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बिलासपुर में बायोगैस संयंत्रों पर प्रशासन का फोकस, स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

बिलासपुर जिले में स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन अब बायोगैस संयंत्रों के प्रभावी संचालन पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर Sanjay Agrawal और जिला पंचायत सीईओ Sandeep Agrawal ने तखतपुर जनपद पंचायत के ग्राम गनियारी स्थित बायोगैस (गोबर गैस) संयंत्र का निरीक्षण किया। गैस उत्पादन और जैविक खाद पर हुई चर्चा निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संयंत्र की कार्यप्रणाली, गैस उत्पादन क्षमता, गोबर की उपलब्धता और जैविक खाद निर्माण को लेकर चर्चा की। कलेक्टर ने कहा कि बायोगैस परियोजनाएं सिर्फ स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने का भी प्रभावी माध्यम हैं। गोबर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कलेक्टर ने गौठानों और पशुपालकों के माध्यम से गोबर की नियमित और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संयंत्र को पूरी क्षमता से चलाने के लिए कच्चे माल की लगातार आपूर्ति जरूरी है। इससे ग्रामीणों को भी अधिक लाभ मिल सकेगा। घरेलू ईंधन की जरूरत होगी पूरी अधिकारियों ने बताया कि बायोगैस संयंत्र से बनने वाली गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और सस्ता ईंधन उपलब्ध होगा। संयंत्र से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। जैविक खाद से किसानों को फायदा इससे खेती की लागत कम होगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाइप लाइन, वाल्व, डाइजेस्टर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आवश्यक सुधार कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। वहीं जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारियों को नियमित निगरानी और दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल प्रशासन का मानना है कि बायोगैस संयंत्रों के बेहतर संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक खेती को नई दिशा मिलेगी। इससे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी मजबूत होगा। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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बिलासपुर में युवक पर चाकू से जानलेवा हमला, पत्नी ने नकाब हटाकर आरोपी को पहचाना

बिलासपुर के तिफरा इलाके में रविवार रात एक युवक पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया। कुंदरापारा में रात करीब 10 बजे हुई इस घटना में नकाबपोश हमलावर ने युवक की पीठ और पेट पर कई वार किए। घटना के दौरान युवक की पत्नी ने साहस दिखाते हुए हमलावर का नकाब खींच लिया, जिससे उसकी पहचान हो गई। आरोपी की पहचान के बाद पुलिस हरकत में आई हमलावर की पहचान भोलू साहू उर्फ दुर्गेश साहू के रूप में हुई है। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। सूचना मिलते ही सिरगिट्टी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। बाद में पुलिस ने रायपुर से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। फल कारोबारी पर किया हमला जानकारी के मुताबिक, घायल युवक मनीष गोस्वामी (32) तिफरा चौक पर फल की दुकान चलाता है। रविवार रात वह अपनी पत्नी के साथ दुकान के पास खड़ा था। इसी दौरान नकाब पहनकर पहुंचे युवक ने पीछे से मनीष को पकड़ लिया और धारदार चाकू से हमला कर दिया। हमले में मनीष की पीठ और पेट पर गंभीर चोटें आई हैं। पत्नी ने दिखाई हिम्मत हमले के दौरान मनीष की पत्नी ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की और उसका नकाब खींच दिया। तभी पता चला कि हमलावर भोलू साहू है। हालांकि आरोपी मौके से भागने में सफल रहा। घायल मनीष को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। अवैध संबंध को लेकर था विवाद पुलिस जांच में सामने आया कि घायल युवक का आरोपी के परिवार की एक महिला के साथ संबंध था। बताया जा रहा है कि वह महिला गांव सैदा में मनीष के साथ रह रही थी। इसी बात को लेकर आरोपी काफी नाराज था और मनीष से रंजिश रखता था। पुलिस के मुताबिक, इसी विवाद के चलते उसने हमले की साजिश रची। रायपुर से आरोपी गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह बैस के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के रायपुर में छिपे होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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रायपुर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिवसेना का प्रदर्शन, नगर निगम को सौंपा ज्ञापन

Shiv Sena ने रायपुर जोन क्रमांक-10 के विभिन्न वार्डों में पेयजल, सड़क, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने जोन आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की। पेयजल संकट से परेशान लोग शिवसेना नेताओं का आरोप है कि जोन-10 के कई वार्डों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। गर्मी के मौसम में लोगों को पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में नागरिकों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। खराब सड़कों से हादसों का खतरा ज्ञापन में जर्जर सड़कों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन का कहना है कि कई सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी हो रही है। बरसात के मौसम से पहले मरम्मत नहीं होने पर हालात और खराब होने की आशंका जताई गई है। सफाई व्यवस्था पर उठाए सवाल शिवसेना ने आरोप लगाया कि कई वार्डों में नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। बंद स्ट्रीट लाइट से बढ़ी दिक्कत संगठन ने बताया कि कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं या पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। इससे रात के समय लोगों को आवागमन में परेशानी और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन की चेतावनी शिवसेना ने मांग की है कि सभी वार्डों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, खराब सड़कों की मरम्मत कराई जाए, सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए और बंद स्ट्रीट लाइटों को जल्द चालू किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो जनता के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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अमित जोगी के खिलाफ भाजपा नेताओं की शिकायत, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता Amit Jogi के खिलाफ भाजपा नेताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा ने उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने और बाद में कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज कर पुलिस को गुमराह करने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। भाजपा आईटी सेल ने सौंपा ज्ञापन रविवार को भाजपा आईटी सेल के प्रदेश कार्यालय सहमंत्री शैलेश दीक्षित ने संबंधित थाने में लिखित शिकायत देकर अमित जोगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिकायत में कहा गया कि मामला 27 मई 2026 को बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मौके पर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। पोस्ट पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप भाजपा नेताओं के अनुसार, अमित जोगी ने बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें बकरी के साथ गाय की तस्वीर भी दिखाई गई थी। आरोप है कि इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। पोस्ट हटाने और नई तस्वीर डालने का आरोप भाजपा नेताओं का दावा है कि विरोध बढ़ने के बाद अमित जोगी ने करीब दो घंटे के भीतर मूल पोस्ट को हटा दिया। बाद में दूसरी तस्वीर साझा की गई, जिसमें गाय का चित्र नहीं था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बाद खुद को निर्दोष साबित करने के लिए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के एक थाने में कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई। तकनीकी जांच की मांग भाजपा नेताओं ने पुलिस से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सर्वर रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पोस्ट की एडिट हिस्ट्री और वास्तविक तथ्य सामने लाए जाएं। शिकायत में धार्मिक भावनाएं भड़काने, साक्ष्य मिटाने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और पुलिस को झूठी जानकारी देने जैसी धाराओं में जांच की मांग की गई है। पुलिस ने जांच शुरू की पुलिस अधिकारियों ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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कांग्रेस विधायक उत्तरी जांगड़े ने CM साय को लिखा पत्र, 2026 के लिए खुली ट्रांसफर नीति लागू करने की मांग

कांग्रेस विधायक Uttari Jangde ने मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai को पत्र लिखकर वर्ष 2026 के लिए खुली, पारदर्शी और समयबद्ध स्थानांतरण नीति जल्द लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी और अधिकारी शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय से स्पष्ट ट्रांसफर नीति नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। विभिन्न संगठनों से मिल रहे ज्ञापन पत्र में विधायक ने उल्लेख किया कि सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र सहित प्रदेशभर से कर्मचारी संगठन, शिक्षक संघ, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य विभागों के कर्मचारी लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं। इन सभी की प्रमुख मांग एक पारदर्शी और न्यायसंगत ट्रांसफर नीति लागू करने की है, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। गृह जिले से दूर रहने की परेशानी उत्तरी जांगड़े ने कहा कि कई कर्मचारी वर्षों से अपने गृह जिले से दूर पदस्थ हैं। कई मामलों में पति-पत्नी अलग-अलग जिलों में कार्यरत हैं, जिससे पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चुनावी साल का दिया हवाला कांग्रेस विधायक ने पत्र में यह भी कहा कि यदि इस वर्ष ट्रांसफर नीति लागू नहीं हुई, तो अगले साल चुनावी तैयारियों के कारण तबादलों की संभावना कम हो जाएगी। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि वर्ष 2026 में सरकार खुली ट्रांसफर नीति लागू करेगी। सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए जल्द फैसला लिया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू होने से कर्मचारियों का शासन पर विश्वास मजबूत होगा और प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर होगी। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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Congress

MP Election Buzz: Congress में अंदरूनी खींचतान या रणनीति? मीनाक्षी का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल अब खुलकर दिखाई देने लगी है। नेताओं के बयान, पार्टी के भीतर की गतिविधियां और लगातार बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। इसी बीच Congress नेता मीनाक्षी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनाव में पार्टी मजबूती से जीत दर्ज करेगी। हालांकि, मीनाक्षी के इस बयान के बीच कांग्रेस को एक बड़ा झटका भी लगा है। दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले नेता ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। Meenakshi का भरोसा- Congress मजबूत है मीडिया से बातचीत के दौरान मीनाक्षी ने कहा कि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता और नेता मिलकर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस लोगों के मुद्दों को लेकर पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठन कमजोर नहीं होता। कांग्रेस पहले भी चुनौतियों से उभरी है और इस बार भी जनता का समर्थन पार्टी को मिलेगा। Digvijaya समर्थक Gyanchandani का इस्तीफा बना चर्चा का विषय कांग्रेस के भीतर उस समय हलचल तेज हो गई जब दिग्विजय सिंह समर्थक माने जाने वाले ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के अंदर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह किसी व्यक्ति का निजी फैसला है और पार्टी पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। संगठन अभी भी पूरी तरह सक्रिय और मजबूत है। Kailash Vijayvargiya ने Congress पर साधा निशाना बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि विकास चाहने वाले लोग बीजेपी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीजेपी सरकार ने लगातार विकास कार्य किए हैं और जनता इन्हीं कामों के आधार पर वोट करेगी। विजयवर्गीय ने कहा कि सड़क, बिजली, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सरकार ने कई बड़े काम किए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर केवल बयानबाजी और अंदरूनी राजनीति करने का आरोप लगाया। चुनाव नजदीक, सियासी बयानबाजी तेज जैसे-जैसे मध्य प्रदेश में चुनाव करीब आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होती जा रही हैं। कांग्रेस जहां खुद को एकजुट दिखाने में लगी है, वहीं बीजेपी विकास के मुद्दे को लेकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है। अब आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों बड़ी पार्टियां चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Team India का कप्तान बनने के बाद भावुक हुए श्रेयस अय्यर, बोले- देश का नेतृत्व करना सम्मान की बात

Team India का कप्तान बनने के बाद भावुक हुए श्रेयस अय्यर, बोले- देश का नेतृत्व करना सम्मान की बात

Team india की टी20 टीम का नया कप्तान बनाए जाने के बाद श्रेयस अय्यर ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश के लिए कप्तानी करना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। साथ ही उन्होंने उन सभी प्रशंसकों का धन्यवाद किया, जिन्होंने मुश्किल समय में भी उनका साथ दिया। टी20 लीग के मौजूदा सीजन में खेल रहे श्रेयस अय्यर को 6 जून को भारतीय टीम का नया टी20 कप्तान नियुक्त किया गया। इसी दिन शाम को उन्हें मुंबई टी20 लीग में सोबो मुंबई फॉल्कन्स की ओर से मैदान पर उतरना था। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद भी श्रेयस का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने मैच में 61 रनों की बेहतरीन पारी खेली और अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। मैच के बाद जब उनसे भारतीय टीम की कप्तानी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “देश का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मैं उन सभी फैंस का दिल से आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने वर्षों से मेरा समर्थन किया और मुझ पर भरोसा बनाए रखा।” श्रेयस अय्यर का यह बयान सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में है। क्रिकेट प्रशंसक उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दे रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि उनके नेतृत्व में भारतीय टीम नए मुकाम हासिल करेगी।
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“West Bengal Madrasa Survey: पश्चिम बंगाल में मदरसों का होगा सर्वे, पूछे जाएंगे ये 8 अहम सवाल”

“West Bengal Madrasa Survey: पश्चिम बंगाल में मदरसों का होगा सर्वे, पूछे जाएंगे ये 8 अहम सवाल”

West Bengal में मदरसों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार अब मदरसों का व्यापक सर्वे कराने जा रही है, जिसमें कई अहम जानकारियां जुटाई जाएंगी। जानकारी के मुताबिक, इस सर्वे में मदरसों की संरचना, शिक्षा व्यवस्था और संचालन से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल पूछे जाएंगे। कुल मिलाकर 8 प्रमुख बिंदुओं पर डाटा इकट्ठा किया जाएगा, ताकि राज्य में मदरसों की स्थिति को बेहतर तरीके से समझा जा सके। इन सवालों के जरिए यह जानने की कोशिश की जाएगी कि मदरसों में कितने छात्र पढ़ रहे हैं, वहां किस तरह की शिक्षा दी जा रही है, शिक्षक कितने हैं और संस्थानों का संचालन कैसे हो रहा है। सरकार का मानना है कि इस सर्वे से शिक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। वहीं, इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा भी शुरू हो गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से सर्वे की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने बाकी हैं।
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‘तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो?’: ट्विशा से समर्थ के सवाल पर टिकी सीबीआई जांच, प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद में नए खुलासे

प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद मामले में सीबीआई की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब एजेंसी की नजर ट्विशा और समर्थ के बीच हुई बातचीत पर है। जांच के दौरान कुछ ऐसे चैट और बातचीत सामने आई हैं, जिन्होंने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। समर्थ ने पूछा- यह बच्चा किसका है? सूत्रों के मुताबिक, समर्थ ने ट्विशा से सवाल किया था कि वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है और यह बच्चा आखिर किसका है। बताया जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। सीबीआई अब इन्हीं सवालों और बातचीत को जांच का अहम हिस्सा मान रही है। डिजिटल सबूत खंगाल रही सीबीआई जांच एजेंसी कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और अन्य डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ भी जारी है। अधिकारियों का मानना है कि दोनों के बीच हुई बातचीत से केस के कई अहम पहलुओं का खुलासा हो सकता है। मानसिक दबाव के एंगल पर भी जांच सीबीआई यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ट्विशा पर किसी तरह का मानसिक दबाव बनाया गया था। प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने के पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई, इस पहलू पर भी जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिश्तों में भरोसा, जिम्मेदारी और महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि परिवार और करीबी लोग फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी मेडिकल व डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। अधिक जानकारी के लिए इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट और ताजा खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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गुना में दिनदहाड़े जानलेवा हमला: पीड़ित परिवार ने SP ऑफिस पहुंचकर लगाई सुरक्षा की गुहार

गुना शहर के वंदना कॉन्वेंट स्कूल के पास गुरुवार को हुए जानलेवा हमले के मामले में शनिवार को पीड़ित परिवार समाज के लोगों के साथ एसपी ऑफिस पहुंचा। परिवार ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार उनका पीछा कर जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। घटना के बाद से परिवार दहशत में है। पुराने जमीन विवाद से जुड़ा मामला परिजनों के मुताबिक आरोपियों के साथ उनका लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। बमोरी इलाके में नरेश चौकसे के नाम पर एक प्लॉट की रजिस्ट्री है, जिस पर आरोपी कब्जा करना चाहते थे। बताया गया कि पहले कलेक्टर से शिकायत के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर प्लॉट को अतिक्रमण मुक्त कराया था। इसी रंजिश में आरोपियों ने हमला किया। मंदिर से लौट रहे युवक पर हमला पीड़ित परिवार के अनुसार, विंध्याचल कॉलोनी निवासी नरेश चौकसे गुरुवार को मंदिर से दर्शन कर स्कूटर से घर लौट रहे थे। जैसे ही वे वंदना कॉन्वेंट स्कूल की घाटी के पास पहुंचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे संतोष किरार, उसका बेटा सूरज और अन्य बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि बदमाशों ने स्कूटर पर लाठी मारकर उन्हें गिराया और फिर लाठी-डंडों व लोहे के पाइप से बेरहमी से हमला किया। जब नरेश ने बचने की कोशिश की तो एक आरोपी ने कट्टा निकालकर धमकाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हूटर की आवाज सुनकर भागे आरोपी हमले के दौरान सड़क से गुजर रहे एक वाहन के हूटर की आवाज सुनाई दी। बदमाशों को लगा कि पुलिस आ गई है, जिसके बाद वे धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। परिवार का आरोप है कि दिनदहाड़े हुए हमले के बावजूद किसी ने बीच-बचाव की कोशिश नहीं की। पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग पीड़ित परिवार ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, सुरक्षा और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि आवेदन के आधार पर जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। पढ़ें देश और प्रदेश की ताजा खबरें: www.deshharpal.com
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Rally: दिवाली से पहले रैली टालने की मांग, दिल्ली के कारोबारियों को ₹10,000 करोड़ के नुकसान का डर

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानदारों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी तेज होगी और कारोबार को अच्छा फायदा मिलेगा। इसी बीच कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में बड़ी रैली के कारण ट्रैफिक डायवर्जन, रास्तों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही में परेशानी हुई, तो कारोबार प्रभावित हो सकता है। CTI ने आशंका जताई है कि इससे करीब 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यह संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। Rahul Gandhi को क्यों लिखी गई चिट्ठी? CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया है। व्यापारी संगठन चाहता है कि कार्यक्रम 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहे। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली उनके लिए साल का सबसे अहम कारोबारी समय होता है। इस दौरान केवल दिल्ली के ग्राहक ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग थोक खरीदारी करने पहुंचते हैं। अगर सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई, तो दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। दिवाली पर Delhi में कितने करोड़ का कारोबार? दिल्ली के बाजारों में दिवाली के दौरान कपड़े, सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, गिफ्ट आइटम और सजावटी सामान की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल और प्रॉपर्टी जैसे क्षेत्रों में भी खरीदारी होती है। CTI के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। व्यापारियों को डर है कि अगर त्योहार के व्यस्त दिनों में यातायात बाधित हुआ, तो दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। यही वजह है कि संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय व्यापारियों की परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों पर असर की आशंका रामलीला मैदान के आसपास और मध्य दिल्ली में कई बड़े कारोबारी इलाके हैं। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, भागीरथ पैलेस, खारी बावली और दरियागंज जैसे बाजारों में त्योहारों के समय काफी भीड़ रहती है। इन बाजारों में दिल्ली के अलावा दूसरे शहरों से भी व्यापारी सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन या रास्तों पर पाबंदियां लगने से माल की ढुलाई और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, रैली के कारण किन रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा या किन इलाकों में विशेष पाबंदियां लगेंगी, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पहले भी कारोबार प्रभावित होने का दावा CTI ने दावा किया है कि अक्टूबर में दिल्ली के कुछ इलाकों में रैलियों, मार्च और यातायात संबंधी व्यवधानों के कारण कारोबारियों को करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने आशंका जताई है कि दिवाली के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो व्यापारियों को और परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस नुकसान के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे व्यापारी संगठन के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। 2025 में दिवाली पर हुई थी ₹75,000 करोड़ की बिक्री पिछले साल भी दिवाली के मौके पर दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार की उम्मीद जताई गई थी। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में दिवाली की बिक्री करीब 75,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इसी वजह से इस साल भी व्यापारी त्योहारों के दौरान बाजारों में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार के समय बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्राहकों को खरीदारी में परेशानी न हो। 1 नवंबर की Rally को लेकर अब क्या होगा? कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठा रहा है। दूसरी ओर, व्यापारी संगठन चाहता है कि राजनीतिक कार्यक्रम और त्योहारों के कारोबार के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को अनावश्यक परेशानी न हो। फिलहाल, CTI ने राहुल गांधी से रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। रैली की तारीख बदली जाएगी या कार्यक्रम 1 नवंबर को ही होगा, इस पर कांग्रेस के आधिकारिक फैसले का इंतजार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस व्यापारियों की अपील पर क्या फैसला लेती है। अगर रैली की तारीख में बदलाव होता है, तो इससे दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में आवाजाही और कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता कम हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Update 4 दिन की गिरावट से निवेशकों को झटका, ₹20 लाख करोड़ से ज्यादा घटा मार्केट कैप

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए बीते चार कारोबारी दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में करीब ₹20.79 लाख करोड़ की कमी आई। Sensex और Nifty में कमजोरी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बाजार एक बार फिर गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी वजहें बताई जा रही हैं। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। Sensex-Nifty में गिरावट से निवेशकों की बढ़ी चिंता शुक्रवार को BSE Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 87.65 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,600 के आसपास बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इससे उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन शेयरों में पैसा लगा रखा है। लगातार गिरावट के कारण बाजार की धारणा कमजोर हुई है। हालांकि, बाजार में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका अनुमान केवल मौजूदा स्थिति के आधार पर लगाना सही नहीं होगा। 4 दिन में ₹20.79 लाख करोड़ की संपत्ति घटी शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 16 अक्टूबर को करीब ₹472.62 लाख करोड़ था। 23 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। इस तरह चार कारोबारी दिनों में करीब ₹20,78,774 करोड़ की कमी दर्ज की गई। यानी लगभग ₹20.79 लाख करोड़ का बाजार मूल्य घट गया। यहां एक बात समझना जरूरी है। मार्केट कैप में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने इतनी रकम नकद गंवा दी। शेयरों की कीमत घटने से कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। इसी वजह से इस आंकड़े को निवेशकों की संपत्ति के बाजार मूल्य में आई कमी के तौर पर समझना ज्यादा सही होगा। आखिर क्यों गिर रहा है Share Market? कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए अहम संकेत माना जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। इसका असर शेयरों की खरीद-बिक्री और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। Foreign Investors की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार की चाल केवल विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं करती। घरेलू निवेश, कंपनियों के नतीजे और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। Midcap और Smallcap शेयरों में ज्यादा दबाव गिरावट के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन शेयरों में उतार-चढ़ाव अक्सर अधिक हो सकता है, इसलिए बाजार में घबराहट बढ़ने पर इनमें बिकवाली तेज हो जाती है। ऐसे में जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयर ज्यादा हैं, उन्हें अपने निवेश के जोखिम को समझना जरूरी है। आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार? अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सप्ताह पर रहेगी। बाजार की दिशा तय करने में कई कारक अहम होंगे, जिनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया के हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों के संकेत और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। अगर वैश्विक हालात में सुधार होता है और निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो बाजार को सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, तनाव बढ़ने और बिकवाली जारी रहने पर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल किसी निश्चित दिशा का दावा करना जल्दबाजी होगी। Investors के लिए क्या है जरूरी? शेयर बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, खासकर तब जब पोर्टफोलियो की वैल्यू लगातार कम हो रही हो। लेकिन ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेश से जुड़े बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की मौजूदा गिरावट देखकर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का फैसला करना उचित नहीं है। निष्कर्ष: भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी दिनों के दौरान करीब ₹20.79 लाख करोड़ के बाजार मूल्य में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां फिलहाल बाजार के लिए अहम संकेत हैं। आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह इन परिस्थितियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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