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Priyanka Gandhi

Bihar Politics में घमासान, Bankipur पर Priyanka का BJP पर वार; Giriraj बोले- ज्यादा खुश न हों

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सीट पर सामने आए राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोग अब भाजपा से थक चुके हैं। प्रियंका के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी पलटवार किया और विपक्ष को ज्यादा खुश नहीं होने की नसीहत दे दी। बांकीपुर को लेकर नेताओं के बीच जुबानी जंग ने बिहार की राजनीति का माहौल और गर्म कर दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ जनता के बदलते मूड के तौर पर देख रहा है, तो दूसरी ओर बीजेपी नेता इन दावों को लेकर सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं। प्रियंका गांधी ने BJP पर साधा निशाना प्रियंका गांधी ने बांकीपुर के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जनता अब भाजपा से थक चुकी है। उनके बयान को विपक्ष की ओर से बीजेपी के खिलाफ माहौल बनने के दावे के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर जैसी चर्चित सीट पर इस तरह की राजनीतिक टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां का चुनावी मुकाबला लंबे समय से बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार सरकार और बीजेपी की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Giriraj Singh का Priyanka Gandhi को जवाब प्रियंका गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष को बांकीपुर के राजनीतिक समीकरणों को लेकर जल्दबाजी में उत्साहित नहीं होने की सलाह दी। गिरिराज सिंह का कहना है कि चुनावी राजनीति में किसी एक घटनाक्रम या बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है। उन्होंने विपक्ष को संकेत दिया कि अभी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है और तस्वीर आगे और साफ होगी। Bankipur में बढ़ी Political हलचल बांकीपुर की राजनीति में इस बयानबाजी के बाद हलचल बढ़ गई है। एक ओर प्रियंका गांधी का बयान कांग्रेस और विपक्ष के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है, वहीं गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया बीजेपी के आत्मविश्वास को दिखाती है। दरअसल, बिहार की राजनीति में हर चुनावी सीट का अपना महत्व है, लेकिन बांकीपुर पर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर खास नजर रहती है। यही वजह है कि यहां से जुड़े नेताओं के बयान भी तेजी से चर्चा में आ जाते हैं। जनता के मूड पर टिकी निगाहें फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांकीपुर में जनता का मूड किस ओर है। राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा। प्रियंका गांधी के ‘लोग BJP से थक चुके हैं’ वाले बयान और गिरिराज सिंह के ‘ज्यादा खुश न हों’ वाले पलटवार ने बिहार की सियासत में नया राजनीतिक वार-पलटवार जरूर शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में इस सीट को लेकर और बयान सामने आने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

6 साल बाद UPI पर फिर MDR की तैयारी! बड़े कारोबारियों से वसूली जा सकती है Payment Fee

अगर आप रोजाना UPI से Payment करते हैं तो यह खबर आपके लिए काफी अहम है। देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI को लेकर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बाद आने वाले समय में कुछ ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होने का रास्ता खुल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी UPI पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकार के पास कुछ डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था करने का विकल्प होगा। 2020 में खत्म कर दिया गया था MDR UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने साल 2020 में UPI के जरिए होने वाले Merchant Payments पर MDR को खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा दुकानदारों और कारोबारियों को मिला और डिजिटल पेमेंट को तेजी से अपनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे UPI छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े Shopping Platforms तक पहुंच गया। आज चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक QR Code से Payment करना आम बात हो चुकी है। लेकिन इस पूरी व्यवस्था के पीछे बैंक और Payment Companies लगातार टेक्नोलॉजी, सर्वर, नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से लंबे समय से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model की जरूरत पर चर्चा होती रही है। Payment Act में बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है? वित्त मंत्रालय ने कानून के मौजूदा प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट से जुड़े शुल्क के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को बदलना है। अगर संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो सरकार आगे यह तय कर सकती है कि किन पेमेंट सिस्टम, कारोबारियों या ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए। यानी अभी सरकार ने यह नहीं कहा है कि हर UPI Payment पर शुल्क लगेगा। फिलहाल मामला कानूनी बदलाव के प्रस्ताव तक सीमित है। क्या आम UPI Users को देना होगा पैसा? यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आम लोगों के सामान्य UPI Payments पर सीधे शुल्क लगाने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। संभावना यह जताई जा रही है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसका फोकस मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों या कुछ खास तरह के Merchant Transactions पर हो सकता है। इसका मतलब है कि किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को Payment करना या रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करना फिलहाल शुल्क के दायरे में आने की पुष्टि नहीं हुई है। बड़े कारोबारियों पर क्यों हो सकता है असर? UPI का इस्तेमाल अब बड़े E-commerce Platforms, Food Delivery Apps, Travel Companies और दूसरे बड़े कारोबारों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इन कंपनियों के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान किए जाते हैं। ऐसे में अगर सरकार बड़े कारोबारियों के कुछ UPI Transactions पर MDR लागू करती है तो सबसे पहले इसका असर इसी वर्ग पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि किस Merchant को कितना MDR देना होगा और इसकी दर क्या होगी। छोटे दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा? छोटे व्यापारियों के लिए UPI लंबे समय से एक आसान और कम लागत वाला Payment Option रहा है। इसलिए सरकार के सामने यह चुनौती भी होगी कि MDR की व्यवस्था बनाते समय छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। अगर भविष्य में शुल्क सिर्फ बड़े कारोबारियों और निर्धारित श्रेणी के Transactions तक सीमित रखा जाता है तो छोटे दुकानदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रह सकता है। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं भी हो सकती हैं कि अब हर UPI Payment पर Fee लगेगी। लेकिन फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी UPI Payment पर नई अनिवार्य फीस लागू नहीं हुई है। सरकार ने सिर्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। आगे संसद की प्रक्रिया, सरकार के नियम और संबंधित Notification के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। UPI के Future के लिए बड़ा फैसला UPI ने भारत में Payment करने का तरीका ही बदल दिया है। छोटी रकम से लेकर लाखों रुपये के Business Transactions तक इसका इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में MDR की संभावित वापसी सिर्फ फीस से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के पूरे Digital Payment Ecosystem के भविष्य से जुड़ा फैसला है। सरकार के सामने दो बड़ी जरूरतें हैं—एक तरफ आम लोगों के लिए UPI को आसान और किफायती बनाए रखना और दूसरी तरफ इस पूरे सिस्टम को चलाने वाले बैंकों और Payment Companies के लिए टिकाऊ Revenue Model तैयार करना। फिलहाल नजर सरकार के अगले कदम पर है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि UPI पर MDR किन लोगों और किन Transactions पर लागू होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kejriwal

Delhi Politics में फिर हलचल, Kejriwal का PM House की ओर March; Police हुई Alert

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। केजरीवाल के इस कदम के बाद दिल्ली पुलिस भी अलर्ट नजर आई और उन्हें प्रधानमंत्री आवास की ओर आगे बढ़ने से रोकने की तैयारी शुरू कर दी गई। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ नजर आए। जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ा, सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई। पुलिस ने फिरोज शाह रोड के आसपास बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की तैयारी की, ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। PM House की ओर मार्च से बढ़ा राजनीतिक तनाव Kejriwal के प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च ने राजधानी में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि वह अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रही है। वहीं, पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। फिरोज शाह रोड पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ने के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति बनने लगी। पुलिस ने एहतियात के तौर पर बैरिकेड्स लगाए और मार्च के संभावित रास्ते पर सुरक्षा बढ़ाई। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त PM House की ओर मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा इंतजाम कड़े किए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो और यातायात भी प्रभावित न हो। केजरीवाल के इस मार्च को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है। राजधानी की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। समर्थकों में दिखा उत्साह मार्च के दौरान AAP कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। समर्थक नारेबाजी करते हुए केजरीवाल के साथ आगे बढ़ते नजर आए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी लड़ाई जारी रहेगी। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस के बैरिकेड्स के बाद मार्च किस दिशा में जाता है और क्या अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच पाते हैं या पुलिस उन्हें रास्ते में ही रोक देती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मदरसों

Yogi Cabinet का बड़ा प्रस्ताव: मदरसों में 12वीं तक Education, Kamil-Fazil Degree पर रोक

उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार UP Madrasa Education से जुड़े कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाने जा रही है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो मदरसा बोर्ड के तहत चलने वाले संस्थानों में पढ़ाई 12वीं कक्षा तक ही होगी। इसके बाद Kamil और Fazil Degree देने की व्यवस्था खत्म हो सकती है। सरकार के इस प्रस्ताव ने मदरसा शिक्षा से जुड़े छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों के बीच चर्चा तेज कर दी है। खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, जो 12वीं के बाद मदरसा बोर्ड से कामिल या फाजिल की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं। 12वीं तक सीमित होगी मदरसा बोर्ड की पढ़ाई प्रस्तावित संशोधन के तहत मदरसा बोर्ड की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा तक सीमित किए जाने की बात है। यानी मदरसों में शुरुआती कक्षाओं से लेकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट यानी 12वीं तक पढ़ाई जारी रह सकेगी। लेकिन 12वीं के बाद मिलने वाली उच्च शिक्षा की डिग्री मदरसा बोर्ड के माध्यम से नहीं दी जाएगी। छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय या अन्य मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में जाना होगा। Kamil और Fazil Course पर क्या होगा असर? इस प्रस्ताव का सबसे अहम हिस्सा Kamil और Fazil courses से जुड़ा है। मौजूदा व्यवस्था में इन पाठ्यक्रमों को उच्च शिक्षा के स्तर से जोड़ा जाता रहा है। नए प्रावधान लागू होने पर मदरसा बोर्ड इन स्तरों की डिग्री जारी नहीं कर सकेगा। इसका मतलब साफ है कि 12वीं के बाद अगर कोई छात्र उच्च शिक्षा हासिल करना चाहता है तो उसे संबंधित यूनिवर्सिटी या मान्यता प्राप्त संस्थान का विकल्प चुनना होगा। Supreme Court के फैसले के बाद क्यों आया बदलाव? मदरसा शिक्षा में प्रस्तावित संशोधन को सुप्रीम कोर्ट के मदरसा कानून से जुड़े फैसले की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। अदालत की सुनवाई के दौरान मदरसा बोर्ड की शक्तियों और उच्च शिक्षा की डिग्री से जुड़े अधिकारों पर महत्वपूर्ण सवाल सामने आए थे। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से कानून में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य मदरसा बोर्ड की भूमिका को स्कूली शिक्षा तक सीमित करने और उच्च शिक्षा को विश्वविद्यालयी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कदम माना जा रहा है। छात्रों पर क्या पड़ेगा असर? अगर यह संशोधन लागू हो जाता है तो मदरसा बोर्ड से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए आगे की राह बदल जाएगी। उन्हें कामिल या फाजिल की डिग्री के लिए मदरसा बोर्ड पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान की व्यवस्था में जाना होगा। वहीं, मौजूदा छात्रों और पहले से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को लेकर सरकार किस तरह की व्यवस्था लागू करेगी, यह अंतिम नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा। अभी प्रस्ताव है, अंतिम फैसला बाकी यहां यह समझना जरूरी है कि फिलहाल इसे सरकार का प्रस्तावित संशोधन बताया जा रहा है। जब तक कैबिनेट से अंतिम मंजूरी और उसके बाद जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इसे लागू नियम नहीं माना जा सकता। अब सबकी नजर योगी कैबिनेट के फैसले पर है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा का मौजूदा ढांचा बदल जाएगा और 12वीं के बाद की पढ़ाई पूरी तरह उच्च शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था से जुड़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FSSAI

FSSAI ने डाबर इंडिया को भेजा नोटिस, 100% दावे के साथ शहद, घी, तेल आदि की बिक्री पर लगाई रोक

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए जाने वाले दावों को लेकर FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने Dabur India को नोटिस जारी करते हुए उसके कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। मामला खास तौर पर उत्पादों की पैकेजिंग और ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ दावों से जुड़ा है। FSSAI की कार्रवाई के बाद शहद, घी, तेल, नारियल पानी और एप्पल साइडर विनेगर जैसे उत्पादों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि डाबर के सभी संबंधित उत्पादों को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। नियामक की मुख्य आपत्ति लेबलिंग और विज्ञापन में किए गए दावों को लेकर है। किन उत्पादों पर FSSAI की नजर? रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI ने डाबर के कई खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल किए जा रहे ‘100%’ जैसे दावों पर आपत्ति जताई है। इनमें Honey, Apple Cider Vinegar, Virgin Coconut Oil, Sesame Oil, Cow Ghee, Coconut Water और Coconut Milk जैसे उत्पाद शामिल हैं। नियामक ने कंपनी की वेबसाइट और उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में इस्तेमाल की गई भाषा की भी जांच की। कुछ उत्पादों के साथ ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ और ‘100% Organic’ जैसे दावे पाए गए। FSSAI का मानना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या जैविक होने की धारणा बना सकते हैं। इसलिए खाद्य उत्पादों के प्रचार और लेबलिंग में ऐसी भाषा के इस्तेमाल को लेकर नियमों का पालन जरूरी है। Organic Products के दावों पर भी सवाल इस मामले में केवल ‘100%’ दावे ही नहीं, बल्कि कुछ ऑर्गेनिक उत्पादों की लेबलिंग भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Dabur Organic Honey और Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar पर इस्तेमाल किए गए ‘Jaivik Bharat’ लोगो को लेकर भी नियामक ने सवाल उठाए हैं। FSSAI ने संबंधित ऑर्गेनिक दावों और उनके लिए जरूरी प्रमाणन की स्थिति को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को पैकेजिंग पर वही जानकारी दी जाए, जिसे नियमों के तहत प्रमाणित किया जा सकता है। पहले भी दी गई थी चेतावनी FSSAI की मौजूदा कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी खाद्य कंपनियों को ‘100%’ जैसे दावों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। मई 2025 में FSSAI ने खाद्य कारोबारियों को ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी, क्योंकि ‘100%’ जैसी भाषा किसी खाद्य उत्पाद की पूर्ण गुणवत्ता या श्रेष्ठता की गारंटी के तौर पर समझी जा सकती है। डाबर के मामले में भी नियामक की ओर से पहले सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई को संतोषजनक नहीं माने जाने के बाद बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया। 15 दिन में Action Taken Report मांगी FSSAI ने डाबर से इस मामले में 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) जमा करने को कहा है। यानी कंपनी को यह जानकारी देनी होगी कि नियामक की आपत्तियों के बाद उसने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। यह कदम खाद्य कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है कि उत्पाद की पैकेजिंग, वेबसाइट और विज्ञापन में इस्तेमाल किए जाने वाले दावों को लेकर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। क्या Dabur के उत्पाद मिलावटी हैं? इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि FSSAI की कार्रवाई को उत्पादों के मिलावटी या असुरक्षित होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से ‘100%’ दावों, लेबलिंग और ऑर्गेनिक प्रमाणन से जुड़े पहलुओं पर है। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर इस कार्रवाई को सीधे तौर पर ‘डाबर के उत्पाद मिलावटी पाए गए’ कहना भ्रामक हो सकता है। कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती FSSAI की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में लेबलिंग और मार्केटिंग के बढ़ते नियामकीय दबाव को भी दिखाती है। आज उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले पैकेजिंग पर लिखे शब्दों, ऑनलाइन डिस्क्रिप्शन और विज्ञापनों पर काफी भरोसा करते हैं। ऐसे में ‘Pure’, ‘Natural’, ‘Organic’ या ‘100%’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कंपनियों के लिए सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि नियमों के दायरे में आने वाला विषय भी है। डाबर मामले में अब नजर कंपनी की अगली कार्रवाई और FSSAI को दी जाने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। अगर कंपनी को अपने उत्पादों की पैकेजिंग या ऑनलाइन दावों में बदलाव करना पड़ता है, तो इसका असर बाजार में मौजूद उत्पादों की लेबलिंग पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल FSSAI का संदेश स्पष्ट है—खाद्य उत्पादों को बेचते समय कंपनियों को ऐसे दावों से बचना होगा, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या शुद्धता के बारे में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर धारणा दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Udhayanidhi Stalin

Trisha Krishna Controversy ने पकड़ा Political रंग, Udhayanidhi Stalin को Tamil Nadu Police ने हिरासत में लिया

अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन (Trisha Krishna) को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का विवाद अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। मामले में तमिलनाडु पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे और DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को उनके घर से हिरासत में लिया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि Trisha को लेकर की गई कथित भद्दी टिप्पणी सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया था। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस तरह की भाषा को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। घर पर पहुंची पुलिस, पूछताछ के लिए ले गई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु पुलिस की टीम उदयनिधि स्टालिन के चेन्नई स्थित आवास पर पहुंची। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए साथ ले जाया गया। पुलिस की इस कार्रवाई की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। हालांकि, मामले में पुलिस की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित धाराओं को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर जांच के नतीजों का इंतजार है। Trisha पर टिप्पणी से क्यों बढ़ा विवाद? अभिनेत्री Trisha को लेकर कथित टिप्पणी के बाद विवाद तेजी से बढ़ा। मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया। लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की भाषा और महिलाओं के प्रति सम्मान को लेकर सवाल उठाए। इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राजनीति और सार्वजनिक मंचों पर किसी महिला के खिलाफ टिप्पणी करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना कितना जरूरी है। Political angle भी हुआ मजबूत उदयनिधि स्टालिन के हिरासत में लिए जाने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। DMK नेता की पुलिस कार्रवाई को लेकर पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा सकता है। फिलहाल सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं। विवाद ने फिर उठाया Women Respect का मुद्दा Trisha विवाद ने सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सम्मान को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों की हर टिप्पणी तेजी से लोगों तक पहुंचती है। ऐसे में शब्दों का चयन और भाषा की मर्यादा पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prashant Kishor

बांकीपुर में Prashant Kishor की धमाकेदार जीत, JDU-BJP के बीच बढ़ी Political Tension

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट का नतीजा सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने इसे जनता के बदलते मूड का संकेत बताया और अपने राजनीतिक विरोधियों को लेकर तीखा संदेश दिया। वहीं, इस नतीजे के बाद JDU की ओर से भी BJP को लेकर नसीहत सामने आई है। दोनों घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। बांकीपुर की जीत ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल बांकीपुर सीट पर मिली प्रचंड जीत को प्रशांत किशोर के राजनीतिक अभियान के लिए अहम माना जा रहा है। नतीजे के बाद उनके समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। प्रशांत किशोर ने जीत के बाद अपने संबोधन में संकेत दिया कि यह सिर्फ एक सीट का चुनावी परिणाम नहीं है, बल्कि जनता के बीच बन रहे नए राजनीतिक माहौल की झलक भी है। उन्होंने अपने विरोधियों को संदेश देते हुए कहा कि राजनीति में जनता के फैसले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उनके बयान के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि आने वाले चुनावों में प्रशांत किशोर की भूमिका कितनी बड़ी हो सकती है। Prashant Kishor ने दी चेतावनी बांकीपुर के नतीजे के बाद प्रशांत किशोर का तेवर पहले से ज्यादा आक्रामक नजर आया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि उनकी राजनीतिक रणनीति अब सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहने वाली है। जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और संगठन को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी सामने आई। उनके इस बयान को JDU और BJP के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रशांत किशोर का बढ़ता प्रभाव सत्तारूढ़ खेमे के लिए चुनौती बन सकता है। JDU ने BJP को क्यों दी नसीहत? दूसरी तरफ, बांकीपुर के नतीजे के बाद JDU की तरफ से BJP को लेकर नसीहत दिए जाने की चर्चा ने गठबंधन की राजनीति को भी सुर्खियों में ला दिया है। JDU ने सहयोगी दल BJP को संकेत दिया कि बिहार की राजनीति में स्थानीय समीकरण और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। पार्टी का संदेश साफ माना जा रहा है कि बिहार में चुनावी रणनीति बनाते समय स्थानीय नेतृत्व, सामाजिक समीकरण और मतदाताओं के रुझान को प्राथमिकता देनी होगी। BJP के लिए क्या है संकेत? बांकीपुर का परिणाम BJP के लिए भी कई सवाल खड़े करता है। पार्टी के सामने अब यह चुनौती है कि वह बदलते राजनीतिक माहौल को किस तरह समझती है और अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है। JDU की नसीहत के बाद NDA के भीतर भी इस बात पर चर्चा होना स्वाभाविक है कि आने वाले चुनावों में सीटों और उम्मीदवारों को लेकर रणनीति किस तरह तैयार की जाए। बिहार की राजनीति में बढ़ेगी हलचल बिहार की राजनीति में मुकाबला पहले से ही दिलचस्प रहा है। ऐसे में बांकीपुर जैसे महत्वपूर्ण नतीजे के बाद नए राजनीतिक समीकरणों की संभावना को लेकर अटकलें तेज होना स्वाभाविक है। प्रशांत किशोर की सक्रिय राजनीति, JDU की रणनीति और BJP की चुनावी तैयारियां आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल बांकीपुर का परिणाम इतना जरूर बता रहा है कि बिहार के मतदाता के मूड को समझना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं है।
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Ram Mandir

Ram Mandir Donation Case: संसद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन, Lok Sabha में भी जमकर हंगामा

राम मंदिर (Ram Mandir) से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और ‘चंदा चोर’ के नारे भी लगाए गए। मामला यहीं नहीं रुका, लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने सदन में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा किया। विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के मामले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं और सरकार को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। Parliament के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन मंगलवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर मोर्चा संभाल लिया। सांसदों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान ‘चंदा चोर’ के नारे भी लगाए गए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे को लेकर सामने आए आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोकसभा में शुरू होते ही हंगामा संसद के बाहर प्रदर्शन के बाद जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सदन के अंदर भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए मामले को उठाने की कोशिश की। हंगामा बढ़ने के बाद लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। इससे सदन का कामकाज प्रभावित हुआ और राम मंदिर चढ़ावा विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर विपक्ष ने सरकार को घेरा विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है। नेताओं का कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े चढ़ावे में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि श्रद्धालुओं की ओर से दी जाने वाली राशि और सामग्री को लेकर किसी भी तरह के सवाल उठते हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। संसद के बाहर हुए प्रदर्शन और लोकसभा में हंगामे ने साफ कर दिया है कि विपक्ष आने वाले दिनों में इस मामले को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। सड़क से संसद तक पहुंचा मामला राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल एक स्थानीय या धार्मिक मुद्दे तक सीमित नहीं रहा। विपक्ष के प्रदर्शन के बाद यह मामला सीधे संसद की कार्यवाही से जुड़ गया है। जिस तरह से संसद के बाहर नारेबाजी हुई और फिर लोकसभा में हंगामा हुआ, उससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गर्म होने की संभावना है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि मामले को लेकर सरकार और संबंधित पक्ष आगे क्या जवाब देते हैं और कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Alert: बिहार-बंगाल में बिजली गिरने से 11 मौतें, Badrinath Highway पर Landslide से 200 यात्री फंसे

मानसून (Monsoon) ने देश के कई राज्यों में राहत के साथ परेशानी भी बढ़ा दी है। बिहार और पश्चिम बंगाल में आकाशीय बिजली गिरने से 11 लोगों की मौत की खबर है। वहीं उत्तराखंड में बारिश के कारण बद्रीनाथ हाईवे पर लैंडस्लाइड हो गया, जिसके चलते करीब 200 यात्री रास्ते में फंस गए। हरियाणा के अंबाला और झज्जर में भी भारी बारिश के बाद हालात बिगड़ गए। कई सड़कें पानी में डूब गईं और दुकानों तक में बारिश का पानी पहुंच गया। बिहार-बंगाल में बिजली गिरने से 11 मौतें बिहार और पश्चिम बंगाल में मौसम ने अचानक करवट ली। तेज बारिश और गरज-चमक के बीच अलग-अलग स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हुईं। इन हादसों में 11 लोगों की जान चली गई। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर मौजूद लोगों के लिए बिजली गिरना बड़ा खतरा बन गया। हादसों के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन ने स्थिति का जायजा लिया। लोगों को भी खराब मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। Badrinath Highway पर Landslide, 200 यात्री परेशान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश का असर सड़क यातायात पर पड़ा है। बद्रीनाथ हाईवे पर लैंडस्लाइड के बाद सड़क पर मलबा आ गया, जिससे रास्ता बाधित हो गया। इसके चलते करीब 200 यात्री रास्ते में फंस गए। चारधाम यात्रा के दौरान इस तरह की घटनाएं यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ा देती हैं। सड़क पर मलबा हटाने और रास्ता खोलने के लिए संबंधित टीमें काम कर रही हैं। प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हालात पर नजर रखी जा रही है। Ambala और Jhajjar में बारिश से जलभराव हरियाणा में भी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अंबाला और झज्जर के कई इलाकों में तेज बारिश के बाद सड़कें पानी से भर गईं। कुछ जगहों पर स्थिति ऐसी हो गई कि सड़क और जलभराव का अंतर ही नजर नहीं आया। जलभराव का असर बाजारों पर भी पड़ा। कई दुकानों में पानी घुसने से व्यापारियों को परेशानी हुई। लोगों को अपने सामान को पानी से बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। सड़कों पर पानी भरने से वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। कई राज्यों में बारिश का असर, लोगों की बढ़ी चिंता देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई ये तस्वीरें बताती हैं कि मानसून इस बार कई जगहों पर चुनौती बनता नजर आ रहा है। बिहार और बंगाल में बिजली गिरने से जान का नुकसान हुआ, उत्तराखंड में लैंडस्लाइड ने यात्रियों की राह रोक दी और हरियाणा में जलभराव ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। बारिश के बीच सबसे जरूरी है कि लोग मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज न करें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए। वहीं आकाशीय बिजली और तेज बारिश के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना बेहतर है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में प्रशासन की टीमें स्थिति संभालने में जुटी हैं। लोगों को उम्मीद है कि मौसम में सुधार के साथ सड़कें जल्द साफ होंगी और जनजीवन भी सामान्य पटरी पर लौटेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मणिपुर के संगीतकार विक्रम सिंह की हत्या पर राहुल गांधी बोले- पहचान के आधार पर हिंसा चिंता की बात

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मणिपुर के दिवंगत संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विक्रम सिंह की हत्या को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि विक्रम को कथित तौर पर सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह मणिपुर से आते थे। उन्होंने कहा कि किसी युवा की हत्या अपने आप में बड़ी त्रासदी है, लेकिन किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के आधार पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है। राहुल बोले- हिंसा और नफरत का इस्तेमाल गलत राहुल गांधी ने कहा कि इस घटना में हिंसा साफ तौर पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि घटना में हिंसा, नफरत और अहंकार नजर आता है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी सोच बढ़ रही है कि अगर कोई व्यक्ति ताकतवर है तो वह दूसरे के खिलाफ हिंसा कर सकता है। राहुल गांधी ने इस रवैये को गलत बताते हुए कहा कि ताकत के आधार पर किसी के साथ हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। 8 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल विक्रम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने मंगलवार को 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, घटना 6 सितंबर 2026 की रात करीब 11:30 बजे दक्षिण दिल्ली के आश्रम इलाके में हुई। मणिपुर मूल के 54 वर्षीय संगीतकार विक्रम सिंह अपने घर के नीचे डिलीवरी बॉय और स्थानीय ढाबे के कर्मचारियों के बीच हो रहे कथित शोर और हंगामे पर आपत्ति जताने गए थे। आरोप है कि इसके बाद डिलीवरी बॉय और ढाबे के कर्मचारियों ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट की। आरोपियों ने कथित तौर पर बिल्डिंग के अंदर उनका तीन मंजिल तक पीछा किया और लात-घूंसों से हमला किया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में भारी आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि गुरुवार को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, विक्रम सिंह की मौत सीने और पेट पर गंभीर शारीरिक चोटों के कारण हुए भारी आंतरिक रक्तस्राव से हुई। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर भेदभाव के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भारत ने बांग्लादेश को 40 रन से हराया, 10वीं बार विमेंस एशिया कप के फाइनल में पहुंचा

दुबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विमेंस टी20 एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 149 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड 10वीं बार एशिया कप के फाइनल में प्रवेश किया। शेफाली वर्मा ने खेली शानदार पारी भारत की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर 24 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 21 रन का योगदान दिया। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 149 रन बनाए। दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी 150 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सकी। दीप्ति शर्मा ने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 विकेट लिए और बांग्लादेश के बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाए रखा। आखिरी ओवरों में नंदनी शर्मा ने भी महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी। बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन तक ही पहुंच सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। अब फाइनल पर भारत की नजर इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एशिया कप के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज कर रहा है और अब उसकी नजर खिताब जीतने पर होगी।

Apple ने लॉन्च किया फोल्डेबल iPhone Duo, कीमत 4.50 लाख तक; iPhone 18 Pro सीरीज भी आई

Apple ने बुधवार रात आयोजित लॉन्च इवेंट ‘Surprise and Shine’ में कई नए डिवाइस पेश किए। कंपनी ने पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है। इसके साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max समेत कुल 6 नए डिवाइस पेश किए गए। iPhone Duo को कंपनी का अब तक का सबसे महंगा iPhone बताया जा रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए तक जाती है। iPhone Duo में 7.6 इंच की मेन स्क्रीन फोल्डेबल iPhone Duo में बाहर की तरफ 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। फोन खोलने पर अंदर 7.6 इंच की मेन स्क्रीन मिलती है। कंपनी के मुताबिक, यह अब तक किसी भी iPhone में दिया गया सबसे बड़ा डिस्प्ले है। फोन में पहली बार डुअल-बैटरी सिस्टम दिए जाने की जानकारी है। इसके अलावा इसमें फिजिकल SIM कार्ड का विकल्प नहीं होगा। iPhone Duo केवल e-SIM के जरिए काम करेगा। भारत में iPhone Duo की बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। iPhone 18 Pro और Pro Max में DSLR जैसी कैमरा टेक्नोलॉजी Apple ने इस बार iPhone 18 सीरीज में केवल प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए हैं। इन दोनों मॉडल्स में सबसे ज्यादा जोर कैमरा सिस्टम पर दिया गया है। इनके मेन कैमरे में प्रोफेशनल DSLR कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी दिए जाने का दावा किया गया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए, जबकि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए रखी गई है। इन दोनों मॉडल्स की बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी। AirPods 5 और नई Apple Watch भी लॉन्च Apple के लॉन्च इवेंट में iPhone के अलावा AirPods 5, Apple Watch Series 12 और Watch Ultra 4 भी पेश किए गए। कंपनी के नए प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा चर्चा फोल्डेबल iPhone Duo की है, जिसे Apple के स्मार्टफोन लाइनअप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

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