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Pradeep Rawat

Pradeep Rawat Funeral: ‘गजनी’ के विलेन को आज दी जाएगी अंतिम विदाई, 2 बजे होगा अंतिम संस्कार

फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। ‘लगान’ और ‘गजनी’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले अभिनेता प्रदीप रावत (Pradeep Rawat) नहीं रहे। 74 साल की उम्र में मंगलवार शाम उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी शोक का माहौल है। परिवार और करीबी लोगों के लिए यह बेहद भावुक पल है। प्रदीप रावत को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 2 बजे होगी Pradeep Rawat की अंतिम विदाई प्रदीप रावत ने मंगलवार शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच अंतिम सांस ली। उनके मैनेजर के मुताबिक, अभिनेता पहले भी कैंसर से जंग लड़ चुके थे। कुछ समय पहले बीमारी दोबारा सामने आई, जिसके बाद उनका इलाज चल रहा था। बीमारी के बावजूद उन्होंने अपने करियर में लंबे समय तक काम किया और दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए रखी। अब उनके निधन के बाद परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें याद कर रहे हैं। ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा से घर-घर में पहचान प्रदीप रावत का एक्टिंग करियर फिल्मों तक सीमित नहीं था। टीवी के मशहूर धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा की भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने बड़े पर्दे का रुख किया और धीरे-धीरे अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाने लगे। गंभीर और नकारात्मक किरदारों में उनकी पकड़ खास तौर पर मजबूत मानी जाती थी। ‘लगान’ के देवा सिंह सोढ़ी को आज भी याद करते हैं दर्शक आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘लगान’ प्रदीप रावत के करियर की यादगार फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी और कलाकारों की टीम में उनका किरदार भले ही मुख्य भूमिका में नहीं था, लेकिन उनकी मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। ‘लगान’ की लोकप्रियता के साथ प्रदीप रावत भी बड़ी संख्या में दर्शकों के बीच पहचाने जाने लगे। ‘गजनी’ में विलेन बनकर छोड़ी अलग छाप प्रदीप रावत को सबसे ज्यादा चर्चा ‘गजनी’ के किरदार को लेकर मिली। आमिर खान स्टारर हिंदी फिल्म में उन्होंने विलेन की भूमिका निभाई थी। उनका अंदाज, आवाज और स्क्रीन पर दिखाई देने वाला रौबदार व्यक्तित्व इस किरदार की खासियत बना। यही वजह है कि आज भी जब ‘गजनी’ के यादगार विलेन की बात होती है, तो प्रदीप रावत का नाम जरूर लिया जाता है। Bollywood के साथ South फिल्मों में भी किया काम प्रदीप रावत ने सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही काम नहीं किया। उन्होंने Telugu, Tamil, Kannada और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया। उनके खाते में ‘सरफरोश’, ‘लगान’, ‘गजनी’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’ समेत कई चर्चित फिल्में हैं। साउथ इंडियन फिल्मों में भी उन्होंने कई प्रभावशाली किरदार निभाए और वहां के दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। साथी कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया। ‘लगान’ के को-स्टार यशपाल शर्मा ने भी अभिनेता के निधन पर दुख जताया और उनकी अंतिम विदाई से जुड़ी जानकारी साझा की। प्रदीप रावत का जाना सिर्फ एक अभिनेता का चले जाना नहीं है, बल्कि उन किरदारों की याद भी है जिन्हें उन्होंने अपनी आवाज और अंदाज से यादगार बना दिया। अश्वत्थामा से लेकर देवा सिंह सोढ़ी और ‘गजनी’ के विलेन तक, उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी। आज जब उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी, तब उनके चाहने वालों के जेहन में उनके वही दमदार किरदार और पर्दे पर उनका खास अंदाज जरूर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Parliament

Parliament Protest: चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का हल्ला बोल, Rahul Gandhi से मिले Kiren Rijiju

संसद (Parliament) परिसर में बुधवार को सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया, जब विपक्षी सांसदों ने चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने इन घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा और कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में नारेबाजी भी हुई, जिसका असर लोकसभा की कार्यवाही पर दिखाई दिया। विपक्षी सांसदों का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर वे प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार पर विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष की ओर से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया गया। Parliament परिसर में विपक्ष का Protest संसद परिसर में विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे और संबंधित घटनाओं को लेकर विरोध जताया। चढ़ावा चोरी के मामले और प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। नेताओं ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। हंगामे के बीच Lok Sabha की कार्यवाही प्रभावित विरोध प्रदर्शन का असर संसद के कामकाज पर भी पड़ा। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हुई। लगातार शोर-शराबे के बीच सदन को स्थगित करना पड़ा। संसद में इस तरह का गतिरोध कोई नया नहीं है, लेकिन इस बार विपक्ष ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन्हें लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से सदन चलने देने की अपील की जा रही है। Kiren Rijiju की Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi से मुलाकात इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है कि बैठक का उद्देश्य संसद की कार्यवाही को सुचारू बनाने और मौजूदा गतिरोध को कम करने की कोशिश से जुड़ा था। हालांकि, मुलाकात में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। विपक्ष और सरकार आमने-सामने संसद परिसर में हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान को सामने ला दिया है। विपक्ष लगातार अपने मुद्दों को संसद में उठाने और सरकार से जवाब मांगने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, सरकार के सामने चुनौती है कि सदन की कार्यवाही बिना व्यवधान के चले और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज पूरा हो। ऐसे में रिजिजू की विपक्षी नेताओं के साथ मुलाकात को गतिरोध कम करने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है। क्या है पूरा मामला? चढ़ावा चोरी और लाठीचार्ज से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई और सदन को स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए संसद में जारी गतिरोध को खत्म किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

UPI Payment पर लगेगा Charge? ₹2000 से ऊपर Transaction पर 0.40% Fee की चर्चा

UPI ने आम आदमी की जिंदगी में डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक, आज कुछ सेकंड में मोबाइल से भुगतान हो जाता है। ऐसे में अगर UPI Transaction पर चार्ज की व्यवस्था आती है, तो इसका असर सीधे करोड़ों लोगों और कारोबारियों पर पड़ सकता है। दरअसल, ₹2,000 से ज्यादा के UPI Transaction पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसमें अधिकतम 0.40 फीसदी तक शुल्क लगाए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। शुल्क कब और किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, यह आधिकारिक नियम आने के बाद ही साफ होगा। ₹2000 से ज्यादा के UPI Payment पर क्या बदलेगा? प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Payment को शुल्क के दायरे में लाने की बात सामने आई है। इसका मकसद छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट को प्रभावित किए बिना बड़े ट्रांजैक्शन से जुड़े खर्च की भरपाई के लिए नया मॉडल तैयार करना हो सकता है। यानी अगर कोई व्यक्ति छोटी रकम का भुगतान करता है, तो उस पर अलग व्यवस्था हो सकती है। वहीं बड़े भुगतान के लिए MDR लागू किए जाने की संभावना है। क्या हर UPI Transaction पर 0.40% Charge लगेगा? नहीं, फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। 0.40% को संभावित अधिकतम MDR दर के तौर पर बताया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ₹2,000 से ज्यादा के UPI Payment पर अनिवार्य रूप से 0.40% चार्ज लगेगा। अंतिम नियमों में यह तय होगा कि शुल्क की दर कितनी होगी, कौन-से ट्रांजैक्शन इसके दायरे में आएंगे और भुगतान का बोझ ग्राहक या व्यापारी में से किस पर पड़ेगा। MDR Charge क्या होता है? MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट को स्वीकार करने वाले कारोबारी से पेमेंट सिस्टम के तहत लिया जा सकता है। UPI के मामले में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने की लागत की भरपाई किस तरह की जाए। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे सिस्टम पार्टनर इसके संचालन से जुड़े खर्च उठाते हैं। इसी वजह से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। ₹10,000 के UPI Payment पर कितना Charge हो सकता है? मान लीजिए किसी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR लागू होता है। ऐसे में ₹10,000 के भुगतान पर गणना के हिसाब से शुल्क करीब ₹40 बनता है। लेकिन इसे केवल उदाहरण के तौर पर समझना चाहिए। वास्तविक स्थिति में शुल्क की दर, टैक्स और अन्य नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम व्यवस्था लागू होने के बाद ही सही रकम स्पष्ट होगी। आम UPI Users को सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या UPI से पैसा भेजते समय सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से चार्ज काटा जाएगा? जरूरी नहीं। MDR का संबंध मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम से जुड़ी शुल्क व्यवस्था से होता है। इसलिए MDR की चर्चा का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक को UPI Payment करते समय अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। हालांकि, भविष्य में अगर शुल्क व्यवस्था बदली जाती है, तो इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नियम किस तरह तैयार किए जाते हैं। छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर क्या होगा असर? UPI का सबसे बड़ा फायदा यही रहा है कि छोटे कारोबारी भी बिना कैश के भुगतान ले सकते हैं। किराना दुकान, सब्जी वाला, रेस्टोरेंट या स्थानीय दुकानदार—हर जगह QR Code से भुगतान करना आसान हो गया है। अगर ₹2,000 की सीमा के आधार पर नया मॉडल बनाया जाता है, तो छोटे मूल्य वाले पेमेंट को इससे बाहर रखने की कोशिश की जा सकती है। इससे रोजाना होने वाले छोटे UPI Transactions पर असर सीमित रह सकता है। हालांकि, कारोबारियों के लिए बड़े भुगतान पर शुल्क का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा। यही वजह है कि अंतिम नियम आने के बाद मर्चेंट और ग्राहक दोनों की प्रतिक्रिया अहम होगी। UPI पर Charge लगाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? भारत में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इतने बड़े नेटवर्क को संचालित करने में तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग सिस्टम और पेमेंट कंपनियों की लागत भी जुड़ी होती है। ऐसे में UPI को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए Revenue Model पर चर्चा होती रही है। MDR इसी बहस का एक संभावित हिस्सा है। अभी UPI Users को क्या करना चाहिए? फिलहाल UPI Payment को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 0.40% तक MDR की बात एक प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में सामने आई है। इसे हर UPI Payment पर लागू हो चुका नियम समझना सही नहीं होगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि शुल्क किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसका भुगतान कौन करेगा। UPI ने भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका ही बदल दिया है। ऐसे में किसी भी तरह की Fee या MDR व्यवस्था का असर बड़ा हो सकता है। ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर संभावित 0.40% तक MDR Charge की चर्चा इसी वजह से महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम नियम क्या होते हैं और सरकार किस तरह छोटे पेमेंट, आम ग्राहकों और कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन बनाती है।
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Monsoon

Monsoon का कहर: UP-Jharkhand में 17 मौतें, Uttarakhand-Himachal में 300 Roads बंद

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) अब राहत से ज्यादा आफत बनता नजर आ रहा है। कहीं तेज बारिश के बीच बिजली गिरने से लोगों की जान जा रही है, तो कहीं पहाड़ दरकने से सड़कें बंद हो गई हैं। उत्तर प्रदेश और झारखंड में बारिश व आकाशीय बिजली से 17 लोगों की मौत की खबर है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जगह Landslide हुआ है, जिससे करीब 300 सड़कें प्रभावित हुई हैं। केरल में भी बारिश से हालात चिंताजनक बने हुए हैं और पिछले चार दिनों में 25 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। UP-Jharkhand में बारिश और बिजली बनी जानलेवा उत्तर प्रदेश और झारखंड के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अलग-अलग घटनाओं में 17 लोगों की जान चली गई। बारिश के दौरान बिजली गिरने की घटनाओं ने खासकर ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम खराब होने पर लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन भी प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। Himachal और Uttarakhand में Landslide से रास्ते बंद पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश का असर और ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश के कारण कई जगह पहाड़ों से मलबा सड़कों पर आ गया, जिसके चलते यातायात रोकना पड़ा। जानकारी के मुताबिक करीब 300 सड़कें बंद हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सड़कें खोलने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। बारिश के बीच पहाड़ी रास्तों पर सफर करना भी जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों से मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की अपील की जा रही है। Kerala में भी बारिश का कहर, 4 दिन में 25 मौतें दक्षिण भारत में केरल भी भारी बारिश से प्रभावित है। राज्य में पिछले चार दिनों के दौरान बारिश से जुड़ी घटनाओं में 25 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। Monsoon ने बढ़ाई राज्यों की चिंता देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि इस समय मानसून का असर काफी तेज है। मैदानी राज्यों में जहां भारी बारिश और Lightning लोगों के लिए खतरा बनी हुई है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में Landslide और सड़क बंद होने से सामान्य जीवन प्रभावित है। सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में है जहां बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। सड़कें बंद होने से जरूरी सेवाओं और आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन Alert, लोगों से सावधानी बरतने की अपील बारिश और प्राकृतिक घटनाओं को देखते हुए प्रभावित राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। बंद सड़कों को जल्द खोलने और जरूरत पड़ने पर लोगों तक राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मौसम खराब होने के दौरान लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory पर ध्यान देने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी इलाकों में बिना जरूरी काम के यात्रा से बचना बेहतर होगा। मानसून के इस दौर में देश के कई राज्यों में मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूपी और झारखंड में बिजली गिरने से हुई मौतों से लेकर हिमाचल-उत्तराखंड में Landslide और केरल में बारिश से हुई मौतों तक, हालात पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और सरकारी Advisory का पालन करने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JPSC

JPSC Protest: 4 दिन बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा जल उपवास, Sonam Wangchuk से हुई Live बातचीत

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना Water Fast तोड़ दिया। करीब चार दिन तक बिना अन्न और जल के अनशन पर रहने के बाद सोनम वांगचुक से Live बातचीत हुई। इसके बाद उनकी अपील मानते हुए महतो ने पानी ग्रहण किया। हालांकि, Water Fast खत्म होने का मतलब आंदोलन खत्म होना नहीं है। छात्रों की मांगें अभी भी बरकरार हैं और देवेंद्र महतो भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। Sonam Wangchuk से बातचीत के बाद बदला फैसला देवेंद्र महतो के लगातार जल उपवास को लेकर समर्थकों और छात्रों में चिंता बढ़ रही थी। इसी बीच सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। बातचीत के दौरान वांगचुक ने महतो से अपनी सेहत का ध्यान रखने और Water Fast समाप्त करने की अपील की। सोनम वांगचुक की बात सुनने के बाद देवेंद्र महतो ने पानी पीकर अपना जल उपवास समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों ने भी राहत की सांस ली। लेकिन महतो ने साफ किया कि छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनका विरोध JPSC-JSSC परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी है। JPSC परीक्षा को लेकर क्यों नाराज हैं छात्र? रांची में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य वजह 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठे सवाल हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों की मांग है कि अगर जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की मांग भी उठ रही है। JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी छात्रों के बीच नाराजगी है। यही वजह है कि आंदोलन अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। CBI जांच की मांग ने बढ़ाई हलचल प्रदर्शनकारी छात्र मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े कई लोगों की ओर से CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है, इसलिए किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। CID जांच भी बनी चर्चा का विषय इस मामले में राज्य की जांच एजेंसी CID की कार्रवाई भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान पूछताछ और छापेमारी जैसी कार्रवाई की गई है। मामले से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय होना जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। फिलहाल छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने लाई जाए। कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय नाम रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं, छात्रों की समस्याओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर वह पहले भी आवाज उठाते रहे हैं। मौजूदा JPSC-JSSC आंदोलन में भी उनकी भूमिका प्रमुख रही है। लंबे Water Fast के कारण वह इस प्रदर्शन का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे। सोनम वांगचुक से उनकी बातचीत के बाद जल उपवास खत्म करने का फैसला भी आंदोलन के बीच काफी चर्चा में रहा। रांची में जारी है छात्रों का आंदोलन रांची में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर नियुक्ति युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दों में से है। देवेंद्र महतो के Water Fast खत्म करने के बाद अब आंदोलन की अगली रणनीति पर सबकी नजर है। एक तरफ महतो ने स्वास्थ्य को देखते हुए जल उपवास खत्म किया है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की मुख्य मांगें अभी भी जस की तस हैं। आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। अगर जांच को लेकर कोई ठोस फैसला होता है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर प्रदर्शन आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक बात फिलहाल साफ है—देवेंद्र महतो का Water Fast भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन JPSC-JSSC को लेकर छात्रों की नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है। अब नजर सरकार के अगले कदम और जांच की दिशा पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meta

Meta पर बढ़ा Pressure: PM मोदी का Video हटाने पर संसदीय पैनल सख्त, Zuckerberg से जवाब तलब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक Facebook Video कुछ समय के लिए हटाए जाने का मामला अब Meta के लिए मुश्किलें बढ़ाता नजर आ रहा है। वीडियो दोबारा बहाल किए जाने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। संसदीय समिति ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta से जवाब मांगा है और कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) से माफी की मांग भी सामने आई है। मामला केवल एक वीडियो के हटने तक सीमित नहीं रह गया है। अब सवाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, Content Moderation Policy और भारत में मिलने वाली Safe Harbour Protection को लेकर भी उठ रहे हैं। आखिर क्या है पूरा मामला? दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो Facebook पर पोस्ट किया गया था। यह वीडियो छात्रों और युवाओं से जुड़े एक अहम मुद्दे के संदर्भ में था। कुछ समय बाद यह वीडियो भारतीय यूजर्स के लिए Facebook पर उपलब्ध नहीं रहा। वीडियो के हटने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार और संसदीय स्तर पर Meta से जवाब मांगा गया। मामला बढ़ने पर कंपनी ने सफाई दी कि वीडियो को गलती से हटा दिया गया था। बाद में इसे प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया। Meta की ओर से इसे किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई के बजाय एक तकनीकी या मॉडरेशन संबंधी गलती बताया गया। लेकिन समिति इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आई। Zuckerberg से माफी की मांग क्यों? वीडियो हटाए जाने के मामले को लेकर संसदीय समिति ने Meta के कामकाज और उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। समिति की ओर से मार्क जुकरबर्ग से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने की बात कही गई है। समिति का तर्क है कि किसी बड़े सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा कंटेंट अगर प्लेटफॉर्म से हटता है, तो इसे महज एक सामान्य तकनीकी गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह जानना जरूरी है कि वीडियो किस वजह से हटाया गया और इस फैसले के पीछे कौन-सी प्रक्रिया काम कर रही थी। यही वजह है कि अब Meta से सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि Accountability की भी मांग की जा रही है। Safe Harbour Protection पर क्यों उठे सवाल? इस विवाद का सबसे अहम पहलू Meta को मिलने वाली Safe Harbour Protection है। भारत में Information Technology कानून के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को कुछ परिस्थितियों में यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी सुरक्षा मिलती है। लेकिन इस सुरक्षा के साथ प्लेटफॉर्म की कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। ऐसे में अगर किसी प्लेटफॉर्म की Content Moderation प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते हैं, तो उसकी जवाबदेही पर बहस होना स्वाभाविक है। संसदीय समिति की ओर से संकेत दिया गया है कि Meta को इस पूरे मामले पर गंभीरता से जवाब देना होगा। यही वजह है कि Safe Harbour को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सरकार भी Meta से मांग सकती है जवाब मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार की ओर से Meta के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब लेने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है। बातचीत में प्रधानमंत्री के वीडियो के अलावा प्लेटफॉर्म की Content Moderation व्यवस्था और अन्य डिजिटल कंटेंट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। सरकार यह जानना चाहती है कि Meta के प्लेटफॉर्म पर किसी महत्वपूर्ण पोस्ट को हटाने का फैसला किस स्तर पर लिया जाता है और ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए कंपनी की तरफ से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। Meta के सामने अब सबसे बड़ा सवाल Meta के लिए चुनौती सिर्फ इस विवाद को खत्म करना नहीं है। कंपनी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि आखिर ऐसा कौन-सा सिस्टम था जिसकी वजह से प्रधानमंत्री से जुड़ा वीडियो हट गया। अगर कंपनी इसे तकनीकी गलती बता रही है, तो यह सवाल भी उठता है कि भविष्य में ऐसी गलती रोकने के लिए क्या व्यवस्था बदली जाएगी। सोशल मीडिया आज केवल मनोरंजन या बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। राजनीतिक बयान, सरकारी घोषणाएं और सार्वजनिक बहस का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं प्लेटफॉर्म पर होता है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण पोस्ट के हटने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आगे क्या होगा? फिलहाल वीडियो वापस Facebook पर आ चुका है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संसदीय समिति की सख्ती और सरकार की ओर से Meta के अधिकारियों से जवाब मांगने के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चा में रह सकता है। अब नजर इस बात पर है कि Meta इस पूरे मामले पर आगे क्या जवाब देता है और क्या कंपनी की ओर से इस घटना को लेकर औपचारिक रूप से जिम्मेदारी तय करने या माफी की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है। कुल मिलाकर, PM Modi Video Removal Case ने एक बार फिर भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और Content Moderation Policy को बहस के केंद्र में ला दिया है। मामला भले एक वीडियो से शुरू हुआ हो, लेकिन अब चर्चा इससे कहीं आगे पहुंच चुकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Repo Rate

RBI का बड़ा फैसला: Repo Rate नहीं बदला, Home Loan और EMI पर राहत के लिए करना होगा इंतजार

RBI Repo Rate को लेकर आम लोगों को इस बार भी राहत नहीं मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में Repo Rate को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। यानी फिलहाल Home Loan, Car Loan और दूसरे Floating Rate Loans की EMI कम होने की उम्मीद पर ब्रेक लग गया है। बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि Repo Rate में कटौती होने पर बैंकों के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना रहती है। इसका फायदा आगे चलकर ग्राहकों को कम ब्याज दर और कम EMI के रूप में मिल सकता है। लेकिन इस बार दरों में बदलाव नहीं होने से ऐसी राहत तत्काल नहीं मिलने वाली। Loan की EMI पर क्या पड़ेगा असर? अगर आपने पहले से Floating Rate पर Home Loan या कोई दूसरा कर्ज लिया हुआ है, तो RBI के इस फैसले के बाद EMI में तुरंत कमी की उम्मीद नहीं है। इसी तरह नया Loan लेने वालों को भी ब्याज दरों में बड़ी कटौती का फायदा फिलहाल नहीं मिलेगा। हालांकि, Loan की EMI केवल RBI के Repo Rate पर ही निर्भर नहीं करती। बैंक अपनी lending rates, loan की अवधि, ग्राहक की प्रोफाइल और अन्य परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दर तय करते हैं। इसलिए अलग-अलग ग्राहकों पर इसका असर अलग हो सकता है। RBI ने Rate Cut से क्यों बनाई दूरी? RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती महंगाई और Global Market में जारी अस्थिरता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और बाहरी आर्थिक परिस्थितियों का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बरतने का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक के लिए आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है। ऐसे माहौल में Repo Rate को स्थिर रखना एक संतुलित कदम माना जा रहा है। महंगाई पर RBI की नजर ब्याज दरों से जुड़े फैसले में Inflation की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। अगर महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों में जल्द कटौती करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी तरफ, अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और आर्थिक गतिविधियों को सहारे की जरूरत महसूस होती है, तो आगे चलकर Rate Cut की गुंजाइश बन सकती है। इसलिए आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़े RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगे। Home Loan लेने वालों को क्या करना चाहिए? RBI के फैसले के बाद मौजूदा Loan ग्राहकों को अपनी EMI और ब्याज दर की समीक्षा करनी चाहिए। अगर बैंक की ब्याज दर में भविष्य में कमी आती है तो ग्राहक अपने Loan की शर्तों के अनुसार इसका लाभ ले सकते हैं। नया Home Loan लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी सिर्फ Repo Rate देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। अलग-अलग बैंकों की Interest Rate, Processing Fee, Loan Tenure और अन्य शुल्कों की तुलना करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। आगे क्या उम्मीद? फिलहाल RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखकर इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाई है। अब बाजार की नजर महंगाई, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर रहेगी। अगर आने वाले समय में महंगाई का दबाव कम होता है और वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होती हैं, तो भविष्य में Repo Rate में कटौती की संभावना पर चर्चा फिर तेज हो सकती है। फिलहाल बैंक ग्राहकों को सस्ती EMI के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। RBI का फैसला एक नजर में हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Araghchi

Iran Power Struggle: Araghchi की छुट्टी की चर्चा, Pezeshkian कमजोर और IRGC मजबूत

ईरान की सियासत में इन दिनों सबकुछ सामान्य नहीं है। सत्ता के अलग-अलग केंद्रों के बीच खींचतान की खबरों ने एक बार फिर देश की राजनीति को चर्चा में ला दिया है। सबसे ज्यादा नजर विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) पर है। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विदेश मंत्री के पद से हटाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, अभी तक अराघची को हटाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इस खबर को फिलहाल दावे और मीडिया रिपोर्टों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने ईरान की सत्ता में चल रहे बड़े Power Struggle को जरूर सामने ला दिया है। Araghchi को हटाने की आखिर क्यों हो रही चर्चा? अब्बास अराघची ईरान की विदेश नीति के अहम चेहरों में शामिल हैं। अमेरिका के साथ बातचीत और दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार के भीतर कुछ लोगों को अराघची की कार्यशैली को लेकर आपत्ति है। दावा है कि अमेरिका के साथ बातचीत जैसे संवेदनशील मामलों में विदेश मंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच मतभेद सामने आए हैं। इसी के बाद अराघची को पद से हटाने की चर्चा तेज हुई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम फैसला लिया जा चुका है या नहीं। Pezeshkian की सरकार के सामने बढ़ी चुनौती ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की सरकार भी इस पूरे विवाद के केंद्र में है। पेजेश्कियान अपेक्षाकृत सुधारवादी रुख के लिए जाने जाते हैं और विदेश नीति में बातचीत तथा कूटनीति को अहमियत देते रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा तनाव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि देश के बड़े फैसलों में राष्ट्रपति सरकार की भूमिका कितनी है और सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव कितना बढ़ चुका है। यही सवाल अब ईरान की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। IRGC के बढ़ते प्रभाव की क्यों हो रही चर्चा? ईरान में IRGC सिर्फ एक सामान्य सैन्य संगठन नहीं है। देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय रणनीति और राजनीतिक व्यवस्था में इसका लंबे समय से प्रभाव रहा है। हालिया घटनाक्रमों के बाद कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि IRGC का प्रभाव और मजबूत हुआ है। खासकर युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के माहौल में सुरक्षा से जुड़े फैसलों में सैन्य नेतृत्व की भूमिका बढ़ने की बात कही जा रही है। अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो इसका सीधा असर ईरान की Foreign Policy पर पड़ सकता है। Supreme Leader की भूमिका सबसे अहम ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए Supreme Leader की भूमिका को समझना जरूरी है। राष्ट्रपति सरकार और प्रशासन का नेतृत्व करते हैं, लेकिन देश की सर्वोच्च राजनीतिक और सैन्य सत्ता Supreme Leader के पास रहती है। इसी वजह से राष्ट्रपति और विदेश मंत्री की राजनीतिक स्थिति को केवल सरकार के फैसलों से नहीं देखा जा सकता। ईरान में Supreme Leader, राष्ट्रपति कार्यालय और IRGC जैसे अलग-अलग Power Centres के बीच संतुलन बेहद अहम है। मौजूदा घटनाक्रम में इसी Power Balance को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका के साथ बातचीत बनी बड़ा मुद्दा अराघची का नाम अमेरिका के साथ बातचीत से भी जुड़ा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच किसी भी तरह की बातचीत देश की आंतरिक राजनीति में बेहद संवेदनशील मुद्दा बन जाती है। एक तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ ईरान के कट्टरपंथी और सुरक्षा से जुड़े धड़े अमेरिका के प्रति सख्त रुख रखने के पक्ष में रहे हैं। ऐसे माहौल में विदेश मंत्री की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए अराघची को लेकर सामने आई खबरों को ईरान की व्यापक Foreign Policy के संदर्भ में देखा जा रहा है। क्या राष्ट्रपति की Power सच में कम हो रही है? यह सवाल फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पेजेश्कियान अब भी राष्ट्रपति हैं और उनकी सरकार औपचारिक रूप से देश के प्रशासन को संभाल रही है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषणों में यह चर्चा जरूर बढ़ी है कि संकट के समय सुरक्षा और सैन्य संस्थानों का प्रभाव बढ़ सकता है। राष्ट्रपति की ताकत कमजोर होने और IRGC के ज्यादा प्रभावशाली होने के दावे भी इसी संदर्भ में सामने आए हैं। हालांकि, इन दावों के हर पहलू की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल ईरान की सत्ता में चल रहे Power Struggle के संकेत के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। Araghchi की कुर्सी का फैसला क्यों होगा अहम? अगर अराघची को वास्तव में विदेश मंत्री पद से हटा दिया जाता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान के विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यह संकेत मिल सकता है कि तेहरान आने वाले दिनों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बातचीत को लेकर अपनी रणनीति बदल रहा है। साथ ही यह भी साफ हो सकता है कि विदेश नीति में राष्ट्रपति सरकार की आवाज ज्यादा मजबूत है या सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ रहा है। फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन अराघची को लेकर उठी चर्चा ने ईरान की राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान को जरूर उजागर कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अराघची अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या ईरान की सत्ता में चल रहा यह Power Shift विदेश मंत्रालय में भी बड़ा बदलाव लेकर आता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar Politics में बड़ा सियासी ट्विस्ट, Bankipur हार के बाद PM Modi से मिले Nitish Kumar

Bihar की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट के नतीजे के बाद हलचल बढ़ गई है। बीजेपी को मिली हार के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद भवन में हुई। इसके बाद बिहार की सियासत में इस बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बांकीपुर का चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में नीतीश कुमार का पीएम मोदी से मिलना राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। Bankipur Result के बाद हुई अहम मुलाकात बांकीपुर सीट का नतीजा सामने आने के बाद बीजेपी और एनडीए के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया। संसद भवन में हुई इस मुलाकात को बिहार के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि चुनावी नतीजों के बाद एनडीए की आगे की रणनीति क्या रहती है। BJP की हार ने खड़े किए कई सवाल बांकीपुर को पटना की अहम विधानसभा सीटों में माना जाता है। यहां बीजेपी की हार के बाद पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव परिणाम को लेकर विपक्ष भी एनडीए पर निशाना साध रहा है और इसे बिहार की राजनीति में बदलते माहौल का संकेत बता रहा है। हालांकि, किसी एक सीट के परिणाम को पूरे राज्य की राजनीति का सीधा संकेत मानना सही नहीं होगा। फिर भी बांकीपुर का नतीजा बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय जरूर बन गया है। Nitish Kumar और PM Modi की बैठक पर टिकी नजरें नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बिहार में चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक में किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर चर्चा हुई। फिलहाल इतना जरूर है कि बांकीपुर के नतीजे के बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की Politics को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। आगे क्या होगी NDA की रणनीति? बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू लंबे समय से महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। चुनावी नतीजों के बाद दोनों दलों के लिए आगे की रणनीति तय करना अहम होगा। खासकर उन सीटों पर पार्टी संगठन और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है जहां उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए। अब सबकी नजरें आने वाले राजनीतिक बयानों और एनडीए की अगली गतिविधियों पर हैं। बांकीपुर का नतीजा और उसके बाद नीतीश कुमार की पीएम मोदी से मुलाकात फिलहाल बिहार की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Air India

Air India Flight Turbulence: फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में जोरदार झटके, 12 यात्री घायल

फुकेट से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट उस वक्त मुश्किल में फंस गई, जब उड़ान के दौरान विमान को अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। हवा में लगे जोरदार झटकों से विमान के अंदर बैठे यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना में करीब 12 यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। टर्बुलेंस के दौरान विमान को कई बार तेज झटके महसूस हुए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि विमान के अंदर की सीलिंग में भी दरारें आने की बात सामने आई है। हालांकि, पायलट ने हालात को संभालते हुए फ्लाइट को सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कराया। अचानक लगे झटकों से घबराए यात्री फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद फ्लाइट सामान्य रूप से अपने सफर पर थी। इसी दौरान रास्ते में विमान अचानक तेज हवा के प्रभाव में आ गया। देखते ही देखते विमान में जोरदार झटके महसूस होने लगे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से यात्रियों में घबराहट बढ़ गई। जिन यात्रियों को चोटें आईं, उन्हें दिल्ली पहुंचने के बाद मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। घटना के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति को लेकर जरूरी इंतजाम किए गए। विमान की सीलिंग में आई दरार इस घटना में सबसे ज्यादा ध्यान विमान के अंदर हुए नुकसान ने खींचा है। तेज टर्बुलेंस के बाद विमान की सीलिंग में दरार आने की जानकारी सामने आई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उड़ान के दौरान हवा के झटके कितने तेज रहे होंगे। दिल्ली में लैंडिंग के बाद विमान की तकनीकी स्थिति की जांच की जा रही है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि टर्बुलेंस के कारण विमान के किन हिस्सों को नुकसान पहुंचा और उसकी गंभीरता कितनी थी। पायलट ने संभाली स्थिति, दिल्ली में सुरक्षित Landing तेज टर्बुलेंस के बावजूद फ्लाइट के पायलट और क्रू ने स्थिति को संभाले रखा। विमान को सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा गया। लैंडिंग के बाद घायल यात्रियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता दी गई। यात्रियों के लिए विमान में सीट बेल्ट बांधकर रखना ऐसे हालात में बेहद महत्वपूर्ण होता है। टर्बुलेंस कब और कितनी तेजी से आएगा, इसका हमेशा सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं होता। क्या होता है Turbulence? टर्बुलेंस दरअसल हवा के प्रवाह में अचानक होने वाला बदलाव है। जब विमान अलग-अलग गति या दिशा से चल रही हवा के क्षेत्र से गुजरता है, तो यात्रियों को विमान में झटके महसूस हो सकते हैं। हल्का टर्बुलेंस आमतौर पर सामान्य माना जाता है, लेकिन तेज टर्बुलेंस में यात्रियों को चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। यही वजह है कि उड़ान के दौरान सीट बेल्ट बांधे रखने की सलाह दी जाती है। Air India Flight Incident पर नजर फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में हुई इस घटना ने एक बार फिर विमान यात्रा के दौरान Turbulence Safety को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। फिलहाल यात्रियों के घायल होने और विमान को हुए नुकसान से जुड़ी जानकारी सामने आ रही है। घटना की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल राहत की बात यह रही कि तेज झटकों के बावजूद फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कर गई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मणिपुर के संगीतकार विक्रम सिंह की हत्या पर राहुल गांधी बोले- पहचान के आधार पर हिंसा चिंता की बात

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मणिपुर के दिवंगत संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने विक्रम सिंह की हत्या को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि विक्रम को कथित तौर पर सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह मणिपुर से आते थे। उन्होंने कहा कि किसी युवा की हत्या अपने आप में बड़ी त्रासदी है, लेकिन किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के आधार पर हमला होना भी गंभीर चिंता का विषय है। राहुल बोले- हिंसा और नफरत का इस्तेमाल गलत राहुल गांधी ने कहा कि इस घटना में हिंसा साफ तौर पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि घटना में हिंसा, नफरत और अहंकार नजर आता है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी सोच बढ़ रही है कि अगर कोई व्यक्ति ताकतवर है तो वह दूसरे के खिलाफ हिंसा कर सकता है। राहुल गांधी ने इस रवैये को गलत बताते हुए कहा कि ताकत के आधार पर किसी के साथ हिंसा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। 8 आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग भी शामिल विक्रम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने मंगलवार को 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, घटना 6 सितंबर 2026 की रात करीब 11:30 बजे दक्षिण दिल्ली के आश्रम इलाके में हुई। मणिपुर मूल के 54 वर्षीय संगीतकार विक्रम सिंह अपने घर के नीचे डिलीवरी बॉय और स्थानीय ढाबे के कर्मचारियों के बीच हो रहे कथित शोर और हंगामे पर आपत्ति जताने गए थे। आरोप है कि इसके बाद डिलीवरी बॉय और ढाबे के कर्मचारियों ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट की। आरोपियों ने कथित तौर पर बिल्डिंग के अंदर उनका तीन मंजिल तक पीछा किया और लात-घूंसों से हमला किया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में भारी आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि गुरुवार को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, विक्रम सिंह की मौत सीने और पेट पर गंभीर शारीरिक चोटों के कारण हुए भारी आंतरिक रक्तस्राव से हुई। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। घटना को लेकर हिंसा और पहचान के आधार पर भेदभाव के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

भारत ने बांग्लादेश को 40 रन से हराया, 10वीं बार विमेंस एशिया कप के फाइनल में पहुंचा

दुबई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विमेंस टी20 एशिया कप के पहले सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 40 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 149 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ भारत ने रिकॉर्ड 10वीं बार एशिया कप के फाइनल में प्रवेश किया। शेफाली वर्मा ने खेली शानदार पारी भारत की ओर से शेफाली वर्मा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 64 रन बनाए। उनकी पारी में 7 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। शेफाली की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर 24 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 21 रन का योगदान दिया। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 149 रन बनाए। दीप्ति शर्मा की शानदार गेंदबाजी 150 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सकी। दीप्ति शर्मा ने 4 ओवर में 26 रन देकर 3 विकेट लिए और बांग्लादेश के बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाए रखा। आखिरी ओवरों में नंदनी शर्मा ने भी महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारत की जीत पक्की कर दी। बांग्लादेश की टीम 20 ओवर में 109 रन तक ही पहुंच सकी और भारत ने मुकाबला 40 रन से अपने नाम कर लिया। अब फाइनल पर भारत की नजर इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एशिया कप के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज कर रहा है और अब उसकी नजर खिताब जीतने पर होगी।

Apple ने लॉन्च किया फोल्डेबल iPhone Duo, कीमत 4.50 लाख तक; iPhone 18 Pro सीरीज भी आई

Apple ने बुधवार रात आयोजित लॉन्च इवेंट ‘Surprise and Shine’ में कई नए डिवाइस पेश किए। कंपनी ने पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है। इसके साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max समेत कुल 6 नए डिवाइस पेश किए गए। iPhone Duo को कंपनी का अब तक का सबसे महंगा iPhone बताया जा रहा है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 3 लाख रुपए है, जबकि टॉप मॉडल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए तक जाती है। iPhone Duo में 7.6 इंच की मेन स्क्रीन फोल्डेबल iPhone Duo में बाहर की तरफ 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। फोन खोलने पर अंदर 7.6 इंच की मेन स्क्रीन मिलती है। कंपनी के मुताबिक, यह अब तक किसी भी iPhone में दिया गया सबसे बड़ा डिस्प्ले है। फोन में पहली बार डुअल-बैटरी सिस्टम दिए जाने की जानकारी है। इसके अलावा इसमें फिजिकल SIM कार्ड का विकल्प नहीं होगा। iPhone Duo केवल e-SIM के जरिए काम करेगा। भारत में iPhone Duo की बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। iPhone 18 Pro और Pro Max में DSLR जैसी कैमरा टेक्नोलॉजी Apple ने इस बार iPhone 18 सीरीज में केवल प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max लॉन्च किए हैं। इन दोनों मॉडल्स में सबसे ज्यादा जोर कैमरा सिस्टम पर दिया गया है। इनके मेन कैमरे में प्रोफेशनल DSLR कैमरों जैसी टेक्नोलॉजी दिए जाने का दावा किया गया है। भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए, जबकि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए रखी गई है। इन दोनों मॉडल्स की बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी। AirPods 5 और नई Apple Watch भी लॉन्च Apple के लॉन्च इवेंट में iPhone के अलावा AirPods 5, Apple Watch Series 12 और Watch Ultra 4 भी पेश किए गए। कंपनी के नए प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा चर्चा फोल्डेबल iPhone Duo की है, जिसे Apple के स्मार्टफोन लाइनअप में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

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