2025 में सोने (Gold) की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। सोना अब $3,000 प्रति औंस से ऊपर पहुँच गया है, जिससे निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है। इस तेजी के पीछे कई कारण हैं – वैश्विक राजनीतिक तनाव (geopolitical tension), अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और सुरक्षित निवेश (safe-haven investment) की बढ़ती मांग। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी (central bank buying) ने भी सोने की कीमतों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस साल सोने की कीमतों में 30% से अधिक की वृद्धि देखी गई है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण हुई है। Nixon Shock की याद: क्या इतिहास दोहर सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान सोने की तेजी 1971 के “Nixon Shock” की याद दिलाती है। उस समय राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने अमेरिकी डॉलर को गोल्ड में कन्वर्ट करने की सुविधा बंद कर दी थी, जिससे ब्रेटन वुड्स सिस्टम समाप्त हो गया। इसके परिणामस्वरूप डॉलर का मूल्य कम हुआ और आर्थिक अस्थिरता (stagflation) पैदा हुई। आज भी कुछ विश्लेषक मानते हैं कि सोने की बढ़ती कीमतें आर्थिक अनिश्चितता का संकेत हैं। हालांकि, इसका सीधा मतलब यह नहीं कि Stock Market Crash होगा। Stock Market और सोने का संबंध इतिहास में सोने की कीमत और स्टॉक मार्केट का अक्सर विपरीत संबंध देखा गया है। लेकिन अब यह संबंध पहले जितना मजबूत नहीं रहा। ICICI Securities ने कहा है कि सोने की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं कि शेयर बाजार में गिरावट आएगी। Goldman Sachs का अनुमान है कि सोने की कीमत 2026 के मध्य तक $4,800 तक जा सकती है। निवेशक बढ़ती आर्थिक चिंताओं और संभावित अमेरिकी मंदी (US recession) के कारण सुरक्षित निवेश की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। निवेशकों के लिए सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more