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Araghchi

Iran Power Struggle: Araghchi की छुट्टी की चर्चा, Pezeshkian कमजोर और IRGC मजबूत

ईरान की सियासत में इन दिनों सबकुछ सामान्य नहीं है। सत्ता के अलग-अलग केंद्रों के बीच खींचतान की खबरों ने एक बार फिर देश की राजनीति को चर्चा में ला दिया है। सबसे ज्यादा नजर विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) पर है। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विदेश मंत्री के पद से हटाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, अभी तक अराघची को हटाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इस खबर को फिलहाल दावे और मीडिया रिपोर्टों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने ईरान की सत्ता में चल रहे बड़े Power Struggle को जरूर सामने ला दिया है। Araghchi को हटाने की आखिर क्यों हो रही चर्चा? अब्बास अराघची ईरान की विदेश नीति के अहम चेहरों में शामिल हैं। अमेरिका के साथ बातचीत और दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार के भीतर कुछ लोगों को अराघची की कार्यशैली को लेकर आपत्ति है। दावा है कि अमेरिका के साथ बातचीत जैसे संवेदनशील मामलों में विदेश मंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच मतभेद सामने आए हैं। इसी के बाद अराघची को पद से हटाने की चर्चा तेज हुई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम फैसला लिया जा चुका है या नहीं। Pezeshkian की सरकार के सामने बढ़ी चुनौती ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की सरकार भी इस पूरे विवाद के केंद्र में है। पेजेश्कियान अपेक्षाकृत सुधारवादी रुख के लिए जाने जाते हैं और विदेश नीति में बातचीत तथा कूटनीति को अहमियत देते रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा तनाव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि देश के बड़े फैसलों में राष्ट्रपति सरकार की भूमिका कितनी है और सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव कितना बढ़ चुका है। यही सवाल अब ईरान की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। IRGC के बढ़ते प्रभाव की क्यों हो रही चर्चा? ईरान में IRGC सिर्फ एक सामान्य सैन्य संगठन नहीं है। देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय रणनीति और राजनीतिक व्यवस्था में इसका लंबे समय से प्रभाव रहा है। हालिया घटनाक्रमों के बाद कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि IRGC का प्रभाव और मजबूत हुआ है। खासकर युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के माहौल में सुरक्षा से जुड़े फैसलों में सैन्य नेतृत्व की भूमिका बढ़ने की बात कही जा रही है। अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो इसका सीधा असर ईरान की Foreign Policy पर पड़ सकता है। Supreme Leader की भूमिका सबसे अहम ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए Supreme Leader की भूमिका को समझना जरूरी है। राष्ट्रपति सरकार और प्रशासन का नेतृत्व करते हैं, लेकिन देश की सर्वोच्च राजनीतिक और सैन्य सत्ता Supreme Leader के पास रहती है। इसी वजह से राष्ट्रपति और विदेश मंत्री की राजनीतिक स्थिति को केवल सरकार के फैसलों से नहीं देखा जा सकता। ईरान में Supreme Leader, राष्ट्रपति कार्यालय और IRGC जैसे अलग-अलग Power Centres के बीच संतुलन बेहद अहम है। मौजूदा घटनाक्रम में इसी Power Balance को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका के साथ बातचीत बनी बड़ा मुद्दा अराघची का नाम अमेरिका के साथ बातचीत से भी जुड़ा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच किसी भी तरह की बातचीत देश की आंतरिक राजनीति में बेहद संवेदनशील मुद्दा बन जाती है। एक तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ ईरान के कट्टरपंथी और सुरक्षा से जुड़े धड़े अमेरिका के प्रति सख्त रुख रखने के पक्ष में रहे हैं। ऐसे माहौल में विदेश मंत्री की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए अराघची को लेकर सामने आई खबरों को ईरान की व्यापक Foreign Policy के संदर्भ में देखा जा रहा है। क्या राष्ट्रपति की Power सच में कम हो रही है? यह सवाल फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पेजेश्कियान अब भी राष्ट्रपति हैं और उनकी सरकार औपचारिक रूप से देश के प्रशासन को संभाल रही है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषणों में यह चर्चा जरूर बढ़ी है कि संकट के समय सुरक्षा और सैन्य संस्थानों का प्रभाव बढ़ सकता है। राष्ट्रपति की ताकत कमजोर होने और IRGC के ज्यादा प्रभावशाली होने के दावे भी इसी संदर्भ में सामने आए हैं। हालांकि, इन दावों के हर पहलू की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल ईरान की सत्ता में चल रहे Power Struggle के संकेत के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। Araghchi की कुर्सी का फैसला क्यों होगा अहम? अगर अराघची को वास्तव में विदेश मंत्री पद से हटा दिया जाता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान के विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यह संकेत मिल सकता है कि तेहरान आने वाले दिनों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बातचीत को लेकर अपनी रणनीति बदल रहा है। साथ ही यह भी साफ हो सकता है कि विदेश नीति में राष्ट्रपति सरकार की आवाज ज्यादा मजबूत है या सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ रहा है। फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन अराघची को लेकर उठी चर्चा ने ईरान की राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान को जरूर उजागर कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अराघची अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या ईरान की सत्ता में चल रहा यह Power Shift विदेश मंत्रालय में भी बड़ा बदलाव लेकर आता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN में सेना का बढ़ा दबदबा! सुप्रीम लीडर खामेनेई ने राष्ट्रपति पजशकियान को दी सख्त चेतावनी

IRAN की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को साफ संदेश दिया है कि देश की सरकार को सुरक्षा और सैन्य मामलों में सेना के फैसलों के अनुसार काम करना होगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी बड़े फैसले का अंतिम अधिकार अब वरिष्ठ सैन्य कमांडर अहमद वाहिदी के पास रहेगा। यानी सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार का फैसला तभी लागू होगा, जब सेना की मंजूरी होगी। सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में ईरान के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सेना की भूमिका और मजबूत की जा रही है। ऐसे समय में सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रपति के अधिकारों पर उठे सवाल इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रपति के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। हालांकि, ईरानी सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा मामलों में सेना की भूमिका इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका असर केवल ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दुनिया की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump का Iran पर बड़ा बयान: फिर हो सकता है Attack, लेकिन बातचीत से उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। Trump ने संकेत दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इसी बीच उन्होंने बातचीत का दरवाजा भी खुला रखा है। Trump का कहना है कि वह लोगों की जान नहीं लेना चाहते और अगर बातचीत से समाधान निकल सकता है तो इसे प्राथमिकता दी जाएगी। ईरान के साथ आज से बातचीत की तैयारी Trump के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सोमवार यानी 3 अगस्त से फिर शुरू हो सकती है। दोनों पक्षों के बीच संभावित वार्ता को लेकर दुनिया की नजरें टिकी हैं। खास बात यह है कि ट्रंप ने बातचीत के लिए कोई निश्चित Deadline तय नहीं की है। अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख फिलहाल दो तरफा नजर आ रहा है। एक ओर वह बातचीत के जरिए समझौते की संभावना तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए सैन्य विकल्प की बात भी कर रहे हैं। Trump ने दी फिर Military Action की चेतावनी Trump ने साफ किया है कि अगर बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता तो अमेरिका के पास आगे कार्रवाई करने के विकल्प मौजूद हैं। यानी ईरान को लेकर Washington की नीति में Diplomacy के साथ Military Pressure भी जारी रहने वाला है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि उनका मकसद लोगों की जान लेना नहीं है। इसी वजह से बातचीत को एक मौका देने की कोशिश की जा रही है। Nuclear Program बना सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का एक बड़ा कारण ईरान का Nuclear Program है। अमेरिका चाहता है कि ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर ठोस आश्वासन मिले। इसके अलावा Middle East में सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव भी दोनों देशों के बीच बातचीत के अहम मुद्दे हो सकते हैं। ईरान की ओर से आने वाला रुख इस पूरी प्रक्रिया में काफी महत्वपूर्ण होगा। अगर दोनों देश कुछ मुद्दों पर सहमति बनाने में सफल रहते हैं तो क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ सकती है। Middle East पर भी नजर अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहता। Middle East के कई देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति इससे प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश इस नई बातचीत पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Trump और Iran के बीच बातचीत किसी Deal तक पहुंच पाएगी? अगर वार्ता सफल होती है तो सैन्य टकराव का खतरा कम हो सकता है। लेकिन बातचीत विफल रहने की स्थिति में तनाव फिर बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि Trump की Negotiation Strategy ईरान के साथ रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan

Pakistan Terror Attack: स्वात में Suicide Blast से मचा हड़कंप, 14 लोगों की मौत

पाकिस्तान (Pakistan) के खैबर पख्तूनख्वा से रविवार को एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई। स्वात जिले के काबल इलाके में एक पुलिस स्टेशन के पास हुए आत्मघाती हमले में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में पुलिसकर्मी और आम नागरिक शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्टों में 8 पुलिसकर्मियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। Peace Rally के बीच हुआ Blast मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काबल में एक Peace Rally आयोजित की जा रही थी। इस दौरान पुलिस स्टेशन के पास जोरदार धमाका हुआ। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। हमले की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। पूरे इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू की गई। अधिकारियों ने घटनास्थल से जुड़े सबूत जुटाने के साथ हमले की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। 14 लोगों की मौत, 22 घायल इस हमले में अब तक 14 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। घायलों की संख्या 22 बताई जा रही है। घायलों में कुछ की हालत गंभीर होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। मृतकों में पुलिसकर्मियों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में 8 पुलिसकर्मियों की मौत की जानकारी दी गई है। अधिकारियों की ओर से अंतिम और विस्तृत आंकड़े की पुष्टि का इंतजार है। Khyber Pakhtunkhwa में पहले भी रहे हैं आतंकी हमले खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का ऐसा इलाका है जहां पिछले कुछ वर्षों में आतंकी गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। पुलिस और सुरक्षा बलों को कई बार निशाना बनाया गया है। स्वात जिले का भी आतंकवाद से पुराना संबंध रहा है। हालांकि सुरक्षा अभियानों के बाद स्थिति में काफी सुधार आया था, लेकिन समय-समय पर होने वाली हिंसक घटनाएं क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। Security Agencies ने शुरू की जांच धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया और आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले के पीछे कौन लोग या संगठन जिम्मेदार हैं। फिलहाल किसी संगठन की ओर से हमले की जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है। पाकिस्तान में बढ़ती चिंता काबल में हुए इस हमले ने पाकिस्तान में आतंकी हिंसा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस और आम लोगों की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं और मृतकों तथा घायलों से जुड़े आंकड़ों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद हमले के कारण और जिम्मेदार लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Spain

Spain Border Crisis: समुद्र पार कर पहुंचे हजारों Migrants, Morocco से आए लोगों में मची भगदड़

यूरोप में बढ़ते Migration Crisis के बीच स्पेन से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। बेहतर भविष्य की तलाश में मोरक्को से समुद्र के रास्ते स्पेन (Spain) पहुंचने की कोशिश कर रहे हजारों प्रवासियों के बीच हालात अचानक बिगड़ गए। बॉर्डर पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान मची अफरा-तफरी और भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। Morocco से Spain पहुंचने की कोशिश में हजारों लोग रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 49 हजार प्रवासी (Migrants) मोरक्को की तरफ से स्पेन में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो बेहतर रोजगार, सुरक्षित जीवन और आर्थिक स्थिरता की उम्मीद में यूरोप पहुंचना चाहते हैं। कई प्रवासियों ने समुद्री रास्ते का सहारा लिया, जो बेहद जोखिम भरा माना जाता है। छोटी नावों और कठिन परिस्थितियों में लंबी समुद्री यात्रा के दौरान हर साल कई लोगों की जान चली जाती है। Spain Border पर बिगड़े हालात प्रवासियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्पेन के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी। बॉर्डर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ में भगदड़ मच गई। अचानक मची अफरा-तफरी के कारण कई लोग घायल हुए और 18 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। Europe के सामने बढ़ता Immigration Challenge स्पेन लंबे समय से अवैध प्रवासन की चुनौती का सामना कर रहा है। अफ्रीका से यूरोप पहुंचने के लिए स्पेन एक प्रमुख रास्ता माना जाता है। इसी वजह से यहां सीमा सुरक्षा और मानवीय सहायता दोनों बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासन की समस्या सिर्फ सीमा नियंत्रण से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और बेहतर अवसरों की तलाश जैसे कई कारण हैं। Migrants Crisis पर सरकार की नजर इस घटना के बाद स्पेन प्रशासन ने सीमा सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए हैं। वहीं मानवाधिकार संगठनों ने प्रवासियों की सुरक्षा और मानवीय मदद को लेकर चिंता जताई है। यूरोपीय देशों के सामने अब यह सवाल है कि बढ़ते प्रवासन को कैसे नियंत्रित किया जाए, साथ ही उन लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए जो बेहतर जिंदगी की उम्मीद लेकर लंबी और खतरनाक यात्रा करते हैं। क्यों बढ़ रहे हैं Europe की ओर Migrants? स्पेन की यह घटना एक बार फिर दुनिया को याद दिलाती है कि Migration Crisis केवल सीमा का मुद्दा नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी से जुड़ा गंभीर विषय भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Canada

Canada PGWP पढ़ाई पूरी, लाखों खर्च फिर भी Work Permit से इनकार; Punjabi Students का बड़ा Protest

विदेश में बेहतर शिक्षा और सुनहरे भविष्य का सपना लेकर हर साल हजारों भारतीय छात्र कनाडा (Canada) का रुख करते हैं। लेकिन इस समय कनाडा में पढ़ रहे सैकड़ों भारतीय छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। खासतौर पर पंजाब से जुड़े 500 से अधिक छात्र पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) नहीं मिलने के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। कई छात्र कई दिनों से धरना दे रहे हैं, जबकि कुछ ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में पढ़ाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद अब उन्हें काम करने की अनुमति नहीं मिल रही। इससे उनका करियर, आर्थिक स्थिति और भविष्य तीनों दांव पर लग गए हैं। क्या है पूरा मामला? जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन कर रहे अधिकांश छात्र अल्बर्टा (Alberta) के विभिन्न कॉलेजों से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। इनमें Portage College के छात्र भी शामिल हैं। छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने एडमिशन लिया था, तब उन्हें पढ़ाई पूरी होने के बाद Post-Graduation Work Permit (PGWP) मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब बड़ी संख्या में उनके आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। छात्रों का कहना है कि परिवारों ने कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया। कॉलेज फीस, रहने का खर्च और अन्य जरूरतों पर लाखों रुपये खर्च हुए। अब वर्क परमिट नहीं मिलने से वे न नौकरी कर पा रहे हैं और न ही आगे स्थायी निवास (PR) की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की क्या मांग है? धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी केवल एक मांग है कि उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पोस्टर लेकर नारे लगाए— “We Studied Here, We Deserve to Work Here” यानी, “हमने यहां पढ़ाई की है, इसलिए हमें यहां काम करने का मौका मिलना चाहिए।” कई छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा तो उनका करियर और परिवार की वर्षों की मेहनत बेकार हो जाएगी। Alberta Premier Danielle Smith का सख्त बयान इस पूरे विवाद के बीच अल्बर्टा की प्रीमियर Danielle Smith का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने साफ कहा कि जिन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के पास वैध वीजा, वर्क परमिट या कानूनी रूप से रहने की अनुमति नहीं है, उन्हें कनाडा छोड़कर अपने देश लौटना होगा। उन्होंने कहा कि कनाडा के इमिग्रेशन नियम सभी के लिए समान हैं और सरकार इनमें कोई विशेष छूट नहीं दे सकती। उनके इस बयान के बाद छात्रों की चिंता और बढ़ गई है। छात्रों को मिला राजनीतिक समर्थन प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कुछ कनाडाई सांसदों ने मुलाकात की और उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया। छात्रों को उम्मीद है कि सरकार उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करेगी और कोई समाधान निकलेगा। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से वर्क परमिट को लेकर किसी बड़े राहत पैकेज या नीति बदलाव की घोषणा नहीं की गई है। क्यों बढ़ रही है Canada में सख्ती? पिछले कुछ वर्षों में कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए हैं। सरकार का कहना है कि शिक्षा प्रणाली का गलत इस्तेमाल रोकना, इमिग्रेशन प्रक्रिया को संतुलित रखना और स्थानीय रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। इन्हीं बदलावों के चलते अब वर्क परमिट और स्थायी निवास (PR) से जुड़े नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गए हैं। भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर भारत, खासकर पंजाब, हर साल कनाडा भेजे जाने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सबसे बड़ी संख्या वाले राज्यों में शामिल है। अधिकांश छात्र पढ़ाई के बाद नौकरी और फिर Permanent Residency (PR) की उम्मीद लेकर कनाडा जाते हैं। ऐसे में वर्क परमिट पर आई इस सख्ती ने हजारों भारतीय छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों को अब किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले वर्क परमिट और इमिग्रेशन नियमों की पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए। आगे क्या होगा? फिलहाल प्रदर्शन जारी है और छात्र अपने मामलों की दोबारा समीक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर, अल्बर्टा सरकार अपने रुख पर कायम है कि जिन छात्रों के पास वैध कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें देश छोड़ना होगा। अब सबकी नजर कनाडा सरकार के अगले फैसले पर है। यदि कोई समाधान नहीं निकलता, तो सैकड़ों भारतीय छात्रों को वापस लौटना पड़ सकता है। यह मामला सिर्फ वर्क परमिट का नहीं, बल्कि उन परिवारों के सपनों का भी है जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए जीवनभर की कमाई दांव पर लगा दी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran पर हमले रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में गिरा

Iran पर हमले रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में गिरा

अमेरिका की राजनीति में Iran को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरान पर सैन्य हमलों को रोकना था। हालांकि यह प्रस्ताव बेहद करीबी मुकाबले में 49-50 वोटों से खारिज हो गया। इस मतदान में सभी की नजरें सांसदों के रुख पर थीं। खास बात यह रही कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। यदि वह मतदान करते तो नतीजे अलग हो सकते थे, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका। यह प्रस्ताव ऐसे समय लाया गया था जब मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान को लेकर अमेरिका की सैन्य रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों का कहना था कि किसी भी बड़े सैन्य कदम से पहले कांग्रेस की भूमिका तय होनी चाहिए, ताकि बिना व्यापक सहमति के युद्ध जैसी स्थिति न बने। वहीं प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने वाले सांसदों का मानना था कि राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार होना चाहिए और ऐसे प्रस्ताव से अमेरिका की सुरक्षा नीति प्रभावित हो सकती है। 49-50 के बेहद करीबी अंतर से प्रस्ताव गिरने के बाद अमेरिका में ईरान नीति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के बीच टकराव और बढ़ सकता है। इस फैसले पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिका-सऊदी के हवाई हमलों से IRAQ में तनाव बढ़ा, 10 PMF लड़ाके मारे गए

अमेरिका-सऊदी के हवाई हमलों से IRAQ में तनाव बढ़ा, 10 PMF लड़ाके मारे गए

IRAQ एक बार फिर मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव का केंद्र बन गया है। अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) के ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। इन हमलों में PMF के कम से कम 10 लड़ाकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से की गई। हमले के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। ईरान का जवाब, दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें हवाई हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि मिसाइलों से हुए नुकसान और संभावित हताहतों को लेकर अभी तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ सकता है। यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। आम लोगों में बढ़ी चिंता लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई के कारण इराक और आसपास के इलाकों में रहने वाले आम लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल है। लोगों को आशंका है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो क्षेत्र में बड़े संघर्ष की स्थिति बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Japan

Japan में बड़ा Earthquake: Kumamoto में 7.1 Magnitude के झटके, समुद्री इलाकों पर नजर

जापान (Japan) के कुमामोटो (Kumamoto) क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को हिला दिया। मंगलवार को महसूस किए गए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.1 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था, जिसके चलते कई इलाकों में तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद जापान में समुद्री इलाकों के लिए Tsunami Warning जारी कर दी गई है। 10 KM गहराई में था Earthquake का केंद्र जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र कुमामोटो क्षेत्र के पास समुद्र तल से करीब 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। कम गहराई पर होने के कारण झटकों की तीव्रता ज्यादा महसूस की गई। कई इलाकों में लोग अचानक आए कंपन से घबरा गए और सुरक्षा के लिए घरों से बाहर निकल आए। जापान की मौसम एजेंसी और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। Tsunami Warning के बाद Coastal Areas में बढ़ी सतर्कता भूकंप के बाद संभावित सुनामी खतरे को देखते हुए जापान के तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया। समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। हालांकि, शुरुआती जानकारी में बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं। भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक को देखते हुए भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है। Japan में Earthquake क्यों आते हैं बार-बार? जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। यह देश Pacific Ring of Fire क्षेत्र में आता है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं। इसी वजह से यहां भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां अक्सर देखने को मिलती हैं। जापान ने वर्षों के अनुभव के आधार पर अपनी इमारतों, आपदा प्रबंधन सिस्टम और Early Warning Technology को काफी मजबूत बनाया है, जिससे बड़े भूकंपों के दौरान नुकसान को कम किया जा सके। प्रशासन की नजर हर स्थिति पर कुमामोटो Earthquake के बाद राहत और बचाव एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन कर रहा है और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोकना है। जापानी अधिकारी लगातार अपडेट जारी कर रहे हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। Japan Earthquake Latest Update: कुमामोटो में आए 7.1 Magnitude भूकंप के बाद Tsunami Alert जारी है। प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Middle East Crisis: Hormuz मुद्दे पर Iran की कूटनीति, Saudi-Oman के साथ तनाव कम करने की कोशिश

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर सऊदी अरब और ओमान से अहम बातचीत की है। Iran ने कहा कि अमेरिकी हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में हालात और संवेदनशील हो गए हैं। ऐसे समय में सभी पड़ोसी देशों को मिलकर स्थिति को संभालने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की जरूरत है। Iran की ओर से हुई इस बातचीत में होर्मुज मार्ग की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और बढ़ते तनाव को कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। ईरान का कहना है कि बातचीत और आपसी सहयोग के जरिए ही मौजूदा संकट का समाधान निकाला जा सकता है। US Attacks के बाद बढ़ा Middle East Tension ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। तेहरान का कहना है कि इन हमलों से मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा है और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। ईरान लगातार यह बात कहता रहा है कि किसी भी बाहरी सैन्य हस्तक्षेप से हालात और जटिल हो सकते हैं। वहीं, अब ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ संवाद बढ़ाकर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। Strait of Hormuz क्यों है दुनिया के लिए महत्वपूर्ण? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है। अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतों, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। Iran-Saudi Relations पर दुनिया की नजर Iran और सऊदी अरब के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने बातचीत के जरिए संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। होर्मुज मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत को क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता के लिए ईरान और सऊदी अरब के बीच संवाद बेहद जरूरी है। Oman बना बातचीत का अहम हिस्सा ओमान लंबे समय से खाड़ी देशों के बीच संतुलित कूटनीतिक भूमिका निभाता आया है। ईरान और अरब देशों के बीच बातचीत में ओमान की भूमिका कई बार महत्वपूर्ण रही है। होर्मुज संकट को लेकर भी ओमान तनाव कम करने और सभी पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। Global Impact: तेल बाजार से लेकर व्यापार तक असर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक स्तर पर देखा जा सकता है। तेल आपूर्ति में बाधा आने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से अमेरिका, खाड़ी देश और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। क्या कम होगा खाड़ी क्षेत्र का तनाव? फिलहाल ईरान, सऊदी अरब और ओमान के बीच बातचीत को तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कूटनीतिक प्रयास क्षेत्र में स्थायी शांति लाने में कितने सफल होते हैं। होर्मुज संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tibet-Nepal

Tibet-Nepal Border पर भारी तबाही, 11 दिन बाद Foreign Journalists ने देखा Ground Reality

Tibet-Nepal की सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के 11 दिन बाद आखिरकार विदेशी मीडिया को तिब्बत के प्रभावित इलाके तक पहुंच मिली। चीन के विदेश मंत्रालय की व्यवस्था के तहत चुनिंदा International Journalists को Gyirong County ले जाया गया, जहां आपदा के बाद की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने ज्यादा साफ तौर पर आई हैं। यह आपदा इतनी भयावह थी कि चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद कभी व्यस्त रहने वाला Gyirong Border Crossing मलबे और कीचड़ में बदल गया। पांच मंजिला कस्टम बिल्डिंग समेत कई ढांचे बाढ़ की चपेट में आ गए। मौके पर पहुंचे पत्रकारों ने बड़े पैमाने पर तबाही देखी, जबकि Rescue Teams अब भी मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। Nepal में 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता इस प्राकृतिक आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या भी 1,300 के पार पहुंच चुकी है। नेपाल में बड़ी संख्या में लापता लोग Hydropower Projects से जुड़े कर्मचारी हैं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें 121 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई है। मलबे से घिरी सुरंगों तक पहुंचना Rescue Teams के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। तबाही के बीच जिंदा बचने की उम्मीद इतनी बड़ी त्रासदी के बीच कुछ घटनाओं ने उम्मीद भी जगाई है। नेपाल में दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को करीब नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया। उनके बचने की कहानी ने उन परिवारों में भी उम्मीद पैदा की है, जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। बचाव अभियान में नेपाल के साथ भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत कई देशों की टीमें मदद कर रही हैं। मुश्किल पहाड़ी इलाका, भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुरंगों में जमा पानी Rescue Operation को लगातार कठिन बना रहे हैं। Tibet में 43 मौतें, 519 लोग Missing चीन की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत के Gyirong इलाके में अब तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 519 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यही वजह है कि लापता लोगों के परिवार लगातार जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ विदेशी राजनयिकों और परिवारों ने चीन से राहत अभियान और Missing Persons को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग की है। Foreign Media की पहुंच पर क्यों उठे सवाल? आपदा के शुरुआती दिनों में तिब्बत के प्रभावित हिस्से तक विदेशी पत्रकारों की पहुंच सीमित रही। नेपाल की तरफ से आपदा की तस्वीरें और जमीनी रिपोर्ट लगातार सामने आती रहीं, लेकिन चीनी हिस्से की स्थिति को लेकर जानकारी अपेक्षाकृत कम उपलब्ध थी। अब 11 दिन बाद चीन की ओर से चुनिंदा विदेशी पत्रकारों को Gyirong ले जाने के बाद सीमा क्षेत्र में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे वहां चल रहे Search and Rescue Operation और नुकसान के वास्तविक स्तर को समझने में मदद मिली है। भारत के नागरिक भी प्रभावित इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं, जबकि 166 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने नेपाल के राहत अभियान में करीब 95 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञों की टीम भेजी है। भारतीय टीमों में Tunnel Rescue, Forensic और Medical Experts भी शामिल हैं। इन टीमों की मदद से मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। सिर्फ बाढ़ नहीं, Himalayan Disaster का बड़ा संकेत इस पूरी घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और Glacial Lake से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के लिए यह हादसा केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में Infrastructure और Disaster Preparedness को लेकर बड़ी चेतावनी भी है। फिलहाल Nepal और Tibet में हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। राहत और बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगातार Search Operation चला रहे हैं। कुछ लोगों के कई दिनों बाद जिंदा मिलने से उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन 5,500 से ज्यादा लोगों का अब भी लापता होना इस आपदा की भयावहता को बयां करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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