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नर्मदापुरम में 28 करोड़ की सरकारी मूंग घोटाला: मिट्टी से भरी मिलीं बोरियां, जिला प्रबंधक समेत 3 पर FIR

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सरकारी मूंग के भंडारण में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सरकारी मूंग की बोरियों में मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ मिलाए जाने का मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में शासन को करीब 28.14 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। जांच में मिट्टी से भरी मिलीं बोरियां माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में रखी सरकारी मूंग की शिकायत मिलने पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर 22 जुलाई को गठित जांच दल ने औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान वेयरहाउस में रखे 23 स्टैक में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। कई बोरियों में निर्धारित सीमा से अधिक मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ पाए गए, जबकि कुछ बोरियां पूरी तरह मिट्टी से भरी हुई थीं। मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया और स्टॉक के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। 31 हजार क्विंटल से अधिक सरकारी मूंग प्रभावित जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान मार्कफेड और नाफेड की करीब 31,298.89 क्विंटल सरकारी मूंग में मिलावट की गई। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इससे शासन को लगभग 28.14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिला प्रबंधक समेत तीन लोगों पर FIR जांच रिपोर्ट के आधार पर कनकधारा वेयरहाउस के संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे को लापरवाही और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का जिम्मेदार माना गया है। जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन की शिकायत पर माखननगर थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पहले भी ब्लैकलिस्ट हो चुका था वेयरहाउस जांच में यह भी सामने आया कि जिस कनकधारा वेयरहाउस में यह गड़बड़ी मिली, उसे लगभग एक वर्ष पहले भी अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था। उस समय जांच समिति में जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे भी शामिल थे। इसके बावजूद दोबारा सरकारी मूंग के भंडारण में गंभीर गड़बड़ी सामने आने से निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अन्य वेयरहाउसों की भी होगी जांच एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिले के अन्य वेयरहाउसों का भी चरणबद्ध तरीके से निरीक्षण और जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके। आरोपी वेयरहाउस संचालक अस्पताल में भर्ती एफआईआर में नामजद वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित फिलहाल एक निजी हार्ट केयर अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के अनुसार वे पिछले तीन दिनों से उपचाराधीन हैं। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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MP में बिल्डिंग परमिशन के नियम आसान: अब नहीं देनी होगी कई NOC, पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति (Building Permission) की प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब बिल्डिंग परमिशन के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। साथ ही पूरी भवन अनुज्ञा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आवेदन के लिए केवल डिजिटल दस्तावेज ही मान्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा सभी नगरीय निकायों को जारी निर्देशों के अनुसार, इस व्यवस्था से नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भवन अनुमति प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनेगी, जिससे प्रदेश में Ease of Doing Business को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नई व्यवस्था के तहत भवन अनुज्ञा के लिए आवेदन, भवन का नक्शा और अन्य आवश्यक दस्तावेज केवल ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। किसी भी स्थिति में हार्ड कॉपी जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यदि भूमि स्वामी स्वयं आवेदन करता है तो उसे ऑनलाइन शपथ-पत्र देना होगा। वहीं, अधिकृत कंसल्टेंट के माध्यम से आवेदन करने पर भूमि स्वामी के हस्ताक्षरित शपथ-पत्र की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। इन मामलों में ही लगेगी NOC की जरूरत सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में आवश्यक होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य सभी मामलों में इन विभागों की अनापत्ति की जरूरत नहीं होगी। हाउसिंग सोसायटी, बिजली और नजूल विभाग से भी राहत नए निर्देशों के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, बिजली विभाग और नजूल विभाग से मांगी जाने वाली कई अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में आवेदकों को स्वयं NOC लाने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा और विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी सहमति या आपत्ति दर्ज करनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आगे की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। पर्यावरण और फायर NOC के नियम भी हुए आसान नए निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति अब केवल निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी, जहां वास्तव में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित होगी। अग्निशमन विभाग (Fire NOC) से संबंधित प्रक्रिया भी राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया और अधिक सरल एवं पारदर्शी बनेगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मंत्री बनने के सपने नहीं, जमीनी हकीकत में रहना चाहिए: धरमलाल कौशिक

बिलासपुर, देशहरपाल। छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर जारी चर्चाओं के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पद की अपेक्षा संगठन और जनता के प्रति जिम्मेदारी अधिक महत्वपूर्ण होती है। बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में शामिल हुए बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से जुड़े सवाल पर कहा, “मंत्री बनने के सपने देखने के बजाय जमीनी हकीकत में रहना चाहिए। मुझे मंत्री से भी बड़ा दायित्व विधानसभा अध्यक्ष के रूप में मिला था। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है और आज भी मैं विधायक एवं संगठन की जिम्मेदारी निभा रहा हूं।” विकास कार्यों का किया उल्लेख धरमलाल कौशिक ने कहा कि भाजपा सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल में बिल्हा विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने सड़क, सिंचाई, बिजली, शिक्षा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में लगातार प्रगति का दावा किया। उन्होंने बताया कि अरपा-भैंसाझार सिंचाई परियोजना अंतिम चरण में है, जिसके पूरा होने पर लगभग 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके अलावा पथरिया बैराज के लिए 55 करोड़ रुपये और दगौरी क्षेत्र में सिंचाई विस्तार के लिए 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मनियारी परियोजना पर भी तेजी से कार्य जारी है। 14 साल वकालत के बाद राजनीति में आए अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कौशिक ने बताया कि सार्वजनिक जीवन में आने से पहले उन्होंने करीब साढ़े 14 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इसके बाद संगठन और सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय बिलासपुर में हाईकोर्ट की स्थापना के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। साथ ही कहा कि क्षेत्र में 132 केवी, 220 केवी और 400 केवी विद्युत उपकेंद्र, सड़क नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिली है। ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ नहीं देखने चाहिए मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में कौशिक ने कहा कि राजनीति में केवल बड़े-बड़े सपने देखने से कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा, “मुंगेरीलाल के हसीन सपने नहीं देखने चाहिए। व्यक्ति को जमीनी हकीकत में रहना चाहिए। मुझे विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व मिले हैं। पार्टी ने मुझे बहुत सम्मान दिया है।” धरमलाल कौशिक के इस बयान को राजनीतिक हलकों में संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास में आस्था का अद्भुत संगम, कलश स्थापना की बोली पहुंची 53 करोड़ रुपये

जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और आस्था देखने को मिली। चातुर्मास के शुभ अवसर पर आयोजित कलश स्थापना की बोली में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी श्रद्धा का अनूठा परिचय दिया। कलश स्थापना का लाभ प्राप्त करने के लिए आयोजित बोली ने नया इतिहास रच दिया। बोली की राशि बढ़ते-बढ़ते 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसे जैन समाज में गुरु भक्ति, समर्पण और धार्मिक आस्था का अभूतपूर्व उदाहरण माना जा रहा है। बोली के दौरान लगातार बढ़ती राशि ने आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं को भी आश्चर्यचकित कर दिया। धार्मिक आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक बोली नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, गुरु के प्रति समर्पण और धर्म के प्रति विश्वास का प्रतीक है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, पूजा-अर्चना, तप, स्वाध्याय तथा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जैन धर्म में चातुर्मास को सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्वों में से एक माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु धर्म साधना, सेवा, तप और धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। मुनिश्री सुधासागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस वर्ष के चातुर्मास में भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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गुना के जंगल में तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिलने से सनसनी, शिकार कर अंगों की तस्करी की आशंका

मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिलने से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शव की हालत देखकर शिकार कर उसके अंगों की तस्करी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। मामला गुना उत्तर वन परिक्षेत्र की भदौरा सब रेंज के आगरा-हंसली जंगल का है। गुरुवार को जंगल में पहुंचे ग्रामीणों ने तेंदुए का शव पड़ा देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। वन अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए का शव बेहद क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। उसके चारों पैर और सिर गायब थे, जबकि केवल धड़ मौके पर पड़ा मिला। धड़ की खाल भी नहीं थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि तेंदुए का शिकार उसके नाखून, दांत और अन्य अंगों की तस्करी के उद्देश्य से किया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में वन्यजीव तस्करों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित शिकार का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने वन विभाग की गश्त व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि घटना के समय बीट गार्ड और गश्ती दल कहां मौजूद थे तथा तेंदुए के शव को इस हालत में किसने पहुंचाया। मामले की जानकारी मिलने पर गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने वन विभाग को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों की तलाश की जा रही है। गौरतलब है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत तेंदुए का शिकार एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है। दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जबलपुर: नाम और धर्म छिपाकर शादी का झांसा देने का आरोप, महिला आरक्षक की शिकायत पर वकील के खिलाफ केस दर्ज

मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ एक महिला आरक्षक ने एक अधिवक्ता पर नाम और धर्म छिपाकर शादी का झांसा देने, दुष्कर्म करने और धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला आरक्षक का आरोप है कि आरोपी ने खुद को “सौरभ सिंह राजपूत” बताकर उससे दोस्ती की, जबकि बाद में उसका वास्तविक नाम शोहराब शेख अख्तर होने की जानकारी मिली। महिला का कहना है कि शादी का भरोसा दिलाकर आरोपी ने कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। अब वह गर्भवती है, लेकिन आरोपी बच्चे को अपना मानने से इनकार कर रहा है। महिला ने डीएनए जांच कराने की भी मांग की है। कोर्ट में हुई थी मुलाकात पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2024 में कोर्ट में ड्यूटी के दौरान उसकी मुलाकात मक्का नगर निवासी अधिवक्ता से हुई थी। बातचीत के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने शादी का प्रस्ताव रखा। महिला ने उसे पहले ही बता दिया था कि वह तलाकशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। इसके बावजूद आरोपी ने शादी करने का भरोसा दिया। महिला का आरोप है कि आरोपी अक्सर वकील की वर्दी पहनकर उसके घर आता था, जिससे परिवार को भी उस पर विश्वास हो गया। बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से उसे पता चला कि आरोपी का नाम और धर्म दोनों अलग हैं तथा उसकी पहले से शादी हो चुकी है। मारपीट और गर्भपात का दबाव बनाने का आरोप महिला का आरोप है कि सच्चाई सामने आने के बाद जब उसने विरोध किया तो आरोपी और उसके परिजनों ने उसके साथ मारपीट की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया और अब गर्भपात कराने का दबाव बना रहा है। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां उससे धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करवाया गया। महिला का कहना है कि इसके बावजूद आरोपी ने शादी नहीं की और बाद में उससे दूरी बना ली। एक बच्चे की कस्टडी छोड़ने का भी आरोप महिला का दावा है कि आरोपी ने सरकारी नौकरी में अधिक बच्चों को लेकर परेशानी होने की बात कहकर उसे अपने एक बच्चे की अभिरक्षा (कस्टडी) पूर्व पति को देने के लिए भी तैयार किया। इसके लिए कोर्ट में प्रकरण भी दायर कराया गया। संगठन ने कार्रवाई की मांग की पीड़िता के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे एक सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। पुलिस ने शुरू की जांच सीएसपी भगत सिंह गठोरिया ने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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सेक्स सीडी कांड में भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, CBI कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर रोक

छत्तीसगढ़ के चर्चित सेक्स सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राजेश मूणत के कथित मॉर्फ्ड अश्लील वीडियो मामले में CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट में बघेल के खिलाफ कोई आगे की कार्रवाई नहीं होगी। न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने भूपेश बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया। बघेल ने 24 जनवरी 2026 को CBI की विशेष अदालत के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें मार्च 2025 में मिली डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) राहत को रद्द करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने के निर्देश दिए गए थे। वकील ने कोर्ट में रखी ये दलील भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि यदि ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया जारी रही, तो हाईकोर्ट में दायर याचिका का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए अंतिम निर्णय आने तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि CBI की विशेष अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर डिस्चार्ज आदेश को पलट दिया और आरोपों की प्रकृति में भी बदलाव किया, जबकि ऐसा निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा उचित समय पर लिया जाना चाहिए। क्या है पूरा मामला? यह मामला वर्ष 2017 का है। आरोप है कि तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत की छवि खराब करने के उद्देश्य से उनका एक कथित अश्लील मॉर्फ्ड वीडियो तैयार कर उसे प्रसारित किया गया था। मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में भूपेश बघेल समेत अन्य आरोपियों पर आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल और अश्लील सामग्री के प्रसार जैसे आरोप लगाए थे। पहले मिली थी डिस्चार्ज राहत मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए भूपेश बघेल को इस मामले से डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में CBI की विशेष अदालत ने उस आदेश को रद्द कर उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया, जिसके बाद बघेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि भूपेश बघेल कथित साजिश में शामिल थे। केवल सह-आरोपियों के साथ होटल में ठहरना किसी आपराधिक षड्यंत्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता। साथ ही गवाहों के बयानों से केवल इतना स्पष्ट होता है कि उन्होंने सह-आरोपी विनोद वर्मा की गिरफ्तारी के विरोध में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, न कि कथित सीडी के प्रसार में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका थी। इन दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट में कोई नई कार्रवाई नहीं होगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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बिलासपुर में किसान युवक की संदिग्ध मौत, घर के पीछे मिला शव; परिजनों ने प्रेम प्रसंग में हत्या की जताई आशंका

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक किसान युवक का शव उसके ही घर के पीछे स्थित बाड़ी में संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक के गले पर चोट के निशान मिलने के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि प्रेम प्रसंग के चलते युवक की हत्या की गई है। मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, ग्राम कौड़िया निवासी 28 वर्षीय चंद्रप्रकाश पटेल खेती-किसानी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वह शादीशुदा था और उसके चार बच्चे हैं। उसके पिता स्वर्गीय नान दाऊ पटेल थे। बताया जा रहा है कि बुधवार को परिवार के अन्य सदस्य खेत में काम करने गए हुए थे, जबकि चंद्रप्रकाश घर पर ही मौजूद था। शाम को जब परिजन वापस लौटे तो उन्होंने घर के पीछे स्थित बाड़ी में चंद्रप्रकाश का शव पड़ा देखा। घटना की सूचना तत्काल सीपत थाना पुलिस को दी गई। परिजनों का कहना है कि चंद्रप्रकाश का एक युवती से प्रेम प्रसंग था। उनका आरोप है कि इसी विवाद के चलते युवती और उसके परिजनों ने मिलकर उसकी हत्या की है। हालांकि, पुलिस ने अभी हत्या की पुष्टि नहीं की है और मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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इंदौर वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं से मारपीट का वीडियो वायरल, प्रशासन ने आश्रम सील करने की शुरू की कार्रवाई

इंदौर के एक वृद्धाश्रम में रह रही बुजुर्ग महिलाओं के साथ मारपीट का एक वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में करीब 14 वर्षीय एक किशोर डंडे से बुजुर्ग महिलाओं की पिटाई करता दिखाई दे रहा है। घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की बताई जा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका को थाने बुलाकर पूछताछ की। पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई के तहत उन्हें समझाइश देकर छोड़ दिया है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी हरकत में आ गया। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने वृद्धाश्रम पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रशासन ने बताया कि आश्रम में रह रहे 30 बुजुर्गों में से जो स्वस्थ हैं, उन्हें गांधी नगर स्थित निराश्रित आश्रम और गणेश वृद्धाश्रम में स्थानांतरित किया जा रहा है। वहीं जिन बुजुर्गों की तबीयत खराब है, उन्हें बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेजा जाएगा। प्रशासन ने वृद्धाश्रम को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें deshharpal.com
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भोपाल में किसानों काप्रदर्शनदूसरे दिन भी जारी, CM हाउस कूच की तैयारी; स्कूलों की छुट्टी, कई रास्ते बंद

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम और अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। बड़ी संख्या में किसान प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं और मुख्यमंत्री आवास (CM हाउस) की ओर कूच की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कई रास्तों पर बैरिकेडिंग, लोगों को हो रही परेशानी किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए हैं। इसका असर होशंगाबाद रोड और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां लोगों को लंबा जाम और यातायात की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों में छुट्टी घोषित स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड पर स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रदर्शन स्थल पर डटे किसान प्रदर्शन स्थल पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। रातभर धरने पर बैठे कई किसान जहां जगह मिली, वहीं आराम करते नजर आए। वहीं कुछ किसान दोपहर के भोजन के लिए दाल-बाटी बनाते दिखाई दिए। इससे आंदोलन स्थल पर एकजुटता और सामूहिक सहयोग का माहौल देखने को मिला। नेताओं को दिया साथ बैठकर भोजन का निमंत्रण प्रदर्शन कर रहे किसानों ने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक नेताओं से धरना स्थल पर पहुंचकर उनके साथ भोजन करने और उनकी समस्याएं सुनने की अपील की है। आंदोलन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। कई महिलाएं पोस्टरों पर नारे लिखकर किसानों की मांगों का समर्थन कर रही हैं।
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X पर अब लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे $1 की टिप, मस्क ने नए फीचर का किया ऐलान

नई दिल्ली। इलॉन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को फाइनेंशियल सर्विसेज से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं। मस्क ने ऐलान किया है कि X पर यूजर्स लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर की टिप भेज सकेंगे। यह पेमेंट कंपनी के फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म X मनी के जरिए किया जाएगा। मस्क ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि X मनी के माध्यम से किसी को भी 1 डॉलर भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस करने का विकल्प जोड़ा जा रहा है। कैसे काम करेगा नया टिपिंग फीचर? इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक या क्रिएटर को सीधे आर्थिक मदद दे सकेंगे। इसके लिए लाइक बटन को कुछ देर तक दबाना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट सिस्टम के जरिए 1 डॉलर ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है, ताकि यूजर्स को अलग से पेमेंट ऐप या लंबी प्रक्रिया का सहारा न लेना पड़े। हालांकि, X ने अभी तक इस फीचर के लॉन्च की तारीख और इसकी उपलब्धता से जुड़ी शर्तों की जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजर्स 1 डॉलर की तय रकम को बदल सकेंगे या भविष्य में अलग-अलग रकम भेजने के विकल्प भी मिलेंगे। क्या है X मनी और इसमें कौन-सी सुविधाएं हैं? X मनी, X का फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए यूजर्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, डिपॉजिट अकाउंट और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका पेमेंट और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्रॉस रिवर बैंक के साथ जुड़ा है। X मनी खुद बैंक नहीं है, बल्कि बैंकिंग पार्टनर के माध्यम से वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़ी सुविधाओं में पात्र डिपॉजिट पर ब्याज, खरीदारी पर कैशबैक और डेबिट कार्ड को Apple Pay से कनेक्ट करने जैसे विकल्प शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता यूजर की पात्रता और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। X को ‘एवरीथिंग ऐप’ बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘एवरीथिंग ऐप’ यानी सुपर ऐप के रूप में विकसित करना है, जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। X मनी के जरिए टिप भेजने का फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है। अगर यह सुविधा व्यापक स्तर पर शुरू होती है, तो क्रिएटर्स को अपने कंटेंट के जरिए सीधे आर्थिक सहयोग पाने का एक और माध्यम मिल सकता है। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी या नए टिपिंग फीचर को लॉन्च करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में पहले से ही UPI आधारित डिजिटल पेमेंट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में X मनी को भारत में वित्तीय सेवाएं शुरू करने के लिए देश के लागू बैंकिंग, भुगतान और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। क्या होता है ‘एवरीथिंग ऐप’? एवरीथिंग ऐप या सुपर ऐप ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें एक ही ऐप के जरिए कई तरह की सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग और बैंकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। चीन का WeChat इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां मैसेजिंग के साथ भुगतान और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं। मस्क X को भी इसी तरह का बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं।

पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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