होकर महाकौशल महाविद्यालय की ओर बढ़ रही थी। पुलिस ने सिविल लाइन क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 21 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। 48 घंटे में इस्तीफे की मांग NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो NSUI, यूथ कांग्रेस और अन्य सहयोगी संगठन और बड़ा आंदोलन करेंगे। मालवीय चौक पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन शाम को मालवीय चौक पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री के विरोध में पोस्टर जलाने की कोशिश की गई, जिसे रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने दो बार वाटर कैनन चलाकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता मशाल लेकर अंजुमन स्कूल की ओर बढ़े, जबकि अन्य मालवीय चौक पर दोबारा एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप कांग्रेस नेता सौरभ नाटी शर्मा ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है तथा शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाया, हालांकि देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर के राजेश सोंथालिया बने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के सहायक राज्य आयुक्त

बिलासपुर के वरिष्ठ स्काउटर राजेश सोंथालिया को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य संघ का सहायक राज्य आयुक्त (Assistant State Commissioner) नियुक्त किया गया है। इस संबंध में राज्य मुख्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने सोमवार को नियुक्ति आदेश जारी किया। राजेश सोंथालिया की नियुक्ति राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसा पर की गई है। स्काउट आंदोलन में उनकी वर्षों की सक्रिय भागीदारी, संगठनात्मक क्षमता और सेवा भावना को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। निभाएंगे अहम जिम्मेदारी सहायक राज्य आयुक्त के रूप में राजेश सोंथालिया अब प्रदेशभर में स्काउट गतिविधियों के संचालन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगठन के विस्तार और युवा नेतृत्व को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सामाजिक कार्यों में रहा उल्लेखनीय योगदान राजेश सोंथालिया शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में स्काउट आंदोलन को नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, अभिजीत दीपके बोले- अब सरकार खुद बातचीत के लिए आए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने साफ कहा कि अब उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि सरकार से बातचीत के लिए नहीं जाएगा। यदि सरकार बातचीत चाहती है तो उसे खुद जंतर-मंतर आना होगा। अभिजीत दीपके ने संसद मार्च के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से माफी भी मांगी और कहा कि जिन लोगों को कानूनी सहायता की जरूरत है, वे CJP की लीगल टीम से संपर्क करें। सभी प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनमें खून की कमी के लक्षण हैं, लेकिन उनका अनशन 24वें दिन भी जारी है। विपक्षी नेताओं ने जताया समर्थन मंगलवार को जंतर-मंतर पर कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता आंदोलन के समर्थन में पहुंचे। इनमें उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, शरद पवार, सुप्रिया सुले, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह सहित कई प्रमुख नेता शामिल रहे। शाम होते-होते प्रदर्शन स्थल पर भीड़ फिर बढ़ गई। धरने में वे प्रदर्शनकारी भी शामिल हुए, जो एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई में घायल हुए थे। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी रिहा दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया है। इसके बाद CJP ने पुलिस मुख्यालय के सामने प्रस्तावित धरना रद्द कर दिया। वहीं, संसद मार्च के दौरान बर्गर खाते नजर आए CJP प्रवक्ता विजेता दाहिया को संगठन ने पद से हटा दिया। इस पर दाहिया ने वीडियो जारी कर कहा कि यदि किसी को भूख लगेगी तो वह खाना जरूर खाएगा। दिनभर के प्रमुख अपडेट्स अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, लोकभवन के बाहर पुलिस से धक्का-मुक्की

राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में हिरासत के विरोध में मंगलवार रात छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रायपुर के लोकभवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक विकास उपाध्याय समेत कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गेट की ओर बढ़ने से रोक दिया, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। दरअसल, दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में देशभर में कांग्रेस प्रदर्शन कर रही है। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध दिल्ली में हुए प्रदर्शन में शामिल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस उन्हें और अन्य वरिष्ठ नेताओं को बस में बैठाकर एयरपोर्ट की ओर ले गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका एक जूता भी ले लिया। कांग्रेस की प्रमुख मांगें प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और भजन-कीर्तन रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकभवन के बाहर भजन-कीर्तन किया, सरकार के खिलाफ नारे लगाए और गेट तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालात को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना पूर्व महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि कई छात्रों ने आत्महत्या की है और छात्रों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं। कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता ने शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की। वहीं, सुबोध हरितवाल ने कहा कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

भोपाल महिला आयोग में रिश्तों के दो चौंकाने वाले मामले, पत्नी ने मांगा तलाक तो दूसरे केस में दोनों ने लगाए गंभीर आरोप

भोपाल में राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान वैवाहिक विवादों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने सबका ध्यान खींचा। एक मामले में सरकारी विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर बनने के बाद पत्नी ने पति पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की, जबकि दूसरे मामले में पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। 20 साल बाद पत्नी ने मांगा तलाक पहले मामले में सरकारी विभाग में कार्यरत असिस्टेंट डायरेक्टर महिला ने शादी के करीब 20 साल बाद महिला आयोग में पति के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक लेनदेन से जुड़े आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, सुनवाई के दौरान वह स्वयं उपस्थित नहीं हुईं। सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर पति आयोग के सामने पेश हुए और कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी बिना बताए बेटे को लेकर मायके चली गई और तब से अलग रह रही है। पति ने कहा कि दोनों का बेटा आईवीएफ तकनीक से हुआ है और यदि रिश्ते में लगातार प्रताड़ना होती तो ऐसा संभव नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी के जाने के बाद उनकी मां को पैरालिसिस का दूसरा अटैक आया और अब इस उम्र में अकेले जीवन बिताना मुश्किल होगा। दूसरे मामले में पति-पत्नी के गंभीर आरोप दूसरे मामले में पति ने महिला आयोग के सामने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का एक अन्य महिला के साथ अवैध संबंध है और उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है। उसका दावा था कि इस संबंध में वह अदालत में दस्तावेज और सबूत भी प्रस्तुत कर चुका है। वहीं, पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना, मारपीट, जबरन गर्भपात कराने, निजी वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करने और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला ने यह भी दावा किया कि उसके पति का अपनी रिश्तेदारी की एक महिला के साथ संबंध है और ससुर ने भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। महिला ने आयोग को बताया कि शादी के बाद से उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और वर्तमान में उसका खर्च मायके वाले उठा रहे हैं। दूसरी ओर, पति ने पत्नी के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में महिला आयोग ने संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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